उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में हाउस टैक्स की बढ़ी दरों को लेकर चल रहा कानूनी विवाद खत्म हो गया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निगम के टैक्स बढ़ाने के फैसले को सही ठहराते हुए इसके खिलाफ दायर जनहित याचिका को खारिज कर दिया। मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ ने 77 पन्नों के फैसले में कहा कि टैक्स वृद्धि की प्रक्रिया में कोई कानूनी गलती नहीं पाई गई।
कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि याचिका राजनीति से प्रेरित लगती है। खंडपीठ ने माना कि निगम ने हाउस टैक्स बढ़ाने के लिए सभी नियमों का पालन किया और पूरी प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से अपनाई। इसके बाद अब शहरवासियों को बढ़ी हुई दरों पर ही हाउस टैक्स जमा करना होगा।
टैक्स वसूली के लिए शहर में लगाए जाएंगे कैंप
अपर नगर आयुक्त अवनिंद्र कुमार ने बताया कि कोर्ट के आदेश के बाद निगम टैक्स वसूली में सख्ती करने के बजाय समाधान की दिशा में काम करेगा। टैक्स से जुड़ी समस्याओं के निस्तारण के लिए शहर में कैंप लगाए जाएंगे। जिन मामलों में टैक्स का गलत आकलन हुआ है, उसे मौके पर ही ठीक किया जाएगा।
6 लाख लोग भरते हैं हाउस टैक्स
निगम क्षेत्र में करीब छह लाख लोग हाउस टैक्स जमा करते हैं। इनमें से आधे से अधिक टैक्स जमा कर चुके हैं। वहीं, निगम केस के चलते हर महीने 20 प्रतिशत की छूट को आगे बढ़ा रहा था। अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा वित्तीय वर्ष, यानी 31 मार्च तक हाउस टैक्स में 20 प्रतिशत की छूट मिलती रहेगी। इसके बाद नई व्यवस्था के अनुसार निर्णय लिया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में याचिकाकर्ता
हाई कोर्ट से राहत नहीं मिलने पर याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट जाने का फैसला किया है। इस मामले में पूर्व पार्षद अनिल स्वामी, राजेंद्र त्यागी और हिमांशु मित्तल ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। हिमाशु मित्तल ने बताया कि गुरुवार को समीक्षा बैठक में चर्चा हुई कि ऐसी क्या कमी रह गई, जिसकी वजह से फैसला शहरवासियों के पक्ष में नहीं आया। उन्होंने कहा कि हाउस टैक्स बढ़ोतरी के मुद्दे पर वे शहर की जनता को अधर में नहीं छोड़ेंगे। जनप्रतिनिधियों से बात करेंगे।
पूर्व मेयर बोले- मैं जनता से माफी मांगता हूं
निगम के पूर्व मेयर आशु कुमार वर्मा ने हाउस टैक्स में बढ़ोतरी को लेकर नाराजगी जताई है। उन्होंने एक फेसबुक पोस्ट के जरिये कहा है कि वह गाजियाबाद महानगर के निवासियों से हाथ जोड़कर माफी मागते है कि 300 प्रतिशत तक बढ़ाए हाउस टैक्स से लोगों को राहत नहीं दिला सके। उन्होंने लिखा है कि शहरवासियों ने स्थानीय निकाय, विधानसभा और लोकसभा चुनाव में उन्हें भरपूर समर्थन दिया, लेकिन टैक्स बढ़ोतरी के मुद्दे पर अपेक्षित गए राहत नहीं मिल पाई।
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