अपहरण कर किशोरी से सामूहिक दुष्कर्म के मामले में अदालत ने दो युवकों को 20-20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई तथा 15-15 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। एक आरोपित को पुलिस पहले ही क्लीनचिट दे चुकी है।
एक आरोपित को पुलिस दे चुकी है क्लीनचिट
बड़ौत के एक मुहल्ला निवासी व्यक्ति ने 11 मई 2019 को मुकदमा दर्ज कराते हुए बताया था कि उनकी 15 वर्षीय बेटी 23 अप्रैल की शाम चार बजे उपले लेने के लिए घर के पीछे खाली प्लाट में गई थी, लेकिन वापस घर नहीं लौटी। इंतजार करने पर बेटी को तलाश किया गया। जानकारी की गई तो पता चला कि बेटी को कुछ बदमाश उठाकर लेकर गए हैं।
पुलिस के पीछे करने पर पीड़िता को छोड़ भागे थे आरोपित
पुलिस कंट्रोल रूम नंबर 100 पर कॉल की गई। इसके बाद पुलिस ने बदमाशों का पीछा किया। रास्ते में बेटी बेहोशी की हालत में पुलिस को मिली। आरोप है कि होश में आने पर बेटी ने जानकारी दी कि कामिल, सलाऊ और इमरान ने उसे उठाकर ले जाने के बाद दुष्कर्म किया है। जो आसपास मुहल्ले के ही रहने वाले हैं। पुलिस ने विवेचना के आधार पर आरोपित सलाऊ और इमरान के खिलाफ कार्रवाई कर अदालत में चार्जशीट दाखिल की थी तथा कामिल को क्लीनचिट दे दी थी।
पीड़िता सहित आठ की हुई थी गवाही
आरोपित सलाऊ और इमरान की पत्रावली एडीजे पंचम शबिस्तां आकिल की अदालत में विचाराधीन थी। पीड़िता समेत आठ गवाहों की गवाही हुई। अदालत ने 20 मई को सलाऊ और इमरान को दोषी करार दिया था। अदालत ने शुक्रवार को सजा के प्रश्न पर सुनवाई करते हुए उन दोनों को 20-20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई तथा 15-15 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। अर्थदंड अदा न करने पर छह-छह माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
पीड़िता और उसके माता-पिता ने भी दी थी गवाही
विशेष लोक अभियोजक नरेंद्र पंवार ने बताया कि अदालत में आठ गवाहों की गवाही हुई थी। इनमें पीड़िता, उसके माता-पिता के अलावा इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर, विवेचक एसआई विजय कुमार चौहान व अभिषेक कुमार शामिल हैं।
मुजरिम के स्वजन कचहरी में डाले रहे डेरा
अदालत के फैसले पर मुजरिम पक्ष के लोग सुबह से ही टकटकी लगा रहे। जबकि पीड़ित पक्ष से कोई कचहरी नहीं पहुंचा। विशेष लोक अभियोजक नरेंद्र पंवार का कहना है कि पीड़ित पक्ष लंबे समय से कचहरी नहीं आ रहा है। उनके द्वारा पत्रावली की मजबूत पैरवी की गई है।
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