Citation : 2026 Latest Caselaw 1107 Chatt
Judgement Date : 30 March, 2026
1/5
(M.Cr.C. No.-2006 of 2026 & 2413 of 2026)
2026:CGHC:14853
अप्रतिवेद्य
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर
विविध दाण्डिक प्रकरण क्रमांक-2006/2026
घनश्याम ढीमर पिता-गोपी ढीमर, उम्र-लगभग 26 वर्ष, निवासी-ढीमरपारा, वार्ड
संख्या-32, हनुमान मंदिर के पास, दुर्ग, पुलिस थाना-सिटी कोतवाली, दुर्ग,
जिला-दुर्ग, छत्तीसगढ़
-----आवेदक/अभियुक्त
विरूद्घ
छत्तीसगढ़ राज्य, द्वारा पुलिस थाना-सिटी कोतवाली, दुर्ग, जिला-दुर्ग, छत्तीसगढ़
-----उत्तरवादी/राज्य
एवं
विविध दाण्डिक प्रकरण क्रमांक-2413/2026
वामन शर्मा पिता-स्वर्गीय गुलाब चंद शर्मा, उम्र-लगभग 21 वर्ष, निवासी-मकान
संख्या-125, ब्राह्मण पारा, दुर्गा मंदिर के पास, पुलिस थाना-सिटी कोतवाली,
जिला-दुर्ग, छत्तीसगढ़
-----आवेदक/अभियुक्त
विरूद्घ
छत्तीसगढ़ राज्य, द्वारा पुलिस थाना-सिटी कोतवाली, दुर्ग, जिला-दुर्ग, छत्तीसगढ़
-----उत्तरवादी/राज्य
Digitally
signed by
POMAN
POMAN DEWANGAN
DEWANGAN Date:
2026.04.01
10:25:13
+0530
2/5
(M.Cr.C. No.-2006 of 2026 & 2413 of 2026)
आवेदक/अभियुक्त घनश्याम ढीमर द्वारा : श्री तरूण डनसेना, अधिवक्ता ।
आवेदक/अभियुक्त वामन शर्मा द्वारा : श्री ऱजा अली, अधिवक्ता ।
राज्य/उत्तरवादी द्वारा : श्री सुमित सिंह, उप शासकीय अधिवक्ता ।
न्यायमूर्ति श्री संजय कु मार जायसवाल
!! आदेश पीठ पर पारित !!
30/03/2026
1.
उपरोक्त दोनों नियमित जमानत आवेदन एक ही अपराध क्रमांक से संबंधित होने के कारण,
इनका निराकरण इस संयुक्त आदेश के माध्यम से किया जा रहा है ।
2. धारा-483 भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के तहत प्रस्तुत प्रथम जमानत
आवेदन में आवेदकगण/अभियुक्तगण को पुलिस थाना-सिटी कोतवाली, दुर्ग, छत्तीसगढ़
के अपराध क्रमांक-567/2025 अंतर्गत धारा-103(1), 331(8), 111(2)(क) के
मामले में जमानत देने का निवेदन किया गया है ।
3. अभियोजन मामला संक्षेप में इस प्रकार है कि वेदुरवाड़ा संतोष आचारी सोना-चाँदी का
व्यवसाय करने के साथ-साथ ब्याज पर धनराशि उधार देने का कार्य करता था । उसने
कु छ धनराशि सह-अभियुक्त दादू सोनी को भी उधार दी थी, जिसे वह लंबे समय से वापस
नहीं कर रहा था, जिसके कारण दोनों के मध्य कई बार विवाद हो चुका था । घटना के
समय वेदुरवाड़ा संतोष आचारी की पत्नी श्रीमती व्ही. रानी सोनी अपने मायके में निवासरत
थी । दिनांक 07/11/2025 को वेदुरवाड़ा संतोष आचारी ने अपनी पत्नी को दूरभाष पर
सूचित किया कि रुपये वापस मांगने को लेकर उसका दादू सोनी से विवाद हो गया है तथा
दादू सोनी का पुत्र अपने साथियों के साथ उसे मारने के उद्देश्य से घूम रहा है और उसने
(M.Cr.C. No.-2006 of 2026 & 2413 of 2026)
अपनी पत्नी से आकर समझौता कराने का निवेदन किया, किं तु उसकी पत्नी ने आने से
मना कर दिया ।
4. अभियुक्तगण/आवेदकगण (कु ल 13 अभियुक्त) द्वारा दिनांक 07/11/2025 की रात्रि
लगभग 11:00 बजे वेदुरवाड़ा संतोष आचारी के घर का दरवाजा तोड़कर उसे जबरन बाहर
निकाला गया और ब्राह्मणपारा स्थित आर्यन भवन ले जाकर रात्रि लगभग 01:30 बजे तक
हाथ, मुक्का, लात-घूँसों, डण्डों एवं प्लास्टिक की नल-पाइप आदि से मारपीट कर उसे
गंभीर एवं प्राणघातक चोटें पहुँचाई गईं । पश्चात में उसे उपचार हेतु अस्पताल में भर्ती
कराया गया, जहाँ उसकी मृत्यु हो गई । मृत्यु से पूर्व उसने अपनी पत्नी को दूरभाष पर
अभियुक्तगण के नाम बताए थे, जिसके आधार पर उसकी पत्नी श्रीमती व्ही. रानी सोनी की
सूचना पर दिनांक 08/11/2025 को 12 अभियुक्त के विरुद्ध नामजद प्रथम सूचना पत्र
दर्ज की गई तथा विवेचना पूर्ण कर अभियोगपत्र प्रस्तुत किया गया ।
5. अभियुक्त/आवेदक घनश्याम ढीमर के विद्वान अधिवक्ता का तर्क है कि वह दिनांक
08/11/2025 से अभिरक्षा में निरुद्ध है । उसके मेमोरेंडम कथन में बांस का डण्डा
बताए जाने के बावजूद उससे प्लास्टिक पाइप की जब्ती दर्शाई गई है, जो अभियोजन
मामले को संदिग्ध बनाती है । यह भी तर्क प्रस्तुत किया गया है कि वह घटना में
सम्मिलित नहीं था और पूर्णतः निर्दोष है, मृतक से उसकी कोई दुश्मनी नहीं थी तथा उसे
झूठा फँ साया गया है । प्रकरण में लगभग 30 साक्षी हैं, अतः विचारण में समय लगना
संभावित है । इन समस्त परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए उसे जमानत पर रिहा किया
जाए ।
6. उत्तरवादी/राज्य के विद्वान अधिवक्ता का तर्क है कि घटना के अगले दिन दर्ज की गई
प्रथम सूचना रिपोर्ट में वह नामजद आरोपी है । उसके कब्ज़े से प्लास्टिक की पाइप जब्त
(M.Cr.C. No.-2006 of 2026 & 2413 of 2026)
की गई है, जिस पर रक्त के धब्बे पाए गए हैं । साथ ही मृतक की पत्नी के कथन में भी
उसका नाम स्पष्ट रूप से उल्लिखित है, जिससे उसकी घटना में संलिप्तता प्रथमदृष्टया
स्थापित होती है । अतः ऐसे गंभीर आरोप की प्रकृ ति को दृष्टिगत रखते हुए उसका
जमानत आवेदन निरस्त किया जावे ।
7. उभयपक्ष का तर्क श्रवण किया गया तथा अभिलेख व के स डायरी का परिशीलन किया
गया ।
8. मामले में अभियोगपत्र प्रस्तुत किया जा चुका है, किं तु विचारण अभी प्रारंभ नहीं हुआ है ।
अभियुक्त/आवेदक घनश्याम ढीमर के विरुद्ध पुलिस द्वारा संकलित साक्ष्य तथा अपराध
की गंभीर प्रकृ ति को दृष्टिगत रखते हुए उसका मामला इस स्तर पर जमानत प्रदान किए
जाने योग्य नहीं पाया जाता । फलतः अभियुक्त/आवेदक घनश्याम ढीमर का जमानत
आवेदन खारिज किया जाता है ।
9. अभियुक्त/आवेदक वामन शर्मा के विद्वान अधिवक्ता का तर्क है कि उसका नाम प्रथम
सूचना पत्र में उल्लेखित नहीं है तथा उससे किसी वस्तु की जब्ती भी नहीं की गई है ।
किसी भी अभियोजन साक्षी द्वारा उसका नाम नहीं लिया गया है, यह भी तर्क प्रस्तुत किया
गया है कि वह दिनांक 16/01/2026 से अभिरक्षा में है, प्रकरण में लगभग 30 साक्षी हैं
तथा विचारण में समय लगना संभावित है; उसके विरुद्ध कोई साक्ष्य नहीं है और उसे झूठा
फँ साया गया है । अतः उसे जमानत पर रिहा किया जाए ।
10. उत्तरवादी/राज्य के विद्वान अधिवक्ता का तर्क है कि सह-अभियुक्त धन्नू सेन के मेमोरेंडम
कथन में आवेदक वामन शर्मा का नाम स्पष्ट रूप से आया है, जिससे उसकी घटना में
(M.Cr.C. No.-2006 of 2026 & 2413 of 2026)
संलिप्तता प्रथमदृष्टया परिलक्षित होती है । अतः ऐसे में उसका मामला जमानत प्रदान किए
जाने योग्य नहीं है । अतः जमानत आवेदन निरस्त किया जाए ।
11. उभयपक्ष का तर्क श्रवण किया गया तथा अभिलेख व के स डायरी का परिशीलन किया
गया ।
12. परिशीलन से यह परिलक्षित होता है कि अभियुक्त/आवेदक वामन शर्मा की गिरफ्तारी
के वल सह-अभियुक्त धन्नू सेन के मेमोरेंडम कथन के आधार पर की गई है । उससे किसी
वस्तु की जब्ती नहीं हुई है तथा न ही उसका नाम प्रथम सूचना पत्र अथवा साक्षियों के
कथन में उल्लेखित है । वह दिनांक 16/01/2026 से अभिरक्षा में है । विचारण में समय
लगने की संभावना को दृष्टिगत रखते हुए अभियुक्त/आवेदक वामन शर्मा का प्रकरण
जमानत प्रदान किए जाने योग्य पाया जाता है ।
13. अतः आवेदक/अभियुक्त वामन शर्मा का जमानत आवेदन स्वीकार किया जाता है ।
आवेदक/अभियुक्त वामन शर्मा दाण्डिक प्रकरण के निराकरण तक संबंधित न्यायालय में
अपनी नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने हेतु ₹25,000/- (पच्चीस हजार रुपये) का
मुचलका एवं उतनी ही राशि का सक्षम जमानत प्रस्तुत करे तो उसे रिहा किया जाए ।
14. रजिस्ट्री को निर्देशित किया जाता है कि इस आदेश की प्रतिलिपि यथाशीघ्र विचारण
न्यायालय को सूचनार्थ व अनुपालनार्थ प्रेषित की जाए ।
सही/-
(संजय कु मार जायसवाल) न्यायाधीश
पोमन
Publish Your Article
Campus Ambassador
Media Partner
Campus Buzz
LatestLaws.com presents: Lexidem Offline Internship Program, 2026
LatestLaws.com presents 'Lexidem Online Internship, 2026', Apply Now!