दहेज प्रताड़ना से जुड़े एक मामले में मप्र हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि वैवाहिक विवादों में पति के साथ उसके रिश्तेदारों को भी बेवजह आरोपी बनाने की प्रवृत्ति बढ़ रही है, जो चिंताजनक है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बिना ठोस साक्ष्य के लगाए गए ऐसे आरोप कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग माने जाएंगे।
रिश्तेदारों के खिलाफ FIR निरस्त
न्यायमूर्ति हिमांशु जोशी की एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान पति के रिश्तेदारों के खिलाफ दर्ज एफआईआर और उससे संबंधित कार्रवाई को निरस्त कर दिया। हालांकि, कोर्ट ने यह भी साफ किया कि पति के खिलाफ मामला जारी रहेगा और ट्रायल चलता रहेगा।
चार साल पहले हुई थी शादी
मामले में विदिशा निवासी शुभम साहू की ओर से दलील दी गई कि उनकी शादी वर्ष 2022 में सागर निवासी निधि से हुई थी। शादी के कुछ समय बाद ही पत्नी की तबीयत बिगड़ने लगी और वह मायके चली गई। इसके बाद वह लापता हो गई।
पिछले साल लगाए केस
याचिकाकर्ता के अनुसार, जुलाई 2025 में उन्होंने तलाक के लिए आवेदन दायर किया, जिसके बाद पत्नी ने पति और उसके परिजनों के खिलाफ दहेज प्रताड़ना का मामला दर्ज करा दिया।
सुनवाई के दौरान मप्र हाईकोर्ट ने कहा कि वैवाहिक विवादों में पूरे परिवार को आरोपी बनाना न्यायोचित नहीं है, खासकर तब जब आरोपों के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य मौजूद न हों।
यह फैसला ऐसे मामलों में एक अहम संदेश माना जा रहा है, जहां पारिवारिक विवादों में आरोपों का दायरा अक्सर जरूरत से ज्यादा बढ़ा दिया जाता है।
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