सुप्रीम कोर्ट ने पात्रता परीक्षा में अंको में छूट का लाभ ले चुके आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों के मेरिट में आने पर सामान्य वर्ग में स्थानांतरित होने के संबंध में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।
कोर्ट ने कहा है कि यदि आरक्षित वर्ग के उम्मीदवार पात्रता परीक्षा में अंको की छूट लेते हैं लेकिन मुख्य चयन परीक्षा में उनकी मेरिट सामान्य वर्ग के अंतिम चयनित उम्मीदवार से अधिक है, तो वे सामान्य वर्ग यानी अनारक्षित श्रेणी में स्थान पाने के हकदार हैं।
शीर्ष अदालत ने कहा कि अगर नियमों या अधिसूचना में स्पष्ट रूप से मनाही नहीं है तो उन्हें सामान्य वर्ग में विचार से बाहर नहीं किया जा सकता। सर्वोच्च अदालत ने कहा कि योग्यता मानदंडों में दी गई छूट केवल पात्रता को प्रभावित करती है, न कि मेरिट को, और किसी भी निषेध के अभाव में, एक श्रेणी से दूसरी श्रेणी में जाने की अनुमति है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दूरगामी प्रभाव
यह फैसला महाराष्ट्र में शिक्षक भर्ती मामले में आया है जिसमें पात्रता परीक्षा टीईटी में अंको की छूट का लाभ लेने वाले आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को मुख्य परीक्षा की मेरिट में सामान्य वर्ग के अंतिम उम्मीदवार से ज्यादा अंक लाने पर भी सामान्य वर्ग का नहीं माना गया था। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का दूरगामी प्रभाव है।
ऐसे अन्य मामलों में इसका असर हो सकता है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे पर पूर्व के विभिन्न फैसलों का विश्लेषण करने के बाद यह व्यवस्था दी है।
महाराष्ट्र के आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों के वकील आर.के. सिंह कहते हैं कि इस फैसले का असर उत्तर प्रदेश के 69,000 सहायक शिक्षकों की भर्ती के मामले में भी पड़ सकता है क्योंकि उस मामले में भी एक मुद्दा विचार का यही है। सिंह उस मामले में भी आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों के वकील हैं।
दूरगामी प्रभाव वाला यह ताजा फैसला
न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और आलोक अराधे की पीठ ने महाराष्ट्र में शिक्षक भर्ती मामले में आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों की याचिकाएं स्वीकार करते हुए दिया है। हाई कोर्ट ने आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों की मेरिट में अधिक नंबर आने पर सामान्य वर्ग में माने जाने की मांग खारिज कर दी थी। हाई कोर्ट ने कहा था कि टीईटी में ली गई छूट को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
छूट केवल पात्रता को प्रभावित करती है, न कि योग्यता को- कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि योग्यता मानदंडों में दी गई छूट केवल पात्रता को प्रभावित करती है, न कि योग्यता को, और किसी भी निषेध के अभाव में, माइग्रेशन (श्रेणी परिवर्तन) की अनुमति है। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता सामान्य श्रेणी में जाने के हकदार हैं। सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट का 14 फरवरी 2025 का आदेश रद करते हुए कहा कि जिन याचिकाकर्ताओं के अंक सामान्य श्रेणी के चयनित अंतिम उम्मीदवार से ज्यादा है उन्हें मेरिट लिस्ट में शामिल किया जाए।
इस मामले में आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों ने बॉम्बे हाई कोर्ट के 14 फरवरी 2025 के फैसले को चुनौती दी थी। याचिका में महाराष्ट्र में जिला परिषद, म्युनिसिपल कॉरपोरेशन आदि में शिक्षक भर्ती की 25 फरवरी 2024 की मेरिट लिस्ट को चुनौती दी गई थी। उनकी मांग थी कि सामान्य वर्ग की मेरिट में अंतिम चयनित उम्मीदवार से ज्यादा अंक लाने पर उन्हें सामान्य वर्ग में माना जाए।
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