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कोयला खान भविष्य-निधि और प्रकीर्ण उपबंध अधिनियम, 1948 ( Coal Mines Provident Fund and Miscellaneous Provisions Act, 1948 )


 

कोयला खान भविष्य-निधि और प्रकीर्ण उपबंध अधिनियम, 1948

(1948 का अधिनियम संख्यांक 46)

[13 सितम्बर, 1948]

कोयला खानों में नियोजित व्यक्तियों के लिए एक

भविष्य-निधि स्कीम  [एक [ [पेंशन स्कीम]]

[एक निक्षेप सहबद्ध बीमा स्कीम] और

एक बोनस स्कीम विरचित करने का

उपबन्ध करने के लिए

अधिनियम

 ।                                             ।                                              ।                                              ।                                              ।

एत्दद्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित किया जाता हैः-

1. संक्षिप्त नाम और विस्तार- [(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम कोयला खान भविष्य-निधि और प्रकीर्ण उपबन्ध अधिनियम, 1948 है ।]

 [(2) इसका विस्तार  *** सम्पूर्ण भारत पर है ।]

2. निर्वचन-इस अधिनियम में, जब तक कि विषय या संदर्भ में कोई बात विरुद्ध न हो,-

(क) “बोनस" से कोई ऐसी धनराशि अभिप्रेत है जो इस अधिनियम के अधीन विरचित कोयला खान बोनस स्कीम के अधीन किसी  [कर्मचारी] को संदेय है;

 [(कक) “कोयला" के अन्तर्गत लिग्नाइट आता है;]

 [(ख) “कोयला खान" से कोई ऐसा उत्खान अभिप्रेत है जहां कोयले की तलाश या अभिप्राप्ति के प्रयोजन के लिए कोई संक्रिया चलाई जाती रही है या चलाई जा रही है, और निम्नलिखितत इसके अन्तर्गत आते हैं-

(i) सब बोरिंग और बोर-छिद्र;

(ii) कोयला खान में के, या उसके पार्श्वस्थ और कोयला खान के सब कूपक, चाहे वे गलाए जा रहे हों                 या नहीं;

(iii) अनुखनन के अनुक्रम में सब समतलिकाएं और आनत समपथ;

(iv) कोई विवृत खनित या खदान, अर्थात् ऐसा उत्खान जहां कोयले की तलाश या अभिप्राप्ति के लिए कोई संक्रिया चलाई जाती रही है या चलाई जा रही है और जो न कूपक है न ऐसा उत्खान है जिसका विस्तार उपरिस्थ भूमि के नीचे है;

(v) कोयले या अन्य वस्तुओं को कोयला खान में लाने या वहां से हटाने या वहां से कचरा हटाने के लिए उपबन्धित सब प्रवहणियां या आकाशी रज्जुमार्ग;

(vi) कोयला खान में के, या उसके पार्श्वस्थ  और कोयला खान के सब एडिट, समतलिकाएं, समपथ, मशीनरी, संकर्म, रेल, ट्रामवे और साइडिंग;

(vii) वे सब कर्मशालाएं जो कोयला खान की प्रसीमाओं के अन्दर स्थित हैं और एक ही प्रबन्ध के अधीन हैं और उस कोयला खान से या उसी प्रबन्ध के अधीन की कई कोयला खानों से संसक्त प्रयोजनों के लिए उपयोग में लाई जाती हैः

(viii) कोयला खान का कोई कार्यालय;

(ix) कोयला खान या उसी प्रबन्ध के अधीन की कई कोयला खानों के कार्यकरण के प्रयोजनार्थ विद्युत-प्रदाय के लिए सब विद्युत-केन्द्र;

(x) कोयला खान के नियोजक के अनन्य अधिभोग के कोई परिसर जो कोयला खान का कचरा डालने के लिए तत्समय उपयोग में लाए जा रहे हैं या जिनमें ऐसे कचरे के सम्बन्ध में कोई संक्रिया चलाई जा रही है;

(xi) कोयला खान या उसी प्रबन्ध के अधीन की कई कोयला खानों के कर्मचारियों के फायदे के लिए बनाए रखे गए सब अस्पताल और कैन्टीनें;

(xii) कोई कोक भट्टी या प्लांट;

(xiii) कोयला खान में का या उसके पार्श्वस्थ और कोयला खान का कोई परिसर जिस पर कोयला खान से संसक्त कोई प्लांट या अन्य मशीनरी स्थित है या जिस पर कोयला खान के काम की अनुषंगी कोई प्रक्रिया चलाई जा रही है;

(ग) ”अभिदाय" से वह अभिदाय अभिप्रेत है जो इस अधिनियम के अधीन विरचित कोयला खान भविष्य-निधि स्कीम के अधीन किसी सदस्य के बारे में संदेय है  [या जो उस कर्मचारी के संबंध में, जिसे बीमा स्कीम लागू होती है, संदेय अभिदाय है ;]

 [(घ) “कर्मचारी" से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जो कोयला खान में या उसके सम्बन्ध में किसी किस्म के काम में, चाहे वह शारीरिक हो या अन्य, मजदूरी पर नियोजित है और जो नियोजक से सीधे या परतः अपनी मजदूरी पाता है, और उसके अन्तर्गत निम्नलिखित आते हैं-

(1) कोई व्यक्ति जो कोयला खान में या उसके सम्बन्ध में ठेकेदार द्वारा या के माध्यम से नियोजित                   है; तथा

(2) कोयला खान भविष्य-निधि स्कीम के प्रयोजनों के लिए,-

(i) कोई अन्य व्यक्ति भी जो कोयला खान में या उसके सम्बन्ध में सफाई कर्मकार, माली, अध्यापक या घरेलू नौकर के रूप में नियोजित है और जो नियोजक से सीधे मजदूरी पाता है; तथा

(ii) कोई शिक्षु या प्रशिक्षणार्थी भी जो नियोजक से वृत्तिका या अन्य पारिश्रमिक पाता है;]

 [(ङ) “नियोजक" से, जब कि वह किसी कोयला खान के सम्बन्ध में प्रयुक्त हुआ है, कोई ऐसा व्यक्ति, जो कोयला खान या उसके किसी भाग का अव्यवहित स्वत्वधारी, पट्टेदार या अधिभोगी है, और ऐसी कोयला खान की दशा में जिसका कारबार समापक या रिसीवर द्वारा चलाया जा रहा है, वह समापक या रिसीवर, अभिप्रेत है और किसी ऐसी कम्पनी के स्वामित्व में की कोयला खान की दशा में, जिसका कारबार प्रबन्ध अभिकर्ता द्वारा चलाया जा रहा है, ऐसा प्रबन्ध अभिकर्ता अभिप्रेत है; किन्तु इसके अन्तर्गत ऐसा व्यक्ति नहीं आता है जो उस कोयला खान से केवल स्वामित्व, भाटक या नजराना प्राप्त करता है या ऐसी कोयला खान का स्वत्वधारी मात्र है जो कार्यकरण के लिए किसी पट्टे, अनुदान या अनुज्ञप्ति के अध्यधीन है या केवल मृदा का स्वामी है और उस कोयला खान के कोयले में हितबद्ध नहीं है, किन्तु कोयला खान या उसके किसी भाग के कार्यकरण का कोई ठेकेदार उसी प्रकार से इस अधिनियम के अध्यधीन होगा मानो वह नियोजक हो, किन्तु इस प्रकार नहीं कि नियोजक को किसी दायित्व से छूट मिल जाए;

 ।                                             ।                                              ।                                              ।

(च) “निधि" से कोयला खान भविष्य-निधि स्कीम के अधीन स्थापित भविष्य-निधि अभिप्रेत है;  ***

1[(चक) “बीमा निधि" से धारा 3छ की उपधारा (2) के अधीन स्थापित निक्षेप-सहबद्ध बीमा निधि अभिप्रेत है;

(चख) “बीमा स्कीम" से धारा 3छ की उपधारा (1) के अधीन विरचित कोयला खान निक्षेप-सहबद्ध बीमा स्कीम अभिप्रेत है;]

 [ [(चग)] “प्रबन्ध अभिकर्ता" का वही अर्थ है जो उसे कम्पनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) में समनुदिष्ट                 है; तथा]

(छ) “सदस्य" से निधि का सदस्य अभिप्रेत है ।

 [(ज) “पेंशन निधि" से धारा 3ङ की उपधारा (2) के अधीन स्थापित पेंशन निधि अभिप्रेत है;

(झ) “पेंशन स्कीम" से धारा 3ङ की उपधारा (1) के अधीन बनाई गई कोयला खान पेंशन स्कीम अभिप्रेत है;

(ञ) “अधिवर्षिता" से किसी ऐसे कर्मचारी के संबंध में जो पेंशन स्कीम का सदस्य है, उक्त कर्मचारी द्वारा, ऐसी आयु प्राप्त करना अभिप्रेत है, जो संविदा या सेवा की शर्तों में ऐसी आयु के रूप में नियत की गई है जिसको प्राप्त करने पर ऐसा कर्मचारी नियोजन रिक्त कर देगा ।]

3. कोयला खान भविष्य-निधि स्कीम-(1) केन्द्रीय सरकार, शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा,  [कर्मचारियों] के लिए भविष्य-निधि के स्थापनार्थ कोयला खान भविष्य-निधि स्कीम कही जाने वाली एक स्कीम विरचित कर सकेगी और उन कोयला खानों को विनिर्दिष्ट कर सकेगी जिनको उक्त स्कीम लागू होगी ।

 [(1क) निधि धारा 3क के अधीन गठित बोर्ड में निहित होगी और उसके द्वारा प्रशासित की जाएगी ।]

(2) उपधारा (1) के उपबन्धों के अधीन विरचित स्कीम प्रथम अनुसूची में विनिर्दिष्ट सब बातों के लिए या उनमें से किसी के लिए उपबन्ध कर सकेगी ।

 [3क. न्यासी बोर्ड का गठन-(1) केन्द्रीय सरकार, शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, ऐसी तारीख से, जैसी उसमें विनिर्दिष्ट की जाए, उन राज्यक्षेत्रों के लिए, जिन पर इस अधिनियम का विस्तार है, एक न्यासी बोर्ड (जिसे एतस्मिन्पश्चात् इस अधिनियम में बोर्ड कहा गया है) गठित कर सकेगी, जो निम्नलिखित से मिल कर बनेगा, अर्थात् :-

(क) एक अध्यक्ष, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त किया जाएगा;

(ख) कोयला खान भविष्य-निधि आयुक्त-पदेन;

(ग) तीन व्यक्ति, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त किए जाएंगे;

(घ) उन राज्यों की सरकारों का, जिन्हें केन्द्रीय सरकार समय-समय पर इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे, प्रतिनिधित्व करने वाले छह से अनधिक व्यक्ति, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त किए जाएंगे;

(ङ) नियोजकों का प्रतिनिधित्व करने वाले छह व्यक्ति, जो नियोजकों के ऐसे संगठनों से, जिन्हें केन्द्रीय सरकार से इस निमित्त मान्यताप्राप्त हो, परामर्श के पश्चात् केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त किए जाएंगे और जिनमें से कम से कम एक व्यक्ति ऐसा होगा जो किसी भी ऐसे संगठन का सदस्य न हो;

(च) कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले छह व्यक्ति, जो कर्मचारियों के ऐसे संगठनों से, जिन्हें केन्द्रीय सरकार से इस निमित्त मान्यताप्राप्त हो, परामर्श के पश्चात् केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त किए जाएंगे और जिनमें से कम से कम एक व्यक्ति ऐसा होगा जो स्वयं कर्मचारी हो और कम से कम एक व्यक्ति ऐसा होगा जो किसी भी ऐसे संगठन का सदस्य न हो ।

(2) वे निबंधन और शर्तें जिनके अध्यधीन बोर्ड का सदस्य नियुक्त किया जा सकेगा और बोर्ड के अधिवेशनों का समय, स्थान और प्रक्रिया ऐसी होगी जैसी कोयला खान भविष्य-निधि स्कीम में उपबंधित की जाए ।

(3) बोर्ड अपने में निहित निधि का प्रशासन  [धारा 3ङ  [और धारा 3छ] के उपबंधों के अधीन रहते हुए] ऐसी रीति से करेगा जैसी पूर्वोक्त स्कीम में विनिर्दिष्ट हो ।

(4) बोर्ड अन्य ऐसे कत्यों का पालन करेगा जिनके पालन करने की अपेक्षा पूर्वोक्त स्कीम  [, कोयला खान भविष्य-निधि स्कीम  [, कोयला खान कुटुम्ब पेंशन स्कीम और बीमा स्कीम] के किन्हीं उपबन्धों द्वारा या के अधीन उससे की जाए ।]

3ख. न्यासी बोर्ड का निगमित निकाय होना-धारा 3क के अधीन गठित न्यासी बोर्ड उसे गठित करने वाली अधिसूचना में विनिर्दिष्ट नाम का एक निगमित निकाय होगा, उसका शाश्वत उत्तराधिकार और सामान्य मुद्रा होगी तथा उक्त नाम से वह वाद लाएगा और उस पर वाद लाया जाएगा ।

3ग. आफ़िसरों की नियुक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार एक कोयला खान भविष्य-निधि आयुक्त नियुक्त करेगी, जो बोर्ड का मुख्य कार्यपालक आफ़िसर होगा और बोर्ड के साधारण नियंत्रण और अधीक्षण के अध्यधीन होगा ।

(2) केन्द्रीय सरकार अन्य इतने, जितने वह कोयला खान भविष्य-निधि आयुक्त को उसके कर्तव्यों के निर्वहन में सहायता देने के लिए आवश्यक समझे, आफ़िसर भी, जिनका न्यूनतम मासिक सम्बलम् उनको लागू वेतनमान में (यदि कोई हो) चार सौ रुपए से कम न हो, नियुक्त कर सकेगी ।

(3) उपधारा (1) और उपधारा (2) के उपबन्धों के अध्यधीन रहते हुए बोर्ड अन्य ऐसे आफ़िसर और कर्मचारी, जैसी वह कोयला खान भविष्य-निधि स्कीम  [कोयला खान कुटुम्ब पेंशन स्कीम और बीमा स्कीम] के दक्ष प्रशासन के लिए आवश्यक समझे, नियुक्त कर सकेगा ।

(4) कोयला खान भविष्य-निधि आयुक्त की भर्ती का तरीका उसका संबलम् और भत्ते, अनुशासन तथा सेवा की अन्य शर्तें ऐसी होंगी जैसी केन्द्रीय सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट की जाएं और ऐसे संबलम् तथा भत्तों का संदाय निधि में से किया जाएगा ।

(5) बोर्ड के अन्य आफ़िसरों तथा कर्मचारियों की भर्ती का तरीका उनके, संबलम् और भत्ते, अनुशासन तथा सेवा की अन्य शर्तें ऐसी होंगी जैसी केन्द्रीय सरकार के अनुमोदन से बोर्ड द्वारा विनिर्दिष्ट की जाएं ।

3घ. लेखाओं का अंतरण-(1) जहां कि कोई कर्मचारी जो उस कोयला खान की जिसमें वह नियोजित हो, किसी भविष्य-निधि का योगदाता हो, किसी कोयला खान भविष्य-निधि स्कीम के अनुसार निधि का सदस्य हो जाता है, वहां उस कोयला खान की भविष्य-निधि में कर्मचारी के नाम जमा संचय किसी तत्समय प्रवृत्त विधि में या भविष्य-निधि को स्थापित करने वाले किसी विलेख या अन्य लिखत में अंतर्विष्ट किसी तत्प्रतिकूल बात के होते हुए भी, किन्तु स्कीम में अंतर्विष्ट उपबन्धों के, यदि कोई हों, अध्यधीन रहते हुए, ऐसे व्यक्ति द्वारा और उतने समय के अन्दर, जो स्कीम में उपबंधित किया गया हो, निधि को अंतरित किए जाएंगे और उस निधि में कर्मचारी के खाते में जमा किए जाएंगे ।

(2) जहां कि निधि का कोई सदस्य कोयला खान में अपना नियोजन छोड़ देता है और किसी अन्य स्थापन में (जो ऐसी कोयला खान नहीं है जिसे कोयला खान भविष्य-निधि स्कीम लागू होती है) पुनर्नियोजन अभिप्राप्त कर लेता है और उस स्थापन की किसी भविष्य-निधि का योगदाता बन जाता है, वहां निधि में ऐसे कर्मचारी के नाम जमा संचयों की रकम, उस स्थापन की, जिसमें वह पुनर्नियोजित हो, भविष्य-निधि में उसके खाते में जमा किए जाने के लिए इतने समय के भीतर, जितना केन्द्रीय सरकार इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे, उस दशा में अंतरित की जाएगी जिसमें कर्मचारी ऐसी वांछा करे और उस भविष्य-निधि से संबंधित नियम ऐसे अंतरण को अनुज्ञात करें ।

(3) जहां कि कोई कर्मचारी, जो किसी स्थापन की (जो ऐसी कोयला खान नहीं है जिसे कोयला खान भविष्य-निधि स्कीम लागू होती है) किसी भविष्य-निधि का योगदाता है, उस स्थापन में अपना नियोजन छोड़ देता है और किसी कोयला खान में पुनर्नियोजन अभिप्राप्त कर लेता है और निधि का सदस्य बन जाता है, वहां उसके द्वारा छोड़े गए स्थापन की भविष्य-निधि में ऐसे कर्मचारी के नाम जमा संचयों की रकम निधि में उसके खाते में जमा किए जाने के लिए उस दशा में अंतरित की जाएगी जिसमें कर्मचारी ऐसी वांछा करे और ऐसी भविष्य-निधि से संबंधित नियम यह अनुज्ञात करे ।]

 [3ङ. कोयला खान पेंशन स्कीम-(1) केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा निम्नलिखित का उपबंध करने के प्रयोजन के लिए कोयला खान पेंशन स्कीम के नाम से एक स्कीम विरचित कर सकेगी-

(क) किसी कोयला खान या किसी ऐसे वर्ग की कोयला खानों में, जिनको यह अधिनियम लागू होता है, नियोजित व्यक्तियों को अधिवर्षिता पेंशन, सेवानिवृत्ति पेंशन या स्थायी पूर्ण निःशक्तता पेंशन, और

(ख) ऐसे कर्मचारियों के हिताधिकारियों को संदेय विधवा या विधुर पेंशन, बालक पेंशन या अनाथ पेंशन और जीवन बीमा प्रसुविधाएं ।

(2) धारा 3 में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी पेंशन स्कीम विरचित किए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र एक पेंशन निधि स्थापित की जाएगी जिसमें प्रत्येक ऐसे कर्मचारी के संबंध में, जो पेंशन स्कीम का सदस्य है, समय-समय पर निम्नलिखित का संदाय किया जाएगा,-

(क) नियोजक के अभिदाय और कर्मचारी के अभिदाय के रूप में धारा 10घ की उपधारा (1) के अधीन निधि में संदेय रकम के एक चौथाई से अनधिक ऐसी राशियां जो पेंशन स्कीम में विनिर्दिष्ट की जाएं;

(ख) ऐसी राशियां जो केन्द्रीय सरकार इस निमित्त संसद् द्वारा विधि के अनुसार सम्यक् विनियोग के पश्चात् विनिर्दिष्ट करे;

(ग) कुटुम्ब पेंशन निधि की शुद्ध आस्तियां जो पेंशन निधि की स्थापना के ठीक पूर्व विद्यमान थीं; और

(घ) कोई अन्य अभिदाय जो केन्द्रीय सरकार के पूर्व अनुमोदन से पेंशन निधि में किया जाए ।

(3) पेंशन निधि की स्थापना पर, कुटुम्ब पेंशन स्कीम (जिसे इसमें इसके पश्चात् समाप्त हुई स्कीम कहा गया है) प्रवर्तन में नहीं रह जाएगी और समाप्त हुई स्कीम की सभी आस्तियां पेंशन निधि में निहित और उसको अंतरित हो जाएंगी और समाप्त हुई स्कीम के अधीन सभी दायित्व पेंशन निधि के विरुद्ध प्रवर्तनीय होंगे तथा समाप्त हुई स्कीम के अधीन हिताधिकारी उन प्रसुविधाओं, जिनके वे समाप्त हुई स्कीम के अधीन हकदार थे, अन्यून प्रसुविधाएं पेंशन निधि से प्राप्त करने के हकदार होंगे ।

(4) पेंशन निधि, बोर्ड में निहित होगी और उसके द्वारा ऐसी रीति से प्रशासित की जाएगी, जो पेंशन स्कीम में विनिर्दिष्ट                की जाए ।

(5) उपधारा (1) के उपबंधों के अधीन विरचित किसी स्कीम में दूसरी अनुसूची में विनिर्दिष्ट सभी या किन्हीं विषयों के लिए उपबंध किया जा सकेगा ।]

3च. केन्द्रीय सरकार द्वारा विशेष अनुदान-केन्द्रीय सरकार, संसद् द्वारा इस निमित्त विधि द्वारा सम्यक् विनियोग किए जाने के पश्चात्, कोयला खान कुटुम्ब पेंशन स्कीम के प्रशासन के सम्बन्ध में सभी व्यय की, जो उक्त स्कीम द्वारा या उसके अधीन उपबंधित प्रसुविधाओं के खर्च हेतु व्यय न हों, पूर्ति के लिए कुटुम्ब पेंशन निधि में ऐसी अतिरिक्त राशियों का संदाय करेगी जो उसके द्वारा अवधारित की जाएं ।]

 [3छ. कोयला खान निक्षेप-सहबद्ध बीमा स्कीम-(1) केन्द्रीय सरकार, शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, ऐसे कर्मचारियों के लिए, जो कोयला खान भविष्य-निधि स्कीम के अन्तर्गत आते हैं, जीवन बीमा प्रसुविधाओं की व्यवस्था करने के प्रयोजनार्थ कोयला खान निक्षेप-सहबद्ध बीमा स्कीम कही जाने वाली एक स्कीम विरचित कर सकेगी ।

(2) बीमा स्कीम की विरचना के पश्चात्, यथाशीघ्र, एक निक्षेप-सहबद्ध बीमा निधि स्थापित की जाएगी जिसमें नियोजक द्वारा ऐसे प्रत्येक कर्मचारी के सम्बन्ध में, जिसका वह नियोजक है तत्समय उसको संदेय आधारिक मजदूरी, मंहगाई भत्ता और प्रतिधारण भत्ता (यदि कोई हो) के योग एक प्रतिशत से अनधिक, ऐसी रकम का संदाय समय-समय पर किया जाएगा, जो केंद्रीय सरकार, शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, विनिर्दिष्ट करे ।

स्पष्टीकरण-इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए,-

(क) “आधारिक मजदूरी" पद का वही अर्थ है जो कर्मचारी भविष्य-निधि और प्रकीर्ण उपबन्ध अधिनियम, 1952 (1952 का 19) में है;

(ख) “मंहगाई भत्ता" से ऐसे सभी नकद संदाय अभिप्रेत हैं, चाहे उनका कोई भी नाम हो, जो किसी कर्मचारी की निर्वाह-खर्च में वृद्धि के कारण संदत्त किए जाते हों और इसके अंतर्गत उस कर्मचारी को मंजूर की गई कोई खाद्य संबंधी रियायत का नकद मूल्य भी है;

(ग) “प्रतिधारण भत्ता" से किसी कोयला खान के किसी कर्मचारी को किसी ऐसी अवधि के दौरान, जिसमें कोयला खान में कार्य नहीं हो रहा है, उसकी सेवा को प्रतिधारित करने के लिए, तत्समय संदेय कोई भत्ता अभिप्रेत है ।

(3) केन्द्रीय सरकार, संसद् द्वारा इस निमित्त बनाई गई विधि द्वारा सम्यक् विनियोग किए जाने के पश्चात्, ऐसे प्रत्येक कर्मचारी के सम्बन्ध में, जो कोयला खान भविष्य-निधि स्कीम के अन्तर्गत आता है, उस अभिदाय के आधे के बराबर रकम का अभिदाय करेगी, जो नियोजक से धारा 2 के अधीन अभिदाय किए जाने के लिए अपेक्षित है ।

(4) (क) नियोजक बीमा स्कीम के प्रशासन के सम्बन्ध में ऐसे सभी व्यय की, जो उस स्कीम द्वारा या उसके अधीन उपबन्धित प्रसुविधाओं के खर्च हेतु व्यय न हों, पूर्ति के लिए बीमा निधि में ऐसी अतिरिक्त राशियों का संदाय करेगा, जो उपधारा (2) के अधीन उससे अपेक्षित अभिदाय के एक-चौथाई से अधिक न हो और जो केन्द्रीय सरकार समय-समय पर अवधारित करे ।

(ख) केन्द्रीय सरकार, संसद् द्वारा इस निमित्त बनाई गई विधि द्वारा सम्यक् विनियोग किए जाने के पश्चात् बीमा स्कीम के प्रशासन के संबंध में सभी व्यय की, जो उस स्कीम द्वारा या उसके अधीन उपबन्धित प्रसुविधाओं के खर्च हेतु व्यय न हों, पूर्ति के लिए बीमा निधि में ऐसी अतिरिक्त राशियों का संदाय करेगी जो खण्ड (क) के अधीन नियोजक द्वारा संदेय राशियों के आधे के बराबर हों ।

(5) बीमा निधि बोर्ड में निहित होगी और बोर्ड उसका प्रशासन ऐसी रीति से करेगा जो बीमा स्कीम में विनिर्दिष्ट की जाए ।

(6) उपधारा (1) के उपबन्धों के अधीन विरचित किसी स्कीम में उन सभी विषयों या उनमें से किसी के बारे में उपबन्ध किया जा सकेगा जो तृतीय अनुसूची में विनिर्दिष्ट हैं ।]

 [4. निधि का 1961 के अधिनियम संख्यांक 43 के अधीन मान्यताप्राप्त होना-आय-कर अधिनियम, 1961 के प्रयोजनों के लिए, निधि को, उस अधिनियम की चौथी अनुसूची के भाग क के अर्थ में एक मान्यताप्राप्त भविष्य-निधि समझा जाएगा ।]

5. कोयला खान बोनस स्कीम-(1) केन्द्रीय सरकार शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा,  [कर्मचारियों] को बोनस के संदाय के लिए कोयला खान बोनस स्कीम कही जाने वाली एक स्कीम विरचित कर सकेगी और उन कोयला खानों को विनिर्दिष्ट कर सकेगी जिनको उक्त स्कीम लागू होगी ।

(2) उपधारा (1) के उपबन्धों के अधीन विरचित स्कीम  [चतुर्थ अनुसूची] में विनिर्दिष्ट सब बातों के लिए या उनमें से किसी के लिए उपबंध कर सकेगी ।

 [(3) नियोजक यथापूर्वोक्त स्कीम के अनुसार बोनस का संदाय करेगा ।]

6. स्कीम का भूतलक्षी प्रवर्तन-इस अधिनियम के अधीन विरचित स्कीम यह उपबंध कर सकेगी कि उसके उपबंधों में से कोई या तो भूतलक्षी या भविष्यलक्षी रूप में उस तारीख को और से प्रवृत्त होगा जो स्कीम में इस निमित्त विनिर्दिष्ट की जाए ।

7. स्कीम का उपांतरण-केन्द्रीय सरकार इस अधिनियम के अधीन विरचित स्कीम में  [भविष्यलक्षी या भूतलक्षी रूप से परिवर्धन, संशोधन या फेरफार, शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, कर सकेगी ।

 [ [7क. स्कीम का संसद् के समक्ष रखा जाना-इस अधिनियम के अधीन बनाई गई हर स्कीम बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, तीस दिन की अवधि के लिए रखी जाएगी । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र में या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस स्कीम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगी । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह स्कीम नहीं बनाई जानी चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगी । किन्तु स्कीम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव                     नहीं पड़ेगा ।]

7ख. नियोजकों द्वारा शोध्य धन का अवधारण-(1) कोयला खान भविष्य निधि आयुक्त या केन्द्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त सम्यक् रूप से प्राधिकृत कोई अन्य आफ़िसर, इस अधिनियम के या तद्धीन विरचित किसी स्कीम के किसी उपबंध के अधीन किसी नियोजक द्वारा शोध्य रकम का अवधारण आदेश द्वारा कर सकेगा और इस प्रयोजन के लिए ऐसी जांच कर सकेगा जैसी वह                   आवश्यक समझे ।

(2) उपधारा (1) के अधीन जांच करने वाले आफ़िसर को ऐसी जांच के प्रयोजन के लिए निम्नलिखित मामलों, अर्थात् :-

(क) किसी व्यक्ति को हाज़िर कराने या उसकी शपथ पर परीक्षा करने;

(ख) दस्तावेजों को प्रकट करने और पेश करने की अपेक्षा करने;

(ग) शपथपत्र पर साक्ष्य प्राप्त करने;

(घ) साक्षियों की परीक्षा के लिए कमीशन निकालने,

के बारे में वही शक्तियां होंगी जो वाद का विचारण करने के लिए सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) के अधीन न्यायालय में निहित होती हैं और कोई भी ऐसी जांच भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 193 और धारा 228 के अर्थ के अंदर और धारा 196 के प्रयोजन के लिए न्यायिक कार्यवाही समझी जाएगी ।

(3) किसी नियोजक द्वारा शोध्य रक़म अवधारित करने वाला कोई आदेश उपधारा (1) के अधीन तब तक नहीं किया जाएगा जब तक नियोजक को अपना मामला अभ्यावेदित करने का युक्तियुक्त अवसर न दे दिया गया हो ।

(4) इस धारा के अधीन किया गया आदेश अंतिम होगा और किसी भी न्यायालय में प्रश्नगत नहीं किया जाएगा ।]

8. कुर्की के विरुद्ध संरक्षण-(1) भविष्य-निधि की वह रक़म, जो निधि में किसी सदस्य के नाम जमा है, किसी भी प्रकार समनुदिष्ट या भारित किए जाने योग्य न होगी और उस सदस्य द्वारा उपगत किसी ऋण या दायित्व के बारे में की किसी डिक्री या आदेश के अधीन कुर्की के दायित्व के अधीन न होगी और न शासकयि समनुदेशिती तथा न कोई रिसीवर, जो प्रान्तीय दिवाला अधिनियम, 1920 (1920 का 5)के अधीन नियुक्त हो, ऐसी किसी रक़म का हक़दार होगा या उस पर कोई दावा रखेगा ।

(2) कोई रक़म जो निधि में सदस्य के नाम उसकी मृत्यु के समय जमा है और कोयला खान भविष्य-निधि स्कीम के अधीन उसके नामनिर्देशिती को संदेय है, उक्त स्कीम द्वारा प्राधिकृत किसी कटौती के अध्यधीन रहते हुए, नामनिर्देशिती में निहित होगी, और मृतक द्वारा उपगत या उस सदस्य की मृत्यु के पूर्व नामनिर्देशिती द्वारा उपगत किसी ऋण या अन्य दायित्व से मुक्त होगी ।

 [(3) उपधारा (1) और उपधारा (2) के उपबन्ध कोयला खान कुटुम्ब पेंशन स्कीम के अधीन संदेय कुटुम्ब पेंशन या किसी अन्य रकम के सम्बन्ध में  [और बीमा स्कीम के अधीन संदेय किसी रकम के संबंध में भीट, जहां तक हो सके, वैसे ही लागू होंगे जैसे वे निधि में से संदेय किसी रकम के सम्बन्ध में लागू होते हैं ।]

9. शास्ति- [(1) यदि कोई व्यक्ति-

(क) इस अधिनियम के या तद्धीन विरचित किसी स्कीम के किसी उपबन्ध का उल्लंघन करेगा तो वह कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो एक हज़ार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डनीय होगा;

(ख) जो यथापूर्वोक्त दण्डनीय किसी अपराध के लिए दोषसिद्ध किया जा चुका है, पूर्व दोषसिद्धि की तारीख से दो वर्ष की कालावधि के अंदर ऐसे किसी अपराध का फिर दोषी होगा, तो वह दोषसिद्ध किए जाने पर कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो दो हज़ार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डनीय होगा ।]

(2) कोई भी न्यायालय  [उपधारा (1)] के अधीन दण्डनीय किसी भी अपराध का संज्ञान, उस अपराध को गठित करने वाले तथ्यों की, ऐसे प्राधिकारी की, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त विनिर्दिष्ट किया जाए, पूर्व मंजूरी से की गई लिखित रिपोर्ट पर करने के सिवाय नहीं करेगा ।

 [(3) प्रेसिडेंसी मजिस्ट्रेट या प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट के न्यायालय से अवर कोई भी न्यायालय, उपधारा (1) के अधीन दण्डनीय किसी अपराध का विचारण नहीं करेगा ।]

10. निरीक्षक-(1) केन्द्रीय सरकार शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा ऐसे व्यक्तियों को, जिन्हें वह ठीक समझे, कोयला खान भविष्य-निधि स्कीम  [या बीमा स्कीमट या कोयला खान बोनस स्कीम के प्रयोजनों के लिए निरीक्षक नियुक्त कर सकेगी और उनकी अधिकारिता परिनिश्चित कर सकेगी ।

(2) निरीक्षक, अपनी अधिकारिता के अंदर की किसी कोयला खान के बारे में,-

 [(क) नियोजक से या किसी ऐसे ठेकेदार से, जिससे कोई रक़म धारा 10ङ के अधीन वसूलीय है, यह अपेक्षा कर सकेगा कि वह कोयला खान में व्यक्तियों के नियोजन से संबंधित-

(i) ऐसी जानकारी दे, अथवा

(ii) ऐसे लेखा, पुस्तकें, रजिस्टर और अन्य दस्तावेज निरीक्षक के कार्यालय में या अन्य ऐसे स्थान में जो, यथास्थिति, नियोजक या ठेकेदार के निकटतर हो पेश करे,

जैसे निरीक्षक इस अधिनियम के अधीन विरचित किसी स्कीम के प्रयोजनों के लिए आवश्यक समझे;

(ख) किसी युक्तियुक्त समय पर  [और ऐसी सहायता के साथ, यदि कोई हो, जैसी वह ठीक समझे, किसी भी कोयला खान में प्रवेश कर सकेगा और उसकी तलाशी ले सकेगा] और उसका भारसाधक पाए गए व्यक्ति से यह अपेक्षा कर सकेगा कि वह उस कोयला खान में व्यक्तियों के नियोजन से संबंधित ऐसे लेखाओं, पुस्तकों, रजिस्टरों और अन्य दस्तावेजों को, जिन्हें वह आवश्यक समझे, उसके समक्ष पेश करे;

(ग) पूर्वोक्त प्रयोजनों में से किसी से सुसंगत किसी बात के बारे में नियोजक की,  [या किसी ऐसे ठेकेदार की, जिससे कोई रक़म धारा 10ङ के अधीन वसूलीय हो,] उसके अभिकर्ता या सेवक की या उसे कोयला खान  *** के भारसाधक पाए गए किसी अन्य व्यक्ति की, या किसी अन्य ऐसे व्यक्ति की, जिसके बारे में निरीक्षक के पास यह विश्वास करने के लिए युक्तियुक्त हेतुक है कि वह उस कोयला खान में कर्मचारी है या रहा है, परीक्षा कर सकेगा;

7[(घ) कोयला खान के संबंध में रखे गए किन्हीं लेखाओं, पुस्तकों, रजिस्टरों या अन्य दस्तावेजों की प्रतिलिपियां बना सकेगा या उनसे उद्धरण ले सकेगा और जहां कि उसके पास यह विश्वास करने का कारण है कि इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध नियोजक या ठेकेदार द्वारा किया गया है, वहां ऐसे लेखाओं, पुस्तकों, रजिस्टरों या अन्य दस्तावेजों या उनके प्रभागों का, जिसे या जिन्हें वह उस अपराध के बारे में सुसंगत समझे ऐसी सहायता से, जैसी वह ठीक समझे, अभिगृहीत              कर सकेगा;

(ङ) अन्य ऐसी शक्तियों का प्रयोग कर सकेगा जैसी ऐसी कोई स्कीम उपबंधित करे ।]

7[(2क) हर व्यक्ति, जिससे कोई जानकारी देने या कोई दस्तावेज़ पेश करने की अपेक्षा उपधारा (2) के खण्ड (क) या खण्ड (ख) के अधीन की जाए, भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 175 के अर्थ के अंदर ऐसा करने के लिए वैध रूप से आबद्ध समझा जाएगा ।

(2ख)  [दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2)] के उपबंध यावत्शक्य उपधारा (2) के अधीन की किसी तलाशी या अभिग्रहण को उसी प्रकार लागू होंगे जैसे वे उक्त संहिता की 1[धारा 94] के अधीन निकाले गए वारंट के प्राधिकार के अधीन की गई तलाशी या किए गए अभिग्रहण को लागू होते हैं ।]

(3) हर निरीक्षक भारतीय दंड संहिता, (1860 का 45) की धारा 121 के अर्थ के अंदर लोक सेवक समझा जाएगा ।

 [10क. नियोजक द्वारा शोध्य धन की वसूली का ढंग-इस अधिनियम के अधीन विरचित किसी स्कीम के अधीन किसी अभिदाय या बोनस के बारे में नियोजक द्वारा कोई रक़म,  [या धारा 3घ की उपधारा (1) या उपधारा (3) के अधीन अंतरित किए जाने के लिए अपेक्षित कोई संचय, या धारा 10च के अधीन वसूलीय कोई नुकसानी, या ऐसी किसी स्कीम के प्रशासन के बारे में इस अधिनियम के अधीन नियोजक द्वारा संदेय कोई प्रभार] केन्द्रीय सरकार द्वारा उसी रीति से वसूल किए जा सकेंगे जिससे भू-राजस्व की बकाया वसूल की जाती है ।

 [10ख. कतिपय दशाओं में नियोजक का अवधारण-(1) जहां कि नियोजक कोई फ़र्म या व्यष्टियों का अन्य संगम है वहां उसके सभी भागीदार या सदस्य या उनमें से कोई भी, अथवा जहां कि नियोजक कोई कम्पनी है वहां उसके सब निदेशक या उनमें से कोई भी किसी ऐसे अपराध के लिए, जिसके लिए नियोजक दण्डनीय है, इस अधिनियम के अधीन अभियोजित और दंडित किया जा सकेगाः]

परन्तु जहां कि किसी फ़र्म, संगम या कम्पनी ने कोयला खान भविष्य-निधि आयुक्त को या इस निमित्त केन्द्रीय सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट किसी आफ़िसर को लिखित सूचना दे दी है कि उसने-

                (क) किसी फ़र्म की दशा में, अपने भागीदारों में से किसी को,

                (ख) किसी संगम की दशा में, अपने सदस्यों में से किसी को,

                (ग) किसी कम्पनी की दशा में, अपने निदेशकों में से किसी को,

जो हर एक दशा में किसी ऐसे स्थान का निवासी है जिस पर इस अधिनियम का विस्तार है और जो हर एक दशा में या तो ऐसी फ़र्म, संगम या कम्पनी के प्रबन्ध का वस्तुतः भारसाधक है या उसमें अंशों की अधिकतम संख्या का धारक है, इस अधिनियम के या तद्धीन विरचित किसी स्कीम के प्रयोजनों के लिए नियोजक का उत्तदायित्व संभालने के लिए नामनिर्दिष्ट कर दिया है, वहां, यथास्थिति, ऐसा भागीदार, सदस्य या निदेशक, जब तक वह इस प्रकार निवास करता रहे और यथापूर्वोक्त भारसाधक बना रहे या अंशों की अधिकतम संख्या धारण करता रहे, इस अधिनियम के या तद्धीन विरचित किसी स्कीम के प्रयोजनों के लिए नियोजक तब के सिवाय समझा जाएगा जब कि उसका नामनिर्देशन रद्द करने वाली या यह कथन करने वाली कि वह, यथास्थिति, भागीदार, सदस्य या निदेशक नहीं रह गया है, लिखित सूचना कोयला खान भविष्य-निधि आयुक्त या इस निमित्त केन्द्रीय सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट आफ़िसर को प्राप्त हो जाती है ।

                (2) जहां कि कोई नियोजक सरकार या कोई स्थानीय प्राधिकारी है, वहां कोयला खान के कार्यकलाप का प्रबन्ध करने के लिए, यथास्थिति, ऐसी सरकार या स्थानीय प्राधिकारी द्वारा प्राधिकृत सब आफ़िसरों को या व्यक्तियों को या उनमें से किसी को भी, किसी तत्समय प्रवृत्त विधि या संविदा में अंतर्विष्ट किसी तत्प्रतिकूल बात के होते हुए भी, कोयला खान के बारे में नियोजक समझा जाएगा और किसी ऐसे अपराध के लिए, जिसके लिए नियोजक दण्डनीय है, इस अधिनियम के अधीन अभियोजित और दण्डित किया                         जा सकेगा ।

                10ग. शक्तियों का प्रत्यायोजन-(1) केन्द्रीय सरकार, शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, यह निदेश दे सकेगी कि इस अधिनियम या तद्धीन विरचित किसी स्कीम के अधीन उसके द्वारा प्रयोक्तव्य कोई शक्ति ऐसी शर्तों के अध्यधीन, यदि कोई हों, जैसी उस अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाएं, कोयला खान भविष्य-निधि आयुक्त द्वारा भी या केन्द्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किसी आफिसर द्वारा भी प्रयोक्तव्य होंगी ।

                (2) बोर्ड अपने अध्यक्ष को या कोयला खान भविष्य-निधि आयुक्त को या बोर्ड के किसी अन्य आफिसर को, इस अधिनियम के या तद्धीन विरचित किसी स्कीम के अधीन की बोर्ड की ऐसी शक्तियां और ऐसे कृत्य, जिन्हें बोर्ड इस अधिनियम के अधीन विरचित किसी स्कीम के दक्ष प्रशासन के लिए आवश्यक समझे, ऐसी शर्तों और निर्बन्धनों के, यदि कोई हों, अध्यधीन, जैसे बोर्ड विनिर्दिष्ट करे, प्रत्यायोजित कर सकेगा ।

                10घ. अभिदाय का नियोजकों द्वारा संदाय और सदस्यों से उसकी वसूली-(1) वह अभिदाय (जिसे एतस्मिन्पश्चात् नियोजक-अभिदाय कहा गया है) नियोजक द्वारा और वह अभिदाय (जिसे एतस्मिन्पश्चात् कर्मचारी-अभिदाय कहा गया है) कर्मचारी द्वारा उस दर से संदेय होगा जो कोयला खान भविष्य-निधि स्कीम में विनिर्दिष्ट की जाए और नियोजक नियोजक-अभिदाय, तथा कर्मचारी-अभिदाय भी, संदत्त करेगा चाहे उसने अभिदाय का कर्मचारी वाला अंश कर्मचारी से वसूल किया हो या नहीं ।

                (2) किसी सदस्य की ओर से नियोजक द्वारा संदत्त अभिदाय की रकम किसी अन्य तत्समय प्रवृत्त विधि में या किसी संविदा में अंतर्विष्ट किसी तत्प्रतिकूल बात के होते हुए भी, सदस्य की मजदूरी में से कटौती द्वारा वसूलीय होगी, न कि अन्यथा ।

(3) उसके सिवाय जैसा कि कोयला खान भविष्य-निधि स्कीम में अन्यथा उपबंधित हो, उपधारा (2) के अधीन की कोई भी कटौती, उस मजदूरी से भिन्न किसी मजदूरी में से नहीं की जाएगी जो उस कालावधि के बारे में, जिसके लिए कि अभिदाय संदेय है, संदत्त की जा रही है ।

(4) किसी तत्प्रतिकूल संविदा के होते हुए भी, नियोजक नियोजक-अभिदाय की या धारा 10क में निर्दिष्ट प्रभारों की कटौती सदस्य की मजदूरी में से करने का या ऐसा अभिदाय या प्रभार ऐसे सदस्य से अन्यथा वसूल करने का हकदार नहीं होगा ।

10नियोजकों और ठेकेदारों द्वारा धन की वसूली-(1) ठेकेदार द्वारा या के माध्यम से नियोजित कर्मचारी के बारे में नियोजक द्वारा संदत्त या संदेय  [अभिदाय की रक़म (अर्थात् कोयला खान भविष्य निधि स्कीम के अनुसरण में नियोजक का अभिदाय तथा कर्मचारी का अभिदाय और बीमा स्कीम के अनुसरण में नियोजक का अभिदाय)] और धारा 10क में निर्दिष्ट कोई प्रभार और ऐसे किसी कर्मचारी के बारे में किसी कोयला खान बोनस स्कीम के अधीन संदत्त या संदेय कोई बोनस ऐसे नियोजक द्वारा ठेकेदार से या तो किसी संविदा के अधीन ठेकेदार को संदेय किसी रकम में से कटौती द्वारा या ऐसे ऋण के रूप में जो ठेकेदार द्वारा चुकाया जाना है, वसूल किए जा सकेंगे ।

(2) वह ठेकेदार, जिससे उसके द्वारा या के माध्यम से नियोजित किसी कर्मचारी के बारे में उपधारा (1) में वर्णित रकमें वसूल की जा सकती हैं, उसके सिवाय, जैसा कोयला खान भविष्य-निधि स्कीम में अन्यथा उपबंधित है, ऐसे कर्मचारी से, ऐसी किसी स्कीम के अधीन के कर्मचारी-अभिदाय को उस कर्मचारी को संदेय मजदूरी में से कटौती द्वारा इस शर्त के अध्यधीन वसूल कर सकेगा कि ऐसी कोई भी कटौती उस मजदूरी से भिन्न किसी मजदूरी से नहीं की जाएगी, जो उस कालावधि के बारे में संदेय हो जिससे कर्मचारी का अभिदाय संबंधित है ।

(3) किसी तत्प्रतिकूल संविदा के होते हुए भी, कोई भी ठेकेदार नियोजक-अभिदाय की, या उपधारा (1) में निर्दिष्ट प्रभारों या बोनस की कटौती अपने द्वारा या अपने माध्यम से नियोजित किसी कर्मचारी को संदेय रकम में से करने का या ऐसे अभिदाय या प्रभारों या बोनस को ऐसे कर्मचारी से अन्यथा वसूल करने का हकदार नहीं होगा ।

10च. नुकसानी वसूल करने की शक्ति-जहां कि कोई नियोजक इस अधिनियम के अधीन विरचित किसी स्कीम के अधीन अपने द्वारा संदेय किसी अभिदाय या बोनस या किन्हीं प्रभारों के संदाय में व्यतिक्रम करता है या जहां कि कोई ऐसा व्यक्ति जिससे भविष्य-निधि संचयों को धारा 3घ के उपबंधों के अनुसार अंतरित करने की अपेक्षा की गई है, ऐसे संचयों के अंतरण में व्यतिक्रम करता है, वहां केन्द्रीय सरकार बकाया की रकम के पच्चीस प्रतिशत से अनधिक इतनी नुकसानी, जितनी अधिरोपित करना वह ठीक समझे, यथास्थिति, ऐसे नियोजक या व्यक्ति से, वसूल कर सकेगी ।]

11. अभिदायों और बोनस संदाय की अन्य ऋणों पर पूर्विकता-इस अधिनियम के अधीन विरचित स्कीम के अधीन के किसी अभिदाय या बोनस के बारे में शोध्य रकम या ऐसी किसी स्कीम के प्रशासन के बारे में उपगत कोई प्रभार, जब कि उनके लिए दायित्व, देनदार व्यक्ति के दिवालिया न्यायनिर्णीय होने के पूर्व, या ऐसी कम्पनी की दशा में जिसका परिसमापन आदिष्ट हो चुका है ऐसे आदेश की तारीख के पूर्व, प्रोद्भूत हो चुका है, उन ऋणों में सम्मिलित समझा जाएगा जिन्हें प्रेसिडेंसी नगर दिवाला अधिनियम, 1909 (1909 का 3) की धारा 49 के अधीन या प्रान्तीय दिवाला अधिनियम, 1920 (1920 का 5) की धारा 61 के अधीन या  [कम्पनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) की धारा 530ट के अधीन, यथास्थिति, दिवालिया की सम्पत्ति के या उस कम्पनी को, जिसका समापन किया जा रहा है, आस्तियों के वितरण में सभी अन्य ऋणों पर पूर्विकता दी जा कर चुकाया जाना है ।

 [11क. सद्भावपूर्वक किए गए कार्यों के लिए परित्राण-कोई भी वाद या अन्य विधिक कार्यवाही इस अधिनियम के या तद्धीन विरचित किसी स्कीम के अधीन सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात के लिए किसी व्यक्ति के विरुद्ध                    नहीं होगी ।]

 [11ख. कठिनाइयों का निराकरण करने की शक्ति-यदि इस अधिनियम के उपबंधों या तद्धीन विरचित किसी स्कीम को प्रभावी करने कोई कठिनाई उद्भूत हो तो केन्द्रीय सरकार शासकीय राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा इस अधिनियम के उपबन्धों से अन-असंगत ऐसा उपबन्ध कर सकेगी या ऐसा निदेश दे सकेगी जो उस कठिनाई के निराकरण के लिए उसे आवश्यक या समीचीन                       प्रतीत हो ।]

 [11ग. छूट देने की शक्ति-(1) यदि नियोजक ऐसा किए जाने के लिए आवेदन करता है तो, केन्द्रीय सरकार, शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा और ऐसी शर्तों के अधीन, जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाएं, किसी कोयला खान को बीमा स्कीम के सभी उपबन्धों या उनमें से किसी के प्रवर्तन से छूट तभी दे सकेगी जब उसका यह समाधान हो जाता है कि उस कोयला खान के कर्मचारी कोई पृथक् अभिदाय या प्रीमियम का संदाय किए बिना जीवन बीमा के रूप में प्रसुविधाओं का उपभोग कर रहे हैं, चाहे वे भविष्य-निधि में उनके निक्षेपों से सहबद्ध हों या नहीं और ऐसी प्रसुविधाएं बीमा स्कीम के अधीन अनुज्ञेय प्रसुविधाओं की अपेक्षा ऐसे कर्मचारियों के लिए अधिक अनुकूल हों ।

(2) उपधारा (1) के उपबन्धों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, बीमा स्कीम किसी कोयला खान में नियोजित और उस स्कीम के अन्तर्गत आने वाले किसी व्यक्ति या किसी वर्ग के व्यक्तियों को उसके सभी उपबन्धों या उनमें से किसी के प्रवर्तन से छूट देने के लिए तभी उपबन्ध कर सकेगी, जब ऐसे व्यक्ति या ऐसे वर्ग के व्यक्तियों को जीवन बीमा के रूप में अनुज्ञेय प्रसुविधाएं बीमा स्कीम के अधीन उन प्रसुविधाओं से अधिक अनुकूल हों जिनकी व्यवस्था की गई है ।

(3) जहां किसी कोयला खान में नियोजित किसी व्यक्ति या व्यक्तियों के किसी वर्ग के सम्बन्ध में बीमा स्कीम के सभी उपबंधों या उनमें से किसी के प्रवर्तन से इस धारा के अधीन कोई छूट दी जाती है (चाहे ऐसी छूट किसी ऐसी कोयला खान को दी गई है जिसमें ऐसे व्यक्ति या ऐसे वर्ग के व्यक्ति नियोजित हैं अथवा ऐसे व्यक्ति या ऐसे वर्ग के व्यक्तियों को उस रूप में दी गई है) वहां ऐसी कोयला खान के सम्बन्ध में नियोजक-

(क) जीवन बीमा के रूप में उन प्रसुविधाओं के सम्बन्ध में, जिनके लिए ऐसा व्यक्ति या व्यक्तियों का ऐसा वर्ग हकदार है या किसी बीमा निधि के संबंध में ऐसे लेखे रखेगा, ऐसी विवरणियां देगा और ऐसा विनिधान करेगा, निरीक्षण के लिए ऐसी सुविधाओं की व्यवस्था करेगा और ऐसे निरीक्षण-प्रभार का संदाय करेगा, जो केन्द्रीय सरकार निदेश करे;

(ख) जीवन बीमा के रूप में जिन प्रसुविधाओं के लिए ऐसा व्यक्ति या व्यक्तियों का ऐसा वर्ग छूट की तारीख के ठीक पूर्व हकदार था, उनकी कुल मात्रा को छूट के पश्चात् किसी भी समय केन्द्रीय सरकार की इजाजत के बिना नहीं     घटाएगा; और

(ग) जहां ऐसा कोई व्यक्ति अपना नियोजन छोड़ देता है और किसी अन्य कोयला खान में पुनर्नियोजन अभिप्राप्त कर लेता है वहां उस व्यक्ति द्वारा छोड़ी गई कोयला खान की बीमा निधि में उस रकम को, जो संचित रकम उस व्यक्ति के खाते में जमा है, उस कोयला खान की, जिसमें वह व्यक्ति पुनर्नियोजित होता है, यथास्थिति, बीमा निधि में या निक्षेप-सहबद्ध बीमा निधि में उस व्यक्ति के जमा खाते में उतने समय के भीतर अंतरित करेगा  जो केन्द्रीय सरकार इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे ।

स्पष्टीकरण-इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए “बीमा निधि" से कर्मचारियों को जीवन बीमा के रूप में प्रसुविधाओं का उपबन्ध करने के लिए किसी स्कीम के अधीन नियोजक द्वारा स्थापित कोई ऐसी निधि, चाहे वह भविष्य-निधि में या निक्षेप-सहबद्ध हो या नहीं, अभिप्रेत है, जिसमें कर्मचारियों ने उस निमित्त किसी पृथक् अभिदाय या प्रीमियम का संदाय न किया हो ।

(4) यदि नियोजक,-

(क) उपधारा (1) के अधीन दी गई किसी छूट की दशा में, उस उपधारा के अधीन अधिरोपित किसी शर्त का या उपधारा (3) के उपबन्धों में से किसी का;

(ख) उपधारा (2) के अधीन दी गई किसी छूट की दशा में उपधारा (3) के उपबन्धों में से किसी का,

अनुपालन करने में असफल रहता है  तो इस धारा के अधीन दी गई कोई छूट उस प्राधिकारी के, जिसने वह छूट दी थी, लिखित आदेश द्वारा रद्द की जा सकेगी ।

                (5) जहां उपधारा (1) के अधीन या उपधारा (2) के अधीन दी गई कोई छूट रद्द कर दी जाती है वहां ऐसे हर कर्मचारी के नाम में, जिसे ऐसी छूट दी गई थी, जमा की गई रकम ऐसे समय के भीतर और ऐसी रीति से, जो विनिर्दिष्ट की जाए, बीमा निधि में उसके खाते में उसके नाम अन्तरित कर दी जाएगी ।

                11घ. 1956 के अधिनियम 31 में किसी बात के होते हुए भी इस अधिनियम का प्रभावी होना-इस अधिनियम के उपबन्ध जीवन बीमा निगम अधिनियम, 1956 में उनसे असंगत किसी बात के होते हुए भी प्रभावी होंगे ।]

                12. 1948 के अध्यादेश 7 का निरसन-(1) कोल माइन्स प्राविडेंट फण्ड एण्ड बोनस स्कीम्स आर्डिनेंस, 1948 एतद्द्वारा निरसित किया जाता है ।

                (2) ऐसे किसी निरसन के होते हुए भी, उक्त आर्डिनेंस द्वारा या के अधीन प्रदत्त किसी शक्ति के प्रयोग में की गई कोई भी बात या कार्रवाई इस अधिनियम के द्वारा या अधीन प्रदत्त शक्तियों के प्रयोग में से ऐसे की गई समझी जाएगी, मानो यह अधिनियम 1948 के अप्रैल के तेईसवें दिन को प्रारम्भ हुआ था ।

प्रथम अनुसूची

(धारा 3 देखिए)

वे बातें जिनके लिए कोयला खान भविष्य-निधि स्कीम में उपबन्ध किया जाना है

                1. वे कर्मचारी या उन कर्मचारियों का वर्ग जो निधि में सम्मिलित होंगे, निधि को संदेय अभिदाय और वे शर्तें जिनके अधीन किसी कर्मचारी को निधि में सम्मिलित होने से या अभिदायों के संदाय से छूट दी जा सकेगी ।

                 [2. नियोजकों द्वारा और  [कर्मचारियों] द्वारा या की ओर से 2[(चाहे वे नियोजक द्वारा सीधे अथवा ठेकेदार द्वारा या के माध्यम से नियोजित हों)] निधि को अभिदायों का संदाय और ऐसे संदाय की दर, समय और रीति और वह रीति जिससे ऐसे अभिदायों की वसूली की जा सकेगी ।

 [2क. वह रीति जिससे कर्मचारी अभिदाय ठेकेदारों द्वारा उन कर्मचारियों से जो ऐसे ठेकेदारों द्वारा या के माध्यम से नियोजित हैं, वसूल किए जा सकेंगे ।]

3. नियोजक द्वारा ऐसी धनराशियों का संदाय जैसी निधि के प्रशासन के खर्च की पूर्ति के लिए आवश्यक समझी जाएं और वह दर और वह रीती जिससे  [संदाय किया जाएगा ।]

 [4. बोर्ड की सहायता के लिए किसी समिति का गठन ।]

 [5. प्रादेशिक तथा अन्य कार्यालय खोलना ।]

6. वह रीति जिसमें लेखे रखे जाएंगे, निधि के धनों का विनिधान, बजट की तैयारी, लेखाओं की संपरीक्षा तथा केन्द्रीय सरकार को रिपोर्टों का प्रस्तुत किया जाना ।

7. वे शर्तें जिनके अधीन निधि में से रकम का लिया जाना अनुज्ञात किया जा सकेगा और कोई कटौती या समपहरण किया जा सकेगा  [,ऐसी कटौती या समपहरण की अधिकतम रकम तथा ऐसी काटी गई या समपहृत रकमों का उपयोग ।]

8. सदस्यों को संदेय ब्याज की दर का केन्द्रीय सरकार द्वारा न्यासी बोर्ड के परामर्श से नियत किया जाना ।

9. वह प्ररूप जिसमें कर्मचारी अपेक्षा किए जाने पर अपने तथा अपने कुटुम्ब के बारे में विशिष्टियां देगा ।

10. सदस्य के नाम में जमा रकम को उसकी मृत्यु के पश्चात् प्राप्त करने के लिए किसी व्यक्ति का नामनिर्देशन तथा ऐसे नामनिर्देशन को रद्द करना या बदलना ।

11. वे रजिस्टर और अभिलेख जो नियोजक 3[या ठेकेदार] द्वारा रखे जाने हैं और वे विवरणियां जो उसके द्वारा दी जानी हैं ।

12. किसी कर्मचारी की पहचान के प्रयोजनों के लिए पहचान-पत्र या टोकन या डिस्क का प्ररूप या डिजाइन, और उनका दिया जाना, अभिरक्षा या प्रतिस्थापन ।

13. वे फीसें जो इस अनुसूची में विनिर्दिष्ट प्रयोजनों में से किसी के लिए उद्गृहीत की जानी हैं ।

 [13क. वह रीति जिसमें किसी विद्यमान भविष्य-निधि में के संचय धारा 3घ के अधीन निधि को अन्तरित किए जाएंगे और उन आस्तियों के मूल्यांकन का ढंग जिनका अंतरण ऐसी भविष्य-निधि का प्रशासन करने वाले व्यक्ति द्वारा किया जाए ।

14. कोई अन्य बात जिसके लिए कोयला खान भविष्य-निधि स्कीम में उपबंध किया जाना है या जो उस स्कीम को कार्यान्वित करने के प्रयोजन के लिए आवश्यक या उचित हो ।]

[द्वितीय अनुसूची

[धारा 3ङ (5) देखिए]

वे विषय जिनके लिए कोयला खान पेंशन स्कीम में उपबंध किया जाना है

1. वे कर्मचारी या कर्मचारियों का वह वर्ग जिसको कोयला खान पेंशन स्कीम लागू होगी और वह समय जिसके भीतर उस स्कीम में सम्मिलित होने के विकल्प का प्रयोग उन कर्मचारियों द्वारा किया जाएगा, जिनको उक्त स्कीम लागू नहीं होती है ।

2. वह समय जिसके भीतर ऐसे कर्मचारी जो धारा 3ङ के अधीन, जैसी कि वह कोयला खान भविष्य-निधि और प्रकीर्ण उपबंध (संशोधन) अधिनियम, 1996 (जिसे इसमें इसके पश्चात् इस अनुसूची में संशोधनकारी अधिनियम कहा गया है) के प्रारम्भ के पूर्व थी, कुटुम्ब पेंशन स्कीम के सदस्य नहीं हैं, पेंशन स्कीम के विकल्प का प्रयोग करेंगे ।

3. निधि में नियोजकों का अभिदाय और कर्मचारियों के अभिदाय का वह भाग जो पेंशन निधि में जमा किया जाएगा और वह रीति जिसमें वह जमा किया जाएगा ।

4. निधि में केन्द्रीय सरकार का अभिदाय और अन्य अभिदाय जो पेंशन निधि में जमा किए जाएंगे और वह रीति जिसमें वे जमा किए जाएंगे ।

5. धारा 3ङ के अधीन, जैसी कि वह संशोधनकारी अधिनियम के प्रारम्भ के पूर्व थी, पेंशन के लिए पात्र होने के लिए न्यूनतम अर्हक सेवा और वह रीति जिससे कर्मचारियों को उनकी पिछली सेवा के फायदें दिए जा सकेंगे ।

6. सेवा की उस कालावधि का विनियमन जिसके लिए कोई अभिदाय प्राप्त नहीं हुआ है ।

7. वह रीति जिसमें नियोजक द्वारा अभिदाय के संदाय में व्यतिक्रम के प्रति कर्मचारियों का हित संरक्षित किया जाएगा ।

8. वह रीति जिसमें पेंशन निधि के लेखे रखे जाएंगे और विनिधान के ऐसे ढंग के अधीन रहते हुए, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा अवधारित किया जाए, पेंशन निधि के धन का विनिधान किया जाएगा ।

9. वह प्ररूप जिसमें कर्मचारी, जब भी अपेक्षा की जाए तब, अपने और अपने कुटुम्ब के सदस्यों के बारे में विशिष्टियां देगा ।

10. कर्मचारियों की बाबत रखी जाने वाली पेंशन स्कीम के प्रशासन के लिए अपेक्षित प्ररूप, रजिस्टर और अभिलेख ।

11. पेंशन और पेंशन से संबंधित फायदों के मापमान और कर्मचारियों को ऐसे फायदे देने से संबंधित शर्तें, पेंशन स्कीम के अधीन संदेय जीवन बीमा की रकम और ऐसे संदाय की रीति ।

12. पेंशन के संवितरण का ढंग और संवितरण करने वाले ऐसे अभिकरणों से जो इस प्रयोजनार्थ विनिर्दिष्ट किए जाएं, किए जाने वाले ठहराव ।

13. वह रीति जिसमें पेंशन स्कीम के प्रशासन के संबंध में उपगत व्यय केन्द्रीय सरकार द्वारा बोर्ड को संदत्त किए जा सकेंगे ।

14. किसी कर्मचारी की मृत्यु की दशा में पेंशन और बीमा की रकम प्राप्त करने के लिए व्यक्तियों का नामनिर्देशन ।

15. कोई अन्य विषय जिसका पेंशन स्कीम में उपबंध किया जाना है या जो पेंशन स्कीम के कार्यान्वयन के प्रयोजन के लिए आवश्यक या उचित हो सकता है ।

[तृतीय अनुसूची

[धारा 3 देखिए]

वे बातें जिनके लिए कोयला खान निक्षेप-सहबद्ध बीमा स्कीम में उपबंध किया जाना है

1. वे कर्मचारी या उन कर्मचारियों का वर्ग जो बीमा स्कीम के अन्तर्गत आएंगे ।

2. वह रीति जिससे बीमा निधि के लेखे रखे जाएंगे और बीमा निधि के धन का विनिधान, विनिधान की ऐसी पद्धति के अध्यधीन किया जाएगा जो केन्द्रीय सरकार आदेश द्वारा अवधारित करे ।

3. वह प्ररूप जिसमें कर्मचारी, जब भी अपेक्षा की जाए तब, अपने और अपने कुटुम्ब के सदस्यों के बारे में, विशिष्टियां देगा ।

4. कर्मचारी को शोध्य बीमा की रकम उसकी मृत्यु के पश्चात् प्राप्त करने के लिए किसी व्यक्ति का नामनिर्देशन और ऐसे नामनिर्देशन को रद्द करना या बदलना ।

5. वे रजिस्टर और अभिलेख, जो कर्मचारियों के बारे में रखे जाने हैं, किसी कर्मचारी या उसके नामनिर्देशिती या बीमा की रकम प्राप्त करन के हकदार उसके कुटुम्ब के किसी सदस्य की पहचान करने के प्रयोजन के लिए किसी पहचानपत्र, टोकन या डिस्क का प्ररूप या डिजाइन ।

6. बीमा रकम के मान जो निधि में सम्बद्ध कर्मचारी के लेखे में उसकी मृत्यु के ठीक पूर्व की तीन वर्ष की अवधि के दौरान के औसत अतिशेष से कम नहीं होंगे या दस हजार रुपए से अधिक नहीं होंगे ।

7. वह न्यूनतम औसत अतिशेष जो स्कीम के अधीन प्रसुविधाओं का पात्र होने के लिए किसी कर्मचारी द्वारा भविष्य निधि में रखा जाना है ।

8. वह रीति जिससे नामनिर्देशिती या कर्मचारी के नामनिर्देशिती या कर्मचारी के कुटुम्ब के किसी सदस्य को स्कीम के अधीन शोध्य रकम का संदाय किया जाना है, जिसके अन्तर्गत यह उपबन्ध भी है कि इस रकम का संदाय बैंककारी कम्पनी (उपक्रमों का अर्जन और अन्तरण) अधिनियम, 1970 (1970 का 5) की प्रथम अनुसूची में विनिर्दिष्ट किसी तत्स्थानी नए बैंक में, ऐसे नामनिर्देशिती या कुटुम्ब के किसी सदस्य के नाम में किसी बचत बैंक खाते में जमा के रूप में ही किया जाएगा, अन्यथा नहीं ।

9. कोई अन्य विषय जिसके लिए बीमा स्कीम में उपबन्ध किया जाना है या जो उस स्कीम को कार्यान्वित करने के प्रयोजन के लिए आवश्यक या उचित हो ।]

[चतुर्थ अनुसूची

(धारा 5 देखिए)

वे बातें जिनके लिए कोयला खान बोनस स्कीम में उपबंध किया जाना है

1. ऐसे बोनस का संदाय जो किसी कालावधि के दौरान  [कर्मचारी] के हाजिर रहने पर निर्भर है ।

2. वे कर्मचारी या उन कर्मचारियों का वर्ग जो बोनस के लिए पात्र होंगे तथा पात्रता की शर्तें ।

3. वह दर जिससे बोनस किसी कर्मचारी को संदेय होगा और वह रीति जिससे बोनस की संगणना की जाएगी ।

4. वे दशाएं जिनमें बोनस पूर्णतः या भागतः प्राप्त करने से कोई कर्मचारी विवर्जित किया जा सकेगा ।

5. वह दर जिससे राशियां बोनस के संदाय के लिए नियोजक द्वारा पृथक् रख दी जाएंगी तथा ऐसे संदाय का समय                      और रीति ।

6. वे रजिस्टर और अभिलेख जो नियोजक  [या ठेकेदार] द्वारा रखे जाने हैं और विवरणियां जो उसके द्वारा दी जानी हैं ।

 [6क. बोनस की उस रकम का, जो उस तिमाही की समाप्ति से, जिससे वह संबंधित है, छह मास की कालावधि तक असंदत्त या अदावाकृत रही हो, नियोजक द्वारा निधि को या केन्द्रीय सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट किसी अन्य निधि को अंतरण और अपने कर्मचारियों के प्रति नियोजक के दायित्व का ऐसे अंतरित रकम की मात्रा तक निर्वापन ।

7. कोई अन्य बात जिसके लिए कोयला खान बोनस स्कीम में उपबन्ध किया जाना है, या जो उस स्कीम को कार्यान्वित करने के लिए आवश्यक या उचित हो ।]

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