रामपुर रजा लाइब्रेरी अधिनियम, 1975
(1975 का अधिनियम संख्यांक 22)
[9 मई, 1975]
रामपुर रजा लाइब्रेरी को राष्ट्रीय महत्व की संस्था घोषित करने
के लिए तथा उसके प्रशासन और उससे संबंधित या उसके
आनुषंगिक विषयों का उपबन्ध
करने के लिए
अधिनियम
भारत गणराज्य के छब्बीसवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो: -
अध्याय 1
प्रारम्भिक
1. संक्षिप्त नाम और प्रारम्भ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम रामपुर रजा लाइब्रेरी अधिनियम, 1975 है ।
(2) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा जिसे केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे ।
2. रामपुर रजा लाइब्रेरी का राष्ट्रीय महत्व की संस्था घोषित किया जाना-इसके द्वारा यह घोषित किया जाता है कि रामपुर में स्थित रामपुर रजा लाइब्रेरी राष्ट्रीय महत्व की संस्था है ।
3. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, -
(क) बोर्ड" से धारा 4 के अधीन स्थापित बोर्ड अभिप्रेत है;
(ख) अध्यक्ष" से बोर्ड का अध्यक्ष अभिप्रेत है;
(ग) न्यास विलेख" से रामपुर के स्वर्गीय नवाब सर सैय्यद रजा अली खान बहादुर द्वारा 6 अगस्त, 1951 को निष्पादित और रामपुर के कार्यकारी मुख्य उप-रजिस्ट्रार के कार्यालय में सं० 103, पुस्तक ख्र्ज्, जिल्द सं० 8 में, पृष्ठ 74 से लेकर 93 तक में रजिस्ट्रीकृत न्यास विलेख अभिप्रेत है;
(घ) निधि" से धारा 19 में निर्दिष्ट निधि अभिप्रेत है;
(ङ) लाइब्रेरी" से रामपुर रजा लाइब्रेरी अभिप्रेत है जो इस अधिनियम द्वारा राष्ट्रीय महत्व की संस्था घोषित की गई है;
(च) सदस्य" से बोर्ड का सदस्य अभिप्रेत है और इसके अन्तर्गत अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष, यदि कोई हो, भी हैं ;
(छ) विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है;
(ज) रामपुर" से उत्तर प्रदेश राज्य में रामपुर जिले का मुख्यालय अभिप्रेत है;
(झ) राज्य सरकार" से उत्तर प्रदेश राज्य की सरकार अभिप्रेत है ।
अध्याय 2
रामपुर रजा लाइब्रेरी बोर्ड
4. बोर्ड की स्थापना और उसका निगमन-(1) उस तारीख से, जिसे केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए एक बोर्ड स्थापित किया जाएगा, जो रामपुर रजा लाइब्रेरी बोर्ड" कहलाएगा ।
(2) बोर्ड पूर्वोक्त नाम का शाश्वत उत्तराधिकार और सामान्य मुद्रा वाला एक निगमित निकाय होगा, जिसे इस अधिनियम के उपबन्धों के अधीन रहते हुए, सम्पत्ति के अर्जन, धारण और व्ययन करने और संविदा करने की शक्ति होगी और उक्त नाम से वह वाद लाएगा और उस पर वाद लाया जाएगा ।
5. बोर्ड की स्थापना-(1) बोर्ड में निम्नलिखित व्यक्ति होंगे, अर्थात्: -
(क) उत्तर प्रदेश राज्य के राज्यपाल, पदेन, जो अध्यक्ष होंगे,
(ख) श्री सैय्यद मुरतजा अली खान, आजीवन, जो उपाध्यक्ष होंगे,
(ग) कर्नल बशीर हुसैन जैदी, आजीवन,
(घ) महालेखापाल, उत्तर प्रदेश, पदेन,
(ङ) रामपुर के स्वर्गीय नवाब सर सैय्यद रजा अली खान बहादुर का कोई वंशज, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा नामनिर्देशित किया जाएगा,
(च) केन्द्रीय सरकार द्वारा नामनिर्देशित किए जाने वाले चार व्यक्ति जिनमें से-
(i) दो व्यक्ति ऐसे होंगे जिनको केन्द्रीय सरकार की राय में लाइब्रेरी में संकलनों के बारे में विशिष्ट ज्ञान है, या जो प्रख्यात इतिहासकार या अरबी, फारसी अथवा उर्दू के विद्वान हैं,
(ii) एक व्यक्ति लाइब्रेरी से संबंधित विषयों से व्यौहार करने वाले विभाग का ऐसा अधिकारी होगा जो भारत सरकार के उप-सचिव से नीचे की पंक्ति का न हो,
(iii) एक ऐसा व्यक्ति होगा जिसे केन्द्रीय सरकार की राय में सार्वजनिक पुस्तकालयों के प्रबंध का विशिष्ट ज्ञान और अनुभव है,
(छ) रामपुर का कलक्टर और जिला मजिस्ट्रेट, पदेन,
(ज) तीन अन्य व्यक्ति जिनमें से कम से कम दो ख्यातिप्राप्त विद्वान होंगे और जो राज्य सरकार द्वारा नामनिर्देशित किए जाएंगे,
(झ) लाइब्रेरी का निदेशक, पदेन, जो सदस्य-सचिव होगा ।
(2) इस धारा के अधीन किया गया प्रत्येक नामनिर्देशन केन्द्रीय सरकार द्वारा, राजपत्र में अधिसूचित किया जाएगा और इस प्रकार अधिसूचित प्रत्येक नामनिर्देशन अधिसूचना की तारीख से प्रभावी होगा ।
6. पदावधि और कुछ दशाओं में नया नामनिर्देशन-(1) नामनिर्देशित सदस्यों की पदावधि उतनी होगी जितनी विहित की जाए ।
(2) कोई भी नामनिर्देशित सदस्य, उसे नामनिर्देशित करने वाली सरकार को लिखित सूचना देकर अपना पद त्याग सकेगा और केन्द्रीय सरकार द्वारा राजपत्र में ऐसे पद त्याग के अधिसूचित किए जाने पर यह समझा जाएगा कि उसने ऐसी अधिसूचना के प्रकाशन की तारीख को अपना पद रिक्त कर दिया है ।
(3) यदि किसी नामनिर्देशित सदस्य का पद उसकी पदावधि की समाप्ति से पूर्व रिक्त हो जाता है तो उसके फलस्वरूप होने वाली रिक्ति उस सरकार द्वारा, जिसने ऐसे सदस्य को नामनिर्देशित किया था, नए नामनिर्देशन से भरी जा सकेगी और इस प्रकार नामनिर्देशित सदस्य उस सदस्य की, जिसके स्थान पर उसका नामनिर्देशन हुआ हो, पदावधि के शेष भाग के लिए पद धारण करेगा ।
(4) पदावरोही सदस्य पुनः नामनिर्देशन का पात्र होगा ।
(5) यदि कोई नामनिर्देशित सदस्य, अंग-शैथिल्य के कारण या अन्यथा अपना कर्तव्य करने में अस्थायी रूप से असमर्थ हो जाता है या छुट्टी के कारण अथवा अन्यथा ऐसी परिस्थितियों में, जिनसे उसका पद रिक्त नहीं होता, अनुपस्थित है, तो, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार उसकी अनुपस्थिति के दौरान उसके स्थान पर कार्य करने के लिए किसी अन्य व्यक्ति को नामनिर्देशित कर सकेगी ।
7. रिक्तियों आदि के कारण कार्यों का अविधिमान्य न होना-बोर्ड का कोई कार्य केवल इस कारण अविधिमान्य नहीं होगा कि-
(क) बोर्ड में कोई रिक्ति या उसके गठन में कोई त्रुटि है, अथवा
(ख) उसके सदस्य के रूप में कार्य करने वाले किसी व्यक्ति के नामनिर्देशन में कोई त्रुटि हुई है, अथवा
(ग) उसकी प्रक्रिया में कोई अनियमितता हुई है जिससे कि मामले में गुणागुण पर कोई प्रभाव न पड़ता हो ।
8. व्यक्तियों को नामनिर्देशित करने वाली सरकार का कर्तव्य-(1) किसी व्यक्ति को बोर्ड का सदस्य नामनिर्देशित करने से पूर्व, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार अपना समाधान कर लेगी कि वह व्यक्ति कोई ऐसा वित्तीय या अन्य हित नहीं रखेगा जिसका उसके द्वारा उन कृत्यों के प्रयोग या पालन पर, जो सदस्य के रूप में उसके हैं, कोई प्रतिकूल प्रभाव पड़ना संभाव्य हो, और यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार अपने द्वारा नामनिर्देशित प्रत्येक सदस्य के बारे में समय-समय पर इस बात का भी अपना समाधान कर लेगी कि वह सदस्य कोई ऐसा हित नहीं रखता है ; और कोई व्यक्ति, जो सदस्य है या जिसे, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार नामनिर्देशित करने की प्रस्थापना करती है और जो सदस्य बनने के लिए सहमत हो गया है, केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार द्वारा किसी भी समय ऐसा करने के लिए निवदेन किए जाने पर उसे लाइब्रेरी में अपने वित्तीय या अन्य हितों के बारे में ऐसी जानकारी देगा जैसी वह सरकार इस उपधारा के अधीन अपने कृत्यों का अपने द्वारा पालन किए जाने के लिए आवश्यक समझे ।
(2) कोई भी नामनिर्देशित सदस्य, जो बोर्ड द्वारा या उसकी ओर से की गई किसी संविदा या ठहराव से या किए जाने के लिए प्रस्थापित किसी संविदा या ठहराव से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किसी भी प्रकार से संबंधित है या उसमें हितबद्ध है, सुसंगत परिस्थितियों की जानकारी अपने को हो जाने के पश्चात् यथाशीघ्र अपने संबंध या हित का स्वरूप बोर्ड के अधिवेशन में प्रकट करेगा और ऐसा प्रकटन बोर्ड के कार्यवृत्त में अभिलिखित किया जाएगा तथा वह सदस्य ऐसे प्रकटन के पश्चात् ऐसी संविदा या ठहराव संबंधी किसी चर्चा में भाग नहीं लेगा या उस पर कोई मत नहीं देगा ; और यदि वह मत देगा तो उसका मत शून्य होगा ।
9. बोर्ड के अधिवेशन-(1) बोर्ड के अधिवेशन ऐसे समय और स्थान पर होंगे और ऐसे अधिवेशनों में कामकाज करने के संबंध में (जिसके अन्तर्गत अधिवेशनों में गणपूर्ति भी है), उपधारा (2), (3) और (4) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, प्रक्रिया के ऐसे नियमों का पालन किया जाएगा जो इस अधिनियम के अधीन बनाए गए विनियमों द्वारा उपबंधित किए जाएं ।
(2) बोर्ड के अधिवेशन में अध्यक्ष, या उसकी अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष, यदि कोई हो, अथवा दोनों की अनुपस्थिति में उपस्थित सदस्यों द्वारा अपने में से चुना गया कोई सदस्य बोर्ड के अधिवेशन का सभापतित्व करेगा ।
(3) यदि सरकार का कोई अधिकारी, जो अपने पद के आधार पर बोर्ड का सदस्य नामनिर्देशित किया गया हो, बोर्ड के किसी अधिवेशन में उपस्थित होने में असमर्थ हो तो वह, अध्यक्ष के पूर्व अनुमोदन से, किसी व्यक्ति को उस अधिवेशन में उपस्थित होने के लिए लिखकर प्राधिकृत कर सकेगा, किन्तु ऐसे प्राधिकृत व्यक्ति को उस अधिवेशन में मत देने का हक नहीं होगा ।
(4) बोर्ड के अधिवेशन में सभी प्रश्नों का विनिश्चय उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के बहुमत से होगा और मत बराबर होने की दशा में अध्यक्ष का या, उसकी अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष का, यदि कोई हो, अथवा दोनों की अनुपस्थिति में, सभापतित्व करने वाले सदस्य को, दूसरा या निर्णायक मत देने का अधिकार होगा ।
10. विशिष्ट प्रयोजनों के लिए व्यक्तियों का अस्थायी रूप से बोर्ड से सहयुक्त करना-(1) बोर्ड ऐसी रीति से और ऐसे प्रयोजनों के लिए जो इस अधिनियम के अधीन बनाए गए विनियमों द्वारा उपबंधित किए जाएं, किसी ऐसे व्यक्ति को अपने से सहयुक्त कर सकेगा जिसकी सहायता या सलाह वह इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों में से किसी के अनुपालन के बारे में लेना चाहे ।
(2) बोर्ड द्वारा किसी प्रयोजन के लिए उपधारा (1) के अधीन अपने से सहयुक्त किसी व्यक्ति को उन प्रयोजनों से संबंधित बोर्ड की चर्चाओं में भाग लेने का अधिकार होगा किन्तु इस धारा के आधार पर वह मत देने का हकदार नहीं होगा ।
11. बोर्ड के आदेशों और अन्य लिखतों का अधिप्रमाणन-(1) बोर्ड के सभी आदेश और विनिश्चय अध्यक्ष के या उपाध्यक्ष के, यदि कोई हो, या बोर्ड द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किसी अन्य सदस्य के हस्ताक्षर से अधिप्रमाणित किए जाएंगे और बोर्ड द्वारा जारी की गई अन्य सभी लिखतें बोर्ड के किसी अधिकारी के जो इस निमित्त उसी प्रकार प्राधिकृत हो, हस्ताक्षर से अधिप्रमाणित की जाएंगी ।
(2) उपधारा (1) के उपबंधों के अनुसार अधिप्रमाणित आदेश, विनिश्चय या लिखतें उनमें अभिलिखित बातों का साक्ष्य होंगी और भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 (1872 का 1) में अथवा तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी साक्ष्य में ग्राह्य होंगी ।
(3) बोर्ड का कोई सदस्य, अधिकारी या अन्य कर्मचारी अथवा लाइब्रेरी में हितबद्ध कोई अन्य व्यक्ति इस बात का हकदार होगा कि लाइब्रेरी से उस निमित्त उसके द्वारा निवेदन किए जाने पर उसे उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट रीति से अधिप्रमाणित किसी आदेश, विनिश्चय या लिखत की प्रति ऐसी फीस देने पर, जो विहित की जाए, सात दिन के अन्दर दे दी जाए ।
12. बोर्ड के कर्मचारिवृन्द-(1) उपधारा (2) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, बोर्ड इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों का दक्षतापूर्ण पालन करने में अपने को समर्थ बनाने के प्रयोजन से इतने अधिकारी और अन्य कर्मचारी नियुक्त कर सकेगा जितने वह ठीक समझे ।
(2) ऐसे अधिकारियों और कर्मचारियों की भर्ती और उनकी सेवा की शर्तें ऐसी होंगी जो इस अधिनियम के अधीन बनाए गए विनियमों द्वारा उपबंधित की जाएं ।
13. विद्यमान कर्मचारियों की सेवाओं का बोर्ड को अंतरण-इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन रहते हुए, बोर्ड की स्थापना की तारीख से ठीक पूर्व लाइब्रेरी में नियोजित प्रत्येक व्यक्ति ऐसी तारीख से ही ऐसे पदनाम से, जैसा बोर्ड अवधारित करे, बोर्ड का कर्मचारी हो जाएगा और उसमें अपना पद या सेवा उसी अवधि तक, उसी पारिश्रमिक तथा सेवा के उन्हीं निबंधनों और शर्तों पर धारण करेगा जिन पर वह उन्हें ऐसी तारीख को धारण करता यदि बोर्ड स्थापित न किया गया होता तथा तब तक वैसा करता रहेगा जब तक बोर्ड में उसका नियोजन सम्यक् रूप से समाप्त नहीं कर दिया जाता या जब तक ऐसी अवधि, पारिश्रमिक तथा निबंधन और शर्तें बोर्ड द्वारा सम्यक् रूप से परिवर्तित नहीं कर दी जाती :
परन्तु ऐसे किसी व्यक्ति की सेवा की अवधि, तथा पारिश्रमिक तथा निबंधन और शर्तें, केन्द्रीय सरकार के पूर्वानुमोदन के बिना इस प्रकार परिवर्तित न की जाएंगी कि वे उसके लिए अलाभकारी हों ।
14. लाइब्रेरी का स्थान-लाइब्रेरी और उसके संग्रह रामपुर में आस्थित रहेंगे ।
अध्याय 3
बोर्ड की सम्पत्ति, दायित्व और कृत्य
15. बोर्ड की सम्पत्ति और दायित्व-(1) बोर्ड की स्थापना पर-
(i) सब सम्पत्ति, निधियां और शोध्य, जो न्यास-विलेख द्वारा गठित लाइब्रेरी के न्यासियों में, उनकी उस हैसियत में, निहित हैं या उनके द्वारा वसूल की जाने योग्य हैं, बोर्ड में निहित और उसके द्वारा वसूल किए जाने योग्य होंगे; और
(ii) लाइब्रेरी के संबंध में सभी दायित्व, जो उक्त न्यासियों के विरुद्ध प्रवर्तनीय हों, केवल बोर्ड के विरुद्ध प्रवर्तनीय हो जाएंगे ।
(2) सभी सम्पत्ति, जो बोर्ड की स्थापना के पश्चात् लाइब्रेरी को दी जाए, वसीयत की जाए या अन्यथा उसे अंतरित की जाए या बोर्ड द्वारा अर्जित की जाए, बोर्ड में निहित होगी ।
16. बोर्ड के कर्तव्य-(1) न्यास विलेख के उपबन्धों के अधीन रहते हुए, बोर्ड का यह साधारण कर्तव्य होगा कि वह लाइब्रेरी का प्रबन्ध करे तथा आधुनिक वैज्ञानिक ढंग पर लाइब्रेरी के विकास के कार्यक्रमों की (जिनके अन्तर्गत दुष्प्राप्य हस्तलेखों के परिरक्षण और उनकी फोटो-प्रतियों के लिए पर्याप्त सुविधाओं की व्यवस्था भी है) योजना बनाए, उन्हें संप्रवर्तित, संगठित और क्रियान्वित करे तथा अन्य ऐसे कृत्यों का पालन करे जिन्हें केन्द्रीय सरकार समय-समय पर बोर्ड को सौंपे ।
(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी उपबन्धों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, बोर्ड निम्नलिखित के लिए ऐसे कदम उठा सकेगा जो वह ठीक समझे-
(क) पुस्तकालयों से सम्बद्ध विषयों में शिक्षण और अनुसंधान के लिए तथा उन विषयों में विद्या के अभिवर्धन और ज्ञान के प्रसार के लिए उपबन्ध करना;
(ख) लाइब्रेरी में संग्रहों का सरंक्षण, अभिवर्धन और उनमें सुधार करना;
(ग) अध्ययन और अनुसंधान संप्रवर्तित करना और इस प्रयोजन के लिए विद्वानों को सुविधाएं प्रदान करना;
(घ) ऐसी सब अन्य बातें करना जो इस अधिनियम के अधीन उसके कृत्यों के निर्वहन के लिए आवश्यक हों ।
17. बोर्ड की शक्तियां-(1) ऐसी शर्तों और निर्बन्धनों के अधीन रहते हुए, जिन्हें अधिरोपित करना केन्द्रीय सरकार ठीक समझे, बोर्ड उन सब शक्तियों का प्रयोग कर सकेगा जो इस अधिनियम के अधीन उसके कृत्यों और कर्तव्यों के किए जाने के प्रयोजन के लिए आवश्यक या समीचीन हों ।
(2) ऐसे विनियमों के अधीन रहते हुए, जो बोर्ड द्वारा इस निमित्त बनाए जाएं, बोर्ड ऐसे हस्तलेख, पुस्तकें, वस्तुएं या चीजें, जो बोर्ड की राय में लाइब्रेरी में परिरक्षित किए जाने के योग्य हों, समय-समय पर क्रय कर सकेगा या अन्यथा अर्जित कर सकेगा ।
अध्याय 4
वित्त, लेखा, लेखापरीक्षा और रिपोर्टें
18. केन्द्रीय सरकार द्वारा बोर्ड को अनुदान-बोर्ड को इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों का दक्षतपूर्वक निर्वहन करने में समर्थ बनाने के प्रयोजन के लिए केन्द्रीय सरकार, संसद् द्वारा इस निमित्त विधि द्वारा किए गए सम्यक् विनियोग के पश्चात्, प्रत्येक वित्तीय वर्ष में बोर्ड को ऐसी धनराशियां अनुदान या उधार के रूप में या अन्यथा दे सकेगी जिन्हें वह सरकार आवश्यक समझे ।
19. बोर्ड की निधि-(1) बोर्ड एक निधि बनाए रखेगा जिसमें निम्नलिखित जमा किए जाएंगे-
(क) केन्द्रीय सरकार द्वारा उसे दिए गए सब धन;
(ख) ऐसी धनराशियां जो राज्य सरकार विनिर्दिष्ट प्रयोजनों के लिए प्रति वर्ष दे;
(ग) इस अधिनियम के अधीन उसके द्वारा उद्गृहीत सब फीसें और अन्य प्रभार;
(घ) अनुदान, दान, संदान, उपकृति, वसीयत, अभिदान, अंशदान या अंतरण के रूप में बोर्ड द्वारा प्राप्त सब धन;
(ङ) बोर्ड द्वारा किसी अन्य रीति से या किसी अन्य स्रोत से प्राप्त सब अन्य धन ।
(2) बोर्ड इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों के पालन के लिए इतनी राशियां व्यय कर सकेगा जितनी वह ठीक समझे और ऐसी राशियां निधि में से संदेय व्यय समझी जाएंगी ।
(3) इस अधिनियम के अधीन बनाए गए विनियमों द्वारा जितनी राशि विनिर्दिष्ट की जाए उससे अनधिक धनराशि किसी राष्ट्रीयकृत बैंक या किसी अन्य अनुसूचित बैंक या केन्द्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त अनुमोदित किसी अन्य बैंक में चालू खाते में रखी जाएगी, किन्तु उस राशि से अधिक कोई भी धनराशि भारतीय रिजर्व बैंक में या भारतीय रिजर्व बैंक के अभिकर्ताओं के पास निक्षिप्त की जाएगी या ऐसी रीति से विनिहित की जाएगी जो केन्द्रीय सरकार द्वारा साधाणतया या विशेषतया अनुमोदित की जाए ।
स्पष्टीकरण-इस उपधारा में-
(क) राष्ट्रीयकृत बैंक" से बैंककारी कम्पनी (उपक्रमों का अर्जन और अंतरण) अधिनियम, 1970 (1970 का 5) में यथापरिभाषित कोई तत्स्थानी नया बैंक अभिप्रेत है;
(ख) अनुसूचित बैंक" से भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का 2) की द्वितीय सूची में तत्समय सम्मिलित कोई बैंक अभिप्रेत है ।
20. बजट-(1) बोर्ड प्रत्येक वित्तीय वर्ष में उस तारीख तक, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट की जाए, उसे आगामी वित्तीय वर्ष का बजट उस सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट प्ररूप में अनुमोदन के लिए प्रस्तुत करेगा जिसमें प्राक्कलित आय और व्यय तथा वे राशियां दर्शित होंगी जो उस वित्तीय वर्ष के दौरान केन्द्रीय सरकार से अपेक्षित होंगी ।
(2) किसी वित्तीय वर्ष का बजट उस रूप में, जिसमें कि वह किसी वित्तीय वर्ष के लिए केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित किया जाए, उस वित्तीय वर्ष के लिए लाइब्रेरी का बजट होगा ।
(3) यदि किसी वित्तीय वर्ष के लिए लाइब्रेरी को केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुदत्त कोई राशि उस वित्तीय वर्ष में पूर्णतः या भागतः खर्च होने से बची रहे तो ऐसी बची हुई राशि आगामी वित्तीय वर्ष के लिए अग्रनीत की जा सकेगी और उस राशि के अवधारण में, जो उस वर्ष के लिए केन्द्रीय सरकार द्वारा दी जानी हो, हिसाब में ली जा सकेगी ।
(4) उपधारा (5) के उपबन्धों के अधीन रहते हुए, बोर्ड द्वारा या उसकी ओर से कोई भी राशि तब तक व्यय नहीं की जाएगी जब तक वह व्यय केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित बजट में की गई व्यवस्था के अन्तर्गत न हो ।
(5) ऐसी शर्तों और निबंन्धनों के अधीन रहते हुए, जिन्हें केन्द्रीय सरकार अधिरोपित करना ठीक समझे, बोर्ड व्यय के एक शीर्ष से दूसरे शीर्ष को अथवा किसी एक प्रयोजन के लिए की गई व्यवस्था के स्थान पर किसी दूसरे प्रयोजन के लिए पुनर्विनियोग मंजूर कर सकेगा ।
21. लेखा और लेखापरीक्षा-(1) बोर्ड उचित लेखा और अन्य सुसंगत अभिलेख रखेगा तथा एक वार्षिक लेखा विवरण, जिसके अन्तर्गत तुलन-पत्र भी है, ऐसे प्ररूप में जैसा विनिर्दिष्ट किया जाए और ऐसे साधारण निदेशों के अनुसार, जो भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक से परामर्श करके केन्द्रीय सरकार द्वारा दिए जाएं, तैयार करेगा ।
(2) बोर्ड के लेखाओं की परीक्षा प्रति वर्ष भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक द्वारा या उसके द्वारा उस निमित्त प्राधिकृत किसी अधिकारी द्वारा की जाएगी, और ऐसी लेखापरीक्षा के संबंध में उसके द्वारा किया गया कोई व्यय बोर्ड द्वारा भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक को संदेय होगा ।
(3) भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक को तथा बोर्ड के लेखाओं की परीक्षा के संबंध में उसके द्वारा प्राधिकृत किसी व्यक्ति को ऐसी लेखापरीक्षा के संबंध में वही अधिकार, विशेषाधिकार और प्राधिकार प्राप्त होंगे जो भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक को सरकारी लेखाओं की परीक्षा के संबंध में होते हैं और विशिष्टतया, उसे बहियों, लेखाओं, सम्बद्ध वाउचरों और अन्य दस्तावेजों तथा कागजपत्रों को पेश किए जाने की मांग करने और बोर्ड के कार्यालय तथा लाइब्रेरी का निरीक्षण करने का अधिकार होगा ।
(4) भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक द्वारा या इस निमित्त उसके द्वारा प्राधिकृत किसी अन्य व्यक्ति द्वारा यथाप्रमाणित बोर्ड के लेखे, उसके संबंध में लेखापरीक्षा रिपोर्ट के सहित, केन्द्रीय सरकार को प्रति वर्ष भेजे जाएंगे और वह सरकार उनकी प्राप्ति के पश्चात् यथाशीघ्र उन्हें संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाएगी ।
22. विवरणियां और रिपोर्टें-(1) बोर्ड केन्द्रीय सरकार को ऐसे समय पर और ऐसे प्ररूप में और ऐसी रीति से, जो केन्द्रीय सरकार निदिष्ट करे, ऐसी विवरिणयां, विवरण और विशिष्टियां देगा जिनकी केन्द्रीय सरकार समय-समय पर अपेक्षा करे ।
(2) उपधारा (1) के उपबन्धों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, बोर्ड प्रत्येक वित्तीय वर्ष के प्रारम्भ के पश्चात् यथासंभव शीघ्र ऐसे समय के भीतर, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट किया जाए, केन्द्रीय सरकार को एक रिपोर्ट देगा जिसमें पूर्ववर्ती वित्तीय वर्ष के दौरान बोर्ड के क्रियाकलापों का सही और पूरा वृत्तान्त और उन क्रियाकलापों का भी वृत्तान्त होगा जिनकी चालू वित्तीय वर्ष के दौरान किए जाने की संभावना हो ।
अध्याय 5
प्रकीर्ण
23. बोर्ड को निदेश देने की केन्द्रीय सरकार की शक्ति-बोर्ड इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों के निर्वहन में, नीति के प्रश्नों पर ऐसे निदेशों से आबद्ध होगा जो केन्द्रीय सरकार उसे समय-समय पर दे:
परन्तु इस उपधारा के अधीन बोर्ड को कोई भी निदेश दिए जाने से पूर्व उसे अपने विचार प्रकट करने का अवसर दिया जाएगा ।
24. शक्तियों और कर्तव्यों का प्रत्यायोजन-बोर्ड, साधारण या विशेष लिखित आदेश द्वारा, निदेश दे सकेगा कि ऐसी सब शक्तियों या कर्तव्यों का, जिनका उसके द्वारा प्रयोग या निर्वहन किया जा सकता है या उनमें से किसी का प्रयोग या निर्वहन ऐसी परिस्थितियों में और ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए, यदि कोई हो, जो आदेश में विनिर्दिष्ट की जाएं, बोर्ड के किसी ऐसे सदस्य, अधिकारी या कर्मचारी द्वारा भी किया जाएगा जो आदेश में इस निमित्त विनिर्दिष्ट किया जाए ।
25. बोर्ड के अधिकारियों और कर्मचारियों का लोक सेवक होना- बोर्ड का प्रत्येक अधिकारी या कर्मचारी, जब वह इस अधिनियम के या इसके अधीन बनाए गए किसी नियम या विनियम के उपबन्ध के अनुसरण में कार्य कर रहा हो या उसका ऐसे कार्य करना तात्पर्यित हो, भारतीय दण्ड संहिता (1960 का 45) की धारा 21 के अर्थ में लोक सेवक समझा जाएगा ।
26. अधिनियम के अधीन की गई कार्यवाही के लिए संरक्षण-कोई भी वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही किसी भी ऐसी बात के लिए, जो इस अधिनियम के या इसके अधीन बनाए गए किसी नियम या विनियम के अनुसरण में सद्भावपूर्वक की गई हो या की जानी आशयित हो, बोर्ड के या उसके किसी सदस्य, अधिकारी या अन्य कर्मचारी के विरुद्ध न होगी ।
27. नियम बनाने की केन्द्रीय सरकार की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार इस अधिनियम के उपबन्धों को प्रभावी करने के लिए नियम, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, बना सकेगी:
परन्तु जब बोर्ड की स्थापना हो जाए तब ऐसे कोई नियम बोर्ड से परामर्श किए बिना नहीं बनाए जाएंगे ।
(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम निम्नलिखित सब विषयों या उनमें से किसी के लिए उपबन्ध कर सकेंगे, अर्थात्: -
(क) धारा 5 की उपधारा (1) के खण्ड (ङ), खण्ड (च) या खण्ड (ज) के अधीन नामनिर्देशित सदस्यों की पदावधि तथा उनके स्थानों की आकस्मिक रिक्तियों को भरने की रीति;
(ख) अध्यक्ष से भिन्न किसी सदस्य को और बोर्ड से धारा 10 के अधीन सहयुक्त किसी व्यक्ति को संदेय यात्रा और अन्य भत्ते;
(ग) बोर्ड की सदस्यता के लिए निरर्हताएं और जो सदस्य किसी निरर्हता के अधीन है या हो जाए उसे हटाने में अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया;
(घ) वे शर्तें जिनके अधीन, और वह ढंग जिसमें बोर्ड द्वारा या उसकी ओर से संविदाएं की जा सकेंगी;
(ङ) कोई अन्य विषय जो विहित किया जाना है या विहित किया जाए ।
(3) इस धारा के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किन्तु नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।
28. विनियम बनाने की बोर्ड की शक्ति-(1) बोर्ड, इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों के निर्वहन के संबंध में केन्द्रीय सरकार के पूर्व अनुमोदन से ऐसे विनियम बना सकेगा जो इस अधिनियम तथा उसके अधीन बनाए गए नियमों के उपबन्धों से असंगत न हों ।
(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे विनियम निम्नलिखित सब विषयों या उनमें से किसी के लिए उपबन्ध कर सकेंगे, अर्थात्: -
(क) वे शर्तें और निबंन्धन जिनके अधीन लाइब्रेरी में हस्तलेखों और पुस्तकों का उपयोग किया जा सकेगा;
(ख) वह रीति जिससे और वे प्रयोजन जिनके लिए व्यक्तियों को बोर्ड से सहयुक्त किया जा सकेगा;
(ग) बोर्ड के अधिवेशनों का समय और स्थान, ऐसे अधिवेशनों में कार्य करने में अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया और बोर्ड के अधिवेशनों में कार्य करने के लिए आवश्यक गणपूर्ति;
(घ) बोर्ड के अधिवेशनों के कार्यवृत्त रखना और उनकी प्रतियां केन्द्रीय सरकार को भेजना;
(ङ) बोर्ड के अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों की भर्ती और उनकी सेवा की शर्तें;
(च) वे व्यक्ति जिनके द्वारा और वह रीति जिससे बोर्ड की ओर से संदाय, निक्षेप और विनिधान किए जा सकेंगे;
(छ) वह अधिकतम रकम जो बोर्ड द्वारा चालू खाते में रखी जा सकेगी;
(ज) रजिस्टरों और लेखाओं का रखा जाना;
(झ) लाइब्रेरी के हस्तलेखों, पुस्तकों और अन्य वस्तुओं और चीजों के सूचीपत्रों और तालिकाओं का संकलन;
(ञ) लाइब्रेरी के हस्तलेखों, पुस्तकों और अन्य वस्तुओं और चीजों के परिरक्षण के लिए किए जाने वाले उपाय;
(ट) लाइब्रेरी का साधारण प्रबन्ध;
(ठ) लाइब्रेरी के किसी हस्तलेख या पुस्तक के उपयोग के लिए उद्गृहीत की जाने वाली फीसें और अन्य प्रभार;
(ड) कोई अन्य विषय जिसकी बाबत बोर्ड की राय में इस अधिनियम के अधीन उसके कृत्यों के पालन के लिए उपबन्ध करना आवश्यक है ।
(3) केन्द्रीय सरकार, बोर्ड से परामर्श करने के पश्चात्, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, किसी ऐसे विनियम को, जिसे उसने अनुमोदित किया हो, संशोधित, परिवर्तित या विखंडित कर सकेगी और तब वह विनियम उस प्रकार, यथास्थिति, संशोधित या परिवर्तित रूप में प्रभावी होगा या उसका कोई प्रभाव न होगा; किन्तु उससे बोर्ड की उपधारा (1) और (2) के अधीन शक्तियों के प्रयोग पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।
29. अधिनियम का अन्य अधिनियमितियों और लिखतों पर अध्यारोही प्रभाव-इस अधिनियम के उपबन्ध, इस अधिनियम से भिन्न तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में या इस अधिनियम से भिन्न किसी अधिनियमिति के आधार पर प्रभावी किसी लिखत में किसी बात से असंगत होते हुए भी प्रभावी होंगे ।
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