उच्च न्यायालय (मुद्रा) अधिनियम, 1950
(1950 का अधिनियम संख्यांक 7)
[27 फरवरी, 1950]
राज्यों में उच्च न्यायालयों द्वारा समान प्ररूप और डिजाइन
की मुद्राओं के उपयोग के लिए उपबन्ध
करने के लिए
अधिनियम
संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियम हो :-
1. संक्षिप्त नाम-इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम उच्च न्यायालय (मुद्रा) अधिनियम, 1950 है ।
2. उच्च न्यायालय की मुद्रा-(1) प्रत्येक [राज्य] के उच्च न्यायालय की सुविधाजनक स्थानों पर निम्नलिखित उत्कीर्ण, लेख अर्थात्” . . . . . . . स्थित (या. . . . . . . . के) उच्च न्यायालय की मुद्राञ्ज् जिसके पश्चात्, यथास्थिति, उच्च न्यायालय के स्थान का या राज्य का नाम और देवनागरी लिपि में “सत्यमेव जयते”, से मुख्य आकृति के नीचे या घिरे हुए लेबल के अन्दर अशोक स्तंभ की आकृति या छाप वाली एक मुद्रा होगी और वह आवश्यकतानुसार उसका उपयोग करेगा ।
(2) प्रत्येक [संघ राज्यक्षेत्र] के न्यायिक आयुक्त न्यायालय की, *** राज्य के उच्च न्यायालय की मुद्रा के समान मुद्रा होगी, किन्तु प्रथम उत्कीर्ण लेख” .............के लिए न्यायिक आयुक्त न्यायालय की मुद्रा” होगा जिसके पश्चात् [संघ राज्यक्षेत्र का नाम] होगा, और वह आवश्यकतानुसार उसका उपयोग करेगा ।
(3) इस अधिनियम के उपबन्ध, किसी लेटर्स पेटेन्ट, आदेश, निदेश या उच्च न्यायालयों द्वारा मुद्राओं के उपोयग के बारे में किसी अन्य विधि के प्रतिकूल या उससे असंगत किसी उपबन्ध को अतिष्ठित करेंगे ।
3. [1950 के अध्यादेश 13 का निरसनट-निरसन और संशोधन अधिनियम, 1957 (1957 का 36) की धारा 2 और अनुसूची 1 द्वारा निरसित ।
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