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यौन उत्पीड़न मामले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को बड़ी राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत


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25 Mar 2026
Categories: Hindi News

ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद गिरी के लिए आज राहत भरी खबर आई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कथित यौन उत्पीड़न और पोक्सो एक्ट के मामले में दोनों की अग्रिम जमानत याचिका मंजूर कर ली है। जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा की सिंगल बेंच ने दोपहर 3:45 बजे यह अहम फैसला सुनाया। कोर्ट के इस आदेश के बाद अब शंकराचार्य की गिरफ्तारी पर रोक लग गई है।

हाईकोर्ट में क्या हुआ?

आपको बता दें कि इस मामले में पिछली सुनवाई 27 फरवरी को हुई थी, जिसके बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। तब तक के लिए कोर्ट ने शंकराचार्य की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आज दोपहर बाद जस्टिस सिन्हा की बेंच ने अपना सुरक्षित फैसला सुनाते हुए दोनों की जमानत याचिका को हरी झंडी दे दी। इससे पहले राज्य सरकार और शिकायतकर्ता के वकीलों ने जमानत का कड़ा विरोध किया था, लेकिन कोर्ट ने बचाव पक्ष की दलीलों को स्वीकार किया।

शंकराचार्य का पक्ष, ‘फर्जी है मामला’

जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के वकील पीएन मिश्रा ने तर्क दिया था कि यह पूरा मामला साजिश के तहत बनाया गया है। शंकराचार्य ने खुद भी पहले कहा था कि जिस बालक के शोषण की बात कही जा रही है, वह कभी उनके मठ में रहा ही नहीं। उन्होंने इसे प्रशासन और विरोधियों की मिलीभगत करार दिया था।

क्या था पूरा मामला?

यह विवाद प्रयागराज माघ मेले के दौरान शुरू हुआ था। तुलसी पीठाधीश्वर स्वामी रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष महाराज ने आरोप लगाया था कि माघ मेला 2026 और महाकुंभ 2025 के दौरान बटुकों (बालकों) का यौन शोषण किया गया।

8 फरवरी: स्पेशल पॉक्सो कोर्ट में याचिका दाखिल की गई।
21 फरवरी: कोर्ट के आदेश पर झूंसी थाने में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य के खिलाफ FIR दर्ज हुई।
24 फरवरी: गिरफ्तारी से बचने के लिए शंकराचार्य ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

पुलिस जांच और मेडिकल रिपोर्ट

जांच के दौरान दो बच्चों के बयान दर्ज किए गए थे और उनका मेडिकल परीक्षण भी कराया गया था। पुलिस सूत्रों ने दावा किया था कि मेडिकल रिपोर्ट में शोषण की पुष्टि हुई है। हालांकि, शंकराचार्य पक्ष ने इसे सिरे से खारिज करते हुए कहा था कि यह उनकी छवि खराब करने की कोशिश है। आज हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद शंकराचार्य कैंप ने संतोष व्यक्त किया है।

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