गंभीर अपराध के आरोपियों को चुनाव में टिकट न दिए जाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया है. याचिकाकर्ता की मांग थी कि राजनीतिक दल को ऐसे लोगों को टिकट देने से रोका जाए, जिनके ऊपर चुनाव से साल भर पहले से गंभीर अपराध में आरोप तय हैं. याचिका भाजपा नेता अश्विनी कुमार उपाध्याय की ओर से दायर की गई थी। चीफ जस्टिस रंजन गोगई की अध्यक्षता वाली दो सदस्यीय पीठ ने सोमवार को इस याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है। हालांकि पीठ ने याचिकाकर्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय से कहा कि वह चाहे तो चुनाव आयोग के पास जा सकते हैं। याचिका में कहा गया था कि चुनाव आयोग को निर्देश दिया जाए वह राजनीतिक दलों को गंभीर अपराधों में शामिल होने वाले को टिकट देने पर पाबंदी लगाए।यानी वैसे अपराध जिसमें पांच या उससे अधिक वर्ष से अधिक सजा का प्रावधान हो अगर उन मामलों में किसी व्यक्ति पर अदालत आरोप तय कर दे तो वैसे व्यक्ति को राजनीतिक दल चुनाव लडने के लिए टिकट न दे। याचिका में ये भी कहा गया था कि उपरोक्त आदेश देने से न तो किसी संवैधानिक प्रावधान का उल्लंघन होगा और ना ही चुनाव आयोग को इसके लिए अलग से कोई जांच पड़ताल करने की जरूरत पड़ेगी क्योंकि नियम के मुताबिक उम्मीदवार नामांकन दाखिल करते वक्त लंबित मुकदमों का ब्योरा और उनकी स्थिति बताता है साथ ही उसमें धाराओं का भी जिक्र होता है जिनमें वह आरोपित होता है.

चुनाव चिन्ह आदेश में संशोधन कर उपरोक्त शर्त जोड़ने से राजनैतिक दलों पर राज्य और राष्ट्रीय स्तर की पार्टी की मान्यता के लिए अपराधी को टिकट न देने की सिर्फ एक अतिरिक्त शर्त शामिल हो जाएगी. इसका किसी कानून से टकराव भी नहीं होगा क्योंकि फिलहाल इस बारे में कोई कानून नहीं है.

 

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