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कलकत्ता पत्तन (यान मार्गदर्शन) अधिनियम, 1948 ( Calcutta Port (Pilotage) Act, 1948 )


 

कलकत्ता पत्तन (यान मार्गदर्शन) अधिनियम, 1948

(1948 का अधिनियम संख्यांक 33)

[16 अप्रैल, 1948]

हुगली नदी में यान मार्गदर्शन पर नियंत्रण कलकत्ता पत्तन के

आयुक्तों को अन्तरित करने के वास्ते

उपबंध करने के लिए

अधिनियम

                यह समीचीन है कि हुगली नदी में यान मार्गदर्शन पर नियंत्रण कलकत्ता पत्तन के आयुक्तों को अन्तरित करने के लिए तथा उसके आनुषंगिक अन्य विषयों के लिए उपबन्ध किया जाए तथा कलकत्ता पाइलट अधिनियम, 1859 (1859 का 12) में कुछ पारिणामिक संशोधन किए जाएं ;

                अतः एतद्द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित किया जाता है :-

1. संक्षिप्त नाम और प्रारंभ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम कलकत्ता पत्तन (यान मार्गदर्शन) अधिनियम, 1948 है ।

(2) यह उस तारीख  को प्रवृत्त होगा जिसे केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस निमित्त नियत करे  ।

2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में जब तक कि विषय या संदर्भ में कोई बात विरुद्ध न हो,-

                                (क) “नियत दिन" से वह तारीख अभिप्रेत है जिसको यह अधिनियम प्रवृत्त होता है ;

                (ख) “आयुक्त" से कलकत्ता पत्तन अधिनियम, 1890 (1890 का बंगाल अधिनियम 3) के अधीन निगमित कलकत्ता पत्तन के आयुक्त अभिप्रेत हैं ;

(ग) “हुगली क्षेत्र" से कलकत्ता पत्तन से लेकर समुद्र तक फैला हुआ हुगली नदी का वह भाग अभिप्रेत है जिसे भारतीय पत्तन अधिनियम, 1908 (1908 का 15) की धारा 31 लागू की गई है ।

3. आयुक्तों का पाइलट रखने का कर्तव्य-नियत दिन से आयुक्तों का यह कर्तव्य होगा कि वे हुगली क्षेत्र में जलयानों के सुरक्षित नौपरिवहन के लिए पाइलट रखें तथा इस प्रयोजन के लिए आयुक्त पर्याप्त संख्या में इतने पाइलट रखने के लिए आबद्ध होंगे जितने केन्द्रीय सरकार द्वारा समय-समय पर विहित किए जाएं ।

4. पाइलटों की नियुक्ति-आयुक्तों द्वारा पाइलटों के रूप में कोई ऐसा व्यक्ति नियुक्त नहीं किया जाएगा जो भारतीय पत्तन अधिनियम, 1908 (1908 का 15) के उपबंधों के अधीन जलयानों का मार्गदर्शन करने के लिए केन्द्रीय सरकार द्वारा तत्समय प्राधिकृत नहीं है ।

5. पाइलटों के बारे में नियम-(1) आयुक्त समय-समय पर-

                                (क) यान मार्गदर्शन के लिए पाइलटों द्वारा प्राप्त किए जाने वाले वेतनों, मजदूरियों और भत्तों को नियत और विनियमित करने के लिए, और

                                (ख) पाइलटों के व्यवहार और आचरण को विनियमित करने के लिए,

नियम बना सकेंगे तथा ऐसे नियमों का अनुपालन, उनके किसी भी भंग के लिए दो सौ रुपए से अनधिक की धन-संबंधी शास्तियां अधिरोपित करके या नियुक्ति को निलम्बित या उससे वंचित करके अथवा अन्यथा जैसा भी उन्हें समीचीन प्रतीत हो वैसा करके, प्रवर्तित करा सकेंगे :

                परंतु आयुक्तों द्वारा दिया गया ऐसा कोई आदेश, जो ऐसे किसी अधिकारी से संबंधित है, जिसका वेतन एक हजार रुपए या उससे अधिक हो, केन्द्रीय सरकार की पूर्व मंजूरी के अधीन होगा ।

(2) ऐसे कोई नियम तब तक प्रभावी नहीं होंगे जब तक वे केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित और राजपत्र में प्रकाशित नहीं कर दिए जाते ।

                6. यान मार्गदर्शन फीस का उद्ग्रहण-नियत दिन से आयुक्त हुगली क्षेत्र में जलयानों के मार्गदर्शन के लिए भारतीय पत्तन अधिनियम, 1908 (1908 का 15) के अधीन नियत दरों पर फीस उद्गृहीत करने के हकदार होंगे ।

                 [7. यान मार्गदर्शन फीसें और इस अधिनियम के अधीन उद्गृहीत जुर्माने तथा शास्तियां-सभी यान मार्गदर्शन फीसों का तथा किसी न्यायालय द्वारा अधिरोपित जुर्मानों और शास्तियों के सिवाय उन सब जुर्मानों और शास्तियों का, जो पाइलटों या पाइलट सेवा में नियोजित अन्य व्यक्तियों से इस अधिनियम के अधीन उद्गृहीत की जाएं, आयुक्तों द्वारा भारतीय पत्तन अधिनियम, 1908 (1908 का 15) की धारा 36 के उपबन्धों के अनुसार लेखा-जोखा दिया जाएगा और व्यय किया जाएगा ।]

                 ।                                             ।                                              ।                                              ।                              ।

                9. धनराशियों को साधारण लेखे से यान मार्गदर्शन लेखे को और यान मार्गदर्शन लेखे से साधारण लेखे को अन्तरित करने की शक्ति-आयुक्तों को केन्द्रीय सरकार की पूर्व मंजूरी से, साधारण खाते में जमा की गई धनराशियों  [में से किसी राशि] को, 2[भारतीय पत्तन अधिनियम, 1908 (1908 का 5) की धारा 36 के अधीन रखे गए] यान मार्गदर्शन खाते के घाटे को, यदि कोई हो, पूरा करने में प्रयुक्त करने, तथा ऐसे यान मार्गदर्शन खाते की  [सम्पूर्ण अधिशेष निधियों या उनके किसी भाग को, यदि कोई हों,] साधारण खाते को अन्तरित करने की शक्ति होगी ।

                 [10. 1890 के बंगाल अधिनियम 3 के कुछ उपबंधों का लागू किया जाना-कलकत्ता पत्तन अधिनियम, 1890 की धाराएं 18, 19, 24ख, 29 से 34 (जिसमें ये दोनों धाराएं सम्मिलित हैं), 47 से 54 (जिनमें ये दोनों धाराएं सम्मिलित है,), 55, 57, 58, 69 से 80क (जिनमें ये दोनों धाराएं सम्मिलित हैं) एतद्द्वारा इस अधिनियम में निम्नलिखित परिवर्तनों के अधीन सम्मिलित की जाती हैं,                अर्थात् :

(क) कि उक्त धाराओं में कलकत्ता पतन अधिनियम, 1890 (1890 का बंगाल अधिनियम 3) के प्रति निर्देशों को इस अधिनियम के प्रति निर्देश समझा जाएगा ;

(ख) कि धारा 19 के खण्ड (ख) में “पथकर, देय, रेट, भाटक और प्रभार" शब्दों के स्थान पर यान मार्गदर्शन फीस" शब्द रखे जाएंगे ;

                                (ग) कि धारा 30 की उपधारा (2) के परन्तुक का लोप किया जाएगा ;

                                (घ) कि धारा 34 की उपधारा (1) में उपाध्यक्ष या" शब्दों का लोप किया जाएगा ;

                                (ङ) कि धारा 34 की उपधारा (2) का लोप किया जाएगा ।]

                11. [कलकत्ता पाइलट अधिनियम 1859 (1859 का 12) का संशोधन-टनिरसन और संशोधन अधिनियम, 1950 (1950 का 35) की धारा 2 और अनुसूची 1 द्वारा निरसित ।

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