दिल्ली के गोकलपुरी थाना क्षेत्र में एक घर से एमसीडी की सील तोड़ने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष एवं सांसद मनोज तिवारी को कोर्ट की अवमानना का दोषी नहीं माना.बीजेपी नेता ने दिल्ली के एक परिसर की कथित तौर पर सीलिंग तोड़ कर न्यायालय की अवमानना की थी. इस परिसंपत्ति को पूर्वी दिल्ली नगर निगम (ईडीएमसी) ने सील किया था.जस्टिस मदन बी लोकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि तिवारी के रवैये से हम दुखी हैं. मनोज तिवारी ने कानून को अपने हाथ में लिया. सुप्रीम कोर्ट ने सलाह दी है कि अगर पार्टी (BJP) चाहे तो मनोज तिवारी के खिलाफ एक्शन ले सकती है. फैसले के वक्त मनोज तिवारी कोर्ट में मौजूद रहे.

हालांकि, मनोज तिवारी ने अदालत से अधिकार प्राप्त निगरानी समिति पर आरोप लगाया था कि वह सीलिंग के मुद्दे पर दिल्ली के लोगों को आतंकित कर रही है. मनोज तिवारी ने कहा कि उन्होंने कानून नहीं तोड़ा, बल्कि कानून व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश की है.

आपको बता दें कि 16 सितंबर को दिल्ली बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी ने गोकलपुरी में एक मकान में पूर्वी दिल्ली नगर निगम द्वारा लगाई गई सील तोड़ दी थी. मनोज तिवारी अपने लोकसभा क्षेत्र में सड़क के उद्घाटन कार्यक्रम में पहुंचे थे. तभी लोगों ने उन्हें घेरकर सीलिंग से निजात दिलाने की मांग की थी. लोगों ने उन्हें एक मकान दिखाया जिस पर पूर्वी निगम की तरफ से सील लगाई गई थी. बीजेपी नेता ने तुरंत ही एक ईंट उठाकर मकान की सील तोड़ दी थी. जिस मकान पर सील लगी थी, वो रिहायशी मकान था. कुछ समय पहले निगम की तरफ से उस मकान को अवैध निर्माण के चलते सील कर दिया गया था. तिवारी के खिलाफ गोकलपुरी थाने में एक घर से एमसीडी की सील तोड़ने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई थी. मनोज तिवारी के खिलाफ एमसीडी के अधिकारियों के द्वारा शिकायत करने के बाद आईपीसी की धारा 188, 461 और 465 डीएमसी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था.

 

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