सुप्रीम कोर्ट ने जेके जूट मिल के हजारों श्रमिकों को बड़ी राहत दी। सुप्रीम कोर्ट ने ट्रेड यूनियन की ओर से दाखिल याचिका पर फैसला दिया कि ट्रेड यूनियन को श्रमिकों का बकाया धनराशि मांगने का अधिकार है। इसके साथ ही नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) इलाहाबाद और नेशनल कंपनी लॉ अपील ट्रिब्यूनल (एनसीएएलटी) नई दिल्ली के फैसले को उलट दिया। एनसीएलटी और एनसीएएलटी ने ट्रेड यूनियन की याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि यूनियन को श्रमिकों के बकाया धनराशि के लिए मुकदमा लड़ने का अधिकार नहीं है।जेके जूट मिल मजदूर मोर्चा कानपुर के महामंत्री राजू प्रसाद ने बताया कि मंगलवार 30 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय खंडपीठ के जज आरएफ नरीमन और विनीत सरन ने आदेश दिया है। राजू प्रसाद ने बताया कि मिल के करीब तीन हजार मजदूरों का 140 करोड़ रुपये मिल प्रबंधन पर बकाया है। इसके लिए जेके जूट मिल मजदूर मोर्चा की ओर से 2016 में एनसीएलटी इलाहाबाद में याचिका दाखिल की गई थी। जिसे एनसीएलटी ने खारिज कर दिया था।

इसके बाद मोर्चा ने एनसीएलटी इलाहाबाद के फैसले के खिलाफ एनसीएएलटी नई दिल्ली में याचिका दाखिल की थी। इस पर कोर्ट ने एनसीएलटी इलाहाबाद के फैसले को ही सही मानते हुए फिर मोर्चा की याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद 2017 में सुप्रीम कोर्ट में मामला ले गए। कई साल चली सुनवाई के बाद 30 अप्रैल को कोर्ट ने मोर्चा के पक्ष में निर्णय दिया। निर्णय में यह भी कहा कि मोर्चा एनसीएएलटी नई दिल्ली में फिर से मुकदमा दाखिल करे। इस फैसले से मजदूरों में खुशी की लहर है।

 

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