होली के दिन उत्तम नगर में तरुण भूटोलिया की हत्या के बाद अब मामले में प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं। इसी को लेकर हाई कोर्ट ने आदेश दिया हैै। दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) द्वारा आरोपियों में से एक के मकान में तोड़फोड़ के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया है। हालांकि एमसीडी का कहना है कि यह कार्रवाई पूरी तरह से ‘रूटीन ड्राइव’ का हिस्सा थी और इसका हत्या केस से कोई लेना-देना नहीं है। अधिकारियों के अनुसार संबंधित मकान में अवैध निर्माण किया जा रहा था और इसके लिए पहले ही नोटिस जारी किया जा चुका था। निगम का दावा है कि इलाके में ऐसे कई अवैध निर्माणों के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है।
एमसीडी कार्रवाई के तुरंत बाद मामला दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचा, जहां अदालत ने हस्तक्षेप करते हुए एमसीडी को फिलहाल आगे की तोड़फोड़ से रोक दिया। जस्टिस अमित बंसल ने आरोपी के परिवार को एक सप्ताह का समय दिया है, जिससे वे एमसीडी ट्रिब्यूनल में अपील कर सकें। कोर्ट ने साफ निर्देश दिया कि अगले 10 दिनों तक किसी भी तरह क कोई कार्रवाई नहीं की जा सकेगी।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या प्रशासनिक कार्रवाई वास्तव में सामान्य कार्रवाई थी या फिर यह हत्या के बाद दबाव में उठाया गया है। पीडि़त परिवार का आरोप है कि उन्हें अपनी बात रखने का उचित मौका नहीं दिया गया और बिना सुनवाई के कार्रवाई की गई है।
क्या था मामला
गौरतलब है कि 4 मार्च को होली के दिन हस्तसाल गांव में मामूली विवाद बवाल हो गया था। पानी से भरे गुब्बारे के विवाद से शुरू हुआ झगड़े में तरुण भूटोलिया की मौत हो गई थी। इस मामले में अब तक 16 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें दो नाबालिग भी शामिल हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार घटना के बाद से आरोपी परिवार इलाके से गायब हैं, जिससे माहौल अभी भी तनावपूर्ण बना हुआ है। वहीं, पुलिस का कहना है कि उन्होंने सिर्फ सुरक्षा के मद्देनजर बल तैनात किया था और एमसीडी की कार्रवाई पूर्व निर्धारित योजना के तहत ही की गई।
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