इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इलाहाबाद जिला न्यायलय में चल रहे एक मुकदमे में ऑर्डर शीट पर महीनों कोई आदेश दर्ज़ न होने पर गहरी नाराज़गी जताई है। कोर्ट को आदेश पत्रक पर अन्य कई अनियमितताएं देखने को मिली। इस पर कोर्ट ने संबंधित न्यायिक मजिस्ट्रेट से इस मामले में स्पष्टीकरण मांगा है। प्रयागराज के चंद्रदेव शुक्ला की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति तेज प्रताप तिवारी ने यह आदेश दिया। याचिका इलाहाबाद जिला न्यायलय के एसीजेएम कोर्ट में लंबित मुकदमे के शीघ्र निस्तारण का आदेश देने की मांग को लेकर दाखिल की गई थी।
मामला वर्ष 2018 से लंबित आपराधिक केस से जुड़ा है, जिसमें याची ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 529 के तहत याचिका दाखिल कर ट्रायल शीघ्र पूरा कराने की मांग की थी। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने देखा कि न 29 अप्रैल 2021 से 9 अगस्त 2021 तक की अवधि के लिए आदेश पत्र पूरी तरह खाली है। इस पर कोर्ट ने हैरानी जताते हुए कहा कि चाहे न्यायाधीश अवकाश पर रहे हों या कोर्ट खाली रही हो, हर स्थिति में किसी न किसी प्रभारी अधिकारी द्वारा कार्यवाही दर्ज की जानी चाहिए थी।
कोर्ट ने संबंधित न्यायालय के पीठासीन अधिकारी से इस लापरवाही पर स्पष्टीकरण मांगा है। कोर्ट ने यह भी देखा कि मामले की सुनवाई लगभग हर वर्ष केवल 3-4 बार ही सूचीबद्ध हुई। इससे अदालत ने अनुमान जताया कि संबंधित न्यायालय में मामलों का भारी लंबित बोझ हो सकता है। न्यायालय ने पीठासीन अधिकारी से इस पहलू पर भी रिपोर्ट देने को कहा है।
‘केस कॉल्ड आउट’ जैसे अस्पष्ट आदेश पर नाराजगी
हाईकोर्ट ने 17 फरवरी 2026 के आदेश—“केस कॉल्ड आउट, पुट अप ऑन डेट 06।05।2026”—को अत्यंत अस्पष्ट और अस्वीकार्य बताया। कोर्ट ने कहा कि एक वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी से इस प्रकार का संक्षिप्त और बिना विवरण वाला आदेश अपेक्षित नहीं है, जिसमें न केस की स्थिति स्पष्ट हो और न ही की गई कार्यवाही का विवरण।
कोर्ट ने मामले को 10 अप्रैल 2026 को पुनः सूचीबद्ध करते हुए संबंधित न्यायालय के पीठासीन अधिकारी को वर्चुअल माध्यम से व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया है। साथ ही, उन्हें पूर्व में ही विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है।
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