सागर-दिशा तोप अभ्यास अधिनियम, 1949
(1949 का अधिनियम संख्यांक 8)
[17 फरवरी, 1949]
सागर-दिशा तोप अभ्यास के लिए सुविधाओं का
उपबन्ध करने हेतु
अधिनियम
सागर-दिशा तोप अभ्यास के लिए सुविधाओं का उपबन्ध करना समीचीन है;
अतः एत्दद्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित किया जाता है:
1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और लागू होना-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम सागर-दिशा तोप अभ्यास अधिनियम,1949 है ।
(2) इसका विस्तार उन सभी राज्यों ॥। पर है जिनमें समुद्र तट हैं और यह किसी ऐसे जलयान को, जो भारत में रजिस्ट्रीकृत है या भारत में अधिवसित किसी व्यक्ति का है, चाहे वह कहीं भी हो, और उसमें स्थित व्यक्तियों को भी, लागू होता है ।
2. निर्वचन-(1) इस अधिनियम में, जब तक कि कोई बात विषय या सन्दर्भ में विरुद्ध न हो,
(क) अधिसूचित क्षेत्र" से समुद्रीय क्षेत्र का कोई भाग और उस क्षेत्र से लगे हुए समुद्र तट अभिप्रेत हैं जिन्हें धारा 3 के अधीन अधिसूचना द्वारा इस निमित्त विनिर्दिष्ट किया जाए;
(ख) विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है;
(ग) सागर-दिशा तोप अभ्यास" से सागर-दिशा तोप अभ्यास या सागर-दिशा तटीय गोलाबारी अभिप्रेत है, चाहे वह राज्यक्षेत्र समुद्र के अन्दर हो या बाहर, और इसके अन्तर्गत वायु आयुध अभ्यास आता है;
(घ) जलयान" के अन्तर्गत कोई जहाज, नाव, देशी नाव या किसी अन्य प्रकार का जलयान आता है ।
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[3. केन्द्रीय सरकार की सागर-दिशा तोप अभ्यास को प्राधिकृत करने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, ऐसे क्षेत्र पर, जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किया जाए, किसी या किन्हीं विनिर्दिष्ट कालावधि या कालावधियों के दौरान सागर-दिशा तोप अभ्यास को प्राधिकृत कर सकेगी:
परन्तु राजपत्र में ऐसी अधिसूचना के प्रकाशन की तारीख और सागर-दिशा तोप अभ्यास करने की तारीख के बीच कम से कम चौदह दिन का अन्तराल होगा ।
(2) केन्द्रीय सरकार, उपधारा (1) के अधीन अधिसूचना के प्रकाशन के पश्चात् यथाशीघ्र उसका सार,
(क) अधिसूचना में विनिर्दिष्ट क्षेत्र में परिचालित और उस क्षेत्र में सामान्यतः समझी जाने वाली भाषा के किसी समाचारपत्र में ; और
(ख) ऐसी अन्य रीति से, जो विहित की जाए,
प्रकाशित कराएगी ।
(3) यदि यह प्रश्न उत्पन्न होता है कि क्या उपधारा (1) के अधीन अधिसूचना का उपधारा (2) द्वारा यथा अपेक्षित सार प्रकाशित हुआ था तो उस जिले के, जिसमें अधिसूचित क्षेत्र स्थित है, कलक्टर का यह प्रमाणपत्र निश्चायक होगा कि अधिसूचना का सार इस प्रकार प्रकाशित हुआ था ।
3क. प्रत्यायोजन की शक्ति-केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, यह निदेश दे सकेगी कि धारा 3 के अधीन अधिसूचना जारी करने की शक्ति का प्रयोग, ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए, यदि कोई हों, जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाएं, ऐसी राज्य सरकार द्वारा भी किया जाएगा जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाए ।]
4. सागर-दिशा तोप अभ्यास के प्रयोजनों के लिए प्रयोक्तव्य शक्तियां-(1) धारा 3 की उपधारा (1) के अधीन अधिसूचना जारी करने के पश्चात् ऐसे व्यक्ति, जो सागर-दिशा तोप अभ्यास में लगे बलों में सम्मिलित हैं, अधिसूचित क्षेत्र के अन्दर और ऐसी कालावधि या कालावधियों के दौरान, जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट हैं,
(क) अधिसूचित क्षेत्र या उसके किसी भाग के उपयोग को, किसी जलयान द्वारा समुद्रीय क्षेत्र के किसी भाग का उपयोग भी सम्मिलित है, प्रतिषिद्ध करते हुए या निर्बन्धित करते हुए निदेश दे सकेंगे और ऐसे उपाय भी कर सकेंगे जो यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक हों कि कोई अप्राधिकृत्त व्यक्ति ऐसे अभ्यास के दौरान, यथास्थिति, ऐसे अधिसूचित क्षेत्र या उसके किसी भाग में न तो प्रवेश करे, न उस पर से गुजरे और न उसमें रहे, और
(ख) घातक प्रक्षेपणास्त्र से सागर-दिशा तोप अभ्यास कर सकेंगे ।
(2) ऐसे अभ्यास में लगे हुए बलों का कमान आफिसर अधिसूचित क्षेत्र के किसी भाग को संकट-क्षेत्र घोषित कर सकेगा और तब कलक्टर, उस अभ्यास में लगे बलों के कमान आफिसर द्वारा किए गए आवेदन पर ऐसे संकट-क्षेत्र में उन समयों के दौरान, जब घातक प्रक्षेपणास्त्र छोड़े जा रहे हैं या जीवन या सम्पत्ति को खतरा है, किसी व्यक्ति, सम्पत्ति या जलयान के प्रवेश को निषिद्ध करेगा और वहां से उनको सम्बद्ध नौसैनिक या सैनिक प्राधिकारियों की सहायता से हटवाएगा ।
5. प्रतिकर-जबकि धारा 3 के अधीन जारी की गई अधिसूचना के कारण किसी अधिसूचित क्षेत्र में सागर-दिशा तोप अभ्यास करने के लिए प्राधिकृत किया जाता है तब, किसी व्यक्ति, सम्पत्ति, अधिकारों या विशेषाधिकारों की संरक्षा के लिए युक्तियुक्त रीति से किए गए व्ययों सहित, ऐसे अभ्यास के कारण उस व्यक्ति या सम्पत्ति को होने वाले नुकसान के लिए या उन अधिकारों या विशेषाधिकारों में हस्तक्षेप के लिए प्रतिकर संदेय होगा ।
6. प्रतिकर निर्धारण की पद्धति-(1) धारा 5 के अधीन संदेय किसी प्रतिकर की रकम अवधारित करने के प्रयोजन के लिए उस जिले का कलक्टर, जिसमें कोई अधिसूचित क्षेत्र स्थित है, अभ्यास में लगे बलों के साथ रहने के लिए एक या एक से अधिक राजस्व अधिकारियों को प्रतिनियुक्त करेगा ।
(2) इस प्रकार प्रतिनियुक्त राजस्व अधिकारी धारा 5 के अधीन प्रतिकर के सभी दावों पर विचार करेगा और स्थानीय अन्वेषण के आधार पर और दावेदार को सुनवाई का अवसर देने के पश्चात् प्रतिकर की ऐसी रकम, यदि कोई हो, अवधारित करेगा, जो प्रत्येक मामले में दी जाएगी; और वह इस प्रकार संदेय अवधारित प्रतिकर, दावेदार को तत्काल संवितरित करेगा ।
(3) उपधारा (2) के अधीन संदेय प्रतिकर के अन्तर्गत ऐसा प्रतिकर भी है जो किसी अधिसूचित क्षेत्र के किसी भाग से, जिसे संकट-क्षेत्र घोषित किया गया है, किसी व्यक्ति, सम्पत्ति या जलयान को हटाने के लिए और ऐसे हटाए जाने के दौरान उठाए गए किसी नुकसान के लिए हो । इससे पूर्व कि हटाने की कार्रवाई की जाए हटाए जाने के लिए प्रतिकर तत्काल वहीं ऐसी दर पर दिया जाएगा जो न्यूनतम विहित दरों से कम न हो ।
(4) कोई भी दावेदार जो उसे प्रतिकर दिए जाने के लिए राजस्व अधिकारी द्वारा इन्कार कर दिए जाने से, या राजस्व अधिकारी द्वारा उसे दिलाए जाने वाले प्रतिकर की रकम से, असन्तुष्ट है, राजस्व अधिकारी के विनिश्चय की अपने को सूचना मिलने से एक मास के अन्दर, किसी भी समय उस विनिश्चय के विरुद्ध कलक्टर को अपील कर सकेगा ।
(5) ऐसी अपील में कलक्टर का विनिश्चय अन्तिम होगा और उस धारा के अधीन कलक्टर द्वारा विनिश्चित किसी बात के बारे में किसी सिविल न्यायालय में कोई वाद नहीं होगा ।
(6) इस धारा के अधीन राजस्व अधिकारी या कलक्टर के समक्ष फाइल किए गए किसी दावे, सूचना, अपील, आवेदन या दस्तावेज के सम्बन्ध में कोई शुल्क प्रभारित नहीं होगा ।
7. अपराध-यदि धारा 3 की उपधारा (1) के अधीन जारी की गई किसी अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किसी अधिसूचित क्षेत्र में और किसी कालावधि के दौरान कोई व्यक्ति
(क) सागर-दिशा तोप अभ्यास करने में जानते हुए बाधा डालेगा या हस्तक्षेप करेगा, अथवा
(ख) सम्यक् प्राधिकार के बिना किसी शिविर में प्रवेश करेगा या उसमें रहेगा, अथवा
(ग) सम्यक् प्राधिकार के बिना किसी क्षेत्र में, जिसे संकट-क्षेत्र घोषित किया गया है, ऐसे समय प्रवेश करेगा या रहेगा जबकि उसमें प्रवेश करना निषिद्ध किया गया है, अथवा
(घ) सम्यक् प्रधिकार के बिना किसी ऐसे ध्वज या चिह्न या निशाने या बोया या साधित्र में, जो सागर-दिशा तोप अभ्यास के प्रयोजनों के लिए प्रयुक्त होता है, हस्तक्षेप करेगा,
तो वह जुर्माने से, जो बीस रुपए तक का हो सकेगा, या कारावास से, जो पन्द्रह दिन का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डनीय होगा ।
8. इस अधिनियम के अधीन की गई कार्रवाई के लिए संरक्षण-(1) कोई भी वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही किसी भी ऐसी बात के बारे में, जो इस अधिनियम या तद्धीन बनाए गए नियमों के अनुसरण में सद्भावपूर्वक की गई हो या की जाने के लिए आशयित हो, किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध न होगी ।
(2) इस अधिनियम में यथा अन्यथा उपबन्धित के सिवाय, कोई वाद या अन्य विधिक कार्यवाही किसी ऐसे नुकसान के बारे में जो इस अधिनियम या तद्धीन बनाए गए नियमों के अनुसरण में सद्भावपूर्वक की गई किसी बात से कारित हुआ है या की जाने के लिए आशयित किसी बात से जिसका कारित होना सम्भाव्य है, केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार के विरुद्ध न होगी ।
[9. नियम बनाने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार इस अधिनियम के उपबन्धों को प्रभावी करने के लिए नियम, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, बना सकेगी, और विभिन्न राज्यों के लिए या उनके विभिन्न क्षेत्रों के लिए विभिन्न नियम बनाए जा सकते हैं ।
(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम निम्नलिखित में से सभी या किन्हीं विषयों के लिए उपबन्ध कर सकते हैं, अर्थात्ः
(क) वह रीति, जिससे धारा 3 के अधीन अधिसूचना का सार प्रकाशित किया जा सकेगा ;
(ख) इस अधिनियम के अधीन सागर-दिशा तोप अभ्यास के लिए अधिसूचित क्षेत्र के उपयोग का ऐसी रीति से विनियमन, जिससे जनता की खतरे से रक्षा हो और प्रभावित क्षेत्र के निवासियों को न्यूनतम असुविधा पहुंचाते हुए अभ्यास किया जा सके ;
(ग) धारा 6 की उपधारा (3) के अधीन संदेय प्रतिकर के लिए न्यूनतम दरें विहित करना, और साधारणतया प्रतिकर का दावा करने, प्रतिकर देने वाले प्राधिकारियों द्वारा अनुसरित की जाने वाली प्रक्रिया, दावों के शीघ्र निपटाए जाने, और प्रतिकर के मूल अधिनिर्णयों से अपीलें फाइल करने के सम्बन्ध में व्यवस्था ;
(घ) इस अधिनियम के अधीन अधिनिर्णीत की जाने वाली प्रतिकर की रकम के निर्धारण में अनुसरित किए जाने वाले सिद्धांत ;
(ङ) कोई अन्य विषय, जो विहित किया जाना है या विहित किया जाए ।
(3) इस धारा के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम, बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किन्तु नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से पूर्व उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।]
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