युद्धाभ्यास और खुले क्षेत्र में गोला चलाने तथा तोप दागने का अभ्यास अधिनियम, 1938
(1938 का अधिनियम संख्यांक 5)
[12 मार्च, 1938]
सैनिक युद्धाभ्यास और खुले क्षेत्र में गोला चलाने तथा तोप दागने के अभ्यास के लिए
सुविधाओं का उपबंध करने के लिए
अधिनियम
सैनिक युद्धाभ्यास और खुले क्षेत्र में गोला चलाने तथा तोप दागने के अभ्यास के लिए सुविधाओं का उपबन्ध करना समीचीन है;
अतः निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित किया जाता हैः-
1. संक्षिप्त नाम और विस्तार-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम युद्धाभ्यास और खुले क्षेत्र में गोला चलाने तथा तोप दागने का अभ्यास अधिनियम, 1938 है ।
(2) इसका विस्तार 2॥। सम्पूर्ण भारत पर है ।
अध्याय 1
युद्धाभ्यास
2. युद्धाभ्यास प्राधिकृत करने के लिए राज्य सरकार की शक्ति-(1) राज्य सरकार, स्थानीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, किसी ऐसे क्षेत्र में, जिसे उस अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किया गया हो, किसी विनिर्दिष्ट अवधि के दौरान, जो तीन मास से अधिक की न हो, सैनिक युद्धाभ्यासों का किया जाना प्राधिकृत कर सकेगी:
परन्तु एक ही क्षेत्र या उसके किसी भाग को तीन वर्ष की किसी अवधि में एक से अधिक बार सामान्यतः इस प्रकार विनिर्दिष्ट नहीं किया जाएगा ।
(2) राज्य सरकार उपधारा (1) के अधीन अधिसूचना जारी करने के अपने आशय की सूचना, अधिसूचना जारी करने से पूर्व यथासंभवशीघ्र प्रकाशित करेगी, और ऐसी अधिसूचना तब तक जारी नहीं की जाएगी जब तक स्थानीय राजपत्र में ऐसी सूचना के प्रथम प्रकाशन की तारीख से तीन मास का समय नहीं बीत जाता ।
(3) उपधारा (2) द्वारा अपेक्षित सूचना स्थानीय राजपत्र में प्रकाशन द्वारा दी जाएगी और वह उस समस्त क्षेत्र में भी, जिसे उस अधिसूचना में विनिर्दिष्ट करना प्रस्तावित हो, धारा 13 के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित रीति से प्रकाशन द्वारा दी जाएगी, तथा युद्धाभ्यासों के प्रारंभ के यथाशक्य निकटतम एक मास और एक सप्ताह पूर्व वैसे ही प्रकाशन द्वारा दुहराई जाएगी ।
3. युद्धाभ्यासों के प्रयोजनों के लिए प्रयोग में लाई जा सकने वाली शक्तियां-(1) जहां धारा 2 की उपधारा (1) के अधीन कोई अधिसूचना जारी की जा चुकी हो वहां ऐसे व्यक्ति, जो युद्धाभ्यासों में लगे सैनिक बलों में सम्मिलित हैं, विनिर्दिष्ट सीमाओं के भीतर और विनिर्दिष्ट अवधियों के दौरान, -
- यह अधिनियम 1962 के विनियम सं० 12 की धारा 3 और अनुसूची द्वारा गोवा, दमण और दीव पर; 1963 के विनियम सं० 6 की धारा 2 और अनुसूची 1 द्वारा (1-7- 1965 से) दादरा और नागर हवेली पर; 1963 के विनियम सं० 7 की धारा 3 और अनुसूची 1 द्वारा (1-10-1963 से) पाण्डिचेरी पर; 1965 के विनियम सं० 8 की धारा 3 और अनुसूची द्वारा (1-10-1967 से) सम्पूर्ण लक्षद्वीप संघ राज्यक्षेत्र पर, लागू होने के संबंध में विस्तारित किया गया ।
- 1951 के अधिनियम सं० 3 की धारा 3 और अनुसूची द्वारा भाग ख राज्यों के सिवाय शब्दों का लोप किया गया ।
(क) उस अधिसूचना में विनिर्दिष्ट क्षेत्र से होकर गुजर सकेंगे या वहां पड़ाव डाल सकेंगे, अस्थायी प्रकार के सैनिक संकर्म बना सकेंगे या सैनिक युद्धाभ्यास कर सकेंगे, और
(ख) ऐसे क्षेत्र में जल के किसी भी स्रोत से अपने लिए जल ले सकेंगेः
परन्तु इसमें की कोई बात जल-प्रदाय के किसी ऐसे स्रोत से, चाहे वह निजी स्वामी का हो या किसी सार्वजनिक प्राधिकरण का, सैनिक बलों की युक्तियुक्त आवश्यकताओं से अधिक मात्रा में या ऐसी मात्रा में जल लेने के लिए प्राधिकृत नहीं करेगी जिससे कि उस जल-प्रदाय में कमी आ जाए जो सामान्यतः उन व्यक्तियों द्वारा अपेक्षित है जो ऐसे जल-प्रदाय के प्रयोग के हकदार हैं ।
(2) उपधारा (1) के उपबन्ध किसी ऐसे कूप या तालाब में, जो किसी धार्मिक समुदाय द्वारा पवित्र माना जाता है, या पूजा के किसी स्थान में या उससे संलग्न भूमि में उपासना करने के विधिसम्मत प्रयोजन के अलावा, या मृतकों की अन्त्येष्टि के लिए आरक्षित या प्रयुक्त किसी स्थान या भवन में, या किसी निवास-गृह या उससे संलग्न परिसरों में, या किसी शिक्षा-संस्था, कारखाने, कर्मशाला या स्टोर में या उन परिसरों में, जो किसी व्यापार, कारबार या विनिर्माण के लिए उपयोग में लाए जाते हैं, या किसी उद्यान या विहार-भूमि में, या प्राचीन संस्मारक परिरक्षण अधिनियम, 1904 (1904 का 7) की धारा 2 में यथा परिभाषित किसी प्राचीन संस्मारक में प्रवेश करने या हस्तक्षेप करने के लिए प्राधिकृत नहीं करेंगे ।
4. नुकसान की मरम्मत करने के बारे में समादेशक आफिसर का कर्तव्य-युद्धाभ्यासों में लगे सैनिक बलों का समादेशक आफिसर इस अध्याय द्वारा प्रदत्त शक्तियों के अधीन उपयोग में लाई गई सभी भूमियों को यथासाध्य शीघ्रता से एवं यावत्साध्य ऐसी मरम्मत करवाएगा कि वे अपनी पूर्ववर्ती दशा में हो जाएं ।
5. युद्धाभ्यासों द्वारा कारित नुकासान के लिए प्रतिकर का अधिकार-जहां धारा 2 के अधीन जारी की गई अधिसूचना सैनिक युद्धाभ्यास करने के लिए प्राधिकृत करती है वहां व्यक्ति या सम्पत्ति को ऐसे युद्धाभ्यासों से होने वाले किसी नुकसान के लिए या उनके कारण अधिकारों या विशेषाधिकारों में जो हस्तक्षेप हुआ हो उसके लिए रक्षा प्राक्कलनों में से प्रतिकर संदेय होगा, जिसमें वे व्यय भी सम्मिलित होंगे जो किसी व्यक्ति, सम्पत्ति, अधिकारों और विशेषाधिकारों को संरक्षित रखने में युक्तियुक्त रूप से हुए हों ।
6. प्रतिकर निर्धारित करने की पद्धति-(1) उस जिले का कलेक्टर, जिसमें युद्धाभ्यासों के प्रयोजन के लिए उपयोग में लाया गया कोई क्षेत्र स्थित है, धारा 5 के अधीन संदेय किसी प्रतिकर की रकम अवधारित करने के प्रयोजन के लिए युद्धाभ्यास में लगे बलों के साथ रहने के लिए एक या अधिक राजस्व अधिकारियों को प्रतिनियुक्त करेगा ।
(2) राजस्व अधिकारी धारा 5 के अधीन प्रतिकर के लिए सभी दावों पर विचार करेगा और स्थानीय अन्वेषण के आधार पर और जहां सम्भव हो वहां दावेदार की सुनवाई करने के पश्चात्, प्रत्येक मामले में दी जाने वाली प्रतिकर की, यदि कोई हो, रकम अवधारित करेगा और इस प्रकार दिए जाने के लिए इस प्रकार अवधारित प्रतिकर दावेदार को वहीं बांट देगा ।
(3) कोई दावेदार, जो उसे प्रतिकर देने से राजस्व अधिकारी द्वारा इन्कार करने से या राजस्व अधिकारी द्वारा उसे दिए गए प्रतिकर की रकम से असंतुष्ट है, उस राजस्व अधिकारी के विनिश्चय की संसूचना से पन्द्रह दिन के भीतर किसी भी समय, उस विनिश्चय के विरुद्ध अपील करने के अपने आशय की सूचना राजस्व अधिकारी को दे सकेगा ।
(4) जहां ऐसी कोई सूचना दी गई है वहां जिले का कलक्टर एक आयोग का गठन करेगा, जिसमें अध्यक्ष के रूप में यह स्वयं, युद्धाभ्यासों में लगे बलों के समादेशक आफिसर द्वारा नामनिर्देशित एक व्यक्ति और जिला-बोर्ड द्वारा नामनिर्देशित दो व्यक्ति होंगे तथा आयोग उन सभी अपीलों का विनिश्चय करेगा जिनकी सूचना दी गई है ।
(5) आयोग के किसी भी सदस्य के अनुपस्थित रहने पर भी, आयोग अपनी शक्तियों का प्रयोग कर सकेगा और एक जैसी राय रखने वालों की संख्या बराबर होने की दशा में आयोग के अध्यक्ष को निर्णायक मत प्राप्त होगा ।
(6) आयोग का विनिश्चय अन्तिम होगा और आयोग द्वारा विनिश्चित किसी मामले के बारे में किसी भी सिविल न्यायालय में कोई भी वाद नहीं लाया जाएगा ।
(7) इस धारा के अधीन राजस्व अधिकारी, कलक्टर या आयोग के समक्ष फाइल किए गए किसी दावे, सूचना, अपील, आवेदन या दस्तावेज के संबंध में कोई फीस प्रभारित नहीं की जाएगी ।
7. अपराध-यदि धारा 2 की उपधारा (1) के अधीन की किसी अधिसूचना में विनिर्दिष्ट क्षेत्र के अन्दर और अवधि के दौरान कोई व्यक्ति-
(क) युद्धाभ्यास करने में जान-बूझकर बाधा डालेगा या हस्तक्षेप करेगा, अथवा
(ख) सम्यक् प्राधिकार के बिना किसी शिविर में प्रवेश करेगा या उसमें बना रहेगा, अथवा
(ग) युद्धाभ्यासों के प्रयोजनों के लिए प्रयुक्त किसी ध्वज या चिह्न या साधित्र में सम्यक् प्राधिकार के बिना हस्तक्षेप करेगा,
तो वह जुर्माने से, जो दस रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा ।
अध्याय 2
खुले क्षेत्र में गोला चलाने और तोप दागने का अभ्यास
8. परिभाषाएं-इस अध्याय में-
(क) खुले क्षेत्र में गोला चलाने" के अन्तर्गत वायु आयुध अभ्यास भी आता है,
(ख) अधिसूचित क्षेत्र" में ऐसा क्षेत्र अभिप्रेत है जो धारा 9 की उपधारा (1) के अधीन जारी की गई अधिसूचना में परिभाषित है ।
9. खुले क्षेत्र में गोला चलाने और तोप दागने का अभ्यास प्राधिकृत करने के लिए राज्य सरकार की शक्ति-(1) राज्य सरकार, स्थानीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, किसी क्षेत्र को ऐसे क्षेत्र के रूप में परिनिश्चित कर सकेगी जिसके भीतर समय-समय पर खुले क्षेत्र में गोला चलाने और तोप दागने का अभ्यास करने के लिए उतने वर्षों के लिए प्राधिकृत किया जा सके जितने विनिर्दिष्ट किए जाएं ।
(2) राज्य सरकार, स्थानीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, समस्त अधिसूचित क्षेत्र में या उसके किसी विनिर्दिष्ट भाग में, अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किसी अवधि या किन्हीं अवधियों के दौरान, खुले क्षेत्र में गोला चलाना और तोप दागने का अभ्यास करना प्राधिकृत कर सकेगी ।
(3) उपधारा (2) के अधीन कोई अधिसूचना जारी करने से पूर्व, राज्य सरकार ऐसी अधिसूचना जारी करने के अपने आशय की सूचना, अधिसूचना जारी करने से पूर्व यथासम्भव शीघ्र, प्रकाशित करेगी, और ऐसी अधिसूचना तब तक जारी नहीं की जाएगी जब तक स्थानीय राजपत्र में ऐसी सूचना के प्रथम प्रकाशन की तारीख से दो मास का समय नहीं बीत जाता ।
(4) उपधारा (3) द्वारा अपेक्षित सूचना, स्थानीय राजपत्र में प्रकाशन द्वारा, दी जाएगी और साथ ही अधिसूचित क्षेत्र में परिचालित किसी समाचारपत्र में और उस क्षेत्र में सामान्यतः समझी जाने वाली भाषा में प्रकाशन द्वारा और डोंडी पिटवा कर, और उस परिक्षेत्र की भाषा में उस सूचना की प्रतियां सभी प्रमुख स्थानों पर चिपका कर और ऐसी अन्य रीति से उक्त समस्त क्षेत्र में दी जाएगी, जो धारा 13 के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित की जाए, और अधिसूचना में विनिर्दिष्ट अवधि या प्रत्येक अवधि के प्रारंभ के यथाशक्य निकटतम एक सप्ताह पूर्व वैसे ही प्रकाशन द्वारा दोहराई जाएगी :
परन्तु उक्त डोंडी पिटवाने और सूचना चिपकाने के तथ्य का सत्यापन उस परिक्षेत्र के एक मुखिया और दो अन्य साक्षर निवासियों द्वारा लिखित रूप में किया जाएगा तथा यह और कि डोंडी पिटवा कर ऐसी सूचना खुले क्षेत्र में ऐसे गोला चलाने और तोप दागने के अभ्यास के प्रारम्भ के यथाशक्य निकटतम क्रमशः सात दिन और दो दिन पूर्व दी जाएगी ।
10. खुले क्षेत्र में गोला चलाने और तोप दागने के अभ्यास के प्रयोजनार्थ प्रयोग में लाई जा सकने वाली शक्तियां-(1) जहां धारा 9 की उपधारा (2) के अधीन कोई अधिसूचना जारी की गई हो वहां ऐसे व्यक्ति, जो खुले क्षेत्र में गोला चलाने और तोप दागने के अभ्यास में लगे बलों में सम्मिलित हैं, विनिर्दिष्ट अवधि या अवधियों के दौरान अधिसूचित क्षेत्र में या उसके किसी विनिर्दिष्ट भाग में, -
(क) घातक प्रक्षेपणास्त्रों से खुले क्षेत्र में गोला चलाने और तोप दागने का अभ्यास कर सकेंगे, और
(ख) सैनिक युद्धाभ्यासों में लगे बलों को धारा 3 द्वारा प्रदत्त अधिकारों में से किसी का प्रयोग, धारा 3 और धारा 4 के उपबंधों के अधीन रहते हुए, कर सकेंगेः
परन्तु धारा 3 की उपधारा (2) के उपबंध उस उपधारा में विनिर्दिष्ट किसी स्थान में प्रवेश करने या हस्तक्षेप करने से उस दशा में विवर्जित नहीं करेंगे जब वह ऐसे क्षेत्र में स्थित हो जिसे इस धारा की उपधारा (2) के अधीन खतरे के इलाके के रूप में, उस सीमा तक, जो उस स्थान से व्यक्तियों और पालतू पशुओं का अपवर्जन सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक हो, घोषित किया गया हैः
परन्तु यह और कि किसी ऐसे निवास-गृह की दशा में, जो स्त्रियों के अधिभोग में हो, किसी स्थानीय निवासी के माध्यम से पर्याप्त चेतावनी दी जाएगी और ऐसी चेतावनी देने के पश्चात् उस परिक्षेत्र के दो प्रतिष्ठित निवासियों की उपस्थिति में उसमें प्रवेश किया जाएगा ।
(2) ऐसे किसी अभ्यास में लगे बलों का समादेशक आफिसर अधिसूचित क्षेत्र या उसके विनिर्दिष्ट भाग के अन्दर के किसी क्षेत्र को खतरे का इलाका घोषित कर सकेगा और, तदुपरि, अभ्यास में लगे बलों के समादेशक आफिसर द्वारा कलक्टर को आवेदन करने पर, कलक्टर, उन समयों के दौरान, जब घातक प्रक्षेपणास्त्र फेंका जा रहा हो या जीवन या स्वास्थ्य को खतरा हो, ऐसे खतरे के इलाके में सभी व्यक्तियों और पालतू पशुओं का प्रवेश प्रतिषिद्ध करेगा और वहां से उनका हटाया जाना सुनिश्चित करेगा ।
11. प्रतिकर-खुले क्षेत्र में गोला चलाने और तोप दागने के अभ्यास की दशा में, धारा 5 और धारा 6 के उपबंध वैसे ही लागू होंगे जैसे वे सैनिक युद्धाभ्यासों की दशा में लागू होते हैंः
परन्तु इस धारा के अधीन संदेय प्रतिकर में वह प्रतिकर भी सम्मिलित होगा, जो खतरे के इलाके के रूप में घोषित किसी स्थान से व्यक्तियों या पालतू पशुओं के अपवर्जन या हटाए जाने के लिए हो, और ऐसा प्रतिकर, उक्त अपवर्जन या हटाए जाने की प्रक्रिया पूरी करने से पूर्व, उन दरों पर संवितरित किया जाएगा जो धारा 13 के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित न्यूनतम दरों से कम नहीं होंगी और इसके अन्तर्गत वह प्रतिकर भी सम्मिलित होगा जो ऐसे अपवर्जन या हटाए जाने के कारण होने वाली नियोजन सम्बन्धी किसी हानि या फसलों के खराब होने के लिए हो ।
12. अपराध-यदि धारा 9 की उपधारा (2) के अधीन जारी की गई किसी अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किसी अवधि के दौरान अधिसूचित क्षेत्र के अन्दर कोई व्यक्ति-
(क) खुले क्षेत्र में गोला चलाने या तोप दागने का अभ्यास करने में जानबूझकर बाधा डालेगा या हस्तक्षेप करेगा, अथवा
(ख) सम्यक् प्राधिकार के बिना किसी शिविर में प्रवेश करेगा या उसमें बना रहेगा, अथवा
(ग) किसी ऐसे क्षेत्र में, जिसे खतरे के इलाके के रूप में घोषित किया गया हो, ऐसे समय, जब उसमें प्रवेश करना प्रतिषिद्ध है, सम्यक् प्राधिकार के बिना प्रवेश करेगा या बना रहेगा, अथवा
(घ) अभ्यास के प्रयोजनों के लिए प्रयुक्त किसी ध्वज या चिह्न या निशाने या साधित्र में सम्यक् प्रधिकार के बिना हस्तक्षेप करेगा,
तो वह जुर्माने से, जो दस रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा ।
अध्याय 3
साधारण
13. नियम बनाने की शक्ति- 1[(1)] राज्य सरकार, स्थानीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, निम्नलिखित के लिए नियम बना सकेगीः-
(क) वह रीति विहित करना, जिससे धारा 2 की उपधारा (2) और धारा 9 की उपधारा (3) द्वारा अपेक्षित सूचनाएं सम्बद्ध क्षेत्रों में प्रकाशित की जाएंगी;
(ख) युद्धाभ्यासों या खुले क्षेत्र में गोला चलाने और तोप दागने के अभ्यास के लिए इस अधिनियम के अधीन भूमि के उपयोग को ऐसी रीति से विनियमित करना जिससे कि जनता खतरे से सुरक्षित रहे और बिना हस्तक्षेप के और प्रभावित क्षेत्रों के निवासियों को कम से कम असुविधा में डालते हुए युद्धाभ्यास या अभ्यास किए जा सकें;
(ग) उपधारा 6 में निर्दिष्ट राजस्व अधिकारियों और आयोगों की प्रक्रिया को ऐसी रीति से विनियमित करना जिससे कि प्रतिकर के लिए दावे करने और प्रतिकर संबंधी मूल अधिनिर्णयों के विरुद्ध अपील करने की पद्धति के बारे में सम्यक् प्रचार सुनिश्चित किया जा सके, दावों और अपीलों का शीघ्र निपटारा किया जा सके, और जहां तक सम्भव हो प्रतिकर दावेदारों को सीधे दिया जा सके; और
(घ) दिए जाने वाले प्रतिकर की रकम निर्धारित करने के लिए धारा 6 में निर्दिष्ट राजस्व अधिकारियों और आयोगों द्वारा अनुसरित किए जाने वाले सिद्धान्तों को परिनिश्चित करना ।
2[(2) इस अधिनियम के अधीन राज्य सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम, बनाए जाने के पश्चात्, यथाशीघ्र, राज्य विधान-मंडल के समक्ष रखा जाएगा ।]
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- 2005 के अधिनियम सं० 4 की धारा 2 और अनुसूची द्वारा पुनः संख्यांकित ।
- 2005 के अधिनियम सं० 4 की धारा 2 और अनुसूची द्वारा अंतःस्थापित ।

