चारधाम यात्रा मार्ग में अव्यवस्थाओं और तीर्थस्थलों पर पशुओं के साथ हो रही कथित क्रूरता के मामलों को लेकर दायर जनहित याचिकाओं पर उत्तराखंड हाईकोर्ट ने बुधवार को एक साथ सुनवाई की। मुख्य न्यायाधीश मनोज गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने इस दौरान राज्य सरकार के सामने कई अहम सवाल खड़े करते हुए यात्रा व्यवस्था को और बेहतर बनाने के निर्देश दिए। कोर्ट ने साफ कहा कि श्रद्धालुओं की सुविधा और पशुओं के संरक्षण को ध्यान में रखते हुए जारी की गई एसओपी में जरूरी संशोधन किए जाएं। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि यात्रा मार्ग पर किसी भी श्रद्धालु को असुविधा न हो और जानवरों के साथ किसी प्रकार की क्रूरता न हो।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से यह सुझाव भी रखा गया कि यात्रा मार्ग पर पशु चिकित्सालय (वेटरनरी फैसिलिटी) स्थापित किए जाएं, ताकि घोड़े-खच्चरों समेत अन्य जानवरों को समय पर इलाज मिल सके। इस पर कोर्ट ने सरकार को इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार करने के निर्देश दिए।

सरकार ने अदालत को बताया- नई एसओपी तैयार है

राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि चारधाम यात्रा को सुचारु और सुरक्षित बनाने के लिए पहले ही नई SOP जारी की जा चुकी है, जिसमें पशुओं की देखभाल और श्रद्धालुओं की सुविधाओं से जुड़े प्रावधान शामिल हैं। हालांकि, कोर्ट ने इस पर संतोष जताने के बजाय कहा कि मौजूदा SOP का दोबारा मूल्यांकन किया जाए, ताकि जमीनी स्तर पर आने वाली समस्याओं को दूर किया जा सके।

सरकार को एसओपी सुधारने के निर्देश

खंडपीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि यात्रा के दौरान भीड़ प्रबंधन, यातायात व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाएं और पशुओं के लिए सुविधाएं सभी पहलुओं पर संतुलित और प्रभावी व्यवस्था जरूरी है। कोर्ट ने संकेत दिए कि केवल कागजों पर SOP बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसका सख्ती से पालन भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

यह जनहित याचिकाएं पशु प्रेमी गौरी मौलेखी, धर्मगुरु अजय गौतम, पर्यावरण प्रेमी नारायण शर्मा समेत अन्य लोगों द्वारा दायर की गई हैं। याचिकाओं में कहा गया है कि चारधाम और अन्य प्रमुख तीर्थस्थलों पर श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे न केवल व्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ रहा है बल्कि जानवरों और पर्यावरण पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ रहा है।

आरोप- एसओपी की सही पालन नहीं हो रहा

याचिकाकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार द्वारा जारी SOP का सही तरीके से पालन नहीं हो रहा है। ऐसे में एक निगरानी समिति (मॉनिटरिंग कमेटी) का गठन किया जाए, जो पूरे यात्रा मार्ग पर व्यवस्थाओं की निगरानी करे। साथ ही जानवरों और श्रद्धालुओं दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बेहतर चिकित्सा और आपातकालीन सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार को निर्देशों पर अमल करने के लिए समय दिया है और अब इस मामले में तीन सप्ताह बाद अगली सुनवाई होगी। कोर्ट की सख्ती के बाद यह माना जा रहा है कि आगामी चारधाम यात्रा में व्यवस्थाओं को लेकर बड़े सुधार देखने को मिल सकते हैं।

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