सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस दीपांकर दत्ता ने कॉलेजियम सिस्टम की कार्य प्रणाली पर यह कहते हुए सवाल उठाए हैं कि इसमें पारदर्शिता की कमी है। शनिवार को महिला दिवस के मौके पर इंडियन वुमेन इन लॉ की ओर से आयोजित एक कॉन्फ्रेंस में जस्टिस दत्ता ने इस सिस्टम को लेकर अपनी चिंता जाहिर की।
सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस दीपांकर दत्ता ने कॉलेजियम सिस्टम को लेकर जो कुछ भी भावनाएं जाहिर की हैं, जिससे सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जजों की नियुक्ति और ट्रांसफर पोस्टिंग की सिफारिश करने वाले सिस्टम पर बड़ा सवाल उठ खड़ा हुआ है। क्योंकि, अब खुद सुप्रीम कोर्ट के जज ने ऐसे प्रश्न उठाए हैं, जिसको लेकर शीर्ष न्यायपालिका पर सवाल उठाए जाते रहे हैं।
जस्टिस दीपांकर दत्ता ने कॉलेजियम को लेकर क्या कहा
जस्टिस दीपांकर दत्ता के मुताबिक पारदर्शिता की इतनी कमी है कि अक्सर जजों को भी बहुत कम स्पष्टता होती है कि कॉलेजियम काम कैसे करता है और इसकी बैठकें कहां होती हैं। उन्होंने कहा, 'आप जानकर हैरान रह जाएंगे कि न सिर्फ हम जानते हैं कि क्या हो रहा है...हम ये तक नहीं जानते कि कॉलेजियम बैठता कहां है।'
जस्टिस दीपांकर दत्ता ने नियुक्ति में मेरिट पर जोर दिया
सुप्रीम कोर्ट में आने से पहले बॉम्बे हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रह चुके दीपांकर दत्ता ने आगे कहा कि न्यायिक नियुक्तियां जेंडर की संख्या के बजाए मेरिट के आधार पर ही होनी चाहिए। उन्होंने कहा, 'जब हाई कोर्ट के जजों के पद पर प्रमोशन की बात आती है, तो मैं नंबरों पर नहीं जाऊंगा। ऐसा नहीं कि 50 में से महिलाओं को 25 क्यों नहीं मिल सकते, 30 क्यों नहीं दिए जा सकते? यह जेंडर न्यूट्रलिटी है। हमें मेरिट पर जाना चाहिए।'
जजों की नियुक्ति में क्षमता, ईमानदारी और स्वभाव पर जोर
जस्टिस दत्ता का कहना है कि बेंच में प्रमोशन के लिए व्यक्ति की क्षमता, ईमानदारी और उसके स्वभाव को ध्यान में रखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, 'मैं प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व के खिलाफ हूं। अगर कोई जज बनने लायक है, उसे बनना चाहिए।'
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम में अभी कौन-कौन जज हैं
कॉलेजियम सिस्टम क्या है
कॉलेजियम सिस्टम के माध्यम से ही हायर जुडिशरी में जजों की नियुक्ति और ट्रांसफर होती है।
कॉलेजियम सिस्टम ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों से आकार लिया है, जिसमें पांच वरिष्ठ जज शामिल होते हैं।
कॉलेजियम सिस्टम की अगुवाई भारत के चीफ जस्टिस (CJI) करते हैं।
हाई कोर्ट कॉलेजियम की अगुवाई संबंधित चीफ जस्टिस करते हैं और उसमें उस उच्च न्यायालय के दो वरिष्ठ जज भी सदस्य होते हैं।
इस तरह से देश में शीर्ष न्यायपालिका में नियुक्तियों और ट्रांसफर के लिए कॉलेजियम सिस्टम उत्तरदायी है और सरकार की भूमिका तब शुरू होती है, जब यह नामों की सिफारिश कर देता है।
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