सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि मुकदमों के तेजी से निपटारा करने और त्वरित न्याय देने के लिए गठित विभिन्न न्यायाधिकरणों को सरकारी नियंत्रण में नहीं छोड़ा सकता है, इससे तीखी आलोचना होगी। शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार को राहत देते हुए उन न्यायाधिकरणों के अध्यक्ष और सदस्यों के कार्यकाल 8 सितंबर, 2026 तक बढ़ाने की इजाजत देते हुए यह टिप्पणी की है, जिनका कार्यकाल जल्द खत्म होने वाला है।मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने ‘न्यायाधिकरणों को सरकारी नियंत्रण में नहीं छोड़ा सका है क्योंकि इससे तीखी आलोचना होगी। पीठ ने सरकार से कहा कि आप न्यायाधिकरणों को न्यायिक नियंत्रण में भी नहीं रख सकते, ऐसे में सवाल उठता है कि फिर कहां? पीठ के कहा कि ऐसे में एक ठोस कानून होना चाहिए ताकि जवाबदेही तय हो सके।
हालांकि पीठ ने इसके बाद सरकार को विभिन्न न्यायाधिकरणों के अध्यक्ष और सदस्यों के कार्यकाल 8 सितंबर, 2026 तक बढ़ाने की इजाजत दे दी है। पीठ ने केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण बार एसोसिएशन, रेवेन्यू बार एसोसिएशन व अन्य की ओर से दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में कहा गया है कि यदि समय रहते खाली पदों को नहीं भरा गया तो मौजूदा सदस्यों के कार्यकाल खत्म होने के कारण कई न्यायाधिकरणों का कामकाज पूरी तरह से ठप हो जाएगा। अटॉर्नी जनरल वेंकटरमणी ने पीठ से कहा कि शीर्ष अदालत के पिछले साल मद्रास बार एसोसिएशन मामले में पारित फैसले के मद्देनजर सरकार संसद के आगामी मानसून सत्र में नये न्यायाधिकरण विधेयक पेश कर सकती है। शीर्ष अदालत ने पिछले साल न्यायाधिकरण सुधार अधिनियम 2021 को रद्द कर दिया था।पिछली सुनवाई पर सुप्रीम कोर्य ने केंद्र सरकार को मद्रास बार एसोसिएशन मामले में पारित उसके फैसले के हिसाब से एक ठोस प्रस्ताव पेश करने को कहा था।
अटार्नी जनरल ने पीठ को बताया कि सरकार एक नए विधेयक पर काम कर रही है, और एक अंतरिम व्यवस्था के तौर पर मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल बढ़ाने की अनुमति देने की मांग की। उन्होंने पीठ से कहा कि सरकार एक दूसरे प्रस्ताव पर काम कर रही है और नये विधेयक पर भी विचार किया जा रहा है। उन्होंने पीठ से कहा कि सितंबर 2026 तक या मॉनसून सत्र में, एक नया कानून बनने की संभावना है।अटार्नी जनरल ने शीर्ष अदालत को बताया कि इस बीच विभिन्न न्यायाधिकरणों से करीब 21 सदस्यों का कार्यकाल खत्म हो रहा है। दूसरी तरफ याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संजय जैन ने पीठ से कहा कि मद्रास बार एसोसिएशन के फैसले में सदस्यों के लिए कम से कम 5 साल का कार्यकाल जरूरी किया गया था।उनकी जवाबदेही पर विचार करना होगा- मुख्य न्यायाधीशमुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने एक साथ बड़े पैमाने पर कार्यकाल का विस्तार देने पर चिंता जताते हुए कि ‘उनकी (न्यायाधिकरण के सदस्यों) ईमानदारी और परफॉर्मेंस का मूल्यांकन कौन करेगा। सिर्फ एक बड़े आदेश से विस्तार देने के बजाय, हमें उनकी जवाबदेही पर विचार करना होगा। वे किसके प्रति जवाबदेह हैं? अगर उनका काम ठीक नहीं है, तो उनका कार्यकाल क्यों बढ़ाया जाना चाहिए? उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को एक पूरा कानून लाना चाहिए जो यह तय करे कि ट्रिब्यूनल के सदस्य किसके प्रति जवाबदेह हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ट्रिब्यूनल के सदस्यों को जवाबदेह बनाने के लिए कोई तंत्र होना चाहिए। यह सुनिश्चित करने के लिए एक सिस्टम होना चाहिए कि प्रशासनिक सदस्य फैसले के कामों में भूमिका निभाएं।’
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