धन शोधन निरोधक अधिनियम (पीएमएलए) के तहत बने स्पेशल कोर्ट ने शनिवार को मुंबई में शराब कारोबारी विजय माल्या को भगोड़ा वित्तीय अपराधी घोषित कर दिया. विजय माल्या को आर्थिक भगोड़ा घोषित किए जाने के बाद अब सरकार को उसकी संपत्तियों को जब्त करने का अधिकार मिल सकेगा। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने इसके लिए स्पेशल कोर्ट में अर्जी लगाई थी.यही नहीं पीएमएलए कोर्ट ने विजय माल्या की अपील करने के लिए कुछ समय दिए जाने की मांग को भी खारिज कर दिया। विजय माल्या की प्रॉपर्टी जब्त करने को लेकर पीएमएलए कोर्ट में 5 फरवरी को सुनवाई होगी। बता दें कि विजय माल्या को लंदन की वेस्टमिंस्टर कोर्ट ने ब्रिटेन सरकार को भारत प्रत्यर्पित करने का आदेश दिया है।

आर्थिक भगोड़ा कौन? नए अधिनियम के तहत जिसे आर्थिक भगोड़ा घोषित किया जाता है, उसकी सम्पत्ति तुरंत प्रभाव से जब्त कर ली जाती है। आर्थिक भगोड़ा वह होता है जिसके विरुद्ध सूचीबद्द अपराधों के लिए गिर‌फ्तारी का वारंट जारी किया गया होता है। साथ ही ऐसा व्यक्ति भारत को छोड़ चुका है, ताकि यहां हो रही आपराधिक कार्रवाई से बच सके या वह विदेश में हो और इस कार्रवाई से बचने के लिए भारत आने से मना कर रहा है। इस अध्यादेश के तहत 100 करोड़ रुपये से ज्यादा के धोखाधड़ी, चेक अनादर और लोन डिफाल्ट के मामले आते हैं।

भारी कर्ज में दबी एयरलाइंस किंगफिशर के मालिक विजय माल्या पर आरोप है कि वह कई बैकों से करीब 9,990 करोड़ रुपये का लोन लेकर फरार हैं। फिलहाल माल्या लंदन में हैं और उसे भारत प्रत्यर्पित करने का आदेश दिया जा चुका है। माल्या पर वह केस भारत सरकार की तरफ से सीबीआई और ईडी ने ही किया था।

इससे पहले ईडी के वकील और वरिष्ठ अधिवक्ता हितेन वेनगांवकर ने बताया कि एफईओए नया कानून है और काफी सख्त भी. इस कानून के दायरे में जांच एजेंसियां विजय माल्या की सभी प्रॉपर्टी जब्त कर सकती हैं. ये प्रॉपर्टी चाहे अपराध क्षेत्र के अंदर हों या बाहर, उससे फर्क नहीं पड़ता. आर्थिक भगोड़ा घोषित होने पर माल्या को ब्रिटेन से प्रत्यर्पित करने में भी मदद मिलेगी. स्पेशल कोर्ट माल्या की सभी अर्जियां पहले ही खारिज कर चुका है.

 

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