Saturday, 02, May, 2026
 
 
 
Expand O P Jindal Global University
 

वैवाहिक डिक्री में मृतक तलाकशुदा पुत्री की समझौता राशि पर माता का अधिकार : इलाहाबाद उच्च न्यायालय


Allahabad high Court2.jpeg
02 May 2026
Categories: Hindi News

वैवाहिक समझौतों एवं उत्तराधिकार विधि के अंतर्संबंध पर एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए इलाहाबाद उच्च न्यायालय के माननीय न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेन्द्र ने यह अभिनिर्णीत किया कि एक मृतक तलाकशुदा महिला की माता, तलाक की डिक्री के अंतर्गत उसकी पुत्री को प्रदत्त धनराशि प्राप्त करने की विधिक रूप से अधिकारी है।

न्यायालय संविधान के अनुच्छेद 227 के अंतर्गत दायर एक याचिका पर विचार कर रहा था, जिसमें एक महत्वपूर्ण विधिक प्रश्न उठाया गया था कि यदि कोई तलाकशुदा महिला निर्धारित धनराशि प्राप्त करने से पूर्व ही मृत्यु को प्राप्त हो जाती है, तो क्या उसके विधिक उत्तराधिकारी उक्त समझौता राशि पर दावा कर सकते हैं। हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13-बी के अंतर्गत पारस्परिक सहमति से तलाक की डिक्री अप्रैल, 2024 में पारित की गई थी। समझौते के अनुसार पति ने पत्नी को ₹20 लाख अदा करने पर सहमति व्यक्त की थी। जिसमें से ₹4 लाख का भुगतान कर दिया गया, जबकि शेष ₹16 लाख परिवार न्यायालय के समक्ष जमा किए गए। यद्यपि शेष राशि के भुगतान हेतु चेक तैयार कर लिया गया था, तथापि उसके निर्गमन से पूर्व ही पत्नी का दुर्भाग्यवश निधन हो गया।

तत्पश्चात मृतका की माता ने स्वयं को एकमात्र जीवित विधिक उत्तराधिकारी बताते हुए उक्त राशि के निर्गमन हेतु परिवार न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। तथापि पति द्वारा इस दावे का विरोध करते हुए यह तर्क प्रस्तुत किया गया कि उक्त राशि केवल पत्नी के भरण-पोषण हेतु निर्धारित थी, अतः यह उसकी माता को हस्तांतरित नहीं की जा सकती।

याचिकाकर्त्री की ओर से यह प्रतिपादित किया गया कि जैसे ही तलाक की डिक्री द्वारा पत्नी का उक्त राशि पर अधिकार सुनिश्चित हो गया, वह उसकी संपत्ति बन गई, जो उसकी मृत्यु के उपरांत उत्तराधिकार विधि के अनुसार उसके उत्तराधिकारियों को प्राप्त होगी।

विपरीत रूप से प्रतिवादी ने यह तर्क दिया कि उक्त राशि भरण-पोषण के स्वरूप की थी, जो पत्नी के व्यक्तिगत उपयोग हेतु थी, अतः यह उसके विधिक उत्तराधिकारियों को हस्तांतरित नहीं की जा सकती।

माननीय उच्च न्यायालय ने हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 की धारा 14 एवं 15 का विशद परीक्षण किया। न्यायालय ने अवलोकन किया कि किसी भी हिंदू महिला द्वारा अर्जित संपत्ति, जिसमें भरण-पोषण अथवा समझौते के रूप में प्राप्त धनराशि भी सम्मिलित है, पूर्ण स्वामित्व की होती है, जब तक कि उस पर कोई विशेष प्रतिबंध आरोपित न हो।

चूंकि तलाक की डिक्री में उक्त राशि के उपयोग पर कोई प्रतिबंध निर्धारित नहीं किया गया था, अतः न्यायालय ने यह निष्कर्ष निकाला कि यह राशि मृतका की संपत्ति का भाग है। चूंकि मृतका की कोई संतान नहीं थी तथा पारस्परिक सहमति से तलाक की डिक्री के उपरांत वैवाहिक संबंध समाप्त हो चुके थे, इसलिए न्यायालय ने धारा 15 के अंतर्गत यह घोषित किया कि उक्त संपत्ति उसकी माता को प्राप्त होगी।

न्यायालय ने दीवानी प्रक्रिया संहिता की धारा 2(11), जिसमें “विधिक प्रतिनिधि” की परिभाषा दी गई है, तथा धारा 146, जो मृतक द्वारा प्रारंभ की गई कार्यवाही को उसके उत्तराधिकारियों द्वारा जारी रखने की अनुमति प्रदान करती है, का भी परीक्षण किया।

इसके अतिरिक्त, न्यायालय ने माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों पर भी निर्भरता व्यक्त की, जिनमें Yallawwa V. Shantavva (1997) में यह प्रतिपादित किया गया कि तलाक के पश्चात पति-पत्नी के मध्य पारस्परिक उत्तराधिकार अधिकार समाप्त हो जाते हैं, तथा V. Tulasamma V.Sesha Reddy (1977) में यह स्थापित किया गया कि हिंदू महिला की संपत्ति पर उसका पूर्ण स्वामित्व होता है।

न्यायालय ने यह अभिनिर्णीत किया कि तलाक की डिक्री के अंतर्गत प्रदत्त धनराशि महिला की पूर्ण स्वामित्व वाली संपत्ति है तथा चूंकि तलाक के उपरांत न तो कोई संतान थी और न ही वैवाहिक संबंध शेष थे, अतः धारा 15(1)(c) के अंतर्गत उक्त संपत्ति मृतक तलाकशुदा महिला की विधिक प्रतिनिधि के रूप में उसकी माता को प्राप्त होगी।

अंततः, उच्च न्यायालय ने याचिका स्वीकार करते हुए परिवार न्यायालय को निर्देशित किया कि वह ₹16 लाख की शेष राशि दो सप्ताह के भीतर याचिकाकर्त्री के पक्ष में निर्गत करे। यह निर्णय इस सिद्धांत को सुदृढ़ करता है कि वैवाहिक डिक्री के अंतर्गत प्रदत्त वित्तीय अधिकार, एक बार अर्जित हो जाने पर, मृतक की संपत्ति का हिस्सा बन जाते हैं और उत्तराधिकार विधि के अनुसार हस्तांतरणीय होते हैं।

वाद विवरण:
वाद संख्या: Matters Under Article 227 No. 1779 of 2025
पीठ: माननीय न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेन्द्र
याचिकाकर्ता: किरण रैकवार
प्रतिवादी: उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य

Order link



Download the LatestLaws.com Mobile App
 
 
Latestlaws Newsletter
 

Publish Your Article

 

Campus Ambassador

 

Media Partner

 

Campus Buzz

 

LatestLaws Guest Court Correspondent

LatestLaws Guest Court Correspondent Apply Now!
 

LatestLaws.com presents: Lexidem Offline Internship Program, 2026

 

LatestLaws.com presents 'Lexidem Online Internship, 2026', Apply Now!

 
 

LatestLaws Partner Event : Smt. Nirmala Devi Bam Memorial International Moot Court Competition

 
 
Latestlaws Newsletter