एक अत्यंत मानवीय एवं संवैधानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण निर्णय में इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ ने लखनऊ छावनी बोर्ड को पिपरा घाट शवदाहगृह में आधुनिक श्मशान के निर्माण हेतु शीघ्र निविदा (tender) आमंत्रित करने, परिसर की चारदीवारी की तत्काल मरम्मत कराने तथा पेयजल सुविधा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। न्यायालय ने स्पष्ट रूप से यह अभिनिर्धारित किया कि सम्मानजनक अंतिम संस्कार का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत एक मूलभूत अधिकार है।

याचिकाकर्ता शिव गुप्ता ने संविधान के अनुच्छेद 226 के अंतर्गत यह जनहित याचिका दायर कर प्रतिवादियों को लखनऊ छावनी क्षेत्र में स्थित पिपरा घाट शवदाहगृह का उचित रखरखाव एवं संचालन सुनिश्चित करने हेतु परमादेश (mandamus) जारी करने की प्रार्थना की। याचिकाकर्ता ने तीन प्रमुख राहतें मांगीं: शवदाहगृह का समुचित रख-रखाव; प्रत्येक मानव को सम्मानपूर्वक अंतिम विदाई सुनिश्चित करना; तथा लखनऊ छावनी के नागरिक क्षेत्रों में निश्चित समयसीमा में सीवेज लाइनें बिछाना।

छावनी बोर्ड के अधिवक्ता श्री संजीव सिंह ने न्यायालय को सूचित किया कि आधुनिक शवदाहगृह के निर्माण का प्रस्ताव पहले ही स्वीकृत हो चुका है और निविदा आमंत्रित करने की प्रक्रिया जारी है।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने इससे आगे बढ़कर न्यायालय का ध्यान एक अत्यंत चिंताजनक स्थिति की ओर आकृष्ट किया। उन्होंने बताया कि वर्तमान में संचालित शवदाहगृह में उचित चारदीवारी न होने के कारण बंदर, कुत्ते एवं गायें बेरोकटोक परिसर में प्रवेश करते हैं, गंदगी फैलाते हैं और अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण रूप से कभी-कभी चिता की अग्नि जलती रहने के दौरान और परिजनों के जाने के बाद मृत मानव अवशेषों को भी विक्षिप्त कर देते हैं। यह भी बताया गया कि परिसर में पेयजल एवं शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव है। यह तर्क दिया गया कि मानव गरिमा के साथ जीने का अधिकार मृत्यु के उपरांत भी बना रहता है और सम्मानजनक अंतिम संस्कार अनुच्छेद 21 के अंतर्गत संरक्षित है।

न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ एवं न्यायमूर्ति अभ्देश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने इस विषय को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए कहा कि मानव गरिमा के साथ जीने का अधिकार मृत्यु के बाद भी विद्यमान रहता है और प्रत्येक मृत व्यक्ति को सम्मानजनक एवं उचित अंतिम संस्कार का अधिकार है। न्यायालय ने निर्देशित किया कि छावनी बोर्ड आधुनिक शवदाहगृह हेतु अधिमानतः चार सप्ताह के भीतर निविदा आमंत्रित करे; शवदाहगृह की चारदीवारी की तत्काल मरम्मत एवं नवीनीकरण किया जाए; तथा वर्तमान में संचालित शवदाहगृह में तुरंत पेयजल सुविधा सुनिश्चित की जाए।

न्यायालय ने सर्वोच्च न्यायालय के आश्रय अधिकार अभियान बनाम भारत संघ, AIR 2002 SC 554 के निर्णय पर आधारित हुआ, जिसमें यह स्थापित किया गया था कि अनुच्छेद 21 के अंतर्गत मानव गरिमा की संवैधानिक संरक्षा मृत्यु के बाद भी जारी रहती है।

Case Details:

Case No.: PIL No. 558 of 2026

Court: High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench

Bench: Hon'ble Justice Shekhar B. Saraf & Hon'ble Justice Abdhesh Kumar Chaudhary

Petitioner: Shiv Gupta

Respondents: Union of India through Secretary, Ministry of Defence & 2 Others (including Lucknow Cantonment Board)

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