राजस्थान हाईकोर्ट में एक हैरान करने वाले मामला सामने आया है, जिस पर कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी दी है। दरअसल कोर्ट ने जयपुर स्थित 'श्री शंकर सेवा धाम ट्रस्ट' के पदाधिकारियों के खिलाफ दर्ज हत्या के प्रयास (धारा 307) की एफआईआर और पूरी कानूनी कार्यवाही को रद्द करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान बेहद तल्ख और तार्किक टिप्पणी करते हुए कहा है कि किसी मृत व्यक्ति की हत्या या उसे मारने का प्रयास कानूनी और व्यावहारिक रूप से असंभव है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला 'श्री शंकर सेवा धाम ट्रस्ट' के अध्यक्ष प्रहलाद गुप्ता और बिशन लाल जांगिड़ से जुड़ा है। वरिष्ठ अधिवक्ता ए.के. अग्रवाल ने कोर्ट को बताया कि संस्थान विमंदित, दिव्यांग और निराश्रित व्यक्तियों की सेवा करता है। 'सीताराम' नामक व्यक्ति सड़क पर गंभीर स्थिति में मिला था, जिसे संस्थान ने आश्रय और उपचार दिया। इलाज के दौरान उसकी मृत्यु हो गई, जिसके बाद संस्थान ने आदर्श नगर मोक्षधाम में ससम्मान उसका अंतिम संस्कार कर दिया।
करीब दो माह बाद, मृतक के भाई भागचंद ने आरोप लगाया कि संस्थान ने सीताराम के अंग निकाल लिए हैं। कालवाड़ थाना पुलिस ने शुरुआत में इन आरोपों को आधारहीन माना, लेकिन दोबारा शिकायत होने पर जांच शुरू की और निचली अदालत ने इस पर प्रसंज्ञान ले लिया।
हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी
जस्टिस अनूप कुमार ढंड ने याचिका मंजूर करते हुए कहा कि 'जो व्यक्ति पहले ही मर चुका है, उसे न तो मारने का प्रयास किया जा सकता है और न ही कानून की नजर में मरे हुए व्यक्ति की हत्या संभव है।' कोर्ट ने आगे कहा कि इस मामले में शिकायतकर्ता ने अपने भाई की गुमशुदगी तक दर्ज नहीं कराई थी। अंगों के गायब होने का वैज्ञानिक प्रमाण केवल पोस्टमार्टम से मिल सकता था, जबकि इस मामले में पोस्टमार्टम हुआ ही नहीं। बिना किसी मेडिकल साक्ष्य के अंग निकालने या हत्या के प्रयास का आरोप लगाना कानूनी रूप से टिकने योग्य नहीं है।
संस्थान को मिली राहत
कोर्ट ने माना कि इन परिस्थितियों में कोई अपराध नहीं बनता है। पुलिस की कार्रवाई को त्रुटिपूर्ण बताते हुए अदालत ने ट्रस्ट के पदाधिकारियों को बड़ी राहत दी है। कोर्ट के इस आदेश ने स्पष्ट कर दिया है कि बिना ठोस साक्ष्य और वैज्ञानिक आधार के केवल संदेह पर गंभीर आपराधिक धाराएं नहीं लगाई जा सकतीं।
Publish Your Article
Campus Ambassador
Media Partner
Campus Buzz
LatestLaws.com presents: Lexidem Offline Internship Program, 2026
LatestLaws.com presents 'Lexidem Online Internship, 2026', Apply Now!