सीबीआई न्यायालय मुंबई ने बैंक धोखाधड़ी के मामले में दिनांक 18.03.2026 को मनोज कुमार माथुर, तत्कालीन वरिष्ठ प्रबंधक, बैंक ऑफ इंडिया, नरीमन प्वाइंट शाखा; हरित मेहता, इनफिनिट ट्रांसमिशन के प्रोपराइटर; अभय मेहता, फर्म के निदेशक और इलेश शाह को दोषी ठहराया और सजा सुनाई।
आरोपी मनोज कुमार माथुर और इलेश शाह को तीन वर्ष के कारावास तथा प्रत्येक पर 50,000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है; हरित मेहता को 3.50 करोड़ रुपये के जुर्माने के साथ पांच वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है तथा अभय मेहता को एक करोड़ रुपये के जुर्माने के साथ पांच वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।
केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने दिनांक 09.09.2010 को 07 आरोपियों के विरुद्ध यह मामला दर्ज किया था। यह आरोप था कि वर्ष 2007-09 के दौरान आरोपियों ने आपराधिक साजिश के तहत धोखाधड़ी करके 3.55 करोड़ रुपये की साख पत्र (एलसी) सुविधा का लाभ उठाया था। यह एलसी कथित रूप से एचडीएफसी बैंक, लोअर परेल शाखा, मुंबई द्वारा मेसर्स इनफिनिटी ट्रांसमिशन के पक्ष में जारी की गई थी। आरोपी मनोज कुमार माथुर, तत्कालीन वरिष्ठ प्रबंधक, बैंक ऑफ इंडिया, नरीमन प्वाइंट शाखा ने अन्य आरोपियों के साथ साजिश रचकर धोखाधड़ी से जाली एलसी (साख पत्र) को भुनाया और कुछ राशि पिछले एलसी के भुगतान में समायोजित कर दी गई तथा शेष राशि आरोपियों द्वारा हड़प ली गई थी।
जांच में यह सामने आया कि लेटर ऑफ क्रेडिट (साख पत्र) जाली था और इसे एचडीएफसी बैंक द्वारा कभी जारी ही नहीं किया गया था, जिससे बैंक को भारी वित्तीय नुकसान हुआ। आरोपियों ने धनराशि की निशानदेही को छिपाने के लिए धोखाधड़ी से प्राप्त धन को कई खातों के माध्यम से स्थानांतरित किया। इस राशि का एक हिस्सा पूर्व वित्तीय देनदारियों को चुकाने में उपयोग किया गया, जबकि शेष राशि को विभिन्न व्यक्तियों और संस्थाओं ने हड़प लिया था।
जांच पूर्ण होने के पश्चात सीबीआई ने दिनांक 18.06.2012 को 17 आरोपियों एवं फर्मों के विरुद्ध आरोप पत्र दाखिल किया था।
माननीय न्यायालय ने विचारण (ट्रायल) के बाद आरोपियों को दोषी ठहराया और तदनुसार सजा सुनाई।
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