कच्छी मेमन अधिनियम, 1938
(1938 का अधिनियम संख्यांक 10)
[8 अप्रैल, 1938]
उत्तराधिकार और विरासत के मामलों में सभी कच्छी मेमनों
का मुस्लिम विधि द्वारा शासित होने का
उपबन्ध करने के लिए
अधिनियम
यह समीचीन है कि उत्तराधिकार और विरासत के मामलों में सभी कच्छी मेमन मुस्लिम विधि द्वारा शासित हों;
अतः एतद्द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित किया जाता है: -
1. संक्षिप्त नाम और प्रारंभ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम कच्छी मेमन अधिनियम, 1938 है ।
(2) यह 1938 के नवम्बर के प्रथम दिन प्रवृत्त होगा ।
2. कच्छी मेमनों का कतिपय मामलों में मुस्लिम विधि द्वारा शासित होना-धारा 3 के उपबन्धों के अधीन रहते हुए, उत्तराधिकार और विरासत के मामलों में सभी कच्छी मेमन मुस्लिम विधि द्वारा शास्ति होंगे ।
3. व्यावृत्ति-इस अधिनियम की कोई भी बात, उसके प्रारम्भ के पूर्व अर्जित किसी अधिकार पर या उपगत किसी दायित्व पर या किसी ऐसे अधिकार या दायित्व की बाबत किसी विधिक कार्यवाही या उपचार पर प्रभाव नहीं डालेगी; और कोई ऐसी विधिक कार्यवाही या उपचार इस प्रकार जारी रखा जा सकेगा या प्रवृत्त किया जा सकेगा मानो यह अधिनियम पारित नहीं किया गया हो ।
4. [निरसित ।]-निरसन और संशोधन अधिनियम, 1942 (1942 का अधिनियम संख्यांक 25) की धारा 2 और अनुसूची द्वारा निरसित ।
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यह अधिनियम, बिहार सरकार की अधिसूचना सं० 1089/क-15/40 जे०आर०, तारीख 31 अगस्त, 1940 द्वारा कतिपय परिवर्तनों के अधीन, संथाल परगना जिला और छोटा नागपुर खण्ड को लागू किया गया है । इसे उड़ीसा प्रान्त के सभी भागतः अपवर्जित क्षेत्रों को भी उड़ीसा राज्य की अधिसूचना सं० 2266-111ग-14/41-कॉम०,

