अनुसूचित क्षेत्र (विधियों की एकरूपता) अधिनियम, 1951
(1951 का अधिनियम संख्यांक 37)
[23 जून, 1951]
अनुसूचित क्षेत्रों में प्रवृत्त कतिपय विधियों और आसाम राज्य
के दरंग और लखीमपुर जिलों में प्रवृत्त विधियों
में एकरूपता लाने के लिए
अधिनियम
संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित किया जाता है :-
1. संक्षिप्त नाम और प्रारम्भ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम अनुसूचित क्षेत्र (विधियों की एकरूपता) अधिनियम, 1951 है ।
(2) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा जिसे केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे ।
2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, -
(क) नियत दिन" से इस अधिनियम के प्रवृत्त होने के लिए धारा 1 की उपधारा (2) के अधीन नियत की गई तारीख अभिप्रेत है;
(ख) विधि" से किसी अधिनियम, अध्यादेश, विनियम, नियम, आदेश या उपविधि का उतना अंश अभिप्रेत है जितने का संबंध संविधान की सप्तम अनुसूची की सूची-1 और सूची-3 में प्रगणित विषयों में से किसी से है;
(ग) अनुसूचित क्षेत्र" से अनुसूची में विनिर्दिष्ट क्षेत्र अभिप्रेत है ।
3. विधियों की एकरूपता-(1) समस्त विधियां, जिनका नियत दिन के ठीक पहले अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार है या जो वहां प्रवृत्त हैं, उक्त दिन को अनुसूचित क्षेत्रों में प्रवृत्त न रह जाएंगी, सिवाय उन बातों के जो उक्त दिन के पहले की गई थीं या नहीं की गई थीं, और शंकाओं को दूर करने के लिए यह घोषित किया जाता है कि साधारण खण्ड अधिनियम, 1897 (1897 का 10) की धारा 6 ऐसे प्रवृत्त न रह जाने के सम्बन्ध में उसी प्रकार लागू होगी जिस प्रकार वह केन्द्रीय अधिनियम द्वारा किसी अधिनियमिति के निरसन के सम्बन्ध में लागू होती है ।
(2) उन समस्त विधियों का, जिनका नियत दिन के ठीक पहले आसाम राज्य के दरंग जिले पर विस्तार है या जो वहां प्रवृत्त हैं, अनुसूची के पैरा 1 में विनिर्दिष्ट क्षेत्रों पर, उक्त दिन से, यथास्थिति, विस्तार होगा या वे वहां प्रवृत्त होंगी ।
(3) उन समस्त विधियों का, जिनका नियत दिन के ठीक पहले आसाम राज्य के लखीमपुर जिले पर विस्तार है या जो वहां प्रवृत्त हैं, उक्त अनुसूची के पैरा 2 और पैरा 3 में विनिर्दिष्ट क्षेत्रों पर उक्त दिन से, यथास्थिति, विस्तार होगा या वे वहां प्रवृत्त होंगी ।
4. संक्रमणकालीन उपबन्ध-धारा 3 में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, केन्द्रीय सरकार या आसाम राज्य की सरकार, आदेश द्वारा, यह निदेश दे सकेगी कि कोई विधि, जो अनुसूचित क्षेत्रों में नियत दिन के ठीक पहले प्रवृत्त थी, उन क्षेत्रों में या उनके किसी विनिर्दिष्ट भाग में, नियत दिन के बारह मास से अनधिक उतनी अवधि के दौरान, जितनी आदेश में विनिर्दिष्ट हो, प्रवृत्त बनी रही समझी जाएंगी और उसी प्रकार यह अतिरिक्त निदेश भी दे सकेगी कि कोई विधि, जिसका अनुसूचित क्षेत्रों पर नियत दिन को विस्तार होता या जो वहां प्रवृत्त होती, उन क्षेत्रों में या उनके किसी विनिर्दिष्ट भाग में विस्तारित या प्रवृत्त हुई नहीं समझी जाएगी ।
5. व्यावृत्ति-धारा 3 में किसी बात के होते हुए भी, उन समस्त पक्षकारों के बीच, जो सभी संविधान (अनुसूचित जनजाति) आदेश, 1950 की अनुसूची के भाग 1-आसाम की मद 2 में विनिर्दिष्ट अनुसूचित जनजातियों के हैं या ऐसी अन्य जनजाति या जनजातियों के हैं जो इस निमित्त विनिर्दिष्ट की जाएं, समस्त वादों, मामलों और अन्य विधिक कार्यवाहियों का आसाम फ्रन्टियर (ऐडमिनिस्ट्रेशन आफ जस्टिस) रेगुलेशन, 1945 (1945 का रेगुलेशन सं० 1) के अधीन ऐसे विचारण किया जाएगा और विचारण किया जाता रहेगा मानो यह अधिनियम पारित नहीं हुआ था ।
6. कठिनाइयां दूर करने के लिए उपबन्ध-यदि धारा 3 के अधीन एक विधि या विधि-समूह से किसी अन्य विधि या विधि-समूह में संक्रमण के सम्बन्ध में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है तो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचित आदेश द्वारा, उस कठिनाई को दूर करने के लिए ऐसे उपबन्ध बना सकेगी जैसे वह ठीक समझे ।
(अनुसूची)
[धारा 2(ग) देखिए]
1. आसाम सरकार की अधिसूचना संख्या 6778-ए० पी० तारीख 2 नवम्बर, 1934 में यथापरिभाषित बालिपारा सीमान्त भू-भाग की अन्दर की लाइन के साथ-साथ बालिपारा सीमान्त भू-भाग में सम्मिलित क्षेत्र का उतना भाग जितना पूर्व की ओर बरनदी पर स्तम्भ सं० 98 पर कामरूप जिले की पूर्वी सीमा से खींची गई रेखा के भीतर है जब तक कि यह लखीमपुर जिले की सीमा तक नहीं पहुंच जाती; वहां से लखीमपुर जिले की पश्चिमी सीमा के साथ-साथ दक्षिण की तरफ उस बिन्दु तक जहां यह दरंग जिले की सीमा से मिलती है; वहां से दरंग जिले की उत्तरी सीमा के साथ-साथ पश्चिम की ओर उस बिन्दु तक जहां यह कामरूप जिले की पूर्वी सीमा से मिलती है; वहां से दरंग जिले की उत्तरी सीमा के साथ-साथ पश्चिम की ओर उस बिन्दु तक जहां यह कामरूप जिले की पूर्वी सीमा से मिलती है; वहां से इस सीमा के साथ-साथ उत्तर की तरफ प्रारम्भ-स्थल तक ।
2. आबर पहाड़ियों और मिछिमी पहाड़ियों के जिलों (शदिया सीमान्त भू-भाग) में सम्मिलित क्षेत्र का उतना भाग जितना दीपा पर 498 बिन्दु से एक सीध में खींची गई रेखा से रेमी नदी की नामरहित धारा के जंकशन तक जो रेमी और टोदिकरंग नदियों के जंकशन से दक्षिण-पूर्व में एक मील पर है; वहां से एक सीधी रेखा में कबो-पासीघाट मार्ग पर कबो से मील निशान पत्थर संख्या 4 के बिन्दु तक; वहां से एक सीधी रेखा में सिसरी और गांगो नदियों के जंकशन तक; वहां से गांगो नदी के बाएं किनारे के साथ-साथ दिबंग नदी के साथ इसके जंकशन तक; वहांसे एक सीधी रेखा में हजीनगादी और कुंडिल नदी के संगम तक (कुंडिल नदी के 492 बिन्दु के उत्तर में आधा मील के लगभग); वहां से एक सीधी रेखा में टीपू बालिजान नदी के दाहिने किनारे पर 625 बिन्दु तक (हरू नदी और बालिजान के संगम के उत्तर में चार मील के लगभग); वहां से बालिजान नदी के नीचे की तरु इसके दाहिने किनारे के साथ-साथ लोहित नदी के साथ इसके संगम तक; वहां से लोहित नदी के पार और इसके बाएं किनारे पर नीचे की तरफ इसके दाहिने किनारे के साथ-साथ लोहित नदी के साथ इसके संगम तक; वहां से लोहित नदी के पार और इसके बाएं किनारे पर नीचे की तरफ नव दिहिंग मुख तक; वहां से नव दिहिंग नदी के दाहिने किनारे पर ऊपर की तरफ डिराक नदी के साथ इसके संगम तक; वहां से डिराक नदी के बाएं किनारे से ऊपर की तरफ वहां यह जहां तक शदिया सीमान्त भू-भाग और लखीमपुर जिले के बीच की सीमा से मिलती है; वहां से लखीमपुर जिले की उत्तरी सीमा के साथ-साथ पश्चिम की ओर प्रारम्भ स्थल तक ।
3. टिराप सीमान्त भू-भाग में सम्मिलित क्षेत्र का उतना भाग जितना बूढ़ी दिहिंग नदी के दाहिने किनारे पर ऊपर की तरफ करिया पानी और बूढ़ी दिहिंग नदियों के संगम से नाफुक और नामचिक नदियों के संगम तक खींची गई रेखा के भीतर पड़ता है; वहां से नामचिक नदी के बाएं किनारे के ऊपर की तरफ कथांग नदी के साथ इसके संगम तक; वहां से कथांग हका के ऊपर की तरफ लाखा हका के साथ इसके जंकशन तक; वहां से लाखा हका के ऊपर की तरफ से इसके उद्गम तक और वहां से 894 बिन्दु तक; वहां से दक्षिण-पश्चिम की दिशा में नामरहित धारा के नीचे की तरफ, जो 894 बिन्दु से प्रारम्भ होती है, टिराप नदी के साथ इसके जंकशन तक; वहां से टिराप नदी से इसके बाएं किनारे से ऊपर की तरफ लुंगकन पर्वत श्रेणी पर 2438 की उंचाई के पूर्व के बिन्दु तक; और वहां से पश्चिम में 2438 की उंचाई तक; वहां से उत्तर-पश्चिम दिशा में कपंग वा धारा के नीचे की ओर तिपंग नदी के साथ उसके जंकशन तक; वहां से तिपंग नदी से नीचे की तरफ, कुंकल वा के साथ इसके जंकशन तक; वहां से दक्षिण-पश्चिम की दिशा में टुटिंग टक कान की पर्वत श्रेणी की रिज के साथ-साथ इस पर्वत श्रेणी और लोम्पी पर्वत श्रेणी के बीच सैडिल तक; वहां से उत्तर-पश्चिम की दिशा में नामरहित धारा के नीचे की तरफ, जो इस सैडिल से प्रारम्भ होती हैं, लाखापानी या तेई धारा के साथ इसके जंकशन तक; वहां से लाखापानी धारा से नीचे की तरफ टिराप नदी के साथ इसके जंकशन तक; वहां से टिराप नदी के नीचे की तरफ बूढ़ी दिहिंग नदी के साथ इसके जंकशन तक; वहां से बूढ़ी दिहिंग नदी के नीचे की तरफ मनमाउजान के साथ इसके जंकशन तक; वहां से मनमाउजान और मंगंगखासी धारा के ऊपर वहां तक जहां तक यह अपर दिहिंग आरक्षित वन की पूर्वी सीमा बनाती है; वहां से अपर दिहिंग आरक्षित वन (पूर्व ब्लाक) की पश्चिमी सीमा के साथ-साथ उस बिन्दु तक जहां यह पेंगरी हका से मिलती है; वहां से पेंगरी हका के नीचे की तरफ बूढ़ी दिहिंग नदी तक और बूढ़ी दिहिंग नदी के ऊपर की ओर प्रारम्भ-स्थल तक ।
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