हाईकोर्ट ने राज्य के विभिन्न बागवानी क्षेत्रों में इस्तेमाल होने वाली एंटी हेलगन (ओला रोधी तोपों) के पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जन सुरक्षा पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को लेकर संज्ञान लिया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने इस मामले में सरकार और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोटिस जारी कर जवाबतलब किया है।
खंडपीठ ने पूछा क्या राज्य सरकार ने इन ओला रोधी तोपों के संचालन और इसके इस्तेमाल को लेकर अब तक कोई आधिकारिक गाइडलाइन या दिशा-निर्देश जारी किए हैं या नहीं। जनहित याचिका पर अगली सुनवाई 20 जुलाई को होगी। हाईकोर्ट ने यह जनहित याचिका रोहड़ू तहसील के भामनोली गांव के एक स्थानीय निवासी से प्राप्त पत्र के आधार पर दर्ज की गई है। शिकायतकर्ता ने हिमाचल प्रदेश में एंटी-हेलगन के इस्तेमाल पर तुरंत प्रतिबंध या निलंबन लगाने की मांग की है।
याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने नोट किया कि यह बंदूकें अत्यधिक तीव्र गति की शॉक वेव्स (झटके वाली तरंगें) पैदा करती हैं, जिससे न केवल भारी ध्वनि प्रदूषण होता है, बल्कि स्थानीय वातावरण, मवेशी, वन्यजीव और कृषि पारिस्थितिकी तंत्र भी बुरी तरह प्रभावित होते हैं। इन गन का मुख्य उद्देश्य बादलों को मोड़ना है ताकि विशिष्ट सेब बागानों पर ओलावृष्टि न हो। लेकिन इसका दुष्परिणाम यह हो रहा है कि मुड़े हुए बादल दूसरे क्षेत्रों में जाकर अत्यधिक भारी बारिश और ओलावृष्टि कर रहे हैं।
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