December 27, 2018:

सरकार कोअल्पसंख्यकों के सशक्तीकरण के लिए उनकी शिक्षा एवं रोजगार पर ध्यान देना चाहिए।

बीजू जनता दल (बीजद) के रवींद्र कुमार जेना ने आरोप लगाया कि यह विधेयक एक धर्म विशेष के लोगों को निशाना बनाने के लिए लाया गया है।

उन्होंने विधेयक को संवैधानिक प्रावधानों के खिलाफ करार देते हुए कहा कि प्रस्तावित कानून के दुरुपयोग को रोकने के लिए कोई ठोस उपाय नहीं किए गए हैं।

तेलुगू देशम पार्टी के जयदेव गल्ला ने विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि सरकार राजनीतिक लाभ की मंशा से तीन तलाक संबंधी अध्यादेश लाई थी, लेकिन पांच राज्यों के हालिया विधानसभा चुनावों में उसके कोई लाभ नहीं मिला।

उन्होंने कहा कि सरकार को तीन तलाक पीड़ित मुस्लिम महिलाओं की चिंता से पहले भीड़ द्वारा हत्या की घटनाओं से पीड़ित मुस्लिम पुरुषों एवं महिलाओं का ध्यान नहीं देना चाहिए।

गल्ला ने कहा कि इस विधेयक को संसदीय समिति या प्रवर समिति के पास भेजा जाना चाहिए।

विधेयक का समर्थन करते हुए शिवसेना के अरविंद सावंत ने कहा कि इसके कानून बनने से मुस्लिम महिलाएं सबसे ज्यादा खुश होंगी।

उन्होंने कहा कि सरकार को अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण, समान नागरिक संहिता लागू करने और जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाने के लिए पहल करनी चाहिए।

तेलंगाना राष्ट्र समिति के जितेंद्र रेड्डी ने विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि इस विधेयक को लाने की मंशा और समय को लेकर बड़ा सवाल है।

उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यकों के सशक्तीकरण के लिए जरूरी है कि सरकार उनकी शिक्षा एवं रोजगार पर ध्यान देना चाहिए।

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