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मध्य प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2000 ( Madhya Pradesh Reorganisation Act, 2000 )


 

मध्य प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2000

(2000 का अधिनियम संख्यांक 28)

[25 अगस्त, 2000]

विद्यमान मध्य प्रदेश राज्य के पुनर्गठन और

उससे संबंधित विषयों का उपबंध

करने के लिए

अधिनियम

भारत गणराज्य के इक्यावनवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-

भाग 1

प्रारंभिक

1. संक्षिप्त नाम-इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम मध्य प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2000 है ।

2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-

                                (क) नियत दिन" से वह दिन अभिप्रेत है, जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे ;

                                (ख) अनुच्छेद" से संविधान का कोई अनुच्छेद अभिप्रेत है ;

                (ग) सभा निर्वाचन-क्षेत्र", परिषद् निर्वाचन-क्षेत्र" और संसदीय निर्वाचन-क्षेत्र" के वही अर्थ हैं जो लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 (1950 का 43) में हैं ;

(घ) निर्वाचन आयोग" से राष्ट्रपति द्वारा अनुच्छेद 324 के अधीन नियुक्त निर्वाचन आयोग अभिप्रेत है ;

(ङ) विद्यमान मध्य प्रदेश राज्य" से नियत दिन के ठीक पूर्व विद्यमान मध्य प्रदेश राज्य अभिप्रेत है ;

(च) विधि" के अंतर्गत संपूर्ण विद्यमान मध्य प्रदेश राज्य में या उसके किसी भाग में, नियत दिन के ठीक पूर्व विधि का बल रखने वाली कोई अधिनियमिति, अध्यादेश, विनियम, आदेश, उपविधि, नियम, स्कीम, अधिसूचना या अन्य लिखत हैं ;

(छ) अधिसूचित आदेश" से राजपत्र में प्रकाशित कोई आदेश अभिप्रेत है ;

(ज) मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ राज्य के संबंध में, जनसंख्या अनुपात" से 485.7ः176.2 का अनुपात अभिप्रेत है ;

(झ) संसद् के किसी सदन या विद्यमान मध्य प्रदेश राज्य के विधान-मंडल के संबंध में, आसीन सदस्य" से वह व्यक्ति अभिप्रेत है जो नियत दिन के ठीक पूर्व उस सदन का सदस्य है ;

(ञ) विद्यमान मध्य प्रदेश राज्य के संबंध में, उत्तरवर्ती राज्य" से मध्य प्रदेश या छत्तीसगढ़ राज्य अभिप्रेत है ;

(ट) अंतरित राज्यक्षेत्र" से वह राज्यक्षेत्र अभिप्रेत है जो नियत दिन को विद्यमान मध्य प्रदेश राज्य से छत्तीसगढ़ राज्य को अंतरित किया गया है ;

(ठ) खजाना" के अन्तर्गत उप-खजाना भी है ; और

(ड) विद्यमान मध्य प्रदेश राज्य के जिला, तहसील या अन्य प्रादेशिक खंड के प्रति किसी निर्देश का यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह नियत दिन को उस प्रादेशिक खंड में समाविष्ट क्षेत्र के प्रति निर्देश है ।

भाग 2

मध्य प्रदेश राज्य का पुनर्गठन

3. छत्तीसगढ़ राज्य का बनाया जाना-नियत दिन से ही, एक नया राज्य बनाया जाएगा जिसका नाम छत्तीसगढ़ राज्य होगा, जिसमें विद्यमान मध्य प्रदेश राज्य के निम्नलिखित राज्यक्षेत्र समाविष्ट होंगे, अर्थात् :-

बस्तर, बिलासपुर, दंतेवाड़ा, धमतरी, दुर्ग, जांजगीर-चांपा, जशपुर, कांकेर, कवर्धा, कोरबा, कोरिया, महासमुन्द, रायगढ़, रायपुर, राजनांदगांव और सरगुजा जिले,

और तदुपरि उक्त राज्यक्षेत्र विद्यमान मध्य प्रदेश राज्य के भाग नहीं रहेंगे ।

4. मध्य प्रदेश राज्य और उसके प्रादेशिक खंड-नियत दिन से ही, मध्य प्रदेश राज्य में धारा 3 में विनिर्दिष्ट राज्यक्षेत्रों से भिन्न विद्यमान मध्य प्रदेश राज्य के राज्यक्षेत्र समाविष्ट होंगे ।

5. संविधान की पहली अनुसूची का संशोधन-नियत दिन से ही, संविधान की पहली अनुसूची में, 1. राज्य" शीर्षक के अंतर्गत,-

(क) मध्य प्रदेश राज्य के राज्यक्षेत्रों से संबंधित पैरा में, राजस्थान और मध्य प्रदेश (राज्यक्षेत्र अंतरण) अधिनियम, 1959 (1959 का 47) की प्रथम अनुसूची में विनिर्दिष्ट है" शब्दों, कोष्ठकों और अंकों के पश्चात् निम्नलिखित जोड़ा जाएगा, अर्थात् :-

किन्तु इनके अंतर्गत मध्य प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2000 की धारा 3 में विनिर्दिष्ट राज्यक्षेत्र नहीं हैं ।";

                                (ख) प्रविष्टि 25 के पश्चात् निम्नलिखित प्रविष्टि अंतःस्थापित की जाएगी, अर्थात् :-

26. छत्तीसगढ़ : मध्य प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2000 की धारा 3 में विनिर्दिष्ट राज्यक्षेत्र ।"।       

6. राज्य सरकार की व्यावृत्ति शक्तियां-इस भाग के पूर्वगामी उपबंधों की किसी बात से यह नहीं समझा जाएगा कि वह मध्य प्रदेश सरकार या छत्तीसगढ़ की सरकार की, नियत दिन के पश्चात्, राज्य के किसी जिला या अन्य प्रादेशिक खंड का नाम, क्षेत्र, या सीमाओं में परिवर्तन करने की शक्ति को प्रभावित करती है ।

भाग 3

विधान-मंडल में प्रतिनिधित्व

राज्य सभा

7. संविधान की चौथी अनुसूची का संशोधन-नियत दिन से ही संविधान की चौथी अनुसूची की सारणी में,-

(क) प्रविष्टि 9 से प्रविष्टि 27 को क्रमशः प्रविष्टि 10 से प्रविष्टि 28 के रूप में पुनः संख्यांकित किया जाएगा ;

(ख) प्रविष्टि 8 में, अंक 16" के स्थान पर अंक 11" रखे जाएंगे ;

(ग) प्रविष्टि 8 के पश्चात् निम्नलिखित प्रविष्टि अंतःस्थापित की जाएगी, अर्थात्ः-

9. छत्तीसगढ़ ...................51" ।

8. आसीन सदस्यों का आबंटन-(1) नियत दिन से ही, विद्यमान मध्य प्रदेश राज्य का प्रतिनिधित्व करने वाले राज्य सभा के सोलह आसीन सदस्य, इस अधिनियम की पहली अनुसूची में विनिर्दिष्ट रूप में, मध्य प्रदेश राज्य और छत्तीसगढ़ राज्य को आबंटित स्थानों को भरने के लिए निर्वाचित किए गए समझे जाएंगे ।

(2) ऐसे आसीन सदस्यों की पदावधि अपरिवर्तित रहेगी ।

लोक सभा

9. लोक सभा में प्रतिनिधित्व-नियत दिन से ही, उत्तरवर्ती मध्य प्रदेश राज्य को 29 स्थान और उत्तरवर्ती छत्तीसगढ़ राज्य को 11 स्थान लोक सभा में आबंटित किए जाएंगे और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 (1950 का 43) की पहली अनुसूची तद्नुसार संशोधित समझी जाएगी ।

10. संसदीय और सभा निर्वाचन-क्षेत्रों का परिसीमन-(1) नियत दिन से ही, संसदीय और सभा निर्वाचन-क्षेत्र परिसीमन आदेश, 1976, का इस अधिनियम की दूसरी अनुसूची में निदेशित रूप में संशोधन किया जाएगा ।

11. आसीन सदस्यों के बारे में उपबंध-(1) उस निर्वाचन-क्षेत्र का, जो धारा 10 के उपबंधों के आधार पर नियत दिन को, सीमाओं में परिवर्तन सहित या उसके बिना, उत्तरवर्ती मध्य प्रदेश या छत्तीसगढ़ राज्यों को आबंटित हो गया है, प्रतिनिधित्व करने वाले लोक सभा के प्रत्येक आसीन सदस्य के बारे में यह समझा जाएगा कि वह इस प्रकार आबंटित उस निर्वाचन-क्षेत्र से लोक सभा के लिए निर्वाचित हो गया है ।

(2) ऐसे आसीन सदस्यों की पदावधि अपरिवर्तित रहेगी ।

विधान सभा

12. विधान सभाओं के बारे में उपबंध-(1) नियत दिन को मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ राज्यों की विधान सभाओं में स्थानों की संख्या, क्रमशः दो सौ तीन और नब्बे होगी ।

(2) लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 (1950 का 43) की दूसरी अनुसूची में, 1. राज्य" शीर्षक के नीचे,-

 

(क) प्रविष्टि 5 से प्रविष्टि 25 को क्रमशः प्रविष्टि 6 से प्रविष्टि 26 के रूप में पुनः संख्यांकित किया जाएगा ;

(ख) प्रविष्टि 4 के पश्चात् निम्नलिखित प्रविष्टि अंतःस्थापित की जाएगी, अर्थात् :-

1.

5

5. छत्तीसगढ़........

90" ;

(ग) इस प्रकार पुनः संख्यांकित प्रविष्टि 13 में, 320" अंकों के स्थान पर 230" अंक रखे जाएंगे ।      

13. आसीन सदस्यों का आबंटन-(1) उस निर्वाचन-क्षेत्र से, जो नियत दिन को धारा 10 के उपबंधों के आधार पर, सीमाओं में परिवर्तन सहित या उसके बिना छत्तीसगढ़ राज्य को आबंटित हो गया है, उस सभा में स्थान भरने के लिए निर्वाचित विद्यमान मध्य प्रदेश राज्य की विधान सभा के प्रत्येक आसीन सदस्य के बारे में यह समझा जाएगा कि वह उस दिन से ही मध्य प्रदेश की विधान सभा का सदस्य नहीं रह गया है और उसे इस प्रकार आबंटित उस निर्वाचन-क्षेत्र से छत्तीसगढ़ की विधान सभा में स्थान को भरने के लिए निर्वाचित किया गया समझा जाएगा ।

(2) विद्यमान मध्य प्रदेश राज्य की विधान सभा के सभी आसीन सदस्य उस राज्य की विधान सभा के सदस्य बने रहेंगे और किसी ऐसे निर्वाचन-क्षेत्र का जिसके विस्तार या नाम और सीमा का धारा 9 के उपबंधों के आधार पर परिवर्तन हो गया है, प्रतिनिधित्व करने वाले किसी ऐसे आसीन सदस्य के बारे में यह समझा जाएगा कि वह इस प्रकार परिवर्तित उस निर्वाचन-क्षेत्र से मध्य प्रदेश की विधान सभा में निर्वाचित हो गया है ।

(3) तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की विधान सभाओं के बारे में यह समझा जाएगा कि वे नियत दिन को सम्यक् रूप से गठित की गई हैं ।

(4) विद्यमान मध्य प्रदेश राज्य की विधान सभा के आसीन सदस्य के बारे में, जिसे अनुच्छेद 333 के अधीन आंग्ल-भारतीय समुदाय का प्रतिनिधित्व करने के लिए उस सभा में नामनिर्देशित किया गया है, यह समझा जाएगा कि उसे उस अनुच्छेद के अधीन मध्य प्रदेश विधान सभा में उक्त समुदाय का प्रतिनिधित्व करने के लिए नामनिर्देशित किया गया है ।

14. विधान सभाओं की अवधि-अनुच्छेद 172 के खंड (1) में निर्दिष्ट पांच वर्ष की अवधि, मध्य प्रदेश राज्य और छत्तीसगढ़ राज्य की विधान सभा की दशा में, उस तारीख को प्रारंभ हुई समझी जाएगी जिसको वह विद्यमान मध्य प्रदेश राज्य की विधान सभा की दशा में, वस्तुतः प्रारंभ हुई है ।

15. अध्यक्ष और उपाध्यक्ष-(1) वे व्यक्ति, जो नियत दिन के ठीक पूर्व विद्यमान मध्य प्रदेश राज्य की विधान सभा के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष हैं, उस दिन से ही उस सभा के, क्रमशः अध्यक्ष और उपाध्यक्ष बने रहेंगे ।

(2) नियत दिन के पश्चात् यथाशक्य शीघ्र, उत्तरवर्ती छत्तीसगढ़ राज्य की विधान सभा, उस सभा के दो सदस्यों को, क्रमशः उसके अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के रूप में चुनेगी और जब तक उनको इस प्रकार चुना नहीं जाता तब तक अध्यक्ष के पद के कर्तव्यों का पालन उस सभा के ऐसे सदस्य द्वारा किया जाएगा, जिसे राज्यपाल इस प्रयोजन के लिए नियुक्त करे ।

16. प्रक्रिया के नियम-नियत दिन के ठीक पहले यथाप्रवृत्त मध्य प्रदेश विधान सभा की प्रक्रिया और कार्य संचालन के नियम, जब तक कि अनुच्छेद 208 के खंड (1) के अधीन नियम नहीं बनाए जाते हैं । छत्तीसगढ़ की विधान सभा की प्रक्रिया और कार्य संचालन के नियम ऐसे उपांतरणों और अनुकूलनों के अधीन रहते हुए होंगे जो उसके अध्यक्ष द्वारा उनमें किए जाएं ।   

निर्वाचन-क्षेत्रों का परिसीमन

17. निर्वाचन-क्षेत्रों का परिसीमन-(1) निर्वाचन आयोग धारा 12 के उपबंधों को प्रभावी बनाने के प्रयोजन के लिए इसमें इसके पश्चात् उपबंधित रीति से अवधारित करेगा-

(क) संविधान के सुसंगत उपबंधों को ध्यान में रखते हुए, क्रमशः मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ राज्यों की विधान सभाओं में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित किए जाने वाले स्थानों की संख्या;

(ख) उन सभा निर्वाचन-क्षेत्र, जिनमें खंड (क) में निर्दिष्ट प्रत्येक राज्य को विभाजित किया जाएगा, ऐसे     निर्वाचन-क्षेत्रों में से प्रत्येक का विस्तार और उनमें से प्रत्येक में वे स्थान जो अनुसूचित जातियों या अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित किए जाएंगे; और

(ग) खंड (क) में निर्दिष्ट प्रत्येक राज्य में संसदीय निर्वाचन-क्षेत्रों की सीमाओं के समायोजन और उनके विस्तार का वर्णन, जो आवश्यक या समीचीन हो ।

(2) उपधारा (1) के खंड (ख) और खंड (ग) में निर्दिष्ट विषयों का अवधारण करते समय, निर्वाचन आयोग निम्नलिखित उपबंधों को ध्यान में रखेगा, अर्थात् :-

(क) सभी निर्वाचन-क्षेत्र एक सदस्यीय निर्वाचन-क्षेत्र होंगे ;

(ख) सभी निर्वाचन-क्षेत्र, यथासाध्य, भौगोलिक रूप से संहृत क्षेत्र होंगे और उनका परिसीमन करते समय उनकी भौतिक विशिष्टताओं, प्रशासनिक इकाइयों की विद्यमान सीमाओं, संचार की सुविधाओं और सार्वजनिक सुविधाओं का ध्यान रखना होगा ; और

(ग) वे निर्वाचन-क्षेत्र, जिनमें अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए स्थान आरक्षित किए जाते हैं, यथासाध्य, उन क्षेत्रों में अवस्थित होंगे, जिनमें कुल जनसंख्या के अनुपात में उनकी जनसंख्या सर्वाधिक हो ।

(3) निर्वाचन आयोग, उपधारा (1) के अधीन अपने कृत्यों के पालन में अपनी सहायता के प्रयोजन के लिए सहयुक्त सदस्यों के रूप में ऐसे पांच व्यक्तियों को अपने साथ सहयुक्त करेगा, जो केन्द्रीय सरकार, आदेश द्वारा, विनिर्दिष्ट करे, और वे ऐसे व्यक्ति होंगे जो उस राज्य की विधान सभा के या राज्य का प्रतिनिधित्व करने वाले लोक सभा के सदस्य हों :

परंतु सहयुक्त सदस्यों में से किसी को मत देने का या निर्वाचन आयोग के किसी विनिश्चय पर हस्ताक्षर करने का अधिकार नहीं होगा ।

(4) यदि किसी सहयुक्त सदस्य का पद, मृत्यु या पदत्याग के कारण रिक्त हो जाता है तो वह, जहां तक साध्य हो, उपधारा (3) के उपबंधों के अनुसार भरा जाएगा ।

(5) निर्वाचन आयोग,-

(क) निर्वाचन-क्षेत्रों के परिसीमन के लिए अपनी प्रस्थापनाएं किसी ऐसे सहयुक्त सदस्य की विसम्मत प्रस्थापनाओं सहित, यदि कोई हों, जो उनका प्रकाशन चाहता है, राजपत्र में और ऐसी अन्य रीति से, जिसे आयोग ठीक समझे, प्रकाशित करेगा और साथ ही एक सूचना भी प्रकाशित करेगा जिसमें प्रस्थापनाओं के संबंध में, आक्षेप और सुझाव आमंत्रित किए गए हों और वह तारीख विनिर्दिष्ट हो जिसको या जिसके पश्चात् प्रस्थापनाओं पर उसके द्वारा आगे विचार किया जाएगा ;

(ख) उन सभी आक्षेपों और सुझावों पर विचार करेगा जो उसे इस प्रकार विनिर्दिष्ट तारीख से पहले प्राप्त हुए हों ;

(ग) उसे इस प्रकार विनिर्दिष्ट तारीख के पहले प्राप्त सभी आक्षेपों और सुझावों पर विचार करने के पश्चात् एक या अधिक आदेशों द्वारा, निर्वाचन-क्षेत्रों का परिसीमन अवधारित करेगा और ऐसे आदेश या आदेशों को राजपत्र में प्रकाशित करवाएगा और ऐसे प्रकाशन पर वह आदेश या वे आदेश विधि का पूर्ण बल रखेंगे और उसे या उन्हें किसी न्यायालय में प्रश्नगत नहीं किया जाएगा ।

(6) सभा निर्वाचन-क्षेत्रों से संबंधित ऐसा प्रत्येक आदेश, ऐसे प्रकाशन के पश्चात्, यथाशीघ्र संबंधित राज्य की विधान सभा के समक्ष रखा जाएगा ।

(7) मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ राज्यों में निर्वाचन-क्षेत्रों का परिसीमन वर्ष 1971 में की गई जनगणना के प्रकाशित आंकडों के आधार पर अवधारित किया जाएगा ।

18. परिसीमन आदेशों को अद्यतन रखने की निर्वाचन आयोग की शक्ति-(1) निर्वाचन आयोग, समय-समय पर, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा,-

(क) धारा 17 के अधीन किए गए किसी आदेश में किसी मुद्रण संबंधी भूल को उसमें अनवधानता से हुई भूल या लोप के कारण हुई किसी गलती को ठीक कर सकेगा ;

(ख) जहां ऐसे किसी आदेश या किन्हीं आदेशों में उल्लिखित किसी प्रादेशिक खंड की सीमाओं या नाम में परिवर्तन हो जाए वहां ऐसे संशोधन कर सकेगा जो उसे ऐसे आदेश को अद्यतन करने के लिए आवश्यक या समीचीन प्रतीत हों ।

(2) किसी सभा निर्वाचन-क्षेत्र के संबंध में इस धारा के अधीन प्रत्येक अधिसूचना निकाली जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संबंधित राज्य की विधान सभा के समक्ष रखी जाएगी ।

अनुसूचित जातियां और अनुसूचित जनजातियां

19. अनुसूचित जातियां आदेश का संशोधन-नियत दिन से ही, संविधान (अनुसूचित जातियां) आदेश, 1950, तीसरी अनुसूची में निदेशित रूप में संशोधित हो जाएगा ।

20. अनुसूचित जनजातियां आदेश का संशोधन-नियत दिन से ही, संविधान (अनुसूचित जनजातियां) आदेश, 1950, चौथी अनुसूची में निदेशित रूप में संशोधित हो जाएगा ।

भाग 4

उच्च न्यायालय

21. छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय-(1) नियत दिन से ही छत्तीसगढ़ राज्य के लिए एक पृथक् उच्च न्यायालय होगा (जिसे इसमें इसके पश्चात् छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय" कहा गया है) और मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय मध्य प्रदेश राज्य के लिए उच्च न्यायालय होगा (जिसे इसमें इसके पश्चात् मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय कहा गया है) । 

(2) छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय का प्रधान स्थान ऐसे स्थान पर होगा जिसे राष्ट्रपति, अधिसूचित आदेश द्वारा, नियत करे ।

(3) उपधारा (2) में किसी बात के होते हुए भी छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के न्यायाधीश और खंड न्यायालय छत्तीसगढ़ राज्य में उसके प्रधान स्थान से भिन्न ऐसे अन्य स्थान या स्थानों पर बैठ सकेंगे जिन्हें मुख्य न्यायमूर्ति छत्तीसगढ़ के राज्यपाल के अनुमोदन से नियत करे ।

22. छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के न्यायाधीश-(1) मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के ऐसे न्यायाधीश जो नियत दिन के ठीक पहले पद धारण कर रहे हों और राष्ट्रपति द्वारा अवधारित किए जाएं, उस दिन से मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधीश नहीं रहेंगे और छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के न्यायाधीश हो जाएंगे ।

(2) वे व्यक्ति जो उपधारा (1) के कारण छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के न्यायाधीश हो जाते हैं, उस दशा के सिवाय जहां ऐसा कोई व्यक्ति उस उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायमूर्ति नियुक्त हो जाता है, उस न्यायालय में मध्य प्रदेश स्थित उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के रूप में अपनी-अपनी नियुक्तियों की पूर्विकता के अनुसार रैंक धारण करेंगे ।

23. छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय की अधिकारिता-छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय को, छत्तीसगढ़ राज्य में सम्मिलित राज्यक्षेत्रों के किसी भाग की बाबत, ऐसी सभी अधिकारिता, शक्तियां और प्राधिकार होंगे जो नियत दिन से ठीक पहले प्रवृत्त विधि के अधीन उक्त राज्यक्षेत्रों के उस भाग की बाबत मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा प्रयोक्तव्य थे ।

24. विधिज्ञ परिषद् और अधिवक्ताओं के संबंध में विशेष उपबंध-(1) नियत दिन से ही अधिवक्ता अधिनियम, 1961 (1961 का 25) की धारा 3 की उपधारा (1) के खंड (क) में, और मध्य प्रदेश" शब्दों के स्थान पर, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़" शब्द रखे   जाएंगे ।

(2) ऐसा व्यक्ति जो नियत दिन से ठीक पहले विद्यमान मध्य प्रदेश राज्य की विधिज्ञ परिषद् की नामावली में अधिवक्ता है, नियत दिन से  एक वर्ष के भीतर ऐसे विद्यमान राज्य की विधिज्ञ परिषद् को छत्तीसगढ़ विधिज्ञ परिषद् की नामवली में अपने नाम को अन्तरित किए  जाने का लिखित में विकल्प दे सकेगा और अधिवक्ता अधिनियम, 1961 (1961 का 25) और उसके अधीन बनाए गए नियमों में किसी बात के होते हुए भी, इस प्रकार दिए गए ऐसे विकल्प पर उसका नाम छत्तीसगढ़ विधिज्ञ परिषद् की नामावली में उक्त अधिनियम, और उसके अधीन बनाए गए नियमों के प्रयोजनों के लिए इस प्रकार दिए गए विकल्प की तारीख से अन्तरित किया गया समझा जाएगा ।

(3) ऐसे अधिवक्ताओं से भिन्न ऐसे व्यक्तियों को, जो नियत दिन के ठीक पहले मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय या उसके किसी अधीनस्थ न्यायालय में विधि व्यवसाय करने के लिए हकदार हैं, नियत दिन से ही, यथास्थिति, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय या उसके किसी अधीनस्थ न्यायालय में भी विधि व्यवसाय करने के लिए हकदार व्यक्तियों के रूप में भी मान्यता दी जाएगी ।

(4) छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में सुनवाई का अधिकार ऐसे सिद्धांतों के अनुसार विनियमित होगा जो नियत दिन से ठीक पहले मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में सुनवाई के अधिकार की बाबत प्रवृत्त हैं ।

25. छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में पद्धति और प्रक्रिया-मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में पद्धति और प्रक्रिया की बाबत नियत दिन से ठीक पूर्व प्रवृत्त विधि, इस भाग के उपबंधों के अधीन रहते हुए आवश्यक उपान्तरणों सहित, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के संबंध में लागू होगी और तद्नुसार छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय को पद्धति और प्रक्रिया की बाबत नियम बनाने और आदेश करने की ऐसी सभी शक्तियां प्राप्त होंगी जो नियत दिन के ठीक पहले मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा प्रयोक्तव्य हैं :

परंतु ऐसे कोई नियम या आदेश जो मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में पद्धति और प्रक्रिया की बाबत नियत दिन के ठीक पूर्व प्रवृत्त हैं, जब तक कि छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय द्वारा बनाए गए नियमों और आदेशों द्वारा परिवर्तित या प्रतिसंहृत नहीं कर दिए जाते, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में पद्धति और प्रक्रिया की बाबत आवश्यक उपांतरणों सहित ऐसे लागू होंगे मानो वे उस न्यायालय द्वारा बनाए गए हों ।

26. छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय की मुद्रा की अभिरक्षा-मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की मुद्रा की अभिरक्षा के संबंध में नियत दिन के ठीक पूर्व प्रवृत्त विधि, आवश्यक उपांतरणों सहित, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय की मुद्रा की अभिरक्षा के संबंध में लागू होगी ।

27. रिटों और अन्य आदेशिकाओं का प्ररूप-मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा प्रयुक्त की जाने वाली, जारी की जाने वाली या दी जाने वाली रिटों तथा अन्य आदेशिकाओं के प्ररूप की बाबत नियत दिन के ठीक पूर्व प्रवृत्त विधि, आवश्यक उपांतरणों सहित, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय द्वारा प्रयुक्त की जाने वाली, जारी की जाने वाली या दी जाने वाली रिटों तथा अन्य आदेशिकाओं के प्ररूप के संबंध में लागू होगी ।

28. न्यायाधीशों की शक्तियां-मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति, एकल न्यायाधीश और खंड न्यायालयों की शक्तियों के संबंध में तथा उन शक्तियों के प्रयोग के आनुषंगिक सभी विषयों के संबंध में, नियत दिन के ठीक पूर्व प्रवृत्त विधि, आवश्यक उपांतरणों सहित, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के संबंध में लागू होगी ।

29. उच्चतम न्यायालय को अपीलों के बारे में प्रक्रिया-मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय तथा उसके न्यायाधीशों और खंड न्यायालयों से उच्चतम न्यायालय को अपीलों के संबंध में, नियत दिन से ठीक पूर्व प्रवृत्त विधि, आवश्यक उपांतरणों सहित, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के संबंध में लागू होगी ।

30. मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय से छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय को कार्यवाहियों का अन्तरण-(1) इसमें इसके पश्चात् जैसा उपबंधित है उसके सिवाय, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय को नियत दिन से, अन्तरित राज्यक्षेत्र के संबंध में कोई अधिकारिता नहीं होगी ।

(2) नियत दिन से ठीक पूर्व मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में लंबित ऐसी कार्यवाहियां, जो उस दिन से पूर्व या पश्चात् उस उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति द्वारा वादहेतुक उत्पन्न होने के स्थान पर और अन्य परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए ऐसी कार्यवाहियों के रूप में प्रमाणित की जाएं जिनकी सुनवाई और उनका विनिश्चय छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय द्वारा किया जाना चाहिए, ऐसे प्रमाणीकरण के यथाशक्य पश्चात् छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय को अन्तरित हो जाएंगी ।

(3) इस धारा की उपधारा (1) और उपधारा (2) या धारा 23 में किसी बात के होते हुए भी, किंतु इसमें इसके पश्चात् जैसा उपबंधित है उसके सिवाय, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय को अपीलों, उच्चतम न्यायालय को इजाजत के लिए आवेदनों, पुनर्विलोकन और ऐसी अन्य कार्यवाहियों के लिए आवेदनों, जिनमें ऐसी किन्हीं कार्यवहियों में नियत दिन से पहले मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा पारित किसी आदेश के संबंध में कोई अनुतोष मांगा गया है, को ग्रहण करने, सुनवाई करने या उनका निपटारा करने की अधिकारिता होगी और छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय को नहीं होगी :

परन्तु यदि मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा ऐसी कार्यवाहियों को ग्रहण किए जाने के पश्चात् उस उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति को यह प्रतीत होता है कि उन कार्यवाहियों को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय को अंतरित किया जाना चाहिए तो वह यह आदेश करेगा कि वे इस प्रकार अंतरित की जाएं और ऐसी कार्यवाहियां उसके पश्चात् तद्नुसार अंतरित हो जाएंगी ।

(4) मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा-

(क) नियत दिन से पूर्व उपधारा (2) के कारण छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय को अन्तरित किन्हीं कार्यवाहियों में, या

(ख) ऐसी कार्यवाहियों में जिनकी बाबत मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय को उपधारा (3) के कारण अधिकारिता रही है,

किया गया कोई आदेश सभी प्रयोजनों के लिए मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के आदेश के रूप में ही प्रभावी नहीं रहेगा बल्कि छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश के रूप में भी प्रभावी रहेगा ।

31. छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय को अन्तरित कार्यवाहियों में उपसंजात होने या कार्यवाही करने का अधिकार-ऐसे किसी व्यक्ति को, जो नियत दिन के ठीक पूर्व मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में विधि व्यवसाय करने के लिए हकदार अधिवक्ता है या इसमें विधि व्यवसाय करने के लिए कोई अन्य हकदार व्यक्ति है और जो धारा 30 के अधीन उस उच्च न्यायालय से छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय को अन्तरित कार्यवाहियों में उपसंजात होने के लिए प्राधिकृत था, उन कार्यवाहियों के संबंध में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में उपसंजात होने का अधिकार होगा ।

32. निर्वचन-धारा 30 के प्रयोजनों के लिए,-

(क) किसी न्यायालय में कार्यवाहियां तब तक लम्बित समझी जाएंगी जब तक वह न्यायालय पक्षकारों के बीच सभी विवाद्यकों का, जिनके अन्तर्गत कार्यवाहियों के खर्चे के कराधान की बाबत कोई विवाद्यक भी है, निपटान नहीं कर देता है और उसके अंतर्गत अपीलें, उच्चतम न्यायालय को अपील की इजाजत के लिए आवेदन, पुनर्विलोकन के लिए आवेदन, पुनरीक्षण के लिए अर्जियां और रिट याचिकाएं भी हैं ;

(ख) उच्च न्यायालय के प्रति निर्देशों का अर्थ यह लगाया जाएगा कि उसके अन्तर्गत उसके किसी न्यायाधीश या खंड न्यायालय के प्रति निर्देश हैं और किसी न्यायालय या न्यायाधीश द्वारा किए गए किसी आदेश के प्रति निर्देशों का अर्थ यह लगाया जाएगा कि उसके अंतर्गत उस न्यायालय या न्यायाधीश द्वारा किए गए दण्डादेश, पारित निर्णय या डिक्री के प्रति  निर्देश है ।

33. व्यावृत्ति-इस भाग की कोई बात संविधान के किन्हीं उपबंधों के छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय को लागू होने पर प्रभाव नहीं डालेगी, और इस भाग का प्रभाव किसी ऐसे उपबन्ध के अधीन रहते हुए होगा, जो नियत दिन को या उसके पश्चात् उस उच्च न्यायालय की बाबत किसी विधान-मंडल या ऐसा उपबन्ध करने के लिए शक्ति रखने वाले किसी अन्य प्राधिकारी द्वारा किया जाए ।

भाग 5

व्यय का प्राधिकृत किया जाना और राजस्व का वितरण

34. छत्तीसगढ़ राज्य के व्यय का प्राधिकृत किया जाना-मध्य प्रदेश का राज्यपाल, नियत दिन के पूर्व किसी भी समय, छत्तीसगढ़ राज्य की संचित निधि में से ऐसा व्यय, प्राधिकृत कर सकेगा जो वह छत्तीसगढ़ राज्य की विधान सभा द्वारा ऐसे व्यय की मंजूरी के लंबित रहने तक, नियत दिन से प्रारम्भ होने वाली छह मास से अनधिक की किसी अवधि के लिए आवश्यक समझे :

परंतु छत्तीसगढ़ का राज्यपाल, नियत दिन के पश्चात् किसी अवधि के लिए, जो छह मास की उक्त अवधि के परे की नहीं होगी, छत्तीसगढ़ राज्य की संचित निधि में से ऐसा अतिरिक्त व्यय प्राधिकृत कर सकेगा जो वह आवश्यक समझे ।

35. मध्य प्रदेश राज्य के लेखाओं से संबंधित रिपोर्टें-(1) नियत दिन के पूर्व किसी अवधि की बाबत अनुच्छेद 151 के खंड (2) में निर्दिष्ट भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक की मध्य प्रदेश राज्य के लेखाओं से संबंधित रिपोर्टों को प्रत्येक उत्तरवर्ती मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ राज्यों के राज्यपाल को प्रस्तुत की जाएगी जो उन्हें उस राज्य के विधान-मंडल के समक्ष रखवाएगा ।

(2) राष्ट्रपति, आदेश द्वारा,-

(क) वित्तीय वर्ष के दौरान नियत दिन के पूर्व की किसी अवधि की बाबत या किसी पूर्वतर वित्तीय वर्ष की बाबत किसी सेवा पर मध्य प्रदेश की संचित निधि में से उपगत किसी व्यय को, जो उस सेवा के लिए और उस वर्ष के लिए अनुदत्त रकम से आधिक्य में हो, और जैसा कि वह उपधारा (1) में निर्दिष्ट रिपोर्टों में प्रकट हो, सम्यक् रूप से प्राधिकृत घोषित कर सकेंगे ; तथा

(ख) उक्त रिपोर्टों से उद्भूत किसी विषय पर कोई कार्रवाई किए जाने के लिए उपबन्ध कर सकेंगे ।

36. राजस्व का वितरण-राष्ट्रपति, संविधान के अनुच्छेद 280 के अधीन गठित वित्त आयोग की सिफारिश पर, विद्यमान मध्य प्रदेश राज्य को संदेय कुल रकम में मध्य प्रदेश राज्य और छत्तीसगढ़ राज्य के अंश का अवधारण आदेश द्वारा ऐसी रीति से करेंगे जो वह ठीक समझें ।

भाग 6

आस्तियों और दायित्वों का प्रभाजन

37. भाग का लागू होना-(1) इस भाग के उपबन्ध मध्य प्रदेश राज्य की नियत दिन के ठीक पहले की आस्तियों और दायित्वों के प्रभाजन के संबंध में लागू होंगे ।

(2) उत्तरवर्ती राज्य, पूर्ववर्ती राज्य द्वारा किए गए विनिश्चयों से उद्भूत फायदे प्राप्त करने के हकदार होंगे और उत्तरवर्ती राज्य, विद्यमान मध्य प्रदेश राज्य द्वारा किए गए विनिश्चयों से उद्भूत वित्तीय दायित्वों को वहन करने के लिए दायी होंगे ।

(3) आस्तियों और दायित्वों का प्रभाजन ऐसे वित्तीय समायोजन के अधीन होगा जो उत्तरवर्ती राज्यों के बीच आस्तियों और दायित्वों के न्यायोचित, युक्तियुक्त और साम्यापूर्ण प्रभाजन के लिए आवश्यक हो ।

(4) वित्तीय आस्तियों और दायित्वों की रकम के संबंध में कोई विवाद आपसी करार से और उसमें असफल रहने पर केन्द्रीय सरकार द्वारा भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक की सलाह पर आदेश द्वारा निपटाया जाएगा ।

38. भूमि और माल-(1) इस भाग के अन्य उपबंधों के अधीन रहते हुए, विद्यमान मध्य प्रदेश राज्य के स्वामित्व की सब भूमि और सब सामान, वस्तुएं और अन्य माल-

(क) यदि वे अंतरित राज्यक्षेत्र के भीतर हों तो छत्तीसगढ़ राज्य को संक्रान्त हो जाएंगे; और

(ख) किसी अन्य मामले में, मध्य प्रदेश राज्य की संपत्ति बने रहेंगे :

परन्तु कोई भूमि, भंडार, वस्तुएं या अन्य माल उत्तरवर्ती राज्यों में पारस्परिक करार के आधार पर ऐसी भूमि, भंडार, वस्तुओं या माल की स्थिति के अनुसार वितरित किए जाएंगे और ऐसा कोई करार न होने की दशा में केन्द्रीय सरकार, उत्तरवर्ती राज्यों की सरकारों में से किसी के अनुरोध पर और उत्तरवर्ती राज्यों की दोनों ही सरकारों से परामर्श करने के पश्चात् ऐसी भूमि, सामान, वस्तुओं या माल के उत्तरवर्त्ती राज्यों के बीच न्याय और साम्यापूर्ण वितरण के लिए निदेश दे सकेगी और उक्त भूमि, सामान, वस्तुएं या माल तद्नुसार उत्तरवर्ती राज्यों को संक्रात हो जाएंगे :

परंतु यह और कि इस उपधारा के अधीन विद्यमान मध्य प्रदेश राज्य से बाहर अवस्थित किसी भूमि, सामान, वस्तुएं और माल या माल के किसी वर्ग के वितरण की दशा में, ऐसा वितरण उस प्रयोजन के लिए उत्तरवर्ती राज्यों की सरकारों के बीच हुए पारस्परिक करार के माध्यम से किया जाएगा, जिसके न हो सकने पर केन्द्रीय सरकार उत्तरवर्ती राज्यों की सरकारों में से किसी के द्वारा किए गए अनुरोध पर, उत्तरवर्ती राज्यों की दोनों सरकारों के परामर्श के पश्चात् इस उपधारा के अधीन, यथास्थिति, ऐसी भूमि, सामान, वस्तुएं और माल या माल के किसी वर्ग के वितरण के लिए ऐसे निदेश जारी कर सकेगी, जो वह ठीक समझे ।

(2) विनिर्दिष्ट प्रयोजनार्थ, जैसे कि विशिष्ट संस्थाओं, कर्मशालाओं या उपक्रमों में या सन्निर्माणाधीन विशेष संकर्मों पर प्रयोग या उपयोग के लिए रखा हुआ सामान उस उत्तरवर्ती राज्यों को संक्रांत हो जाएगा जिसके राज्यक्षेत्र में ऐसी संस्थाएं, कर्मशालाएं, उपक्रम या संकर्म स्थित हों । 

(3) सचिवालय से तथा संपूर्ण विद्यमान मध्य प्रदेश राज्य पर अधिकारिता रखने वाले विभागाध्यक्षों के कार्यालयों से संबंधित सामान उत्तरवर्ती राज्यों में, उस प्रयोजन के लिए उत्तरवर्ती राज्यों की सरकारों के बीच किए गए पारस्परिक करार के अनुसार विभाजित किया जाएगा, जिसके न हो सकने पर केन्द्रीय सरकार उत्तरवर्ती राज्यों की सरकारों में से किसी के द्वारा किए गए अनुरोध पर दोनों उत्तरवर्ती राज्यों की सरकारों से परामर्श के पश्चात् ऐसा निदेश दे सकेगी,  जिसे वह, यथास्थिति, ऐसे समान या ऐसे सामान के किसी भाग के वितरण के लिए ठीक समझे ।

(4) विद्यमान मध्य प्रदेश राज्य में किसी वर्ग के किसी अन्य अनिर्गमित सामान का विभाजन उत्तरावर्ती राज्यों में उस अनुपात में किया जाएगा जिस अनुपात में नियत दिन से पूर्व तीन वर्ष की अवधि में उस वर्ग का कुल सामान विद्यमान मध्य प्रदेश राज्य के उन राज्यक्षेत्रों के लिए क्रय किया गया था जो उत्तरवर्ती राज्यों में क्रमशः सम्मिलित हैं :

परन्तु जहां किसी वर्ग के समान की बाबत ऐसा अनुपात अभिनिश्चित नहीं किया जा सकता या जहां ऐसे किसी वर्ग के सामान का मूल्य दस हजार रुपए से अधिक न हो वहां उस वर्ग के सामान का उत्तरवर्ती राज्यों में विभाजन जनसंख्या के अनुपात के अनुसार किया जाएगा ।

(5) इस धारा में, भूमि" पद के अन्तर्गत प्रत्येक प्रकार की स्थावर संपत्ति तथा ऐसी संपत्ति में या उस पर के कोई अधिकार हैं, और माल" पद के अन्तर्गत सिक्के, बैंक नोट तथा करेंसी नोट नहीं हैं ।

39. खजाना और बैंक का अतिशेष-नियत दिन के ठीक पूर्व मध्य प्रदेश राज्य के सभी खजानों में की रोकड़ बाकी तथा उस राज्य के भारतीय रिजर्व बैंक, भारतीय स्टेट बैंक या किसी अन्य बैंक में की जमा अतिशेषों के योग का मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ राज्यों में विभाजन जनसंख्या के अनुपात के अनुसार किया जाएगा :

परन्तु ऐसे विभाजन के प्रयोजनों के लिए, कोई रोकड़ बाकी किसी एक खजाने से दूसरे खजाने को अंतरित नहीं की जाएगी और प्रभाजन भारतीय रिजर्व बैंक की बहियों में नियत दिन को दोनों राज्यों के जमा अतिशेषों के समायोजन द्वारा किया जाएगा :

परन्तु यह और कि यदि नियत दिन को छत्तीसगढ़ राज्य का भारतीय रिजर्व बैंक में कोई खाता न हो तो समायोजन ऐसी रीति से किया जाएगा जिसका केन्द्रीय सरकार, आदेश द्वारा, निदेश दे ।

40. करों की बकाया-सम्पत्ति पर किसी कर या शुल्क के बकाया को, जिसके अन्तर्गत भू-राजस्व की बकाया भी है, वसूल करने का अधिकार उस उत्तरवर्ती राज्य का होगा जिसके राज्यक्षेत्र में वह संपत्ति स्थित है और किसी अन्य कर या शुल्क की बकाया की वसूली का अधिकार उस उत्तरवर्ती राज्य को होगा जिसके राज्यक्षेत्र के अन्तर्गत नियत दिन को उस कर या शुल्क के निर्धारण का स्थान हो ।

41. उधार और अग्रिम को वसूल करने का अधिकार-(1) विद्यमान मध्य प्रदेश राज्य द्वारा उस राज्य के भीतर किसी क्षेत्र में किसी स्थानीय निकाय, सोसाइटी, कृषक या अन्य व्यक्ति को नियत दिन के पूर्व दिए गए किन्हीं उधारों या अग्रिमों की वसूली का अधिकार उस उत्तरवर्ती राज्य का होगा जिस राज्य के अन्तर्गत उस दिन वह क्षेत्र हो ।

(2) विद्यमान मध्य प्रदेश राज्य द्वारा, उस राज्य के बाहर के किसी व्यक्ति या संस्था को नियत दिन के पहले दिए गए उधारों या अग्रिमों की वसूली का अधिकार मध्य प्रदेश राज्य का होगा :

परन्तु ऐसे किसी उधार या अग्रिम की बाबत वसूल की गई किसी राशि का विभाजन मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़  राज्यों के बीच उनकी जनसंख्या के अनुपात के अनुसार किया जाएगा ।

42. कतिपय निधियों में विनिधान और जमा-(1) इस अधिनियम की पांचवीं अनुसूची में यथाविनिर्दिष्ट विद्यमान मध्य प्रदेश राज्य के रोकड़ बाकी विनिधान लेखा या लोक लेखा की किसी निधि से किए गए विनिधानों की बाबत धारित प्रतिभूतियों का प्रभाजन, उत्तरवर्ती राज्यों की जनसंख्या के अनुपात में किया जाएगा :

परन्तु यह कि विद्यमान मध्य प्रदेश राज्य की आपदा राहत निधि में से किए गए विनिधानों में धारित प्रतिभूतियों का विभाजन उत्तरवर्ती राज्यों के अधिभोगाधीन राज्यक्षेत्रों के क्षेत्र के अनुपात में किया जाएगा ।

परन्तु यह और कि विद्यमान मध्य प्रदेश राज्य की संचित निधि में से किए गए पूर्णतया विनियोग से सृजित मध्य प्रदेश के लोक लेखा में आरक्षित निधियों के अतिशेष का अग्रनयन उस सीमा तक जहां तक अतिशेषों का विनिधान सरकारी लेखा के बाहर नहीं किया गया है, उत्तरवर्ती राज्यों के लोक लेखा में वैसी ही आरक्षित निधियों में नहीं किया जाएगा :

परन्तु यह भी कि उपधारा (2) में विनिर्दिष्ट निधियों को छोड़कर किन्हीं अन्य आरक्षित निधियों में अतिशेष मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ राज्यों के बीच उन राज्यों की जनसंख्या के अनुपात में आबंटित किए जाएंगे ।

(2) नियत दिन के ठीक पूर्व विद्यमान मध्य प्रदेश राज्य की किसी ऐसी विशेष निधि में विनिधान जिसके उद्देश्य किसी स्थानीय क्षेत्र तक सीमित हैं, उस राज्य के होंगे, जिसमें नियत दिन को वह क्षेत्र सम्मिलित किया गया है ।

 (3) किसी प्राइवेट, वाणिज्यिक या औद्योगिक उपक्रम में नियत दिन के ठीक पूर्व विद्यमान मध्य प्रदेश राज्य के विनिधान, जहां तक ऐसे विनिधान, रोकड़ बाकी विनिधान लेखा से नहीं किए गए हैं या किए गए नहीं समझे गए हैं, वहां तक उस राज्य को संक्रांत हो जाएंगे, जिसमें उस उपक्रम के कारबार का प्रधान स्थान अवस्थित है ।

 (4) जहां इस अधिनियम के भाग 2 के उपबंधों के आधार पर, किसी केन्द्रीय अधिनियम, राज्य अधिनियम या प्रांतीय अधिनियम के अधीन विद्यमान मध्य प्रदेश राज्य या उसके किसी भाग के लिए गठित कोई निगमित निकाय अंतरराज्यिक निगमित निकाय हो जाता है, वहां, विद्यमान मध्य प्रदेश राज्य द्वारा नियत दिन के पूर्व किसी ऐसे निगमित निकाय में के विनिधानों या उसे दिए गए उधारों या अग्रिमों का विभाजन, इस अधिनियम द्वारा या इसके अधीन अभिव्यक्त रूप से अन्यथा उपबंधित के सिवाय, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ राज्यों में उसी अनुपात में किया जाएगा, जिसमें उस निगमित निकाय की आस्तियों का विभाजन इस भाग के उपबंधों के अधीन किया जाता है । 

43. राज्य उपक्रम की आस्तियां और दायित्व-(1) विद्यमान मध्य प्रदेश राज्य के किसी ऐसे उपक्रम से संबंधित आस्तियां और दायित्व, उसके प्रत्यक्ष स्वामित्व में हो या किसी केन्द्रीय, राज्य या प्रांतीय अधिनियम के अधीन गठित या निगमित अथवा रजिस्ट्रीकृत निगमित निकाय के माध्यम से स्वामित्वाधीन हो,-

(क) यदि वह अनन्यतः किसी उत्तरवर्ती राज्य में अवस्थित है तो उस उत्तरवर्ती राज्य को संक्रांत हो जाएंगे और जहां विद्यमान मध्य प्रदेश राज्य द्वारा ऐसे उपक्रम के लिए अवक्षयण आरक्षिती रखी गई हो वहां उस निधि में से किए गए विनिधानों की बाबत धारित प्रतिभूतियां भी ऐसे उत्तरवर्ती राज्य को संक्रांत हो जाएंगी ;

(ख) जहां ऐसा कोई उपक्रम या उसका कोई भाग एक से अधिक उत्तरवर्ती राज्य में अवस्थित है वहां ऐसी आस्तियां, दायित्व और प्रतिभूतियां उत्तरवर्ती राज्यों के बीच नियत दिन से दो वर्ष की अवधि के भीतर उन राज्यों द्वारा किए गए करार की रीति के अनुसार अथवा ऐसा करार न होने पर, जैसा केन्द्रीय सरकार आदेश द्वारा निदेश दे, विभाजित की जाएंगी । 

(2) उपधारा (1) के अधीन उत्तरवर्ती राज्यों के बीच किए गए करार या केन्द्रीय सरकार द्वारा किए गए आदेश में उपक्रम के विघटन या उस उपक्रम के किसी कर्मचारी के उत्तरवर्ती राज्यों को अंतरण या उनके द्वारा उनके पुनर्नियोजन के लिए धारा 62 के उपबधों के अधीन रहते हुए उपबंध किया जा सकेगा ।

(3) उपधारा (1) के अधीन उत्तरवर्ती राज्यों के बीच किए गए करार या केन्द्रीय सरकार द्वारा किए गए आदेश में ऐसी आस्तियों और दायित्वों के, जो उत्तरवर्ती राज्य या उस उत्तरवर्ती राज्य के किसी अन्य उपक्रम को संक्रांत हो जाते, अंतरण के लिए उपबंध किया जा सकेगा और उपधारा (1) में निर्दिष्ट उपक्रम का कोई कर्मचारी, जो उत्तरवर्ती राज्यों को अंतरित या उनके द्वारा पुनर्नियोजित किया जाता, उस उत्तरवर्ती राज्य के बजाय ऐसे उपक्रम को अंतरित हो सकेगा या उसके द्वारा पुनर्नियोजित किया जा सकेगा ।

44. लोक ऋण-(1) विद्यमान मध्य प्रदेश राज्य के लोक ऋण और लोक लेखा के मद्दे सभी दायित्व जो नियत दिन से ठीक पूर्व बकाया थे, जब तक कि इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन प्रभाजन का कोई भिन्न ढंग उपबंधित न किया गया हो, उत्तरवर्ती राज्यों की जनसंख्या के अनुपात में प्रभाजित हो जाएंगे ।

(2) उत्तरवर्ती राज्यों को आबंटित किए जाने वाले दायित्वों की विभिन्न मदें और एक उत्तरवर्ती राज्य द्वारा दूसरे उत्तरवर्ती राज्य को अभिदाय किए जाने के लिए अपेक्षित अभिदाय की रकम वह होगी जो केन्द्रीय सरकार, भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक के परामर्श से आदेश करे :

परन्तु ऐसे आदेश जारी किए जाने तक, विद्यमान मध्य प्रदेश राज्य के लोक ऋण और लोक लेखा मद्दे दायित्व उत्तरवर्ती मध्य प्रदेश राज्य के दायित्व बने रहेंगे ।

(3) किसी भी स्रोत से लिए गए उधार और विद्यमान मध्य प्रदेश राज्य द्वारा ऐसी इकाइयों को, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट की जाएं और जिनका प्रचलन क्षेत्र किसी उत्तरवर्ती राज्य तक सीमित है, पुनः उधार देने मद्दे दायित्व उपधारा (4) में यथाविनिर्दिष्ट संबंधित राज्यों को न्यागत हो जाएगा । 

(4) विद्यमान मध्य प्रदेश राज्य का लोक ऋण जो उन उधारों के कारण माना जा सकता है जो किसी विनिर्दिष्ट संस्था को पुनः उधार देने के अभिव्यक्त प्रयोजनार्थ किसी स्रोत से लिए गए हों और नियत दिन के ठीक पूर्व बकाया हों-

(क) यदि किसी स्थानीय क्षेत्र में के किसी स्थानीय निकाय, निगमित निकाय या अन्य संस्था को पुनः उधार दिया गया हो तो वह उस राज्य का ऋण होगा जिसमें नियत दिन को वह स्थानीय क्षेत्र सम्मिलित किया जाता हो ; या

(ख) यदि मध्य प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड, मध्य प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम, या मध्य प्रदेश गृह निर्माण मंडल को या किसी अन्य ऐसी संस्था को जो नियत दिन को अन्तरराज्यीय संस्था हो जाए, पुनः उधार दिया गया हो तो मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ राज्यों में उसका विभाजन उसी अनुपात में किया जाएगा जिसमें ऐसे निगमित निकाय या ऐसी संस्था की आस्तियों का विभाजन इस अधिनियम के भाग 7 के उपबंधों के अधीन किया गया है ।

(5) जहां विद्यमान मध्य प्रदेश राज्य ने कोई निक्षेप निधि या अवक्षयण निधि अपने द्वारा लिए गए किसी उधार के प्रतिसंदाय के लिए रखी गई हो वहां उस निधि में से किए गए विनिधानों की बाबत धारित प्रतिभूतियों का उत्तरवर्ती मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ राज्यों में विभाजन उसी अनुपात में किया जाएगा जिसमें इस धारा के अधीन दोनों राज्यों के बीच सम्पूर्ण लोक ऋण का विभाजन किया जाए ।

(6) इस धारा में, सरकारी प्रतिभूति" पद से कोई ऐसी प्रतिभूति अभिप्रेत है जो लोक ऋण लेने के लिए राज्य सरकार द्वारा सृजित और जारी की गई है और लोक ऋण अधिनियम, 1944 (1944 का 18) की धारा 2 के खंड (2) में विनिर्दिष्ट या उसके अधीन विहित प्ररूपों में से किसी प्ररूप की है ।

45. प्लवमान ऋण-विद्यमान मध्य प्रदेश राज्य के, किसी स्थानीय निकाय, निगमित निकाय या अन्य संस्था को अल्पकालीन वित्त उपलब्ध कराने के लिए किसी प्लवमान ऋण के सभी दायित्व उत्तरवर्ती राज्यों के बीच पारस्परिक करार द्वारा अवधारित किए जाएंगे और ऐसा करने में असफल रहने की दशा में केन्द्रीय सरकार उत्तरवर्ती राज्यों के बीच ऐसे राज्यों से परामर्श करने के पश्चात् ऐसे दायित्वों का अवधारण करेगी ।

46. आधिक्य में संगृहीत करों का वापस किया जाना-आधिक्य में संगृहीत संपत्ति कर या शुल्क, जिसके अंतर्गत भू-राजस्व भी है, वापस करने का विद्यमान मध्य प्रदेश राज्य का दायित्व उस उत्तरवर्ती राज्य का दायित्व होगा, जिसके राज्यक्षेत्र में वह संपत्ति अवस्थित हो तथा आधिक्य में संगृहीत कोई अन्य कर या शुल्क वापस करने का विद्यमान मध्य प्रदेश राज्य का दायित्व उस उत्तरवर्ती राज्य का दायित्व होगा जिसके राज्यक्षेत्र में उस कर या शुल्क के निर्धारण का स्थान सम्मिलित किया गया है ।

47. निक्षेप, आदि-(1) विद्यमान मध्य प्रदेश राज्य का किसी सिविल निक्षेप या स्थानीय निधि निक्षेप की बाबत दायित्व नियत दिन से ही उस राज्य का दायित्व होगा जिसके क्षेत्र में निक्षेप किया गया है ।

(2) विद्यमान मध्य प्रदेश राज्य का किसी पूर्त या अन्य विन्यास की बाबत दायित्व नियत दिन से ही उस राज्य का दायित्व होगा जिसके क्षेत्र में विन्यास का फायदा पाने की हकदार संस्था अवस्थित है या उस राज्य का होगा जिस तक विन्यास के उद्देश्य, उसके निबंधनों के अधीन, सीमित हैं ।

48. भविष्य-निधि-नियत दिन को सेवारत किसी सरकारी सेवक के भविष्य-निधि खाते की बाबत विद्यमान मध्य प्रदेश राज्य का दायित्व, उस दिन से उस राज्य का दायित्व होगा जिसको वह सरकारी सेवक स्थायी रूप से आबंटित किया गया हो ।

49. पेंशन-पेंशनों की बाबत विद्यमान मध्य प्रदेश राज्य के दायित्व का उत्तरवर्ती मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ राज्यों को संक्रमण या उनमें प्रभाजन इस अधिनियम की छठी अनुसूची के उबपंधों के अनुसार होगा ।  

50. संविदाएं-(1) जहां विद्यमान मध्य प्रदेश राज्य ने अपनी कार्यपालिक शक्ति के प्रयोग में राज्य के किन्हीं प्रयोजनों के लिए कोई संविदा नियत दिन के पूर्व की हो, वहां वह संविदा, -

(क) यदि संविदा के प्रयोजन, नियत दिन से ही, उत्तरवर्ती मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ राज्यों में से किसी एक राज्य के अनन्य प्रयोजन हों, तो उस राज्य की कार्यपालिक शक्ति के प्रयोग में; और 

(ख) किसी अन्य दशा में, मध्य प्रदेश राज्य की कार्यपालिक शक्ति के प्रयोग में, की गई समझी जाएगी और वे सब अधिकार तथा दायित्व, जो ऐसी किसी संविदा के अधीन प्रोद्भूत हुए हैं या हों, उस सीमा तक, यथास्थिति, छत्तीसगढ़ राज्य या मध्य प्रदेश राज्य के अधिकार या दायित्व होंगे जिस तक वे विद्यमान मध्य प्रदेश राज्य के अधिकार या दायित्व होते :

                परन्तु किसी ऐसी दशा में, जो खंड (ख) में निर्दिष्ट है इस उपधारा द्वारा किए गए अधिकारों तथा दायित्वों का प्रारंभिक आबंटन ऐसे वित्तीय समायोजन के अधीन होगा जो उत्तरवर्ती मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ राज्यों के बीच करार पाया जाए या ऐसे करार के अभाव में जो केन्द्रीय सरकार आदेश द्वारा निदेश दे ।

(2) इस धारा के प्रयोजनों के लिए यह समझा जाएगा कि ऐसे दायित्वों के अन्तर्गत, जो संविदा के अधीन प्रोद्भूत हुए हैं या प्रोद्भूत हों, निम्नलिखित भी हैं,-

(क) संविदा से संबंधित कार्यवाहियों में किसी न्यायालय या अन्य अधिकरण द्वारा किए गए किसी आदेश या अधिनिर्णय की तुष्टि करने का कोई दायित्व ; और

(ख) किन्हीं ऐसी कार्यवाहियों में या उनके संबंध में उपगत व्ययों की बाबत कोई दायित्व ।

(3) यह धारा, उधारों, प्रत्याभूतियों और अन्य वित्तीय बाध्यताओं की बाबत दायित्वों के प्रभाजन से संबंधित इस भाग के अन्य उपबंधों के अधीन रहते हुए प्रभावी होगी और बैंक अतिशेष और प्रतिभूतियों के विषय में कार्यवाही, उनके संविदात्मक अधिकारों की प्रकृति के होते हुए भी उन अन्य उपबंधों के अधीन की जाएगी ।

51. अनुयोज्य दोष की बाबत दायित्व-जहां नियत दिन के ठीक पूर्व, विद्यमान मध्य प्रदेश राज्य संविदा भंग से भिन्न किसी अनुयोज्य दोष की बाबत किसी दायित्व के अधीन हैं, वहां वह दायित्व,-

(क) यदि वाद-हेतुक पूर्णतया उस राज्यक्षेत्र के भीतर उत्पन हुआ है जो उस दिन से उत्तरवर्ती मध्य प्रदेश या छत्तीसगढ़ राज्यों में से किसी का राज्यक्षेत्र है तो उस उत्तरवर्ती राज्य का होगा ; और

(ख) किसी अन्य दशा में, प्रारंभिकतः मध्य प्रदेश राज्य का होगा किन्तु यह ऐसे वित्तीय समायोजन के अधीन होगा जो मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ राज्यों के बीच करार पाया जाए, या ऐसे करार के अभाव में, जो केन्द्रीय सरकार, आदेश द्वारा, निदेश दे ।

52. प्रत्याभूतिदाता के रूप में दायित्व-जहां नियत दिन के ठीक पूर्व, विद्यमान मध्य प्रदेश राज्य पर किसी रजिस्ट्रीकृत सहकारी सोसाइटी या अन्य व्यक्ति के किसी दायित्व के बारे में प्रत्याभूतिदाता के रूप में दायित्व हो, वहां विद्यमान मध्य प्रदेश राज्य का वह दायित्व-

(क) यदि उस सोसाइटी या व्यक्ति का कार्यक्षेत्र उस राज्यक्षेत्र तक सीमित है जो उस दिन से मध्य प्रदेश या छत्तीसगढ़ राज्यों में से किसी का राज्यक्षेत्र है तो उस उत्तरवर्ती राज्य का होगा; और

(ख) किसी अन्य दशा में, प्रारंभिकतः मध्य प्रदेश राज्य का होगा, किन्तु यह ऐसे वित्तीय समायोजन के अधीन रहते हुए होगा जो मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ राज्यों के बीच करार पाया जाए या ऐसे करार के अभाव में, जो केन्द्रीय सरकार, आदेश द्वारा, निदेश दे । 

53. उचंत मदें-यदि कोई उचंत मद अंततः इस भाग के पूर्वगामी उपबंधों में से किसी में निर्दिष्ट प्रकार की आस्ति या दायित्व पर प्रभाव डालने वाली पाई जाए तो उसके संबंध में उस उपबंध के अनुसार कार्यवाही की जाएगी ।

54. अवशिष्ट उपबंध-विद्यमान मध्य प्रदेश राज्य की किसी ऐसी आस्ति या दायित्व का, जिसके बारे में इस भाग के पूर्वगामी उपबंधों में व्यवस्था नहीं है, फायदा या भार प्रथमतः मध्य प्रदेश राज्य को ऐसे वित्तीय समायोजन के अधीन रहते हुए संक्रांत हो जाएगा जो मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ राज्यों के बीच करार पाया जाए, या ऐसे करार के अभाव में, जो केन्द्रीय सरकार, आदेश द्वारा, निदेश दे ।

55. आस्तियों या दायित्वों का करार द्वारा प्रभाजन-जहां उत्तरवर्ती मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ राज्य करार करते हैं कि आस्ति, दायित्व या किसी विशिष्ट आस्ति या दायित्व के फायदे या भार का उनके बीच प्रभाजन ऐसी रीति से किया जाना चाहिए जो उससे भिन्न है जो इस भाग के पूर्वगामी उपबंधों में दी गई है, वहां उन उपबंधों में किसी बात के होते हुए भी उस आस्ति, दायित्व या उस आस्ति या दायित्व या फायदे या भार का प्रभाजन उस रीति से किया जाएगा जो करार पाई जाए ।

56. कतिपय मामलों में आबंटन या समायोजन का आदेश करने की केन्द्रीय सरकार की शक्ति-जहां उत्तरवर्ती मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ राज्यों में से कोई राज्य, इस भाग के उपबंधों में से किसी के आधार पर किसी संपत्ति का हकदार हो जाए या कोई फायदा प्राप्त करे, या किसी दायित्व के अधीन हो जाए और नियत दिन से तीन वर्ष की अवधि के भीतर दोनों में से किसी राज्य द्वारा निर्देश किए जाने पर केन्द्रीय सरकार की राय हो कि यह न्यायसंगत और साम्यापूर्ण है कि वह संपत्ति या वे फायदे दूसरे उत्तरवर्ती राज्य को अंतरित किए जाने चाहिएं या उनमें से उसे अंश मिलना चाहिए या उस दायित्व मद्दे दूसरे उत्तरवर्ती राज्य द्वारा अभिदाय किया जाना चाहिए, वहां उक्त संपत्ति या फायदों का आबंटन दोनों राज्यों के बीच ऐसी रीति से किया जाएगा या दूसरे राज्य, दायित्व के अधीन होने वाले राज्य को उसके बारे में ऐसा अभिदाय करेगा जो केन्द्रीय सरकार, दोनों राज्य सरकारों से परामर्श के पश्चात् आदेश द्वारा, अवधारित करे ।

57. कतिपय व्यय का संचित निधि पर भारित किया जाना-इस अधिनियम के उपबंधों के आधार पर मध्य प्रदेश राज्य द्वारा या छत्तीसगढ़ राज्य द्वारा उन अन्य राज्यों को या केन्द्रीय सरकार द्वारा उन राज्यों में से किसी राज्य को संदेय सब राशियां, यथास्थिति, उस राज्य की संचित निधि पर, जिसके द्वारा ऐसी राशियां संदेय हो, या भारत की संचित निधि पर भारित होंगी । 

भाग 7

कतिपय निगमों के बारे में उपबंध

58. मध्य प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड, राज्य सड़क परिवहन निगम और राज्य भांडागारण निगम, आदि के बारे में उपबंध-(1) विद्यमान मध्य प्रदेश राज्य के लिए गठित निम्नलिखित निगमित निकाय, अर्थात् :-

(क) विद्युत (प्रदाय) अधिनियम, 1948 (1948 का 54) के अधीन गठित राज्य विद्युत बोर्ड ;

(ख) सड़क परिवहन निगम अधिनियम, 1950 (1950 का 64) के अधीन स्थापित राज्य सड़क परिवहन निगम; और

(ग) भाण्डागारण निगम अधिनियम, 1962 (1962 का 58) के अधीन स्थापित राज्य भाण्डागारण निगम,

नियत दिन से ही उन क्षेत्रों में जिनकी बाबत उस दिन के ठीक पहले वे कार्य कर रहे थे, इस धारा के उपबंधों और ऐसे निगमित निकायों के कार्य करने के लिए उन इन्तजामों के, जो उत्तरवर्ती राज्यों के बीच आपसी करार पाया जाए, जिसके न होने पर ऐसे निदेशों के अधीन रहते हुए, जो समय-समय पर केन्द्रीय सरकार द्वारा जारी किए जाएं, कार्य करते रहेंगे ।

                (2) केन्द्रीय सरकार द्वारा उपधारा (1) के अधीन बोर्ड या निगम की बाबत जारी किए गए किन्हीं निदेशों के अंतर्गत ऐसा निदेश भी होगा कि वह अधिनियम, जिसके अधीन वह बोर्ड या वह निगम गठित हुआ था, उस बोर्ड या निगम को लागू होने में ऐसे अपवादों और उपांतरों के अधीन रहते हुए प्रभावी होगा जो केन्द्रीय सरकार ठीक समझे । 

                (3) उपधारा (1) में निर्दिष्ट बोर्ड या निगम, ऐसी तारीख से जो केन्द्रीय सरकार आदेश द्वारा, नियत करे, कार्य करना बंद कर देगा और उस तारीख से विघटित समझा जाएगा ; तथा ऐसे विघटन पर उसकी आस्तियों, अधिकारों तथा दायित्वों का उत्तरवर्ती मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ राज्यों के बीच प्रभाजन ऐसी रीति से किया जाएगा जो, यथास्थिति, बोर्ड या निगम के विघटन के एक वर्ष के भीतर उनमें करार पाई जाए, या यदि कोई करार न हो पाए तो ऐसी रीति से किया जाएगा जो केन्द्रीय सरकार, आदेश द्वारा, अवधारित करे :

                परंतु किसी पब्लिक सेक्टर की कोयला कंपनी द्वारा बोर्ड को प्रदाय किए गए कोयला के असंदत्त शोध्यों की बाबत उक्त बोर्ड के किन्हीं दायित्वों को विद्यमान मध्य प्रदेश राज्य के उत्तरवर्ती राज्यों के क्रमशः गठित उत्तरवर्ती संगठनों के बीच अनंतिम रूप से प्रभाजित किया जाएगा या इस उपधारा के अधीन बोर्ड के विघटन के लिए नियत तारीख के पश्चात् ऐसी रीति में जो उत्तरवर्ती राज्यों की सरकारों के बीच करार पाई जाए, ऐसे विघटन से एक मास के भीतर अथवा ऐसा कोई करार नहीं किया जाता है तो ऐसी रीति में प्रभाजित किया जाएगा जो केन्द्रीय सरकार, आदेश द्वारा, दायित्वों के समाधान और अन्तिम रूप दिए जाने के अधीन अवधारित करे जो उत्तरवर्ती राज्यों के बीच पारस्परिक करार के द्वारा ऐसे विघटन की तारीख से तीन मास के भीतर पूरा किया जाएगा या ऐसे करार की असफलता की दशा में केन्द्रीय सरकार के निदेश द्वारा प्रभाजित किया जाएगा :

                परन्तु यह और कि पब्लिक सेक्टर की कोयला कंपनी द्वारा बोर्ड को प्रदाय किए गए कोयला के असंदत्त शोध्यों के बकाया पर दो प्रतिशत की दर से ब्याज जो रोकड़ जमा ब्याज से उच्चतर है तब तक संदत्त किया जाएगा जब तक कि उत्तरवर्ती राज्यों में इस उपधारा के अधीन बोर्ड के विघटन के लिए नियत तारीख को या उसके पश्चात् गठित संबद्ध उत्तरवर्ती संगठनों द्वारा ऐसे शोध्यों का समापन नहीं कर दिया जाता है ।     

                (4) इस धारा के पूर्ववर्ती उपबंधों की किसी बाबत का यह अर्थ नहीं लगाया जाएगा कि वह, यथास्थिति, मध्य प्रदेश राज्य की सरकार या छत्तीसगढ़ राज्य की सरकार को, नियत दिन को या उसके पश्चात् किसी समय राज्य विद्युत बोर्ड या राज्य सड़क परिवहन निगम या राज्य भाण्डागारण निगम से संबंधित इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन उस राज्य के लिए ऐसा बोर्ड या निगम गठित करने से निवारित करती है ; और यदि इन राज्यों में से किसी में ऐसे बोर्ड या निगम का इस प्रकार गठन  उपधारा (1) में निर्दिष्ट बोर्ड या निगम के विघटन से पहले किया जाता है तो- 

(क) उस राज्य में विद्यमान बोर्ड या निगम से उसके सभी या किन्हीं उपक्रमों, आस्तियों, अधिकारों और दायित्वों को ग्रहण करने के लिए नए बोर्ड या नए निगम को समर्थ बनाने के लिए उपबंध केन्द्रीय सरकार के आदेश द्वारा किया जा सकेगा; और -

(ख) विद्यमान बोर्ड या निगम के विघटन पर,-

(i) कोई आस्ति, अधिकार और दायित्व जो अन्यथा उपधारा (3) के उपबंधों द्वारा या उनके अधीन उस राज्य को संक्रांत हो जाते, उस राज्य की बजाय नए बोर्ड या नए निगम को संक्रांत हो जाएंगे ; 

(ii) कोई ऐसा कर्मचारी, जो उपधारा (5) के खंड (i) के साथ पठित उपधारा (3) के अधीन उस राज्य को अन्यथा स्थानांतरित हो जाता या उसके द्वारा पुनः नियोजित किया जाता, उस राज्य को स्थानांतरित या उसके द्वारा पुनः नियोजित किए जाने के बजाय नए बोर्ड या नए निगम को स्थानांतरित हो जाएगा या उसके द्वारा  पुनः नियोजित किया जाएगा । 

                (5) उत्तरवर्ती राज्यों के बीच उपधारा (3) के अधीन हुए करार में और केन्द्रीय सरकार द्वारा उस उपधारा के अधीन अथवा उपधारा (4) के खंड (क) के अधीन किए गए आदेश में उपधारा (1) में निर्दिष्ट बोर्ड या निगम के किसी कर्मचारी के-

(i) उपधारा (4) के अधीन करार या उस उपधारा के अधीन किए गए आदेश की दशा में, उत्तरवर्ती राज्यों को या उनके द्वारा ;

(ii) उस उपधारा के खंड (क) के अधीन किए गए आदेश की दशा में, उपधारा (4) के अधीन गठित नए बोर्ड या नए निगम को या उसके द्वारा,

स्थानांतरण या पुनः नियोजन के लिए और धारा 64 के उपबंधों के अधीन रहते हुए ऐसे स्थानांतरण या पुनः नियोजन के पश्चात् ऐसे कर्मचारियों को लागू सेवा के निबंधनों और शर्तों के लिए भी उपबंध किया जा सकेगा ।

59. मध्य प्रदेश राज्य वित्तीय निगम के बारे में उपबंध-(1) राज्य वित्तीय निगम अधिनियम, 1951 (1951 का 63) के अधीन स्थापित मध्य प्रदेश राज्य वित्तीय निगम नियत दिन से ही, उन क्षेत्रों में जिनके संबंध में वह उस दिन के ठीक पूर्व कार्य कर रहा था, इस धारा के उपबंधों तथा ऐसे निदेशों के अधीन रहते हुए, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा समय-समय पर उत्तरवर्ती राज्यों की सरकारों से परामर्श के पश्चात् जारी किए जाएं, कार्य करता रहेगा ।

(2) उपधारा (1) के अधीन निगम के बारे में केन्द्रीय सरकार द्वारा जारी किए गए किन्हीं निदेशों के अंतर्गत ऐसा निदेश भी हो सकेगा कि उक्त अधिनियम, निगम को लागू होने में, ऐसे अपवादों तथा उपांतरों के अधीन रहते हुए प्रभावी होगा जो निदेश में विनिर्दिष्ट किए जाएं ।

(3) उपधारा (1) या उपधारा (2) में किसी बात के होते हुए भी, निगम का निदेशक बोर्ड, केन्द्रीय सरकार के पूर्वानुमोदन से और यदि केन्द्रीय सरकार द्वारा ऐसी अपेक्षा की जाए तो, नियत दिन के पश्चात् किसी समय निगम के, यथास्थिति, पुनर्गठन या पुनर्संगठन या विघटन की स्कीम के संबंध में, जिसके अतंर्गत नए निगमों के बनाए जाने और विद्यमान निगम की आस्तियां, अधिकार तथा दायित्व उन्हें अंतरित किए जाने की प्रस्थापनाएं भी हैं, विचारार्थ अधिवेशन बुला सकेगा और यदि ऐसी स्कीम उपस्थित और मत देने वाले शेयरधारकों के बहुमत से साधारण अधिवेशन में पारित संकल्प द्वारा अनुमोदित कर दी जाए तो वह स्कीम केन्द्रीय सरकार को उसकी मंजूरी के लिए प्रस्तुत की जाएगी ।

(4) यदि स्कीम केन्द्रीय सरकार द्वारा उपांतरों के बिना या ऐसे उपांतरणों के सहित जो साधारण अधिवेशन में अनुमोदित हुए हैं, मंजूर कर ली जाती है तो केन्द्रीय सरकार, स्कीम को प्रमाणित करेगी और ऐसे प्रमाणन पर वह स्कीम, तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में तत्प्रतिकूल किसी बात के होते हुए भी, उस स्कीम द्वारा प्रभावित निगमों पर तथा उनके शेयरधारकों और लेनदारों पर भी आबद्धकर होगी । 

(5) यदि स्कीम इस प्रकार अनुमोदित या मंजूर नहीं की जाती है तो केन्द्रीय सरकार इस स्कीम को मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के ऐसे न्यायाधीश को, जो उसके मुख्य न्यायमूर्ति द्वारा इस निमित्त नामनिर्देशित किया जाए, निर्देशित कर सकेगी और उस स्कीम के बारे में न्यायाधीश का विनिश्चय अंतिम होगा और स्कीम द्वारा प्रभावित निगमों पर तथा उनके शेयरधारकों और लेनदारों पर भी आबद्धकर होगा ।

(6) इस धारा के पूर्ववर्ती उपबंधों की किसी बात का यह अर्थ नहीं लगाया जाएगा कि वह मध्य प्रदेश राज्य और छत्तीसगढ़ राज्य की सरकार को नियत दिन को या उसके पश्चात् किसी समय राज्य वित्तीय निगम अधिनियम, 1951 (1951 का 63) के अधीन उस राज्य के लिए किसी राज्य वित्तीय निगम का गठन करने से निवारित करती है ।

60. कतिपय कम्पनियों के बारे में उपबंध-(1) इस भाग के पूर्वगामी उपबंधों में किसी बात के होते हुए भी इस अधिनियम की सातवीं अनुसूची में विनिर्दिष्ट प्रत्येक कंपनी, नियत दिन से ही और तब तक जब तक कि किसी विधि में या उत्तरवर्ती राज्यों के बीच किसी करार में या केन्द्रीय सरकार द्वारा जारी किए गए किसी निदेश में अन्यथा उपबंधित न हो, उन क्षेत्रों में, जिनमें वह उस दिन के ठीक पूर्व कार्य कर रही थी, कार्य करती रहेगी, और केन्द्रीय सरकार उत्तरवर्ती राज्यों की सरकारों से परामर्श के पश्चात्, कम्पनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) में या किसी अन्य विधि में तत्प्रतिकूल किसी बात के होते हुए भी, ऐसे कार्यकरण के संबंध में,       समय-समय पर, ऐसे निदेश दे सकेगी, जो वह ठीक समझे ।

(2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट किसी कंपनी के संबंध में, उस उपधारा के अधीन जारी किए गए किन्हीं निदेशों में निम्नलिखित के संबंध में निदेश भी हो सकेंगे-

                (क)  मध्य प्रदेश राज्य और छ्त्तीसगढ़ राज्य के बीच कंपनी में हितों और शेयरों का विभाजन ;

                (ख) कंपनी के निदेशक बोर्ड के पुनर्गठन की अपेक्षा करने के लिए निदेश, जिससे कि दोनों उत्तरवर्ती राज्यों को यथोचित प्रतिनिधित्व दिया जा सके ।

61. राज्य सरकार के आदेश से निगमित संगठनों, रजिस्ट्रीकृत सोसाइटी या न्यास का कार्यकरण-(1) इस भाग के पूर्वगामी उपबंधों और तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी राज्य सरकार के आदेश से निगमित कोई संगठन, रजिस्ट्रीकृत सोसाइटी या न्यास, नियत दिन को या से और तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में या उत्तरवर्ती राज्यों के बीच किसी करार में या केन्द्रीय सरकार द्वारा उत्तरवर्ती राज्यों से परामर्श करने के पश्चात् जारी किए गए किसी निर्देश में जब तक कि अन्यथा उपबंधित न हो, उन क्षेत्रों में कार्य करते रहेंगे जिनमें उस दिन से ठीक पहले वह कार्य कर रहा था और केन्द्रीय सरकार, उत्तरवर्ती राज्यों की सरकारों से परामर्श के पश्चात्, ऐसे कार्यकरण के संबंध में निर्देश जारी कर सकेगी ।

(2) उपधारा (1) के अधीन जारी किए गए किन्हीं निदेशों में निम्नलिखित के बारे में निदेश भी हो सकेंगे,-

                (i) संगठन, सोसाइटी या न्यास के, चाहे उन्हें किसी भी नाम से पुकारा जाए, निदेशक बोर्ड का पनुर्गठन ; या

                (ii) मुख्य कार्यपालक की नियुक्ति, चाहे उसे किसी नाम से पुकार जाए ; या

                (iii) विनियम या उपविधियां, चाहे उन्हें किसी नाम से पुकारा जाए ; या

                (iv) नियत प्रभारों को चुकाने के लिए विद्यमान मध्य प्रदेश राज्य द्वारा प्रदान की गई वित्तीय सहायता, यदि कोई हों, का निर्धारण और प्रभाजन ।

62. कानूनी निगमों के बारे में साधारण उपबंध-(1) इस भाग के पूर्वगामी उपबंधों द्वारा अभिव्यक्त रूप से जैसा अन्यथा उपबंधित है उसके सिवाय, जहां विद्यमान मध्य प्रदेश राज्य या उसके किसी भाग के लिए केन्द्रीय अधिनियम, राज्य अधिनियम या प्रांतीय अधिनियम के अधीन गठित कोई निगमित निकाय, इस अधिनियम के भाग 2 के उपबंधों के आधार पर अंतरराज्यिक निगमित निकाय हो गया है, वहां जब तक कि उक्त निगमित निकाय के बारे में विधि द्वारा अन्य उपबंध नहीं कर दिया जाता है, वह, नियत दिन से ही उन क्षेत्रों में जिनकी बाबत उस दिन के ठीक पूर्व कार्य कर रहा था और क्रियाशील था, ऐसे निदेशों के अधीन रहते हुए, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा उत्तरवर्ती राज्यों की सरकारों से परामर्श के पश्चात्, समय-समय पर जारी किए जाएं, कार्य करता रहेगा और क्रियाशील बना रहेगा ।

(2) केन्द्रीय सरकार द्वारा ऐसे निगमित निकाय की बाबत उपधारा (1) के अधीन दिए गए किन्हीं निदेशों के अंतर्गत यह निदेश भी होगा कि कोई विधि, जिसके द्वारा उक्त निगमित निकाय शासित होता है, उस निगमित निकाय को लागू होने में, ऐसे अपवादों और उपांतरों के अधीन प्रभावी होगी जो उस निदेश में विनिर्दिष्ट हों ।

63. कतिपय विद्यमान सड़क परिवहन अनुज्ञापत्रों के चालू रहने के बारे में अस्थायी उपबंध-(1) मोटर यान अधिनियम,    1988 (1988 का 59) की धारा 88 में किसी बात के होते हुए भी, विद्यमान मध्य प्रदेश राज्य के राज्य परिवहन प्राधिकारी या उस राज्य में किसी प्रादेशिक परिवहन प्राधिकारी द्वारा, अनुदत्त अनुज्ञापत्र, यदि ऐसा अनुज्ञापत्र नियत दिन के ठीक पूर्व अंतरित राज्यक्षेत्र के किसी क्षेत्र में विधिमान्य और प्रभावी था, उस अधिनियम के उपबंधों के अधीन रहते हुए जो तत्समय उस क्षेत्र में प्रवृत्त हो, उस क्षेत्र में उस दिन के पश्चात् विधिमान्य और प्रभावी समझा जाएगा और ऐसे किसी अनुज्ञापत्र पर उस क्षेत्र में उपयोग के लिए उसे विधिमान्य करने के प्रयोजन के लिए छत्तीसगढ़ राज्य परिवहन प्राधिकरण या छत्तीसगढ़ में किसी प्रादेशिक परिवहन प्राधिकरण द्वारा प्रतिहस्ताक्षर किया जाना आवश्यक नहीं होगा : 

परंतु केन्द्रीय सरकार, उत्तरवर्ती राज्य सरकार या संबद्ध सरकारों से परामर्श के पश्चात् उन शर्तों में, जो अनुज्ञापत्र देने वाले प्राधिकरण द्वारा अनुज्ञापत्र से संलग्न की गई हों, परिवर्धन, संशोधन या परिवर्तन कर सकेगी ।

(2) किसी ऐसे अनुज्ञापत्र के अधीन उत्तरवर्ती राज्यों में से किसी में कोई परिवहन यान प्रचालित करने के लिए नियत दिन के पश्चात् किसी परिवहन यान की बाबत कोई पथकर, प्रवेश फीस या वैसी ही प्रकृति के अन्य प्रभार उद्गृहीत नहीं किए जाएंगे यदि ऐसे यान को उस दिन के ठीक पूर्व अंतरित राज्यक्षेत्र में प्रचालित करने के लिए ऐसे किसी पथकर, प्रवेश फीस या अन्य प्रभारों के संदाय से छूट प्राप्त थी :

परंतु केन्द्रीय सरकार, संबद्ध राज्य सरकार या सरकारों से परामर्श के पश्चात्, यथास्थिति, पथकर, प्रवेश फीस या अन्य प्रभार के उद्ग्रहरण को प्राधिकृत कर सकेगी ।

64. कतिपय मामलों में छंटनी प्रतिकर से संबंधित विशेष उपबंध-जहां किसी केन्द्रीय अधिनियम, राज्य अधिनियम या प्रांतीय अधिनियम के अधीन गठित कोई निगमित निकाय, सहकारी सोसाइटियों से संबंधित किसी विधि के अधीन रजिस्ट्रीकृत कोई सहकारी सोसाइटी या उस राज्य का कोई वाणिज्यिक या औद्योगिक उपक्रम इस अधिनियम के अधीन विद्यमान मध्य प्रदेश राज्य के पुनर्गठन के कारण किसी भी रीति से पुनर्गठित या पुनर्संगठित किया जाता है या किसी अन्य निगमित निकाय, सहकारी सोसाइटी या उपक्रम के साथ समामेलित किया जाता है या विघटित किया जाता है और ऐसे पुनर्गठन, पुनर्संगठन, समामेलन या विघटन के परिणामस्वरूप ऐसे निगमित निकाय या किसी ऐसी सहकारी सोसाइटी या उपक्रम द्वारा नियोजित किसी कर्मकार को किसी अन्य निगमित निकाय को या किसी अन्य सहकारी सहकारी सोसाइटी या उपक्रम को अंतरित या उसके द्वारा पुनर्नियोजित किया जाता है वहां औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 (1947 का 14) की धारा 25च, या धारा 25चच या धारा 25चचच में  किसी बात के होते हुए भी, ऐसा अंतरण या पुनर्नियोजन उसे उक्त धारा के अधीन किसी प्रतिकर का हकदार नहीं बनाएगा :

परतुं यह तब जब कि-

(क) ऐसे अंतरण या पुनर्नियोजन के पश्चात् कर्मकार को लागू होने वाले सेवा के निबंधन और शर्तें ऐसे अंतरण या पुनर्नियोजन से ठीक पूर्व उसे लागू होने वाले निबंधनों और सेवा-शर्तों से कम अनुकूल न हों ;

(ख) उस निगमित निकाय, सहकारी सोसाइटी या उपक्रम से, जहां कर्मकार अंतरित या पुनर्नियोजित हो, संबंधित नियोजक करार द्वारा या अन्यथा उस कर्मकार को उसकी छंटनी की दशा में इस आधार पर कि उसकी सेवा चालू रही है और अंतरण या पुनर्नियोजन द्वारा उसमें बाधा नहीं पड़ी है औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 (1947 का 14) की धारा 25च या धारा 25चच या धारा 25चचच के अधीन विधिक रूप से प्रतिकर देने का दायी होगा ।

65. आय-कर के बारे में विशेष उपबंध-जहां इस भाग के उपबंधों के अधीन कोई कारबार चलाने वाले किसी निगमित निकाय की आस्तियां, अधिकार और दायित्व, किसी ऐसे अन्य निगमित निकायों को, अंतरित किए जाते हैं, जो अंतरण के पश्चात् वही कारबार चलाते हों, वहां प्रथम वर्णित निगमित निकाय को हुई हानियां, लाभ या अभिलाभ जो अंतरण न होने पर आय-कर अधिनियम, 1961 (1961 का 43) के अध्याय 6 के उपबंधों के अनुसार अग्रनीत या मुजरा किए जाते, केन्द्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त बनाए जाने वाले नियमों के अनुसार अंतरिती निगमित निकायों में प्रभाजित किए जाएंगे और ऐसे प्रभाजन पर प्रत्येक अंतरिती निगमित निकाय को आबंटित हानि के अंश के संबंध में कार्यवाही उक्त अधिनियम के अध्याय 6 के उपबंधों के अनुसार की जाएगी मानो वे हानियां स्वयं अंतरिती निगमित निकाय को अपने द्वारा किए गए कारबार में उन वर्षों में हुई हों जिनमें हानियां हुईं ।

66. कतिपय राज्य संस्थाओं में सुविधाओं का जारी रहना-(1) यथास्थिति, मध्य प्रदेश राज्य या छत्तीसगढ़ राज्य की सरकार, इस अधिनियम की आठवीं अनुसूची में विनिर्दिष्ट संस्थाओं की बाबत, जो उस राज्य में अवस्थित हैं, ऐसी सुविधाएं अन्य राज्य के लोगों को ऐसी अवधि तक और ऐसे निबंधनों और शर्तों पर प्रदान करती रहेगी जो दोनों राज्य सरकारों के बीच नियत तारीख से एक वर्ष की अवधि के भीतर, या यदि उक्त एक वर्ष की अवधि के भीतर कोई करार नहीं हो पाता तो जैसा केन्द्रीय सरकार के आदेश द्वारा नियत किया जाए, और वे किसी भी प्रकार से उन लोगों के लिए उन सुविधाओं से कम अनुकूल नहीं होगी जो उन्हें नियत दिन के पूर्व दी जा रही थीं ।

(2) केन्द्रीय सरकार, नियत दिन से एक वर्ष के अवधि की भीतर, किसी भी समय, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, मध्य प्रदेश और छ्त्तीसगढ़ राज्यों में नियत दिन को विद्यमान किसी अन्य संस्था को आठवीं अनुसूची में विनिर्दिष्ट कर सकेगी और ऐसी अधिसूचना के जारी किए जाने पर यह समझा जाएगा कि अनुसूची का संशोधन उक्त संस्था को उसमें सम्मिलित करके किया गया है ।

भाग 8

सेवाओं के बारे में उपबंध

67. अखिल भारतीय सेवाओं से संबंधित उपबंध-(1) इस धारा में राज्य काडर" पद का-

(क) भारतीय प्रशासनिक सेवा के संबंध में वही अर्थ है जो भारतीय प्रशासनिक सेवा (काडर) नियम, 1954 में है ; 

(ख) भारतीय पुलिस सेवा के संबंध में वही अर्थ है जो भारतीय पुलिस सेवा (काडर) नियम, 1954 में है ;

(ग) भारतीय वन सेवा के संबंध में वही अर्थ है जो भारतीय वन सेवा (काडर) नियम, 1966 में है ।

(2) विद्यमान मध्य प्रदेश राज्य के लिए भारतीय प्रशासनिक सेवा, भारतीय पुलिस सेवा और भारतीय वन सेवा के काडरों के स्थान पर, नियत दिन से ही इन सेवाओं में से प्रत्येक की बाबत दो पृथक् काडर होंगे जिनमें से एक मध्य प्रदेश राज्य के लिए और दूसरा छत्तीसगढ़ राज्य के लिए होगा ।

(3) उपधारा (2) में निर्दिष्ट राज्य काडरों की प्रारंभिक सदस्य-संख्या और संरचना ऐसी होगी जो केन्द्रीय सरकार नियत दिन से पूर्व आदेश द्वारा, अवधारित करे ।

(4) उक्त सेवा में से प्रत्येक के ऐसे सदस्य जो नियत दिन के ठीक पहले मध्य प्रदेश काडर में के थे, उपधारा (2) के अधीन गठित उसी सेवा के राज्य काडरों को ऐसी रीति से और ऐसी तारीख या तारीखों से आबंटित किए जाएंगे जो केन्द्रीय सरकार आदेश द्वारा विनिर्दिष्ट करे ।

(5) इस धारा की कोई बात नियत दिन को या उसके पश्चात् अखिल भारतीय सेवा अधिनियम, 1951 (1951 का 61) या इसके अधीन बनाए गए नियमों या विनियमों के प्रवर्तन पर प्रभाव डालने वाली नहीं समझी जाएगी ।

68. मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की सेवाओं से संबंधित उपबंध-(1) प्रत्येक व्यक्ति, जो नियत दिन के ठीक पहले विद्यमान मध्य प्रदेश राज्य के क्रियाकलापों के संबंध में सेवा कर रहा हो, उस दिन से ही, जब तक केन्द्रीय सरकार के किसी साधारण या विशिष्ट आदेश द्वारा उससे अनंतिम रूप से छत्तीसगढ़ राज्य के क्रियाकलापों के संबंध में सेवा करने की अपेक्षा न की जाए, अनंतिम रूप से मध्य प्रदेश राज्य के क्रियाकलापों के संबंध में सेवा करता रहेगा :

परन्तु इस धारा के अधीन कोई निदेश नियत दिन से एक वर्ष की अवधि की समाप्ति के पश्चात् जारी नहीं किया जाएगा ।

(2) नियत दिन के पश्चात्, यथाशक्य शीघ्र, केन्द्रीय सरकार, साधारण या विशेष आदेश द्वारा वह उत्तरवर्ती राज्य, जिसे उपधारा (1) में निर्दिष्ट प्रत्येक व्यक्ति सेवा के लिए अंतिम रूप से आबंटित होगा और वह तारीख जिससे ऐसा आबंटन प्रभावी होगा या प्रभावी हुआ समझा जाएगा, निर्धारित करेगी ।

(3) ऐसा प्रत्येक व्यक्ति जो उपधारा (2) के उपबंधों के अधीन अंतिम रूप से किसी उत्तरवर्ती राज्य को आबंटित किया जाता है, यदि वह पहले से उस राज्य में सेवा नहीं कर रहा है, ऐसी तारीख से जो संबंधित सरकारों के बीच करार पाई जाए या ऐसे किसी करार के अभाव में, उस तारीख से जो केन्द्रीय सरकार द्वारा अवधारित की जाए, उत्तरवर्ती राज्य में सेवा करने के लिए उपलब्ध    कराया जाएगा ।

69. सेवाओं से संबंधित अन्य उपबंध-(1) इस धारा या धारा 68 की कोई बात नियत दिन से या उसके पश्चात् संघ या किसी राज्य के कार्यकलाप के संबंध में सेवा करने वाले व्यक्तियों की सेवा शर्तों के अवधारण के संबंध में संविधान के भाग 14 के अध्याय 1 के उपबंधों के प्रवर्तन पर प्रभाव डालने वाली नहीं समझी जाएगी :

परन्तु ऐसे किसी व्यक्ति की दशा में जिसे धारा 68 के अधीन मध्य प्रदेश राज्य को या छत्तीसगढ़ राज्य को आबंटित समझा गया है, नियत दिन के ठीक पूर्व लागू होने वाली सेवा की शर्तों में उसके लिए अलाभकर परिवर्तन केन्द्रीय सरकार के पूर्व अनुमोदन के बिना नहीं किया जाएगा ।

(2) किसी व्यक्ति द्वारा नियत दिन के पहले की गई सभी सेवाएं, उसकी सेवा की शर्तों को विनियमित करने वाले नियमों के प्रयोजनों के लिए-

(क) यदि उसे धारा 68 के अधीन किसी राज्य को आबंटित किया गया समझा जाए तो उस राज्य के कार्यकलाप के संबंध में की गई सेवाएं मानी जाएंगी ;

(ख) यदि उसे छत्तीसगढ़ के प्रशासन के संबंध में संघ को आबंटित किया गया समझा जाए तो संघ के कार्यकलाप के संबंध में की गई सेवाएं मानी जाएंगी ।

(3) धारा 68 के उपबंध किसी अखिल भारतीय सेवा के सदस्यों के संबंध में लागू नहीं होंगे ।

70. अधिकारियों के उसी पद पर बने रहने के बारे में उपबंध-प्रत्येक व्यक्ति जो नियत दिन के ठीक पूर्व विद्यमान मध्य प्रदेश राज्य के कार्यकलाप के संबंध में ऐसे किसी क्षेत्र में जो उस दिन उत्तरवर्ती राज्यों में से किसी में आता है, किसी पद या अधिकार पद को धारण करता हो या उसके कर्तव्यों का निर्वहन करता हो, उस उत्तरवर्ती राज्य में वही पद या अधिकार पद धारण करता रहेगा और उस दिन से ही उत्तरवर्ती राज्य की सरकार द्वारा या उस राज्य में किसी समुचित प्राधिकारी द्वारा उस पद या अधिकार पद पर सम्यक् रूप से नियुक्त किया गया समझा जाएगा :

परन्तु इस धारा की कोई बात किसी सक्षम प्राधिकारी को नियत दिन से ही ऐसे व्यक्ति के संबंध में उसके ऐसे पद या अधिकार पद पर बने रहने पर प्रभाव डालने वाला आदेश पारित करने से निवारित करने वाली नहीं समझी जाएगी ।

71. सलाहकार समितियां-(1) केन्द्रीय सरकार, निम्नलिखित के संबंध में अपनी सहायता के प्रयोजनार्थ आदेश द्वारा एक या अधिक सलाहकार समितियां स्थापित कर सकेगी-

(क) इस भाग के अधीन अपने किसी कृत्य का निर्वहन करना ; और

(ख) इस भाग के उपबंधों द्वारा प्रभावित सभी व्यक्तियों के साथ ऋजु और साम्यापूर्ण व्यवहार को सुनिश्चित करना और ऐसे व्यक्तियों द्वारा किए गए किन्हीं अभ्यावेदनों पर उचित रूप से विचार करना ।

72. निदेश देने की केन्द्रीय सरकार की शक्ति-केन्द्रीय सरकार, मध्य प्रदेश राज्य की सरकार और छत्तीसगढ़ राज्य की सरकार को ऐसे निदेश दे सकेगी जो उसे इस भाग के पूर्वगामी उपबंधों को प्रभावी करने के लिए आवश्यक प्रतीत हों और राज्य सरकारें ऐसे निदेशों का अनुपालन करेंगी ।

73. राज्य लोक सेवा आयोग के बारे में उपबंध-(1) विद्यमान मध्य प्रदेश राज्य का लोक सेवा आयोग नियत दिन से ही मध्य प्रदेश राज्य का लोक सेवा आयोग होगा ।

(2) नियत दिन के ठीक पूर्व विद्यमान मध्य प्रदेश राज्य के लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या अन्य सदस्य का पद धारण करने वाले व्यक्ति नियत दिन से मध्य प्रदेश राज्य के लोक सेवा आयोग का, यथास्थिति, अध्यक्ष या अन्य सदस्य होगा ।

(3) ऐसा प्रत्येक व्यक्ति जो उपधारा (2) के अधीन नियत दिन से मध्य प्रदेश राज्य लोक सेवा आयोग का अध्यक्ष या अन्य सदस्य हो जाए,-

(क) मध्य प्रदेश राज्य की सरकार से सेवा की ऐसी शर्तें प्राप्त करने का हकदार होगा जो उन शर्तों से कम अनुकूल नहीं होंगी, जिन्हें उसे लागू होने वाले उपबंधों के अधीन वह प्राप्त करने का हकदार था ;

(ख) अनुच्छेद 316 के खंड (2) के परन्तुक के अधीन रहते हुए, नियत दिन के ठीक पूर्व उसे लागू होने वाले उपबंधों के अधीन यथा अवधारित उसकी पदावधि का जब तक अवसान न हो, तब तक पद धारण करेगा या धारण किए रहेगा ।

 (4) मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा नियत दिन से पूर्व किसी अवधि की बाबत किए गए कार्य के बारे में आयोग की रिपोर्ट अनुच्छेद 323 के खंड (2) के अधीन मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ राज्यों के राज्यपालों को प्रस्तुत की जाएगी और मध्य प्रदेश राज्य का राज्यपाल ऐसी रिपोर्ट की प्राप्ति पर, जहां तक संभव हो उन दशाओं के संबंध में, यदि कोई हों, जहां आयोग की सलाह स्वीकार नहीं की गई थी, दिए गए स्पष्टीकरण के ज्ञापन और इस प्रकार स्वीकार न किए जाने के लिए कारणों के साथ उस रिपोर्ट की प्रति मध्य प्रदेश राज्य के विधान-मंडल के समक्ष रखवाएगा और छत्तीसगढ़ राज्य की विधान-सभा के समक्ष ऐसी रिपोर्ट या किसी ऐसे ज्ञापन को रखवाना आवश्यक नहीं होगा ।

74. आयोगों, प्राधिकरणों और अधिकरणों की अधिकारिता-(1) तत्समय प्रवृत्त किसी विधि में किसी बात के होते हुए भी किसी केन्द्रीय अधिनियम, राज्य अधिनियम या प्रान्तीय अधिनियम के अधीन गठित प्रत्येक आयोग, प्राधिकरण, अधिकरण, विश्वविद्यालय, बोर्ड या कोई अन्य निकाय, जिसकी अधिकारिता विद्यमान मध्य प्रदेश राज्य पर हैं, नियत तारीख से ही उत्तरवर्ती मध्य प्रदेश राज्य में कार्य करना जारी रखेगा और नियत तारीख से पूर्व यथाविद्यमान अधिकारिता का प्रयोग नियत तारीख से दो वर्ष की अधिकतम अवधि के लिए या ऐसी अवधि तक, जो निम्नलिखित की बाबत उत्तरवर्ती राज्यों के बीच पारस्परिक करार द्वारा विनिश्चित की जाती है, छत्तीसगढ़ राज्य पर भी करेगा-

                (i) ऐसे निकाय को उत्तरवर्ती राज्यों के लिए संयुक्त निकाय के रूप में बनाए रखना; या

(ii) उक्त अवधि की समाप्ति पर उत्तरवर्ती राज्यों में से किसी राज्य के लिए इसे समाप्त करना ; या

(iii) छत्तीसगढ़ राज्य के लिए, यथास्थिति, एक पृथक् आयोग, प्राधिकरण, अधिकरण, विश्वविद्यालय, बोर्ड या कोई अन्य निकाय, गठित करना,

जो भी पूर्वतर हो ।

(2) उपधारा (1) के खंड (ii) के अधीन ऐसे किसी निकाय को समाप्त किए जाने की दशा में, ऐसे निकाय के किसी कर्मचारी द्वारा, उसकी नियुक्ति के पर्यवसान के विरुद्ध या किसी सेवा शर्त को लागू करने के लिए या वैकल्पिक पब्लिक नियोजन में आमेलन सुनिश्चित करने के लिए, केन्द्रीय सरकार या किसी उत्तरवर्ती राज्य के विरुद्ध कोई वाद या अन्य विधिक कार्यवाही संस्थित नहीं        की जाएगी ।

(3) तत्समय प्रवृत्त किसी विधि में या न्यायालय या अधिकरण के किसी निर्णय, डिक्री या आदेश या संविदा या करार में किसी बात के होते हुए भी, उपधारा (1) के खंड (ii) के अधीन समाप्त किए गए किसी निकाय का कोई अध्यक्ष या सदस्य उसकी पदावधि की शेष अवधि के लिए किसी प्रतिकर का हकदार नहीं होगा ।

(4) इस धारा में या तत्समय प्रवृत्त किसी विधि में किसी बात के होते हुए भी, केन्द्रीय सरकार उत्तरवर्ती राज्यों के बीच किसी पारस्परिक करार के अनुसरण में या यदि ऐसा कोई करार न हो तो उत्तरवर्ती राज्यों की सरकारों से परामर्श करने के पश्चात् उपधारा (1) में निर्दिष्ट किसी अवधि के भीतर किसी उत्तरवर्ती राज्य की अधिकारिता के भीतर आने वाले किसी निकाय से संबंधित किसी विषय के बारे में संकल्प के लिए निदेश जारी करेगी ।

 

 

भाग 9

विद्युत और जल स्रोतों का प्रबंध और विकास

75. कतिपय दशाओं में विद्युत और जल प्रदाय का प्रबंध-(1) जहां केन्द्रीय सरकार को यह प्रतीत होता है कि किसी क्षेत्र के लिए विद्युत शक्ति के उत्पादन या प्रदाय अथवा जल प्रदाय के संबंध में अथवा ऐसे उत्पादन या प्रदाय के लिए किसी परियोजना के कार्यान्वयन के संबंध में किसी इंतजाम में ऐसा कोई उपांतरण किया गया है या किए जाने की संभावना है जो उत्तरवर्ती राज्यों के बनने के कारण उस क्षेत्र के लिए अलाभकर होगा वहां केन्द्रीय सरकार उत्तरवर्ती राज्यों से परामर्श के पश्चात्, राज्य सरकार या ऐसे इंतजाम के रखरखाव के लिए नियत दिन से पहले उत्तरदायी अन्य प्राधिकरी को निदेश दे सकेगी ।

(2) केन्द्रीय सरकार नियत दिन से तीन मास की अवधि के भीतर आदेश द्वारा केन्द्रीय सरकार के उपक्रमों द्वारा उत्पादित विद्युत के लिए विद्यमान मध्य प्रदेश राज्य के हक में उन सम्भाव्य अलाभ को ध्यान में रखते हुए जो विद्युत शक्ति के उत्पादन और प्रदाय के लिए उपांतरित इंतजामों के परिणामस्वरूप किसी उत्तरवर्ती राज्य को हो सकता है, उत्तरवर्ती राज्यों के अंश अवधारित   करेगी ।

76. अंतरराज्यिक नदी जल बोर्ड-(1) केन्द्रीय सरकार जब भी आवश्यक समझे, उत्तरवर्ती राज्यों से परामर्श के पश्चात्, अंतरराज्यिक नदी और नदीघाटी की योजना और उसके विकास के लिए अन्तरराज्यिक नदी जल बोर्ड का गठन कर सकेगी ।

(2) उपधारा (1) के अधीन गठित अंतरराज्यिक नदी जल बोर्ड को निम्नलिखित कृत्य सोंपे जाएंगे, अर्थात् :-

(क) विभिन्न परियोजनाओं के लिए, ऐसी परियोजनाओं के लिए अधिकथित कार्यक्रम के अनुसार निधियों की अपेक्षा की परीक्षा करना और उनकी लागतों में हिस्सा बटाने के बारे में करार को दृष्टिगत रखते हुए ऐसे कार्यक्रमों को कार्यान्वित करने के लिए भाग लेने वाले राज्यों को उक्त व्यय के प्रभाजन के संबंध में सलाह देना ;

(ख) उपलब्ध जल के बेहतर उपयोग को सुनिश्चित करने की दृष्टि से सिंचाई, विद्युत और अन्य प्रयोजनों के लिए जलाशयों के जल में हिस्सा निश्चित करना और उनसे जल निकालना ;

(ग) उक्त परियोजनाओं के फलस्वरूप विस्थापित व्यक्तियों के पुनर्वास के कार्यक्रमों का अवधारण करना ;

(घ) योजना का अनुमोदन और पर्यवेक्षण करना, संयुक्त अंतरराज्यिक परियोजना का सर्वेक्षण और अन्वेषण करना, तथा परियोजना तैयार करना, उसकी रिपोर्ट तैयार करना और उसका निर्माण करना तथा उसका पश्चात्वर्ती प्रचालन और रखरखाव करना ।

भाग 10

विधिक और प्रकीर्ण उपबंध

77. 1956 के अधिनियम 37 का संशोधन-नियत दिन से ही राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 की धारा 15 के खंड (ख) में उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश" शब्दों के स्थान पर, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़" शब्द रखे जाएंगे ।

78. विधियों का राज्यक्षेत्रीय विस्तार-इस अधिनियम के भाग 2 के उपबंधों की बाबत यह नहीं समझा जाएगा कि उनसे उन राज्यक्षेत्रों में, जिन पर नियत दिन के ठीक पूर्व प्रवृत्त कोई विधि विस्तारित होती है या लागू होती है, कोई परिवर्तन हुआ है और ऐसी किसी विधि में मध्य प्रदेश राज्य के संबंध में राज्यक्षेत्रीय निर्देशों का, जब तक कि सक्षम विधान-मंडल या अन्य समक्ष प्राधिकारी द्वारा अन्यथा उपबंधित न कर दिया जाए, तब तक वही अर्थ लगाया जाएगा मानो वे नियत दिन के पहले विद्यमान मध्य प्रदेश राज्य के अन्दर हैं ।

79. विधियों के अनुकूलन की शक्ति-नियत दिन के पूर्व बनाई गई किसी विधि के मध्य प्रदेश राज्य या छत्तीसगढ़ राज्य के संबंध में लागू होने को सुकर बनाने के प्रयोजनार्थ समुचित सरकार उस दिन से दो वर्ष की समाप्ति के पूर्व आदेश द्वारा विधि के ऐसे अनुकूलन तथा उपांतरण, चाहे वे निरसन के रूप में हों या संशोधन के रूप में, जो आवश्यक या समीचीन हों, कर सकेगी और तब ऐसी प्रत्येक विधि, जब तक सक्षम विधान-मंडल या अन्य सक्षम प्राधिकारी द्वारा परिवर्तित, निरसित या संशोधित न कर दी जाए, तब तक इस प्रकार किए गए अनुकूलनों और उपांतरों के अधीन रहते हुए प्रभावी होगी ।

स्पष्टीकरण-इस धारा में समुचित सरकार" पद से अभिप्रेत है संघ सूची में प्रगणित किसी विषय से संबंधित किसी विधि के बारे में केन्द्रीय सरकार और किसी अन्य विधि के बारे में उसके किसी राज्य को लागू होने की दशा में, राज्य सरकार । 

80. विधियों के अर्थान्वयन की शक्ति-इस बात के होते हुए भी कि नियत दिन के पूर्व बनाई गई किसी विधि के अनुकूलन के लिए धारा 79 के अधीन कोई उपबंध नहीं किया गया है या अपर्याप्त उपबंध किया गया है, ऐसी विधि को प्रवर्तित करने के लिए अपेक्षित या सशक्त किया गया कोई न्यायालय, अधिकरण या प्राधिकारी, मध्य प्रदेश राज्य अथवा छत्तीसगढ़ राज्य के संबंध में उसके लागू होने को सुकर बनाने के प्रयोजनार्थ, उस विधि का अर्थान्वयन, सार पर प्रभाव डाले बिना ऐसी रीति से कर सकेगा, जो, यथास्थिति उस न्यायालय, अधिकरण या प्राधिकारी के समक्ष मामले की बाबत आवश्यक या उचित हो । 

81. कानूनी कृत्यों का प्रयोग करने के लिए प्राधिकारियों, आदि को नामित करने की शक्ति-छत्तीसगढ़ राज्य की सरकार, अन्तरित राज्यक्षेत्र की बाबत, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, ऐसा प्राधिकारी, अधिकारी या व्यक्ति विनिर्दिष्ट कर सकेगी जो नियत दिन को या उसके पश्चात् उस दिन प्रवृत्त किसी विधि के अधीन, ऐसे प्रयोक्तव्य कृत्यों का प्रयोग करने के लिए, जो उस अधिसूचना में वर्णित हों, सक्षम होगा और ऐसी विधि तद्नुसार प्रभावी होगी ।

82. विधिक कार्यवाहियां-जहां नियत दिन के ठीक पूर्व विद्यमान मध्य प्रदेश राज्य इस अधिनियम के अधीन मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ राज्यों के बीच प्रभाजनाधीन किसी सम्पत्ति, अधिकारों या दायित्वों की बाबत किन्हीं विधिक कार्यवाहियों का पक्षकार हो, वहां मध्य प्रदेश राज्य या छत्तीसगढ़ राज्य, जो इस अधिनियम के किसी उपबन्ध के आधार पर उस सम्पत्ति या उन अधिकारों या दायित्वों का उत्तरवर्ती हो या उसमें कोई भाग अर्जित करता हो, विद्यमान मध्य प्रदेश राज्य के स्थान पर प्रतिस्थापित किया गया या उन कार्यवाहियों में पक्षकार के रूप में जोड़ा गया समझा जाएगा और कार्यवाहियां तद्नुसार चालू रखी जा सकेंगी ।

83. लम्बित कार्यवाहियों का अन्तरण-(1) नियत दिन के ठीक पूर्व किसी ऐसे क्षेत्र में जो उस दिन मध्य प्रदेश राज्य के भीतर आता हो किसी न्यायालय (जिसके अंतर्गत उच्च न्यायालय है), अधिकरण, प्राधिकारी या अधिकारी के समक्ष लंबित प्रत्येक कार्यवाही, यदि वह कार्यवाही अनन्यतः अंतरित राज्यक्षेत्र से संबंधित हो, जो उस दिन से छत्तीसगढ़ राज्य का राज्यक्षेत्र है छत्तीसगढ़ राज्य के तत्स्थानी न्यायालय, अधिकरण, प्राधिकारी या अधिकारी को अंतरित हो जाएगी ।

(2) यदि कोई प्रश्न उठता है कि क्या उपधारा (1) के अधीन कोई कार्यवाही अंतरित हो जानी चाहिए तो वह प्रश्न मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय को निर्देशित किया जाएगा और उस उच्च न्यायालय का विनिश्चय अन्तिम होगा ।

(3) इस धारा में,-

(क) कार्यवाही" के अन्तर्गत कोई वाद, मामला या अपील है ; और

(ख) छत्तीसगढ़ राज्य में तत्स्थानी न्यायालय, अधिकरण, प्राधिकारी या अधिकारी" से अभिप्रेत है-

(i) वह न्यायालय, अधिकरण, प्राधिकारी या अधिकारी जिसमें या जिसके समक्ष वह कार्यवाही, संस्थित की जाती यदि वह नियत दिन के पश्चात् की गई होती ; या

(ii) शंका की दशा में उस राज्य का ऐसा न्यायालय, अधिकरण, प्राधिकारी या अधिकारी, जो नियत दिन के पश्चात्, यथास्थिति, छत्तीसगढ़ राज्य की सरकार या केन्द्रीय सरकार द्वारा या नियत दिन के पूर्व विद्यमान मध्य प्रदेश राज्य की सरकार द्वारा तत्स्थानी न्यायालय, अधिकरण, प्राधिकारी या अधिकारी के रूप में अवधारित किया जाए ।

84. कतिपय मामलों में प्लीडरों का विधि-व्यवसाय करने का अधिकार-कोई व्यक्ति, जो नियत दिन के ठीक पूर्व विद्यमान मध्य प्रदेश राज्य में किन्हीं अधीनस्थ न्यायालयों में विधि-व्यवसाय करने के लिए हकदार प्लीडर के रूप में नामावलीगत है, उस दिन से एक वर्ष की अवधि के लिए, इस बात के होते हुए भी, कि उन न्यायालयों की अधिकारिता के भीतर के संपूर्ण राज्यक्षेत्र या उसका कोई भाग छत्तीसगढ़ राज्य को अंरतित कर दिया गया है, उन न्यायालयों में विधि व्यवसाय करने का हकदार बना रहेगा ।

85. अन्य विधियों से असंगत अधिनियम के उपबंधों का प्रभाव-इस अधिनियम के उपबंध, किसी अन्य विधि में उनसे असंगत किसी बात के होते हुए भी, प्रभावी होंगे ।

86. कठिनाइयां दूर करने की शक्ति- (1) यदि इस अधिनियम के उपबंधों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है, तो राष्ट्रपति, आदेश द्वारा, ऐसी कोई भी बात कर सकेंगे, जो ऐसे उपबंधों से असंगत न हो और जो उस कठिनाई को दूर करने के प्रयोजन के लिए, उन्हें आवश्यक या समीचीन प्रतीत हो :

परंतु ऐसा कोई आदेश, नियत दिन से तीन वर्ष की अवधि की समाप्ति के पश्चात् नहीं किया जाएगा ।

(2) इस धारा के अधीन किया गया प्रत्येक आदेश, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखा जाएगा ।

 

पहली अनुसूची

(धारा 8 दखिए)

(1) पांच आसीन सदस्यों, अर्थात् श्री लक्खीराम अग्रवाल, श्री सुरेन्द्र कुमार सिंह, श्री सिकन्दर बख्त, श्री सुरेश पचौरी और श्री अब्दुल गयूर कुरैशी में से जिनकी पदावधि 9 अप्रैल, 2002 को समाप्त होगी ; श्री लक्खीराम अग्रवाल और श्री सुरेन्द्र कुमार सिंह छत्तीसगढ़ राज्य को आबंटित स्थानों में से दो स्थानों को भरने के लिए निर्वाचित समझे जाएंगे और अन्य तीन आसीन सदस्य मध्य प्रदेश राज्य को आबंटित स्थानों में से तीन स्थानों को भरने के लिए निर्वाचित समझे जाएंगे ।

(2) पांच आसीन सदस्यों अर्थात् श्री ओ० राज गोपाल, श्री दिलीप कुमार जुदेव, श्री झुमुक लाल भेंडिया, श्री बालकवि बैरागी और सुश्री माबेल रिबैलो में से, जिनकी पदावधि 30 जून 2004 को समाप्त होगी, श्री दिलीप कुमार जुदेव और श्री झुमुक लाल भेंडिया छत्तीसगढ़ राज्य को आबंटित स्थानों में से दो स्थान को भरने के लिए निर्वाचित समझे जाएंगे और अन्य तीन आसीन सदस्य मध्य प्रदेश राज्य को आबंटित स्थानों में से तीन स्थानों को भरने के लिए निर्वाचित समझे जाएंगे ।

(3) छह आसीन सदस्यों अर्थात्; श्री अर्जुन सिंह, श्री कैलाश जोशी, श्री भगत राम मनहर, श्री हंसराज भारद्वाज,               श्री पी० के० माहेश्वरी और श्री विक्रम वर्मा में से जिनकी पदावधि 2 अप्रैल, 2006 को समाप्त हो जाएगी, श्री भगत राम मनहर, छत्तीसगढ़ राज्य को आबंटित स्थानों में से एक स्थान को भरने के लिए निर्वाचित हुए समझे जाएंगे और अन्य पांच सदस्य मध्य प्रदेश राज्य को आबंटित पांच स्थानों को भरने के लिए निर्वाचित हुए समझे जाएंगे ।

 

दूसरी अनुसूची

(धारा 10 देखिए)

संसदीय और विधान सभा निर्वाचन-क्षेत्र परिसीमन आदेश,

1976 का संशोधन

संसदीय और विधान सभा निर्वाचन-क्षेत्र परिसीमन आदेश, 1976 में,-

1.  अनुसूची 12 में,-

(i) भाग क-संसदीय निर्वाचन-क्षेत्र में,-

(क) क्रम संख्यांक 12 से 22 (दोनों सम्मिलित हैं) और उनसे संबंधित प्रविष्टियों का लोप किया जाएगा ;

(ख) क्रम संख्या 10 में, निम्नलिखित अंकों, शब्दों, कोष्ठकों और अक्षरों का लोप किया जाएगा,             अर्थात् : -

                87. मनेन्द्रगढ़ (अ०ज०जा)" और 88. बैकुंठपुर" ।

(ii) भाग ख-विधान सभा निर्वाचन-क्षेत्र में,-क्रम संख्यांक 87 से 176 (दोनों सम्मिलित हैं) और उनसे संबंधित प्रविष्टियों का लोप किया जाएगा ।

                2. अनुसूची 12 के पश्चात् निम्नलिखित अनुसूची अन्तःस्थापित की जाएगी, अर्थात् :-

अनुसूची 12

छत्तीसगढ़

भाग क-संसदीय निर्वाचन-क्षेत्र

क्रम सं०

निर्वाचन-क्षेत्र का नाम और विस्तार

1

2

1.

सरगुजा (अ०ज०जा०)-2 बैकुंठपुर, 3-प्रेमनगर (अ०ज०जा०), 4-सूरजपुर (अ०ज०जा०), 5-पाल (अ०ज०जा०), 6-सामरी (अ०ज०जा०), 7-लुन्ड्रा (अ०ज०जा०), 8-पिलखा (अ०ज०जा०), 9-अंबिकापुर (अ०ज०जा०) और    10-सीतापुर (अ०ज०जा०) ।

2.

रायगढ़ (अ०ज०जा०)-11-बगीचा (अ०ज०जा०), 12-जशपुर (अ०ज०जा०), 13-तपकरा (अ०ज०जा०),14-पत्थलगांव (अ०ज०जा०), 15-धर्मजयगढ़ (अ०ज०जा०), 16-लैलूंगा (अ०ज०जा०), 17-रायगढ़ और 18-खरसिया ।

3.

जांजगीर-21- रामपुर (अ०ज०जा०), 22-कटघोरा, 23-तानाखार (अ०ज०जा०), 32-मस्तुरी (अ०जा०),33-सीपत, 34- अकलतरा, 36-चांपा और 37-सक्ती ।

4.

बिलासपुर (अ०जा०)-1-मनेन्द्रगढ़ (अ०ज०जा०), 24-मरवाही (अ०ज०जा०), 25-कोटा, 26-लोरमी, 27-मुंगेली (अ०जा०), 28-जरहगांव (अ०जा०), 29-तखतपुर, 30-बिलासपुर और 31-बिलहा ।

5.

सारंगढ़ (अ०जा०)-19-सरिया, 20-सारंगढ़ (अ०जा०), 35-पामगढ़, 38-मालखरोदा (अ०जा०), 39-चन्द्रपुर, 48-पलारी (अ०जा०), 49-कसडोल और 50-भटगांव (अ०जा०) ।

6.

रायपुर-40-रायपुर नगर, 41-रायपुर ग्रामीण, 42-अभनपुर, 43-मंदिरहसौद, 44-आरंग (अ०जा०), 45-धरसीवा, 46-भाटापारा और 47-बलोदाबाजार ।

7.

महासमुन्द-53-सराईपाली, 54-बसना, 55-खल्लारी, 56-महासमुन्द, 51-राजिम, 52-बिन्द्रानवागढ़ (अ०ज०जा०), 58-कुरुद और 59-धमतरी ।

8.

कांकेर (अ०ज०जा०)-57-सिहावा (अ०ज०जा०), 60-भानुप्रतापपुर (अ०ज०जा०), 61-कांकेर, (अ०ज०जा०), 63-केशकाल (अ०ज०जा०), 62-नारायणपुर (अ०ज०जा०), 79-गुन्डरदेही, 81-बालोद और 82-डोंडीलोहारा (अ०ज०जा०) ।

 

क्रम सं०

निर्वाचन-क्षेत्र का नाम और विस्तार

1

2

9.

बस्तर (अ०ज०जा०)-64-कोंडागांव (अ०ज०जा०), 65-भानपुरी (अ०ज०जा०), 66-जगदलपुर (अ०ज०जा०), 67-केशलूर (अ०ज०जा०), 68-चित्रकोट (अ०ज०जा०), 69-दन्तेवाड़ा (अ०ज०जा०), 70-कोन्टा (अ०ज०जा०) और 71-बिजापुर (अ०ज०जा०) ।

10.

दुर्ग-72-मारो (अ०जा०), 73-बेमेतरा, 74-साजा, 75-धमधा 76-दुर्ग, 77-भिलाई, 78-पाटन और     80-खेरथा ।

11.

राजनांदगांव-83-चौकी (अ०ज०जा०), 84-खुज्जी, 85-डोगरगांव, 86-राजनांदगांव, 87-डोंगरगढ़ (अ०जा०), 88-खैरगढ़, 89-बीरेन्द्रनगर और 90-कवर्धा ।

भाग ख-सभा निर्वाचन-क्षेत्र

कोरिया जिला

1.

मनेन्द्रगढ़ (अ०ज०जा०)-भरतपुर तहसील और मनेन्द्रगढ़ तहसील (खड़गांवा रा०नि०मं० में पटवारी हल्का 15 को छोड़कर) और उस क्षेत्र में स्थित वनग्राम ।

2

बैकुंठपुर-बैकुंठपुर तहसील और उसमें स्थित वन ग्राम; तथा मनेन्द्रगढ़ तहसील में खड़गांवा रा०नि०मं० में पटवारी हल्का 15 ।

3

प्रेम नगर (अ०ज०जा०)-सूरजपुर तहसील में प्रेमनगर रा०नि०मं० और रामानुजनगर रा०नि०मं० (पटवारी हल्का 73 से 80 तक को छोड़कर) ; तथा अंबिकापुर तहसील में उदयपुर रा०नि०मं० और लखनपुर रा०नि०मं० के पटवारी हल्का 55, 57, 58, और 65 तथा उस क्षेत्र में स्थित वनग्राम ।

4

सूरजपूर (अ०ज०जा०)-सूरजपुर तहसील में सूरजपुर और भैयाथान रा०नि०मं०, रामानुजनगर रा०नि०मं० के पटवारी हल्का 73 से 80 तक और चन्द्रामेढ़ा रा०नि०मं० (पटवारी हल्का 17 से 26 तक को छोड़कर

5

पाल (अ०ज०जा०)-पाल तहसील में बसन्तपुर, रामचन्द्रपुर और चयगली रा०नि०मं० तथा बलरामपुर रा०नि०मं० के रामानुजगंज नगर और पटवारी हल्का 32 से 34क और 34ख तक ।

6

सामरी (अ०ज०जा०)-सामरी तहसील और उस क्षेत्र में स्थित वन ग्राम; और पाल तहसील में बलरामपुर रा०नि०मं० ( रामानुजगंज नगर पटवारी हल्का 32 से तक 34क और 34ख तक को छोड़कर)

7

लुन्ड्रा (अ०ज०जा०)-अंबिकापुर तहसील में लुन्ड्रा और राजपुर रा०नि०मं० तथा उस क्षेत्र में स्थित वनग्राम और सूरजपुर तहसील में प्रतापपुर रा०नि०मं० के पटवारी हल्का 39 से 42 तक ।

8

पिलखा (अ०ज०जा०)-सूरजपुर तहसील में पिलखा रा०नि०मं० प्रतापपुर रा०नि०मं० (पटवारी हल्का 39 से 42 तक को छोड़कर) और चन्द्रामेढा़ रा०नि०मं० के पटवारी हल्का 17 से 26 तक तथा उस क्षेत्र में स्थित वनग्राम ।

9

अंबिकापुर (अ०ज०जा०)-अंबिकापुर तहसील में अंबिकापुर-1 अंबिकापुर-2 रा०नि०मं० और लखनपुर रा०नि०मं० (पटवारी हल्का 55, 57, 58, और 65 को छोड़कर) तथा उस क्षेत्र में स्थित वनग्राम ।

10

सीतापुर (अ०ज०जा०)-अंबिकापुर तहसील में सीतापुर और बतौली  रा०नि०मं० ।

जशपुर जिला

11

बगीचा (अ०ज०जा०)-जशपुर तहसील में बगीचा और सन्ना रा०नि०मं० तथा उस क्षेत्र में स्थित वनग्राम ।

12.

जशपुर (अ०ज०जा०)-जशपुर तहसील में जशपुर और कस्तुरा रा०नि०मं० तथा कुनकुरी रा०नि०मं० के पटवारी हल्का 78 से 82 तक और 98 तथा उस क्षेत्र में स्थित वनग्राम ।

13.

तपकरा (अ०ज०जा०)-जशपुर तहसील में तपकरा रा०नि०मं० और कुनकुरी रा०नि०मं० (पटवारी हल्का 78 से 82 तक और 98 को छोड़कर) तथा उस क्षेत्र में स्थित वनग्राम ।

14.

पत्थलगांव (अ०ज०जा०)-उदयपुर (धर्मजयगढ़) तहसील में पत्थलगांव रा०नि०मं० और कापू रा०नि०मं० (पटवारी हल्का 1 से 6 तक और 36 को छोड़कर) ।

रायगढ़ जिला

क्रम सं०

निर्वाचन-क्षेत्र का नाम और विस्तार

1

2

15.

धर्मजयगढ़ (अ०ज०जा०)-उदयपुर (धर्मजयगढ़) तहसील में धर्मजयगढ़ रा०नि०मं० और कापू रा०नि०मं० के पटवारी हल्का 1 से 6 तक और 36 तथा घरघोड़ा तहसील में घरघोड़ा रा०नि०मं० तथा उस क्षेत्र में स्थित वनग्राम । 

16.

लैलूंगा (अ०ज०जा०)-घरघोड़ा तहसील में लैलूंगा और तमनार रा०नि०मं० तथा उस क्षेत्र में स्थित वनग्राम ।

17.

रायगढ़-रायगढ़ तहसील में रायगढ़-1 और रायगढ़-2 रा०नि०मं० तथा पुसौर रा०नि०मं० के पटवारी हल्का 44 से 52 तक ।

18.

खरसिया-रायगढ़ तहसील में खरसिया और भूपदेवपुर रा०नि०मं० ।

19.

सरीया-रायगढ़ तहसील में पुसौर रा०नि०मं० (पटवारी हल्का 44 से 52 तक को छोड़कर) ; तथा सारंगढ़ तहसील में सरीया और बरमकेला रा०नि०मं० तथा उस क्षेत्र में स्थित वन ग्राम । 

20.

सारंगढ (अ०ज०जा०)-सारंगढ़ तहसील में सारंगढ़ और हर्दी रा०नि०मं० और उस क्षेत्र में स्थित वनग्राम ।

कोरबा जिला

21.

रामपुर (अ०ज०जा०)-कटघोरा तहसील में कोरबार रा०नि०मं० (कोरबा नगर और पटवारी हल्का 21 को छोड़कर), रामपुर रा०नि०मं० (पटवारी हल्का 73 से 80 तक को छोड़कर) और तानाखार रा०नि०मं० के पटवारी हल्का 14, 20, 22 और 30 । 

22.

कटघोरा-कटघोरा तहसील में कोरबा रा०नि०मं० में कोरबा नगर और पटवारी हल्का 21, कटघोरा रा०नि०मं० और पाली रा०नि०मं० (पटवारी हल्का 34 और 36 से 46 तक को छोड़कर) ।

23

तानाखार (अ०ज०जा०)-कटघोरा तहसील में पसान रा०नि०मं० और तानाखार रा०नि०मं० (पटवारी हल्का 14, 20, 22 और 30 को छोड़कर) तथा पाली रा०नि०मं० के पटवारी हल्का 34 और 36 से 46 तक । 

बिलासपुर जिला

24.

मरवाही (अ०ज०जा०)-बिलासपुर तहसील में मरवाही रा०नि०मं० और गौरेला रा०नि०मं० (पटवारी हल्का 26 से 28 तक को छोड़कर) और कोटा रा०नि०मं० के पटवारी हल्का 31 से 33 तक तथा 37 । 

25.

कोटा-बिलासपुर तहसील में गौरेला रा०नि०मं० में पटवारी हल्का 26 से 28 तक, कोटा रा०नि०मं० (पटवारी हल्का 31 से 33 तक तथा 37 को छोड़कर) और घुटकु-1 रा०नि०मं० के पटवारी हल्का 64 से 67 तक और उस क्षेत्र में स्थित वनग्राम ।

26.

लोरमी-मुंगेली तहसील में लोरमी रा०नि०मं० (पटवारी हल्का 12 से 14 तक, 17, 35 और 36 को छोड़कर) और पंडरिया रा०नि०मं० तथा उस क्षेत्र में स्थित वनग्राम ।

27.

मुंगेली (अ०ज०जा०)-मुंगेली तहसील में मुंगेली और कुन्डा रा०नि०मं० और पटवारी हल्का 17, 35 और 36 ।

28.

जरहागांव (अ०जा०)-मुंगेली तहसील में लोरमी रा०नि०मं० के पटवारी हल्का 12 से 14 तक, जरहागांव रा०नि०मं० और पथरिया रा०नि०मं० (पटवारी हल्का 84 से 91 तक को छोड़कर) ।

29.

तखतपुर-बिलासपुर तहसील में तखतपुर रा०नि०मं० और घुटकु-2 रा०नि०मं० (पटवारी हल्का 96 को छोड़कर) और घुटकु-1 रा०नि०मं० (पटवारी हल्का 64 से 67 तक, 78 से 89 तक, 97 और 98 को छोड़कर) ।

30.

बिलासपुर-बिलासपुर  तहसील में रेलवे कालोनी सहित बिलासपुर नगर और बिलासपुर रा०नि०मं० के पटवारी हल्का 109, 110-अ और 110-ब ।

31.

बिलहा-बिलासपुर तहसील में बिलहा रा०नि०मं० और बिलासपुर रा०नि०मं० के पटवारी हल्का 94, 95, 112 और 117 तथा मुंगेली तहसील में पथरिया रा०नि०मं० के पटवारी हल्का 84 से 91 ।

32.

मस्तूरी (अ०जा०)-बिलासपुर तहसील में मस्तूरी रा०नि०मं०, बिलासपुर रा०नि०मं० के पटवारी हल्का 111, 130 और 131 तथा सीपत (नरगोड़ा) रा०नि०मं० के पटवारी हल्का 133, 135 और 136 ।

 

क्रम सं०

निर्वाचन-क्षेत्र का नाम और विस्तार

1

2

33.

सीपत-बिलासपुर तहसील में सीपत (नरगोड़ा) रा०नि०मं०, (पटवारी हल्का 133, 135 और 136 को छोड़कर) बिलासपुर रा०नि०मं० के पटवारी हल्का 107, 108, और 132 तथा घुटकु-1 रा०नि०मं० के पटवारी हल्का 78 से 80 तक, 97 और 98 और घुटकु-2  रा०नि०मं० का पटवारी हल्का 96 और उस क्षेत्र में स्थित वनग्राम ।

जांजगीर-चांपा जिला

34.

अकलतरा-जांजगीर तहसील में बलौदा रा०नि०मं० और अकलतरा रा०नि०मं० के (पटवारी हल्का 58 और 60 को छोड़कर) और उस क्षेत्र में स्थित वनग्राम ।

35.

पामगढ़-जांजगीर तहसील में पामगढ़ और नवागढ़ रा०नि०मं० ; अकलतरा रा०नि०मं० के पटवारी हल्का 58 और 60 तथा जांजगीर रा०नि०मं० के पटवारी हल्का 50, 52 और 53 ।

36.

चांपा-जांजगीर तहसील में चांपा रा०नि०मं० और जांजगीर रा०नि०मं० (पटवारी हल्का 50, 52, और 53 को छोड़कर) ।

37.

सक्ती-सक्ती तहसील में सक्ती रा०नि०मं० तथा कटघोरा तहसील में रामपुर रा०नि०मं० के पटवारी हल्का 73 से 80 तक ।

38.

मालखरोदा (अ०जा०)-सक्ती तहसील में जयजयपुर रा०नि०मं० और मालखरोदा रा०नि०मं० (पटवारी हल्का 51, 52, 57, 59 और 60 को छोड़कर ।

39.

चन्द्रपुर-सक्ती तहसील में चन्द्रपुर रा०नि०मं० और मालखरोदा रा०नि०मं० के पटवारी हल्का 51, 52, 57, 59 और 60 ।

रायपुर जिला

40.

रायपुर नगर-रायपुर नगर (वार्ड 20 से 24 तक 29, 30, 34 और 35 और गैर वार्ड नगरपालिका क्षेत्र को छोड़कर) । 

41.

रायपुर ग्रामीण-रायपुर तहसील में गैर वार्ड नगरपालिका क्षेत्र सहित रायपुर नगर के वार्ड 20 से 24 तक, 29, 30, 34 और 35, रायपुर-2 रा०नि०मं० और रायपुर-1  रा०नि०मं० (पटवारी हल्का 111, 112  और 115 को छोड़कर) ।

42.

अभनपुर-रायपुर तहसील में अभनपुर तथा नवापारा रा०नि०मं० ।

43.

मंदिरहसौद-रायपुर तहसील में मंदिरहसौद रा०नि०मं० और रायपुर-1  रा०नि०मं० के पटवारी हल्का 111, 112 और 115 ।

44.

आरंग (अ०जा०)-रायपुर तहसील में आरंग और खरोरा रा०नि०मं० ।

45.

धरसीवा-रायपुर तहसील में धरसीवा-1, धरसीवा-2  और तिल्दा रा०नि०मं० ।

46.

भाटापारा-बलोदाबाजार तहसील में सिमगा रा०नि०मं० और भाटापारा रा०नि०मं० पटवारी हल्का 34 से 38 को छोड़कर ।

47.

बलोदाबाजार-बलोदाबाजार तहसील में भाटापारा रा०नि०मं० के पटवारी हल्का 34 से 38 तक तथा, बलोदाबाजार और जरोदा रा०नि०मं० ।

48.

पलारी (अ०जा०)-बलोदाबाजार तहसील में पलारी और लवन रा०नि०मं० तथा उस क्षेत्र में स्थित वनग्राम ।

49.

कसडोल-बलोदाबाजार तहसील में कसडोल और बिलाईगढ़ रा०नि०मं० तथा उस क्षेत्र में स्थित वनग्राम । 

50.

भटगांव (अ०जा०)-बलोदाबाजार तहसील में भटगांव रा०नि०मं० और उस क्षेत्र में स्थित वनग्राम; तथा महासमुन्द तहसील में भंवरपुर रा०नि०मं० । 

51.

राजिम-बिन्द्रानवागढ़ तहसील में राजिम रा०नि०मं०, छुरा रा०नि०मं० (पटवारी हल्का 31 से 35 तक को छोड़कर) और गरियाबन्द रा०नि०मं० के पटवारी हल्का 36 से 39 तक, 41 तथा 42 ।

52.

बिन्द्रानवागढ़ (अ०ज०जा०)-बिन्द्रानवागढ़ तहसील में देवभोग रा०नि०मं०गरियाबन्द रा०नि०मं० (पटवारी हल्का 36 से 39 तक, 41 और 42 को छोड़कर और छुरा रा०नि०मं० के पटवारी हल्का 31 से 35 तक तथा उस क्षेत्र में स्थित वन ग्राम ।

महासमुंद जिला

क्रम सं०

निर्वाचन-क्षेत्र का नाम और विस्तार

1

2

53.

सराईपाल-महासमुन्द तहसील में सराईपाली और कम्हारपाली रा०नि०मं० ।

54.

बसना-महासमुन्द तहसील में बसना रा०नि०मं० और पिथोड़ा रा०नि०मं० (पटवारी हल्का 25 से 28 तक को छोड़कर)  तथा उस क्षेत्र में स्थित वन ग्राम ।

55.

खल्लारी-महासमुन्द तहसील में खल्लारी और कोमाखान रा०नि०मं० और पिथोड़ा रा०नि०मं० के पटवारी हल्का 25 से 28 तक तथा उस क्षेत्र में स्थित वन ग्राम ।

56.

महासमुन्द-महासमुन्द तहसील में महासमुन्द और पटेवा रा०नि०मं० तथा उस क्षेत्र में स्थित वन ग्राम ।

धमतरी जिला

57.

सिहावा (अ०ज०जा०)-धमतरी तहसील में सिहावा रा०नि०मं० तथा धमतरी रा०नि०मं० (धमतरी नगर तथा पटवारी हल्का 50 से 52 तक को छोड़कर) तथा उस क्षेत्र में स्थित वन ग्राम । 

58.

कुरुद-धमतरी तहसील में कुरुद और मगरलोड रा०नि०मं० तथा उस क्षेत्र में स्थित वन ग्राम ।

59.

धमतरी-धमतरी तहसील में भोधती रा०नि०मं० और धमतरी रा०नि०मं० के धमतरी नगर और पटवारी हल्का 50 से 52 तक ।

कांकेर जिला

60.

भानुप्रतापपुर (अ०ज०जा०)-भानुप्रतापपुर तहसील; तथा कांकेर तहसील में चारामा रा०नि०मं० (पटवारी हल्का 2 तथा 13 से 16 तक को छोड़कर) तथा कांकेर रा०नि०मं० के पटवारी हल्का 20 से 24 तक तथा 26 ।  

61.

कांकेर (अ०ज०जा०)-कांकेर तहसील में नरहरपुर रा०नि०मं० चारामा रा०नि०मं० के पटवारी हल्का 2 और 13 से 16 तक और कांकेर रा०नि०मं० (पटवारी हल्का 20 से 24 तक और 26 को छोड़कर) । 

62.

नारायणपुर (अ०ज०जा०)-नारायणपुर तहसील में कोयलीबेड़ा तथा अन्तागढ़ रा०नि०मं० और नारायणपुर रा०नि०मं० के पटवारी हल्का 23 से 25 तक तथा उस क्षेत्र में स्थित वन ग्राम ।

बस्तर जिला

63.

केशकाल (अ०ज०जा०)-कोंडागांव तहसील में केशकाल रा०नि०मं० और फरसगांव रा०नि०मं० के पटवारी हल्का 19 से 26 तक तथा उस क्षेत्र में स्थित वन ग्राम ।

64.

कोंडागांव (अ०ज०जा०)-कोंडागांव तहसील में फरसगांव रा०नि०मं० (पटवारी हल्का 19 से 26 तक को छोड़कर), कोंडागांव रा०नि०मं० (पटवारी हल्का 35 और 37 से 43 तक को छोड़कर) तथा उस क्षेत्र में स्थित वन ग्राम; और नारायणपुर तहसील में नारायणपुर रा०नि०मं० (पटवारी हल्का 23 से 25 तक को छोड़कर) ।  

65.

भानपुरी (अ०ज०जा०)-जगदलपुर तहसील में भानपुरी रा०नि०मं० और बकावण्ड रा०नि०मं० का पटवारी हल्का 38; और कोंडागांव तहसील में कोंडागांव रा०नि०मं० के पटवारी हल्का 35 और 37 से 43 तक तथा उस क्षेत्र में स्थित वन ग्राम ।

66.

जगदलपुर (अ०ज०जा०)-जगदलपुर तहसील में बकावन्द रा०नि०मं० (पटवारी हल्का 38 को छोड़कर),       जगदलपुर-(ख) रा०नि०मं० तथा जगदलपुर-(क) रा०नि०मं० (पटवारी हल्का 54 से 59 तक को छोड़कर) तथा उस क्षेत्र में स्थित वन ग्राम । 

67.

केशलूर (अ०ज०जा०)-जगदलपुर तहसील में केशलूर रा०नि०मं० और जगदलपुर-(क) रा०नि०मं० के पटवारी हल्का 54 से 59 तक, तथा उस क्षेत्र में स्थित वन ग्राम; और कोन्टा तहसील में छिन्दगढ़ रा०नि०मं० के पटवारी हल्का 7 से 9 तक ।

68.

चित्रकोट (अ०ज०जा०)-जगदलपुर तहसील में चित्रकोट रा०नि०मं० और दन्तेवाड़ा तहसील में दन्तेवाड़ा रा०नि०मं०  के पटवारी हल्का 1 से 9 तक तथा उस क्षेत्र में स्थित वन ग्राम ।

दन्तेवाड़ा जिला

क्रम सं०

निर्वाचन-क्षेत्र का नाम और विस्तार

1

2

69.

दन्तेवाड़ा (अ०ज०जा०)-दन्तेवाड़ा तहसील (दन्तेवाड़ा रा०नि०मं० के पटवारी हल्का 1 से 9 तक को छोड़कर) तथा उस क्षेत्र में स्थित वन ग्राम । 

70.

कोन्टा (अ०ज०जा०)-कोन्टा तहसील (छिन्दगढ़ रा०नि०मं० के पटवारी हल्का 7 से 9 तक को छोड़कर) तथा उस क्षेत्र में स्थित वन ग्राम । 

71.

बिजापुर (अ०ज०जा०)-बिजापुर तहसील तथा उस क्षेत्र में स्थित वन ग्राम ।

दुर्ग जिला

72.

मारो (अ०जा०)-बेमेतरा तहसील में मारो और नवागढ़ रा०नि०मं० तथा खन्डसरा रा०नि०मं० के पटवारी हल्का 46, 51, 52 तथा 55 से 57 तक ।

73.

बेमेतरा-बेमेतरा तहसील में बेमेतरा और आनन्दगांव रा०नि०मं० तथा खन्डसरा रा०नि०मं० के पटवारी हल्का 47 से 50 तक, 53 और 54 ।

74.

साजा-बेमेतरा तहसील में साजा और देवकर रा०नि०मं० और खन्डसरा रा०नि०मं० (पटवारी हल्का 46 से 57 तक को छोड़कर) ।

75.

धमधा-दुर्ग तहसील में धमधा और ननकठ्ठी रा०नि०मं० और भिलाई रा०नि०मं० के पटवारी हल्का 46 से 48 तक और 50 से 52 तक ।

76.

दुर्ग-दुर्ग तहसील में दुर्ग-1 और दुर्ग-2 रा०नि०मं० और भिलाई रा०नि०मं० में भिलाई नगर में एस०ए०एफ० कालोनी, कोसानाला, सुपेला बाजार पश्चिम, सुपेला बाजार, सुपेला बाजार पूर्व और सुपेला केम्प पश्चिम और भिलाई नगर की परिधि में पड़ने वाला भूतपूर्व राजस्व ग्राम छौनी ।

77.

भिलाई-दुर्ग तहसील में भिलाई रा०नि०मं० में भिलाई नगर (एस०ए०एफ० कालोनी, कोसानाला, सुपेला बाजार पश्चिम, सुपेला बाजार , सुपेला बाजार पूर्व तथा सुपेला केम्प पश्चिम और भिलाई नगर की परिधि में पड़ने वाला भूतपूर्व राजस्व ग्राम छौनी को छोड़कर) ।

78.

पाटन-दुर्ग तहसील में भिलाई रा०नि०मं० (पटवारी हल्का 46 से 48 तक और 50 से 52 तक और भिलाई नगर को छोड़कर) और पाटन रा०नि०मं० (पटवारी हल्का 95 से 98 तक को छोड़कर) । 

79.

गुन्डरदेही-दुर्ग तहसील में भाठागांव और गुन्डरदेही रा०नि०मं० के पटवारी हल्का 95 से 98 तक ।

80.

खेरथा-दुर्ग तहसील में अण्डा रा०नि०मं० और बालोद तहसील में खेरथा रा०नि०मं० ।

81.

बालोद-बालोद तहसील में गुरुर और बालोद , रा०नि०मं० तथा उस क्षेत्र में स्थित वन ग्राम ।

82.

डोंडीलोहारा (अ०ज०जा०)-बोलोद तहसील में कुसुमकसा और डोंडीलोहारा रा०नि०मं० तथा उस क्षेत्र में स्थित वन ग्राम ।

राजनांदगांव जिला

83.

चौकी (अ०ज०जा०)-राजनांदगांव तहसील में मानपुर और मोहला रा०नि०मं० और चौकी रा०नि०मं० (पटवारी हल्का 99 से 105 तक को छोड़कर) ।

84.

खुज्जी-राजनांदगांव तहसील में छुरिया और खुज्जी रा०नि०मं० और चौकी रा०नि०मं० के पटवारी हल्का 99 से 105 तक तथा उस क्षेत्र में स्थित वन ग्राम ।

85.

डोंगरगांव-राजनांदगांव तहसील में डोंगरगांव रा०नि०मं० और खैरागढ़ तहसील में लालबहादुरनगर रा०नि०मं० (पटवारी हल्का 88 को छोड़कर) तथा उस क्षेत्र में स्थित वन ग्राम ।

86.

राजनांदगांव-राजनांदगांव तहसील में राजनांदगांव रा०नि०मं० ।

87.

डोंगरगढ़ (अ०जा०)-राजनांदगांव तहसील में घुमका रा०नि०मं० और खैरागढ़ तहसील में लालबहादुरनगर रा०नि०मं० का पटवारी हल्का 88, डोंगरगढ़ रा०नि०मं० और पान्डादाह रा०नि०मं० के पटवारी हल्का 52 और 55 से 61 तक । 

 

क्रम सं०

निर्वाचन-क्षेत्र का नाम और विस्तार

1

2

88.

खैरागढ़-खैरागढ़ तहसील में खैरागढ़ और छुईखदान रा०नि०मं० और पान्डादाह रा०नि०मं० (पटवारी हल्का 52 और 55 से तक 61 तक को छोड़कर) और गन्डई रा०नि०मं (पटवारी हल्का 6 और 8 से 14 तक को छोड़कर) तथा उस क्षेत्र में स्थित वन ग्राम । 

कवर्धा जिला

89.

बीरेन्द्र नगर-खैरागढ़ तहसील में गन्डई रा०नि०मं० के पटवारी हल्का 6 और 8 से 14 तक ; और कवर्धा तहसील में वीरेन्द्रनगर और सहसपुरलोहारा रा०नि०मं० और कवर्धा रा०नि०मं० (पटवारी हल्का 28, 29, 34, और 35 और कवर्धा नगर को छोड़कर) तथा उस क्षेत्र में स्थित वन ग्राम ।

90.

कवर्धा-कवर्धा तहसील में दशरंगपुर और बोडला रा०नि०मं० और कवर्धा रा०नि०मं० में कवर्धा नगर और पटवारी हल्का 28, 29, 34 और 35 तथा उस क्षेत्र में स्थित वन ग्राम ।

तीसरी अनुसूची

(धारा 19 देखिए)

संविधान (अनुसूचित जातियां) आदेश, 1950 का संशोधन

संविधान (अनुसूचित जातियां) आदेश, 1950 में,-

                                (क) पैरा 2 में, 22" अंकों के स्थान पर 23" अंक रखें जाएंगे;

                                (ख) अनुसूची में भाग 22 के पश्चात् निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात् :-  

भाग 23-छत्तीसगढ़

1. औधेलिया

2. बागरी, बागड़ी

3. बेहना, बहाना

4. बलाही, बलाई

5. बांछड़ा

6. बरहार, बसोड़

7. बरगूंडा

8. बसोर, बुरुड़, बंसोर, बंसोडी, बांसफोड़, बसार

9. बेड़िया

10. बेलदार, सुनकर

11. भंगी, मेहतर, बाल्मिकी, लालबैगी, धरकर

12. भानुमती

13. चड़ार

14. चमार, चमारी, बेरवा, भांबी, जाटव, मोची, रेगर, नोना, रोहिदास, रामनामी, सतनामी, सूर्यबंशी, सूर्यराम नामी,

     अहिरवार, चमार, मांगन, रैदास

15. चिडार

16. चिकवा, चिकवी

17. चितार

18. दहैत, दहायत, दाहात

19. देवार

20. धानुक

21. ढेड़, ढेर

22. डोहोर

23. डोम, डूमार, डोम, डोमार, डोरिस

24. गांड़ा, गांडी

25. घासी, घसिया

26. होलिया

27. कंजर

28. कतिया, पथरिया

29. खटीक

30. कोली, कोरी

31. खांगर, कनेरा, मिर्धा

32. कुचबंधिया

33. महार, मेहरा, मेहर

34. मांग, मांग गरौड़ी, मांग गारूड़ी, दंखनी मांग, मांग महाशी, मदारी, गारूड़ी, राधे मांग

35. मेघवाल

36. मोघिया

37. मुसखान

38. नट, कालबेलिया, सपेरा, नवदिगार, कुबुतार

39. पासी

40. रूज्झार

41. सांसी, सांसिया

42. सिलावट

43. झमराल ।"।

                               

 

चौथी अनुसूची

(धारा 20 देखिए)

संविधान (अनुसूचित जनजातियां) आदेश, 1950 का संशोधन

संविधान (अनुसूचित जनजातियां) आदेश, 1950 में,-

                                (क) पैरा 2 में, 19" अंकों के स्थान पर 20" अंक रखे जाएंगे ;

                                (ख) अनुसूची में,- 

                                                (i) भाग 8 के स्थान पर निम्नलिखित भाग रखा जाएगा, अर्थात् :-

भाग 8-मध्य प्रदेश

1. अगरिया 

2. आंध

3. बैगा

4. भैना

5. भारिया, भूमिया, भुईहार, भुमिया, भूमिया, भारिया, पालिहा, पांडो

6. भत्तरा

7. भील, भिलाला, बरेला, पटेलिया

8. भील मीना

9. भुंजिया

10. बियार, बीआर

11. बिझवार

12. बिरहुल, बिरहोर

13. डामोर, डामरिया 

14. धनवार

15. गडाबा, गडबा

16. गोंड, अरख, आरख, अगरिया, असुर, बड़ी मारिया, बड़ा मारिया, भटोला, भीम्मा, भूता, कोइलाभुता, कोलियाभुती,

बायसन हार्न मारिया, छोटा मारिया, दंडामी मारिया, धुरू, धुरवा, धोबा, धुलिया, डोरला, गायकी, गट्टा, गट्टी, गैटा, गोंड, गोवारी, हिल मारिया, कंडरा, कलंगा, खटोला, कोइतर, कोया, खिरवार, खिरवारा, कुच मारिया, कुचाकी मारिया, माडिया, मारिया, माना, मन्नेवार, माघया, मोगिया, मोंघ्या, मुडिया, मुरिया, नगारची, नागवंशी, ओझा, राजगोंड, सोन्झारी, झरेका, थाटिया, थोट्या, वाडेमारिया, वडेमारिया, दरोई

17. हलबा, हलबी 

18. कमार 

19. कारकू 

20. कवर, कंवर, कौर, चेरवा, राठिया, तनवर, छत्री 

21. कीर (भोपाल, रायसेन और सिहोर जिलों में)

22. खैरवार, कोंदर 

23. खरिया

24. कोंध, खोंड, कांध

25. कोल

26. कोलम

27. कोरकू, बोपची, मोवसी, निहाल, नाहुल, बौंधी, बोडियां

28. कोरवा, कोडाकू 

29. मांझी 

30. मझवार 

31. मवासी

32. मीना (विदिशा जिले के सिरोंज उपखंड में)

33. मुंडा

34. नगेसिया, नागासिया

35. उरांव, धानका, धनगढ़

36. पनिका [(i) छतरपुर, पन्ना, रीवां, सतना, शहडोल, उमरिया, सीधी और टीकमगढ़ जिलों में, और (ii) दतिया जिले की सेंवढ़ा और दतिया तहसीलों मेंट

37. पाव

38. परधान, पथारी, सरौती

39. पारधी (भोपाल, रायसेन तथा सिहोर जिलों में)

40. पारधी, बहेलिया, बहेल्लिया, चिता पारधी, लंगोली पारथी, फांस पारथी, शिकारी, टाकनकार, टाकिया [(i) छिंदवाड़ा,

मंडला, डिंडोरी और सिओनी जिलों में, (ii) बालाघाट जिले की बैहर तहसील में, (iii) बैतूल जिले की बैतूल, भैंसदेही और शाहपुर तहसीलों में, (iv) जबलपुर जिले की पाटन तहसील और सिहोरा तथा मझोली खंडों में, (ध्) कटनी जिले की कटनी (मुंडरवारा) और विजया राघौगढ़ तहसीलों और बहोरीबंद तथा ढीमरखेड़ा खंडों में, (ध्त्) होशंगाबाद जिले की होशंगाबाद, बाबई, सोहागपुर, पिपरिया और बनखेड़ी तहसीलों तथा केसला खंड में, (ध्त्त्) नरसिंहपुर जिले में, और (ध्त्त्त्) खंडवा जिले की हरसुद तहसील मेंट

41. परजा

42. सहारिया, सहरिया, सेहरिया, सोसिया, सोर 

43. साओंता, सोंता ।

44. सौर

45. सवर, सवरा

46. सोंर ।";          

(ii) भाग 19 के पश्चात् निम्नलिखित जोड़ा जाएगा, अर्थात् :-

भाग 20-छत्तीसगढ़

1. अगरिया

                2. आंध

3. बैगा

                4. भैना

5. भारिया, भूमिया, भुईहार, भुमियां, भूमिया, भारिया, पालिहा, पांडो

6. भत्तरा

7. भील, भिलाला, बरेला, पटेलिया

8. भील मीना

9. भुंजिया

10. बियार, बीआर

11. बिंझवार

12. बिरहुल, बिरहोर

13. डामोर, डामरिया 

14. धनवार

15. गडाबा, गडबा

16. गोंड, अरख, आरख, अगरिया, असुर, बड़ी मारिया, बड़ा मारिया, भटोला, भीम्मा, भूता, कोइलाभुता, कोलियाभुती, भार, बायसन हार्न मारिया, छोटा मारिया, दंडामी मारिया, धुरू, धुरवा, धोबा, धुलिया, डोरला, गायकी, गट्टा, गट्टी, गैटा, गोंड, गोवारी, हिल मारिया, कंडरा, कलंगा, खटोला, कोइतर, कोया, खिरवार, खिरवारा, कुच मारिया, कुचाकी मारिया, माडिया, मारिया, माना, मन्नेवार मोध्या, मोगिया, मोंघ्या, मुडिया, मुरिया, नगारची, नागवंशी, ओझा, राजगोंड, सोन्झारी, झरेका, थाटिया, थोट्या, वाडेमारिया, वडेमारिया, दरोई

17. हलबा, हलबी 

18. कमार 

19. कारकू 

20. कवर, कंवर, कौर, चेरवा, राठिया, तनवर, छत्री 

21. खैरवार, कोंदर 

22. खरिया

23. कोंध, खोंड, कांध

24. कोल

25. कोलम

26. कोरकू, बोपची, मोवसी, निहाल, नाहुल, बौंधी, बोडिया

27. कोरवा, कोडाकू 

28. मांझी 

29. मझवार 

30. मवासी

31. मुंडा

32. नगेसिया, नागासिया

33. उरांव, धानका, धनगढ़

34. पाव

35. परधान, पथारी, सरोती

36. पारधी, बहेलिया, बहेल्लिया, चिता पारधी, लंगोली परधी, फांस पारधी, शिकारी, टाकनकार, टाकिया [(i) बस्तर, दंतेवाडा, कांकेर, रायगढ़, जशपुरनगर, सरगुजा, और कोरिया जिले में, (ii) कोरबा जिले की कटघोरा, पाली, करतला और कोरबा तहसीलों में, (iii) बिलासपुर जिले की बिलासपुर, पेंडरा, कोटा और तखतपुर तहसीलों में, (iv) दुर्ग जिले की दुर्ग, पाटन, गुंडेरदही, धमधा, बालौद, गुरूर और डोंडीलोहारा तहसीलों में, (ध्) राजनांदगांव जिले के चौकी, मानपुर और मोहला राजस्व निरीक्षक सर्किलों में, (ध्त्) महासमुंद जिले की महासमुंद, सराईपाली और बसना तहसीलों में,   (ध्त्त्) रायपुर जिले की बिंद्रा-नवागढ़ राजिम और देवभोग तहसीलों में; और (ध्त्त्त्) धमतरी जिले के धमतरी, कुरुद और सिहावा तहसीलों मेंट

37. परजा

38. सहारिया, सहरिया, सेहरिया, सहेरिया, सोसिया, सोर

                39. साओंता, सौंता

40. सौर

41. सवर, सवरा

42. सोंर ।"।

 

पांचवीं अनुसूची

(धारा 42 देखिए)

1. दुर्भिक्ष राहत निधि

                2. प्रत्याभूति आरक्षित निधि विनिधान लेखा

3. राजस्व आरक्षित निधि विनिधान लेखा

                4. राज्य कृषि प्रत्यय (राहत और प्रत्याभूति) निधि   

5. रोकड़ अतिशेष विनिधान लेखा 

6. भू-राजस्व और स्टाम्प निधि

7. ग्रामीण विकास निधि 

8. ऊर्जा विकास उपकर निधि 

9. प्रतिकरात्मक वन रोपण निधि 

10. वन विकास उपकर निधि

11. सड़क सुरक्षा निधि

12. अवक्षयण/नवीकरण आरक्षित निधि 

13. मध्य प्रदेश आपदा राहत निधि  

14. विश्व खाद्य कार्यक्रम परियोजना निधि 

15. मध्य प्रदेश राज्य कर्मचारी कुटुम्ब प्रसुविधा निधि 

16. विद्यालय भवन निधि 

17. पेंशनभोगी कल्याण निधि  

18. फसल बीमा निधि

 

 

 

छठी अनुसूची

(धारा 49 देखिए)

पेंशनों की बाबत दायित्व का प्रभाजन

                1. पैरा 3 में वर्णित समायोजनों के अधीन रहते हुए, विद्यमान मध्य प्रदेश राज्य द्वारा नियत दिन के पहले अनुदत्त पेंशनों की बाबत प्रत्येक उत्तरवर्ती राज्य अपने-अपने खजानों में से पेंशनें देगा ।

                2. उक्त समायोजनों के अधीन रहते हुए विद्यमान मध्य प्रदेश राज्य के कार्यकलापों के संबंध में सेवा करने वाले उन अधिकारियों की पेंशनों के बारे में दायित्व, जो नियत दिन के पहले सेवानिवृत्त होते हैं या सेवानिवृत्ति पूर्व छुट्टी पर चले जाते हैं किन्तु पेंशनों के लिए जिनके दावे उस दिन के ठीक पहले बकाया हैं, मध्य प्रदेश राज्य का दायित्व होगा ।

                3. नियत दिन से आंरभ होने वाली और उस वित्तीय वर्ष के 31 मार्च को समाप्त होने वाली कालावधि की बाबत तथा प्रत्येक पश्चात्वर्ती वित्तीय वर्ष की बाबत पैरा 1 और 2 में निर्दिष्ट पेंशनों के बारे में सभी उत्तरवर्ती राज्यों को किए गए कुल संदायों को संगणना में लिया जाएगा । पेंशनों की बाबत विद्यमान मध्य प्रदेश राज्य में के कुल दायित्व का उत्तरवर्ती राज्यों के बीच प्रभाजन जनसंख्या के अनुपात में किया जाएगा और अपने द्वारा देय अंश से अधिक का संदाय करने वाले किसी उत्तरवर्ती राज्य को आधिक्य की रकम की प्रतिपूर्ति कम संदाय करने वाले उत्तरवर्ती राज्य द्वारा की जाएगी ।

                4. नियत दिन के पहले अनुदत्त की गई और विद्यमान राज्य के राज्यक्षेत्र से बाहर किसी भी क्षेत्र में दी जाने वाली पेंशनों के बारे में विद्यमान मध्य प्रदेश राज्य का दायित्व, पैरा 3 के अनुसार किए जाने वाले समायोजनों के अधीन रहते हुए मध्य प्रदेश राज्य का दायित्व होगा, मानो ऐसी पेंशन पैरा 1 के अधीन मध्य प्रदेश राज्य के किसी खजाने से ली गई हों ।

                5. (1) विद्यमान मध्य प्रदेश राज्य के कार्यकलाप के संबंध में नियत दिन के ठीक पहले सेवा करने वाले और उस दिन या उसके पश्चात् सेवानिवृत्त होने वाले अधिकारी की पेंशन के बारे में दायित्व, उसे पेंशन अनुदत्त करने वाले उत्तरवर्ती राज्य का दायित्व होगा, किंतु किसी ऐसे अधिकारी को विद्यमान मध्य प्रदेश राज्य के कार्यकलाप के संबंध में सेवा के कारण मिलने वाली पेंशन का प्रभाग उत्तरवर्ती राज्यों में जनसंख्या के अनुपात में आंबटित किया जाएगा और पेंशन अनुदत्त करने वाली सरकार, प्रत्येक उत्तरवर्ती राज्यों में से प्रत्येक राज्य से इस दायित्व का उसका अंश प्राप्त करने की हकदार होगी ।

                (2) यदि ऐसा कोई अधिकारी नियत दिन के पश्चात् पेंशन अनुदत्त करने वाले राज्य से भिन्न एक से अधिक उत्तरवर्ती राज्यों के कार्यकलापों के संबंध में सेवा करता रहा हो, तो पेंशन अनुदत्त करने वाले राज्य को वह राज्य सरकार ऐसी रकम की प्रतिपूर्ति करेगी जिसका नियत दिन के पश्चात् की उसकी सेवा के कारण मिलने वाली पेंशन, के भाग का वही अनुपात हो, जो प्रतिपूर्ति करने वाले राज्य के अधीन नियत दिन के पश्चात् की उसकी अर्हक सेवा का उस अधिकारी को उसकी पेंशन के प्रयोजनार्थ परिकलित नियत दिन के पश्चात् की कुल सेवा का है ।

6. इस अनुसूची में पेंशन के प्रति निर्देश का अर्थ यह लगाया जाएगा कि उसके अन्तर्गत पेंशन मूल्य के प्रति निर्देश भी है ।

 

सातवीं अनुसूची

(धारा 60 देखिए)

सरकारी कंपनियों की सूची

1

मध्य प्रदेश स्टेट इण्डस्ट्रीज कारपोरेशन लिमिटेड

भोपाल

2

मध्य प्रदेश लघु उद्योग निगम लिमिटेड

भोपाल

3

मध्य प्रदेश स्टेट माइनिंग कारपोरेशन लिमिटेड

भोपाल

4

मध्य प्रदेश स्टेट इण्डस्ट्रियल डेवलपमेंट कारपोरेशन लिमिटेड

भोपाल

5

मध्य प्रदेश स्टेट एग्रो इण्डस्ट्रीज डेवलपमेंट कारपोरेशन लिमिटेड

भोपाल

6

मध्य प्रदेश स्टेट सिविल सप्लाईज कारपोरेशन लिमिटेड

भोपाल

7

मध्य प्रदेश स्टेट टेक्सटाइल कारपोरेशन लिमिटेड

भोपाल

8

मध्य प्रदेश राज्य वन विकास निगम लिमिटेड

भोपाल

9

मध्य प्रदेश स्टेट टूरिज्म डेवलपमेंट कारपोरेशन लिमिटेड

भोपाल

10

मध्य प्रदेश पुलिस हाउसिंग कारपोरेशन लिमिटेड

भोपाल

11

मध्य प्रदेश लैदर डेवलपमेंट कारपोरेशन लिमिटेड

भोपाल

12

मध्य प्रदेश हस्तशिल्प एवं हथकरघा विकास निगम लिमिटेड

भोपाल

13

मध्य प्रदेश ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड

भोपाल

14

मध्य प्रदेश स्टेट इलैक्ट्रानिक्स डेवलपमेंट कारपोरेशन लिमिटेड

भोपाल

15

मध्य प्रदेश पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक वित्त एवं विकास निगम

भोपाल

16

मध्य प्रदेश आदिवासी वित्त एवं विकास निगम

भोपाल

17

मध्य प्रदेश एक्सपोर्ट कारपोरेशन लिमिटेड

भोपाल

18

दि प्राविडेंट इनवेस्टमेंट कंपनी

मुम्बई

19

मध्य प्रदेश फिल्म डेवलपमेंट कारपोरेशन लिमिटेड

भोपाल

20

ऑप्टेल टेलि कम्यूनिकेशन्स लिमिटेड

भोपाल

21

मध्य प्रदेश औद्योगिक केन्द्र विकास निगम (भोपाल) लिमिटेड

भोपाल

22

मध्य प्रदेश औद्योगिक केन्द्र विकास निगम (इन्दोर) लिमिटेड

इन्दोर

23

मध्य प्रदेश औद्योगिक केन्द्र विकास निगम (रायपुर) लिमिटेड

रायपुर

24

मध्य प्रदेश औद्योगिक केन्द्र विकास निगम (जबलपुर) लिमिटेड

जबलपुर

25

मध्य प्रदेश औद्योगिक केन्द्र विकास निगम (ग्वालियर) लिमिटेड

ग्वालियर

26

मध्य प्रदेश औद्योगिक केन्द्र विकास निगम (रीवा) लिमिटेड

रीवा

27

मध्य प्रदेश एग्रो पेस्टीसाइड्स लिमिटेड

भोपाल

28

मध्य प्रदेश एग्रो ऑयल एंड कैटलफीड लिमिटेड

भोपाल

आठवीं अनुसूची

(धारा 66 देखिए)

कतिपय राज्य संस्थाओं में सुविधाओं का बना रहना

प्रशिक्षण संस्थाओं/केन्द्रों की सूची

1. खाद्य अपमिश्रण निवारण संगठन, राज्य प्रयोगशाला, नियंत्रक, लाल घाटी, भोपाल । 

2. राज्य स्वास्थय प्रबंध और संचार संस्थान, ग्वालियर ।

3. मध्य प्रदेश राज्य बीज प्रमाणन अभिकरण, कार्यालय कम्पलेक्स, बी-2, गौतम नगर, भोपाल ।

4. मध्य प्रदेश राज्य वन अनुसंधान संस्थान, पोलीपाथर, नर्मदा रोड, जबलपुर ।

5. पंडित कुंजीलाल दूबे राष्ट्रीय संसदीय विद्यापीठ, पुराना विधान सभा कैम्पस, भोपाल ।

6. महात्मा गांधी राज्य ग्रामीण विकास और प्रशिक्षण संस्थान, आधारताल, जबलपुर ।

7. मध्य प्रदेश राज्य रोजगार और प्रशिक्षण संस्थान, राजीव गांधी भवन, श्यामला हिल्स, भोपाल । 

8. राज्य प्रशासन अकादमी, हितकरणी नगर, 1100 क्वार्टर, भोपाल ।

9. चिकित्सा विधिक संस्थान, गांधी मेडिकल कालेज, भोपाल ।

10. रेंजर प्रशिक्षण कालेज, बालाघाट ।

11. ऐपेक्स बैंक कृषि सहकारिता कर्मचारिवृन्द प्रशिक्षण संस्थान, कोटरा सुलतानाबाद, भोपाल ।

12. जवाहर लाल नेहरू पुलिस अकादमी, सागर ।

13. जनजाति अनुसंधान और प्रशिक्षण संस्थान, श्यामला हिल्स, भोपाल ।

14. कारागार प्रशिक्षण केन्द्र, सागर ।

15. सशस्त्र पुलिस कालेज, इंदौर ।

16. पुलिस रेडियो प्रशिक्षण विद्यालय, इंदौर ।

17. केन्द्रीय प्रशिक्षण संस्थान, होमगार्ड और सिविल रक्षा, खमरिया, जबलपुर ।

18. न्यायालयिक प्रयोगशाला, सागर ।

19. मध्य प्रदेश जल और भूमि प्रबंध संस्थान, वाल्मी हिल्स, कालियासोत बांध के निकट, कोलार रोड, भोपाल ।

20. न्यायिक अधिकारी प्रशिक्षण संस्थान, उच्च न्यायालय कैम्पस, जबलपुर । 

21. संजय गांधी युवा नेतृत्व और ग्रामीण विकास प्रशिक्षण संस्थान, पचमढ़ी, जिला होशंगाबाद ।

22. राज्यस्तरीय प्रशिक्षण संस्थान, महलगांव, ग्वालियर ।  

23. कृत्रिम गर्भाधान प्रशिक्षण संस्थान, भोपाल/मांडला ।

24. सहायक पशुचिकित्सा क्षेत्रीय अधिकारी प्रशिक्षण केन्द्र, महासमुन्द, शिवपुरी । 

25. कुक्कुट प्रशिक्षण केन्द्र, रीवा ।

26. खाद्य विश्लेषण एकक, भोपाल ।

27. मत्स्य उद्योग प्रशिक्षण संस्थान, रायपुर और नौगांव । 

28. केन्द्रीय शुक्र केन्द्र, भोपाल ।  

29. कुक्कुट अनुसंधान केन्द्र, भोपाल ।  

30. मृदा संरक्षण प्रशिक्षण केन्द्र, ग्वालियर और बेतूल । 

31.पौध संरक्षण प्रशिक्षण केन्द्र, अबदुल्ला गंज, (रायसेन) ।

32. अधिकारी प्रशिक्षण केन्द्र, वागवानी, पचमढ़ी । 

33. सिस्टर ट्युटर प्रशिक्षण संस्थान, उज्जैन ।

34. केन्द्रीय अनुसंधान प्रयोगशाला केन्द्र, श्यामला हिल्स, भोपाल ।

35. हाइडल और सिंचाई परियोजना डिजाइन ब्यूरो, भोपाल ।

36. पिछड़ा वर्ग पूर्व-परीक्षा प्रशिक्षण केन्द्र, भोपाल ।

37. राज्य शिक्षा प्रबंध और प्रशिक्षण संस्थान, भोपाल ।

38. अखिल भारतीय सेवा पूर्व-परीक्षा प्रशिक्षण केन्द्र, रविशंकर विश्वविद्यालय परिसर, रायपुर ।

39. आबकारी प्रशिक्षण संस्थान, बिड़लानगर । 

40. विमानन कर्मशाला, राज्य हंगर, भोपाल ।

                                                      ______________________

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