इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि किरायेदारों के अधिकार से ज्यादा जरुरीआम लोगों की सुरक्षा है। कोर्ट ने कहा, यदि कोई भवन जर्जर और खतरनाक हालात में है तो उसको गिराने में कोई भी किरायेदार रुकावट नहीं डाल सकते। कोर्ट ने साफ किया कि ऐसे मामलों में प्रशासन को वैधानिक अधिकारों के तहत तुरंत कार्रवाई करने की छूट है। यह आदेश न्यायमूर्ति नीरज तिवारी और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने दिया।
शासन को वैधानिक अधिकारों के तहत कार्रवाई की छूट
हाईकोर्ट ने ध्वस्तीकरण के लिए चिह्नित जर्जर भवन को किरायेदारों को खाली करने के लिए कहा है। हाईकोर्ट ने कहा व्यक्तिगत अधिकार सार्वजनिक हित के अधिकार पर प्रभावी नहीं होंगे। अदालत ने साफ किया कि ऐसे मामलों में प्रशासन को वैधानिक अधिकारों के तहत कार्रवाई की छूट है। मुक्तेश्वर महादेव मुक्तेश्वरी दुर्गा धर्मार्थ सेवा समिति वाराणसी की तरफ से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी।
हाईकोर्ट ने जारी किया था नोटिस
ये मामला समिति की इंग्लिशियालाइन स्थित एक पुरानी इमारत से जुड़ा है। वाराणसी नगर निगम ने अगस्त 2021 में भवन को असुरक्षित व खतरनाक घोषित करते हुए ध्वस्तीकरण नोटिस जारी किया था। लेकिन किरायेदारों द्वारा किए गए मुकदमों के चलते कार्रवाई लगातार टलती रही। 29 अगस्त 2025 को जर्जर भवन का एक हिस्सा गिरने से जनहानि का खतरा पैदा हो गया जिसके बाद समिति की तरफ से जर्जर भवन गिराने की मांग को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की।
हाईकोर्ट ने मामले में सुनवाई करते हुए कहा कि नगर निगम अधिनियम 1959 की धारा 331 और 334 नगर आयुक्त को खतरनाक जर्जर भवन गिराने की शक्ति देता है। एक बार भवन अगर असुरक्षित हो जाए तो निवासियों को खाली करना अनिवार्य है, वर्ना पुलिस की मदद से खाली कराया जाए।
दो सप्ताह में ध्वस्तीकरण कार्रवाई पूरा करने का निर्देश
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि किरायेदारी कानून सुरक्षा देता है पर जनसुरक्षा के सामने उसकी सीमा है। हालांकि कोर्ट ने कहा कि निवासियों को सामान निकालने का उचित अवसर दिया जाना चाहिए। कोर्ट ने नगर निगम को दो सप्ताह में ध्वस्तीकरण कार्रवाई पूरा करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही पुलिस प्रशासन को पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया।
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