लेडी हार्डिंग आयुर्विज्ञान महाविद्यालय और अस्पताल
(अर्जन) और प्रकीर्ण उपबंध अधिनियम, 1977
(1977 का अधिनियम संख्यांक 34)
[3 दिसम्बर, 1977]
दिल्ली संघ राज्यक्षेत्र में महिलाओं के लिए आयुर्विज्ञान की उच्च शिक्षा
के लिए अधिक अच्छी सुविधाएं तथा महिलाओं और बच्चों के लिए
चिकित्सीय सुविधाएं सुनिश्चित करने की दृष्टि से लेडी
हार्डिंग आयुर्विज्ञान महाविद्यालय और अस्पताल के
अर्जन करने का और कलावती शरण अस्पताल
के प्रबन्ध का और उनसे सम्बन्धित या
उनके आनुषंगिक विषयों का
उपबंध करने के लिए
अधिनियम
भारत गणराज्य के अट्ठाईसवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो: -
अध्याय 1
प्रारम्भिक
1. संक्षिप्त नाम और प्रारम्भ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम लेडी हार्डिंग आयुर्विज्ञान महाविद्यालय और अस्पताल (अर्जन) और प्रकीर्ण उपबंध अधिनियम, 1977 है ।
(2) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे ।
2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, -
(क) नियत दिन" से वह तारीख अभिप्रेत है जिसको यह अधिनियम प्रवृत्त होता है ;
(ख) प्रशासन बोर्ड" से स्कीम के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा गठित प्रशासन बोर्ड अभिप्रेत है;
(ग) प्रबन्ध बोर्ड" से केन्द्रीय सरकार द्वारा गठित कलावती शरण अस्पताल का प्रबन्ध बोर्ड अभिप्रेत है;
(घ) निधि" से स्कीम द्वारा स्थापित महिलाओं और बच्चों के लिए लेडी हार्डिंग अस्पताल, दिल्ली, निधि अभिप्रेत है;
(ङ) कलावती शरण अस्तपाल" से बच्चों के लिए कलावती शरण अस्पताल, नई दिल्ली के नाम से ज्ञात संस्था और साथ ही ऐसे औषधालय जो उससे संलग्न हैं और उसके सम्बन्ध में प्रयोग किए जाते हैं, अभिप्रेत हैं और इसके अन्तर्गत ऐसी प्रयोगशालाएं और पुस्तकालय भी हैं जो उक्त सभी अस्पताल के सम्बन्ध में या उसके उपसाधा
न या अनुलग्न के रूप में प्रयोग किए जाते हैं;
(च) लेडी हार्डिंग आयुर्विज्ञान महाविद्यालय और अस्पताल" से महिलाओं के लिए लेडी हार्डिंग आयुर्विज्ञान महाविद्यालय, नई दिल्ली तथा महिलाओं और बच्चों के लिए लेडी हार्डिंग अस्पताल, नई दिल्ली के नाम से ज्ञात संस्थाएं और साथ ही ऐसे औषधालय जो उनसे संलग्न हैं और उनके सम्बन्ध में प्रयोग किए जाते हैं, अभिप्रेत हैं, और इनके अन्तर्गत ऐसे सभी अध्यापन-कक्ष, संग्रहालय, प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय, छात्रावास और बोर्डिंग हाउस भी हैं जो उक्त महाविद्यालय या अस्पताल के सम्बन्ध में या उसके उपसाधन या अनुलग्न के रूप में प्रयोग किए जाते हैं ;
(छ) स्कीम" से निधि के प्रशासन के लिए ऐसी स्कीम अभिप्रेत है जो पूर्त विन्यास अधिनियम, 1890 (1890 का 6) की धारा 5 की उपधारा (1) के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा बनाई गई है और जो भारत सरकार के भूतपूर्व स्वास्थ्य मंत्रालय की अधिसूचना सं० फा० 4-77/56-एम० 2, तारीख 14 मार्च, 1957 और अधिसूचना सं० फा० 4-77/56-एम० 2, तारीख 17 अप्रैल, 1957 द्वारा संशोधित भारत सरकार के भूतपूर्व स्वास्थ्य मंत्रालय की अधिसूचना सं० फा० 4-3 (1)/53-एम० 1, तारीख 12 जून, 1953 के साथ प्रकाशित की गई थी ;
(ज) कोषपाल" से पूर्त विन्यास अधिनियम, 1890 (1890 का 6) के अधीन नियुक्त भारतीय पूर्त विन्यास कोषपाल अभिप्रेत है ।
अध्याय 2
लेडी हार्डिंग आयुर्विज्ञान महाविद्यालय और अस्पताल का अर्जन
3. लेडी हार्डिंग आयुर्विज्ञान महाविद्यालय और अस्पताल का केन्द्रीय सरकार में निहित होना-(1) नियत दिन को, लेडी हार्डिंग आयुर्विज्ञान महाविद्यालय और अस्पताल और साथ ही, -
(क) ऐसी सभी भूमि जिन पर लेडी हार्डिंग आयुर्विज्ञान महाविद्यालय और अस्पताल बना हुआ है और उससे अनुलग्न सभी अन्य भूमि और ऐसी भूमि पर के सभी भवन, परिनिर्माण और फिक्सचर;
(ख) लेडी हार्डिंग आयुर्विज्ञान महाविद्यालय और अस्पताल का सभी फर्नीचर, उपस्कर, स्टोर, उपकरण और साधित्र, ओषधि, धन और अन्य आस्तियां;
(ग) लेडी हार्डिंग आयुर्विज्ञान महाविद्यालय और अस्पताल से संबंधित सभी अन्य जंगम और स्थावर सम्पत्ति और आस्तियां, जिनके अन्तर्गत पट्टे भी हैं चाहे वे कोषपाल या प्रशासन बोर्ड में अथवा किसी अन्य व्यक्ति में निहित हों ; और सभी अधिकार, शक्ति, प्राधिकार और विशेषाधिकार, रोकड़बाकी, आरक्षित निधि, विनिधान तथा ऐसी सम्पत्ति में या उसके संबंध में या उससे उद्भूत होने वाले ऐसे सभी अन्य अधिकार और हित जो नियत दिन के ठीक पूर्व कोषपाल या प्रशासन बोर्ड या किसी ऐसे अन्य व्यक्ति के, जो लेडी हार्डिंग आयुर्विज्ञान महाविद्यालय और अस्पताल के कामकाज के प्रबन्ध का भारसाधक था स्वामित्व, कब्जे, शक्ति या नियंत्रण में थे ; और
(घ) लेडी हार्डिंग आयुर्विज्ञान महाविद्यालय और अस्पताल द्वारा या उसकी ओर से लिए गए सभी उधार और उसके सम्बन्ध में उपगत सभी प्रकार के सभी अन्य दायित्व और बाध्यताएं जो नियत दिन को अस्तित्व में हों,
केन्द्रीय सरकार को अन्तरित हो जाएंगी और उसमें पूर्ण रूप में निहित हो जाएंगी ।
(2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट सभी या किन्हीं सम्पत्ति और आस्तियों के सम्बन्ध में दान, विन्यास, वसीयत या न्यास के प्रत्येक विलेख अथवा अन्य दस्तावेज के बारे में यह अर्थ लगाया जाएगा मानो वह नियत दिन से ही केन्द्रीय सरकार के पक्ष में किया गया था या निष्पादित था ।
(3) इस अधिनियम के अन्य उपबन्धों के अधीन रहते हुए, उपधारा (1) में निर्दिष्ट कोई सम्पत्ति जो उस उपधारा के उपबन्धों के आधार पर केन्द्रीय सरकार में निहित हो गई है, इस प्रकार निहित होने के बल पर, उस पर प्रभाव डालने वाले किसी न्यास, बाध्यता, बन्धक, भार, धारणाधिकार और अन्य विल्लंगमों में मुक्त और उन्मोचित हो जाएगी और ऐसी सम्पत्ति के प्रयोग को किसी रीति से निर्बन्धित करने वाली किसी न्यायालय या अधिकरण की किसी कुर्की, व्यादेश या किसी डिक्री या आदेश के बारे में यह समझा जाएगा कि वह वापस ले लिया गया है ।
(4) इस अधिनियम में अन्तर्विष्ट अन्य उपबन्धों के अधीन रहते हुए, लेडी हार्डिंग आयुर्विज्ञान महाविद्यालय और अस्पताल के सम्बन्ध में कोषपाल या प्रशासन बोर्ड या किसी अन्य व्यक्ति द्वारा या उनके विरुद्ध कोई कार्यवाही या वादहेतुक, जो नियत दिन के ठीक पूर्व लम्बित या विद्यमान था, नियत दिन से ही, केन्द्रीय सरकार द्वारा या उसके विरुद्ध उसी प्रकार चालू रखा जा सकेगा और प्रवर्तित किया जा सकेगा जिस प्रकार उसे कोषपाल या प्रशासन बोर्ड या ऐसे अन्य व्यक्ति द्वारा या उसके विरुद्ध उस दशा में प्रवर्तित किया जा सकता था जिसमें यदि यह अधिनियम अधिनियमित ही नहीं हुआ होता और उसे कोषपाल या प्रशासन बोर्ड या ऐसे अन्य व्यक्ति द्वारा या उसके विरुद्ध प्रवर्तित नहीं किया जाएगा ।
4. रकम का संदाय-(1) धारा 3 के अधीन, लेडी हार्डिंग आयुर्विज्ञान महाविद्यालय और अस्पताल का केन्द्रीय सरकार को अन्तरण और उसमें निहित होने के लिए कोषपाल को केन्द्रीय सरकार, एक लाख रुपए की राशि के बराबर रकम नकद रूप में देगी ।
(2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट, रकम का संदाय नियत दिन से तीन मास के भीतर (जिसे इसके पश्चात् इस धारा में विनिर्दिष्ट अवधि कहा गया है) किया जाएगा ।
(3) उपधारा (1) में निर्दिष्ट रकम पर, यदि उसका विनिर्दिष्ट अवधि के भीतर संदाय नहीं किया जाता है तो, विनिर्दिष्ट अवधि की समाप्ति की तारीख से उसके संदाय की तारीख तक चार प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से ब्याज दिया जाएगा ।
5. लेडी हार्डिंग आयुर्विज्ञान महाविद्यालय और अस्पताल का प्रशासन सरकारी संस्था के रूप में किया जाना-नियत दिन से ही, लेडी हार्डिंग आयुर्विज्ञान महाविद्यालय और अस्पताल का प्रशासन केन्द्रीय सरकार द्वारा सरकारी संस्था में रूप में किया जाएगा और धारा 3 के अधीन उसको अंतरित और उसमें निहित संपत्ति का प्रशासन करते समय स्कीम में विनिर्दिष्ट प्रयोजनों का ध्यान रखा जाएगा ।
6. प्रशासन बोर्ड को 1882 के अधिनियम 2 का लागू होना-शंकाओं को दूर करने के लिए यह घोषित किया जाता है कि इस अधिनियम की किसी बात के बारे में यह नहीं समझा जाएगा कि वह नियत दिन के पूर्व की किसी अवधि के दौरान उसके द्वारा की गई किसी बात या लोप के संबंध में भारतीय न्यास अधिनियम, 1882 के उपबंधों के अधीन प्रशासन बोर्ड या उसके किसी सदस्य को प्रोद्भूत किसी अधिकार को या उसके द्वारा उपगत किसी दायित्व को लागू होती है ।
7. स्कीम के प्रयोजनों के लिए रकम का धारित किया जाना-(1) धारा 4 के अधीन संदत्त रकम कोषपाल में निहित होगी और कोषपाल उसे उसी रीति से धारण करेगा जिससे उसमें निहित निधि नियत दिन के ठीक पूर्व उसके द्वारा धारित थी ।
(2) प्रशासन बोर्ड धारा 4 के अधीन कोषपाल को संदत्त रकम का प्रशासन उसी रीति से करेगा जिससे निधि का उसने इस प्रकार प्रशासन किया था मानो ऐसी रकम निधि थी ।
अध्याय 3
कलावती शरण अस्पताल का प्रबन्ध
8. कलावती शरण अस्पताल का प्रबंध सरकारी संस्था के रूप में किया जाना-(1) किसी संविदा या लिखत में किसी प्रतिकूल बात के होते हुए भी, कलावती शरण अस्पताल का प्रबन्ध नियत दिन से ही केन्द्रीय सरकार द्वारा सरकारी संस्था के रूप में किया जाएगा ।
(2) कलावती शरण अस्पताल का सरकारी संस्था के रूप में प्रबन्ध करते समय भारत के राष्ट्रपति के पक्ष में तारीख 8 जून, 1954 को श्री अशोक शरण द्वारा और तारीख 8 जून, 1954 को श्री रघुबीर शरण द्वारा निष्पादित करार के उन प्रयोजनों को ध्यान में रखा जाएगा जिनके अनुसरण में वह अस्पताल स्थापित किया गया था ।
(3) प्रबंध बोर्ड का विघटन नियत दिन से ही हो जाएगा ।
अध्याय 4
प्रकीर्ण
9. अधिनियम का अन्य सभी अधिनियमितियों पर अध्यारोही होना-इस अधिनियम के उपबंध, उस समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में या इस अधिनियम से भिन्न किसी अन्य विधि के आधार पर प्रभावी किसी लिखत में या किसी न्यायालय, अधिकरण, या प्राधिकरण की किसी डिक्री या आदेश में उनसे असंगत किसी बात के होते हुए भी, प्रभावी होंगे ।
10. लेडी हार्डिंग आयुर्विज्ञान महाविद्यालय और अस्पताल तथा कलावती शरण अस्पताल के अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों के संबंध में उपबंध-(1) प्रत्येक अधिकारी या अन्य कर्मचारी जो नियत दिन के ठीक पूर्व, यथास्थिति, लेडी हार्डिंग आयुर्विज्ञान महाविद्यालय और अस्पताल या कलावती शरण अस्पताल में या उसके कामकाज के संबंध में नियोजित है, नियत दिन से ही, केन्द्रीय सरकार का, यथास्थिति, अधिकारी या अन्य कर्मचारी हो जाएगा और उसी अवधि तक, उसी पारिश्रमिक पर और उन्हीं निबंधनों और शर्तों पर तथा पेंशन, उपदान और अन्य बातों के बारे में वैसे ही अधिकारों और विशेषाधिकारों के साथ अपना पद धारण करेगा जो वह उस दशा में धारण करता जिसमें यदि यह अधिनियम अधिनियमित नहीं हुआ होता और तब तक ऐसा करता रहेगा जब तक केन्द्रीय सरकार के अधीन उसका नियोजन सम्यक् रूप से समाप्त नहीं कर दिया जाता या जब तक उसका पारिश्रमिक, निबंधन और शर्तें केन्द्रीय सरकार द्वारा सम्यक् रूप से परिवर्तित नहीं कर दी जातीं :
परन्तु यदि इस प्रकार किए गए परिवर्तन किसी ऐसे अधिकारी या अन्य कर्मचारी को प्रतिग्राह्य नहीं हैं तो उसका नियोजन, स्थायी कर्मचारी की दशा में तीन मास के पारिश्रमिक के बराबर और अन्य कर्मचारी की दशा में एक मास के पारिश्रमिक के बराबर रकम का संदाय करके, केन्द्रीय सरकार द्वारा समाप्त किया जा सकेगा:
परन्तु यह और कि इस उपधारा की कोई बात किसी ऐसे अधिकारी या अन्य कर्मचारी को लागू नहीं होगी जिसने नियत दिन से ठीक अगले तीस दिन के भीतर केन्द्रीय सरकार को दी गई लिखित सूचना द्वारा, केन्द्रीय सरकार के अधिकारी या अन्य कर्मचारी न बनने के अपने आशय की सूचना दे दी है ।
(2) औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 (1947 का 14) या उस समय प्रवृद किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी, लेडी हार्डिंग आयुर्विज्ञान महाविद्यालय और अस्पताल या कलावती शरण अस्पताल में या उसके कामकाज के संबंध में नियोजित किसी अधिकारी या अन्य कर्मचारी की सेवाओं का केन्द्रीय सरकार को अन्तरण, किसी ऐसे अधिकारी या अन्य कर्मचारी को उस अधिनियम या अन्य विधि के अधीन किसी प्रतिकर का हकदार नहीं बनाएगा और ऐसा कोई दावा किसी न्यायालय, अधिकरण या अन्य प्राधिकरण द्वारा ग्रहण नहीं किया जाएगा ।
(3) ऐसे व्यक्तियों के स्थान पर जो नियत दिन के ठीक पूर्व, लेडी हार्डिंग आयुर्विज्ञान महाविद्यालय और अस्पताल तथा कलावती शरण अस्पताल के अधिकारियों या अन्य कर्मचारियों के किसी पेंशन, भविष्य या उपदान निधि अथवा उसी के समान गठित किसी अन्य निधि के लिए न्यासी थे, ऐसे व्यक्तियों को जिन्हें केन्द्रीय सरकार साधारण या विशेष आदेश द्वारा विनिर्दिष्ट करे, न्यासी के रूप में प्रतिस्थापित किया जाएगा ।
11. संविदा, आदि का प्रभाव-(1) सभी संविदाएं, विलेख, बंधपत्र, करार, मुख्तारनामे, विधिक प्रतिनिधित्व के अनुदान और सभी प्रकार की अन्य लिखतें जो नियत दिन के ठीक पूर्व विद्यमान हैं या प्रभावशील हैं और जिनका, यथास्थिति, प्रशासन बोर्ड या प्रबन्ध बोर्ड अथवा, यथास्थिति, प्रशासन बोर्ड या प्रबन्ध बोर्ड की ओर से कोई व्यक्ति पक्षकार है अथवा जो, यथास्थिति, प्रशासन बोर्ड या प्रबन्ध बोर्ड के पक्ष में है, जहां तक कि उनका सम्बन्ध, यथास्थिति, लेडी हार्डिंग आयुर्विज्ञान महाविद्यालय और अस्पताल तथा कलावती शरण अस्पताल के किसी प्रयोजन या कामकाज से है, केन्द्रीय सरकार के विरुद्ध या उसके पक्ष में पूर्ण बल रखेगी और प्रभावी होंगी तथा पूर्ण रूप से और प्रभावी तौर पर इस प्रकार प्रवर्तित या क्रियान्वित की जा सकेगी मानो, यथास्थिति, प्रशासन बोर्ड या प्रबन्ध बोर्ड के स्थान पर केन्द्रीय सरकार उनकी पक्षकार थी अथवा मानो वे केन्द्रीय सरकार के पक्ष में जारी की गई थी ।
(2) यदि, यथास्थिति, लेडी हार्डिंग आयुर्विज्ञान महाविद्यालय और अस्पताल या कलावती शरण अस्पताल के सम्बन्ध में अथवा लेडी हार्डिंग आयुर्विज्ञान महाविद्यालय और अस्पताल या कलावती शरण अस्पताल के किसी कामकाज के सम्बन्ध में, यथास्थिति, प्रशासन बोर्ड या प्रबन्ध बोर्ड या कोषपाल या किसी अन्य व्यक्ति द्वारा या उसके विरुद्ध चलाया गया कोई वाद, की गई कोई अपील या सभी प्रकार की अन्य कार्यवाही नियत दिन को लम्बित हैं तो लेडी हार्डिंग आयुर्विज्ञान महाविद्यालय और अस्पताल के केन्द्रीय सरकार को अन्तरण के कारण या कलावती शरण अस्पताल का प्रबन्ध केन्द्रीय सरकार को अन्तरण द्वारा ग्रहण किए जाने के कारण या इस अधिनियम में अन्तर्विष्ट किसी अन्य बात के कारण किसी भी रीति से उसका उपशमन नहीं किया जाएगा, वह बन्द नहीं की जाएगी या उसका प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा, किन्तु वाद, अपील या अन्य कार्यवाही केन्द्रीय सरकार द्वारा या उसके विरुद्ध चालू रखी जा सकेगी, अभियोजित की जा सकेगी और प्रवर्तित की जा सकेगी ।
12. दुर्भाव से की गई संविदाओं का या लेडी हार्डिंग आयुर्विज्ञान महाविद्यालय और अस्तपाल तथा कलावती शरण अस्पताल के लिए अहितकर संविदाओं का रद्द किया जाना और उनमें परिवर्तन किया जाना-(1) धारा 11 में किसी बात के होते हुए भी, यदि केन्द्रीय सरकार का, ऐसी जांच के पश्चात् जो वह ठीक समझे, यह समाधान हो जाता है कि नियत दिन के पूर्व, यथास्थिति, लेडी हार्डिंग आयुर्विज्ञान महाविद्यालय और अस्तपाल या कलावती शरण अस्पताल के सम्बन्ध में अथवा लेडी हार्डिंग आयुर्विज्ञान महाविद्यालय और अस्पताल या कलावती शरण अस्पताल से सम्बन्धित किसी कामकाज के सम्बन्ध में प्रशासन बोर्ड या प्रबन्ध बोर्ड या उसके किसी सदस्य के बीच की गई कोई संविदा या करार दुर्भाव से किया गया है या ऐसी संविदा या करार, यथास्थिति, लेडी हार्डिंग आयुर्विज्ञान महाविद्यालय और अस्पताल या कलावती शरण अस्पताल के लिए अहितकर है तो वह उस संविदा या करार को रद्द करने वाला या उसमें परिवर्तन करने वाला आदेश (या तो बिना शर्त के या ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए जिन्हें वह इस प्रयोजन के लिए अधिरोपित करना ठीक समझे) कर सकेगी और तत्पश्चात् वह संविदा या करार तद्नुसार प्रभावी होगा :
परन्तु किसी संविदा या करार को तब तक रद्द नहीं किया जाएगा या उसमें तब तक परिवर्तन नहीं किया जाएगा जब तक कि उस संविदा या करार के पक्षकारों को सुनवाई का उचित अवसर न दे दिया जाए ।
(2) उपधारा (1) के अधीन किए गए किसी आदेश से व्यथित कोई भी व्यक्ति उस सिविल अधिकारिता वाले प्रधान न्यायालय को जिसकी अधिकारिता की स्थानीय सीमा के भीतर, यथास्थिति, लेडी हार्डिंग आयुर्विज्ञान महाविद्यालय और अस्तपाल या कलावती शरण अस्पताल स्थित है, ऐसे आदेश में परिवर्तन किए जाने या उसे उलट दिए जाने के लिए आवेदन कर सकता है और तब वह न्यायालय उस आदेश को पुष्ट कर सकता है, उपान्तरित कर सकता है अथवा उलट सकता है ।
13. सम्पत्ति, आदि का कब्जा देने का कर्तव्य-(1) लेडी हार्डिंग आयुर्विज्ञान महाविद्यालय और अस्ताल का केन्द्रीय सरकार को अन्तरण किए जाने पर और उसके उसमें निहित हो जाने पर तथा कलावती शरण अस्पताल का प्रबन्ध केन्द्रीय सरकार द्वारा ग्रहण किए जाने पर, -
(क) यथास्थिति, प्रशासन बोर्ड या प्रबन्ध बोर्ड और प्रत्येक व्यक्ति जिसके कब्जे, अभिरक्षा या नियंत्रण में धारा 3 की उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट कोई सम्पत्ति या आस्ति अथवा कलावती शरण अस्पताल से सम्बन्धित कोई सम्पत्ति या आस्ति है, ऐसी संपत्ति या आस्ति को ऐसे अधिकारी या अन्य व्यक्ति को देगा जिसे केन्द्रीय सरकार इस निमित्त प्राधिकृत करे;
(ख) यथास्थिति, प्रशासन बोर्ड या प्रबन्ध बोर्ड और प्रत्येक व्यक्ति जिसके कब्जे, अभिरक्षा या नियंत्रण में ऐसे निहित होने या ग्रहण किए जाने के ठीक पूर्व, लेडी हार्डिंग आयुर्विज्ञान महाविद्यालय और अस्तपाल या कलावती शरण अस्पताल से सम्बन्धित कोई बहियां, दस्तावेजें या अन्य कागजपत्र हैं, उन बहियों, दस्तावेजों और कागजपत्रों का लेखाजोखा केन्द्रीय सरकार को देने का दायी होगा और उन्हें केन्द्रीय सरकार को या ऐसे अधिकारी या अन्य व्यक्ति को देगा जिसे केन्द्रीय सरकार इस निमित्त प्राधिकृत करे ।
(2) इस धारा में अन्तर्विष्ट अन्य उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, केन्द्रीय सरकार के लिए यह विधिपूर्ण होगा कि वह ऐसी सभी सम्पत्ति और आस्तियों का कब्जा लेने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जो इस अधिनियम के अधीन उसको अन्तरित और उसमें निहित हो गई हैं अथवा जिनके संबंध में इस अधिनियम के अधीन उसके द्वारा प्रबन्ध ग्रहण किया गया है ।
14. शास्ति-कोई व्यक्ति, -
(क) जिसके कब्जे, अभिरक्षा या नियंत्रण में लेडी हार्डिंग आयुर्विज्ञान महाविद्यालय और अस्तपाल या कलावती शरण अस्तपाल के प्रयोजनों के लिए धारित कोई सम्पत्ति है, उस सम्पत्ति को केन्द्रीय सरकार से सदोष विधारित करेगा; या
(ख) लेडी हार्डिंग आयुर्विज्ञान महाविद्यालय और अस्पताल या कलावती शरण अस्पताल के प्रयोजनों के लिए धारित किसी सम्पत्ति का कब्जा सदोष अभिप्राप्त करेगा या उसे रोके रखेगा; या
(ग) लेडी हार्डिंग आयुर्विज्ञान महाविद्यालय और अस्तपाल या कलावती शरण अस्तपाल से सम्बन्धित किन्हीं बहियों, दस्तावेजों या अन्य कागजपत्र को केन्द्रीय सरकार से जानबूझकर विधारित करेगा या उनको देने में असफल रहेगा; या
(घ) लेडी हार्डिंग आयुर्विज्ञान महाविद्यालय और अस्पताल या कलावती शरण अस्पताल से सम्बन्धित अपने कब्जे, अभिरक्षा या नियंत्रण में की कोई आस्तियां, बहियां या अन्य दस्तावेजें केन्द्रीय सरकार को देने में असफल रहेगा; या
(ङ) लेडी हार्डिंग आयुर्विज्ञान महाविद्यालय और अस्पताल या कलावती शरण अस्पताल के प्रयोजनों के लिए धारित किसी सम्पत्ति को सदोष हटाएगा या नष्ट करेगा; या
(च) लेडी हार्डिंग आयुर्विज्ञान महाविद्यालय और अस्पताल या कलावती शरण अस्पताल के प्रयोजनों के लिए धारित किसी सम्पत्ति का सदोष प्रयोग करेगा,
वह कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो दस हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डनीय होगा ।
15. कम्पनियों द्वारा अपराध-(1) जहां इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध किसी कम्पनी द्वारा किया गया है वहां प्रत्येक व्यक्ति जो उस अपराध के किए जाने के समय उस कम्पनी के कारबार के संचालन के लिए उस कम्पनी का भारसाधक और उसके प्रति उत्तरदायी था और साथ ही वह कम्पनी भी ऐसे अपराध के दोषी समझे जाएंगे और तद्नुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही की जाने और दण्डित किए जाने के भागी होंगे:
परन्तु इस उपधारा की कोई बात किसी ऐसे व्यक्ति को दण्ड का भागी नहीं बनाएगी यदि वह यह साबित कर देता है कि अपराध उसकी जानकारी के बिना किया गया था या उसने ऐसे अपराध के किए जाने को रोकने के लिए सब सम्यक् तत्परता बरती थी ।
(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, जहां इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध किसी कम्पनी द्वारा किया गया है तथा यह साबित होता है कि वह अपराध उस कम्पनी के किसी निदेशक, प्रबन्धक, सचिव या अन्य अधिकारी की सहमति या मौनानुकूलता से किया गया है या उस अपराध का किया जाना उसकी किसी उपेक्षा के कारण माना जा सकता है, वहां ऐसा निदेशक, प्रबन्धक, सचिव या अन्य अधिकारी भी उस अपराध का दोषी समझा जाएगा और तद्नुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने और दण्डित किए जाने का भागी होगा ।
स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए, -
(क) कंपनी" से कोई निगमित निकाय अभिप्रेत है और इसके अन्तर्गत फर्म या व्यष्टियों का अन्य संगम भी है; तथा
(ख) फर्म के सम्बन्ध में निदेशक" से उस फर्म का भागीदार अभिप्रेत है ।
16. सद्भावपर्वक की गई कार्यवाही के लिए संरक्षण-इस अधिनियम के अधीन, सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात के लिए कोई भी वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही केन्द्रीय सरकार के या उसके किसी अधिकारी या अन्य कर्मचारी के विरुद्ध न होगी ।
17. अपराधों का संज्ञान-दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) में किसी बात के होते हुए भी कोई न्यायालय इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध का संज्ञान केन्द्रीय सरकार अथवा उस सरकार द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किसी अधिकारी द्वारा किए गए लिखित परिवाद पर ही करेगा, अन्यथा नहीं ।
18. क्षतिपूर्ति-केन्द्रीय सरकार के प्रत्येक अधिकारी की, उसके कर्तव्यों के निर्वहन में या उसके संबंध में उसको हुई सभी हानियों और व्ययों की बाबत, जो उसके जानबूझकर किए गए कार्य या व्यतिक्रम से न हुए हों, केन्द्रीय सरकार द्वारा क्षतिपूर्ति की जाएगी ।
19. नियम बनाने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार इस अधिनियम के उपबन्धों को कार्यान्वित करने के लिए नियम, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, बना सकेगी ।
(2) इस अधिनियम के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किन्तु नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।
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