सुप्रीम कोर्ट ने उस वकील को फटकार लगाई, जिसने एक जज को खुले बाजार में बेचने की कोशिश की थी। जी हां, सुप्रीम कोर्ट ने उस वकील की जमानत याचिका पर बुधवार को सुनवाई से इनकार कर दिया, जिसे तलाक के एक मामले में अनुकूल न्यायिक आदेश दिलाने के लिए 30 लाख रुपये की रिश्वत मांगने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह ‘न्यायपालिका को बेच रहा था।

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने याचिकाकर्ता के वकील से कहा, ‘’आपने (याचिकाकर्ता ने) एक न्यायाधीश को खुले बाजार में बेचने की कोशिश की।’ जब पीठ ने याचिका पर विचार करने को लेकर अपनी अनिच्छा दिखाई, तो याचिकाकर्ता के वकील ने इसे वापस ले लिया। याचिका में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के फरवरी के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें याचिकाकर्ता को जमानत देने से इनकार कर दिया गया था। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि उसे (याचिकाकर्ता को) अगस्त 2025 में गिरफ्तार किया गया था और वह पिछले आठ महीने से हिरासत में है। वकील ने दलील दी कि मामले में अभी तक आरोप तय नहीं किए गए हैं।

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा, ‘वह न्यायपालिका को बेच रहा था… हमें ऐसे लोगों के लिए कोई सहानुभूति नहीं है।’ वकील ने दलील दी कि याचिकाकर्ता 70 वर्ष का है और स्वास्थ्य समस्याओं से ग्रस्त है। पीठ ने कहा, ‘उनहत्तर वर्ष की आयु में वह एक न्यायाधीश को खुलेआम बेच रहा है।’ पीठ ने यह भी कहा कि यह कोई साधारण जालसाजी का मामला नहीं है। जब पीठ ने याचिका खारिज करने की बात कही, तो याचिकाकर्ता के वकील ने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी। पीठ ने उन्हें याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी।

सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की कि हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को शिकायतकर्ता सहित अभियोजन के दो गवाहों से जिरह के बाद नये सिरे से जमानत के लिए आवेदन करने की स्वतंत्रता दी थी। पिछले वर्ष अगस्त में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, याचिकाकर्ता ने पंजाब की एक अदालत में लंबित तलाक के मामले में अनुकूल न्यायिक आदेश दिलाने के लिए शिकायतकर्ता से कथित तौर पर 30 लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि याचिकाकर्ता ने एक न्यायिक अधिकारी पर अपने व्यक्तिगत प्रभाव का इस्तेमाल करने का दावा किया था और अनुकूल आदेश दिलवाने का आश्वासन दिया था।

सीबीआई ने एक जाल बिछाया, जिस दौरान याचिकाकर्ता के इशारे पर कथित तौर पर काम कर रहे एक सह-आरोपी ने रिश्वत की मांग के आंशिक भुगतान के रूप में शिकायतकर्ता से चार लाख रुपये स्वीकार किए। याचिकाकर्ता को पिछले साल अगस्त में गिरफ्तार किया गया था और चंडीगढ़ की एक विशेष सीबीआई अदालत ने सितंबर में इस मामले में उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। उच्च न्यायालय के समक्ष, याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी थी कि उसे इस मामले में झूठा फंसाया गया है। सीबीआई के वकील ने उच्च न्यायालय में उसकी जमानत याचिका का विरोध करते हुए दलील दी थी कि आरोप गंभीर प्रकृति के हैं।

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