सुप्रीम कोर्ट ने कहा - सरकार पता लगाए कि ऐसा क्यों हो रहा है और इसे रोकने के लिए क्या इंतजाम जरूरी हैं।

गुजरात के मशहूर गिर अभयारण्य में शेरों की मौत पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताते हुए केंद्र और गुजरात सरकार से इसकी वजहों का पता लगाने को कहा है। कोर्ट ने कहा शेरों का संरक्षण जरूरी है। सरकार पता लगाए कि ऐसा क्यों हो रहा है और इसे रोकने के लिए क्या इंतज़ाम ज़रूरी हैं। केंद्र ने इस मामले में कोर्ट को जानकारी देने के लिए समय मांगा है।

कोर्ट से गुजरात सरकार ने कहा शेरों के संरक्षण के लिए हर तरह के उपाय किए जाएंगे। कोर्ट ने केन्द्र से कहा कि गुजरात के गिर अभ्यारण्य में तीन सप्ताह के भीतर 23 शेरों की रहस्यमय मृत्यु के मामले पर गौर करे। ऐसा संदेह है कि किसी वायरस संक्रमण की वजह से इन शेरों की मौत हुई है। न्यायमूर्ति मदन बी लोकूर, न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने केन्द्र की ओर से पेश अतिरिक्त सालिसीटर जनरल एएनएस नाडकर्णी से कहा, ‘‘आज हमारे सामने एकदम अजीब समस्या है। शेर मर रहे हैं। ऐसा लगता है कि वहां किसी किस्म का वायरस है। हमें मालूम नहीं। ऐसा ही समाचार पत्रों में आ रहा है आप इसका पता लगाएं.’’

आइए जानते हैं: अभयारण्य में शेरों की मौत के लिए खतरनाक कैनाइन डिस्टेंपर वायरस(सीडीवी) और प्रोटोजोवा संक्रमण को जिम्मेदार माना जा रहा है। इनके कारण अबतक 23 शेरों की मौत हो चुकी है। 26 शेरों वाले इस अभायरण्य में अब केवल तीन ही शेर बचे हुए हैं। लगातार शेरों की मौत से गिर प्रशासन सकते में है। बचे हुए शेरों को बचाने के लिए प्रशासन हर संभव कोशिश में लगा हुआ है।

क्या है कैनाइन डिस्टेंपर वायरस और यह कैसे फैलता है...

कैनाइन डिस्टेंपर बेहद खतरनाक संक्रामक वायरस है। इसे सीडीवी भी कहा जाता है। इस बीमारी से ग्रसित जानवरों का बचना बेहद मुश्किल होता है।

-यह बीमारी मुख्यत: कुत्तों में पाई जाती है। हालांकि कैनाइन फैमिली में शामिल रकून, भेड़िया और लोमड़ी में भी यह बीमारी पाई जाती है।

-कुत्तों के जरिए यह वायरस दूसरों जानवरों में भी फैल जाता है।

-इसके अलावा यह वायरस हवा तथा सीधे या अप्रत्यक्ष तौर पर इस वायरस से ग्रसित किसी जानवर के संपर्क में आने से भी फैलता है। -शुरू में यह वायरस कुत्तों के टॉन्सल, लिंफ (नसों में बहने वाला खास तरल) पर हमला करता है। बीमारी के लक्षण इस वायरस से ग्रसित होने के करीब एक सप्ताह में सामने आता है। इसके बाद यह बीमारी कुत्ते के श्वास नली, किडनी और लिवर पर हमला कर देता है। कुछ दिन में इसके वायरस मस्तिष्क तंत्रिका में पहुंच जाते हैं और कुत्तों की मौत हो जाती है।

-हाई फीवर, लाल आंखें तथा नाक और कान से पानी बहना इस बीमारी का मुख्य लक्षण है। इसके अलावा कफ, उल्टी और डायरिया भी हो सकता है। इस बीमारी के कारण कुत्ते सुस्त पड़ जाते हैं।

-यह बीमारी खराब वैक्सीन से भी फैल सकती है। हालांकि ऐसे मामले रेयर ही होते हैं।

 

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