सुप्रीम कोर्ट ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया से पूछा है कि ब्याज दरें घटाने का लाभ प्लोटिंग रेट पर लोन लेने वालों को क्यों नहीं दिया जा रहा है। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एस के कौल व न्यायमूर्ति के एम जोसेफ की पीठ ने भारतीय रिजर्व बैंक को लोक न्यास ‘मनीलाइफ फाउंडेशन’ को छह सप्ताह के भीतर उसकी शिकायत पर जवाब देने को कहा है।
लोक न्यास मनीलाइफ फाउंडेशन ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट को लेकर आरबीआई के फैसले के बाद भी बैंक और अन्य वित्तीय संस्थाएं ब्याज दरों में कमी लाने में सुस्त रवैया अपनाती हैं। न्यास मनीलाइफ फाउंडेशन ने कहा है कि ग्राहकों को ब्याज दरों में कमी का फायदा देने में देरी की जाती है।
रिजर्व बैंक हर दो महीने पर अपनी मौद्रिक नीति की समीक्षा करता है। और रेपो रेट तय करता है। केंद्रीय बैंक रेपो दर के आधार पर ही बैंकों एवं वित्तीय संस्थानों को अल्पकालिक कर्ज उपलब्ध कराता है। इसी दर से बैंकों में आगे ब्याज दर की दिशा तय होती है। रेपो दर में घटबढ़ से मकान एवं वाहनों के ऋण सहित अन्य कर्ज के ईएमआई पर असर पड़ता है।
पीठ ने कहा, 'याचिकाकर्ता के मुताबिक इस विषय में लिये गए निर्णय के नतीजे के बारे में उसे जानकारी नहीं दी गई। इसके बाद याचिकाकर्ता के पास इस न्यायालय का दरवाजा खटखटाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा।
न्यायालय ने याचिकाकर्ता ट्रस्ट और अन्य से कहा है कि यदि वह रिजर्व बैंक के जवाब से संतुष्ट नहीं हो तो वह फिर से न्यायालय के समक्ष अपनी बात रख सकते हैं। जनहित याचिका में देश में बैंकिंग कंपनियों द्वारा भारतीय रिजर्व बैंक (कर्ज पर ब्याज दर) मास्टर निर्देशन 2016 को लागू करने के तरीके को चुनौती दी गई थी।
बैंकों की मनमानी रोकने के लिए 4 प्रमुख सुझाव
- जो बैंक फ्लोटिंग रेट वाले लोन पर प्रचलित दरों से ज्यादा ब्याज वसूलते हैं और घटी दरों का लाभ ग्राहकों को नहीं दे रहे, उनके लिए आरबीआई निर्देश जारी करे।
- अगर बैंक तय रेट से ज्यादा ब्याज ले रहे हैं तो यह रकम रिजर्व बैंक के पास आनी चाहिए। सेंट्रलाइज्ड योजना के जरिये यह राशि उन सभी कर्जदारों को वापस मिलनी चाहिए, जिन्होंने फ्लोटिंग रेट पर कर्ज लिया है, ताकि वह कम ब्याज दर के लाभ से वंचित न हों।
- आरबीआई सभी बैंकों को निर्देश दें कि जो ग्राहक कम दरों पर कर्ज के पात्र हैं, उनसे कम ब्याज दर पर जाने के लिए कन्वर्जन शुल्क न लिया जाए। इसकी वसूली तुरंत रोकी जाए।
- बैंक ब्याज दरों में बदलाव की सूचना ग्राहकों को तुरंत दें। ब्याज दर में बदलाव के एक दिन के अंदर कम से कम तीन माध्यमों टेलीफोन, एसएमएस और ईमेल के जरिये यह सूचना जरूर देनी चाहिए।
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