Citation : 2026 Latest Caselaw 200 Chatt
Judgement Date : 9 March, 2026
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(Cr. A. No.-479 of 2026)
2026:CGHC:11286
अप्रतिवेद्य
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर
दाण्डिक अपील क्रमांक-479/2026
पवन कु मार चन्द्रवंशी पिता-रूपलाल चन्द्रवंशी, उम्र-लगभग 36 वर्ष, निवासी-खैरीपार
(बधई कु ण्डा), पुलिस थाना व तहसील-कवर्धा, जिला-कबीरधाम, छत्तीसगढ़
-----अपीलार्थी/अभियुक्त
विरूद्घ
छत्तीसगढ़ राज्य, द्वारा पुलिस थाना-तरेगांव जंगल, जिला-कबीरधाम, छत्तीसगढ़
-----उत्तरवादी/राज्य
अपीलार्थी/अभियुक्त द्वारा : श्री सतीश चन्द्र वर्मा, अधिवक्ता (आभासी माध्यम से)
सहित श्री मोहम्मद नकीब, अधिवक्ता ।
राज्य/उत्तरवादी द्वारा : सुश्री प्रिया शर्मा, पैनल अधिवक्ता ।
माननीय न्यायमूर्ति श्री संजय कु मार जायसवाल, न्यायाधीश
!! आदेश पीठ पर पारित !!
09/03/2026
1.
धारा 14(क)(ii) अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण)
अधिनियम, 1989 (जिसे आगे संक्षेप में "विशेष अधिनियम" कहा गया है) के अंतर्गत
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2026.03.10 10:19:11 +0530
(Cr. A. No.-479 of 2026)
प्रस्तुत इस अपील में विचारण न्यायालय-विशेष न्यायाधीश (विशेष अधिनियम),
कबीरधाम, छत्तीसगढ़ द्वारा पुलिस थाना-तरेगांव जंगल, कबीरधाम, छत्तीसगढ़ के अपराध
क्रमांक-03/2026 अंतर्गत धारा 318(4), 316(5), 3(5) भारतीय न्याय संहिता,
2023 तथा विशेष अधिनियम की धारा 3(2)(v), 3(2)(vक) के तहत प्रस्तुत अग्रिम
जमानत आवेदन में पारित आदेश दिनांक-10/02/2026 को चुनौती दी गई है जिसके
तहत अपीलार्थी/अभियुक्त का अग्रिम जमानत आवेदन निरस्त कर दिया गया । उक्त
आदेश को संक्षेप में "प्रश्नाधीन आदेश" से संबोधित किया जा रहा है ।
2. अभियोजन का मामला इस आशय का है कि प्रार्थी सिद्धराम मसराम, सचिव, ग्राम पंचायत
कु करापानी, थाना तरेगांव जंगल, जिला कबीरधाम द्वारा थाना तरेगांव जंगल में प्रस्तुत
लिखित आवेदन के आधार पर यह रिपोर्ट दर्ज कराई गई कि ट्रायबल एवं बैगा आवास
योजना के अंतर्गत 17 बैगा परिवारों के मकान निर्माण हेतु ग्राम पंचायत कु करापानी के बैंक
खाता क्रमांक 77075410408, छत्तीसगढ़ ग्रामीण बैंक, शाखा बोडला में कु ल राशि
₹21,50,000/- दिनांक 30.10.2024 को जमा हुई थी । उक्त राशि को मकान
निर्माण कार्य कराने के लिए तकनीकी सहायक पवन चंद्रवंशी (अपीलार्थी/आवेदक) एवं
ठेके दार छोटू चंद्रवंशी को प्रदान किया गया था, किं तु आरोपियों द्वारा राशि प्राप्त करने के
पश्चात आज दिनांक तक किसी भी हितग्राही का मकान निर्माण कार्य प्रारंभ नहीं किया गया
है । आरोपियों ने मकान निर्माण कराने के नाम पर उक्त राशि छलपूर्वक प्राप्त कर उसका
दुरुपयोग करते हुए हितग्राहियों के साथ धोखाधड़ी की है । उक्त शिकायत के आधार पर
अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना की जा रही है ।
3. इस अपील के संबंध में पीड़ित/शिकायतकर्ता को दिनांक-19/02/2026 को सूचना
प्रेषित की गई थी । जिसके अनुपालन में पीड़ित द्वारा आज दिनांक 09/03/2026 को
(Cr. A. No.-479 of 2026)
संबंधित जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से आभासी रूप से उपस्थित होकर अपीलार्थी/
अभियुक्त को जमानत दिए जाने पर आपत्ति होने की अभिव्यक्ति की गई ।
4. अपीलार्थी/आवेदक के विद्वान अधिवक्ता का तर्क है कि अपीलार्थी/अभियुक्त निर्दोष है तथा
उसे प्रकरण में मिथ्या रूप से फं साया गया है । अपीलार्थी/अभियुक्त के विरुद्ध प्रथमदृष्टया
कोई अपराध निर्मित नहीं होता है । विशेष अधिनियम के अंतर्गत प्रथमदृष्टया अपराध प्रकट
नहीं होता । विशेष अधिनियम की धारा 18 एवं 18(क) के प्रावधान वर्तमान प्रकरण में
आकर्षित नहीं होते हैं । अतः "प्रश्नाधीन आदेश" अपास्त करते हुए अपीलार्थी/अभियुक्त
को अग्रिम जमानत पर रिहा किया जाये । विद्वान अधिवक्ता द्वारा अपने तर्क के समर्थन में
शफीक अहमद विरुद्ध छत्तीसगढ़ राज्य (दाण्डिक अपील क्रमांक-924/2025, निर्णय
दिनांक-10/06/2025) तथा अखिलेश यादव विरुद्ध छत्तीसगढ़ राज्य (दाण्डिक अपील
क्रमांक-2104/2024, निर्णय दिनांक-12/03/2025) का हवाला दिया गया है ।
5. उत्तरवादी/राज्य के विद्वान अधिवक्ता ने अपील का विरोध करते हुए तर्क प्रस्तुत किया है
कि प्रकरण में अपीलार्थी/अभियुक्त के विरुद्ध नामजद रिपोर्ट दर्ज की गई है तथा प्रथम
सूचना पत्र में अनुसूचित जनजाति वर्ग से संबंधित हितग्राहियों के साथ छलपूर्वक व्यवहार
कर शासन की योजना के अंतर्गत प्राप्त राशि का दुरुपयोग करने का विशिष्ट आरोप है ।
प्रथमदृष्टया अभिलेख में उपलब्ध सामग्री से अपीलार्थी/अभियुक्त की संलिप्तता परिलक्षित
होती है तथा विशेष अधिनियम के अंतर्गत अपराध निर्मित होना प्रतीत होता है । इस
प्रकार, "विशेष अधिनियम" की धारा 18 एवं 18(क) के अंतर्गत अग्रिम जमानत पर लगाए
गए प्रतिबंध का प्रावधान वर्तमान प्रकरण में लागू होता है । अतः विचारण न्यायालय द्वारा
पारित "प्रश्नाधीन आदेश" उचित एवं विधिसम्मत है, जिसमें किसी प्रकार के हस्तक्षेप की
आवश्यकता नहीं है । अतः प्रस्तुत अपील खारिज किया जाए ।
(Cr. A. No.-479 of 2026)
6. उपस्थित पक्ष का तर्क श्रवण किया तथा अभिलेख एवं के स डायरी का परिशीलन किया गया ।
7. अभिलेख के समग्र परिशीलन से यह स्पष्ट होता है कि प्रकरण में अपीलार्थी/अभियुक्त के
विरुद्ध नामजद रिपोर्ट दर्ज की गई है । प्रथम सूचना पत्र में यह आरोप लगाया गया है कि
अनुसूचित जनजाति वर्ग से संबंधित हितग्राहियों के साथ छलपूर्वक व्यवहार करते हुए उनके
लिए शासन की योजना के अंतर्गत प्राप्त राशि का दुरुपयोग किया गया है । प्रथमदृष्टया
प्रथम सूचना पत्र के अवलोकन से ही यह परिलक्षित होता है कि विशेष अधिनियम के
प्रावधान आकर्षित होते हैं । विशेष अधिनियम की धारा 18 के अंतर्गत अग्रिम जमानत पर
लगाए गए प्रतिबंध का प्रावधान वर्तमान प्रकरण में लागू होता है । मामले में तथ्यों की
भिन्नता से अपीलार्थी/आवेदक पक्ष द्वारा उल्लेखित न्यायदृष्टांत का समर्थन उन्हें नहीं
मिलता ।
8. ऐसी दशा में, विधिक प्रावधान के प्रकाश में यह न्यायालय पाती है कि विशेष अधिनियम की
धारा 18 एवं के प्रावधान वर्तमान प्रकरण में आकर्षित होते हैं, जिसके परिणामस्वरूप
अपीलार्थी/अभियुक्त का मामला अग्रिम जमानत हेतु उपयुक्त नहीं पाया जाता । इसलिए
विचारण न्यायालय द्वारा पारित "प्रश्नाधीन आदेश" में कोई अवैधता अथवा अशुद्घता
परिलक्षित नहीं होती है । अतः उसमें हस्तक्षेप किए जाने की आवश्यकता नहीं पाई जाती ।
अतः अपील खारिज की जाती है ।
9. रजिस्ट्री को निर्देशित किया जाता है कि इस आदेश की प्रति यथाशीघ्र विचारण न्यायालय
को सूचनार्थ प्रेषित किया जाए ।
सही/-
(संजय कु मार जायसवाल) न्यायाधीश
पोमन
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