नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी को सरकार की ओर से नियमित फंड नहीं मिलने पर झारखंड हाईकोर्ट ने नाराजगी जतायी है। शुक्रवार को एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस डॉ रवि रंजन और जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की अदालत ने कहा कि यदि सरकार लॉ यूनिवर्सिटी नहीं चलाना चाहती तो इसे बंद कर दे।अदालत ने छह मार्च को मुख्य सचिव, वित्त और भवन निर्माण विभाग के सचिव को सशरीर हाजिर होकर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।
कोर्ट ने कहा कि जिस एक्ट के तहत यूनिवर्सिटी का गठन किया गया है, उसमें साफ है कि इसे चलाने के लिए सरकार, बार कौंसिल, बार एसोसिएशन और अन्य से आर्थिक मदद मिलेगी। ऐेसे में सरकार इसे मदद करने से इनकार नहीं कर सकती। इस मामले में सरकार की ओर से जो स्टैंड लिया जा रहा है, वह उचित नहीं है। अदालत ने कहा कि यह विश्वविद्यालय पीआईएल से बना है। यदि यही स्थिति रही तो इसी पीआईएल से यह बंद भी हो जाएगी। इसलिए सरकार को गंभीरता से सोचना होगा।
सरकार ने पैसे देने से किया है इनकार
इस मामले में सरकार की ओर से बताया गया कि लॉ यूनिवर्सिटी को झारखंड सरकार ने एक मुश्त 50 करोड़ रुपये स्थापना के समय ही दिए हैं। इसके बाद कैबिनेट ने फैसला लिया है कि सरकार यूनिवर्सिटी को अब आर्थिक मदद नहीं कर सकती। इस पर कोर्ट ने कहा कि सरकार का यह निर्णय एक्ट के खिलाफ है।
महाधिवक्ता के आग्रह को कोर्ट ने नहीं माना
सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता ने अदालत से मुख्य सचिव, वित्त और भवन निर्माण सचिव को अगले सप्ताह हाजिर होने से छूट दोने का आग्रह किया। अदालत को बताया गया कि अभी बजट सत्र चल रहा है। ऐसे में अधिकारी व्यस्त हैं और वह हाजिर होने में असमर्थ होंगे। लेकिन अदालत ने इस आग्रह को नहीं माना और अगले सप्ताह हाजिर होने का निर्देश दिया।
भवन, लाइब्रेरी और अन्य सुविधाओं की कमी
झारखंड हाईकोर्ट में बार एसोसिएशन ने जनहित याचिका दायर कर कहा है कि यूनिवर्सिटी को राज्य सरकार की ओर से सहयोग नहीं किया जा रहा है। इस कारण पुस्तकालय और अन्य भवनों का निर्माण नहीं हो पा रहा है। यहां के छात्रों को काफी परेशानी हो रही है।
Source Link
Picture Source :

