अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट शैलजा मिश्रा की अदालत ने अपने फैसले से स्पष्ट किया कि यदि पुलिस निर्धारित समय सीमा के बाद आरोप पत्र दाखिल करती है तो उसका संज्ञान नहीं लिया जा सकता। इस आधार पर अभियुक्त उज्जवल गुप्ता के विरुद्ध चल रही मुकदमे की कार्यवाही को समाप्त कर दिया गया।

कर्नलगंज थाने में वर्ष 2020 में अभियुक्त के विरुद्ध लापरवाही पूर्वक वाहन चलाने के मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इन धाराओं में अधिकतम दो वर्ष तक की सजा का प्रावधान है। दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 468 के अनुसार ऐसे अपराधों के लिए आरोप पत्र दाखिल करने या संज्ञान लेने की समय सीमा तीन वर्ष निर्धारित है। पुलिस ने लगभग छह साल की देरी के बाद मार्च 2026 में न्यायालय में चार्जशीट पेश की।

आरोपी के अधिवक्ता संदीप मिश्रा ने दलील दी कि देरी से चार्जशीट दायर करने के कारण मुकदमे की कार्यवाही जारी रखना अवैध है। कोर्ट ने भी पाया कि अभियोजन पक्ष ने देरी के लिए कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया। न ही देरी को माफ करने के लिए कोई प्रार्थना पत्र दिया। देरी की वजह से आरोप पत्र का संज्ञान नहीं लिया और मुकदमे की कार्यवाही समाप्त कर दी।

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