आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014
(2014 का अधिनियम संख्यांक 6)
[1 मार्च, 2014]
विद्यमान आंध्र प्रदेश राज्य के पुनर्गठन और
उससे संबंधित विषयों का उपबंध
करने के लिए
अधिनियम
भारत गणराज्य के पैंसठवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो: -
भाग 1
प्रारंभिक
1. संक्षिप्त नाम-इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 है ।
2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, -
(क) नियत दिन" से वह दिन अभिप्रेत है जो केंद्रीय सरकार, राजपत्र में, अधिसूचना द्वारा, नियत करे;
(ख) अनुच्छेद" से संविधान का कोई अनुच्छेद अभिप्रेत है;
(ग) सभा निर्वाचन-क्षेत्र", परिषद् निर्वाचन-क्षेत्र" और संसदीय निर्वाचन-क्षेत्र" के वही अर्थ हैं, जो लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 (1950 का 43) में हैं;
(घ) निर्वाचन आयोग" से राष्ट्रपति द्वारा अनुच्छेद 324 के अधीन नियुक्त निर्वाचन आयोग अभिप्रेत है;
(ङ) विद्यमान आंध्र प्रदेश राज्य" से नियत दिन के ठीक पूर्व यथाविद्यमान आंध्र प्रदेश राज्य अभिप्रेत है;
(च) विधि" के अंतर्गत विद्यमान संपूर्ण आंध्र प्रदेश राज्य या उसके किसी भाग में नियत दिन के ठीक पूर्व विधि का बल रखने वाली कोई अधिनियमिति, अध्यादेश, विनियम, आदेश, उपविधि, नियम, स्कीम, अधिसूचना या अन्य लिखत भी है;
(छ) अधिसूचित आदेश" से राजपत्र में प्रकाशित कोई आदेश अभिप्रेत है;
(ज) जनसंख्या अनुपात" से, आंध्र प्रदेश राज्य और तेलंगाना राज्य के संबंध में, 2011 की जनगणना के अनुसार 58.32: 41.68 का अनुपात अभिप्रेत है;
(झ) आसीन सदस्य" से, संसद् के या विद्यमान आंध्र प्रदेश राज्य के विधान-मंडल के किसी सदन के संबंध में, ऐसा कोई व्यक्ति अभिप्रेत है जो नियत दिन के ठीक पूर्व उस सदन का सदस्य है;
(ञ) उत्तरवर्ती राज्य" से, विद्यमान आंध्र प्रदेश राज्य के संबंध में, यथास्थिति, आंध्र प्रदेश राज्य या तेलंगाना राज्य अभिप्रेत है;
(ट) अंतरित राज्यक्षेत्र" से वह राज्यक्षेत्र अभिप्रेत है जो नियत दिन को विद्यमान आंध्र प्रदेश राज्य से तेलंगाना राज्य को अंतरित किया गया है;
(ठ) खजाना" के अंतर्गत उपखजाना भी है; और
(ड) विद्यमान आंध्र प्रदेश राज्य के किसी जिले, मंडल, तहसील, तालुक या अन्य प्रादेशिक खंड के प्रति किसी निर्देश का यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह नियत दिन को उस प्रादेशिक खंड के भीतर समाविष्ट क्षेत्र के प्रति निर्देश है ।
भाग 2
आंध्र प्रदेश राज्य का पुनर्गठन
3. तेलंगाना राज्य का बनाया जाना-नियत दिन से ही एक नया राज्य बनाया जाएगा, जिसका नाम तेलंगाना राज्य होगा, जिसमें विद्यमान आंध्र प्रदेश राज्य के निम्नलिखित राज्यक्षेत्र समाविष्ट होंगे, अर्थात्: -
आदिलाबाद, करीमनगर, मेडक, निजामाबाद, वारंगल, रंगारेड्डी, नालगोंडा, महबूबनगर, [खम्माम (किंतु कुकुनूर, वेलैरपाडु और भुरगमपाडु मंडलों, किन्तु इसके अंतर्गत पलवानचा राजस्व प्रभाग के अधीन उसके पिनापाका, मोरामपल्ली बंजार, भुरगमपाडु, नागिनेनीपरोलू, कृष्णानगर, टेकुला, सरापका, इरावेंडी, मोथेपट्टीनगर, उप्पसुका, सोमपल्ली और नकरीपेटा राजस्व ग्राम नहीं हैं और चिंतुर, कुनावरम, वरारामचन्द्रपुरम और भ्रदाचलम मंडलों, किंतु इसके अंतर्गत भद्राचलम राजस्व प्रभाग के अधीन भद्राचलम का राजस्व ग्राम सम्मिलित नहीं है, को छोड़कर)] और हैदराबाद जिले,
और तदुपरि उक्त राज्यक्षेत्र विद्यमान आंध्र प्रदेश राज्य के भाग नहीं रहेंगे ।
4. आंध्र प्रदेश राज्य और उसके प्रादेशिक खंड-नियत दिन से ही, आंध्र प्रदेश राज्य में विद्यमान आंध्र प्रदेश राज्य के, धारा 3 में विनिर्दिष्ट राज्यक्षेत्रों से भिन्न राज्यक्षेत्र समाविष्ट होंगे ।
5. तेलंगाना और आंध्र प्रदेश राज्यों के लिए हैदराबाद का सामान्य राजधानी होना-(1) नियत दिन से ही, विद्यमान आंध्र प्रदेश राज्य में हैदराबाद, ऐसी अवधि के लिए जो दस वर्ष से अधिक की नहीं होगी, तेलंगाना राज्य और आंध्र प्रदेश राज्य की सामान्य राजधानी होगी ।
(2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट अवधि के अवसान पर, हैदराबाद तेलंगाना राज्य की राजधानी होगी और आंध्र प्रदेश राज्य के लिए एक नई राजधानी होगी ।
स्पष्टीकरण-इस भाग में, सामान्य राजधानी के अन्तर्गत हैदराबाद नगर निगम अधिनियम, 1955 (1956 का हैदराबाद अधिनियम सं० 2) के अधीन बृहत्तर हैदराबाद नगर निगम के रूप में अधिसूचित विद्यमान क्षेत्र आता है ।
6. आंध्र प्रदेश के लिए एक राजधानी का गठन करने के लिए विशेषज्ञ समिति-केन्द्रीय सरकार उत्तरवर्ती आंध्र प्रदेश राज्य के लिए नई राजधानी के बारे में विभिन्न अनुकल्पों का अध्ययन करने के लिए तथा आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 के अधिनियमन की तारीख से छह मास से अनधिक की अवधि में समुचित सिफारिशें करने के लिए एक विशेषज्ञ समिति का गठन करेगी ।
7. विद्यमान आंध्र प्रदेश राज्य के राज्यपाल का सामान्य राज्यपाल होना-नियत दिन से ही, विद्यमान आंध्र प्रेदश राज्य का राज्यपाल ऐसी अवधि के लिए, जो राष्ट्रपति द्वारा अवधारित की जाए, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के दोनों उत्तरवर्ती राज्यों के लिए राज्यपाल होगा ।
8. हैदराबाद की सामान्य राजधानी के निवासियों की संरक्षा करने का राज्यपाल का उत्तरदायित्व-(1) नियत दिन से ही, सामान्य राजधानी क्षेत्र के प्रशासन के प्रयोजनों के लिए, राज्यपाल का, उन सभी के, जो ऐसे क्षेत्र में निवास करते हैं, प्राण, स्वतंत्रता और संपत्ति की सुरक्षा करने का विशेष उत्तरदायित्व होगा ।
(2) विशिष्टतया, राज्यपाल के उत्तरदायित्व का उन विषयों तक जैसे कि विधि व्यवस्था, आंतरिक सुरक्षा और महत्वपूर्ण संस्थापनों की सुरक्षा और सामान्य राजधानी क्षेत्र में सरकारी भवनों के प्रबंधन और आबंटन तक विस्तार किया जाएगा ।
(3) राज्यपाल, कृत्यों के निर्वहन में, तेलंगाना राज्य की मंत्रि-परिषद् से परामर्श करने के पश्चात्, की जाने वाली कार्रवाई के बारे में अपने व्यक्तिगत निर्णय का प्रयोग करेगा:
परन्तु यदि इस बारे में कोई प्रश्न उ-ूत होता है कि यह विषय इस संबंध में ऐसा विषय है या नहीं, जिसके प्रति राज्यपाल से इस उपधारा के अधीन अपने व्यक्तिगत निर्णय का प्रयोग करने की अपेक्षा की जाती है, राज्यपाल का उसके विवेकानुसार किया गया विनिश्चय अंतिम होगा और राज्यपाल द्वारा की गई किसी बात की विधिमान्यता को इस आधार पर प्रश्नगत नहीं किया जाएगा कि उसे अपने व्यक्तिगत निर्णय का प्रयोग करते हुए किया जाना चाहिए या नहीं किया जाना चाहिए ।
(4) राज्यपाल को केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त किए जाने वाले दो सलाहकार सहायता प्रदान करेंगे ।
9. केन्द्रीय सरकार से उत्तरवर्ती राज्यों को पुलिस बलों की सहायता, आदि-(1) केन्द्रीय सरकार, उत्तरवर्ती आंध्र प्रदेश और तेलंगाना राज्यों को अतिरिक्त पुलिस बल जुटाने में सहायता प्रदान करेगी ।
(2) केन्द्रीय सरकार, नियत दिन से ही, तीन वर्ष की अवधि के लिए हैदराबाद में ग्रे-हाउंड प्रशिक्षण केन्द्र का अनुरक्षण और प्रशासन करेगी जो उत्तरवर्ती राज्यों के लिए सामान्य प्रशिक्षण केन्द्र के रूप में कार्य करेगा और उक्त अवधि के अवसान पर हैदराबाद में विद्यमान ग्रे-हाउंड प्रशिक्षण केन्द्र तेलंगाना राज्य का प्रशिक्षण केन्द्र हो जाएगा ।
(3) केन्द्रीय सरकार, उत्तरवर्ती आंध्र प्रदेश राज्य को, एक वैसे ही प्रतिष्ठापूर्ण प्रशिक्षण केन्द्र का, ऐसे स्थान पर, जो आंध्र प्रदेश राज्य सरकार आदेश द्वारा अधिसूचित करे, गठन किए जाने में सहायता प्रदान करेगी ।
(4) केन्द्रीय सरकार, ग्रे-हाउन्डों के लिए नए प्रचालन केन्द्रों (हब) का ऐसे अवस्थानों पर, जो उत्तरवर्ती राज्य आदेश द्वारा अधिसूचित करें, गठन करने में वित्तीय सहायता प्रदान करेगी ।
(5) विद्यमान आंध्र प्रदेश के ग्रे-हाउन्डों और ओक्टोपस बलों को, कार्मिकों से विकल्प की ईप्सा करने के पश्चात्, उत्तरवर्ती राज्यों के बीच वितरित किया जाएगा और इन बलों में प्रत्येक नियत दिन को या उसके पश्चात् उत्तरवर्ती राज्यों के संबधित पुलिस महानिदेशक के अधीन कार्य करेगा ।
10. संविधान की पहली अनुसूची का संशोधन-नियत दिन से ही, संविधान की पहली अनुसूची में, 1. राज्य" शीर्षक के अधीन, -
(क) आंध्र प्रदेश राज्य के राज्यक्षेत्रों से संबंधित पैरा में, आंध्र प्रदेश और मद्रास (सीमा-परिवर्तन) अधिनियम, 1959 (1959 का 56) की द्वितीय अनुसूची में" शब्दों, कोष्ठकों और अंकों के पश्चात्, निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्: - तथा आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 की धारा 3 में";
(ख) प्रविष्टि 28 के पश्चात्, निम्नलिखित प्रविष्टि अंतःस्थापित की जाएगी, अर्थात्: -
29. तेलंगाना: वे राज्यक्षेत्र जो आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 की धारा 3 में विनिर्दिष्टहैं ।"।
11. राज्य सरकार की व्यावृत्त शक्तियां-इस भाग के पूर्वगामी उपबंधों की किसी बात से यह नहीं समझा जाएगा कि वह आंध्र प्रदेश सरकार या तेलंगाना सरकार की, नियत दिन के पश्चात् राज्य के किसी जिले या अन्य प्रादेशिक खंड के नाम, क्षेत्र या सीमाओं में परिवर्तन करने की शक्ति को प्रभावित करती है ।
भाग 3
विधान-मंडलों में प्रतिनिधित्व
राज्य सभा
12. संविधान की चौथी अनुसूची का संशोधन-नियत दिन से ही संविधान की चौथी अनुसूची की सारणी में, -
(क) प्रविष्टि 1 में, 18" अंकों के स्थान पर, 11" अंक रखे जाएंगे;
(ख) प्रविष्टि 2 से प्रविष्टि 30 तक को क्रमशः प्रविष्टि 3 से प्रविष्टि 31 तक के रूप में पुनःसंख्यांकित किया जाएगा;
(ग) प्रविष्टि 1 के पश्चात्, निम्नलिखित प्रविष्टि अंतःस्थापित की जाएगी, अर्थात्ः-
2. तेलंगाना ...................7" ।
13. आसीन सदस्यों का आबंटन-(1) नियत दिन से ही, विद्यमान आंध्र प्रदेश राज्य का प्रतिनिधित्व करने वाले राज्य सभा के अठारह आसीन सदस्य इस अधिनियम की पहली अनुसूची में विनिर्दिष्ट रूप में आंध्र प्रदेश राज्य और तेलंगाना राज्य को आबंटित स्थानों को भरने के लिए निर्वाचित किए गए समझे जाएंगे ।
(2) ऐसे आसीन सदस्यों की पदावधि अपरिवर्तित बनी रहेगी ।
लोक सभा
14. लोक सभा में प्रतिनिधित्व-नियत दिन से ही, लोक सभा में उत्तरवर्ती आंध्र प्रदेश राज्य को 25 स्थान और उत्तरवर्ती तेलंगाना राज्य को 17 स्थान आबंटित किए जाएंगे और तदनुसार लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 (1950 का 43) की प्रथम अनुसूची संशोधित समझी जाएगी ।
15. संसदीय और सभा निर्वाचन-क्षेत्रों का परिसीमन-(1) नियत दिन से ही, संसदीय और सभा निर्वाचन-क्षेत्र परिसीमन आदेश, 2008 इस अधिनियम की दूसरी अनुसूची में निर्दिष्ट रूप में संशोधित हो जाएगा ।
(2) निर्वाचन आयोग, इस अधिनियम द्वारा यथा संशोधित संसदीय और सभा निर्वाचन-क्षेत्र परिसीमन आदेश, 2008 में, विनिर्दिष्ट स्थानों के आबंटन के अनुसार उत्तरवर्ती आंध्र प्रदेश और तेलंगाना राज्यों के लिए लोक सभा और विधान सभाओं के निर्वाचनों का संचालन करा सकेगा ।
16. आसीन सदस्यों के बारे में उपबंध-(1) ऐसे किसी निर्वाचन-क्षेत्र का, जो नियत दिन को, धारा 14 के उपबंधों के आधार पर सीमाओं में परिवर्तन सहित या उसके बिना, उत्तरवर्ती आंध्र प्रदेश या तेलंगाना राज्यों को आबंटित हो गया है, प्रतिनिधित्व करने वाले लोक सभा के प्रत्येक आसीन सदस्य के बारे में यह समझा जाएगा कि वह इस प्रकार यथा आबंटित उस निर्वाचन-क्षेत्र से लोक सभा के लिए निर्वाचित हुआ है ।
(2) ऐसे आसीन सदस्यों की पदावधि अपरिवर्तित बनी रहेगी ।
विधान सभा
17. विधान सभाओं के बारे में उपबंध-(1) उपधारा (2) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना राज्यों की विधान सभाओं में स्थानों की संख्या नियत दिन से ही क्रमशः 175 और 119 होगी ।
(2) लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 (1950 का 43) की द्वितीय अनुसूची में, 1. राज्य" शीर्ष के अधीन, -
- प्रविष्टि 1 के स्थान पर, निम्नलिखित प्रविष्टि रखी जाएगी, अर्थात्: -
|
1 |
2 |
3 |
4 |
5 |
6 |
7 |
|
1. आंध्र प्रदेश |
294 |
39 |
15 |
175 |
29 |
7" |
(ख) प्रविष्टि 25 से प्रविष्टि 28 को क्रमशः प्रविष्टि 26 से प्रविष्टि 29 के रूप में पुनःसंख्यांकित किया जाएगा;
(ग) प्रविष्टि 24 के पश्चात्, निम्नलिखित प्रविष्टि अंतःस्थापित की जाएगी, अर्थात्:-
|
1 |
2 |
3 |
4 |
5 |
6 |
7 |
|
25. तेलंगाना |
--- |
--- |
--- |
119 |
19 |
12"। |
18. आंग्ल-भारतीय समुदाय का प्रतिनिधित्व-धारा 17 की उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, राज्य का राज्यपाल, संविधान के अनुच्छेद 333 के अनुसार आंग्ल-भारतीय समुदाय को प्रतिनिधित्व देने के लिए उत्तरवर्ती राज्यों की विधान सभाओं में एक-एक सदस्य नामनिर्दिष्ट कर सकेगा ।
19. आसीन सदस्यों का आबंटन-(1) ऐसे किसी निर्वाचन-क्षेत्र से, जो धारा 17 के उपबंधों के आधार पर नियत दिन को, सीमाओं में परिवर्तन सहित या उसके बिना, तेलंगाना राज्य को आबंटित हो गया है, विद्यमान आंध्र प्रदेश राज्य की विधान सभा में किसी स्थान को भरने के लिए निर्वाचित उस सभा के प्रत्येक आसीन सदस्य के बारे में यह समझा जाएगा कि वह उस दिन से ही आंध्र प्रदेश की विधान सभा का सदस्य नहीं रह गया है और उसे इस प्रकार आबंटित उस निर्वाचन-क्षेत्र से तेलंगाना की विधान सभा में स्थान को भरने के लिए निर्वाचित हुआ समझा जाएगा ।
(2) विद्यमान आंध्र प्रदेश राज्य की विधान सभा के सभी आसीन सदस्य उस राज्य की विधान सभा के सदस्य बने रहेंगे और किसी ऐसे निर्वाचन-क्षेत्र का, जिसके विस्तार या नाम का धारा 17 के उपबंधों के आधार पर परिवर्तन हो गया है, प्रतिनिधित्व करने वाले किसी ऐसे आसीन सदस्य के बारे में यह समझा जाएगा कि वह आंध्र प्रदेश की विधान सभा के लिए इस प्रकार यथा परिवर्तित उस निर्वाचन-क्षेत्र से निर्वाचित हुआ है ।
(3) तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना की विधान सभाओं के बारे में यह समझा जाएगा कि वे नियत दिन को सम्यक्त रूप से गठित की गई हैं ।
20. विधान सभाओं की अवधि-आंध्र प्रदेश राज्य की विधान सभा और तेलंगाना राज्य की विधान सभा की दशा में, अनुच्छेद 172 के खंड (1) में निर्दिष्ट पांच वर्ष की अवधि उस तारीख को प्रारंभ हुई समझी जाएगी, जिसको वह विद्यमान आंध्र प्रदेश राज्य की विधान सभा की दशा में वस्तुतः प्रारंभ हुई है ।
21. अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और प्रक्रिया नियम-(1) ऐसा व्यक्ति, जो नियत दिन के ठीक पूर्व विद्यमान आंध्र प्रदेश राज्य की विधान सभा का अध्यक्ष है, उसी दिन से ही उस सभा का अध्यक्ष बना रहेगा और उस सभा के सदस्य सभा के सदस्यों में से एक सदस्य को उस सभा का उपाध्यक्ष चुनेंगे ।
(2) नियत दिन के पश्चात् यथाशक्य शीघ्र, विद्यमान आंध्र प्रदेश की विधान सभा का उपाध्यक्ष, उत्तरवर्ती तेलंगाना राज्य की विधान सभा का उपाध्यक्ष हो जाएगा और उस सभा द्वारा अध्यक्ष को चुने जाने तक, अध्यक्ष के पदीय कर्तव्यों का पालन इस प्रकार नियुक्त उपाध्यक्ष द्वारा किया जाएगा ।
(3) नियत दिन के ठीक पूर्व यथाप्रवृत्त आंध्र प्रदेश विधान सभा की प्रक्रिया और कार्य संचालन के नियम, अनुच्छेद 208 के खंड (1) के अधीन नियम बनाए जाने तक, तेलंगाना की विधान सभा की प्रक्रिया और कार्य संचालन के नियम ऐसे उपांतरणों और अनुकूलनों के अधीन रहते हुए होंगे, जो उसके अध्यक्ष द्वारा उनमें किए जाएं ।
विधान परिषदें
22. उत्तरवर्ती राज्यों के लिए विधान परिषद्-(1) प्रत्येक उत्तरवर्ती राज्य के लिए, संविधान के अनुच्छेद 169 में अन्तर्विष्ट उपबंधों के अनुसार एक-एक विधान परिषद् का गठन किया जाएगा, जो [आंध्र प्रदेश विधान परिषद् में के 58 से अनधिक सदस्यों से] और तेलंगाना राज्य विधान परिषद् में के 40 से अनधिक सदस्यों से मिलकर बनेगी ।
(2) आंध्र प्रदेश राज्य की विद्यमान विधान परिषद् को, नियत दिन से ही, उत्तरवर्ती राज्यों की दो परिषदों के रूप में गठित किया गया समझा जाएगा और विद्यमान सदस्यों को चौथी अनुसूची में विनिर्दिष्टरूप में परिषदों को आबंटित किया जाएगा ।
23. विधान परिषदों के बारे में उपबंध-(1) नियत दिन से ही, क्रमशः 1[आंध्र प्रदेश विधान परिषद् में 58 स्थान] और तेलंगाना विधान परिषद् में 40 स्थान होंगे ।
(2) लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 (1950 का 43) में, -
(i) तृतीय अनुसूची में, -
[(क) विद्यमान प्रविष्टि 1 के स्थान पर, निम्नलिखित प्रविष्टि रखी जाएगी, अर्थात्: -
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1 |
2 |
3 |
4 |
5 |
6 |
7 |
|
1. आंध्र प्रदेश |
58 |
20 |
5 |
5 |
20 |
8";] |
- प्रविष्टि 7 के पश्चात् निम्नलिखित प्रविष्टि अन्तःस्थापित की जाएगी, अर्थात्: -
|
1 |
2 |
3 |
4 |
5 |
6 |
7 |
|
7क. तेलंगाना |
40 |
14 |
3 |
3 |
14 |
6";( |
(ii) चतुर्थ अनुसूची में, तमिलनाडु" शीर्ष और उनसे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात्, निम्नलिखित शीर्ष और प्रविष्टियां अंतःस्थापित की जाएंगी, अर्थात्: -
तेलंगाना
1. नगर निगम;
2. नगर पालिकाएं;
3. नगर पंचायतें;
4. छावनी बोर्ड;
5. जिला प्रजा परिषदें;
6. मंडल प्रजा परिषदें ।"।
24. परिषद् निर्वाचन-क्षेत्र परिसीमन आदेश का संशोधन-(1) नियत दिन से ही, परिषद् निर्वाचन-क्षेत्र (आंध्र प्रदेश) परिसीमन आदेश, 2006, तीसरी अनुसूची के भाग 1 में निदेशित रूप में संशोधित हो जाएगा ।
(2) नियत दिन से ही, परिषद् निर्वाचन-क्षेत्र (तेलंगाना) परिसीमन आदेश, 2014, तीसरी अनुसूची के भाग 2 में विनिर्दिष्टरूप में उत्तरवर्ती तेलंगाना राज्य को लागू होगा ।
(3) केंद्रीय सरकार, यथास्थिति, उत्तरवर्ती आंध्र प्रदेश या तेलंगाना राज्यों से परामर्श करके, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, तीसरी अनुसूची का संशोधन कर सकेगी ।
25. सभापति, उपसभापति और प्रक्रिया नियम-(1) ऐसा व्यक्ति, जो नियत दिन के ठीक पूर्व विद्यमान आंध्र प्रदेश राज्य की विधान परिषद् का सभापति है, उसी दिन से ही उस परिषद् का सभापति बना रहेगा और उस परिषद् के सदस्य, परिषद् के सदस्यों में से एक सदस्य को उस परिषद् का उपसभापति चुनेंगे ।
(2) नियत दिन के पश्चात् यथाशक्य शीघ्र, विद्यमान आंध्र प्रदेश की विधान परिषद् का उपसभापति, उत्तरवर्ती तेलंगाना राज्य की विधान परिषद् का उपसभापति हो जाएगा और उस परिषद् द्वारा सभापति को चुने जाने तक, सभापति के पदीय कर्तव्यों का पालन इस प्रकार नियुक्त उपसभापति द्वारा किया जाएगा ।
(3) नियत दिन के ठीक पूर्व यथा प्रवृत्त आंध्र प्रदेश विधान परिषद् की प्रक्रिया और कार्य संचालन नियम, अनुच्छेद 208 के खंड (1) के अधीन नियम बनाए जाने तक, ऐसे उपांतरणों और अनुकूलनों के अधीन रहते हुए, जो उसके सभापति द्वारा उनमें किए जाएं, तेलंगाना विधान परिषद् के प्रक्रिया और कार्य संचालन नियम होंगे ।
निर्वाचन-क्षेत्रों का परिसीमन
26. निर्वाचन-क्षेत्रों का परिसीमन-(1) संविधान के अनुच्छेद 170 में अंतर्विष्ट उपबंधों के अधीन रहते हुए और इस अधिनियम की धारा 15 पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, उत्तरवर्ती आंध्र प्रदेश और तेलंगाना राज्यों की विधान सभाओं में स्थानों की संख्या 175 और 119 से बढ़ाकर क्रमशः 225 और 153 कर दी जाएगी और निर्वाचन आयोग द्वारा निर्वाचन-क्षेत्रों के परिसीमन का इसमें इसके पश्चात् उपबंधित रीति से, -
(क) संविधान के सुसंगत उपबंधों को ध्यान में रखते हुए, आंध्र प्रदेश राज्य और तेलंगाना राज्य की विधान सभाओं में क्रमशः अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित किए जाने वाले स्थानों की संख्या का अवधारण किया जा सकेगा;
(ख) उन सभा निर्वाचन-क्षेत्रों का, जिनमें खंड (क) में निर्दिष्ट प्रत्येक राज्य को विभाजित किया जाएगा, ऐसे निर्वाचन-क्षेत्रों में से प्रत्येक के विस्तार का और उनका, जिनमें अनुसूचित जातियों या अनुसूचित जनजातियों के लिए स्थान आरक्षित किए जाएंगे, अवधारण किया जा सकेगा; और
(ग) खंड (क) में निर्दिष्ट प्रत्येक राज्य में, संसदीय निर्वाचन-क्षेत्रों की सीमाओं में ऐसे समायोजन और विस्तार के वर्णन का अवधारण किया जा सकेगा, जो आवश्यक या समीचीन हो ।
(2) उपधारा (1) के खंड (ख) और खंड (ग) में निर्दिष्ट विषयों का अवधारण करने में, निर्वाचन आयोग निम्नलिखित उपबंधों को ध्यान में रखेगा, अर्थात्: -
(क) सभी निर्वाचन-क्षेत्र एकल सदस्यीय निर्वाचन-क्षेत्र होंगे;
(ख) सभी निर्वाचन-क्षेत्र, यथासाध्य, भौगोलिक रूप से संहृत क्षेत्र होंगे और उनका परिसीमन करने में उनकी भौतिक विशिष्टताओं, प्रशासनिक इकाइयों की विद्यमान सीमाओं, संचार की सुविधाओं और सार्वजनिक सुख-सुविधाओं का ध्यान रखना होगा; और
(ग) ऐसे निर्वाचन-क्षेत्र, जिनमें अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए स्थान आरक्षित किए जाते हैं, यथासाध्य, उन क्षेत्रों में अवस्थित होंगे, जिनमें कुल जनसंख्या के अनुपात में उनकी जनसंख्या सर्वाधिक हो ।
(3) निर्वाचन आयोग, उपधारा (1) के अधीन अपने कृत्यों के पालन में अपनी सहायता के प्रयोजन के लिए अपने साथ सहयुक्त सदस्यों के रूप में ऐसे पांच व्यक्तियों को सहयुक्त करेगा, जो केंद्रीय सरकार, आदेश द्वारा विनिर्दिष्ट करे और वे ऐसे व्यक्ति होंगे, जो उस राज्य की विधान सभा के या राज्य का प्रतिनिधित्व करने वाले लोक सभा के सदस्य हों:
परंतु सहयुक्त सदस्यों में से किसी को मत देने का या निर्वाचन आयोग के किसी विनिश्चय पर हस्ताक्षर करने का अधिकार नहीं होगा ।
(4) यदि किसी सहयुक्त सदस्य का पद मृत्यु या पदत्याग के कारण रिक्त हो जाता है तो वह, यथासाध्य, उपधारा (3) के उपबंधों के अनुसार भरा जाएगा ।
(5) निर्वाचन आयोग, -
(क) निर्वाचन-क्षेत्रों के परिसीमन के लिए अपनी प्रस्थापनाएं, किसी ऐसे सहयुक्त सदस्य की, जो उनके प्रकाशन की वांछा करता है, विसम्मत प्रस्थापनाओं सहित, यदि कोई हों, राजपत्र में और ऐसी अन्य रीति से, जो आयोग ठीक समझे, ऐसी सूचना के साथ प्रकाशित करेगा, जिसमें प्रस्थापनाओं के संबंध में आक्षेप और सुझाव आमंत्रित किए गए हों और वह तारीख विनिर्दिष्टकी गई हो, जिसको या जिसके पश्चात् प्रस्थापनाओं पर उसके द्वारा आगे विचार किया जाएगा;
(ख) उन सभी आक्षेपों और सुझावों पर विचार करेगा, जो उसे इस प्रकार विनिर्दिष्ट तारीख के पूर्व प्राप्त हुए हों ;
(ग) ऐसे सभी आक्षेपों और सुझावों पर, जो उसे इस प्रकार विनिर्दिष्ट तारीख के पूर्व प्राप्त हुए हों, विचार करने के पश्चात्, एक या अधिक आदेशों द्वारा, निर्वाचन-क्षेत्रों का परिसीमन अवधारित करेगा और ऐसे आदेश या आदेशों को राजपत्र में प्रकाशित करवाएगा,
और ऐसे प्रकाशन पर वह आदेश या वे आदेश विधि का पूर्ण बल रखेंगे और उसे या उन्हें किसी न्यायालय में प्रश्नगत नहीं किया जाएगा ।
(6) सभा निर्वाचन-क्षेत्रों से संबंधित ऐसा प्रत्येक आदेश, ऐसे प्रकाशन के पश्चात्, यथाशीघ्र संबंधित राज्य की विधान सभा के समक्ष रखा जाएगा ।
27. परिसीमन आदेशों को अद्यतन रखने की निर्वाचन आयोग की शक्ति-(1) निर्वाचन आयोग, समय-समय पर, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, -
(क) धारा 26 के अधीन किए गए किसी आदेश में किन्हीं मुद्रण संबंधी भूलों को या अनवधानता से हुई भूल या लोप के कारण उसमें हुई किसी गलती को ठीक कर सकेगा;
(ख) जहां ऐसे किसी आदेश या किन्हीं आदेशों में उल्लिखित किसी प्रादेशिक खंड की सीमाओं या नाम में परिवर्तन किया जाता है, वहां ऐसे संशोधन कर सकेगा, जो उसे ऐसे आदेश को अद्यतन करने के लिए आवश्यक या समीचीन प्रतीत हों ।
(2) किसी सभा निर्वाचन-क्षेत्र के संबंध में इस धारा के अधीन प्रत्येक अधिसूचना, उसके जारी किए जाने के पश्चात्, यथाशीघ्र, संबंधित विधान सभा के समक्ष रखी जाएगी ।
अनुसूचित जातियां और अनुसूचित जनजातियां
28. अनुसूचित जातियां आदेश का संशोधन-नियत दिन से ही, संविधान (अनुसूचित जातियां) आदेश, 1950 का इस अधिनियम की पांचवीं अनुसूची में निर्दिष्ट रूप में संशोधन हो जाएगा ।
29. अनुसूचित जनजातियां आदेश का संशोधन-नियत दिन से ही, संविधान (अनुसूचित जनजातियां) आदेश, 1950 का इस अधिनियम की छठी अनुसूची में निर्दिष्ट रूप में संशोधन हो जाएगा ।
भाग 4
उच्च न्यायालय
30. आंध्र प्रदेश के उच्च न्यायालय की स्थापना किए जाने तक हैदराबाद स्थित उच्च न्यायालय का सामान्य उच्च न्यायालय होना-(1) नियत दिन से ही, -
(क) तेलंगाना राज्य और आंध्र प्रदेश राज्य के लिए हैदराबाद स्थित उच्च न्यायालय, इस अधिनियम की धारा 31 के साथ पठित संविधान के अनुच्छेद 214 के अधीन आंध्र प्रदेश राज्य के लिए एक पृथक् उच्च न्यायालय का गठन किए जाने तक, सामान्य उच्च न्यायालय होगा;
(ख) विद्यमान आंध्र प्रदेश राज्य के लिए, हैदराबाद स्थित उच्च न्यायालय के ऐसे न्यायाधीश, जो नियत दिन के ठीक पूर्व पद धारण कर रहे हैं, उसी दिन से सामान्य उच्च न्यायालय के न्यायाधीश हो जाएंगे ।
(2) सामान्य उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के वेतन और भत्तों की बाबत व्यय का आबंटन आंध्र प्रदेश राज्य और तेलंगाना राज्य के बीच जनसंख्या अनुपात के आधार पर किया जाएगा ।
31. आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय-(1) धारा 30 के उपबंधों के अधीन रहते हुए, आंध्र प्रदेश राज्य के लिए, एक पृथक्त उच्च न्यायालय होगा (जिसे इसमें इसके पश्चात् आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय कहा गया है) और हैदराबाद स्थित उच्च न्यायालय, तेलंगाना राज्य के लिए उच्च न्यायालय (जिसे इसमें इसके पश्चात् हैदराबाद स्थित उच्च न्यायालय कहा गया है) हो जाएगा ।
(2) आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय का प्रधान स्थान ऐसे स्थान पर होगा, जो राष्ट्रपति, अधिसूचित आदेश द्वारा, नियत करे ।
(3) उपधारा (2) में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधीश और खंड न्यायालय आंध्र प्रदेश राज्य में उसके प्रधान स्थान से भिन्न ऐसे अन्य स्थान या स्थानों पर बैठकें कर सकेंगे, जिन्हें मुख्य न्यायमूर्ति, आंध्र प्रदेश के राज्यपाल के अनुमोदन से, नियत करे ।
32. आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधीश-(1) हैदराबाद स्थित उच्च न्यायालय के ऐसे न्यायाधीश, जो आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय की स्थापना की तारीख के ठीक पूर्व, जो राष्ट्रपति द्वारा अवधारित की जाए, पद धारण कर रहे हों, उस तारीख से हैदराबाद स्थित उच्च न्यायालय के न्यायाधीश नहीं रहेंगे और आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधीश हो जाएंगे ।
(2) ऐसे व्यक्ति, जो उपधारा (1) के आधार पर आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधीश हो जाते हैं, उस दशा के सिवाय, जहां ऐसा कोई व्यक्ति उस उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायमूर्ति नियुक्त किया जाता है, उस न्यायालय में हैदराबाद स्थित उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के रूप में अपनी-अपनी नियुक्तियों की पूर्विकता के अनुसार रैंक धारण करेंगे ।
33. आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय की अधिकारिता-आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय को, आंध्र प्रदेश राज्य में सम्मिलित राज्यक्षेत्रों के किसी भाग की बाबत, ऐसी सभी अधिकारिता, शक्तियां और प्राधिकार प्राप्त होंगे, जो धारा 30 की उपधारा (1) में निर्दिष्ट तारीख के ठीक पूर्व प्रवृत्त विधि के अधीन उक्त राज्यक्षेत्रों के उस भाग की बाबत हैदराबाद स्थित उच्च न्यायालय द्वारा प्रयोक्तव्य थे ।
34. विधिज्ञ परिषद् और अधिवक्ताओं के संबंध में विशेष उपबंध-(1) धारा 30 की उपधारा (1) में निर्दिष्ट तारीख से ही, अधिवक्ता अधिनियम, 1961 (1961 का 25) की धारा 3 की उपधारा (1) के खंड (क) में, राजस्थान, उत्तर प्रदेश" शब्दों के स्थान पर, राजस्थान, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश" शब्द रखे जाएंगे ।
(2) ऐसा व्यक्ति, जो धारा 30 की उपधारा (1) में निर्दिष्ट तारीख से ठीक पूर्व विद्यमान आंध्र प्रदेश राज्य की विधिज्ञ परिषद् की नामावली में अधिवक्ता है और हैदराबाद स्थित उच्च न्यायालय में अधिवक्ता के रूप में विधि व्यवसाय कर रहा है, उस तारीख से एक वर्ष के भीतर ऐसे विद्यमान राज्य की विधिज्ञ परिषद् की नामावली में अपने नाम को अंतरित किए जाने का लिखित में विकल्प दे सकेगा और अधिवक्ता अधिनियम, 1961 (1961 का 25) और उसके अधीन बनाए गए नियमों में किसी बात के होते हुए भी, इस प्रकार दिए गए ऐसे विकल्प पर उसका नाम तेलंगाना विधिज्ञ परिषद् की नामावली में उक्त अधिनियम और उसके अधीन बनाए गए नियमों के प्रयोजनों के लिए इस प्रकार दिए गए विकल्प की तारीख से अंतरित किया गया समझा जाएगा ।
(3) ऐसे अधिवक्ताओं से भिन्न व्यक्तियों को, जो धारा 30 की उपधारा (1) में निर्दिष्ट तारीख के ठीक पूर्व हैदराबाद स्थित उच्च न्यायालय या उसके अधीनस्थ किसी न्यायालय में विधि व्यवसाय करने के लिए हकदार हैं, उस तारीख को या उसके पश्चात्, यथास्थिति, आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय या उसके किसी अधीनस्थ न्यायालय में भी विधि व्यवसाय करने के लिए हकदार व्यक्तियों के रूप में मान्यता दी जाएगी ।
(4) आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय में सुनवाई का अधिकार ऐसे सिद्धांतों के अनुसार विनियमित होगा, जो धारा 30 की उपधारा (1) में निर्दिष्ट तारीख के ठीक पूर्व हैदराबाद स्थित उच्च न्यायालय में सुनवाई के अधिकार की बाबत प्रवृत्त है ।
35. आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय में पद्धति और प्रक्रिया-हैदराबाद स्थित उच्च न्यायालय में पद्धति और प्रक्रिया की बाबत धारा 30 की उपधारा (1) में निर्दिष्ट तारीख के ठीक पूर्व प्रवृत्त विधि, इस भाग के उपबंधों के अधीन रहते हुए, आवश्यक उपांतरणों सहित, आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के संबंध में लागू होगी और तदनुसार आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय को पद्धति और प्रक्रिया की बाबत नियम बनाने और आदेश करने की ऐसी सभी शक्तियां प्राप्त होंगी, जो उस तारीख के ठीक पूर्व हैदराबाद स्थित उच्च न्यायालय द्वारा प्रयोक्तव्य हैं :
परंतु ऐसे कोई नियम या आदेश, जो हैदराबाद स्थित उच्च न्यायालय में पद्धति और प्रक्रिया की बाबत धारा 30 की उपधारा (1) में निर्दिष्ट तारीख के ठीक पूर्व प्रवृत्त हैं, जब तक आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा बनाए गए नियमों या किए गए आदेशों द्वारा परिवर्तित या प्रतिसंहृत नहीं कर दिए जाते, आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय में पद्धति और प्रक्रिया की बाबत आवश्यक उपांतरणों सहित इस प्रकार लागू होंगे, मानो वे उस न्यायालय द्वारा बनाए गए हों या किए गए हों ।
36. आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय की मुद्रा की अभिरक्षा-हैदराबाद स्थित उच्च न्यायालय की मुद्रा की अभिरक्षा के संबंध में धारा 30 की उपधारा (1) में निर्दिष्ट तारीख के ठीक पूर्व प्रवृत्त विधि, आवश्यक उपांतरणों सहित, आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय की मुद्रा की अभिरक्षा के संबंध में लागू होगी ।
37. रिटों और अन्य आदेशिकाओं का प्ररूप-हैदराबाद स्थित उच्च न्यायालय द्वारा प्रयुक्त की जाने वाली, जारी की जाने वाली या दी जाने वाली रिटों तथा अन्य आदेशिकाओं के प्ररूप की बाबत धारा 30 की उपधारा (1) में निर्दिष्ट तारीख के ठीक पूर्व प्रवृत्त विधि, आवश्यक उपांतरणों सहित, आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा प्रयुक्त की जाने वाली, जारी की जाने वाली या दी जाने वाली रिटों तथा अन्य आदेशिकाओं के प्ररूप के संबंध में लागू होगी ।
38. न्यायाधीशों की शक्तियां-हैदराबाद स्थित उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति, एकल न्यायाधीश और खंड न्यायालयों की शक्तियों के संबंध में और उन शक्तियों के प्रयोग के आनुषंगिक सभी विषयों के संबंध में, धारा 30 की उपधारा (1) में निर्दिष्ट तारीख के ठीक पूर्व प्रवृत्त विधि, आवश्यक उपांतरणों सहित, आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के संबंध में लागू होगी ।
39. उच्चतम न्यायालय को अपीलों के बारे में प्रक्रिया-हैदराबाद स्थित उच्च न्यायालय तथा उसके न्यायाधीशों और खंड न्यायालयों से उच्चतम न्यायालय को अपीलों के संबंध में, धारा 30 की उपधारा (1) में निर्दिष्ट तारीख के ठीक पूर्व प्रवृत्त विधि, आवश्यक उपांतरणों सहित, आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के संबंध में लागू होगी ।
40. हैदराबाद स्थित उच्च न्यायालय से आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय को कार्यवाहियों का अंतरण-(1) इसमें इसके पश्चात् जैसा उपबंधित है उसके सिवाय, हैदराबाद स्थित उच्च न्यायालय की, धारा 30 की उपधारा (1) में निर्दिष्ट तारीख से ही, आंध्र प्रदेश राज्य के संबंध में कोई अधिकारिता नहीं होगी ।
(2) धारा 30 की उपधारा (1) में निर्दिष्ट तारीख के ठीक पूर्व हैदराबाद स्थित उच्च न्यायालय में लंबित ऐसी कार्यवाहियां, जो उस दिन से पूर्व या पश्चात् उस उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति द्वारा वाद हेतुक उत्पन्न होने के स्थान पर और अन्य परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए ऐसी कार्यवाहियों के रूप में प्रमाणित की जाएं, जिनकी सुनवाई और विनिश्चय आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा किया जाना चाहिए, ऐसे प्रमाणीकरण के पश्चात् यथाशक्य आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय को अंतरित हो जाएंगी ।
(3) इस धारा की उपधारा (1) और उपधारा (2) या धारा 33 में किसी बात के होते हुए भी, किंतु इसमें इसके पश्चात् जैसा उपबंधित है उसके सिवाय, हैदराबाद स्थित उच्च न्यायालय को अपीलों, उच्चतम न्यायालय की इजाजत के लिए आवेदनों, पुनर्विलोकन और ऐसी अन्य कार्यवाहियों के लिए आवेदनों, जिनमें ऐसी किन्हीं कार्यवहियों में धारा 30 की उपधारा (1) में निर्दिष्ट तारीख के पूर्व हैदराबाद स्थित उच्च न्यायालय द्वारा पारित किसी आदेश के संबंध में कोई अनुतोष मांगा गया है, को ग्रहण करने, सुनवाई करने या उनका निपटारा करने की अधिकारिता होगी और आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय को नहीं होगी :
परंतु हैदराबाद स्थित उच्च न्यायालय द्वारा ऐसी कार्यवाहियों को ग्रहण किए जाने के पश्चात् उस उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति को यह प्रतीत होता है कि उन कार्यवाहियों को आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय को अंतरित किया जाना चाहिए, तो वह यह आदेश करेगा कि वे इस प्रकार अंतरित की जाएं और ऐसी कार्यवाहियां उसके पश्चात् तदनुसार अंतरित हो जाएंगी ।
(4) हैदराबाद स्थित उच्च न्यायालय द्वारा, -
(क) धारा 30 की उपधारा (1) में निर्दिष्ट तारीख के पूर्व, उपधारा (2) के आधार पर आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय को अंतरित किन्हीं कार्यवाहियों में, या
(ख) ऐसी कार्यवाहियों में, जिनकी बाबत हैदराबाद स्थित उच्च न्यायालय को उपधारा (3) के आधार पर अधिकारिता रही है,
किया गया कोई आदेश सभी प्रयोजनों के लिए हैदराबाद स्थित उच्च न्यायालय के आदेश के रूप में ही प्रभावी नहीं रहेगा, बल्कि आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश के रूप में भी प्रभावी रहेगा ।
41. आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय को अंतरित कार्यवाहियों में उपसंजात होने या कार्रवाई करने का अधिकार-ऐसे किसी व्यक्ति को, जो धारा 30 की उपधारा (1) में निर्दिष्ट तारीख के ठीक पूर्व हैदराबाद स्थित उच्च न्यायालय में विधि व्यवसाय करने के लिए हकदार अधिवक्ता है या उसमें विधि व्यवसाय करने के लिए कोई अन्य हकदार व्यक्ति है और जो धारा 40 के अधीन उस उच्च न्यायालय से आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय को अंतरित कार्यवाहियों में उपसंजात होने के लिए प्राधिकृत था, उन कार्यवाहियों के संबंध में आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय में उपसंजात होने का अधिकार होगा ।
42. निर्वचन-धारा 40 के प्रयोजनों के लिए, -
(क) किसी न्यायालय में कार्यवाहियां तब तक लंबित समझी जाएंगी, जब तक उस न्यायालय द्वारा पक्षकारों के बीच सभी विवाद्यकों का, जिनके अंतर्गत कार्यवाहियों के खर्चे के विनिर्धारण की बाबत कोई विवाद्यक भी हैं, निपटारा नहीं कर दिया जाता है और उसके अंतर्गत अपीलें, उच्चतम न्यायालय को अपील करने की इजाजत के लिए आवेदन, पुनर्विलोकन के लिए आवेदन, पुनरीक्षण के लिए अर्जियां और रिट याचिकाएं भी हैं; और
(ख) किसी उच्च न्यायालय के प्रति निर्देशों का अर्थ यह लगाया जाएगा कि उसके अंतर्गत किसी न्यायाधीश या खंड न्यायालय के प्रति निर्देश हैं और किसी न्यायालय या न्यायाधीश द्वारा किए गए किसी आदेश के प्रति निर्देशों का अर्थ यह लगाया जाएगा कि उनके अंतर्गत उस न्यायालय या न्यायाधीश द्वारा किए गए किसी दंडादेश, पारित निर्णय या डिक्री के प्रति निर्देश है ।
43. व्यावृत्तियां-इस भाग की कोई बात संविधान के किन्हीं उपबंधों के आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय को लागू होने पर प्रभाव नहीं डालेगी और इस भाग का प्रभाव किसी ऐसे उपबंध के अधीन रहते हुए होगा, जो धारा 30 की उपधारा (1) में निर्दिष्ट तारीख को या उसके पश्चात् उस उच्च न्यायालय की बाबत किसी विधान-मंडल या ऐसा उपबंध करने की शक्ति रखने वाले किसी अन्य प्राधिकारी द्वारा किया जाए ।
भाग 5
व्यय का प्राधिकृत किया जाना और राजस्व का वितरण
44. तेलंगाना राज्य के व्यय को प्राधिकृत किया जाना-विद्यमान आंध्र प्रदेश राज्य का राज्यपाल, नियत दिन के पूर्व किसी भी समय, तेलंगाना राज्य की संचित निधि में से ऐसा व्यय प्राधिकृत कर सकेगा, जो वह तेलंगाना राज्य की विधान सभा द्वारा ऐसे व्यय की मंजूरी के लंबित रहने तक, नियत दिन से आरंभ होने वाली छह मास से अनधिक की किसी अवधि के लिए आवश्यक समझे:
परंतु तेलंगाना का राज्यपाल, नियत दिन के पश्चात् तेलंगाना राज्य की संचित निधि में से ऐसा अतिरिक्त व्यय, ऐसी किसी अवधि के लिए, जो छह मास की उक्त अवधि के परे की नहीं होगी, जो वह आवश्यक समझे, प्राधिकृत कर सकेगा ।
45. आंध्र प्रदेश राज्य के लेखाओं से संबंधित रिपोर्टें-(1) नियत दिन के पूर्व की किसी अवधि की बाबत अनुच्छेद 151 के खंड (2) में निर्दिष्ट भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक की विद्यमान आंध्र प्रदेश राज्य के लेखाओं से संबंधित रिपोर्टों को प्रत्येक उत्तरवर्ती आंध्र प्रदेश और तेलंगाना राज्यों के राज्यपाल को प्रस्तुत किया जाएगा, जो उनको उस राज्य के विधान-मंडल के समक्ष रखवाएगा ।
(2) राष्ट्रपति, आदेश द्वारा, -
(क) वित्तीय वर्ष के दौरान नियत दिन के पूर्व की किसी अवधि की बाबत या किसी पूर्वतर वित्तीय वर्ष की बाबत किसी सेवा पर आंध्र प्रदेश की संचित निधि में से उपगत ऐसे किसी व्यय को, जो उस सेवा के लिए और उस वर्ष के लिए अनुदत्त रकम के, जैसा उपधारा (1) में निर्दिष्ट रिपोर्टों में प्रकट किया गया हो, आधिक्य में हो, सम्यक्त रूप से प्राधिकृत किया गया घोषित कर सकेगा; और
(ख) उक्त रिपोर्टों से उ-ूत किसी विषय पर की जाने वाली किसी कार्रवाई का उपबंध कर सकेगा ।
46. राजस्व का वितरण-(1) तेरहवें वित्त आयोग द्वारा विद्यमान आंध्र प्रदेश राज्य को दिए गए राजस्व को केन्द्रीय सरकार द्वारा उत्तरवर्ती राज्यों के बीच जनसंख्या अनुपात तथा अन्य सन्नियमों के आधार पर प्रभाजित किया जाएगा:
परंतु नियत दिन को, राष्ट्रपति, चौदहवें वित्त आयोग को उत्तरवर्ती राज्यों को उपलब्ध संसाधनों को ध्यान में रखने के लिए और प्रत्येक उत्तरवर्ती राज्य के लिए पृथक्त-पृथक्त अधिनिर्णय करने के लिए निर्देश करेगा ।
(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, केंद्रीय सरकार, उत्तरवर्ती आंध्र प्रदेश राज्य को उपलब्ध संसाधनों को ध्यान में रखते हुए समुचित अनुदान कर सकेगी और इस बात को भी सुनिश्चित कर सकेगी कि उस राज्य के पिछड़े क्षेत्रों को विशेष विकास पैकेज के रूप में पर्याप्त फायदे और प्रोत्साहन दिए जाएं ।
(3) केंद्रीय सरकार, उत्तरवर्ती आंध्र प्रदेश राज्य के लिए विशेष विकास पैकेज पर विचार करते हुए उस राज्य के विशिष्टतया रायलसीमा और उत्तरी तटीय क्षेत्रों में पर्याप्त प्रोत्साहन उपलब्ध कराएगी ।
भाग 6
आस्तियों और दायित्वों का प्रभाजन
47. भाग का लागू होना-(1) इस भाग के उपबंध विद्यमान आंध्र प्रदेश राज्य की नियत दिन के ठीक पूर्व की आस्तियों और दायित्वों के प्रभाजन के संबंध में लागू होंगे ।
(2) उत्तरवर्ती राज्य उन फायदों को, जो विद्यमान आंध्र प्रदेश राज्य द्वारा किए गए विनिश्चयों से उ-ूत हों, प्राप्त करने के हकदार होंगे और उत्तरवर्ती राज्य, विद्यमान आंध्र प्रदेश राज्य द्वारा किए गए विनिश्चयों से उ-ूत वित्तीय दायित्वों को वहन करने के दायी होंगे ।
(3) आस्तियों और दायित्वों का प्रभाजन ऐसे वित्तीय समायोजन के अधीन होगा जो उत्तरवर्ती राज्यों के बीच आस्तियों और दायित्वों के न्यायोचित, युक्तियुक्त और साम्यापूर्ण प्रभाजन को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक हों ।
(4) वित्तीय आस्तियों और दायित्वों की रकम के संबंध में किसी विवाद का निपटारा आपसी करार से, और उसमें असफल रहने पर केंद्रीय सरकार द्वारा, भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक की सलाह पर, आदेश द्वारा, किया जाएगा ।
48. भूमि और माल-(1) इस भाग के अन्य उपबंधों के अधीन रहते हुए, विद्यमान आंध्र प्रदेश राज्य से संबद्ध समस्त भूमि और समस्त सामान, वस्तुंएं और अन्य माल, -
(क) यदि अंतरित राज्यक्षेत्र के भीतर हों, तो तेलंगाना राज्य को संक्रांत हो जाएंगे; अथवा
(ख) किसी अन्य मामले में, आंध्र प्रदेश राज्य की संपत्ति बने रहेंगे:
परन्तु संपत्तियों के विद्यमान आंध्र प्रदेश राज्य के बाहर स्थित होने की दशा में, ऐसी संपत्तियों को उत्तरवर्ती राज्यों के बीच जनसंख्या अनुपात के आधार पर प्रभाजित किया जाएगा:
परंतु यह और कि जहां केंद्रीय सरकार की यह राय है कि किसी माल या किसी वर्ग के माल का वितरण आंध्र प्रदेश और तेलंगाना राज्यों के बीच, माल की अवस्थिति के अनुसार न होकर अन्यथा होना चाहिए, वहां केंद्रीय सरकार माल के न्यायोचित और साम्यापूर्ण वितरण के लिए ऐसे निदेश जारी कर सकेगी जो वह ठीक समझे और वह माल तदनुसार उत्तरवर्ती राज्यों को संक्रांत हो जाएगा:
परंतु यह भी कि इस उपधारा के अधीन किसी माल या माल के किसी वर्ग के वितरण के संबंध में कोई विवाद होने की दशा में, केंद्रीय सरकार ऐसे विवाद का निपटारा उस प्रयोजन के लिए उत्तरवर्ती राज्यों की सरकारों के बीच हुए आपसी करार के माध्यम से करने का प्रयास करेगी, ऐसा करने में असफल रहने पर केंद्रीय सरकार उत्तरवर्ती राज्यों की सरकारों में से किसी के द्वारा किए गए अनुरोध पर, उत्तरवर्ती राज्यों की सरकारों से परामर्श करने के पश्चात्, इस उपधारा के अधीन, यथास्थिति, ऐसे माल या माल के ऐसे वर्ग के वितरण के लिए ऐसा निदेश जारी कर सकेगी, जो वह ठीक समझे ।
(2) विनिर्दिष्ट प्रयोजनों के लिए, जैसे कि विशिष्ट संस्थाओं, कर्मशालाओं या उपक्रमों में या सन्निर्माणाधीन विशेष संकर्मों पर प्रयोग या उपयोग के लिए रखा हुआ सामान उन उत्तरवर्ती राज्यों को संक्रान्त हो जाएगा, जिनके राज्यक्षेत्र में ऐसी संस्थाएं, कर्मशालाएं, उपक्रम या संकर्म अवस्थित हों ।
(3) सचिवालय से और संपूर्ण विद्यमान आंध्र प्रदेश राज्य पर अधिकारिता रखने वाले विभागाध्यक्षों के कार्यालयों से संबंधित सामान को उत्तरवर्ती राज्यों के बीच जनसंख्या के आधार पर विभाजित किया जाएगा ।
(4) इस धारा में भूमि" पद के अन्तर्गत प्रत्येक प्रकार की स्थावर संपत्ति तथा ऐसी संपत्ति में या उस पर के कोई अधिकार हैं और भूमि" पद के अन्तर्गत सिक्के, बैंक नोट तथा करेंसी नोट नहीं आते हैं ।
49. खजाना और बैंक अतिशेष-नियत दिन के ठीक पूर्व, विद्यमान आंध्र प्रदेश राज्य के सभी खजानों के नकद अतिशेषों और भारतीय रिजर्व बैंक, भारतीय स्टेट बैंक या किसी अन्य बैंक के पास विद्यमान आंध्र प्रदेश राज्य के जमा अतिशेषों के योग का आंध्र प्रदेश और तेलंगाना राज्यों के बीच विभाजन जनसंख्या के अनुपात के आधार पर किया जाएगा:
परन्तु ऐसे विभाजन के प्रयोजनों के लिए नकद अतिशेषों का किसी एक खजाने से दूसरे खजाने को कोई अंतरण नहीं किया जाएगा और प्रभाजन भारतीय रिजर्व बैंक की बहियों में नियत दिन को दोनों राज्यों के जमा अतिशेषों को समायोजित करके किया जाएगा:
परन्तु यह और कि यदि नियत दिन को तेलंगाना राज्य का भारतीय रिजर्व बैंक में कोई खाता नहीं है, तो समायोजन ऐसी रीति से किया जाएगा, जैसे केन्द्रीय सरकार, आदेश द्वारा, निदेश दे ।
50. करों की बकाया-संपत्ति पर कर या शुल्क की बकाया को, जिसके अन्तर्गत भू-राजस्व की बकाया भी है, वसूल करने का अधिकार उस उत्तरवर्ती राज्य का होगा जिसमें वह संपत्ति स्थित है, और किसी अन्य कर या शुल्क की बकाया की वसूली का अधिकार उस उत्तरवर्ती राज्य का होगा जिसके राज्यक्षेत्रों में नियत दिन को उस कर या शुल्क के निर्धारण का स्थान सम्मिलित किया जाता है ।
51. उधारों और अग्रिमों को वसूल करने का अधिकार-(1) विद्यमान आंध्र प्रदेश राज्य का उस राज्य के भीतर किसी क्षेत्र में किसी स्थानीय निकाय, सोसाइटी, कृषक या अन्य व्यक्ति को नियत दिन के पूर्व दिए गए किन्हीं उधारों या अग्रिमों की वसूली का अधिकार उस उत्तरवर्ती राज्य का होगा जिसमें उस दिन वह क्षेत्र सम्मिलित किया जाता है ।
(2) विद्यमान आंध्र प्रदेश राज्य का उस राज्य के बाहर के किसी व्यक्ति या संस्था को, नियत दिन के पूर्व दिए गए उधारों या अग्रिमों को वसूल करने का अधिकार आंध्र प्रदेश राज्य का होगा:
परन्तु किसी ऐसे उधार या अग्रिम की बाबत वसूल की गई किसी राशि का विभाजन आंध्र प्रदेश और तेलंगाना राज्यों के बीच जनसंख्या के अनुपात के आधार पर किया जाएगा ।
52. कतिपय निधियों में विनिधान और जमा-(1) सातवीं अनुसूची में यथाविनिर्दिष्ट विद्यमान आंध्र प्रदेश राज्य के नकद अतिशेष विनिधान लेखा या लोक लेखा की किसी निधि से किए गए विनिधानों की बाबत धारित प्रतिभूतियों का प्रभाजन, उत्तरवर्ती राज्यों की जनसंख्या के अनुपात के आधार पर किया जाएगा:
परन्तु विद्यमान आंध्र प्रदेश राज्य को आपदा राहत निधि में से किए गए विनिधानों में धारित प्रतिभूतियों को उत्तरवर्ती राज्य के अधिभोगाधीन राज्यक्षेत्रों के क्षेत्र के अनुपात में विभाजित किया जाएगा ।
(2) नियत दिन के ठीक पूर्व विद्यमान आंध्र प्रदेश राज्य की किसी ऐसी विशेष निधि में विनिधान, जिसके उद्देश्य किसी स्थानीय क्षेत्र तक सीमित हैं, उस राज्य के होंगे, जिसमें नियत दिन को वह क्षेत्र सम्मिलित किया जाता है:
परन्तु विद्यमान राज्य के भिन्न-भिन्न भागों में स्थित बहुल इकाइयों पर ऐसी विशेष निधियों में के विनिधानों को, और ऐसे भाग आंध्र प्रदेश तथा तेलंगाना राज्यों के राज्यक्षेत्रों के अन्तर्गत आते हैं, उत्तरवर्ती राज्यों के बीच जनसंख्या अनुपात के आधार पर प्रभाजित किया जाएगा ।
(3) नियत दिन के ठीक पूर्व विद्यमान आंध्र प्रदेश राज्य के किसी प्राइवेट, वाणिज्यिक या औद्योगिक उपक्रम में के ऐसे विनिधान, जिनके उद्देश्य किसी स्थानीय क्षेत्र तक सीमित हैं, उस उत्तरवर्ती राज्य से संबंधित होंगे जिसमें ऐसा क्षेत्र नियत दिन को सम्मिलित किया जाता है:
परन्तु ऐसी इकाइयों में, जिनकी विद्यमान राज्य के भिन्न-भिन्न भागों में स्थित बहुल इकाइयां हैं और ऐसे भाग आंध्र प्रदेश तथा तेलंगाना राज्यों के राज्यक्षेत्रों के अन्तर्गत आते हैं, विनिधानों को उत्तरवर्ती राज्यों के बीच जनसंख्या अनुपात के आधार पर प्रभाजित किया जाएगा ।
(4) जहां भाग 2 के उपबंधों के आधार पर, किसी केन्द्रीय अधिनियम, राज्य अधिनियम या प्रांतीय अधिनियम के अधीन विद्यमान आंध्र प्रदेश राज्य या उसके किसी भाग के लिए गठित कोई निगमित निकाय अंतरराज्यिक निगमित निकाय हो जाता है, वहां, विद्यमान आंध्र प्रदेश राज्य द्वारा नियत दिन के पूर्व किसी ऐसे निगमित निकाय में के विनिधानों या उसे दिए गए उधारों या अग्रिमों का विभाजन, इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन अभिव्यक्त रूप से अन्यथा उपबंधित के सिवाय आंध्र प्रदेश और तेलंगाना राज्यों के बीच उसी अनुपात में किया जाएगा, जिसमें उस निगमित निकाय की आस्तियों का इस भाग के उपबंधों के अधीन विभाजन किया जाता है ।
53. राज्य उपक्रम की आस्तियां और दायित्व-(1) विद्यमान आंध्र प्रदेश राज्य के किसी वाणिज्यिक या औद्योगिक उपक्रम से संबंधित आस्तियां और दायित्व, जहां ऐसा उपक्रम या उसका कोई भाग अनन्य रूप से किसी स्थानीय क्षेत्र में अवस्थित है या उसका प्रचालन उस तक सीमित है, उसके मुख्यालय की अवस्थिति को विचार में लिए बिना उस राज्य को संक्रान्त हो जाएंगे जिसमें वह क्षेत्र नियत दिन को सम्मिलित किया गया है:
परन्तु जहां ऐसे उपक्रम का प्रचालन भाग 2 के उपबंधों के आधार पर अन्तरराज्यिक बन जाता है, वहां-
(क) उस उपक्रम की प्रचालन इकाइयों की आस्तियों और दायित्वों का प्रभाजन उत्तरवर्ती राज्यों के बीच अवस्थिति के आधार पर किया जाएगा; और
(ख) उस उपक्रम के मुख्यालय की आस्तियों और दायित्वों का प्रभाजन दोनों उत्तरवर्ती राज्यों के बीच जनसंख्या अनुपात के आधार पर किया जाएगा ।
(2) आस्तियों और दायित्वों के प्रभाजन पर, ऐसी आस्तियों और दायित्वों को पारस्परिक करार पर अथवा ऐसे किसी अन्य ढंग के माध्यम से, जो उत्तरवर्ती राज्यों द्वारा करार पाया जाए, संदाय या समायोजन करके भौतिक रूप में अन्तरित किया जाएगा ।
54. लोक ऋण-(1) विद्यमान आंध्र प्रदेश राज्य के लोक ऋण और लोक लेखा मद्धे ऐसे सभी दायित्वों का प्रभाजन, जो नियत दिन के ठीक पूर्व बकाया थे, जब तक कि इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन प्रभाजन का कोई भिन्न ढंग उपबंधित न हो, उत्तरवर्ती राज्यों की जनसंख्या के अनुपात में किया जाएगा ।
(2) उत्तरवर्ती राज्यों को आबंटित किए जाने वाले दायित्वों की विभिन्न मदें और एक उत्तरवर्ती राज्य द्वारा दूसरे उत्तरवर्ती राज्य को किए जाने वाले अपेक्षित अभिदाय की रकम वह होगी जो केन्द्रीय सरकार द्वारा, भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक की सलाह पर, आदिष्ट की जाए:
परन्तु ऐसे आदेश जारी किए जाने तक, विद्यमान आंध्र प्रदेश राज्य के लोक ऋण और लोक लेखा मद्धे दायित्व उत्तरवर्ती आंध्र प्रदेश राज्य के दायित्व बने रहेंगे ।
(3) विद्यमान आंध्र प्रदेश राज्य किसी भी स्रोत से लिए गए उधार और ऐसी इकाइयों को, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा विनिर्दिष्टकी जाएं, और जिनका प्रचालन क्षेत्र दोनों में से किसी उत्तरवर्ती राज्य तक सीमित है, पुनः उधार देने मद्धे दायित्व उपधारा (4) में यथाविनिर्दिष्ट संबंधित राज्य को न्यागत हो जाएगा ।
(4) विद्यमान आंध्र प्रदेश राज्य का लोक ऋण, जो उस उधार के कारण माना जा सकता है जो किसी विनिर्दिष्ट संस्था को उसे पुनः उधार देने के अभिव्यक्त प्रयोजनार्थ किसी स्रोत से लिया गया हो और नियत दिन के ठीक पूर्व बकाया हो-
(क) यदि किसी स्थानीय क्षेत्र में के किसी स्थानीय निकाय, निगमित निकाय या अन्य संस्था को पुनः उधार दिया गया हो तो वह उस राज्य का ऋण होगा जिसमें नियत दिन को वह स्थानीय क्षेत्र सम्मिलित किया जाता है; या
(ख) यदि किसी अन्य ऐसे निगम या संस्था को, जो नियत दिन को अन्तरराज्यिक निगम या संस्था बन जाती है, पुनः उधार दिया गया हो तो आंध्र प्रदेश और तेलंगाना राज्यों में उसका विभाजन उसी अनुपात में किया जाएगा जिसमें ऐसे निगमित निकाय या ऐसी संस्था की आस्तियों का विभाजन भाग 7 के उपबंधों के अधीन किया जाता है ।
(5) जहां विद्यमान आंध्र प्रदेश राज्य द्वारा कोई निक्षेप निधि या अवक्षयण निधि उसके द्वारा लिए गए किसी उधार के प्रतिसंदाय के लिए रखी गई हो, वहां उस निधि में से किए गए विनिधानों की बाबत धारित प्रतिभूतियों का उत्तरवर्ती आंध्र प्रदेश और तेलंगाना राज्यों में विभाजन उसी अनुपात में किया जाएगा जिसमें इस धारा के अधीन दोनों राज्यों के बीच संपूर्ण लोक ऋण का विभाजन किया जाता है ।
(6) इस धारा में, सरकारी प्रतिभूति" पद से कोई ऐसी प्रतिभूति अभिप्रेत है जो लोक ऋण लेने के प्रयोजन के लिए राज्य सरकार द्वारा सृजित और जारी की गई है और जो लोक ऋण अधिनियम, 1944 (1944 का 18) की धारा 2 के खंड (2) में विनिर्दिष्टया उसके अधीन विहित प्ररूपों में से किसी प्ररूप की है ।
55. प्लवमान ऋण-किसी स्थानीय निकाय, निगमित निकाय या अन्य संस्था की लघु अवधि के वित्तपोषण का उपबंध करने के लिए किसी प्लवमान ऋण की बाबत विद्यमान आंध्र प्रदेश राज्य के सभी दायित्वों का अवधारण निम्नलिखित आधार पर किया जाएगा, अर्थात्: -
(क) यदि, प्लवमान ऋण के प्रयोजन, नियत दिन से ही, किसी भी उत्तरवर्ती राज्य के अनन्य प्रयोजन हैं, तो उस राज्य के दायित्व होंगे;
(ख) किसी अन्य दशा में, उन्हें जनसंख्या अनुपात के आधार पर विभाजित किया जाएगा ।
56. आधिक्य में संगृहीत करों का प्रतिदाय-(1) संपत्ति पर संगृहीत आधिक्य किसी कर या शुल्क का, जिसके अन्तर्गत भू-राजस्व भी है, प्रतिदाय करने का विद्यमान आंध्र प्रदेश राज्य का दायित्व उस उत्तरवर्ती राज्य का दायित्व होगा, जिसके राज्यक्षेत्रों में वह संपत्ति अवस्थित है तथा संगृहीत आधिक्य किसी अन्य कर या शुल्क का प्रतिदाय करने का विद्यमान आंध्र प्रदेश राज्य का दायित्व उस उत्तरवर्ती आंध्र प्रदेश और तेलंगाना राज्यों के बीच जनसंख्या अनुपात के आधार पर प्रभाजित किया जाएगा और ऐसे दायित्व का उन्मोचन करने वाला राज्य दूसरे राज्य से, दायित्व के अपने हिस्से को, यदि कोई हो, प्राप्त करने का हकदार होगा ।
(2) नियत दिन को संपत्ति पर संगृहीत आधिक्य किसी अन्य कर या शुल्क का विद्यमान आंध्र प्रदेश राज्य का दायित्व उस उत्तरवर्ती राज्य का दायित्व होगा, जिसके राज्यक्षेत्रों में ऐसे कर या शुल्क के निर्धारण का स्थान सम्मिलित किया गया है और विद्यमान आंध्र प्रदेश राज्य का संगृहीत आधिक्य किसी अन्य कर या शुल्क का प्रतिदाय करने के दायित्व का प्रभाजन उत्तरवर्ती आंध्र प्रदेश और तेलंगाना राज्यों के बीच जनसंख्या अनुपात के आधार पर प्रभाजित किया जाएगा और अपने दायित्व का उन्मोचन करने वाला राज्य दूसरे राज्य से अपने दायित्व के अपने हिस्से को, यदि कोई हो, प्राप्त करने का हकदार होगा ।
57. निक्षेप, आदि-(1) विद्यमान आंध्र प्रदेश राज्य का किसी सिविल निक्षेप या स्थानीय निधि निक्षेप की बाबत दायित्व नियत दिन से उस उत्तरवर्ती राज्य का दायित्व होगा जिसके क्षेत्र में निक्षेप किया गया है ।
(2) विद्यमान आंध्र प्रदेश राज्य का किसी पूर्त या अन्य विन्यास की बाबत नियत दिन से उस उत्तरवर्ती राज्य का दायित्व होगा जिसके क्षेत्र में विन्यास का फायदा पाने की हकदार संस्था अवस्थित है या उस उत्तरवर्ती राज्य का होगा जिस तक विन्यास के उद्देश्य, उसके निबंधनों के अधीन सीमित हैं:
परन्तु नियत दिन के पूर्व संपूर्ण राज्य पर अधिकारिता रखने वाले विद्यमान आंध्र प्रदेश राज्य द्वारा बनाए रखे गए कोई सिविल निक्षेपों या ऋण निधियों या पूर्त अथवा अन्य विन्यास निधियों को उत्तरवर्ती राज्यों के बीच जनसंख्या अनुपात के आधार पर प्रभाजित किया जाएगा ।
58. भविष्य निधि-नियत दिन को सेवारत किसी सरकारी सेवक के भविष्य निधि खाते की बाबत विद्यमान आंध्र प्रदेश राज्य का दायित्व, उस दिन से उस उत्तरवर्ती राज्य का दायित्व होगा जिसे वह सरकारी सेवक स्थायी रूप से आबंटित किया गया हो ।
59. पेंशन-पेंशनों की बाबत विद्यमान आंध्र प्रदेश राज्य का दायित्व, उत्तरवर्ती आंध्र प्रदेश और तेलंगाना राज्यों को या उसका उनके बीच इस अधिनियम की आठवीं अनुसूची में अन्तर्विष्ट उपबंधों के अऩुसार संक्रान्त होगा या उनका प्रभाजन किया जाएगा ।
60. संविदाएं-(1) जहां विद्यमान आंध्र प्रदेश राज्य ने अपनी कार्यपालिका शक्ति का प्रयोग करते हुए राज्य के किन्हीं प्रयोजनों के लिए कोई संविदा नियत दिन के पूर्व की हो वहां वह संविदा, -
(क) यदि संविदा के प्रयोजन, नियत दिन से ही, उत्तरवर्ती आंध्र प्रदेश और तेलंगाना राज्यों में से किसी के अनन्य प्रयोजन हों, तो उस राज्य की कार्यपालिका शक्ति के प्रयोग में की गई समझी जाएगी और दायित्व का उन्मोचन उस राज्य द्वारा किया जाएगा; और
(ख) किसी अन्य दशा में उन सभी अधिकारों तथा दायित्वों को, जो ऐसी किसी संविदा के अधीन प्रो-ूत हुए हैं या प्रो-ूत हों, उत्तरवर्ती राज्यों के बीच जनसंख्या अनुपात के आधार पर या ऐसी किसी अन्य रीति में, जो उत्तरवर्ती राज्यों द्वारा करार पाई जाएं, प्रभाजित किया जाएगा:
(2) इस धारा के प्रयोजनों के लिए, ऐसे दायित्वों के अन्तर्गत, जो किसी संविदा के अधीन प्रो-ूत हुए हैं या प्रो-ूत हों, --
(क) उस संविदा से संबंधित कार्यवाहियों में किसी न्यायालय या अन्य अधिकरण द्वारा किए गए किसी आदेश या अधिनिर्णय की तुष्टि करने का कोई दायित्व; और
(ख) ऐसी किन्हीं कार्यवाहियों में या उनके संबंध में उपगत व्ययों की बाबत कोई दायित्व,
भी सम्मिलित समझा जाएगा ।
(3) यह धारा इस भाग के उधारों, प्रत्याभूतियों और अन्य वित्तीय बाध्यताओं की बाबत दायित्वों के प्रभाजन से संबंधित अन्य उपबंधों के अधीन रहते हुए प्रभावी होगी, और बैंक अतिशेष और प्रतिभूतियों के विषय में कार्यवाही, उनके संविदात्मक अधिकारों की प्रकृति के होते हुए भी उन उपबंधों के अधीन की जाएगी ।
61. अनुयोज्य दोष की बाबत दायित्व-जहां, नियत दिन के ठीक पूर्व, विद्यमान आंध्र प्रदेश राज्य संविदा भंग से भिन्न किसी अनुयोज्य दोष की बाबत किसी दायित्व के अधीन हैं, वहां, -
(क) वह दायित्व, उस दशा में, जब वाद-हेतुक पूर्णतया उन राज्यक्षेत्रों के भीतर उ-ूत हुआ है, जो उस दिन से उत्तरवर्ती आंध्र प्रदेश या तेलंगाना राज्यों में से किसी के राज्यक्षेत्र हैं, उस उत्तरवर्ती राज्य का दायित्व होगा; और
(ख) वह दायित्व किसी अन्य दशा में, उत्तरवर्ती राज्यों के बीच जनसंख्या अनुपात के आधार पर या ऐसी किसी अन्य रीति में, जो उत्तरवर्ती राज्यों द्वारा करार पाई जाए, प्रभाजित किया जाएगा ।
62. प्रत्याभूतिदाता के रूप में दायित्व-जहां, नियत दिन के ठीक पूर्व, विद्यमान आंध्र प्रदेश राज्य किसी रजिस्ट्रीकृत सहकारी सोसाइटी या अन्य व्यक्ति के किसी दायित्व के बारे में प्रत्याभूतिदाता के रूप में दायी हो वहां, -
(क) वह दायित्व उस दशा में, यदि उस सोसाइटी या व्यक्तियों का कार्यक्षेत्र उन राज्यक्षेत्रों तक सीमित है जो उस दिन से आंध्र प्रदेश या तेलंगाना राज्यों में से किसी के राज्यक्षेत्र हैं, उस राज्य का दायित्व होगा; और
(ख) वह दायित्व, किसी अन्य दशा में, उत्तरवर्ती राज्यों के बीच जनसंख्या अनुपात के आधार पर या ऐसी किसी अन्य रीति में, जो उत्तरवर्ती राज्यों द्वारा करार पाई जाए, प्रभाजित किया जाएगा ।
63. उचंत मदें-यदि किसी उचंत मद के बारे में अंततोगत्वा यह पाया जाता है कि उसका इस भाग के पूर्वगामी उपबंधों में से किसी में निर्दिष्ट प्रकार की किसी आस्ति या दायित्व पर प्रभाव पड़ता है तो उसके संबंध में उस उपबंध के अनुसार कार्यवाही की जाएगी ।
64. अवशिष्ट उपबंध-विद्यमान आंध्र प्रदेश की किसी ऐसी आस्ति का फायदा या दायित्व का भार, जिसके बारे में इस भाग के पूर्वगामी उपबंधों में कोई उपबंध नहीं है, प्रथमतः आंध्र प्रदेश राज्य को, ऐसे वित्तीय समायोजन के अधीन रहते हुए जो आंध्र प्रदेश और तेलंगाना राज्यों के बीच करार पाया जाए, या ऐसे करार के अभाव में, जैसे केन्द्रीय सरकार, आदेश द्वारा, निदेश दे, संक्रांत हो जाएगा ।
65. आस्तियों या दायित्व का करार द्वारा प्रभाजन-जहां उत्तरवर्ती आंध्र प्रदेश और तेलंगाना राज्यों के बीच यह करार पाया जाता है कि किसी विशिष्ट आस्ति के फायदे या दायित्व के भार का उनके बीच प्रभाजन ऐसी रीति से किया जाना चाहिए जो इस भाग के पूर्वगामी उपबंधों में उपबंधित रीति से भिन्न है, वहां उनमें अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, उस आस्ति के फायदे या दायित्व के भार का प्रभाजन उस रीति से किया जाएगा, जो करार पाई जाए ।
66. कतिपय मामलों में आबंटन या समायोजन का आदेश करने की केन्द्रीय सरकार की शक्ति-जहां, उत्तरवर्ती आंध्र प्रदेश और तेलंगाना राज्यों में से कोई भी, इस भाग के उपबंधों में से किसी के आधार पर, किसी संपत्ति का हकदार हो जाता है या कोई फायदा अभिप्राप्त कर लेता है या किसी दायित्व के अधीन हो जाता है और नियत दिन से तीन वर्ष की अवधि के भीतर दोनों में से किसी राज्य द्वारा निर्देश किए जाने पर केन्द्रीय सरकार की यह राय हो कि यह न्यायसंगत और साम्यापूर्ण है कि वह संपत्ति या वे फायदे दूसरे उत्तरवर्ती राज्य को अन्तरित किए जाने चाहिएं, वहां उक्त संपत्ति या फायदों का आबंटन दोनों राज्यों के बीच ऐसी रीति से किया जाएगा या दूसरा राज्य उस राज्य को, जो उस दायित्व के अधीन है, उसके बारे में ऐसा अभिदाय करेगा, जो केन्द्रीय सरकार, दोनों राज्य सरकारों से परामर्श के पश्चात्, आदेश द्वारा, अवधारित करे ।
67. कतिपय व्यय का संचित निधि पर भारित होना-इस अधिनियम के उपबंधों के आधार पर, यथास्थिति, आंध्र प्रदेश राज्य द्वारा या तेलंगाना राज्य द्वारा अन्य राज्यों को या केन्द्रीय सरकार द्वारा उत्तरवर्ती राज्यों को संदेय सभी राशियां, यथास्थिति, उस राज्य की संचित निधि पर, जिसके द्वारा ऐसी राशियां संदेय हों, या भारत की संचित निधि पर, भारित होंगी ।
भाग 7
कतिपय निगमों के बारे में उपबंध
68. विभिन्न कंपनियों और निगमों के बारे में उपबंध-(1) विद्यमान आंध्र प्रदेश राज्य के लिए गठित नवीं अनुसूची में विनिर्दिष्टकंपनियां और निगम नियत दिन से ही उन क्षेत्रों में, जिनकी बाबत उस दिन के ठीक पूर्व वे कार्य कर रहे थे, इस धारा के उपबंधों के अधीन कार्य करते रहेंगे ।
(2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट कंपनियों और निगमों की आस्तियों, अधिकारों तथा दायित्वों को उत्तरवर्ती राज्यों के बीच धारा 53 में उपबंधित रीति में प्रभाजित किया जाएगा ।
69. विद्युत शक्ति के उत्पादन और प्रदाय तथा जल के प्रदाय के बारे में व्यवस्थाओं का बना रहना-यदि केन्द्रीय सरकार को यह प्रतीत होता है कि किसी क्षेत्र के लिए विद्युत शक्ति के उत्पादन या प्रदाय या जल प्रदाय के बारे में या ऐसे उत्पादन या प्रदाय के लिए किसी परियोजना के निष्पादन के बारे में व्यवस्था का उस क्षेत्र के लिए अहितकर रूप में उपांतरण इस तथ्य के कारण हो गया है या उपांतरण होने की संभावना है कि वह क्षेत्र भाग 2 के उपबंधों के आधार पर उस राज्य से बाहर हो गया है, जिसमें, यथास्थिति, ऐसी शक्ति के उत्पादन और प्रदाय के लिए विद्युत केन्द्र और अन्य संस्थापन अथवा जल प्रदाय के लिए जलागम क्षेत्र, जलाशय और अन्य संकर्म स्थित हैं, तो केन्द्रीय सरकार, जहां कहीं आवश्यक हो, उत्तरवर्ती राज्यों की सरकारों से परामर्श करने के पश्चात्, पहले वाली व्यवस्था को, जहां तक साध्य हो, बनाए रखने के लिए ऐसे निदेश, जो वह उचित समझे, राज्य सरकार या अन्य संबद्ध प्राधिकारी को दे सकेगी और वह राज्य, जिसे ऐसे निदेश दिए गए हैं उनका पालन करेगा ।
70. आंध्र प्रदेश राज्य वित्तीय निगम के बारे में उपबंध-(1) राज्य वित्तीय निगम अधिनियम, 1951 (1951 का 63) के अधीन स्थापित आंध्र प्रदेश राज्य वित्तीय निगम नियत दिन से ही, उन क्षेत्रों में, जिनके संबंध में वह उस दिन के ठीक पूर्व कार्य कर रहा था, इस धारा के उपबंधों तथा ऐसे निदेशों के अधीन रहते हुए, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा, समय-समय पर, जारी किए जाएं, कार्य करता रहेगा ।
(2) उपधारा (1) के अधीन निगम के बारे में केन्द्रीय सरकार द्वारा जारी किए गए किन्हीं निदेशों के अन्तर्गत ऐसा निदेश भी हो सकेगा कि उक्त अधिनियम निगम के प्रति उसके लागू होने में, ऐसे अपवादों तथा उपांतरणों के अधीन रहते हुए प्रभावी होगा, जो निदेश में विनिर्दिष्ट किए जाएं ।
(3) उपधारा (1) या उपधारा (2) में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, निगम का निदेशक बोर्ड, केन्द्रीय सरकार के पूर्वानुमोदन से नियत दिन के पश्चात् किसी समय निगम के, यथास्थिति, पुनर्गठन या पुनर्संगठन या विघटन की किसी स्कीम के, जिसके अन्तर्गत नए निगमों के बनाए जाने और विद्यमान निगम की आस्तियां, अधिकार तथा दायित्व उन्हें अंतरित किए जाने के बारे में प्रस्थापनाएं भी हैं, विचारार्थ अधिवेशन बुला सकेगा और यदि केन्द्रीय सरकार द्वारा ऐसी अपेक्षा की जाए तो बुलाएगा और यदि ऐसी कोई स्कीम उपस्थित और मत देने वाले शेयरधारकों के बहुमत से साधारण अधिवेशन में पारित संकल्प द्वारा अनुमोदित कर दी जाती है तो वह स्कीम केन्द्रीय सरकार को उसकी मंजूरी के लिए प्रस्तुत की जाएगी ।
(4) यदि स्कीम केन्द्रीय सरकार द्वारा उपांतरणों के बिना या ऐसे उपांतरणों के सहित, जो साधारण अधिवेशन में अनुमोदित किए जाते हैं, मंजूर कर ली जाती है तो केन्द्रीय सरकार, स्कीम को प्रमाणित करेगी और ऐसे प्रमाणन पर वह स्कीम, तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में तत्प्रतिकूल किसी बात के होते हुए भी, उस स्कीम द्वारा प्रभावित निगमों पर तथा उनके शेयरधारकों और लेनदारों पर भी आबद्धकर होगी ।
(5) यदि स्कीम इस प्रकार अनुमोदित या मंजूर नहीं की जाती है तो केन्द्रीय सरकार इस स्कीम को आंध्र प्रदेश और तेलंगाना उच्च न्यायालय के ऐसे न्यायाधीश को, जो उसके मुख्य न्यायमूर्ति द्वारा इस निमित्त नामनिर्देशित किया जाए, निर्देशित कर सकेगी और उस स्कीम के बारे में न्यायाधीश का विनिश्चय अंतिम होगा और स्कीम द्वारा प्रभावित निगमों पर तथा उनके शेयरधारकों और लेनदारों पर भी आबद्धकर होगा ।
(6) इस धारा के पूर्ववर्ती उपबंधों की किसी बात का यह अर्थ नहीं लगाया जाएगा कि वह आंध्र प्रदेश राज्य और तेलंगाना राज्य की सरकार को, नियत दिन को या उसके पश्चात्, किसी समय राज्य वित्तीय निगम अधिनियम, 1951 (1951 का 63) के अधीन उस राज्य के लिए किसी राज्य वित्तीय निगम का गठन करने से निवारित करने वाली है ।
71. कंपनियों के बारे में कतिपय उपबंध-इस भाग में किसी बात के होते हुए भी, केन्द्रीय सरकार, इस अधिनियम की नवीं अनुसूची में विनिर्दिष्ट कंपनियों में से प्रत्येक के लिए-
(क) विद्यमान आंध्र प्रदेश राज्य के हितों और शेयरों का उत्तरवर्ती राज्यों के बीच विभाजन के बारे में;
(ख) कंपनी के निदेशक बोर्ड के पुनर्गठन की अपेक्षा करने के लिए, जिससे सभी उत्तरवर्ती राज्यों को यथोचित प्रतिनिधित्व दिया जा सके, निदेश जारी कर सकेगी ।
72. कतिपय विद्यमान सड़क परिवहन अनुज्ञापत्रों के चालू रहने के बारे में अस्थायी उपबंध-(1) मोटर यान अधिनियम, 1988 (1988 का 59) की धारा 88 में किसी बात के होते हुए भी, विद्यमान आंध्र प्रदेश राज्य के राज्य परिवहन प्राधिकारी या उस राज्य में किसी प्रादेशिक परिवहन प्राधिकारी द्वारा अनुदत्त अनुज्ञापत्र, यदि ऐसा अनुज्ञापत्र नियत दिन के ठीक पूर्व अंतरित राज्यक्षेत्र में के किसी क्षेत्र में विधिमान्य और प्रभावी था, तत्समय उस क्षेत्र में प्रवृत्त उस अधिनियम के उपबंधों के अधीन रहते हुए उस क्षेत्र में उस दिन के पश्चात् और उसकी विधिमान्यता की अवधि तक विधिमान्य और प्रभावी बना रहा समझा जाएगा और ऐसे किसी अनुज्ञापत्र को उस क्षेत्र में उपयोग के लिए उसे विधिमान्य करने के प्रयोजन के लिए तेलंगाना राज्य परिवहन प्राधिकारी या उसमें किसी प्रादेशिक परिवहन प्राधिकारी द्वारा प्रतिहस्ताक्षरित किया जाना आवश्यक नहीं होगा :
परन्तु केन्द्रीय सरकार, उन शर्तों में, जो ऐसे प्राधिकारी द्वारा, जिसके द्वारा अनुज्ञा प्रदान की गई थी अनुज्ञापत्र के साथ संलग्न की गई हों, उत्तरवर्ती राज्य सरकार या संबद्ध सरकारों से परामर्श करने के पश्चात् परिवर्धन, संशोधन या परिवर्तन कर सकेगी ।
(2) किसी ऐसे अनुज्ञापत्र के अधीन उत्तरवर्ती राज्यों में से किसी में किसी परिवहन यान को चलाने के लिए नियत दिन के पश्चात् उस परिवहन यान की बाबत कोई पथकर, प्रवेश फीस या वैसी ही प्रकृति के अन्य प्रभार उद्गृहीत नहीं किए जाएंगे यदि ऐसे यान को उस दिन के ठीक पूर्व अन्तरित राज्यक्षेत्र में चलाने के लिए ऐसे किसी पथकर, प्रवेश फीस या अन्य प्रभारों के संदाय से छूट प्राप्त हो:
परन्तु केन्द्रीय सरकार, यथास्थिति, ऐसे पथकर, प्रवेश फीस या अन्य प्रभारों के उद्ग्रहण को, संबद्ध राज्य सरकार या सरकारों से परामर्श करने के पश्चात् प्राधिकृत कर सकेगी:
परन्तु यह और कि इस उपधारा के उपबंध वहां लागू नहीं होंगे जहां ऐसे पथकर, प्रवेश फीस या इसी प्रकार के अन्य प्रभार ऐसी किसी सड़क या पुल के उपयोग के लिए उद्ग्रहणीय हैं, जिसका सन्निर्माण या विकास वाणिज्यिक प्रयोजन के लिए राज्य सरकार, राज्य सरकार के किसी उपक्रम द्वारा, ऐसे संयुक्त उपक्रम द्वारा जिसमें राज्य सरकार एक शेयरधारक है या प्राइवेट सेक्टर द्वारा किया गया है ।
73. कतिपय मामलों में छंटनी प्रतिकर से संबंधित विशेष उपबंध-जहां किसी केन्द्रीय अधिनियम, राज्य अधिनियम या प्रांतीय अधिनियम के अधीन गठित कोई निगमित निकाय, सहकारी सोसाइटियों से संबंधित किसी विधि के अधीन रजिस्ट्रीकृत कोई सहकारी सोसाइटी या उस राज्य का कोई वाणिज्यिक या औद्योगिक उपक्रम, इस अधिनियम के अधीन विद्यमान आंध्र प्रदेश राज्य के पुनर्गठन के कारण किसी भी रीति से पुनर्गठित या पुनर्संगठित किया जाता है या किसी अनन्य निगमित निकाय, सहकारी सोसाइटी या उपक्रम में समामेलित किया जाता है या विघटित किया जाता है और ऐसे पुनर्गठन, पुनर्संगठन, समामेलन या विघटन के परिणामस्वरूप ऐसे निगमित निकाय या किसी ऐसी सहकारी सोसाइटी या ऐसे उपक्रम द्वारा नियोजित किसी कर्मकार को किसी अन्य निगमित निकाय को या किसी अन्य सहकारी सोसाइटी या उपक्रम को स्थानांतरित किया जाता है या उसके द्वारा पुनर्नियोजित किया जाता है वहां औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 (1947 का 14) की धारा 25च या धारा 25चच या धारा 25चचच में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, ऐसा स्थानांतरण या पुनर्नियोजन उसे उस धारा के अधीन किसी प्रतिकर का हकदार नहीं बनाएगा :
परन्तु यह जब तक कि-
(क) ऐसे स्थानांतरण या पुनर्नियोजन के पश्चात् कर्मकार को लागू होने वाले सेवा के निबंधन और शर्तें ऐसे स्थानांतरण या पुनर्नियोजन के ठीक पूर्व कर्मकार को लागू होने वाले निबंधनों और सेवा-शर्तों से कम अनुकूल न हों;
(ख) उस निगमित निकाय, सहकारी सोसाइटी या उपक्रम से, जहां कर्मकार को स्थानांतरित या पुनर्नियोजित किया गया हो, संबंधित नियोजक, करार द्वारा या अन्यथा उस कर्मकार को, उसकी छंटनी की दशा में, इस आधार पर कि उसकी सेवा चालू रही है और स्थानांतरण या पुनर्नियोजन द्वारा उसमें बाधा नहीं पड़ी है, औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 (1947 का 14) की धारा 25च या धारा 25चच या धारा 25चचच के अधीन विधिक रूप से प्रतिकर देने का दायी हो ।
74. आय-कर के बारे में विशेष उपबंध-जहां इस भाग के उपबंधों के अधीन कारबार चलाने वाले किसी निगमित निकाय की आस्तियां, अधिकार और दायित्व ऐसे किन्हीं अन्य निगमित निकायों को अन्तरित किए जाते हैं, जो अन्तरण के पश्चात् वही कारबार चलाते हों, वहां प्रथम वर्णित निगमित निकाय को हुई हानियां या लाभ या अभिलाभ, जिनका ऐसा अन्तरण न होने पर, आय-कर अधिनियम, 1961 (1961 का 43) के अध्याय 6 के उपबंधों के अनुसार अग्रनीत या मुजरा किया जाना अनुज्ञात कर दिया गया होता, केन्द्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त बनाए जाने वाले नियमों के अनुसार अंतरिती, निगमित निकायों के बीच प्रभाजित किए जाएंगे और ऐसे प्रभाजन पर, प्रत्येक अंतरिती निगमित निकाय को आबंटित हानि के अंश के संबंध में कार्यवाही उक्त अधिनियम के अध्याय 6 के उपबंधों के अनुसार इस प्रकार की जाएगी मानो वे हानियां स्वयं अंतरिती निगमित निकाय को उसके द्वारा चलाए गए किसी कारबार में उन वर्षों में हुई हों जिनमें वे हानियां हुई थीं ।
75. कतिपय राज्य संस्थाओं में सुविधाओं का जारी रहना-(1) यथास्थिति, आंध्र प्रदेश राज्य की या तेलंगाना राज्य की सरकार इस अधिनियम की दसवीं अनुसूची में विनिर्दिष्ट उन संस्थाओं की बाबत, जो उस राज्य में अवस्थित हैं, ऐसी सुविधाएं, जो किसी भी प्रकार से उन लोगों के लिए, जो उन्हें नियत दिन के पूर्व उपलब्ध कराई जा रही थीं, कम अनुकूल नहीं होंगी, ऐसी अवधि तक और ऐसे निबंधनों और शर्तों पर जो दोनों राज्य सरकारों के बीच नियत दिन से एक वर्ष की अवधि के भीतर करार पाई जाएं या यदि कोई करार नहीं किया जाता है तो उक्त अवधि तक जो केन्द्रीय सरकार के आदेश द्वारा नियत किया जाए उपलब्ध कराना जारी रखेगी ।
(2) केन्द्रीय सरकार, नियत दिन से एक वर्ष के भीतर किसी भी समय, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, उपधारा (1) में निर्दिष्ट दसवीं अनुसूची में आंध्र प्रदेश और तेलंगाना राज्यों में नियत दिन को विद्यमान किसी अन्य संस्था को विनिर्दिष्टकर सकेगी और ऐसी अधिसूचना के जारी किए जाने पर यह समझा जाएगा कि ऐसी अनुसूची का संशोधन उक्त संस्था को उसमें सम्मिलित करके किया गया है ।
भाग 8
सेवाओं के बारे में उपबंध
76. अखिल भारतीय सेवाओं से संबंधित उपबंध-(1) इस धारा में राज्य काडर" पद का-
(क) भारतीय प्रशासनिक सेवा के संबंध में वही अर्थ है जो भारतीय प्रशासनिक सेवा (काडर) नियम, 1954 में उसका है;
(ख) भारतीय पुलिस सेवा के संबंध में वही अर्थ है जो भारतीय पुलिस सेवा (काडर) नियम, 1954 में उसका है ; और
(ग) भारतीय वन सेवा के संबंध में वही अर्थ है जो भारतीय वन सेवा (काडर) नियम, 1966 में उसका है ।
(2) विद्यमान आंध्र प्रदेश राज्य के लिए भारतीय प्रशासनिक सेवा, भारतीय पुलिस सेवा और भारतीय वन सेवा के काडरों के स्थान पर, नियत दिन से ही, इन सेवाओं में से प्रत्येक की बाबत दो पृथक् काडर होंगे जिनमें से एक आंध्र प्रदेश राज्य के लिए और दूसरा तेलंगाना राज्य के लिए होगा ।
(3) उपधारा (2) में निर्दिष्ट राज्य काडरों के अधिकारियों की अनंतिम सदस्य संख्या, संरचना और आबंटन ऐसा होगा जो केन्द्रीय सरकार, नियत दिन को या उसके पश्चात्, आदेश द्वारा, अवधारित करे ।
(4) उक्त सेवाओं में से प्रत्येक के ऐसे सदस्य, जो नियत दिन के ठीक पूर्व आंध्र प्रदेश काडर में के थे, उपधारा (2) के अधीन गठित उसी सेवा के उत्तरवर्ती राज्य काडरों को ऐसी रीति से और ऐसी तारीख या तारीखों से जो केन्द्रीय सरकार, आदेश द्वारा, विनिर्दिष्ट करे, आबंटित किए जाएंगे ।
(5) इस धारा की कोई बात नियत दिन को या उसके पश्चात् अखिल भारतीय सेवा अधिनियम, 1951 (1951 का 61) या उसके अधीन बनाए गए नियमों के प्रवर्तन पर प्रभाव डालने वाली नहीं समझी जाएगी ।
77. अन्य सेवाओं से संबंधित उपबंध-(1) ऐसा प्रत्येक व्यक्ति, जो नियत दिन के ठीक पूर्व विद्यमान आंध्र प्रदेश राज्य के कार्यकलापों के संबंध में अधिष्ठायी आधार पर सेवा कर रहा हो, उस दिन से ही तेलंगाना राज्य के कार्यकलापों के संबंध में अनंतिम रूप से सेवा करता रहेगा जब तक कि केन्द्रीय सरकार के साधारण या विशेष आदेश द्वारा उससे आंध्र प्रदेश राज्य के कार्यकलापों के संबंध में अनंतिम रूप से सेवा करने की अपेक्षा न की जाए:
परन्तु इस उपधारा के अधीन नियत दिन से एक वर्ष की अवधि की समाप्ति के पश्चात् जारी प्रत्येक निदेश उत्तरवर्ती राज्यों की सरकारों के परामर्श से जारी किया जाएगा ।
(2) केन्द्रीय सरकार, नियत दिन के पश्चात्, यथाशक्यशीघ्र, साधारण या विशेष आदेश द्वारा, उस उत्तरवर्ती राज्य का, जिसे उपधारा (1) में निर्दिष्ट प्रत्येक व्यक्ति सेवा के लिए, कर्मचारियों से विकल्प की ईप्सा करने पर प्राप्त विकल्प पर विचार करने के पश्चात्, अंतिम रूप से आबंटित किया जाएगा और उस तारीख का, जिससे ऐसा आबंटन प्रभावी होगा या प्रभावी हुआ समझा जाएगा, अवधारण करेगी:
परन्तु ऐसा आबंटन किए जाने के पश्चात् भी, केन्द्रीय सरकार, सेवा में किसी कमी को पूरा करने के लिए, अन्य राज्य विषयक सेवाओं के अधिकारियों को एक उत्तरवर्ती राज्य से दूसरे उत्तरवर्ती राज्य में प्रतिनियुक्त कर सकेगी:
परन्तु यह और कि जहां तक स्थानीय, जिला, आंचलिक और बहु-आंचलिक काडरों का संबंध है, कर्मचारी, उस काडर में, नियत दिन को या उसके पश्चात्, सेवा करते रहेंगे:
परन्तु यह भी कि स्थानीय, जिला, आंचलिक और बहु-आंचलिक काडरों के ऐसे कर्मचारी, जो संपूर्णतया उत्तरवर्ती राज्यों में से एक के अन्तर्गत आते हैं, उस उत्तरवर्ती राज्य को आबंटित किए गए समझे जाएंगे:
परन्तु यह भी कि यदि कोई विशिष्ट आंचल या बहु-आंचल दोनों उत्तरवर्ती राज्यों के अन्तर्गत आता है, तो उस आंचलिक या बहु-आंचलिक काडर के कर्मचारी अंतिम रूप से, एक या दूसरे उत्तरवर्ती राज्य को इस उपधारा के उपबंधों के निबंधनों के अनुसार आबंटित किए जाएंगे ।
(3) ऐसा प्रत्येक व्यक्ति, जिसे किसी उत्तरवर्ती राज्य को उपधारा (2) के उपबंधों के अधीन अंतिम रूप से आबंटित किया जाता है, यदि वह उस राज्य में पहले से सेवा नहीं कर रहा है तो उस उत्तरवर्ती राज्य में, ऐसी तारीख से, जो उत्तरवर्ती राज्यों की सरकारों के बीच करार पाई जाए या ऐसे करार के अभाव में, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा अवधारित की जाए, सेवा करने के लिए उपलब्ध कराया जाएगा: परन्तु केन्द्रीय सरकार को इस धारा के अधीन जारी किए गए अपने आदेशों में से किसी का भी पुनर्विलोकन करने की शक्ति होगी ।
78. सेवाओं से संबंधित अन्य उपबंध-(1) इस धारा या धारा 77 की कोई बात, नियत दिन को या उसके पश्चात् संघ या किसी राज्य के कार्यकलापों के संबंध में सेवा कर रहे व्यक्तियों की सेवा शर्तों के अवधारण के संबंध में संविधान के भाग 14 के अध्याय 1 के उपबंधों के प्रवर्तन पर प्रभाव डालने वाली नहीं समझी जाएगी:
परन्तु ऐसे किसी व्यक्ति की दशा में, जिसे धारा 77 के अधीन आंध्र प्रदेश राज्य या तेलंगाना राज्य को आबंटित किया गया समझा गया है, नियत दिन के ठीक पूर्व लागू होने वाली सेवा शर्तों में उसके लिए अहितकर परिवर्तन केन्द्रीय सरकार के पूर्व अनुमोदन के बिना नहीं किया जाएगा ।
(2) किसी व्यक्ति द्वारा नियत दिन के पूर्व की गई सभी सेवाएं, उसकी सेवा शर्तों को विनियमित करने वाले नियमों के प्रयोजनों के लिए-
(क) यदि उसे धारा 77 के अधीन किसी राज्य को आबंटित किया गया समझा जाए तो उस राज्य के कार्यकलापों के संबंध में की गई सेवाएं समझी जाएंगी;
(ख) यदि उसे उत्तरवर्ती तेलंगाना राज्य के प्रशासन के संबंध में संघ को आबंटित किया गया समझा जाए, तो संघ के कार्यकलापों के संबंध में की गई सेवाएं समझी जाएंगी ।
(3) धारा 77 के उपबंध किसी अखिल भारतीय सेवा के सदस्यों के संबंध में लागू नहीं होंगे ।
79. अधिकारियों के उसी पद पर बने रहने के बारे में उपबंध-ऐसा प्रत्येक व्यक्ति, जो नियत दिन के ठीक पूर्व, विद्यमान आंध्र प्रदेश राज्य के कार्यकलापों के संबंध में ऐसे किसी क्षेत्र में, जो उस दिन उत्तरवर्ती राज्यों में से किसी में आता है, किसी पद या अधिकार-पद को धारण करता हो या उसके कर्तव्यों का निर्वहन करता हो, उस उत्तरवर्ती राज्य में वही पद या अधिकार-पद धारण करता रहेगा और उसी दिन से ही उस उत्तरवर्ती राज्य की सरकार द्वारा या उसमें के किसी समुचित प्राधिकारी द्वारा उस पद या अधिकार-पद पर सम्यक् रूप से नियुक्त किया गया समझा जाएगा :
परन्तु इस धारा की कोई बात किसी सक्षम प्राधिकारी को, नियत दिन से ही, ऐसे व्यक्ति के संबंध में उसके ऐसे पद या अधिकार-पद पर बने रहने पर प्रभाव डालने वाला आदेश पारित करने से निवारित करने वाली नहीं समझी जाएगी ।
80. सलाहकार समितियां-(1) केन्द्रीय सरकार, -
(क) इस भाग के अधीन अपने किसी कृत्य का निर्वहन करने; और
(ख) इस भाग के उपबंधों द्वारा प्रभावित सभी व्यक्तियों के साथ ऋजु और साम्यापूर्ण व्यवहार को सुनिश्चित करने और ऐसे व्यक्तियों द्वारा किए गए किन्हीं अभ्यावेदनों पर उचित रूप से विचार करने,
के संबंध में अपनी सहायता के प्रयोजनार्थ, आदेश द्वारा, आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 के अधिनियमन की तारीख से तीस दिन की अवधि के भीतर एक या अधिक सलाहकार समितियां स्थापित कर सकेगी ।
(2) केन्द्रीय सरकार द्वारा आबंटन संबंधी मार्गदर्शक सिद्धान्त आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 के अधिनियमन की तारीख को या उसके पश्चात् जारी किए जाएंगे और केन्द्रीय सरकार द्वारा व्यष्टिक कर्मचारियों का वास्तविक आबंटन, सलाहकार समिति की सिफारिशों पर किया जाएगा:
परंतु असहमति या मतभेद होने की दशा में, केंद्रीय सरकार का विनिश्चय अंतिम होगाः
परंतु यह और कि आवश्यक मार्गदर्शक सिद्धांत, जब कभी अपेक्षित हों, यथास्थिति, केंद्रीय सरकार द्वारा या राज्य सलाहकार समिति द्वारा विरचित किए जाएंगे, जिन्हें ऐसे मार्गदर्शक सिद्धांत जारी किए जाने के पूर्व केंद्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित किया जाएगा ।
81. निदेश देने की केन्द्रीय सरकार की शक्ति-केन्द्रीय सरकार, आंध्र प्रदेश राज्य की सरकार और तेलंगाना राज्य की सरकार को ऐसे निदेश दे सकेगी जो उसे इस भाग के पूर्वगामी उपबंधों को प्रभावी करने के प्रयोजन के लिए आवश्यक प्रतीत हों और राज्य सरकारें ऐसे निदेशों का अनुपालन करेंगी ।
82. पब्लिक सेक्टर उपक्रमों, आदि के कर्मचारियों के लिए उपबंध-नियत दिन से ही, राज्य पब्लिक सेक्टर उपक्रमों, निगमों और अन्य स्वशासी निकायों के कर्मचारी ऐसे उपक्रम, निगम या स्वशासी निकायों में एक वर्ष की अवधि तक कार्य करते रहेंगे और इस अवधि के दौरान संबंधित निगमित निकाय दोनों उत्तरवर्ती राज्यों के बीच कार्मिकों के वितरण से संबंधित पद्धतियों का अवधारण करेगा ।
83. राज्य लोक सेवा आयोग के बारे में उपबंध-(1) विद्यमान आंध्र प्रदेश राज्य का लोक सेवा आयोग, नियत दिन से ही, आंध्र प्रदेश राज्य का लोक सेवा आयोग होगा ।
(2) उत्तरवर्ती तेलंगाना राज्य द्वारा संविधान के अनुच्छेद 315 के अनुसार एक लोक सेवा आयोग का गठन किया जाएगा और ऐसे आयोग का गठन किए जाने तक संघ लोक सेवा आयोग, राष्ट्रपतिके अनुमोदन से, उस अनुच्छेद के खंड (4) के निबंधनों के अनुसार तेलंगाना राज्य की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए सहमत हो सकेगा ।
(3) नियत दिन के ठीक पूर्व विद्यमान आंध्र प्रदेश राज्य के लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या अन्य सदस्य का पद धारण करने वाले व्यक्ति, नियत दिन से आंध्र प्रदेश राज्य के लोक सेवा आयोग का, यथास्थिति, अध्यक्ष या अन्य सदस्य होगा ।
(4) ऐसा प्रत्येक व्यक्ति, जो उपधारा (3) के अधीन नियत दिन को आंध्र प्रदेश राज्य लोक सेवा आयोग का अध्यक्ष या अन्य सदस्य हो जाए, -
(क) आंध्र प्रदेश राज्य की सरकार से सेवा की ऐसी शर्तें पाने का हकदार होगा जो उन शर्तों से कम अनुकूल नहीं होंगी, जिनका वह उसे लागू होने वाले उपबंधों के अधीन हकदार था;
(ख) अनुच्छेद 316 के खंड (2) के परन्तुक के अधीन रहते हुए, नियत दिन के ठीक पूर्व उसे लागू होने वाले उपबंधों के अधीन यथा अवधारित उसकी पदावधि का अवसान होने तक पद धारण करेगा या धारण किए रहेगा ।
(5) आंध्र प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा नियत दिन के पूर्व की किसी अवधि की बाबत किए गए कार्य के बारे में आयोग की रिपोर्ट अनुच्छेद 323 के खंड (2) के अधीन आंध्र प्रदेश और तेलंगाना राज्यों के राज्यपालों को प्रस्तुत की जाएगी और आंध्र प्रदेश राज्य का राज्यपाल ऐसी रिपोर्ट की प्राप्ति पर, जहां तक संभव हो उन दशाओं के संबंध में, यदि कोई हों, जहां आयोग की सलाह स्वीकार नहीं की गई थी, उसके इस प्रकार स्वीकार न किए जाने के लिए कारणों को स्पष्ट करने संबंधी ज्ञापन के साथ उस रिपोर्ट की प्रति आंध्र प्रदेश राज्य के विधान-मंडल के समक्ष रखवाएगा और तेलंगाना राज्य की विधान सभा के समक्ष ऐसी रिपोर्ट या किसी ऐसे ज्ञापन को रखवाना आवश्यक नहीं होगा ।
भाग 9
जल संसाधनों का प्रबंधन और विकास
84. गोदावरी और कृष्णा नदी जल संसाधनों और उनके प्रबंधन बोर्डों के लिए उच्चतर परिषद्-(1) नियत दिन से ही, केन्द्रीय सरकार गोदावरी नदी प्रबंधन बोर्ड और कृष्णा नदी प्रबंधन बोर्ड के कार्यकरण का पर्यवेक्षण करने के लिए एक उच्चतर परिषद् का गठन करेगी ।
(2) उच्चतर परिषद् निम्नलिखित से मिलकर बनेगी, -
(क) जल संसाधन मंत्री, भारत सरकार-अध्यक्ष;
(ख) आंध्र प्रदेश राज्य का मुख्यमंत्री-सदस्य;
(ग) तेलंगाना राज्य का मुख्यमंत्री-सदस्य ।
(3) उच्चतर परिषद् के कृत्यों के अन्तर्गत निम्नलिखित कृत्य होंगे-
(i) गोदावरी नदी प्रबंधन बोर्ड और कृष्णा नदी प्रबंधन बोर्ड के कार्यकरण का पर्यवेक्षण;
(ii) नदी प्रबंधन बोर्डों और केन्द्रीय जल आयोग द्वारा, जहां कहीं अपेक्षित हो, प्रस्ताव का अंकन और उसकी सिफारिश किए जाने के पश्चात् गोदावरी या कृष्णा नदी जल पर आधारित नई परियोजनाओं के, यदि कोई हों, सन्निर्माण संबंधी योजना और प्रस्तावों का अनुमोदन;
(iii) नदियों के जल में हिस्सा बांटे जाने से उ-ूत किसी विवाद का उत्तरवर्ती राज्यों के बीच बातचीत से और आपसी करार के माध्यम से सौहार्द्रपूर्ण निपटारा;
(iv) कृष्णा जल विवाद अधिकरण के अन्तर्गत न आने वाले किन्हीं विवादों को, अन्तरराज्यिक नदी जल विवाद अधिनियम, 1956 (1956 का 33) के अधीन गठित किए जाने वाले किसी अधिकरण को निर्देश किया जाना ।
85. नदी प्रबंधन बोर्ड का गठन और उसके कृत्य-(1) केन्द्रीय सरकार, ऐसी परियोजनाओं के, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा समय-समय पर अधिसूचित की जाएं, प्रशासन, विनियमन, अनुरक्षण और प्रचालन के लिए नियत दिन से साठ दिन की अवधि के भीतर गोदावरी नदी प्रबंधन बोर्ड और कृष्णा नदी प्रबंधन बोर्ड के नाम से ज्ञात दो पृथक् बोर्डों का (जिन्हें इसमें इसके पश्चात् बोर्ड कहा गया है) गठन करेगी ।
(2) गोदावरी नदी प्रबंधन बोर्ड का मुख्यालय उत्तरवर्ती तेलंगाना राज्य में और कृष्णा नदी प्रबंधन बोर्ड का मुख्यालय उत्तरवर्ती आंध्र प्रदेश राज्य में अवस्थित होगा ।
(3) गोदावरी नदी प्रबंधन बोर्ड और कृष्णा नदी प्रबंधन बोर्ड केन्द्रीय सरकार के प्रशासनिक नियंत्रणाधीन स्वशासी निकाय होंगे और वे ऐसे निदेशों का अनुपालन करेंगे जो केन्द्रीय सरकार द्वारा समय-समय पर उन्हें दिए जाएं ।
(4) प्रत्येक बोर्ड निम्नलिखित अध्यक्ष और सदस्यों से मिलकर बनेगा, -
(क) सचिव या अपर सचिव, भारत सरकार से अनिम्न पंक्ति या स्तर का एक अध्यक्ष, जिसे केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त किया जाएगा;
(ख) दो सदस्य, जिन्हें उत्तरवर्ती राज्यों में से प्रत्येक द्वारा नामनिर्दिष्ट किया जाएगा, उनमें से संबंधित राज्यों का प्रतिनिधित्व करने के लिए एक सदस्य मुख्य इंजीनियर से अनिम्न पंक्ति का एक तकनीकी सदस्य होगा और दूसरा प्रशासनिक सदस्य होगा;
(ग) एक विशेषज्ञ, जिसे केन्द्रीय सरकार द्वारा नामनिर्दिष्ट किया जाएगा ।
(5) प्रत्येक बोर्ड का एक पूर्णकालिक सचिव होगा, जो केन्द्रीय जल आयोग में मुख्य इंजीनियर की पंक्ति से नीचे का नहीं होगा और जिसे केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त किया जाएगा ।
(6) केन्द्रीय सरकार, केन्द्रीय जल आयोग में मुख्य इंजीनियर की पंक्ति के उतने पद सृजित करेगी, जितने वह आवश्यक समझे ।
(7) प्रत्येक बोर्ड को, जलाशयों के दिन-प्रतिदिन के प्रबंधन के लिए, केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल अधिनियम, 1968 (1968 का 50) के अधीन गठित केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल द्वारा, ऐसे निबंधनों और शर्तों पर सहायता प्रदान की जाएगी, जो केन्द्रीय सरकार विनिर्दिष्ट करे ।
(8) प्रत्येक बोर्ड के कृत्यों के अन्तर्गत निम्नलिखित कृत्य होंगेश्न्
(क) परियोजनाओं से जल प्रदाय का उत्तरवर्ती राज्यों को, निम्नलिखित को ध्यान में रखते हुए, विनियमनश्न्
(i) अन्तरराज्यिक नदी जल विवाद अधिनियम, 1956 (1956 का 33) के अधीन गठित अधिकरणों द्वारा किए गए अधिनिर्णय;
(ii) विद्यमान आंध्र प्रदेश राज्य और किसी अन्य राज्य या संघ राज्यक्षेत्र की सरकार को सम्मिलित करते हुए किया गया कोई करार या ठहराव ; और
(ख) विद्यमान आंध्र प्रदेश राज्य और किसी अन्य राज्य या संघ राज्यक्षेत्र की सरकार को सम्मिलित करते हुए किए गए किसी करार या ठहराव को ध्यान में रखते हुए विद्युत का वितरण करने के भारसाधक अधिकारी को उत्पादित विद्युत का प्रदाय किए जाने का विनियमन; और
(ग) उत्तरवर्ती राज्यों के माध्यम से नदियों या उनकी सहायक नदियों से संबंधित जल संसाधन परियोजनाओं के विकास से संबंधित ऐसे शेष चालू या नए संकर्मों का निर्माण, जो केन्द्रीय सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट करे;
(घ) गोदावरी या कृष्णा नदियों पर नई परियोजनाओं के सन्निर्माणसंबंधी किसी प्रस्ताव को आंकना तथा यह समाधान करने के पश्चात् कि ऐसी परियोजनाओं से अन्तरराज्यिक नदी जल विवाद अधिनियम, 1956 (1956 का 33) के अधीन नियत दिन के पूर्व पहले से पूरी हो गई या आरंभ की गई परियोजनाओं के लिए गठित अधिकरणों के अधिनिर्णयों के अनुसार जल की उपलब्धता पर नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता है, तकनीकी मंजूरी प्रदान करना;
(ङ) ऐसे अन्य कृत्य, जिन्हें केन्द्रीय सरकार ग्यारहवीं अनुसूची में विनिर्दिष्टसिद्धान्तों के आधार पर उसे सौंपे ।
86. प्रबंध बोर्ड के कर्मचारिवृन्द-(1) बोर्ड उतने कर्मचारिवृन्द नियोजित करेगा जो वह इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों के दक्षतापूर्ण निर्वहन के लिए आवश्यक समझे और ऐसे कर्मचारिवृन्द को, प्रथमतः, उत्तरवर्ती राज्यों से समान अनुपात में प्रतिनियुक्ति पर नियुक्त किया जाएगा और बोर्ड में स्थायी रूप से आमेलित किया जाएगा ।
(2) उत्तरवर्ती राज्यों की सरकारें सब समयों पर बोर्ड को उसके कृत्यों के निर्वहन के लिए अपेक्षित सभी व्ययों को (जिनके अन्तर्गत कर्मचारिवृन्द के वेतन तथा भत्ते भी हैं) पूरा करने के लिए आवश्यक निधियां उपलब्ध कराएंगी और ऐसी रकमों को सम्बद्ध राज्यों में ऐसे अनुपात में प्रभाजित किया जाएगा जैसे केन्द्रीय सरकार, उक्त राज्यों में से प्रत्येक के फायदों को ध्यान में रखते हुए, विनिर्दिष्ट करे ।
(3) बोर्ड, अपनी ऐसी शक्तियां, कृत्य या कर्तव्य, जैसे वह ठीक समझे, उक्त बोर्ड के अध्यक्ष को या बोर्ड के किसी अधीनस्थ अधिकारी को प्रत्यायोजित कर सकेगा ।
(4) केन्द्रीय सरकार, बोर्ड को दक्ष रूप से कार्य करने में समर्थ बनाने के प्रयोजनार्थ, संबद्ध राज्य सरकारों या किसी अन्य प्राधिकारी को ऐसे निदेश जारी कर सकेगी और राज्य सरकारें या अन्य प्राधिकारी ऐसे निदेशों का अनुपालन करेंगे ।
87. बोर्ड की अधिकारिता-(1) बोर्ड, साधारणतया संबद्ध राज्यों को जल या विद्युत का प्रदाय करने के लिए आवश्यक जल शीर्ष तंत्र (बैराज, बांध, जलाशय, विनियामक संरचना) नहर, नेटवर्क के भाग तथा पारेषण लाइनों पर उन परियोजनाओं में से किसी के बारे में ऐसी अधिकारिता का प्रयोग करेगा जैसी केन्द्रीय सरकार द्वारा अन्तरराज्यिक नदी जल विवाद अधिनियम, 1956 (1956 का 33) के अधीन गठित अधिकरणों द्वारा किए गए अधिनिर्णयों, यदि कोई हों, के अनुसार अधिसूचित की जाए ।
(2) यदि इस बारे में कोई प्रश्न उ-ूत होता है कि उपधारा (1) के अधीन उसमें निर्दिष्ट किसी परियोजना पर बोर्ड की अधिकारिता है अथवा नहीं, तो उसे केन्द्रीय सरकार को उस पर विनिश्चय के लिए निर्दिष्ट किया जाएगा ।
88. विनियम बनाने की बोर्ड की शक्ति-बोर्ड, निम्नलिखित का उपबंध करने के लिए ऐसे विनियम बना सकेगा जो अधिनियम और उसके अधीन बनाए गए नियमों से संगत हों-
(क) बोर्ड के अधिवेशनों के समय और स्थान का तथा ऐसे अधिवेशनों में कारबार के संव्यवहार में अनुसरित की जाने वाली प्रक्रिया का विनियमन;
(ख) बोर्ड के अध्यक्ष या किसी अधिकारी की शक्तियों तथा कर्तव्यों का प्रत्यायोजन;
(ग) बोर्ड के अधिकारियों तथा अन्य कर्मचारिवृन्द की नियुक्ति और उनकी सेवा शर्तों का विनियमन;
(घ) कोई अन्य विषय जिसके लिए विनियम बोर्ड द्वारा आवश्यक समझे जाएं ।
89. जल संसाधनों का आबंटन-कृष्णा जल विवाद अधिकरण की अवधि निम्नलिखित निर्देश-निबंधनों के साथ बढ़ाई जाएगी, अर्थात्: -
(क) यह कि यह परियोजनावार विनिर्दिष्टआबंटन करेगा, यदि अंतरराज्यिक नदी जल विवाद अधिनियम, 1956 (1956 का 33) के अधीन गठित किसी अधिकरण द्वारा ऐसा आबंटन नहीं किया गया है ।
(ख) यह कि यह कम प्रवाह की दशा में जल के परियोजनावार छोड़े जाने के लिए कार्यान्वयन नयाचार (प्रोटोकाल) का अवधारण करेगा ।
स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए यह स्पष्ट किया जाता है कि अधिकरण द्वारा नियत दिन को या उसके पूर्व पहले से किए गए परियोजना-विनिर्दिष्ट अधिनिर्णय उत्तरवर्ती राज्यों पर आबद्धकर होंगे ।
90. पोलावरम् सिंचाई परियोजना का राष्ट्रीय परियोजना होना-(1) पोलावरम् सिंचाई परियोजना को इसके द्वारा राष्ट्रीय परियोजना के रूप में घोषित किया जाता है ।
(2) इसके द्वारा यह घोषित किया जाता है कि लोकहित में यह समीचीन है कि संघ द्वारा सिंचाई के प्रयोजनों के लिए पोलावरम् सिंचाई परियोजना के विनियमन और विकास को अपने नियंत्रण में लिया जाना चाहिए ।
(3) पोलावरम् सिंचाई परियोजना के लिए सहमति उत्तरवर्ती तेलंगाना राज्य द्वारा दी गई समझी जाएगी ।
(4) केंद्रीय सरकार परियोजना का निष्पादन करेगी और पर्यावरण, वन और पुनर्वासन तथा पुनर्व्यवस्थापन संबंधी सन्नियमों सहित सभी अपेक्षित मंजूरियां अभिप्राप्त करेगी ।
91. तुंगभद्रा बोर्ड के संबंध में ठहराव-(1) तुंगभद्रा बोर्ड के संबंध में विद्यमान आंध्र प्रदेश राज्य का स्थान उत्तरवर्ती आंध्र प्रदेश और तेलंगाना राज्यों की सरकारें लेंगी ।
(2) तुंगभद्रा बोर्ड उच्च स्तरीय नहर, निम्न स्तरीय नहर और राजोलीबांदा अपयोजन स्कीम में जल छोड़े जाने को मानीटर करना जारी रखेगा ।
भाग 10
अवसंरचना और विशेष आर्थिक उपाय
92. उत्तरवर्ती राज्यों द्वारा केंद्रीय सरकार द्वारा जारी किए गए सिद्धांतों, मार्गदर्शक सिद्धांतों आदि, का पालन किया जाना-केंद्रीय सरकार द्वारा, नियत दिन से ही कोयले, तेल और प्राकृतिक गैस तथा विद्युत उत्पादन, परेषण और वितरण की शक्ति के संबंध में बारहवीं अनुसूची में यथा प्रगणित विषयों पर जारी किए गए सिद्धांतों, मार्गदर्शक सिद्धांतों, निदेशों और आदेशों का उत्तरवर्ती राज्यों द्वारा कार्यान्वयन किया जाएगा ।
93. उत्तरवर्ती राज्यों की प्रगति और विकास से संबंधित उपाय-केंद्रीय सरकार, नियत दिन से दस वर्ष की अवधि के भीतर उत्तरवर्ती राज्यों की प्रगति और अविरत विकास के लिए तेरहवीं अनुसूची में यथा प्रगणित सभी आवश्यक उपाय करेगी ।
94. कर प्रोत्साहनों सहित राजवित्तीय उपाय-(1) केंद्रीय सरकार, दोनों राज्यों में उद्योगीकरण और आर्थिक विकास को प्रोन्नत करने के लिए उत्तरवर्ती राज्यों के प्रति समुचित राजवित्तीय उपाय, जिनके अंतर्गत कर प्रोत्साहनों की प्रस्थापना भी है, करेगी ।
(2) केंद्रीय सरकार, उत्तरवर्ती राज्यों में पिछड़े क्षेत्रों के विकास के लिए, जिसके अंतर्गत भौतिक और सामाजिक अवसंरचना का विस्तार भी है, कार्यक्रमों का समर्थन करेगी ।
(3) केंद्रीय सरकार उत्तरवर्ती आंध्र प्रदेश राज्य की नई राजधानी में आवश्यक सुविधाओं के, जिनके अंतर्गत राजभवन, उच्च न्यायालय, शासकीय सचिवालय, विधान सभा, विधान परिषद् भी हैं, और ऐसी अन्य आवश्यक अवसंरचनाओं के सृजन के लिए विशेष वित्तीय सहायता उपलब्ध कराएगी ।
(4) केंद्रीय सरकार, उत्तरवर्ती आंध्र प्रदेश राज्य के लिए एक नई राजधानी के सृजन को, यदि आवश्यक समझा जाए, अवश्रेणीकृत वन्य भूमि को अधिसूचना में से निकाल कर, सुकर बनाएगी ।
भाग 11
उच्चतर शिक्षा तक पहुंच
95. सभी छात्रों के लिए क्वालिटीयुक्त उच्चतर शिक्षा के समान अवसर-उत्तरवर्ती राज्यों में सभी छात्रों के लिए क्वालिटीयुक्त उच्चतर शिक्षा के समान अवसर सुनिश्चित करने की दृष्टि से, सभी सरकारी या प्राइवेट, सहायताप्राप्त या गैर-सहायताप्राप्त, उच्चतर, तकनीकी और आयुर्विज्ञान शिक्षा संस्थाओं में प्रवेश का विद्यमान कोटा, जहां तक संविधान के अनुच्छेद 371घ के अधीन यह उपबंधित है, दस वर्ष की अवधि तक उस रूप में जारी रहेगा जिसके दौरान विद्यमान सामान्य प्रवेश प्रक्रिया जारी रहेगी ।
भाग 12
विधिक और प्रकीर्ण उपबंध
96. संविधान के अनुच्छेद 168 का संशोधन-संविधान के अनुच्छेद 168 के खंड (1) के उपखंड (क) में, तमिलनाडु" शब्द के स्थान पर, तमिलनाडु, तेलंगाना" शब्द रखे जाएंगे ।
97. संविधान के अनुच्छेद 371घ का संशोधन-नियत दिन से ही, संविधान के अनुच्छेद 371घ में, -
(क) पार्श्व शीर्ष में, आंध्र प्रदेश राज्य" शब्दों के स्थान पर, आंध्र प्रदेश राज्य या तेलंगाना राज्य" शब्द रखे जाएंगे;
(ख) खंड (1) के स्थान पर निम्नलिखित खंड रखा जाएगा, अर्थात्: -
(1) राष्ट्रपति, आंध्र प्रदेश राज्य या तेलंगाना राज्य के संबंध में किए गए आदेश द्वारा, प्रत्येक राज्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए दोनों राज्यों के विभिन्न भागों के लोगों के लिए लोक नियोजन के विषय में और शिक्षा के विषय में साम्यापूर्ण अवसरों और सुविधाओं का उपबंध कर सकेगा और दोनों राज्यों के विभिन्न भागों के लिए भिन्न-भिन्न उपबंध किए जा सकेंगे ।";
(ग) खंड (3) में, आंध्र प्रदेश राज्य के लिए" शब्दों के स्थान पर, आंध्र प्रदेश राज्य के लिए और तेलंगाना राज्य के लिए" शब्दप्रतिस्थापित किए जाएंगे ।
98. 1951 के अधिनियम 43 की धारा 15क का संशोधन-लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 15क में, तमिलनाडु राज्य विधान परिषद् के गठन" शब्दों के पश्चात् और आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 के अधीन तेलंगाना राज्य की विधान परिषद् के गठन" शब्द और अंक अंतःस्थापित किए जाएंगे ।
99. 1956 के अधिनियम 37 की धारा 15 का संशोधन-राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 (1956 का 37) की धारा 15 में, नियत दिन से ही, खंड (ङ) में आंध्र प्रदेश" शब्दों के स्थान पर, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना" शब्द रखे जाएंगे ।
100. विधियों का राज्यक्षेत्रीय विस्तार-भाग 2 के उपबंधों की बाबत यह नहीं समझा जाएगा कि उनसे उन राज्यक्षेत्रों में, जिन पर नियत दिन के ठीक पूर्व प्रवृत्त आंध्र प्रदेश लैंड रिफार्म्स (सीलिंग आन एग्रिकल्चरल होल्डिंग्स) ऐक्ट, 1973 (1973 का आंध्र प्रदेश अधिनियम सं० 1) और कोई अन्य विधि विस्तारित होती है या लागू होती है, कोई परिवर्तन हुआ है और ऐसी किसी विधि में आंध्र प्रदेश राज्य के संबंध में राज्यक्षेत्रीय निर्देशों का, जब तक कि सक्षम विधान-मंडल या अन्य सक्षम प्राधिकारी द्वारा अन्यथा उपबंधित न किया जाए, तब तक यह अर्थ लगाया जाएगा कि मानो वे नियत दिन के पूर्व विद्यमान आंध्र प्रदेश राज्य के भीतर के राज्यक्षेत्र हैं ।
101. विधियों के अनुकूलन की शक्ति-नियत दिन के पूर्व बनाई गई किसी विधि के आंध्र प्रदेश राज्य या तेलंगाना राज्य के संबंध में लागू होने को सुकर बनाने के प्रयोजनार्थ समुचित सरकार उस दिन से दो वर्ष की समाप्ति के पूर्व आदेश द्वारा, उस विधि के ऐसे अनुकूलन तथा उपांतरण, चाहे वे निरसन के रूप में हों या संशोधन के रूप में, जैसा आवश्यक या समीचीन हो, कर सकेगी और तब ऐसी प्रत्येक विधि, जब तक सक्षम विधान-मंडल या अन्य सक्षम प्राधिकारी द्वारा परिवर्तित, निरसित या संशोधित न कर दी जाए, तब तक इस प्रकार किए गए अनुकूलनों या उपांतरणों के अधीन रहते हुए प्रभावी होगी ।
स्पष्टीकरण-इस धारा में समुचित सरकार" पद से संघ सूची में प्रगणित किसी विषय से संबंधित किसी विधि के बारे में केन्द्रीय सरकार, और किसी अन्य विधि के बारे में, उसके किसी राज्य को लागू होने की दशा में, राज्य सरकार अभिप्रेत है ।
102. विधियों के अर्थान्वयन की शक्ति-इस बात के होते हुए भी कि नियत दिन के पूर्व बनाई गई किसी विधि के अनुकूलन के लिए धारा 101 के अधीन कोई उपबंध नहीं किया गया है या अपर्याप्त उपबंध किया गया है, ऐसी विधि को प्रवर्तित करने के लिए अपेक्षित या सशक्त किया गया कोई न्यायालय, अधिकरण या प्राधिकारी, आंध्र प्रदेश राज्य अथवा तेलंगाना राज्य के संबंध में उसके लागू होने को सुकर बनाने के प्रयोजनार्थ, उस विधि का अर्थान्वयन, उसके सार पर प्रभाव डाले बिना, ऐसी रीति से कर सकेगा, जो उस न्यायालय, अधिकरण या प्राधिकारी के समक्ष मामले की बाबत आवश्यक या उचित हो।
103. कानूनी कृत्यों का प्रयोग करने के लिए प्राधिकारियों, आदि को नामित करने की शक्ति-तेलंगाना राज्य की सरकार, अंतरित राज्यक्षेत्र के बारे में, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, ऐसे प्राधिकारी, अधिकारी या व्यक्ति को विनिर्दिष्ट कर सकेगी जो नियत दिन को या उसके पश्चात्, उस दिन प्रवृत्त किसी विधि के अधीन ऐसे प्रयोक्तव्य कृत्यों का, जो उस अधिसूचना में वर्णित हों, प्रयोग करने के लिए सक्षम होगा और ऐसी विधि तदनुसार प्रभावी होगी ।
104. विधिक कार्यवाहियां-जहां, नियत दिन के ठीक पूर्व, विद्यमान आंध्र प्रदेश राज्य इस अधिनियम के अधीन आंध्र प्रदेश और तेलंगाना राज्यों के बीच प्रभाजनाधीन किसी संपत्ति, किन्हीं अधिकारों या दायित्वों की बाबत किन्हीं विधिक कार्यवाहियों का पक्षकार हो, वहां आंध्र प्रदेश राज्य या तेलंगाना राज्य, जो इस अधिनियम के किसी उपबंध के आधार पर उस संपत्ति या उन अधिकारों या दायित्वों का उत्तराधिकारी होता है या उनमें कोई अंश अर्जित करता है, उन कार्यवाहियों में विद्यमान आंध्र प्रदेश राज्य के स्थान पर प्रतिस्थापित किया गया या पक्षकार के रूप में जोड़ा गया समझा जाएगा और कार्यवाहियां तदनुसार चालू रखी जा सकेंगी ।
105. लंबित कार्यवाहियों का अंतरण-(1) नियत दिन के ठीक पूर्व, किसी ऐसे क्षेत्र में, जो उस दिन को आंध्र प्रदेश राज्य के भीतर आता हो, किसी न्यायालय (उच्च न्यायालय से भिन्न), अधिकरण, प्राधिकारी या अधिकारी के समक्ष लंबित प्रत्येक कार्यवाही, यदि वह कार्यवाही अनन्यतः उस राज्यक्षेत्र से संबंधित है जो उस दिन से तेलंगाना राज्य के राज्यक्षेत्र हैं, तो वह उस राज्य के तत्स्थानी न्यायालय, अधिकरण, प्राधिकारी या अधिकारी को अंतरित हो जाएगी ।
(2) यदि इस बारे में कोई प्रश्न उठता है कि क्या उपधारा (1) के अधीन कोई कार्यवाही अंतरित हो जानी चाहिए तो उसे हैदराबाद स्थित उच्च न्यायालय को निर्दिष्ट किया जाएगा और उस उच्च न्यायालय का विनिश्चय अंतिम होगा ।
(3) इस धारा में, -
(क) कार्यवाही" के अन्तर्गत कोई वाद, मामला या अपील भी है; और
(ख) तेलंगाना राज्य में तत्स्थानी न्यायालय, अधिकरण, प्राधिकारी या अधिकारी" से अभिप्रेत है-
(i) वह न्यायालय, अधिकरण, प्राधिकारी या अधिकारी जिसमें या जिसके समक्ष वह कार्यवाही होगी, यदि वह नियत दिन के पश्चात् संस्थित की जाती है; या
(ii) शंका की दशा में उस राज्य का ऐसा न्यायालय, अधिकरण, प्राधिकारी या अधिकारी, जो नियत दिन के पश्चात्, यथास्थिति, उस राज्य की सरकार या केन्द्रीय सरकार द्वारा या नियत दिन के पूर्व विद्यमान आंध्र प्रदेश राज्य की सरकार द्वारा तत्स्थानी न्यायालय, अधिकरण, प्राधिकारी या अधिकारी के रूप में अवधारित किया जाए ।
106. कतिपय मामलों में प्लीडरों का विधि व्यवसाय करने का अधिकार-ऐसा कोई व्यक्ति, जिसे नियत दिन के ठीक पूर्व विद्यमान आंध्र प्रदेश राज्य में किन्हीं अधीनस्थ न्यायालयों में विधि व्यवसाय करने के लिए हकदार प्लीडर के रूप में नामांकित किया जाता है, उस दिन से एक वर्ष की अवधि के लिए, उन न्यायालयों में, इस बात के होते हुए भी कि उन न्यायालयों की अधिकारिता के भीतर के संपूर्ण राज्यक्षेत्र या उनका कोई भाग तेलंगाना राज्य को अंतरित कर दिया गया है, विधि व्यवसाय करने का हकदार बना रहेगा ।
107. अधिनियम के उपबंधों का अन्य विधियों से असंगत होने की दशा में प्रभाव-इस अधिनियम के उपबंध किसी अन्य विधि में उनसे असंगत किसी बात के होते हुए भी प्रभावी होंगे ।
108. कठिनाइयों को दूर करने की शक्ति- (1) यदि इस अधिनियम के उपबंधों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है, तो राष्ट्रपति, आदेश द्वारा, ऐसी कोई बात कर सकेगा जो ऐसे उपबंधों से असंगत न हो और जो उस कठिनाई को दूर करने के प्रयोजन के लिए उसे आवश्यक या समीचीन प्रतीत हो:
परंतु ऐसा कोई आदेश, नियत दिन से तीन वर्ष की अवधि की समाप्ति के पश्चात् नहीं किया जाएगा ।
(2) इस धारा के अधीन किया गया प्रत्येक आदेश, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखा जाएगा ।
पहली अनुसूची
(धारा 13 दखिए)
(i) आसीन पांच सदस्यों, जिनका कार्यकाल 9 अप्रैल, 2014 को समाप्त होगा, अर्थात् श्री टी० सुब्बारामी रेड्डी, श्री नन्दी येल्लया, श्री मोहम्मद अली खान, श्रीमती टी० रतना बाई और श्री के० वी० पी० रामचन्द्र राव में से ऐसे दो सदस्यों को जिन्हें राज्य सभा के सभापति द्वारा लाट निकाल कर अवधारित किया जाए, तेलंगाना राज्य को आबंटित सात स्थानों में से दो स्थान भरने के लिए निर्वाचित किया गया समझा जाएगा और तीन अन्य आसीन सदस्यों को आंध्र प्रदेश राज्य को आबंटित ग्यारह स्थानों में से तीन स्थानों को भरने के लिए निर्वाचित किया गया समझा जाएगा ।
(ii) आसीन छह सदस्यों, जिनका कार्यकाल 21 जून, 2016 को समाप्त होगा, अर्थात् श्री जेसुदासु सीलम, श्री जयराम रमेश, श्री एन० जनार्दन रेड्डी, श्री वी० हनुमंता राव, श्रीमती गुंडु सुधारानी और श्री वाई० एस० चौधरी में से ऐसे दो सदस्यों को जिन्हें राज्य सभा के सभापति द्वारा लाट निकाल कर अवधारित किया जाए, तेलंगाना राज्य को आबंटित दो स्थानों को भरने के लिए निर्वाचित किया गया समझा जाएगा और चार अन्य आसीन सदस्यों को आंध्र प्रदेश राज्य को आबंटित चार स्थानों को भरने के लिए निर्वाचित किया गया समझा जाएगा ।
(iii) आंध्र प्रदेश राज्य का प्रतिनिधित्व करने वाले छह आसीन सदस्यों, जिनका कार्यकाल 2 अप्रैल, 2018 को समाप्त होगा, अर्थात् श्री आनन्द भास्कर रपोलु, श्री के० चिरंजीवी, श्री पलवी गोवर्धन रेड्डी, श्रीमती रेणुका चौधरी, श्री टी० देवेन्द्र गौड और श्री सी० एम० रमेश में से ऐसे तीन सदस्य, जिन्हें राज्य सभा के सभापति द्वारा लाट निकाल कर अवधारित किया जाए, तेलंगाना राज्य को आबंटित तीन स्थानों को भरने के लिए निर्वाचित किए गए समझे जाएंगे और तीन अन्य आसीन सदस्यों को आंध्र प्रदेश राज्य को आबंटित तीन स्थानों को भरने के लिए निर्वाचित किया गया समझा जाएगा ।
(iv) एक स्थान, जिसकी अवधि 9 अप्रैल, 2014 को समाप्त होगी और जो श्री नन्दमुरी हरिकृष्ण द्वारा 22 अगस्त, 2013 को त्यागपत्र दिए जाने के कारण रिक्त हो गया है, आंध्र प्रदेश राज्य को आबंटित किया जाएगा ।
दूसरी अनुसूची
(धारा 15 देखिए)
संसदीय और सभा निर्वाचन-क्षेत्र परिसीमन आदेश, 2008 का संशोधन
संसदीय और सभा निर्वाचन-क्षेत्र परिसीमन आदेश, 2008 में, -
1. अनुसूची 1 में, -
(i) आंध्र प्रदेश से संबंधित क्रम संख्यांक 1 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्: -
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राज्य/ संघ राज्यक्षेत्र का क्रम संख्यांक और नाम |
समय-समय पर यथा संशोधित, संसदीय और सभा निर्वाचन-क्षेत्र परिसीमन आदेश, 1976, के आधार पर यथा गठित सदन में स्थानों की संख्या |
संसदीय और सभा निर्वाचन-क्षेत्र परिसीमन आदेश, 2008 के अनुसार तत्पश्चात् गठित सभा स्थानों की संख्या |
||||
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कुल |
अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित |
अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित |
कुल |
अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित |
अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित |
|
|
1 |
2 |
3 |
4 |
5 |
6 |
7 |
|
1. आंध्र प्रदेश |
42 |
6 |
2 |
25 |
4 |
1" |
;(ii) तमिलनाडु से संबंधित क्रम संख्यांक 24 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात् निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्: -
|
1 |
2 |
3 |
4 |
5 |
6 |
7 |
|
25. तेलंगाना |
--- |
--- |
--- |
17 |
3 |
2" |
(iii) क्रम संख्यांक 25 से 28 को क्रमशः क्रम संख्यांक 26 से 29 के रूप में पुनःसंख्यांकित किया जाएगा ।
2. अनुसूची 2 में, -
(iv) आंध्र प्रदेश से संबंधित क्रम संख्यांक 1 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्: -
|
राज्य/ संघ राज्यक्षेत्र का क्रम संख्यांक और नाम |
समय-समय पर यथा संशोधित, संसदीय और सभा निर्वाचन-क्षेत्र परिसीमन आदेश, 1976, के आधार पर यथा गठित सदन में स्थानों की संख्या |
संसदीय और सभा निर्वाचन-क्षेत्र परिसीमन आदेश, 2008 के अनुसार तत्पश्चात् गठित सभा स्थानों की संख्या |
||||
|
कुल |
अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित |
अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित |
कुल |
अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित |
अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित |
|
|
1 |
2 |
3 |
4 |
5 |
6 |
7 |
|
1. आंध्र प्रदेश |
294 |
39 |
15 |
175 |
29 |
7" |
;(v) तमिलनाडु से संबंधित क्रम संख्यांक 24 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात् निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्: -
|
1 |
2 |
3 |
4 |
5 |
6 |
7 |
|
25. तेलंगाना |
--- |
--- |
--- |
119 |
19 |
12" |
;(vi) क्रम संख्यांक 25 से 28 को क्रमशः क्रम संख्यांक 26 से 29 के रूप में पुनःसंख्यांकित किया जाएगा ।
3. अनुसूची 3 के स्थान पर निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्: -
अनुसूची 3
आंध्र प्रदेश
सारणी क-सभा निर्वाचन-क्षेत्र
|
क्रम संख्यांक और नाम |
सभा निर्वाचन-क्षेत्रों का विस्तार |
|
1 |
2 |
|
|
1-श्रीकाकुलम जिला |
|
1. इचापुरम |
कानचिल्ली, इचापुरम, कविती और सोमपेटा मंडल। |
|
2. पलासा |
पलासा, मन्डासा और वाजरापुकोथुरू मंडल । |
|
3. टेक्काली |
नन्दीगाम, टेक्काली, सन्थाबोम्माली और कोटाबोम्माली मंडल। |
|
4. पथापटनम |
पथापटनम, मेलियापुट्टी, एल० एन० पेट, कोथुर और हीरामण्डलम मंडल । |
|
5. श्रीकाकुलम |
गारा और श्रीकाकुलम मंडल । |
|
6. अम्डालावालसा |
अम्डालावालसा, पोन्डुरू, सारूबुज्जिली और बुरजा मंडल । |
|
7. इटचेरला |
जी० सिगदम, लावेरू, रानसतालाम तथा इटचेरला मंडल । |
|
8. नारासन्नापेट |
जालुमुरू, नारासन्नापेट, सरावाकोटा तथा पोलाकी मंडल । |
|
9. राजम (अ०जा०) |
वांगरा, रेगिडी, अमादलवालसा, राजम तथा सन्थाकाविति मंडल । |
|
10. पालकोन्डा (अ०ज०जा०) |
सीतमपेट, भामिनी, पालकोन्डा तथा वीराघट्टम मंडल । |
|
|
2-विजियानगरम जिला |
|
11. कुरुपम (अ०ज०जा०) |
कुरुपम, गुम्मालक्ष्मीपुरम, जियाम्मावालसा, कोमरादा तथा गुरुगुबिल्ली मंडल । |
|
12. पार्वथीपुरम (अ०जा०) |
पार्वथीपुरम, सीथानगरम तथा बालीजीपेट मण्डल । |
|
13. सालुर (अ०ज०जा०) |
सालुर, पाचीपेन्टा, मेन्टाडा तथा मककुवा मण्डल । |
|
14. बोब्बिली |
बोब्बिली, रामभद्रपुरम, बादंगी तथा थेरलाम मण्डल । |
|
15. चीपुरूपल्ले |
मेराकमुदीदम, गारिविडी, चीपुरूपल्ले तथा गुर्ला मण्डल । |
|
16. गजपतिनगरम |
गजपतिनगरम, बोन्डापल्ली, गन्तयाडा तथा दत्तीराजेरू मण्डल; और जमी मण्डल के विजीनिगिरि, थन्डरांगी, जमी वालासा, वेन्न, ससनापल्ले, अट्टाडा, भीमासिंगी, सोमायाजुलापालेम, लोटलापल्ले, मोलचासा कोथवालासा, कुमारम और अन्नाराजूपेट गांव । |
|
17. नेल्लीमरला |
नेल्लीमरला, पूसापाटीरेगा, डेनकाडा तथा भोगापुरम मण्डल । |
|
18. विजियानगरम |
विजियानगरम मण्डल । |
|
19. सरूंगावारापुकोटा |
सरूंगावारापुकोटा, वेपाडा, लक्कावारापुकोटा तथा कोथावालसा मण्डल; तथा जमी मण्डल (विजीनिगिरि, थन्डरांगी, जमी वालासा, वेन्न, ससनापल्ले, अट्टाडा, भीमासिंगी, सोमायाजुलापालेम, लोटलापल्ले, मोलचासा कोथवालासा, कुमारम और अन्नाराजूपेट इन 12 गांव को छोड़ते हुए) |
|
|
3-विशाखापटनम जिला |
|
20. भीमिली |
आनन्दपुरम्, पदमानाभम, भीमुनिपतनम तथा विशाखापटनम ग्रामीण मण्डल । |
|
21. विशाखापटनम पूर्व |
विशाखापटनम (शहरी) मण्डल (भाग) विशाखापटनम (नगर निगम)-वार्ड सं० 1 से 11 तथा 53 से 55 । |
|
22. विशाखापटनम दक्षिण |
विशाखापटनम (शहरी) मण्डल (भाग) विशाखापटनम (नगर निगम)-वार्ड सं० 12 से 34, 42 से 43 तथा 46 से 48 । |
|
23. विशाखापटनम उत्तर |
विशाखापटनम (शहरी) मण्डल (भाग) विशाखापटनम (नगर निगम)-वार्ड सं० 36 से 41, 44 से 45 तथा 49 से 52 । |
|
24. विशाखापटनम पश्चिम |
विशाखापटनम (शहरी) मण्डल (भाग) विशाखापटनम (नगर निगम)-वार्ड सं० 35 तथा 56 से 71 । |
|
25. गजुवाका |
गजुवाका मण्डल (गजुवाका नगर निगम सहित) । |
|
26. चौदावरम |
चौदावरम, बुटचाय्यापेटा, रविकामाथम तथा रोलुगुन्टा मण्डल । |
|
27. मडुगुला |
मडुगुला, चीडीकाडा, देवरापल्ले और के. कोटापाडु मण्डल । |
|
28. अराकु वेली (अ०ज०जा०) |
मुनचिंगीपुट्टू, पेडाबायालु, डुम्बरीगुडा, अराकु वेली, हुकुमपेटा तथा अनन्तगिरी मण्डल । |
|
29. पाडेरू (अ०ज०जा०) |
पाडेरू, जी० मडूगुला, चिन्तापल्ले, गुदेम कोथा वीधी और कोयूरू मण्डल । |
|
30. अनाकापल्ले |
कासिमकोटा और अनाकापल्ले मण्डल । |
|
31. पेण्डुरथी |
पेडागान्टयाडा (गजुवाका नगरपालिका में सम्मिलित क्षेत्रों को छोड़कर) पारावाडा, सब्बावरम और पेण्डुरथी मण्डल । |
|
32. येलामानचिली |
रामबिली, मुनागापाका, अटचुटापुरम और येलामानचिली मण्डल । |
|
33. पायाकारओपेट (अ०जा०) |
कोटाउराटला, नक्कापल्ले, पायाकारओपेट और एस० रयावरम मण्डल । |
|
34. नरसीपटनम |
नाथवरम, गोलूगोण्डा, नरसीपटनम और मकावरापलेम मण्डल । |
|
|
4-पूर्व गोदावरी जिला |
|
35. तुनी |
थोन्दांगी, कोटनन्दूरू और तुनी मण्डल । |
|
36. प्राथीपाडु |
सन्खावरम, प्राथीपाडु, येलेश्वरम और रोवथुलापुडी मण्डल । |
|
37. पिथापुरम |
गोलापरोलू, पिथापुरम और कोथापल्ले मण्डल । |
|
38. ककिनाडा ग्रामीण |
कारापा और ककिनाडा ग्रामीण मण्डल । ककिनाडा शहरी मण्डल (भाग) ककिनाडा शहरी (एम) (भाग) ककिनाडा (एम)- वार्ड सं० 66 से 70 । |
|
39. पेडापुरम |
सामालकोटा और पेडापुरम मण्डल । |
|
40. अनापारथी |
पेडापुडी, बिकावोलू, रंगामपेटा और अनापारथी मण्डल । |
|
41. ककिनाडा शहर |
ककिनाडा शहरी मण्डल (भाग) ककिनाडा शहरी (एम) (भाग) ककिनाडा (एम)- वार्ड सं० 1 से 65 । |
|
42. रामचन्द्रपुरम |
काजुलुरू, रामचन्द्रपुरम और पामारू मण्डल । |
|
43. मुमीदिवरम |
पोलावरम, मुमीदिवरम, थाल्लारेवु और काटरेनीकोना मण्डल । |
|
44. अमालापुरम (अ०जा०) |
उप्पालागुप्ताम, अलावरम और अमालापुरम मण्डल । |
|
45. राजोल (अ०जा०) |
राजोल, मलिकिपुरम, सखिनेपटीपल्ले मण्डल । मामिदिकुडुरू मण्डल (भाग) मामिदिकुडुरू, गेड्डाडा, ऐडराडा, कोमाराडा, मगातापल्ले और गोगन्नामाथम गांव । |
|
46. गन्नावरम (अ०जा०) |
पी० गन्नावरम, अम्बाजीपेट और ऐनाविल्ली मण्डल । मामिदिकुडुरू मण्डल (भाग) पेडापटनम, प्पानापल्ले, बोटलाकुररू, डोडावरम, पसारलापुडी, पेडापटनम, नगरम, मोगलीकुडुरू, मकानापलेम, लुतुकुररू, पसारलापुदिलान्का और अडुरू गांव । |
|
47. कोथापेटा |
रावुलापलेम, कोथापेटा, अत्रेयापुरम और अलामुरु मण्डल । |
|
48. मन्दापेट |
मन्दापेट, रायावरम और कपिलेश्वरपुरम मण्डल । |
|
49. राजानगरम |
राजानगरम, सीतानगरम और कोरूकोन्डा मण्डल । |
|
50. राजामुन्दरी शहर |
राजामुन्दरी शहरी मण्डल (भाग) राजामुन्दरी (नगर निगम) (भाग) राजामुन्दरी (नगर निगम)-वार्ड सं० 7 से 35 और 42 से 89 । |
|
51. राजामुन्दरी ग्रामीण |
कादिआम और राजामुन्दरी ग्रामीण मण्डल राजामुन्दरी शहरी मण्डल (भाग) राजामुन्दरी (नगर निगम) (भाग) राजामुन्दरी (नगर निगम)-वार्ड सं० 1 से 6 और 36 से 41 और 90 । |
|
52. जग्गमपेट |
गोकावरम, जग्गमपेट, गान्डेपल्ले और किरलामपुडी मण्डल । |
|
53. रामपचोदावरम (अ०ज०जा०) |
मारेदुमिली, देवीपटनम, वाई० रामावरम, अद्दातीगाला, गंगावरम, रामपचोदावरम और राजावोममन्गी मण्डल । 5-पश्चिमी गोदावरी जिला |
|
54. कोव्वुर (अ०जा०) |
कोव्वुर, चगालू और तल्लापुइडी मण्डल । |
|
55. निडाडावोले |
निडाडावोले, उन्डराजावरम और पेरावली मण्डल । |
|
56. अचन्ता
|
पेनुगोंडा, अचन्ता और पेनुमंत्रा मण्डल । पोडुरू मण्डल (भाग)विताम, जगन्नाधापुरम, पांडीथाविलुरू, मिनीमिनचिलीपाडु, पोडुरू, पेम्माराजूपोलावरम और गुम्मालुरू गांव । |
|
57. पालाकोल |
पालाकोल और येलामानचिली मण्डल ।पोन्डुरू मण्डल (भाग) कोममुचिक्काला, वेडन्गी, जिन्नुरू, मेट्टापारू, पेनुमदाम, रविपाडु और वाडीपारू गांव । |
|
58. नरसापुरम |
मोगालथुर और नरसापुरम मण्डल । |
|
59. भीमावर
|
मवीरावासराम मण्डल तथा भीमावरम मण्डल भीमावरम (नगरपालिका बाह्य विकास) भीमावरम (नगरपालिका)-वार्ड सं० 1 से 27 । चिनामेराम (बाह्य विकास) भाग)-वार्ड सं० 28। रायालाम (ग्रामीण) (बाह्य विकास) भाग)-वार्ड सं० 29 । |
|
60. उन्डी |
कल्ला, पालाकोडेरू, उन्डी और अकिविडु मण्डल । |
|
61. तानुकु |
तानुकु, अटिली और इरागावरम मण्डल । |
|
62. टाडेपल्लीगुडेम |
टाडेपल्लीगुडेम और पेन्टापाडु मण्डल । |
|
63. उन्गुटुर |
उन्गुटुर, भीमाडोल, निडामाररू और गनापावरम मण्डल । |
|
64. देनदुलुरू |
पेडावेगी, पेडापाडु और देनदुलुरू मण्डल । इलुरू मण्डल (भाग) मल्कापुरम, चाटापारू, जलीपुडी, कटलामपुडी, माडेपल्ली, मानुरू, श्रीपारू, कलाकुरू, कोमतीलंका, गुडीवकालंका, कोकीरेलंका, पायदीचिन्तापाडु और पराथीकोलंका गांव । |
|
65. इलुरू
|
इलुरू मण्डल (भाग) इलुरू (नगरपालिका) (भाग) इलुरू (नगरपालिका)-वार्ड सं० 1 से 28 । इलुरू मण्डल (भाग) इलुरू (बाह्य विकास) (भाग) सतरामपाडु (बाह्य विकास)-वार्ड सं० 29 गवारावरम (बाह्य विकास)-वार्ड सं० 30 टंगेलामुडी (ग्रामीण) (बाह्य विकास)-वार्ड सं० 31 कोमाडावोलु (बाह्य विकास) (भाग)-वार्ड सं० 32 इलुरू (ग्रामीण) (बाह्य विकास) (भाग)-वार्ड सं० 33 इलुरू मण्डल (भाग) चोडीमेल्ला, सन्नीवारापुपेटा, इलुरू (ग्रामीण), कोमाडावोल (ग्रामीण) और पोनान्गी गांव । |
|
66. गोपालापुरम (अ०जा०) |
द्वारका तिरूमाला, नल्लाजेरला, देवारापल्ले और गोपालापुरम मण्डल । |
|
67. पोलावरम (अ०ज०जा०) |
पोलावरम, बुट्टायागुडेम, जेलुगुमिल्ली, कोययालगुडेम और टी० नरसापुरम मण्डल । |
|
68. चिण्टालापुडी (अ०जा०) |
चिण्टालापुडी, लिन्गापालेम, कामवारापुकोटा और जंगारेड्डीगुडेम मण्डल । |
|
|
6-कृष्णा जिला |
|
69. तिरूवुरू (अ०जा०) |
विस्सन्नापेट, गमपालागुडेम, तिरूवुरू और ए०कोनडुरू मण्डल । |
|
70. नुजविद |
अगिरीपल्ली, चतराई, मुसुनुरू और नुजविद मण्डल । |
|
71. गन्नावरम |
बापुलापेडु, गन्नावरम और उन्गुतुरू मण्डल । विजयवाड़ा (ग्रामीण) मण्डल (भाग) अम्बापुरम, फिरयाडी नैनावरम, पथापाडु, नुन्ना नीकेपाडु, निडामानुरू, डोन अटकुरू, गुडावल्ली प्रसादामपाडु और रामावारापाडु गांव । |
|
72. गुडीवाडा |
गुडलावल्लेरू, गुडीवाडा और नन्दीवाडा मण्डल । |
|
73. केकालुर |
मन्डावल्ली, केकालुर, कालीडिन्डी और मुदिनेपल्ले मण्डल । |
|
74. पेडाना |
गुडुर, पेडाना, बानतुमिल्ली और करूथीवेनु मण्डल । |
|
75. मछलीपटनम |
मछलीपटनम मण्डल । |
|
76. अवानीगड्डा |
चल्लापल्ली, मोपीदेवी, अवानीगड्डा, नगयालंका, कोडुरू और घन्टासाला मण्डल । |
|
77. पामारू (अ०जा०) |
पामारू, थोटलावल्लुरू, पमिडीमुक्काला, मोवा और पेडापारूपुडी मण्डल । |
|
78. पेनामालुरू |
कन्कीपाडु, वुय्युरू और पेनामालुरू मण्डल । |
|
79. विजयवाड़ा पश्चिम
|
विजयवाड़ा शहरी मण्डल (भाग) विजयवाड़ा शहरी (नगर निगम) (भाग) विजयवाड़ा (नगर निगम)-वार्ड सं० 1 से 13, 15 से 19, 75 और 76 । |
|
80. विजयवाड़ा केंद्रीय
|
विजयवाड़ा शहरी मण्डल (भाग) विजयवाड़ा शहरी (नगर निगम) (भाग) विजयवाड़ा (नगर निगम)-वार्ड सं० 14, 20 से 31, 33 से 35, 42 से 44, 49, 77 और 78 ।
|
|
81. विजयवाड़ा पूर्व
|
विजयवाड़ा शहरी मण्डल (भाग) विजयवाड़ा शहरी (नगर निगम) (भाग) विजयवाड़ा (नगर निगम)-वार्ड सं० 32, 36 से 41, 45 से 48 और 50 से 74 । |
|
82. मइलावरम
|
इब्राहीमपटनम, जी० कोन्डुरू, मइलावरम और रेड्डीगुडेम मण्डल । विजयवाड़ा (ग्रामीण) मण्डल (भाग) कोट्टुरू, टाडेपल्ले, वेमावरम, शाबडा, पेडुरूपाडु, रेयानापाडु, गोलापुडी और जाकामपुडी गांव । |
|
83. नन्दीगाम (अ०जा०) |
कंचिकाचेरला, चन्द्रालापाडु और वीरूल्लापाडु मण्डल । नन्दीगाम मण्डल (भाग) पेडावरम, थाक्केल्लापाडु, मुनागाचेरला, लात्चापालेम, लिंगालापाडु, अडिवीरवुलापाडु, चंदापुरम, केथावीरूनी पाडु, कन्चेला, इथावरम, अम्बारूपेट्टा, नन्दीगाम, सत्यावरम, पल्लागिरी और राघवपुरम गांव । |
|
84. जाग्गाय्यापेटा
|
वत्सावी, जाग्गाय्यापेटा और पेगुगनचिपोरोलू मण्डल । नन्दीगाम मण्डल (भाग) मगालू, कोन्डुरू, रामिरेड्डीपल्ले, जोनालागाड्डा, कोनाथामतमाकुरू, तोरागुदीपादु, दामुलुरू, सोमावरम, रूद्रावरम और गोल्लामुडी गांव । |
|
|
7-गुन्टुर जिला |
|
85. पेडाकुरापाडु |
बेल्लामकोन्डा, अटचामपेट, करोसुरू, अमरावती और पेडाकुरापाडु मण्डल । |
|
86. टाडीकोन्डा (अ०जा०) |
टुल्लुर, टाडीकोन्डा, फिरंगीपुरम और मेडीकोन्डुरू मण्डल । |
|
87. मंगलागिरी |
टाडेपल्ले, मंगलागिरी और डुग्गीराला मण्डल । |
|
88. पोन्नुर |
पोन्नुर, चेबरोलु और पेडाकाकानी मण्डल । |
|
89. वेमुरू (अ०जा०) |
वेमुरू, कोलुर, टसुन्दुर, भाट्टीपरोलु और अमरूथालुर मण्डल । |
|
90. रेपल्ले |
निजामपटनम, नगरम, चेरूकुपल्ली और रेपल्ले मण्डल । |
|
91. तेनाली |
कोल्लीपाडा और तेनाली मण्डल । |
|
92. बापतला |
बापतला, पित्तालावानीपलेम और कारलापलेम मण्डल । |
|
93. प्राथीपाडु (अ०जा०) |
गुन्टुर मण्डल (सिवाय नगम निगम), वात्तिचेरूकुरू, प्राथीपाडु, पेडानन्दीपाडु और काकुमानु मण्डल । |
|
94. गुन्टुर पश्चिम |
गुन्टुर मण्डल (भाग) गुन्टुर (नगर निगम) (भाग) गुन्टुर (नगर निगम)-वार्ड सं० 1 से 6 और 24 से 28 । |
|
95. गुन्टुर पूर्व |
गुन्टुर मण्डल (भाग) गुन्टुर (नगर निगम) (भाग) गुन्टुर (नगर निगम-वार्ड सं० 7 से 23 । |
|
96. चिलाकालुरीपेट |
नाडेन्दला, चिलाकालुरीपेट और इदलापाडु मण्डल । |
|
97. नरसाराओपेट |
रोमपिचेरला और नरसाराओपेट मण्डल । |
|
98. साट्टेनापल्ले |
साट्टेनापल्ले, राजुपलेम, नेकारीकल्लु और मुप्पल्ला मण्डल । |
|
99. विनुकोन्डा |
बोल्लापल्ले, विनुकोन्डा, नुजेन्डला, सवालयापुरम और इपुर मण्डल । |
|
100. गुराजाला |
गुराजाला, डाचेपल्ले, पिडुगुराला और मचावरम मण्डल । |
|
101. माचेरला |
माचेरला, वेलदुरथी, दुर्गी, रेन्ताचिन्ताला और करेमपुडी मण्डल । |
|
|
8-प्रकाशम जिला |
|
102. येरागोन्डापलेम (अ०जा०) |
येरागोन्डापलेम, पुल्लालाचेरूवु, त्रिपुरान्थाकाम, डोरनाला और पेडा अरावेडु मण्डल । |
|
103. डारसी |
डोनाकोन्डा, कुरीचेडु, मुन्डलामुरू, डारसी और थाल्लुर मण्डल । |
|
104. पारचुर |
येडानापुडी, पारचुर, करामचेडु, इकोल्लु, चिनागंजम और मारथुर मण्डल । |
|
105. अड्डान्की |
जे० पानगुलुरू, अड्डान्की, सन्थामागुलुरू, बल्लीकुरावा और कोरीसापाडु मण्डल । |
|
106. चिराला |
चिराला और वेटापलेम मण्डल । |
|
107. सन्थानुथालापाडु (अ०जा०) |
नगुलुपालापाडु, माद्दीपाडु, चिमाकुरथी और सन्थानुथालापाडु मण्डल । |
|
108. ओंगोले |
आंगोले और कोथापटनम मण्डल । |
|
109. कान्डुकुर |
कान्डुकुर, लिन्गासमुन्द्रम, गुडलुरू, उलावापाडु और वोलेटीवारीमलेम मण्डल । |
|
110. कोनदापी (अ०जा०) |
सिंगारायाकोन्डा, कोनदापी, टंगूटूर, जारूगुमिल्ली, पोन्नालुरू और मारीपुडी मण्डल । |
|
111. मार्कापुरम |
कोनाकानामिटला, पोडिली, मार्कापुर और तारलुपाडु मण्डल । |
|
112. गिड्डालुर |
बेस्तावारीपेटा, राचेरला, गिड्डालुर, कोमारोलु, कुमबुम और अरधावीडु मण्डल । |
|
113. कानीगिरि |
हनुमान्थुनीपाडु, चन्द्रसेखरपुरम, पामुर, वेलीगन्धला, पेडाचेरलोपल्ले और कानीगिरि मण्डल । |
|
|
9-नेल्लोर जिला |
|
114. कावाली |
कावाली, बोगोले, आलुर और दगादारथी मण्डल । |
|
115. अट्माकुर |
चेजेरला, अट्माकुर, अनुमासमुन्द्ररामपेटा, मरीपाडु, संगम और अनन्थासागरम मण्डल । |
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116. कोवुर |
विदावालुर, कोडावालुर, कोवुर, बुचिरेड्डीपलेम और इन्दुकुरपेट मण्डल । |
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117. नेल्लोर शहर |
नेल्लोर मण्डल (भाग) नेल्लोर मण्डल (नगरपालिका बाह्य विकास) (भाग) नेल्लोर (नगरपालिका)-वार्ड सं० 1 से 15, 27, 28 और 31 से 44 । |
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118. नेल्लोर ग्रामीण |
नेल्लोर मण्डल (भाग) गोल्ला, कान्दुकुर, सज्जापुरम, वेल्लन्ती, कन्डामुर, अप्पूटूर, दक्षिण मोपुर, मोगल्लापलेम, सत्तेमपाडु, अमनचेरला, मन्नावरापपादु, मुलुमुडी, देवारापलेम, पोट्टेवलेम, अक्काचेरूवुपाडु, ओगुरूपाडु, अम्बापुरम, दोनथाली, बुजा बुजा नेल्लोर (ग्रामीण), कल्लुरपल्ली (ग्रामीण), कानूपारथीपाडु, अल्लीपुरम (ग्रामीण), गुडीपल्लीपेडु, पेड्डा, वेरूकुर, चिन्तारेड्डीपलेम, वीसवाविलेटीपाडु, गुन्डापलेम, ककुपल्ली-1, ककुपल्ली-2 (मडराजा गुडुर) और पेनुबारथी गांव । नेल्लोर मण्डल (नगरपालिका बाह्य विकास) (भाग) नेल्लोर (नगरपालिका)-वार्ड सं० 16 से 26, 29 और 30 अल्लीपुरम (बाह्य विकास) (भाग)-वार्ड सं० 4512काल्लुरपल्ले (बाह्य विकास) (भाग)-वार्ड सं० 46 बुजा बुजा नेल्लोर (बाह्य विकास) (भाग)-वार्ड सं० 47 नेल्लोर-(बीट-1) (बाह्य विकास) (भाग)-वार्ड सं० 48 । |
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119. सर्वेपल्ली |
पोडालाकुर, थोटापल्लीगुडुर, मुथुकुर, वेंकटचलम और मनुबोलू मण्डल । |
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120. गुडुर (अ०जा०) |
गुडुर, चिल्लाकुर, कोटा, वकाडु और चित्तामुर मण्डल । |
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121. सुल्लुरपेटा (अ०जा०) |
ओजिली, नईडुपेट, पेल्लाकुर, दोरावारीसतराम, सुल्लरपेटा और टाडा मण्डल । |
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122. वेन्कटगिरी |
कलुवोया, रापुर, सयदापुरम, दक्किली, वेन्कटगिरी और बलायापल्ले मण्डल । |
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123. उदयगिरी |
जालादन्की, सीथारामापुरम, उदयगिरी, वरीकुन्तापाडु, विन्जामुर, दुत्तालुर, कलीगिरि और कोन्डापुरम मण्डल । |
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10-कडापा जिला |
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124. बाडवेल (अ०जा०) |
कलसापाडु, बी० कोडुर, श्री अवधुथा कासीनयन, पोरूमामिल्ला, बाडवेल, गोपावरम और अतलुर मण्डल । |
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125. राजमपेट |
सिधोट, वोन्तीमित्ता, नन्दलुर, राजमपेट, वीराबल्ले और टी० सुन्डुपल्ले मण्डल । |
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126. कडापा |
कडापा मण्डल । |
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127. कोडुर (अ०जा०) |
पेन्गालुर, चितवेल, पुल्लामपेट, ओबुलावारीपल्ले और कोडुर मण्डल । |
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128. रायाचोटी |
साम्बेपल्ले, चिन्नामनदेम, रायाचोटी, गलीवीडु, लाक्किरेड्डीपल्ली और रामापुरम मण्डल । |
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129. पुलीवेन्डला |
सिमहद्रीपुरम, लिन्गला, थोन्दुर, पुलीवेन्डला, वेमुला, वेमपल्ले और चक्रयापेट मण्डल । |
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130. कमलापुरम |
पेन्डलीमारी, चिन्थाकोम्मडिने, कमलापुरम, वल्लूर, वीरापुनायुनीपल्ले और चेन्नुर मण्डल । |
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131. जम्मालामाडुगु |
पेड्डामुडियम, मइलावरम, कोन्डापुरम, जम्मालामाडुगु, मुड्डानुर और येरागुन्त्ला मण्डल । |
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132. प्रोड्डाटुर |
राजूपलेम और प्रोड्डाटुर मण्डल । |
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133. माईदुकुर |
दुववुर, एस० माईदुकुर, खाजीपेट, ब्रह्मगिरिमाट्टम और चापाड मण्डल । |
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11-कुरनूल जिला |
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134. अल्लागड्डा |
सिरवेल, अल्लागड्डा, डोरनीपाडु, उयालावाडा, चगालमारी और रूद्रावरम मण्डल । |
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135. श्रीसांईलाम |
श्रीसांईलाम, अत्माकुर, वेलगोडे, बान्दी अत्माकुर और महानन्दी मण्डल । |
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136. नन्दीकोटकुर (अ०जा०) |
नन्दीकोटकुर, पगिडयाला, जे० बंगला, कोथापल्ले, पमुलापाडु और मिडथुर मण्डल । |
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137. कुरनूल |
कुरनूल मण्डल (भाग) कुरनूल (नगर निगम) (भाग) कुरनूल (नगर निगम)-वार्ड सं० 1 से 69 । |
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138. पानयाम |
कल्लूर, ओरवाकल, पानयाम और गाडीवेमुला मण्डल । |
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139. नन्दयाल |
नन्दयाल और गोसपाडु मण्डल । |
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140. बानागानापल्ले |
बानागानापल्ले, ओक, कोइलकुन्तला, सन्जामाला और कोलिमीगुन्डला मण्डल । |
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141. धोने |
बेथामचेरला, धोने और पीपल्ली मण्डल । |
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142. पट्टीकोन्डा |
कृष्णागिरी, वेलडुर्थी, पट्टीकोन्डा, माड्डीकेरा और दुगाली मण्डल । |
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143. कोडुमुर (अ०जा०) |
सी० बेलगाल, गुडुर और कोडुमुर मण्डल । कुरनुल मण्डल (भाग) 12आर. कंथालापाडु, सुनकेसुला, रेमाता, उलचाला, बसवापुरम, इदुरूर, जी० सिंगावरम, निडजूर, मुनागलापाडु, ममीडालपाडु, पानचालिन्गाला, ई० थानडरापाडु, गोन्डीपारला, दिनेरेदेवरापाडु, बी० थान्डरापाडु, पासूपुला, रूद्रावरम, नोथानपल्ले, देवमाडा, पुडुर, गरगेयापुरम और डिगुवापाडु गांव । |
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144. येम्मीगनुर |
नन्दावरम, येम्मीगनुर और गोनेगंडला मण्डल । |
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145. मंत्रालायम |
पेडाकाडुबुर, मंत्रालायम, कोसीगी और कोवथालम मण्डल । |
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146. अडोनी |
अडोनी मण्डल । |
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147. अलूर |
देवनाकोन्डा, होलागुन्डा, हलाधरवी, अलूर, अस्पारी और चिप्पागिरी मण्डल । |
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22-अनन्तपुर जिला |
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148. रायदुर्ग
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डी० हिरेहाल, रायदुर्ग, कनेकाल, बोमानहाल और गुम्मागट्टा मण्डल ।
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149. उरावाकोन्डा
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विडापानकाल, वजराकरूर, उरावकोन्डा, बेलूगुप्पा और कुदैर मण्डल ।
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150. गुन्टाकाल
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गुन्टाकाल, गोटी और पामिडी मण्डल ।
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151. टाडपात्री
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पेड्डावाडुगुर, याडीकी, टाडपात्री और पेड्डापाप्पुर मंडल ।
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152. सिंगानमाला (अ०जा०) |
गरलाडिन्न, सिंगानमाला, पुटलुर, येल्लनूर, नरपाला और बी०के० समुद्रम मंडल । |
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153. अनन्तपुर शहरी
|
अनन्तपुर मंडल (भाग) अनन्तपुर (नगरपालिका बाह्य विकास) (भाग) अनन्तपुर (नगरपालिका)-वार्ड सं० 1 से 28 नारायणपुरम (बाह्य विकास)-वार्ड सं० 29 काक्कलापल्ले (ग्रामीण) (बाह्य विकास) (भाग)-वार्ड सं० 30 अनन्तपुर (ग्रामीण) (बाह्य विकास)-वार्ड सं० 31 |
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154. कल्याणदुर्ग |
ब्रह्मासमुद्रम, कल्याणदुर्ग, सेत्तुर, कुन्डुरपी और काम्बाडुर मंडल । |
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155. रापटाडु
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अटमाकुर, रापटाडु, कानागानापल्ली, सी० के० पाल्ली और रामागिरि मंडल, अनंतपुर मंडल (भाग), कोडीमी, थोटीचेरला, सोमनाडोड्डी, रचनापल्ले, सज्जालाकलवा, कुरुगुन्टा, गोलपल्ले, कमरूपल्ले, अलमुरू, कटीगानीकालवा, कक्कालपल्ले (ग्रामीण), उप्परापल्ले, इतिकालपल्ले, जानगालपल्ले, कान्डाकुर, चियेदु, मानिला और पापमपेट (जनगणना शहर) गांव । |
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156. माडाकासिरा (अ०जा०) |
माडाकासिरा, अमरापुरम, कुडीबन्दा, रोल्ला और अगाली मंडल । |
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157. हिन्दुपुर |
हिन्दुपुर, लेपकाशी और चिल्माथुर मंडल । |
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158. पेनुकोन्डा |
परीगी, पेनुकोन्डा, गोरन्तला, सोमानडेपल्ले और रोडाम मंडल । |
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159. पुत्तापारथी |
नालामादा, बुक्कापटनम, कोथाचेरुवु, पुत्तापारथी, ओ० डी० चेरुवु और अमाडागुर मंडल । |
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160. धर्मावरम |
धर्मावरम, बाथालापल्ले, टाडीमारी और मुडीगुब्बा मंडल । |
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161. काडिरि |
तलुपुला, नामबुलीपुलीकुन्टा, गन्डलापेन्टा, काडिरि, नालाचेरुबु और तनाकल मंडल । |
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13-चित्तूर जिला |
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162. थामबल्लापल्ले |
मुलाकालाचेरुवु, थामबल्लापल्ले, पेड्डामनडयम, कुरबालकोटा, पेड्डाथिपासमुन्द्रम और बी० कोथाकोटा मंडल । |
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163. पिलेरू |
गुरमकोन्डा, कलाकाडा, के० वी० पल्ले, पिलेरू, कलीकिरी और वयालपाड मंडल । |
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164. मदनापल्ले |
मदनापल्ले, निम्मानापल्ले और रामसमुद्रम मंडल । |
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165. पुन्गानुर |
सोदाम, सोमाला, चौवदेपल्ले, पुन्गानुर, पुलीचेरला और रोमपिचेरला मंडल । |
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166. चन्द्रागिरि |
तिरुपति (ग्रामीण), चन्द्रागिरि, पकाला, रामचन्द्रपुरम, चिन्नागोटीगल्लु और येरावारीपलेम मंडल । तिरुपति (शहरी) मंडल (भाग) कांकाचैन्नय्यागुन्टा, मंगलम और चेन्नयागुन्टा गांव । |
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167. तिरुपति |
तिरुपति (शहरी) मंडल (भाग) तिरुमाला (जनगणना शहर) तिरुपति (एन एम ए) (जनगणना शहर) अक्कारामपल्ले (जनगणना शहर) तिरुपति (नगरपालिका बाह्य विकास) (भाग) । |
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168. श्रीकालाहस्ती |
रेनीगुन्टा, यरेपेडु, श्रीकालाहस्ती और थोट्टामबेडु मण्डल । |
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169. सत्यावेडु (अ०जा०) |
नारायणवरम, बी० एन० कन्द्रीगा, वरडैय्यापलेम, के० वी० बी० पुरम, पिट्चातुर, सत्यावेडु और नंगलापुरम मण्डल । |
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170. नागरी |
निद्रा, विजयपुरम, नागरी, पुट्टुर और बाडामालापेटा मण्डल । |
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171. गंगाधर नेल्लोर (अ०जा०) |
वेडुरूकुप्पम, करवेटीनगर, पेनुमुरू, एस० आर० पुरम, जी० डी० नेल्लोर और पालासमुद्रम मण्डल । |
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172. चित्तूर |
चित्तूर और गुडीपाला मण्डल । |
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173. पुथालापट्टु (अ०जा०) |
पुथालापट्टु, इराला मण्डल, थावनामपल्ले, बन्गारूपलेम और यादामारी मण्डल । |
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174. पालमानेर |
गंगावरम, पालमानेर, बेरेड्डीपल्ले, वी० कोटा और पेड्डापन्जनी मण्डल । |
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175. कुप्पम |
सान्तिपुरम, गुडुपल्ले, कुप्पम और रामाकुप्पम मण्डल । |
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सारणी ख - संसदीय निर्वाचन-क्षेत्र |
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क्रम संख्यांक और नाम |
सभा निर्वाचन-क्षेत्रों का विस्तार |
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1 |
2 |
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1. अराकु (अ०ज०जा०) |
10-पालकोन्डा (अ०ज०जा०), 11-कुरूपम (अ०ज०जा०), 12-पार्वथीपुरम (अ०जा०), 13-सालुर (अ०ज०जा०), 28-अराकु वेली (अ०ज०जा०), 29-पाडेरू (अ०ज०जा०) और 53-रामपचोदावरम (अ०ज०जा०) । |
|
2. श्रीकाकुलम |
1-इचापुरम, 2-पलासा, 3-टेक्काली, 4-पथापटनम, 5-श्रीकाकुलम, 6-अम्डालावालसा और 8-नारासन्नापेट । |
|
3. विजियानगरम |
7-इटचेरला, 9-राजम (अ०जा०), 14-बोब्बिली, 15-चीपुरूपल्ले, 16-गजपतिनगरम, 17-नेल्लीमरला और 18-विजियानगरम । |
|
4. विशाखापटनम |
19-सरूंगावारापुकोटा, 20-भीमिली, 21-विशाखापटनम पूर्व, 22-विशाखापटनम दक्षिण, 23-विशाखापटनम उत्तर, 24-विशाखापटनम पश्चिम और 25-गजुवाका । 2 |
|
5. अनाकापल्ले |
26-चौदावरम, 27-मडुगुला, 30-अनाकापल्ले, 31-पेण्डुरथी, 32-येलामानचिली, 33-पायाकारओपेट (अ०जा०) और 34-नरसीपटनम । |
|
6. ककिनाडा |
35-तुनी, 36-प्राथीपाडु, 37-पिथापुरम, 38-ककिनाडा ग्रामीण, 39-पेडापुरम, 41-ककिनाडा शहर और 52-जग्गमपेट । |
|
7. अमालापुरम (अ०जा०) |
42-रामचन्द्रपुरम, 43-मुमीदिवरम, 44-अमालापुरम (अ०जा०), 45-राजोल (अ०जा०), 46-गन्नावरम (अ०जा०), 47-कोथापेटा और 48- मन्दापेट । |
|
8. राजामुन्दरी |
40-अनापारथी, 49-राजानगरम, 50-राजामुन्दरी शहर, 51-राजामुन्दरी ग्रामीण, 54-कोव्वुर (अ०जा०), 55-निडाडावोले और 66- गोपालापुरम (अ०जा०) । |
|
9. नरसापुरम |
56-अचन्ता, 57-पालाकोल, 58-नरसापुरम, 59-भीमावरम, 60-उन्डी, 61-तानुकु और 62-टाडेपल्लीगुडेम । |
|
10. इलुरू |
63-उन्गुटुर, 64-देनदुलुरू, 65-इलुरू, 67-पोलावरम (अ०ज०जा०), 68-चिण्टालापुडी (अ०जा०), 70-नुजविद और 73-केकालुर । |
|
11. मछलीपटनम
|
71-गन्नावरम, 72-गुडीवाडा, 74-पेडाना, 75-मछलीपटनम, 76-अवानीगड्डा, 77-पामारू (अ०जा०) और 78- पेनामालुरू । |
|
12. विजयवाड़ा |
69-तिरूवुरू (अ०जा०), 79-विजयवाड़ा पश्चिम, 80-विजयवाड़ा केन्द्रीय, 81-विजयवाड़ा पूर्व, 82-मइलावरम, 83-नन्दीगाम (अ०जा०) और 84-जाग्गाय्यापेटा । |
|
13. गुन्टुर |
86-टाडीकोन्डा (अ०जा०), 87-मंगलागिरि, 88-पोन्नुर, 91-तेनाली, 93-प्राथीपाडु (अ०जा०), 94-गुन्टुर पश्चिम और 95-गुन्टुर पूर्व । |
|
14. नरसाराओपेट
|
85-पेडाकुरापाडु, 96-चिलाकालुरीपट, 97-नरसाराओपेट, 98-साट्टेनापल्ले, 99-विनुकोन्डा, 100-गुराजाला और 101-माचेरला । |
|
15. बापतला (अ०जा०) |
89-वेमुरू (अ०जा०), 90-रेपल्ले, 92-बापतला, 104-पारचुर, 105-अड्डान्की, 106-चिराला और 107-सन्थानुथालापाडु (अ०जा०) । |
|
16. ओंगोले |
102-येरागोन्डापलेम (अ०जा०), 103-डारसी, 108-ओंगोले, 110-कोनदापी (अ०जा०), 111-मार्कापुरम, 112-गिड्डालुर और 113-कानीगिरि । |
|
17. नन्दयाल |
134-अल्लागड्डा, 135-श्रीसांईलाम, 136-नन्दीकोटकुर (अ०जा०), 138-पानयाम, 139-नन्दयाल, 140-बानागानापल्ले और 141-धोने । |
|
18. कुरनूल |
137-कुरनूल, 142-पट्टीकोन्डा, 143-कोडुमूर (अ०जा०), 144-येम्मीगनुर, 145-मंत्रालायम, 146-अडोनी और 147-अलूर । |
|
19. अनन्तपुर |
148-रायदुर्ग, 149-उरावकोन्डा, 150-गुन्टाकाल, 151-टाडपात्री, 152-सगानमाला (अ०जा०), 153-अनन्तपुर शहरी और 154-कल्याणदुर्ग । |
|
20. हिन्दुपुर |
155-रापटाडु, 156-माडाकासिरा, 157-हिन्दुपुर, 158-पेनुकोन्डा, 159-पुत्तापारथी, 160-धर्मावरम और 161-काडिरि । |
|
21. कडापा |
124-बाडवेल (अ०जा०), 126-कडापा, 129-पुलीवेन्डला, 130-कमलापुरम, 131-जम्मालामाडुगु, 132-प्रोड्डाटुर और 133-माईदुकुर । |
|
22. नेल्लोर |
109-कान्डुकुर, 114-कावाली, 115-अटमाकुर, 116-कोवुर, 117-नेल्लोर शहर और 123-उदयगिरि । |
|
23. तिरुपति (अ०जा०) |
119-सर्वेपल्ली, 120-गुडुर (अ०जा०), 121-सुल्लुरपेटा (अ०जा०), 122-वेन्कटगिरि, 167-तिरुपति, 168-श्रीकालाहस्ती और 169-सत्यावेडु (अ०जा०) । |
|
24. राजमपेट |
125-राजमपेट, 127-कोडुर (अ०जा०), 128-रायाचोटी, 162-थामबल्लापल्ले, 163-पिलेरू, 164-मदनापल्ले और 165-पुन्गानुर । |
|
25. चित्तूर (अ०जा०) |
166-चन्द्रागिरि, 170-नागरी, 171-गंगाधर नेल्लोर (अ०जा०), 172-चित्तूर, 173-पुथालापट्टु (अ०जा०), 174-पालमानेर और 175-कुप्पम । |
टिप्पण-सारणी क में जनगणना शहर (सी०टी०) बाह्य विकास (ओ०जी०), मंडल तथा ग्राम अन्य क्षेत्रीय विभाजन के किसी सन्दर्भ से अभिप्रायः उस जनगणना शहर (सी०टी०), बाह्य विकास (ओ०जी०), मंडल तथा ग्राम या अन्य क्षेत्रीय विभाजन के अंतर्गत 15 फरवरी, 2004 के दिन निहित क्षेत्रफल से होगा । पुनः, सारणी क में नगरपालिका क्षेत्रों के वार्ड से अभिप्रायः 2001 की भारत जनगणना रिपोर्ट में यथा परिभाषित क्षेत्रों से माना जाएगा ।
4. अनुसूची 26 के पश्चात्, निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्: -
अनुसूची 27
तेलंगाना
सारणी क-सभा निर्वाचन-क्षेत्र
|
क्रम संख्यांक और नाम |
सभा निर्वाचन-क्षेत्रों का विस्तार |
|
1 |
2 |
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1. आदिलाबाद जिला |
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1. सिरपुर |
कोउथाला, बेज्जुर, कागजनगर, सिरपुर (टी) तथा दहेगांव मंडल । |
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2. चेन्नुर (अ०जा०) |
जयपुर, चेन्नुर, कोटापल्ले तथा मन्डामरी मंडल । |
|
3. बेल्लामपल्ले (अ०जा०) |
कसीपेट, तान्दूर, बेल्लामपल्ले, भीमिनी, नेनाल तथा वेमनपल्ले मंडल । |
|
4. मन्चेरियल |
लक्सेट्टीपेट, मन्चेरियल तथा डान्डेपल्ले मंडल । |
|
5. आसिफाबाद (अ०ज०जा०) |
केरामेरी, वानकडी, सिरपुर (शहरी), आसिफाबाद, जैनूर, नारनूर, तिरयानी तथा रेब्बाना मंडल । |
|
6. खानापुर (अ०जा०जा०) |
जन्नारम, उत्नूर, कद्दाम (बेड्डूर), खानापुर तथआ इन्दरावेल्ली मंडल । |
|
7. आदिलाबाद |
आदिलाबाद, जेनाद तथा बेला मंडल । |
|
8. बोथ (अ०जा०जा०) |
तामसी, तलामाडुगु, गुडिहाथनूर, इचोदा, बाजारहाथनूर, बोथ तथा नेराडिगोन्डा मंडल । |
|
9. निर्मल |
दिलावरपुर, निर्मल, लक्ष्मनचंदा, मामदा तथा सारंगापुर मंडल । |
|
10. मुधोले |
कुन्टाला, कुबीर, भैंसा, तनूर, मुधोले तथआ लोकेस्वरम मंडल । |
|
2. निजामाबाद जिला |
|
|
11. अरमूर |
नन्दीपेट, अरमूर तथा मकलूर मंडल । |
|
12. बोधन |
रन्जाल, नवीपेट, येदपल्ली तथा बोधन मंडल । |
|
13. जुक्कल (अ०जा०) |
मदनूर, जुक्कल, बिचकुन्डा, पितलम तथा निजामसागर मंडल । |
|
14. बांसवाड़ा |
बीरकूर, वर्नी, बांसवाड़ा तथा कोटगिरी मंडल |
|
15. येल्लारेड्डी |
येल्लारेड्डी, नागारेड्डीपेट, लिंगमपेट, ताडवाई, गन्धारी तथा सदाशिवनगर मंडल |
|
16. कामारेड्डी |
माचारेड्डी, डोमाकोंडा, कामारेड्डी तथा भीकनूर मंडल । |
|
17. निजामाबाद (शहरी) |
निजामाबाद (नगर पालिका) |
|
18. निजामाबाद (ग्रामीण)
|
जाकरानपल्ले तथा सिरकोंडा मंडल, निजामाबाद मंडल (भाग), निजामाबाद (सिवाय निजामाबाद नगर पालिका), डिचपल्ले तथा धारपल्ले मंडल । |
|
19. बालकोन्डा |
बालकोन्डा, मोरटाड, काम्मरपल्ले, भीमगल तथा वेलपुर मंडल । |
|
3. करीमनगर जिला |
|
|
20. कोरातला |
इब्राहिमपटनम, मल्लापुर, कोरातला तथा मेटपल्ले मंडल । |
|
21. जगतियाल |
रायकाल, सारंगापुर तथा जगतियाल मंडल । |
|
22. धर्मापुरी (अ०जा०) |
धर्मापुरी, धर्माराम, गोल्लापल्ले, वेलगाटूर तथा पेगाडापल्ले मंडल । |
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23. रामागुन्डम |
रामागुन्डम मंडल । |
|
24. मन्थानी |
कामनपुर, मन्थानी, कटाराम, महादेवपुर, मुथाराम (महादेवापुर), मालहरराओ तथा मुथाराम (मन्थानी) मंडल । |
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25. पेड्डापल्ले |
पेड्डापल्ले, जुलापल्ले, इलिगैड, सुल्तानाबाद, ओडेला तथा श्रीरामपुर मंडल । |
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26. करीमनगर |
करीमनगर मंडल । |
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27. चोप्पाडान्डी (अ०जा०) |
गंगाधारा, रामाडुगु, चोप्पाडान्डी, मल्लिआल, कोडिमियाल तथा बोइनपल्ले मंडल । |
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28. वेमुलवाडा |
वेमुलवाडा, कोनाराओपेटा, चान्दुर्थी, काथलापुर तथा मेडीपल्ले मंडल । |
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29. सिरसिल्ला |
येल्लारेड्डीपेट, गम्भीराओपेट, मुस्ताबाद तथा सिरसिल्ला मंडल । |
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30. मान्कोन्डुर (अ०जा०) |
मान्कोन्जुर, इल्लान्थाकुन्टा, बेज्जानकी, टिम्मापुर (एलएमडी कालोनी) तथा शंकरपटनम मंडल । |
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31. हुजूराबाद |
वीमावंका, जम्मीकुन्टा, हुजूराबाद तथा कमलापुर मंडल । |
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32. हुस्नाबाद |
चिगुरूमामिडि, कोहेडा, हुस्नाबाद, सैदापुर, भीमादेवारपल्ले तथा इलकाथुर्थी मंडल । |
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4. मेडक जिला |
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33. सिद्दीपेट |
सिद्दीपेट, चिन्नाकोडुर तथआ नांगनूर मंडल । |
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34. मेडक |
मेडक, पापन्नापेट, रामायमपेट तथा शंकारामपेट-आर०मंडल । |
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35. नारायणखेड |
कंगटी, मानूर, नारयणखेड, कालहेर तथा शंकारामपेट-ए मंडल । |
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36. अंडोले (अ०जा०) |
टेकमल, अल्लादुर्ग, रेगोडे, रायकोडे, अंडोले, पुलकाल तथा मुलपल्ले मंडल । |
|
37. नरसापुर |
कोवडीपल्ले, कुलचरम, नरसापुर, हाथनुरा, येलडुथी तथा शिवमपेट मंडल । |
|
38. जहीराबाद (अ०जा०) |
जहीराबाद, कोहिर, न्यालकाल तथा झारासंगम मंडल । |
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39. संगारेड्डी |
सदाशिवपेट, कोंडापुर तथा संगारेड्डी मंडल । |
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40. पाटनचेरु |
जिन्नारम, पाटनचेरु तथा रामाचंद्रापुरम मंडल । |
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41. डुब्बक |
मीरडोडी, दौलताबाद, चेगुंटा, डुब्बक तथा टोगुटा मंडल । |
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42. गजवेल |
तुपराप, कोंडापाक, गजवेल, जगदेवपुर, वारगल तथा मुलुग मंडल । |
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5. रंगारेड्डी जिला |
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43. मेडचाल |
मेडचाल, शामिरपेटर, घाटकेसर तथा कीसारा (ग्रामीण) मंडल । |
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44. मलकाजगिरी |
मलकाजगिरी मंडल । |
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45. कुथबुल्लापुर |
कुथबुल्लापुर मण्डल । |
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46. कुकटपल्ले |
हैदराबाद (नगर निगम) (भाग) हैदराबाद (नगर निगम)-वार्ड सं० 24 (भाग) (बालानगर मण्डल में क्षेत्र) कुकटपल्ले (नगर पालिका) (भाग) कुकटपल्ले (नगर पालिका)-वार्ड सं० 5 से 16 |
|
47. उप्पल |
उप्पल नगर पालिका, कापरा नगर पालिका |
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48. इब्राहिमपटनम |
हयाथनगर, इब्राहिमपटनम मंचाल तथा याचाराम मण्डल । |
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49. लाल बहादुर नगर |
सरुरनगर मण्डल (भाग) गड्डियाननराम (जनगणना शहर) लाल बहादुर नगर (नगर पालिका बाह्य विकास) (भाग) लाल बहादुर नगर (नगर पालिका)-वार्ड सं० 1 से 10 |
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50. महेस्वरम |
महेस्वरम तथा कंडुकुर मण्डल सरुरनगर मण्डल (भाग) मेडबोवली, अलमासगुडा, बाडंगपेट, चिन्तालाकुन्टा, जलपल्ली, मामिदीपल्ली कुरमलगुडा तथा नाडारगुल (ग्रामीण)मण्डल । हैदराबाद (बाह्य विकास) (भाग) बालापुर (बाह्य विकास)-वार्ड सं० 36 कोथापेट (बाह्य विकास)-वार्ड सं०37 वेंकटपुर (बाह्य विकास)-वार्ड सं० 39 मल्लापुर (बाह्य विकास)-वार्ड सं० 40 लाल बहादुर नगर (नगर पालिका बाह्य विकास) (भाग) लाल बहादुर नगर (नगर पालिका)-वार्ड सं० 11 नादारगुल (बाह्य विकास) (भाग)-वार्ड सं० 12 जिल्लालगुडा (बाह्य विकास)-वार्ड सं० 15 मीरपेट (जनगणना शहर) । |
|
51. राजेन्द्र नगर |
राजेन्द्र नगर तथा शामशाबाद मंडल । |
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52. सेरीलिंगपमल्ली |
सेरीलिंगमपल्ली मण्डल बालानगर मण्डल (भाग)कुकटपल्ले (नगर पालिका) (भाग) कुकटपल्ले (नगर पालिका) - वार्ड सं० 1 से 4 |
|
53. चेवेल्ला (अ०जा०) |
नवाबपेट, शंकरपल्ले, मोइनाबाद, चेवेल्ला तथा शबद मण्डल । |
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54. पारगी |
डोमा, गंडीड, कुलकाचेर्ला, पारगी तथा पुडुर मंडल |
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55. विकाराबाद |
मारपल्ले, मोमिनपेट, विकाराबाद, धारुर तथा बंतवारम मण्डल । |
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56. तंदूर
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पेड्डेमुल, तंदूर, बशीराबाद तथा यालाल मण्डल । |
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6. हैदराबाद जिला |
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57. मुशीराबाद |
हैदराबाद (नगर निगम बाह्य विकास) (भाग) हैदराबाद (नगर निगम) (भाग) वार्ड सं० 1 |
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58. मलकपेट |
हैदराबाद (नगर निगम बाह्य विकास) (भाग) हैदराबाद (नगर निगम) (भाग)वार्ड सं० 16 वार्ड सं० 17 (भाग) खंड सं० 8 तथा 9 |
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59. अम्बरपेट |
हैदराबाद (नगर निगम बाह्य विकास) (भाग) हैदराबाद (नगर निगम) (भाग) वार्ड सं० 2 वार्ड सं० 3 (भाग) खंड सं० 1 से 4 |
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60. खैराताबाद |
हैदराबाद (नगर निगम बाह्य विकास) (भाग) हैदराबाद (नगर निगम) (भाग) वार्ड सं० 6 वार्ड सं०3 (भाग) खंड सं० 5 तथा 6 वार्ड सं० 8 (भाग) खंड सं० 2 वार्ड सं० 5(भाग) खंड सं० 10 |
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61. जुबली हिल्स |
हैदराबाद (नगर निगम बाह्य विकास) (भाग) हैदराबाद (नगर निगम) (भाग) वार्ड सं० 8 (भाग) खंड सं० 1, 3 तथा 4 |
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62. सनथनगर |
हैदराबाद (नगर निगम बाह्य विकास) (भाग) हैदराबाद (नगर निगम) (भाग) वार्ड सं० 7, 24 (विधानसभा निर्वाचन-क्षेत्र - 46 कुकटपल्ले में क्षेत्र को छोड़कर) और 25 से 30 |
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63. नामपल्ली
|
हैदराबाद (नगर निगम बाह्य विकास) (भाग) हैदराबाद (नगर निगम) (भाग) वार्ड सं० 10 से 12 |
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64. कारवां |
हैदराबाद (नगर निगम बाह्य विकास) (भाग) हैदराबाद (नगर निगम) (भाग) वार्ड सं० 9 वार्ड सं० 13 (भाग) खंड सं० 3 से 6 |
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65. गोशमहल |
हैदराबाद (नगर निगम बाह्य विकास) (भाग) हैदराबाद (नगर निगम) (भाग) वार्ड सं० 4, 14 तथा 15 वार्ड सं० 5 (भाग) खंड सं० 1 से 9 वार्ड सं० 13 (भाग) खंड सं० 1 तथा 2 |
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66. चारमिनार |
हैदराबाद (नगर निगम बाह्य विकास) (भाग) हैदराबाद (नगर निगम) (भाग) वार्ड सं० 20 तथा 23 |
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67. चंद्रायनगुट्टा
|
हैदराबाद (नगर निगम बाह्य विकास) (भाग) हैदराबाद (नगर निगम) (भाग)वार्ड सं० 18 (भाग) खंड सं० 1 से 3 तथा 8 से 14 |
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68. याकुतपुरा |
हैदराबाद (नगर निगम बाह्य विकास) (भाग) हैदराबाद (नगर निगम) (भाग) वार्ड सं० 17 (भाग) खंड सं० 1 से 7 वार्ड सं० 18 (भाग) खंड सं० 6 तथा 7 |
|
69. बहादुरपुरा |
हैदराबाद (नगर निगम बाह्य विकास) (भाग) हैदराबाद (नगर निगम) (भाग) वार्ड सं० 18(भाग) खंड सं० 4 तथा 5 वार्ड सं० 19 |
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70. सिकंदराबाद |
हैदराबाद (नगर निगम बाह्य विकास) (भाग) हैदराबाद (नगर निगम) (भाग) वार्ड सं० 33 (भाग) खंड सं० 4 से 7 वार्ड सं० 34 तथा 35 उस्मानिया विश्वविद्यालय क्षेत्र |
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71. सिकंदराबाद कैंट (अ०जा०)
|
हैदराबाद (नगर निगम बाह्य विकास) (भाग) हैदराबाद (नगर निगम) (भाग) वार्ड सं० 31 तथा 32 वार्ड० 33(भाग) खंड सं० 1 से 3 सिकंदराबाद कैन्टोनमेंट बोर्ड |
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7. महबूबनगर जिला |
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72. कोडंगल |
कोडंगल, बोमरसपेट, कोसगी, दौलथाबाद तथा मदुर मण्डल । |
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73. नारायनपेट |
कोइलकोंडा, नारायनपेट, डामारागिड्डा तथा धानवाड़ा मण्डल । |
|
74. महबूबनगर |
हनवाडा तथा महबूबनगर मण्डल । |
|
75. जाडचेरला |
जाडचेरला, नवाबपेट, बालानगर तथा मिडजिल मण्डल । |
|
76. देवरकाडरा |
भूथपुर, अड्डाकाल, देवरकाडरा, चिन्न चिंता कुन्टा तथा कोथाकोटा मण्डल । |
|
77. मकथाल |
मकथाल, मागानूर, अतमाकुर, नार्वा तथा उत्कूर मण्डल । |
|
78. वानापार्थी |
वानापार्थी, पेब्बेयर, गोपालपेटा, पेड्डामांडाडी तथा घानपुर मण्डल । |
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79. गडवाल |
गडवाल, धारुर, माल्दाकाल तथा घट्टू मण्डल । |
|
80. आलमपुर (अ०जा०) |
ईज़, इतिक्याल, वाड्डेपल्ले, मानोपाड तथा आलमपुर मण्डल । |
|
81. नगरकुरनूल |
नगरकुरनूल, बिजिनापल्ले, थिम्माजीपेट, तडूर और तेलकापल्ले मण्डल । |
|
82. अचम्पेट (अ०जा०) |
बलमूर, लिंगल, अमराबाद, अचम्पेट, उप्पुनुथाला और वन्गूर मण्डल । |
|
83. कालवाकुरथी |
वेलडान्डा, कालवाकुरथी, तालाकोन्डापल्ले, अमान्गल और मडगुल मण्डल । |
|
84. शादनगर |
कोन्दुर्ग, फारूखनगर, कोथुर और केशामपेट मण्डल । |
|
85. कोल्लापुर |
बीपानगन्डला, कोल्लापुर, पेड्डाकोथापल्ले, कोर्डए और पन्गाल मण्डल । |
|
8. नालगोंडा जिला |
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86. देवराकोन्डा (अ०ज०जा०) |
चिन्तापल्ले, गुन्डलापल्ले, चन्दामपेट, देवराकोन्डा और पेड्डा आदीसारलापल्ले मण्डल । |
|
87. नार्गाजुन सागर |
गुररामपोडे, निडामानुर, पेड्डावोरा, अनुमुला और थ्रिपुराराम मण्डल । |
|
88. मिरयालगुडा |
वेमुलापल्ले, मिरयालगुडा और डामेरचेर्ला मण्डल । |
|
89. हुजूरनगर |
नेरेडचेरला, गारीडेपेल्ले, हुजूरनगर, मट्टामपल्ली और मेल्लाचेरदू मण्डल । |
|
90. कोडाड |
मोथे, नाडीगुडेम, मुनागाला, चिलकुर और कोडाड मण्डल । |
|
91. सूर्यपेट |
अटमाकुर (एस०), सूर्यपेट, चिववेमला और पेनपाहद मण्डल । |
|
92. नलगोन्डा |
थिप्पार्थी, नलगोन्डा और कन्गल मण्डल । |
|
93. मुनुगोडे |
मुनुगोडे, नारायणपुर, मारिगुडा, नामपल्ले, चन्डूर और चौटुप्पाल मण्डल । |
|
94. भोंगिर |
भोंगिर, बीबीनगर, वालीगोन्डा, और पोचमपल्ले मण्डल । |
|
95. नकरेकल (अ०जा०) |
रामन्नापेटा, चितयाला, काट्टानगूर, नकरेकल, केथेपल्ले ओर नारकेटपल्ले मण्डल । |
|
96. थुन्गाथुरथी (अ०जा०) |
थिरूरामालागिरी, थुन्गाथुरथी, नुथानकाल, जाजीरेड्डीगुडेम, साली गौराराम, और मोथकूर मण्डल । |
|
97. अलेयर |
एम० टूर्कापल्ले, राजापेट, याडागिरिगुडा, अलेयर, गुन्डाला, अत्माकुर (एम) और बोम्मालारामाराम मण्डल । |
|
9. वारंगल जिला |
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98. जनगांव |
चेरियल, मडडुर, बचनापेट, नरमेटा और जनगांव मण्डल । |
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99. घानपुर (स्टेशन) (अ०जा०) |
घानपुर (स्टेशन), धर्मासागर, रघुनाथपल्ले, जाफरगद और लिंगालाघानपुर मण्डल । |
|
100. पालाकुरथी |
पालाकुरथी, देवरूप्पुला, कोडाकान्डला, रायपारथी और थोरूर मण्डल । |
|
101. दोरनाकल (अ०ज०जा०) |
नरसिम्हलापेट, पारिपेडा, कुरावी और दोरनाकल मण्डल । |
|
102. महाबूबाबाद (अ०ज०जा०) |
गुडुर, नेल्लागुडुर, केसामुद्रम और महाबूबाबाद मण्डल । |
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103. नरसामपेट |
नरसामपेट, खन्नापुर, चेन्नारावपेट, डुग्गोन्डा मण्डल । |
|
104. पारकल |
पारकल अत्माकुर, संगम और गेसुगोन्डा मण्डल । |
|
105. वारंगल पश्चिम |
वारंगल मण्डल (भाग) वारंगल (नगर निगम) (भाग) वारंगल मण्डल (नगर निगम) - वार्ड सं० 1 से 7, 15, 21 और 23 से 25 । |
|
106. वारंगल पूर्व
|
वारंगल मण्डल (भाग) वारंगल (नगर निगम) (भाग) वारंगल मण्डल (नगर निगम) - वार्ड सं० 8 से 14, 16 से 20 और 22 । |
|
107. वारधन्नापेट (अ०जा०) |
हसनपारथी, हनमकोन्डा, पारवाथागिरि और वारधन्नापेट मण्डल । |
|
108. भुपालपल्ले |
मोगुल्लापल्ले, चितयाल, भुपालपल्ले, घानपुर (मुलुग) रेगोन्डा और श्यामपेट मण्डल । |
|
109. मुलुग (अ०ज०जा०) |
वेंकटापुर, इतुरनगरम, मन्गापेन्ट, टाडवई, कोथागुडेम, गोविन्दारावपेट और मुलुग मण्डल । |
|
10. खम्माम जिला |
|
|
110. पिनापाका (अ०ज०जा०) |
पिनापाका, मनुगुरू, गुन्डाला, बुरगामपाहाड और आस्वापुरम मण्डल । |
|
111. येल्लाण्डु (अ०ज०जा०) |
कामेपल्ले, येल्लाण्डु, बैयाराम, तेकुलापल्ले और गारला मण्डल । |
|
112. खम्माम |
खम्माम मण्डल । |
|
113. पालेयर |
थिरूमालायापालेम, कुसुमानची, खम्माम ग्रामीण और नेलाकोन्डापल्ले मण्डल । |
|
114. मधिरा (अ०जा०) |
मुडीगोन्डा, चिन्थाकानी, बोनाकाल, मधिरा और येरूपलेम मण्डल । |
|
115. वायरा (अ०ज०जा०) |
इन्कुरू, कोनीजेरला, सिंगारेनी, जुलुरपाडु और वायरा मण्डल । |
|
116. साथुपल्ले (अ०जा०) |
साथुपल्ले, पेनुबल्ली, कल्लुर, तल्लाडा और वेमसूर मण्डल । |
|
117. कोथागुडेम |
कोथागुडेम और पलवानचा मण्डल । |
|
118. असवारावपेटा (अ०ज०जा०) |
मुलीकालापल्ले, वेलैरपाडु, कुकुनूर, चन्दरूगौण्डा, असवारावपेटा और दम्मापेटा मण्डल । |
|
119. भद्राचलम (अ०ज०जा०) |
वाभ्ड, वेंकटपुरम, चेरला, डुम्मुगुडेम, भद्राचलम, कुनावरमख् चित्तुर और वी आर० पुरम मण्डल । |
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सारणी ख-संसदीय निर्वाचन-क्षेत्र |
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क्रम संख्यांक व नाम |
संसदीय निर्वाचनों-क्षेत्रों का विस्तार |
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(1) |
(2) |
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1-आदिलाबाद (अ०ज०जा०) |
1-सिरपुर, 5-आसिफाबाद (अ०ज०जा०), 6-खानापुर (अ०ज०जा०), 7-आदिलाबाद, 8-बोथ (अ०ज०जा०), 9-निर्मल और 10-मुधोले । |
|
2-पेड्डापल्ले (अ०जा०) |
2-चेन्नुर (अ० जा०), 3-बेल्लापल्ले (अ०जा०), 4-मन्चेरियल, 22-धर्मापुरी (अ०जा०), 23-रामागुन्डम, 24-मन्थानी और 25-पेड्डापल्ले । |
|
3-करीमनगर |
26-करीमनगर 27-चोप्पाडान्डी (अ०जा०), 28-वेमुलवाडा, 29-सिरसिल्ला, 30-मान्कोन्डुर (अ०जा०), 31-हुजूराबाद और 32-हुस्नाबाद । |
|
4-निज़ामाबाद |
11-अरमूर, 12-बोधन, 17-निज़ामाबाद (शहरी), 18-निजामाबाद (ग्रामीण), 19-बालकोन्डा, 20-कोराताला और 21-जगतियाल । |
|
5-ज़हीराबाद |
13-जुक्कल (अ०जा०), 14-बांसवाड़ा, 15-येल्लारेड्डी, 16-कामारेड्डी, 35-नारायणखेड, 36-अन्डोले (अ०जा०), और 38-जहीराबाद (अ०जा०), । |
|
6-मेडक |
33-सिद्दीपेट, 34-मेडक, 37-नरसापुर, 39-संगारेड्डी, 40-पाटनचेरु, 41-डुब्बक और 42-गजवेल । |
|
7-मल्कागिरि |
43-मेडचाल, 44-मलकाजगिरि, 45-कुथबुल्लापुर, 46-कुकटपल्ले, 47-उप्पल, 49-लाल बहादुर नगर और 71-सिकन्दराबाद (कैन्ट) (अ०जा०) । |
|
8-सिकन्दराबाद |
57-मुशीराबाद, 59-अम्बरपेट, 60-खैराताबाद, 61-जुबली हिल्स, 62-सनथनगर, 63-नामपल्ली और 70-सिकन्दराबाद । |
|
9-हैदराबाद |
58-मलकपेट, 64-कारवां, 65-गोशमहल, 66-चारमिनार, 67-चन्द्रायनगुट्टा, 68-याकुतपुरा और 69-बहादुरपुरा । |
|
10-चेवेल्ला |
50-महेस्वरम, 51-राजेन्द्रनगर, 52-सेरीलिंगपल्ली, 53-चेवेल्ला (अ०जा०), 54-पारगी, 55-विकाराबाद (अ०जा०) और 56-तन्दूर । |
|
11-महबूबनगर |
72-कोडंगल, 73-नारायनपेट, 74-महबूबनगर, 75-जाडचेरला, 76-देवरकाडरा, 77-मकथाल और 84-शादनगर । |
|
12-नगरकुरनूल (अ०जा०) |
78-वानापार्थी 79-गडवाल, 80-आलमपुर (अ.जा.), 81-नगरकुरनूल, 82-अचम्पेट (अ.जा.), 83-कालवाकुरथी और 85-कोल्लापुर । |
|
13-नलगोन्डा |
86-देवराकोन्डा (अ०अ०जा०), 87-नार्गाजुन सागर (अ०जा०), 88-मिरयालागुडा, 89-हुजूरनगर, 90-कोडाड, 91-सूर्यपेट और 92-नलगोन्डा । |
|
14-भोंगीर
|
48-इब्राहिमपटनम, 93-मुनुगोडे, 94-भोंगिर, 95-नकरेकल (अ०जा०), 96-थुन्नाथुरथी (अ०जा०), 97-अलेयर और 98-जनगांव । |
|
15-वारंगल (अ०जा०)
|
99-घानपुर (स्टेशन) (अ०जा०), 100-पालाकुरथी, 104-पारकल, 105-वारंगल पश्चिम, 106-वारंगल पूर्व, 107-वारधन्नापेट (अ०जा०), और 108-भुपालपल्ले । |
|
16-महाबूबाबाद (अ०ज०जा)
|
101-दोरनाकल (अ०ज०जा०), 102-महाबूबाबाद (अ०ज०जा०), 103-नरसामपेट, 109-मुलुग (अ०ज०जा०), 110-पिनापाका (अ०ज०जा०), 111-येल्लाण्डु (अ०ज०जा०) और 119-भद्राचलम (अ०ज०जा०) |
|
17-खम्माम
|
112-खम्माम, 113-पालेयर, 114-मधिरा (अ०जा०), 115-वायरा (अ०ज०जा०), 116-साथुपल्ले (अ०जा०), 117-कोथागुडेम और 118-असवारावपेटा (अ०जा०) । |
|
टिप्पण-सारणी क में जनगणना शहर (सी०टी०), बाह्य विकास (ओ.जी.), मंडल तथा ग्राम तथा अन्य क्षेत्रीय विभाजन के किसी सन्दर्भ से अभिप्राय उस जनगणना शहर (सी०टी०), बाह्य विकास (ओ०जी०), मंडल तथा ग्राम या अन्य क्षेत्रीय विभाजन के अंतर्गत 15 फरवरी, 2004 के दिन निहित क्षेत्रफल से होगा । पुनः, सारणी क में नगरपालिका क्षेत्रों के वार्ड से अभिप्राय 2001 की भारत जनगणना रिपोर्ट में यथा परिभाषित क्षेत्रों से माना जाएगा । |
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तीसरी अनुसूची
(धारा 24 देखिए)
भाग 1
परिषद् निर्वाचन-क्षेत्र परिसीमन (आंध्र प्रदेश) आदेश, 2006 में उपांतरण
परिषद् निर्वाचन-क्षेत्र परिसीमन (आंध्र प्रदेश) आदेश, 2006 से संलग्न सारणी के स्थान पर निम्नलिखित सारणी रखी जाएगी, अर्थात्: -
सारणी
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निर्वाचन-क्षेत्र का नाम |
निर्वाचन-क्षेत्र का विस्तार |
स्थानों की संख्या |
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स्थानीय प्राधिकारी निर्वाचन-क्षेत्र |
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1. श्रीकाकुल्लम स्थानीय प्राधिकारी |
श्रीकाकुल्लम |
1 |
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2. विजयनगरम स्थानीय प्राधिकारी |
विजयनगरम |
1 |
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3. विशाखापटनम स्थानीय प्राधिकारी |
विशाखापटनम |
2 |
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4. पूर्व गोदावरी स्थानीय प्राधिकारी |
पूर्व गोदावरी |
2 |
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5. पश्चिम गोदावरी स्थानीय प्राधिकारी |
पश्चिम गोदावरी |
2 |
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6. कृष्णा स्थानीय प्राधिकारी |
कृष्णा |
2 |
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7. गुन्टुर स्थानीय प्राधिकारी |
गुन्टुर |
2 |
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8. प्रकाशम स्थानीय प्राधिकारी |
प्रकाशम |
1 |
|
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9. नेल्लोर स्थानीय प्राधिकारी |
नेल्लोर |
1 |
|
|
|
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10. चित्तूर स्थानीय प्राधिकारी |
चित्तूर |
2 |
|
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11. कडप्पा स्थानीय प्राधिकारी |
कडप्पा |
1 |
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12. अनन्तपुर स्थानीय प्राधिकारी |
अनन्तपुर |
2 |
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13. कूरनूल स्थानीय प्राधिकारी |
कूरनूल |
1 |
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|
स्नातक निर्वाचन-क्षेत्र. |
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1.श्रीकाकुल्लम-विजयनगरम-विशाखापटनम स्नातक |
श्रीकाकुल्लम, विजयनगरम, विशाखापटनम |
1 |
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2. पूर्व-पश्चिम गोदावरी स्नातक |
पूर्व-पश्चिम गोदावरी |
1 |
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3. कृष्णा-गुन्टुर स्नातक
|
कृष्णा, गुन्टुर |
1 |
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4. प्रकाशम-नेल्लोर-चित्तूर स्नातक |
प्रकाशम, नेल्लोर, चित्तूर |
1 |
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|
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5. कडप्पा-अनन्तपुर-कूरनूल स्नातक |
कडप्पा, अनन्तपुर, कूरनूल |
1 |
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|
अध्यापक निर्वाचन-क्षेत्र |
|
|
||
|
|
|
1.श्रीकाकुल्लम-विजयनगरम-विशाखापटनम अध्यापक |
श्रीकाकुल्लम, विजयनगरम, विशाखापटनम |
1 |
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|
|
|
2. पूर्व-पश्चिम गोदावरी अध्यापक |
पूर्व-पश्चिम गोदावरी |
|
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|
|
3. कृष्णा-गुन्टुर अध्यापक |
कृष्णा-गुन्टुर |
1 |
|
|
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4. प्रकाशम-नेल्लोर-चित्तूर अध्यापक |
प्रकाशम-नेल्लोर-चितूर |
1 |
|
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|
|
5. कडप्पा-अनन्तपुर-कूरनूल अध्यापक |
कडप्पा, अनन्तपुर, कूरनूल |
1 |
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भाग 2 1. इस आदेश का संक्षिप्त नाम परिषद् निर्वाचन-क्षेत्र परिसीमन (तेलंगाना) आदेश, 2014 है । 2. तेलंगाना राज्य की विधान परिषद् के (क) स्थानीय प्राधिकारी निर्वाचन-क्षेत्रों, (ख) स्नातक निर्वाचन-क्षेत्रों और (ग) अध्यापक निर्वाचन-क्षेत्रों से निर्वाचनों के प्रयोजन के लिए उक्त तेलंगाना राज्य को निम्नलिखित निर्वाचन-क्षेत्रों में विभाजित किया जाएगा, ऐसे प्रत्येक निर्वाचन-क्षेत्र का विस्तार क्षेत्र और ऐसे प्रत्येक निर्वाचन-क्षेत्र को आबंटित स्थानों की संख्या निम्नलिखित सारणी में दर्शित किए गए अनुसार होगी: - सारणी |
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निर्वाचन-क्षेत्र का नाम |
निर्वाचन-क्षेत्र का विस्तार |
स्थानों की संख्या |
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स्थानीय प्राधिकारी निर्वाचन-क्षेत्र |
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1. महबूबनगर स्थानीय प्राधिकारी |
महबूबनगर |
1 |
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2. रंगा रेड्डी स्थानीय प्राधिकारी |
रंगा रेड्डी |
1 |
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3. हैदराबाद स्थानीय प्राधिकारी |
हैदराबाद |
2 |
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4. मेडक स्थानीय प्राधिकारी |
मेडक |
1 |
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|
5. निजामाबाद स्थानीय प्राधिकारी |
निजामाबाद |
1 |
|
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|
|
|
6. आदिलाबाद स्थानीय प्राधिकारी |
आदिलाबाद |
1 |
|
|
|
|
|
7. करीमनगर स्थानीय प्राधिकारी |
करीमनगर |
1 |
|
|
|
|
|
8. वारंगल स्थानीय प्राधिकारी |
वारंगल |
1 |
|
|
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|
9. खामम्म स्थानीय प्राधिकारी |
खामम्म |
1 |
|
|
|
|
|
10. नालगोंडा स्थानीय प्राधिकारी |
नालगोंडा |
1 |
|
|
|
|
|
स्नातक निर्वाचन-क्षेत्र |
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1. महबूबनगर- रंगा रेड्डी-हैदराबाद स्नातक |
महबूबनगर-रंगा रेड्डी-हैदराबाद |
1 |
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|
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2. मेडक-निजामाबाद-आदिलाबाद करीमनगर स्नातक |
मेडक-निजामाबाद-आदिलाबाद करीमनगर |
1 |
|
|
|
|
|
3. वारंगल-खामम्म-नलगोंडा स्नातक |
वारंगल-खामम्म-नलगोंडा |
1 |
|
|
|
|
|
अध्यापक निर्वाचन-क्षेत्र |
|
|
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1. महबूबनगर-रंगा रेड्डी-हैदराबाद अध्यापक |
महबूबनगर-रंगा रेड्डी – हैदराबाद |
1 |
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|
|
|
2. मेडक-निजामाबाद-आदिलाबाद- करीमनगर अध्यापक |
मेडक-निजामाबाद-आदिलाबाद करीमनगर |
1 |
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|
|
|
|
3. वारंगल-खामम्म-नलगोंडा अध्यापक |
वारंगल-खामम्म-नलगोंडा |
1"। |
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चौथी अनुसूची
[धारा 22 (2) दखिए]
उत्तरवर्ती आंध्र प्रदेश और तेलंगाना राज्यों की विधान परिषद् के सदस्यों की सूची-
आंध्र प्रदेश की विधान परिषद्:
स्थानीय प्राधिकारी निर्वाचन-क्षेत्रों के सदस्य:
(1) इल्लापुरम वेंकय्या (2) पोथुल्ला रामा राव, (3) डी०वी० सूर्यानारायण राजू, (4) नारायण रेड्डी चदीपिराल्ला, (5) बोद्दू भास्करा रामाराव, (6) अंगारा रामामोहन, (7) डा० दसाई थिप्पा रेड्डी एम०एस०, (8) मेका सेशु बाबू (9) पीरुकातला विश्व प्रसाद राव, (10) नारायणा रेड्डी वकाती, (11) मेट्टु गोविन्दा रेड्डी ।
स्नातक निर्वाचन-क्षेत्रों के सदस्य:
1. बोद्दू नागेश्वर राव, (2) कालीडिन्डी रवि किरण वर्मा, (3) एम०वी०एस० सरमा, (4) यन्डापल्ली श्रीनिवासुलू रेड्डी, (5) डा० गेयानंद एम ।
अध्यापक निर्वाचन-क्षेत्रों के सदस्य:
(1) गड़े श्रीनिवासुलू नायडु, (2) के०वी०वी० सत्यनारायण राजू, (3) के०एस० लक्ष्मण राव, (4) बाला सुब्रह्मणयम, (5) बचला पुल्लिहा वितापु ।
नामनिर्दिष्ट सदस्य:
(1) जुपूदी प्रभाकर राव, (2) बलशाली इंदिरा, (3) डा० ए० चक्रपणि, (4) आर० रेद्देप्पा रेड्डी, (5) शेख हुसैन ।
विधान सभा निर्वाचन-क्षेत्रों से निर्वाचित सदस्य:
(1) के० वीरभद्र स्वामी, (2) ए० लक्ष्मी शिव कुमारी, (3) आर० पदमा राजू (4) पालाडुगु वेन्कटा राव, (5) मोहम्मद जानी, (6) एन० राजकुमारी, (7) वाई० रामकृष्णुडु, (8) एस० बासव पुनय्या, (9) ए० अप्पा राव, (10) पी०जे० चन्द्रशेखरा राव, (11) बी० चांगल रायुडू, (12) पी० सामंताकुमारी, (13) सी० रामाचन्द्रय्या (14) एस०वी० सतीश कुमार रेड्डी, (15) जी० थिप्पे स्वामी, (16) एम० सुधाकर बाबू ।
तेलंगाना की विधान परिषद्:
स्थानीय प्राधिकारी निर्वाचन-क्षेत्रों के सदस्य:
(1) नेति विद्या सागर, (2) वी० भूपाल रेड्डी, (3) अरीकाला नरसा रेड्डी, (4) पोटला नागेश्वर राव, (5) टी० भानू प्रसाद राव, (6) एस० जगदीश्वर रेड्डी, (7) श्री एम०एस० प्रभाकर राव, (8) श्री पट्नम नरेन्द्र रेड्डी, (9) सय्यैद अमीनुल हसन जाफरी
स्नातक निर्वाचन-क्षेत्रों के सदस्य:
(1) डा० के० नागेश्वर, (2) कपीलावई दिलीप कुमार, (3) के० स्वामी गोड
अध्यापक निर्वाचन-क्षेत्रों के सदस्य:
(1) पथुरी सुधाकर रेड्डी, (2) पूला रविन्द्र, (3) काटेपल्ली जनार्धन रेड्डी
नामनिर्दिष्ट सदस्य:
(1) डी०राजेश्वर राव, (2) फारुक हुसैन, (3) बी० वेंकटा राव
विधान सभा के सदस्यों द्वारा निर्वाचित सदस्य:
(1) के०आर० अमोस, (2) मोहम्मद अली शब्बीर, (3) के० यादवा रेड्डी, (4) वी० गंगाधर गोड, (5) टी० सन्तोष कुमार, (6) एन० राजालिंगम, (7) डी० श्रीनिवास, (8) एम० रंगा रेड्डी, (9) पी० सुधाकर रेड्डी, (10) बी० लक्ष्मी नारायण, (11) मोहम्मद सलीम, (12) बी० वेंकटेश्वरलु, (13) पीर शब्बीर अहमद, (14) मोहम्मद महमूद अली, (15) सय्यद अलताफ हैदर रजवी ।
पांचवीं अनुसूची
(धारा 28 देखिए)
संविधान (अनुसूचित जातियां) आदेश, 1950 में, -
(1) पैरा 2 में, 24" अंकों के स्थान पर 25" अंक रखे जाएंगे ।
(2) अऩुसूची में, -
(क) आंध्र प्रदेश से संबंधित भाग 1 में, मद संख्या 9 का लोप किया जाएगा;
(ख) भाग 24 के पश्चात् निम्नलिखित भाग अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्: -
भाग 25 - तेलंगाना
1. आदि आंध्र
2. आदि द्रविड़
3. अनामुक
4. आरे माल
5. अरुंधतिय
6. अरब माल
7. बारिकी
8. बावुरी
9. बेड (बुडग) जंगम
10. बिंड्ल
11. बैगारा, बैगारी
12. चचाटि
13. चलवादि
14. चमार, मोची, मुचि, चमार - रविदास, चमार - रोहिदास
15. चम्भार
16. चंडाल
17. डक्कल, डोक्कलवार
18. डंडासि
19. ढोर
20. डोम, डोम्बार, पैडी, पनो
21. एल्लमल्वार, येल्लमालवाण्डल
22. घासी, हड्डी, रेल्लि, चचन्डि
23. गोडारी
24. गोसंगी
25. होलया
26. होलया दासारी
27. जग्गलि
28. जाम्बुबुलु
29. कोलुपुलुबाण्डलु, पम्बांडा, पम्बाला
30. मदासि, कुरुवा, मदारी कुरुवा
31. मादिगा
32. मादिगा दासु, माटीन
33. महार
34. माला, माला आयावारु
35. माला दासरि
36. माला दासु
37. माला हन्नाइ
38. माला जंगम
39. माल मस्ति
40. माला साले, नेट्कानि
41. माला सन्यासी
42. मांग
43. मांग गारोडी
44. मन्न
45. मष्टि
46. मातंगि
47. मेहतर
48. मिता अय्यल्वार
49. मुडला
50. पाकि, मोटि, तोटि
51. पामिडी
52. पंचम पेरिया
53. रेल्लि
54. सामगार
55. सम्बन
56. सप्रु
57. सिंधोल्लु, चिंदोल्लु
58. यातला
59. वल्लूवन ।"।
छठी अनुसूची
(धारा 29 देखिए)
संविधान (अनुसूचित जनजातियां) आदेश, 1950 में संशोधन
संविधान (अनुसूचित जनजातियां) आदेश, 1950 में, -
(1) पैरा 2 में, 22" अंकों के स्थान पर 23" अंक रखे जाएंगे ।
(2) अनुसूची में, -
(क) आंध्र प्रदेश से संबंधित भाग 1 में, मद संख्या 20 में, -
(i) (आदिलाबाद, हैदराबाद, करीम नगर, खम्माम, महबूबनगर, मेडक, नालगोंडा, निजामाबाद और वारंगल जिलों को छोड़कर)" कोष्ठकों और शब्दों का लोप किया जाएगा;
(ii) मद संख्या 30 और उससे संबंधित प्रविष्टियों का लोप किया जाएगा;
(ख) भाग 24 के पश्चात् निम्नलिखित भाग अन्तःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्: -
भाग 25 - तेलंगाना
1. आंध्र, साधू आंध्र
2. बगटा
3. भील
4. चेंचु
5. गडवा, बोडो गडावा, गुतोब गडावा, कलायी गडावा, पारांगी गडावा, कथेरा गडावा, कापू गडावा
6. गोंड, नायकपोड, राजगोंड, कोइतूर
7. गोडू, (अभिकरण भूखंडो में)
8. हिल रेड्डि
9. जातपू
10. कम्मरा
11. कडुनायकन
12. कोलम, कोलावार
13. कोंडधोरा, कुबी
14. कोड कापु
15. कोडारेड्डि
16. कोंध, कोडि, कोध, देसेय कोंध, डोंगारिया कोंध, कुट्टिया कोंध, टिकरिया कोंध, येनिटी कोंध, कुविंगा
17. कोटिया, वेंथो ओरिया, वारत्तिका, डुलिया, होल्वा, सनरोण, सिधोपैको
18. कोया, डोली कोया, गुट्टा कोया, कमारा कोया, मुसारा कोया, ओड्डी कोया, पटिदी कोया, राजा, राशकोया, लिंगधारी कोया (साधारण), कोट्टू कोया, भिण कोया, राज कोया
19. कुलिया
20. मन्ना दोरा
21. मुक्खा दोरा, नूका दोरा
22. नायक (अभिकरण भूखंडों में)
23. परधाण
24. पुर्जा, परांगीपेरजी
25. रेड्डी दोरा
26. रोणा, रेणा
27. सवार, कापू सवार, मालिया सवार, खुट्टा सवार
28. सुगाली, लम्बाडी, बंजारा
29. तोटि (आदिलाबाद, हैदराबाद, करीमनगर, खम्माम, महबूबनगर, मेडक, नलगोंडा, निजामाबाद और वारंगल जिलों में)
30. येनादी, चेला येनादी, कपाला येनादी, मांची येनादी, रेड्डी येनादी
31. येरुकुल्लास, कोरचा, डब्बा येरुकुल्ला, कुंचापुरी येरुकुल्ला, उपु येरुकुल्ला
32 नक्काला, कुरविकरन ।"।
सातवीं अनुसूची
(धारा 52 देखिए)
निधियों की सूची
क. भविष्य निधियां, पेंशन निधियां, बीमा निधियां-
1. अभिदायी भविष्य निधि - 50 प्रतिशत भारित, एनआरएस
2. अखिल भारतीय सेवा भविष्य निधि
3. भविष्य निधि अभिदाय से जिला प्रजा परिषदों को निक्षेप ।
4. साधारण भविष्य निधि (नियमित)
5. आंध्र प्रदेश चतुर्थ श्रेणी सरकारी सेवक कुटुम्ब पेंशन निधि
6. आंध्र प्रदेश राज्य कर्मचारी कुटुम्ब फायदा निधि
7. आंध्र प्रदेश राज्य सरकारी जीवन बीमा निधि
8. अनिवार्य बचत स्कीम
9. 50 ऽ डीए, साधारण भविष्य निधि, एनआरएस
10. जीपीएफ, वर्ग 4
11. साधारण भविष्य निधि संकर्म प्रभारित 50ऽ एनआरएस
12. सीपीएफ संकर्म प्रभारित स्थापन
13. विद्युत विभाग भविष्य निधि
14. आईसीएस भविष्य निधि
15. विश्वविद्यालय कर्मचारियों के लिए अनिवार्य बचत स्कीम
16. डाक बीमा और जीवन वार्षिकी निधि
17. केन्द्रीय सरकार कर्मचारी समूह बीमा स्कीम
18. आईएएस, समूह बीमा
19. आंध्र प्रदेश राज्य सरकार कर्मचारी अभिदायी पेंशन स्कीम
(i) कर्मचारी अभिदाय
(ii) सरकार का अभिदाय
20. आंध्र प्रदेश सहायताप्राप्त शैक्षणिक संस्थान कर्मचारी अभिदायी पेंशन स्कीम
(i) कर्मचारी अभिदाय
(ii) सरकार का अभिदाय
21. पंचायत राज कर्मचारियों के लिए समूह बीमा
22. समूह बीमा विपणन समिति
23. राज्य सरकार कर्मचारी समूह जनता निजी दुर्धटना पालिसी
24. कर्मचारी कल्याण निधि (आंध्र प्रदेश राज्य
ख. निक्षेप निधि, प्रत्याभूति पुनरारंभ निधि, आरक्षित निधियां
25. निक्षेप निधि - विनिधान लेखा ।
26. गारंटी मोचन निधि - विनिधान लेखा ।
27. अवक्षयण आरक्षित निधि - सरकारी वाणिज्यिक विभागों और उपक्रमों से संबंधित -
(i) अल्कोहल कारखाना, नारायणगुडा
(ii) अल्कोहल कारखाना, कामारेड्डी
(iii) आंध्र प्रदेश पाठ्यपुस्तक प्रेस
(iv) सरकारी आसवनी, चगालु
(v) सरकारी मृत्तिका कारखाना, गुडूर
(vi) सरकारी ब्लाक ग्लास कारखाना, गुडूर
28. औद्योगिक विकास निधियां-
(i) शर्करा उद्योगों के संरक्षण के लिए आरक्षित निधि;
(ii) रेशम कीट पालन विकास निधि ।
29. विद्युत विकास निधियां - विशेष आरक्षित निधि - विद्युत
30. अन्य विकास और कल्याण निधियां-
(i) विकास स्कीमों के लिए निधियां
(ii) औद्योगिक बागान निधि
(iii) आंध्र प्रदेश राज्य आसवनी
(iv) आंध्र प्रदेश राज्य आसवनी प्रदूषण नियंत्रण
31. सरकारी मुद्रणालय की अवक्षयण आरक्षित निधि
32. जल संकर्मों की अवक्षयण आरक्षित निधि
33. लघु और सीमांत कृषकों के लिए राज्य विकास सहायकी निधि
34. औद्योगिक अनुसंधान और विकास निधि - मुख्य खाता
35. औद्योगिक अनुसंधान और विकास निधि - विनिधान खाता
36. विकास स्कीमों के लिए निधि - विनिधान खाता
37. आंध्र प्रदेश आसवनी और निसवनी
38. जीआरएफ चालू खाते में भारतीय रिजर्व बैंक के पास जमा राशि
39. प्रतिभूति समायोजन आरक्षिति - विनिधान खाता
ग. अन्य निधि
40. शैक्षणिक प्रयोजनों के लिए विकास निधि
41. के०जी० और पेन्नार जल निकास उपकर निधि
42. मुख्यमंत्री राहत निधि
43. नगरपालिका पर्यावरणीय स्कीम निधि
44. जिला प्रजा परिषद् निधियां
45. केन्द्रीय सड़क निधि से सरकारी सहायता
46. पुलिस निधियों का निक्षेप
47. आंध्र प्रदेश समाज कल्याण निधि निक्षेप
48. खनिज संसाधनों का विकास और प्रौद्योगिकी उन्नयन निधि
49. ग्राम पंचायत निधि
50. मंडला प्रजा परिषद् निधियां
51. विपणन समिति निधियां
52. बुनकरों के लिए मितव्यय निधि सह बचत और प्रतिभूति स्कीमें
53. राज्य कृषि प्रत्यय स्थरीकरण निधि
54. आंध्र प्रदेश राज्य सरकार कर्मचारी अभिदायी पेंशन स्कीम
(i) कर्मचारी अभिदाय
(ii) सरकार का अभिदाय
55. कर्मचारी कल्याण निधि में निक्षेप और कर्मचारी कल्याण निधि पर उपार्जित ब्याज के बराबर समतुल्य अभिदाय
(i) सरकारी कर्मचारियों को ऋण
(ii) पंचायत राज कर्मचारियों को ऋण
(iii) नगर निगम/ नगरपालिक कर्मचारियों को ऋण
(iv) कर्मचारी कल्याण निधि और लेखन सामग्री, स्टांप, आकस्मिक मदों, आदि जैसे अन्य संबद्ध व्यय में कार्यरत कर्मचारियों को पारिश्रमिक
56. आंध्र प्रदेश भवन और अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के निक्षेप
57. प्राकृतिक विपत्ति अव्ययित अतिरिक्त धनराशि निधि
58. कृषि प्रयोजनों के लिए विकास निधि
59. जमींदारी उन्मूलन निधि
60. एथाइल एल्कोहाल भंडारण प्रसुविधा निधि
(i) आंध्र प्रदेश सरकारी पावर एल्कोहाल कारखाना, बोधान
(ii) आंध्र प्रदेश सरकारी पावर एल्कोहाल कारखाना, छागल्लु
61. प्रतिभूति समायोजन आरक्षिती
62. आंध्र प्रदेश फसल बीमा निधि
63. आंध्र प्रदेश व्यापक फसल बीमा स्कीम
64. धार्मिक पूर्त विन्यास निधियां
65. पन-तापीय-बिजली स्कीमों की अवमूल्यन आरक्षिती निधि
(i) पन-तापीय-बिजली स्कीमों की अवमूल्यन आरक्षिती निधि
(ii) मछकुंड
(iii) तुंगभद्रा
66. राज्य नवीकरण निधि
67. आंध्र प्रदेश ग्रामीण विकास निधि
68. सार्वजनिक पुस्तकालयों के उन्नयन के लिए समग्र निधि
69. सरकारी वाणिज्यिक विभागों/ उपक्रमों की साधारण आरक्षिती निधियां ।
आठवीं अनुसूची
(धारा 59 देखिए)
पेंशनों की बाबत दायित्व का प्रभाजन
1. पैरा 3 में वर्णित समायोजनों के अधीन रहते हुए, विद्यमान आंध्र प्रदेश राज्य द्वारा नियत दिन के पूर्व अनुदत्त पेंशनों की बाबत प्रत्येक उत्तरवर्ती राज्य अपने-अपने खजानों में से दी जाने वाली पेशनें संदत्त करेगा ।
2. उक्त समायोजनों के अधीन रहते हुए विद्यमान आंध्र प्रदेश राज्य के कार्यकलापों के संबंध में सेवा करने वाले उन अधिकारियों की पेंशनों के बारे में दायित्व, जो नियत दिन के पूर्व सेवानिवृत्त होते हैं या सेवानिवृत्ति पूर्व छुट्टी पर चले जाते हैं किन्तु पेंशनों के लिए जिनके दावे उस दिन के ठीक पूर्व बकाया हैं, आंध्र प्रदेश राज्य के दायित्व होंगे ।
3. नियत दिन से प्रारंभ होने वाली और नियत दिन के पश्चात् ऐसी तारीख को जो केन्द्रीय सरकार द्वारा नियत की जाए, समाप्त होने वाली अवधि की बाबत तथा प्रत्येक पश्चात्वर्ती वित्तीय वर्ष की बाबत पैरा 1 और पैरा 2 में निर्दिष्ट पेंशनों के बारे में दोनों उत्तरवर्ती राज्यों को किए गए कुल संदायों को संगणना में लिया जाएगा । पेंशनों और अन्य सेवानिवृत्ति फायदों की बाबत विद्यमान आंध्र प्रदेश राज्य के कुल दायित्व का उत्तरवर्ती राज्यों के बीच प्रभाजन जनसंख्या के अनुपात में किया जाएगा और अपने द्वारा देय अंश से अधिक का संदाय करने वाले किसी उत्तरवर्ती राज्य की आधिक्य रकम की प्रतिपूर्ति राज्य या कम संदाय करने वाले राज्य द्वारा की जाएगी ।
4. नियत दिन के पूर्व अनुदत्त की गई और विद्यमान आंध्र प्रदेश राज्य के राज्यक्षेत्र से बाहर किसी भी क्षेत्र में दी जाने वाली पेंशनों के बारे में विद्यमान आंध्र प्रदेश राज्य का दायित्व, पैरा 3 के अनुसार किए जाने वाले समायोजनों के अधीन रहते हुए आंध्र प्रदेश राज्य का दायित्व होगा, मानो ऐसी पेंशनें पैरा 1 के अधीन आंध्र प्रदेश राज्य के किसी खजाने से ली गई हों ।
5. (1) विद्यमान आंध्र प्रदेश राज्य के कार्यकलाप के संबंध में नियत दिन के ठीक पूर्व सेवा करने वाले और उस दिन या उसके पश्चात् सेवानिवृत्त होने वाले अधिकारी की पेंशन के बारे में दायित्व उसे पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति फायदे अनुदत्त करने वाले उत्तरवर्ती राज्य का दायित्व होगा ; किन्तु किसी ऐसे अधिकारी को विद्यमान आंध्र प्रदेश राज्य के कार्यकलाप के संबंध में सेवा के कारण तात्पर्यित पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति फायदे का भाग उत्तरवर्ती राज्यों में जनसंख्या के अनुपात में आबंटित किया जाएगा और पेंशन अनुदत्त करने वाली सरकार, अन्य उत्तरवर्ती राज्यों में से प्रत्येक राज्य से इस दायित्व का उसका अंश प्राप्त करने की हकदार होगी ।
(2) यदि ऐसा कोई अधिकारी नियत दिन के पश्चात् पेंशन अनुदत्त करने वाले राज्य से भिन्न एक से अधिक उत्तरवर्ती राज्य के कार्यकलापों के संबंध में सेवा करता रहा हो, तो पेंशन अनुदत्त करने वाला राज्य उस सरकार को ऐसी रकम की प्रतिपूर्ति करेगा जिसके द्वारा पेंशन की रकम अनुदत्त की गई है, जिसको नियत दिन के पश्चात् की उसकी सेवा के कारण तात्पर्यित पेंशन के भाग का वही अनुपात हो, जो प्रतिपूर्ति करने वाले राज्य के अधीन नियत दिन के पश्चात् की उसकी अर्हक सेवा का उस अधिकारी को उसकी पेंशन के प्रयोजनार्थ परिकलित नियत दिन के पश्चात् की कुल सेवा का है ।
6. इस अनुसूची में पेंशन के प्रति निर्देश का अर्थ इस प्रकार लगाया जाएगा कि उसके अंतर्गत पेंशन के संराशीकृत मूल्य के प्रति निर्देश भी है ।
नवीं अनुसूची
(धारा 68 और धारा 71 देखिए)
सरकारी कंपनियों और निगमों की सूची
|
क्रम सं० |
सरकारी कंपनियों के नाम |
पता |
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(1) |
(2) |
(3) |
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1.
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आंध्र प्रदेश स्टेट सीड्स डेवलपमेंट कारपोरेशन लिमिटेड |
एस-10-193, दूसरा तल, एचएसीए भवन, पब्लिक गार्डन के सामने, हैदराबाद - 500004. |
|
2. |
आंध्र प्रदेश स्टेट एग्रो इंडस्ट्रीयल डेवलपमेंट कारपोरेशन लिमिटेड |
504, हर्मिटेज ऑफिस कांप्लेक्स, हिल फोर्ट रोड, हैदराबाद - 500 004. |
|
3. |
आंध्र प्रदेश स्टेट वेयरहाउसिंग कारपोरेशन |
वेयरहाउसिंग सदन, दूसरा तल, गांधी भवन के पीछे, नमपल्ली, हैदराबाद - 500 001. |
|
4. |
आंध्र प्रदेश स्टेट सिविल सप्लाई कारपोरेशन लिमिटेड |
6-3-655/1/ए, सिविल सप्लाई भवन, सोमाजीगुड़ा, हैदराबाद - 500 082. |
|
5. |
आंध्र प्रदेश गेन्को |
विद्युत शोध, खैराताबाद, हैदराबाद - 500 004. |
|
6. |
आंध्र प्रदेश ट्रांसको |
विद्युत सुधा, खैराताबाद, हैदराबाद - 500 004. |
|
7. |
सिंगारेनी कोलियरीस कंपनी लिमिटेड |
सिंगारेनी भवन, मचारमंजिल रेडहिल्स, हैदराबाद - 500 004. |
|
8. |
एनआरईडीसीएपी |
पिसगा कांप्लेक्स, नमपल्ली, हैदराबाद - 500 001. |
|
9. |
आंध्र प्रदेश फारेस्ट डेवलपमेंट कारपोरेशन लिमिटेड |
यूएनआई बिल्डिंग, तीसरा तल, ए०सी०गार्डस, हैदराबाद - 500 004. |
|
10. |
आंध्र प्रदेश स्टेट फिल्म और टेलीविजन थियेटर डेवलपमेंट कारपोरेशन लिमिटेड |
10-2-1, एफडीसी कांप्लेक्स, ए०सी०गार्डस, हैदराबाद - 500 004. |
|
11. |
आंध्र प्रदेश मेडीकल सर्विसिस इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कारपोरेशन |
एपीएमएसआईडीसी बिल्डिंग. डीएम एंड एचएस कैंपस, सुल्तान बाजार, हैदराबाद - 500 095 |
|
12. |
आंध्र प्रदेश स्टेट पुलिस हाउसिंग कारपोरेशन लिमिटेड
|
डीआईजी ऑफिस, सैफाबाद, हैदराबाद - 500 004.
|
|
13. |
आंध्र प्रदेश स्टेट हाऊसिंग कारपोरेशन लिमिटेड |
3-6-184, स्ट्रीट सं०17, उर्दू हाल लेन, हिमायत नगर, हैदराबाद |
|
14. |
आंध्र प्रदेश हाउसिंग बोर्ड |
ग्रुहकल्पा, एम० जे० रोड, नामपल्ली, हैदराबाद - 500 028 |
|
15. |
आंध्र प्रदेश टेक्नोलाजी सर्विसिस लिमिटेड |
बी० आर० के० बिल्डिंग, टैंक बंद रोड, हैदराबाद |
|
16. |
आंध्र प्रदेश मिनरल डेवलपमेंट कारपोरेशन लिमिटेड
|
रेयर ब्लॉक, तीसरा तल, एचएमडब्ल्यूएसएसबी परिसर, खैराताबाद, हैदराबाद - 500 004. |
|
17. |
आंध्र प्रदेश इंडस्ट्रीयल इन्फ्रास्ट्रक्चर कारपोरेशन लिमिटेड |
5-9-58/बी, छठा तल, परिश्रम भवन, बशीर बाग, हैदराबाद - 500 004. |
|
18. |
आंध्र प्रदेश इंडस्ट्रीयल डेवलपमेंट कारपोरेशन लिमिटेड |
5-9-58/बी, छठा तल, परिश्रम भवन, बशीर बाग, हैदराबाद - 500 004. |
|
19. |
आंध्र प्रदेश स्टेट फाइनेंस कारपोरेशन |
5-9-194, चिराग अली लेन, अबिद, हैदराबाद - 500 001 |
|
20. |
आंध्र प्रदेश लैदर इंडस्ट्रीयल डेवलपमेंट कारपोरेशन (एलआईडीसीएपी) |
5-77/27, दरगाहुसैनी शॉ अली, गोलकोंडा पोस्ट, हैदराबाद - 500 008. |
|
21. |
आंध्र प्रदेश हैंडीक्राफ्ट डेवलपमेंट कारपोरेशन लिमिटेड |
हस्तकला भवन, मुशीराबाद, एक्स रोड, हैदराबाद । |
|
22. |
आंध्र प्रदेश स्टेट ट्रेड कारपोरेशन लिमिटेड (एपीटीपीसी) |
6-10-74, फतेह मैदान रोड, शकर भवन, हैदराबाद - 500 004. |
|
23. |
आंध्र प्रदेश स्टेट इरीगेशन डेवलपमेंट कारपोरेशन लिमिटेड |
8-2-674/2/बी, रोड नं० 13, बंजारा हिल्स, हैदराबाद - 500 034. |
|
24. |
आंध्र प्रदेश स्टेट माइनोरीटीज फाइनेंस कारपोरेशन लिमिटेड |
पांचवां तल, ए० पी० स्टेट हज हाउस, पब्लिक गार्डन के सामने, नमपल्ली, हैदराबाद - 500 001. |
|
25. |
आंध्र प्रदेश बेवरेज कारपोरेशन लिमिटेड |
चौथा तल, प्रोहिबिसन एंड एक्साइज कंप्लेक्स, 9 एंड 10 इस्टर्न, एम० जे० रोड, नमपल्ली, हैदराबाद - 500 001. |
|
26. |
आंध्र प्रदेश स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन |
बस भवन, मुशीराबाद, एक्स रोड, हैदराबाद । |
|
27. |
आंध्र प्रदेश फूड्स |
आईडीए, नचाराम, हैदराबाद - 500 076. |
|
28. |
आंध्र प्रदेश स्टेट टूरिज्म डेवलपमेंट कारपोरेशन लिमिटेड |
3-5-891, ए० पी० टूरिज्म हाउस, हिमायत नगर, हैदराबाद । |
|
29. |
आंध्र प्रदेश राजीव स्वगरूहा कारपोरेशन लिमिटेड |
ए-06, शाहभवन, बांडलागुडा, जीएसआई (पोस्ट), हैदराबाद - 500 068. |
|
30. |
इस्टर्न पावर डिस्ट्रीब्यूशन कारपोरेशन लिमिटेड |
कारपोरेट ऑफिस, गुरूवार जंक्शन के नजदीक, पी एंड टी सीताम्मधारा कालोनी, विशाखापटनम - 530013. |
|
31. |
सर्दर्न पावर डिस्ट्रीब्यूशन कारपोरेशन लिमिटेड |
1-13-65/ए, श्रीनिवासपुरम, तिरूपति-517503. |
|
32. |
सेन्ट्रल पावर डिस्ट्रीब्यूशन कारपोरेशन लिमिटेड |
6-1-50, कारपोरेट ऑफिस, मिंट कंपाउंड, हैदराबाद - 500 063. |
|
33. |
नार्दर्न पावर डिस्ट्रीब्यूशन कारपोरेशन लिमिटेड |
1-1-478, चैतन्यापुरी कालोनी, आरईएस पेट्रोल पंप के नजदीक, वारंगल. |
|
34. |
आंध्र प्रदेश हैवी मशीनरी एंड इंजीनियरिंग लिमिटेड |
रजिस्टर्ड ऑफिस एंड फैक्टरी, कोंडापल्ली- 521 228. कृष्णा डिस्ट्रीक्ट. |
|
35. |
वाईज़ैग ऐपरल पार्क फार एक्सपोर्ट लिमिटेड |
सी-ब्लॉक, चौथा तल, बीआरके भवन, हैदराबाद - 500 063. |
|
36. |
आंध्र प्रदेश स्टेट क्रिश्चयन (माइनोरीटीज) फाइनेंस कारपोरेशन |
6-2-41, फ्लैट नं० 102, मुगल इमामी मेनशन, शाडान कालेज के सामने, खैराताबाद, हैदराबाद - 500 004. |
|
37. |
हैदराबाद मेट्रो रेल लिमिटेड |
मेट्रो रेल भवन, सैफाबाद, हैदराबाद - 500 004. |
|
38. |
आंध्र प्रदेश अर्बन फाइनेंस इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कारपोरेशन लिमिटेड |
दूसरा तल, ई एंड पीएच कंप्लेक्स, कसाना बिल्डिंग, एसी गार्ड, हैदराबाद. |
|
39. |
आंध्र प्रदेश इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कारपोरेशन (आईएनसीएपी) |
10-2-1, तीसरा तल, एफडीसी कंप्लेक्स, एसी गार्ड, हैदराबाद - 500 028. |
|
40. |
आंध्र प्रदेश ओवरसीज मैनपावर कंपनी लिमिटेड (ओएमसीएपी) |
आईटीआई मालेपल्ली कैंपस, विजयनगर कालोनी, हैदराबाद - 500 057. |
|
41. |
आंध्र प्रदेश पावर फाइनेंस कारपोरेशन लिमिटेड |
एल-ब्लॉक, चौथा तल, आंध्र प्रदेश सचिवालय, हैदराबाद |
|
42. |
आंध्र प्रदेश रोड डेवलपमेंट कारपोरेशन |
आर एंड बी आफिस, महावीर के पास, एसी गार्ड, हैदराबाद - 500 057. |
|
43. |
आंध्र प्रदेश ट्राईबल पावर कंपनी लिमिटेड (टीआरआईपीसीओ) |
चौथा तल, दामोदरम सांजिवाइआ संकेशमा भवन, मसब टैंक, हैदराबाद. |
|
44. |
आंध्र प्रदेश ट्राईबल माइनिंग कंपनी लिमिटेड (टीआरआईएमसीओ) |
चौथा तल, दामोदरम सांजिवाइआ संकेशमा भवन, मसब टैंक, हैदराबाद. |
|
45. |
आंध्र प्रदेश कोआपरेटिव आयल सीड्स ग्रोवर्स फेडरेशन लिमिटेड |
परिशर्मा भवन, नवां फ्लोर, हैदराबाद । |
|
46. |
आंध्र प्रदेश मार्केटिंग फेडरेशन लिमिटेड |
हाका भवन, हिल फोर्ड रोड, हैदराबाद । |
|
47. |
डेक्कन इन्फ्रास्ट्रक्चर एंड लैंड होल्डिग्स लिमिटेड
|
केयर आफ आंध्र प्रदेश हाउसिंग बोर्ड, ग्राउंड फ्लोर, ग्रुहा कल्पा, एम जे रोड, नामपल्ली, हैदराबाद-500 001 |
|
48. |
आंध्र प्रदेश एविएशन कारपोरेशन लिमिटेड |
दूसरा तल, कंटेनर, फ्लोराइड स्टेशन, एयर कारपोरेशन काम्पलेक्स, बेगमपेट 16. |
|
49. |
आंध्र प्रदेश गैस इन्फ्रास्ट्रक्चर कारपोरेशन (पी) लिमिटेड
|
5-9-58/बी, परिश्रम भवन, दूसरा तल, फते मैदान रोड, बशीरबाग, हैदराबाद-14 |
|
50. |
आंध्र प्रदेश गैस डिस्ट्रिब्यूसन कारपोरेशन लिमिटेड
|
5-9-58/बी, परिश्रम भवन, दूसरा तल, फते मैदान रोड, बशीरबाग, हैदराबाद-14. |
|
51. |
आंध्र प्रदेश खादी एंड विलेज इंडस्ट्रीज बोर्ड (एपीकेवीआईबी). |
मेहदीपतनम रोड, मसब टैंक, हुमायूं नगर, हैदराबाद । |
|
52. |
आंध्र प्रदेश स्टेट हैंडलूम वीवर्स को-आपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड (एपीसीओ) |
सड़क नं. 16, इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट एरिया, चिन्थल, हैदराबाद-55.
|
|
53. |
आंध्र प्रदेश टैक्सटाइल डेवल्पमेंट कारपोरेशन (एपीटीईएक्स) । |
चौथा तल, बीआरकेआर भवन, सी ब्लाक, टैंकबंदरोड, सैफाबाद, हैदराबाद-4. |
|
54. |
निजाम सूगर्स लिमिटेड (एनएसएल) |
6-3-570/1, 201, डायमंड ब्लाक, रॉकडेल कंपाउंड, सोमाजीगुडा, एरामंजिल, हैदराबाद-82. |
|
55. |
आंध्र प्रदेश फूड प्रोसेसिंग सोसाइटी (एपीएफपीएस) |
पहला तल, बीआरकेआर भवन, टैंक बंद रोड, हैदराबाद-63. |
|
56. |
कृष्णआपतनम इंटरनेशनल लैदर कॉप्लेक्स प्राइवेट लिमिटेड (केपीआइएलसी) |
पांचवां तल, फ्लोर, परिशर्मा भवन, बशीरबाग, हैदराबाद-4. |
|
57. |
आंध्र प्रदेश स्टेट फेडरेशन आफ को-आपरेटिव सुगर फैक्टरीज लिमिटेड (एपीएसएफसीएससी) |
चिराग अली लेन, हैदराबाद-500 001. |
|
58. |
टैक्सटाइल पार्क, पाशा मैलाराम |
पाशा मैलाराम, मेडक डिस्ट्रिक्ट । |
|
59. |
आंध्र प्रदेश वुमेन्स को-आपरेटिव फाइनेंस कारपोरेशन लिमिटेड |
डोर नं० 1335/एच, रोड नं० 45, जुबली हिल्स, हैदराबाद-500 033. |
|
60. |
आंध्र प्रदेश विकलांगुला को-आपरेटिव कारपोरेशन |
एपी विकलांगुला संक्षेमा भवन, नालगोंडा एक्स रोड्स, माल्कपेट । |
|
61. |
आंध्र प्रदेश वाटर रिसोर्सेज डेवल्पमेंट कारपोरेशन |
चौथा तल, जलसौदा बिल्डिंग, एराम मंजिल, हैदराबाद । |
|
62. |
आंध्र प्रदेश स्टेट प्रोपर्जी टैक्स बोर्ड (एपीएसपीटीबी), हैदराबाद |
एसी गार्ड्स मसबटैंक, हैदराबाद । |
|
63. |
आंध्र प्रदेश टोड्डी टैपर्स कोआपरेटिव फाइनेंस कारपोरेशन लिमिटेड (एपी गीता पारिश्रमिक सहकारा आर्थिक समक्षीमा संस्था), नारायनगुंडा, हैदराबाद |
3-5-1089, बीसाइड दीपक सेन्मा थीएटर, नारायनगुंडा, हैदराबाद-29.
|
|
64. |
सोसाइटी फार इंपलायमेंट, प्रोमोशन एंड ट्रैनिंग इन ट्विन सिटीज (एसईटीडब्ल्युआइएन) |
आजमठ जाह पैलेस, पुरानी हवेली, हैदराबाद- 500 022. |
|
65. |
स्पोर्ट्स अथारिटी आफ आंध्र प्रदेश (एसएएपी) |
लाल बहादुर स्टेडियम, हैदराबाद-500 001. एपी. इंडिया । |
|
66. |
आंध्र प्रदेश सोसाइटी फार ट्रेनिंग एंड इंप्लायमेंट प्रोमोशन (एपीएसटीईपी) टू बी ऐडेड |
डायरेक्टर आफ यूथ सर्विसेज एंड एमडी, एपीएसटीईपी, बिहाइंड बोट्स क्लब, सिकंदराबाद । |
|
67. |
स्टेट इंस्टीट्यूट आफ होटल मैनेजमेंट कैटरिंग टेक्नोलॉजी, तिरुपति
|
एसवी जू पार्क के समीप, एपी टूरिज्म ट्रांसपोर्ट के साथ, पेलर विलेज, तिरुपति, चित्तूर जिला - 517 507. |
|
68. |
स्टेट इंस्टीट्यूट आफ होटल मैनेजमेंट कैटरिंग टेक्नोलॉजी, मेडक |
कोहीर क्रास रोड, कावेरी विलेज, मेडक जिला - 502 321. |
|
69. |
आंध्र प्रदेश मीट डेवलपमेंट कारपोरेशन, हैदराबाद |
10-2-289/129, शांतिनगर, हैदराबाद-28 |
|
70. |
आंध्र प्रदेश डेयरी डेवलपमेंट कारपोरेशन, हैदराबाद |
विजया भवन, लालापेट, हैदराबाद-17 |
|
71. |
एपी शीप एंड गोट डेवलपमेंट कोआपरेटिव फेडरेशन, हैदराबाद |
मैंनेजिंग डायरेक्टर, 10 - 2 - 289/127, शांतिनगर, मसाबटैंक, हैदराबाद-28 |
|
72. |
आंध्र प्रदेश स्टेट फिशरमेन कोआपरेटिव सोसाइटीज फेडरेशन, हैदराबाद |
मैनेजिंग डायरेक्टर, आफिस आफ कमिश्नर आफ फिशरीज, फोर्थ लांस, शांतिनगर, मत्स्य भवन, हैदराबाद । |
|
73. |
आंध्र प्रदेश डेयरी डेवलपमेंट कोआपरेटिव फेडरेशन लिमिटेड, हैदराबाद |
विजया भवन, लालापेट, हैदराबाद-17.
|
|
74. |
आंध्र प्रदेश स्टेट वेटरनरी काउंसिल, हैदराबाद |
मकान सं० 2-289/124, रोड नं० 4, शांति नगर, हैदराबाद- 500 028. |
|
75. |
आंध्र प्रदेश गिरिजन कोआपरेटिव कारपोरेशन |
तेलुगु सक्षेमा भवन, मसाब टैंक, हैदराबाद- 28 |
|
76. |
आंध्र प्रदेश स्टेट एसटी कोआपरेटिव फाइनेंस कारपोरेशन (त्रिकोर) |
मैनेजिंग डायरेक्टर, पहला तल, डी.एस.एस. भवन, मसाब टैंक, हैदराबाद- 28 |
|
77. |
आंध्र प्रदेश एजुकेशन एंड वेलफेयर इंफ्रास्टक्चर डेवलपमेंट कारपोरेशन (एपीईडब्ल्यूआईडीसी) |
चौथा तल, राजीव विद्या मिशन बिल्डिंग, एससीईआरटी कंपाउंड, हैदराबाद - 500 001 |
|
78. |
आंध्र प्रदेश शेड्यूल कास्ट्स कोआपरेटिव फाइनेंस कारपोरेशन |
वीसी एंड एमडी, दामोदरम संजीवैय्या संक्षेमा भवन, पांचवां तल, मसाब टैंक, हैदराबाद – 28 |
|
79. |
आंध्र प्रदेश बैकवर्ड क्लासेस कोआपरेटिव फाइनेंस कारपोरेशन |
सक्षेमा भवन, मसाब टैंक, हैदराबाद – 28 |
|
80. |
आंध्र प्रदेश वाशरमेन कोआपरेटिव सोसाइटीज फेडरेशन लिमिटेड |
संक्षेमा भवन, मसाब टैंक, हैदराबाद – 28 |
|
81. |
आंध्र प्रदेश नाई ब्राह्मण कोआपरेटिव सोसाइटीज फेडरेशन लिमिटेड |
संक्षेमा भवन, मसाब टैंक, हैदराबाद – 28 |
|
82. |
आंध्र प्रदेश सागर कोआपरेटिव सोसाइटीज फेडरेशन लिमिटेड |
संक्षेमा भवन, मसाब टैंक, हैदराबाद- 28 |
|
83. |
आंध्र प्रदेश वाल्मिकी कोआपरेटिव सोसाइटीज फेडरेशन लिमिटेड |
संक्षेमा भवन, मसाब टैंक, हैदराबाद- 28 |
|
84. |
आंध्र प्रदेश बालीजा कोआपरेटिव सोसाइटीज फेडरेशन लिमिटेड |
संक्षेमा भवन, मसाब टैंक, हैदराबाद- 28 |
|
85. |
आंध्र प्रदेश बत्राजा कोआपरेटिव सोसाइटीज फेडरेशन लिमिटेड |
संक्षेमा भवन, मसाब टैंक, हैदराबाद- 28 |
|
86. |
आंध्र प्रदेश मेदारा कोआपरेटिव सोसाइटीज फेडरेशन लिमिटेड |
संक्षेमा भवन, मसाब टैंक, हैदराबाद- 28 |
|
87. |
आंध्र प्रदेश कुम्मारी कोआपरेटिव सोसाइटीज फेडरेशन लिमिटेड |
संक्षेमा भवन, मसाब टैंक, हैदराबाद- 28 |
|
88. |
आंध्र प्रदेश विश्वब्राह्मण कोआपरेटिव सोसाइटीज फेडरेशन लिमिटेड |
संक्षेमा भवन, मसाब टैंक, हैदराबाद- 28 |
|
89. |
आंध्र प्रदेश टैडी टेपर्स कोआपरेटिव सोसाइटीज फेडरेशन लिमिटेड |
संक्षेमा भवन, मसाब टैंक, हैदराबाद- 28 |
दसवीं अनुसूची
(धारा 75 देखिए)
कतिपय राज्य संस्थाओं में सुविधाओं को जारी रखना
प्रशिक्षण संस्थाओं/केन्द्रों की सूची
1. आंध्र प्रदेश राज्य सहकारी संघ, हैदराबाद
2. आंध्र प्रदेश पिछड़ा वर्गों के लिए स्टडी सर्कल, विशाखापटनम
3. पर्यावरण संरक्षण प्रशिक्षण और अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद
4. आंध्र प्रदेश वन अकादमी, रंगारेड्डी जिला
5. आंध्र प्रदेश राज्य विज्ञान और प्रौद्योगिकी परिषद् (एपीसीओएसटी), हैदराबाद
6. डॉ. एमसीआर मानव संसाधन विकास संस्थान आंध्र प्रदेश, हैदराबाद
7. सुशासन केन्द्र, हैदराबाद
8. स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य संस्थान, वंगालराव नगर, हैदराबाद
9. राज्य तकनीकी शिक्षा और प्रशिक्षण बोर्ड, हैदराबाद
10. आंध्र प्रदेश पुलिस अकादमी, हैदराबाद
11. जल और भूमि प्रबंधन प्रशिक्षण और अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद
12. एएमआर, आंध्र प्रदेश ग्रामीण विकास अकादमी, हैदराबाद
13. श्री रमनानंदा तीर्थ प्रशिक्षण और अनुसंधान संस्थान
14. आंध्र प्रदेश मद्यनिषेध और उत्पाद शुल्क अकादमी
15. राज्य प्रौद्योगिकी शिक्षण संस्थान, हैदराबाद
16. राज्य शिक्षण अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद्, हैदराबाद
17. आंध्र प्रदेश अध्ययन केन्द्र, हैदराबाद
18. जनजातीय संस्कृति और अनुसंधान संस्थान, संक्षेमा भवन, मसाब टैंक, हैदराबाद
19. मध्यवर्ती शिक्षा बोर्ड, हैदराबाद
20. आंध्र प्रदेश राज्य बीज प्रमाणीकरण अभिकरण, हैदराबाद
21. आंध्र प्रदेश पशुधन विकास अभिकरण, हैदराबाद
22. वन और प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन अध्ययन केन्द्र (सीईएफएनएआरएम), रंगारेड्डी जिला
23. आंध्र प्रदेश प्रेस अकादमी, हैदराबाद
24. एड्स नियंत्रण सोसाइटी, हैदराबाद
25. आंध्र प्रदेश चिकित्सीय एवं सुगंधित वनस्पति बोर्ड, हैदराबाद
26. आंध्र प्रदेश पराचिकित्सीय बोर्ड, हैदराबाद
27. आंध्र प्रदेश राज्य उच्चतर शिक्षा परिषद्, हैदराबाद
28. न्यायालयिक विज्ञान प्रयोगशाला, हैदराबाद
29. राज्यस्तर पुलिस भर्ती बोर्ड
30. आंध्र प्रदेश नेटवर्क सोसाइटी (एसएपीएनईटी), हैदराबाद
31. आंध्र प्रदेश इंजीनियरी अनुसंधान प्रयोगशाला, हैदराबाद
32. आंध्र प्रदेश उर्दू अकादमी, हैदराबाद
33. आंध्र प्रदेश गरीबों के लिए शहरी सेवाएं, हैदराबाद
34. नगरपालिका क्षेत्र में गरीबी उन्मूलन मिशन (एमईपीएमए), हैदराबाद
35. आंध्र प्रदेश ग्रामीण जीवनयापन परियोजना (पी० एम० यू०), हैदराबाद
36. जल संरक्षण मिशन
37. ग्रामीण गरीबी उन्मूलन सोसाइटी, हैदराबाद
38. रोजगार उत्पत्ति और विपणन मिशन, हैदराबाद
39. आंध्र प्रदेश राज्य दूर संवेदी प्रयोग केन्द्र, हैदराबाद
40. आंध्र प्रदेश ओपन स्कूल सोसाइटी, हैदराबाद
41. ए० पी० आर० ई० आई सोसाइटी, हैदराबाद
42. आंध्र प्रदेश समाज कल्याण आवासीय शिक्षा संस्थान सोसाइटी (ए० पी० एस० डब्ल्यू० आर० ई० आई०), हैदराबाद
43. राज्य कृषि प्रबंध और विस्तारण प्रशिक्षण संस्थान (एसएएमईटीआई), हैदराबाद
44. मृदा संरक्षण प्रशिक्षण केन्द्र, हैदराबाद
45. आंध्र प्रदेश पशुधन विकास राज्य प्रबंध संस्थान, हैदराबाद (एसएमआईएलडीए) (हैदराबाद)
46. राज्य पशुपालन प्रशिक्षण केन्द्र, पूर्व गोदावरी
47. राज्य मत्स्यक्षेत्र प्रौद्योगिकी संस्थान (एसआईएफटी), काकीनाड़ा
48. महात्मा ज्योतिबा फूले आंध्र प्रदेश पिछड़ा वर्ग कल्याण आवासीय शैक्षिक संस्था सोसाइटी, हैदराबाद
49. आंध्र प्रदेश पिछडा वर्ग आयोग, हैदराबाद
50. हिन्दी अकादमी, हैदराबाद
51. तेलगु अकादमी, हैदराबाद
52. संस्कृत अकादमी, हैदराबाद
53. ओरियंटल पांडुलिपि पुस्तकालय और अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद
54. आंध्र प्रदेश राज्य अभिलेख और अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद
55. राजीव गांधी ज्ञान प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, हैदराबाद
56. जवाहर लाल नेहरू वास्तु और ललितकला विश्वविद्यालय, हैदराबाद
57. श्री पदमावती महिला विश्वविद्यालय, हैदराबाद
58. द्रविड़ियन विश्वविद्यालय, कुप्पम
59. तेलगु विश्वविद्यालय, हैदराबाद
60. डाक्टर बी० आर० अम्बेडकर मुक्त विश्वविद्यालय, हैदराबाद
61. आर० वी० एम० (एसएसए) प्राधिकारण, हैदराबाद
62. आंध्र प्रदेश सरकारी पाठ्य पुस्तक मुद्रणालय, हैदराबाद
63. राज्य केन्द्रीय पुस्तकालय, हैदराबाद
64. आंध्र प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, हैदराबाद
65. आंध्र प्रदेश राज्य जैव-विविधता बोर्ड, हैदराबाद
66. आंध्र प्रदेश राष्ट्रीय हरित कार्पस, सिकंदराबाद
67. निवारक ओषधि संस्थान निदेशालय, हैदराबाद
68. आंध्र प्रदेश इलैक्ट्रानिक शासन संस्थान (आईईजी), एपी ज्ञान नेटर्वक सोसाइटी, हैदराबाद
69. राष्ट्रीय शहरी प्रबंध संस्थान (एनआईयूएम), हैदराबाद
70. आंध्र प्रदेश राज्य वक्फ बोर्ड, हैदराबाद
71. वक्फ सर्वेक्षण आयुक्त, हैदराबाद
72. अल्पसंख्यक शैक्षिक विकास केन्द्र, हैदराबाद
73. दैरातुल मारिफ, ओयू, हैदराबाद
74. आंध्र प्रदेश राज्य हज समिति, हैदराबाद
75. आंध्र प्रदेश राज्य विकास योजना सोसाइटी, हैदराबाद
76. विस्तारण प्रशिक्षण केन्द्र, राजेन्द्र नगर
77. विस्तारण प्रशिक्षण केन्द्र, हासनपार्थी
78. विस्तारण प्रशिक्षण केन्द्र, बापतला
79. विस्तारण प्रशिक्षण केन्द्र, सामलकोट
80. विस्तारण प्रशिक्षण केन्द्र, श्रीकलाहस्ती
81. आंध्र प्रदेश राजीव शिक्षा और नियोजन मिशन (आरईईएमएपी), हैदराबाद
82. ग्रामीण विकास सेवा सोसाइटी, हैदराबाद
83. सामाजिक संपरीक्षा, जवाबदेही और पारदर्शिता सोसाइटी, हैदराबाद
84. स्त्री निधि प्रत्यय सहकारी फेडरेशन लिमिटेड, हैदराबाद
85. आंध्र प्रदेश सर्वेक्षण प्रशिक्षण अकादमी, हैदराबाद
86. अम्बेडकर अनुसूचित जाति अनुसंधान और प्रशिक्षण संस्थान, हैदराबाद
87. आंध्र प्रदेश राज्य अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति आयोग, हैदराबाद
88. विक्टोरिया मेमोरियल गृह (आवासीय विद्यालय), हैदराबाद
89. एपीटीडब्ल्यू आवासीय शिक्षा संस्था सोसाइटी (गुरूकुलम), हैदराबाद
90. डा० वाईएसआर अनुसूचित जाति स्टडी सर्कल (पीईटीसी), सिकंदराबाद
91. आंध्र प्रदेश महिला आयोग, सिकंदराबाद
92. आंध्र प्रदेश राज्य सामाजिक कल्याण सलाहकार बोर्ड, हैदराबाद
93. राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग, सिकंदराबाद
94. दृष्टि से विक्लांग व्यक्तियों के अध्यापकों के लिए प्रशिक्षण केन्द्र, सिकंदराबाद
95. आंध्र प्रदेश निःशक्त व्यक्ति स्टडी सर्कल, हैदराबाद
96. एपीएसआरटीसी कर्मचारी मितव्ययिता और प्रत्यय सहकारी सोसाइटी लि०, हैदराबाद
97. ट्रक चालक राजमार्ग प्रसुविधा सोसाइटी (टीओएचएएस), हैदराबाद
98. राष्ट्रीय केडेट कार्पस निदेशालय, सिकंदराबाद
99. शिल्पारमन कला शिल्प सांस्कृतिक सोसाइटी, मधापुर, हैदराबाद
100. डा० वाईएसआर राष्ट्रीय पर्यटन और सतकार प्रबंध संस्थान, हैदराबाद
101. राज्य सुधारक प्रशासन संस्थान, चंचलगुड़ा, हैदराबाद
102. आंध्र प्रदेश अग्निशमन सेवा और सिविल रक्षा प्रशिक्षण संस्थान, हैदराबाद
103. श्री प्रागदा कोट्यया मेमोरियल भारतीय हथकरघा प्रौद्योगिकी संस्थान (एसपीकेएमआईएचटी), नल्लोर
104. तेलगु चेनेथा पारिश्रमिक शिक्षण केन्द्रम, अनन्तपुर
105. बुनकर प्रशिक्षण केन्द्र, करीमनगर (डब्ल्यूटीसी), करीमनगर
106. विद्युत करघा सेवा केन्द्र, सिरसिल्ला, करीमनगर
107. खादी ग्रामोद्योग महाविद्यालय, हैदराबाद ।
ग्यारहवीं अनुसूची
[धारा 85(7) (ङ) देखिए]
नदी प्रबंधन बोर्डों के कृत्यों को शासित करने वाले सिद्धांत
1. कृष्णा नदी जल विवाद अधिकरण द्वारा न्यायनिर्णयन के पश्चात्, समुचित आश्रित मापदंड पर आधारित जल संसाधनों की बाबत जल संसाधन मंत्रालय द्वारा अधिसूचित प्रचालन प्रोटोकाल दोनों उत्तरवर्ती राज्यों पर बाध्यकारी होगा ।
2. सिंचाई और विद्युत के लिए जल की मांग में विरोध की दशा में, जल की सिंचाई के लिए अपेक्षा अभिभावी होगी ।
3. सिंचाई और पेयजल के लिए जल की मांग में विरोध की दशा में, पेयजल के प्रयोजन के लिए जल की अपेक्षा अभिभावी होगी ।
4. गोदावरी और कृष्णा नदियों पर विभिन्न परियोजनाओं के संबंध में या विद्यमान आंध्र प्रदेश राज्य के क्षेत्रों के लिए नदी जल अधिकरणों द्वारा किए गए आबंटन सुनिश्चित जल की बाबत नहीं रहेंगे ।
5. भविष्य में किसी अधिकरण द्वारा अतिरिक्त प्रवाह के लिए किए जाने वाले आबंटन, यदि कोई हों, तेलंगाना राज्य तथा उत्तरवर्ती आंध्र प्रदेश के राज्य दोनों पर बाध्यकारी होंगे ।
6. बोर्ड दोनों राज्य सरकारों को प्राकृतिक आपदाओं के प्रबंधन और शमन के लिए, विशेषकर जल को छोड़ने के संदर्भ में, कृष्णा और गोदावरी नदियों में आपदा या सूखा अथवा बाढ़ के प्रबंधन के लिए परामर्श देंगे जबकि उत्तरवर्ती राज्य सरकारें प्राकृतिक आपदाओं के प्रबंधन के लिए उत्तरदायी होंगी । बोर्ड को कृष्णा और गोदावरी नदियों पर बांधों, जलाशयों के मुख्य संकर्मों या नहरों के मुख्य संकर्मों के प्रचालन और उससे संबंधित संकर्मों, जिनके अन्तर्गत केन्द्रीय सरकार द्वारा यथा अधिसूचित जल विद्युत परियोजनाएं भी हैं के संबंध में, दोनों उत्तरवर्ती राज्य सरकारों द्वारा उनके आदेशों के त्वरित और प्रभावी क्रियान्वयन करवाए जाने के लिए पूर्ण प्राधिकार होगा ।
7. तेलंगाना राज्य या आंध्र प्रदेश के उत्तरवर्ती राज्य द्वारा गोदावरी या कृष्णा नदियों पर समुचित आश्रित मानदंडों पर आधारित जल संसाधनों के आधार पर कोई नई परियोजनाएं नदी जल संसाधनों पर सर्वोच्च परिषद् से स्वीकृति प्राप्त किए बिना प्रारंभ नहीं की जा सकेंगी । ऐसे सभी प्रस्ताव उक्त सर्वोच्च परिषद् द्वारा स्वीकृति से पूर्व, क्रमवर्ती बोर्ड द्वारा पहले आंके तथा तकनीकी रूप से अनुमोदित किए जाएंगे ।
8. गोदावरी और कृष्णा नदियों पर चल रही परियोजनाओं तथा भविष्यवर्ती नई परियोजनाओं के कार्यान्वयन का उत्तरदायित्व उस संबंधित राज्य सरकार का होगा जहां परियोजना अवस्थित है ।
9. दोनों में से किसी भी राज्य द्वारा विनिश्चय का कार्यान्वयन होने की दशा में, व्यतिक्रमी राज्य उत्तरदायित्व का वहन करेगा तथा केन्द्रीय सरकार द्वारा अधिरोपित वित्तीय और अन्य शास्तियों का सामना करेगा ।
10. निम्नलिखित सिंचाई परियोजनाएं, जो निर्माणाधीन हैं, विद्यमान आंध्र प्रदेश राज्य द्वारा अधिसूचित योजना के अनुसार पूरी की जाएंगी और जल में हिस्सा बंटाने संबंधी ठहराव इस प्रकार जारी रहेंगे: -
(i) हांडरी नीवा
(ii) तेलुगु गंगा
(iii) गलेरू नागिरि
(iv) वेनेगोंडु
(v) कलवाकुरथि
(vi) नेत्तमपडु ।
बारहवीं अनुसूची
(धारा 92 देखिए)
क. कोयला
1. सिंगरेनी कोयला खान कंपनी लिमिटेड (एससीसीएलएस) की कुल इक्विटी का 51 प्रतिशत तेलंगाना सरकार का और 49 प्रतिशत भारत सरकार का होगा ।
2. एससीसीएल के विद्यमान कोयला अनुबंध किसी परिवर्तन के बगैर जारी रहेंगे ।
3. नए अनुबंध, भारत सरकार की नवीन कोयला वितरण नीति के अनुसार उत्तरवर्ती राज्यों को आबंटित किए जाएंगे ।
4. आबंटित कोयला ब्लाकों के अंतोपयोजी संयंत्रों को उनकी अपनी-अपनी क्षमताओं के अनुपात में आपूर्ति किए जाने वाले ब्लाक से कोयले की आपूर्ति जारी रहेगी ।
ख. तेल और गैस
1. प्राकृतिक गैस का आबंटन, भारत सरकार की नीतियों और उसके द्वारा समय-समय पर जारी मार्गदर्शक सिद्धान्तों के अनुसार किया जाता रहेगा ।
2. तेल और गैस के घरेलू अपतट उत्पादन पर संदेय स्वामिस्व उस राज्य को प्रो-ूत होगा जिसमें ऐसा उत्पादन हुआ है ।
ग. विद्युत
1. एपीजीईएनसीओ की इकाइयों को विद्युत संयंत्रों की भौगोलिक अवस्थिति के आधार पर विभाजित किया जाएगा ।
2. संबद्ध डीआईएससीओएमएस से किए गए विद्यमान विद्युत क्रय करार चालू परियोजनाओं और निर्माणाधीन परियोजनाओं, दोनों के लिए जारी रहेंगे ।
3. विद्यमान आंध्र प्रदेश विद्युत विनियामक आयोग (एपीईआरसी) छह मास से अनधिक अवधि के लिए संयुक्त विनियामक निकाय के रूप में कार्य करेगा, जिसके भीतर उत्तरवर्ती राज्यों में पृथक् एसईआरसी स्थापित किया जाएगा ।
4. विद्यमान राज्य भार प्रेषण केन्द्र (एसएलडीसी), दो से अनधिक वर्ष की अवधि हेतु दोनों उत्तरवर्ती राज्यों के लिए कार्य करेगा जिस समय के भीतर प्रत्येक उत्तरवर्ती राज्य के लिए पृथक् राज्य भार वितरण केन्द्र स्थापित किया जाएगा । इस अवधि के दौरान, विद्यमान एसएलडीसी, बंगलूरू स्थित दक्षिणी आरएलडीसी के सीधे प्रशासन और नियंत्रणाधीन कृत्य करेगा ।
5. उत्तरवर्ती राज्यों से गुजरने वाली 132 के० वी० के एपीटीआरएएनएससीओ की पारेषण लाइनों और उच्चतर वोल्टेज की पारेषण लाइनों को अन्तरराज्यिक पारेषण प्रणाली (आईएसटीएस) लाइनों के अनुरूप समझा जाएगा । प्रत्येक उत्तरवर्ती राज्य के राज्यक्षेत्रों के भीतर आने वाली पारेषण लाइनें संबद्ध राज्य पारेषण इकाइयों को अन्तरित की जाएंगी । आईएसटीएस का रखरखाव भी उत्तरवर्ती राज्यों द्वारा, क्रमशः उनकी अधिकारिताओं में किया जाएगा ।
6. केन्द्रीय उत्पादन स्टेशनों की विद्युत, तेलंगाना राज्य और आंध्र प्रदेश राज्य को ऐसे अनुपात में आबंटित होगी जो संबद्ध उत्तरवर्ती राज्य में सुसंगत डीएससीओएमएस के पिछले पांच वर्ष की वास्तविक ऊर्जा की खपत पर आधारित होगा ।
7. दस वर्ष की अवधि के लिए, ऐसे उत्तरवर्ती राज्य को, जिसके पास कम मात्रा में विद्युत शक्ति है, अन्य उत्तरवर्ती राज्य से अधिशेष विद्युत को क्रय करने से इंकार करने का पहला अधिकार होगा ।
8. अनन्तपुर और कुरनूल जिले, जो आंध्र प्रदेश केन्द्रीय विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड की अधिकारिता में आते हैं, अब आंध्र प्रदेश दक्षिण विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड को पुनः सौंपे जाएंगे ।
तेरहवीं अनुसूची
(धारा 93 देखिए)
शिक्षा
1. भारत सरकार उत्तरवर्ती आंध्र प्रदेश राज्य में बारहवीं और तेरहवीं योजना अवधि में राष्ट्रीय महत्व की संस्थाओं की स्थापना के लिए उपाय करेगी । इसके अन्तर्गत एक आईआईटी, एक एनआईटी, एक आईआईएम, एक आईआईएसईआर, एक केन्द्रीय विश्वविद्यालय, एक पेट्रोलियम विश्वविद्यालय, एक कृषि विश्वविद्यालय और एक आईआईआईटी सम्मिलित होंगे ।
2. भारत सरकार, उत्तरवर्ती आंध्र प्रदेश राज्य में एक अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान की तरह का अतिविशिष्ट अस्पताल सह शिक्षण संस्था स्थापित करेगी ।
3. भारत सरकार, आंध्र प्रदेश राज्य और तेलंगाना राज्य, प्रत्येक में एक जनजातीय विश्वविद्यालय स्थापित करेगी ।
4. उत्तरवर्ती तेलंगाना राज्य में एक उद्यान कृषि विश्वविद्यालय स्थापित किया जाएगा ।
5. भारत सरकार, उत्तरवर्ती आंध्र प्रदेश राज्य में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान स्थापित करेगी ।
अवसंरचना
1. भारत सरकार, उत्तरवर्ती आंध्र प्रदेश राज्य के दुग्गीराजूपट्नम में एक नवीन प्रमुख पत्तन विकसित करेगी जो 2018 के अन्त तक पहले चरण के साथ भिन्न-भिन्न चरणों में पूरा किया जाएगा ।
2. भारतीय इस्पात प्राधिकरण लिमिटेड (एसएआईएल) नियत दिन से छह मास के भीतर उत्तरवर्ती तेलंगाना राज्य के खम्माम जिले में एक एकीकृत इस्पात संयंत्र स्थापित करने की संभाव्यता की जांच करेगा ।
3. भारतीय इस्पात प्राधिकरण लिमिटेड (एसएआईएल), नियत दिन से छह मास के भीतर, उत्तरवर्ती आंध्र प्रदेश राज्य के वाईएसआर जिले में एक एकीकृत इस्पात संयंत्र स्थापित करने की संभाव्यता की जांच करेगा ।
4. आईओसी या एचपीसीएल, नियत दिन से छह मास के भीतर, उत्तरवर्ती आंध्र प्रदेश राज्य में ग्रीनफील्ड क्रूड आयल रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल कामप्लेक्स स्थापित करने की संभाव्यता की जांच करेगी और उस पर शीघ्र विनिश्चय करेगी ।
5. भारत सरकार, नियत दिन से छह मास के भीतर, दिल्ली-मुम्बई औद्योगिक कारीडोर के साथ-साथ विशाखापटनम-चेन्नई औद्योगिक कारीडोर स्थापित करने की संभाव्यता की जांच करेगी और उस अवधि के भीतर उस पर शीघ्र विनिश्चय करेगी ।
6. भारत सरकार, नियत दिन से छह मास के भीतर, विद्यमान विशाखापटनम, विजयवाड़ा और तिरुपति विमानपत्तनों को और अन्तरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विस्तारित करने की संभाव्यता की जांच करेगी और उस पर शीघ्र विनिश्चय करेगी ।
7. एनटीपीसी, उत्तरवर्ती तेलंगाना राज्य में आवश्यक कोयला लिंकेज की स्थापना के पश्चात् 4000 मेगावाट विद्युत शक्ति सुविधा स्थापित करेगी ।
8. भारतीय रेल, नियत दिन से छह मास के भीतर, उत्तरवर्ती आंध्र प्रदेश राज्य में नवीन रेल जोन स्थापित करने की संभाव्यता की जांच करेगी और उस पर शीघ्र विनिश्चय करेगी ।
9. एनएचएआई, उत्तरवर्ती तेलंगाना राज्य के पिछड़े क्षेत्रों में सड़क संपर्क सुधारने के लिए आवश्यक उपाय करेगी ।
10. भारतीय रेल नियत दिन से छह मास के भीतर, उत्तरवर्ती तेलंगाना राज्य में रेल कोच कारखाना स्थापित करने की संभाव्यता की जांच करेगी और राज्य में रेल संपर्क का सुधार करेगी और उस पर शीघ्र विनिश्चय करेगी ।
11. केन्द्रीय सरकार, उत्तरवर्ती आंध्र प्रदेश राज्य की नई राजधानी से हैदराबाद और तेलंगाना के अन्य महत्वपूर्ण शहरों तक त्वरित रेल और सड़क संपर्क स्थापित करने संबंधी उपायों पर विचार करेगी ।
12. भारत सरकार, विशाखापट्टनम में मेट्रो रेल सुविधा की संभाव्यता की जांच करेगी और विजयवाड़ा-गुंटूर-तेनाली मेट्रोपोलिटन शहरी विकास प्राधिकरण नियत दिन से एक वर्ष की अवधि के भीतर, उस पर शीघ्र विनिश्चय करेगा ।
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