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प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी (विनियमन) अधिनियम, 2005 ( Credit Information Companies (Regulation) Act, 2005 )


 

प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी (विनियमन) अधिनियम, 2005

(2005 का अधिनियम संख्यांक 30)

[23 जून, 2005]

प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनियों के विनियमन और उधार के दक्ष वितरण को

सुकर बनाने तथा उससे संबंधित या उससे आनुषंगिक

 विषयों का उपबंध

करने के लिए

अधिनियम

                भारत गणराज्य के छप्पनवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो: -

अध्याय 1

प्रारंभिक

1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारंभ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी (विनियमन) अधिनियम, 2005 है । 

(2) इसका विस्तार संपूर्ण भारत पर है ।

(3) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा जो केंद्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे:

परन्तु इस अधिनियम के भिन्न-भिन्न उपबंधों के लिए भिन्न-भिन्न तारीखें नियत की जा सकेंगी और ऐसे किन्हीं उपबंधों में इस अधिनियम के प्रारंभ के प्रति निर्देश का यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह उस उपबंध के प्रवृत्त होने के प्रति निर्देश है ।

2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, -

(क) बोर्ड" से किसी प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी का निदेशक बोर्ड अभिप्रेत है;

(ख) उधार लेने वाले" से ऐसा कोई व्यक्ति अभिप्रेत है जिसे किसी प्रत्यय संस्था द्वारा उधार या कोई अन्य उधार सुविधा प्रदान की गई है और इसके अंतर्गत किसी प्रत्यय संस्था का ग्राहक भी है;

(ग) ग्राहक" के अंतर्गत निम्नलिखित हैं-

(i) प्रत्याभूति-दाता या ऐसा कोई व्यक्ति जो किसी प्रत्यय संस्था के किसी उधार लेने वाले के लिए प्रत्याभूति या प्रतिभूति देने की प्रस्थापना करता है; या

(ii) ऐसा व्यक्ति-

(अ) जिसने किसी प्रत्यय संस्था से उधारों, अग्रिमों, अवक्रय, पट्टा-सुविधा, प्रत्यय पत्र, प्रत्याभूति सुविधा, उद्यम पूंजी सहायता के रूप में या क्रेडिट कार्डों के रूप में या किसी अन्य रूप या रीति में वित्तीय सहायता अभिप्राप्त की है या जो अभिप्राप्त करने का वांछा करता है;

(आ) जिसने प्रतिभूति संविदा (विनियमन) अधिनियम, 1956 (1956 का 42) की धारा 2 के खंड (ज) में यथा परिभाषित प्रतिभूति जारी करके या कोई वाणिज्यिक पत्र, निक्षेपागार रसीद या कोई अन्य लिखत जारी करके धन संग्रह किया है या जो धन संग्रह करने की वांछा करता है;

(इ) जिसकी वित्तीय स्थिति का किसी प्रत्यय संस्था या किसी ऐसे अन्य व्यक्ति या संस्था द्वारा, जो रिजर्व बैंक द्वारा, अधिसूचना द्वारा, निदेशित की जाए, निर्धारण किया गया है या निर्धारण किए जाने का प्रस्ताव है;

(घ) प्रत्यय विषयक जानकारी" से निम्नलिखित के संबंध में कोई जानकारी अभिप्रेत है-

(i) किसी प्रत्यय संस्था द्वारा किसी उधार लेने वाले को दिए गए या दिए जाने वाले उधारों या अग्रिमों, क्रेडिट कार्डों के अधीन बकाया रकम और अन्य प्रत्यय सुविधाओं की रकम और उसकी प्रकृति;

(ii) किसी प्रत्यय संस्था द्वारा किसी उधार लेने वाले से उसे दी गई या दिए जाने के लिए प्रस्तावित उधार सुविधाओं के लिए ली गई या लिए जाने के लिए प्रस्तावित प्रतिभूति की प्रकृति;

(iii) किसी प्रत्यय संस्था द्वारा उसके किसी उधार लेने वाले के लिए दी गई या दिए जाने के लिए प्रस्तावित प्रत्याभूति या कोई अन्य गैर-निधि आधारित सुविधा;

(iv) किसी प्रत्यय संस्था के किसी उधार लेने वाले की उधार पात्रता;

(v) कोई अन्य विषय, जिसे रिजर्व बैंक, प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनियों द्वारा संगृहीत की जाने वाली और रखी जाने वाली विषयक जानकारी में सम्मिलित किए जाने के लिए आवश्यक समझे, और इस निमित्त अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट करे;

(ङ) प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी" से कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) के अधीन बनाई गई और रजिस्ट्रीकृत कंपनी अभिप्रेत है जिसे धारा 5 की उपधारा (2) के अधीन रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र दिया गया है;

(च) प्रत्यय संस्था" से कोई बैंककारी कंपनी अभिप्रेत है और इसके अंतर्गत निम्नलिखित हैं-

(i) तत्स्थानी नया बैंक, भारतीय स्टेट बैंक, समनुषंगी बैंक, सहकारी बैंक, राष्ट्रीय बैंक और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक;

(ii) भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का 2) की धारा 45झ के खंड (च) के अधीन यथा परिभाषित गैर-बैंककारी वित्तीय कंपनी;

 [(ii) फेक्टर विनियमन अधिनियम, 2011 (2012 का 12) की धारा (2) के खंड () के अधीन यथा परिभाषित कोई फेक्टर;]

(iii) कंपनी अधिनियम, 1956 (1955 का 1) की धारा 4क में निर्दिष्ट लोक वित्तीय संस्था;

(iv) राज्य वित्तीय निगम अधिनियम, 1951 (1951 का 63) की धारा 3 के अधीन किसी राज्य द्वारा स्थापित वित्तीय निगम;

(v) राष्ट्रीय आवास बैंक अधिनियम, 1987 (1987 का 53) की धारा 2 के खंड (घ) में निर्दिष्ट आवास वित्त संस्था;

(vi) ऐसी कंपनियां जो क्रेडिट कार्डों और ऐसे ही अन्य कार्डों के कारबार में लगी हैं और ऐसी कंपनियां जो किसी अन्य रीति में उधार दे रही हैं;

(vii) ऐसी कोई अन्य संस्था जिसे रिजर्व बैंक, समय-समय पर, इस खंड के प्रयोजनों के लिए विनिर्दिष्ट करे;

() उधार गणना" से ऐसी पद्धति अभिप्रेत है जो किसी प्रत्यय संस्था को किसी उधार लेने वाले की उधार पात्रता और अपने उधारों और अग्रिमों का प्रतिसंदाय करने तथा उसके द्वारा प्राप्त की गई या प्राप्त की जाने वाली उधार सुविधा के संबंध में उसकी अन्य बाध्यताओं का उन्मोचन करने की क्षमता का निर्धारण करने के लिए समर्थ बनाती है;

(ज) अधिसूचना" से भारत के राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना अभिप्रेत है;

(झ) विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है;

(ञ) विनियमों" से इस अधिनियम के अधीन रिजर्व बैंक द्वारा बनाए गए विनियम अभिप्रेत हैं;

(ट) रिजर्व बैंक" से भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का 2) की धारा 3 के अधीन गठित भारतीय रिजर्व बैंक अभिप्रेत है;

(ठ) विनिर्दिष्ट उपयोक्ता" से कोई प्रत्यय संस्था, प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी, जो धारा 15 की उपधारा (3) के अधीन सदस्य है, अभिप्रेत है और इसके अंतर्गत ऐसा अन्य व्यक्ति या संस्था है जो किसी प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी से प्रत्यय विषयक जानकारी अभिप्राप्त करने के प्रयोजन के लिए रिजर्व बैंक द्वारा, समय-समय पर, बनाए गए विनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट की जाए;

(ड) उन शब्दों और पदों के, जो इस अधिनियम में प्रयुक्त हैं और परिभाषित नहीं हैं किंतु भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का 2) या बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) या कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) में परिभाषित हैं, वही अर्थ होंगे, जो उन अधिनियमों में हैं ।

अध्याय 2

प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनियों का रजिस्ट्रीकरण

3. प्रत्यय विषयक जानकारी का कारबार प्रारंभ करने या कारबार करने पर प्रतिषेध-इस अधिनियम में जैसा अन्यथा उपबंधित है उसके सिवाय, कोई कंपनी इस अधिनियम के अधीन रिजर्व बैंक से रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र अभिप्राप्त किए बिना प्रत्यय विषयक जानकारी का कारबार प्रारंभ नहीं करेगी या कारबार नहीं करेगी ।

4. रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन-(1) ऐसी प्रत्येक कंपनी जो प्रत्यय विषयक जानकारी का कारबार प्रारंभ करना चाहती है, रिजर्व बैंक को रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन, ऐसे प्ररूप में और ऐसी रीति में, जो विनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट की जाए, करेगी ।

(2) ऐसी प्रत्येक प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी, जो इस अधिनियम के प्रारंभ पर विद्यमान है, ऐसे प्रारंभ से छह मास की समाप्ति से पूर्व, इस अधिनियम के अधीन रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र अभिप्राप्त करने के लिए रिजर्व बैंक को लिखित रूप में आवेदन करेगी:

परंतु इस अधिनियम के प्रांरभ पर विद्यमान किसी प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी के मामले में, धारा 3 की कोई बात ऐसी प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी को उस समय तक प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी का कारबार करने को प्रतिषिद्ध करने वाली नहीं समझी जाएगी जब उसे रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र अनुदत्त किया जाता है या रिजर्व बैंक द्वारा लिखित सूचना द्वारा यह सूचित किया जाता है कि उसे रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र अनुदत्त नहीं किया जा सकता

5. रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र का मंजूर किया जाना-(1) रिजर्व बैंक, किसी कंपनी के प्रत्यय विषयक जानकारी का कारबार प्रारंभ करने या कारबार करने के लिए रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र मंजूर करने के लिए आवेदन पर विचार करने के प्रयोजन के लिए ऐसी कंपनी के अभिलेखों या बहियों के निरीक्षण द्वारा या अन्यथा अपना यह समाधान कराने की अपेक्षा कर सकेगा कि निम्नलिखित शर्तें पूरी कर दी गई हैं, अर्थात्: -

(क) यह कि आवेदक कंपनी के पास धारा 8 में निर्दिष्ट न्यूनतम पूंजी ढांचा है;

(ख) यह कि आवेदक कंपनी के प्रबंध तंत्र या प्रस्तावित प्रबंध तंत्र की साधारण प्रकृति उसके विनिर्दिष्ट उपयोक्तओं, ग्राहकों या उधार लेने वालों या अन्य प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनियों के हित पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाली नहीं होगी;

() यह कि कोई अन्य शर्त, जिसका रिजर्व बैंक की राय में पूरा किया जाना यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक होगा कि आवेदक कंपनी द्वारा प्रत्यय विषयक जानकारी का कारबार प्रारंभ करना या कारबार करना लोकहित या बैंककारी नीति या प्रत्यय पद्धति या उसके विनिर्दिष्ट उपयोक्ताओं या ग्राहकों या उधार लेने वालों या अन्य प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनियों या ऐसे अन्य व्यक्तियों जो प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनियों को प्रत्यय विषयक जानकारी उपलब्ध कराएंगे, के लिए अहितकर नहीं होगा या उन पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला नहीं होगा

(2) रिजर्व बैंक, अपना यह समाधान हो जाने के पश्चात् कि उपधारा (1) में यथानिर्दिष्ट शर्तें पूरी कर दी गई हैं, आवेदक कंपनी को ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए जिन्हें वह अधिरोपित करना ठीक समझे, प्रत्यय विषयक जानकारी का कारबार, प्रारंभ करने या कारबार करने के लिए रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र प्रदान कर सकेगा और यदि कंपनी ऐसी शर्तों में से किसी को या इस अधिनियम के उपबंधों में से किसी को पूरा करने में असफल रहती है तो कंपनी का आवेदन खारिज कर दिया जाएगा:

परंतु ऐसा कोई आवेदन तब तक खारिज नहीं किया जाएगा जब तक कि आवेदक को सुनवाई का अवसर न दे दिया गया हो ।

(3) रिजर्व बैंक, प्रत्यय विषयक जानकारी के उपलब्ध कारबार, विद्यमान प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनियों के विस्तार की संभावना और गुंजाइश तथा अन्य सुसंगत पहलुओं को ध्यान में रखते हुए, ऐसी प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनियों की कुल संख्या अवधारित कर सकेगा जिन्हें प्रत्यय विषयक जानकारी का कारबार करने के लिए रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र दिया जा सकेगा:

परंतु इस प्रकार अवधारित ऐसी प्रत्यय जानकारी कंपनियों की कुल संख्या का, रिजर्व बैंक का यह समाधान हो जाने पर कि प्रत्यय विषयक जानकारी के उपलब्ध कारबार, विद्यमान प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनियों के विस्तार की संभावना और गुंजाइश तथा उनसे संबंधित अन्य सुसंगत पहलुओं में परिवर्तन हुआ है, रिजर्व बैंक द्वारा पुनर्विलोकन किया जा सकेगा ।

6. रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र रद्द करने की रिजर्व बैंक की शक्ित-(1) रिजर्व बैंक धारा 5 की उपधारा (2) के अधीन किसी प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी को अनुदत्त रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र रद्द कर सकेगा यदि ऐसी कंपनी, -

(i) प्रत्यय विषयक जानकारी का कारबार करना बंद कर देती है, या

(ii) ऐसी किन्हीं शर्तों का अनुपालन करने में असफल रही है जिनके अधीन उसे रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र अनुदत्त किया गया है; या

(iii) किसी समय धारा 5 की उपधारा (1) के उपखंड (क) से उपखंड (ग) या उपधारा (2) में निर्दिष्ट शर्तों में से किसी को पूरा करने में असफल रही है; या

(iv) (क) तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के उपबंधों या इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन रिजर्व बैंक द्वारा जारी किसी निदेश का अनुपालन करने में; या

() धारा 12 की उपधारा (1) में निर्दिष्ट अधिकारियों, व्यक्तियों या अभिकरण द्वारा, ऐसी मांग किए जाने पर लेखा बहियों और अन्य सुसंगत दस्तावेजों को निरीक्षण के लिए प्रस्तुत करने या प्रस्थापित करने में, असफल रही है

(2) इस धारा के अधीन किसी प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी को अनुदत्त रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र को इस आधार पर रद्द करने से पूर्व कि कंपनी धारा 5 की उपधारा (1) के खंड (क) से खंड (ग) या उपधारा (2) में विनिर्दिष्ट शर्तों या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के उपबंधों या इस अधिनियम के अधीन जारी निदेशों का अनुपालन करने में असफल रही है, रिजर्व बैंक, ऐसी कंपनी को, ऐसे निदेशों या उपबंधों का ऐसे समय के भीतर पालन करने या ऐसी शर्तों को पूरा करने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने के लिए ऐसे निबंधनों पर जिन्हें रिजर्व बैंक उपयुक्त समझे, समय प्रदान करेगा:

परंतु यदि रिजर्व बैंक की यह राय है कि ऐसी कंपनी के रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र के रद्दकरण में विलंब से लोकहित या बैंककारी नीति या प्रत्यय पद्धति या उधार लेने वालों या अन्य प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनियों पर प्रतिकूल प्रभाव या हानिकर प्रभाव पड़ेगा तो रिजर्व बैंक उपधारा (2) में यथाउपबंधित समय अनुदत्त किए बिना रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र को रद्द कर सकेगा ।

(3) किसी प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी को अनुदत्त रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र के रद्दकरण का कोई भी आदेश रिजर्व बैंक द्वारा तब तक नहीं किया जाएगा जब तक ऐसी कंपनी को सुने जाने का युक्तियुक्त अवसर दे दिया गया हो

7. रिजर्व बैंक के आदेश के विरुद्ध अपील-(1) धारा 5 के अधीन रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र अनुदत्त करने के लिए किसी आवेदन की नामंजूरी या धारा 6 के अधीन रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र के रद्दकरण के आदेश से व्यथित कोई प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी उस तारीख से, जिसको, यथास्थिति, ऐसी नामंजूरी या रद्दकरण का आदेश प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी को संसूचित किया जाता है, तीस दिन की अवधि के भीतर, केन्द्रीय सरकार या ऐसे किसी अन्य प्राधिकारी या अधिकरण को जिसे केन्द्रीय सरकार द्वारा बनाए गए नियमों द्वारा अभिहित किया जाए, अपील कर सकेगी

(2) केन्द्रीय सरकार या उपधारा (1) में निर्दिष्ट प्राधिकारी या अधिकरण का, जहां उपधारा (1) के अधीन उसे अपील की गई है या रिजर्व बैंक का, जहां ऐसी कोई अपील नहीं की गई है, विनिश्चय अंतिम होगा:

परंतु अपील की नामंजूरी का कोई आदेश करने से पूर्व, यथास्थिति, आवेदक कंपनी या प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर दिया जाएगा ।

8. न्यूनतम पूंजी के बारे में अपेक्षा-(1) प्रत्येक प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी की न्यूनतम प्राधिकृत पूंजी तीस करोड़ होगी:

परंतु रिजर्व बैंक, अधिसूचना द्वारा, प्राधिकृत पूंजी की न्यूनतम रकम को पचास करोड़ से अनधिक किसी रकम तक बढ़ा सकेगा ।

(2) प्रत्येक प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी की पुरोधृत पूंजी बीस करोड़ से कम नहीं होगी:

परंतु रिजर्व बैंक, अधिसूचना द्वारा, पुरोधृत पूंजी को उपधारा (1) में यथा निर्दिष्ट प्राधिकृत पूंजी की न्यूनतम रकम से अनधिक किसी रकम तक बढ़ा सकेगा ।

(3) प्रत्येक प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी की न्यूनतम समादत्त पूंजी किसी भी समय पुरोधृत पूंजी के पचहत्तर प्रतिशत से कम नहीं होगी ।

अध्याय 3

प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनियों का प्रबंध

9. प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी का प्रबंध-(1) तत्समय प्रवृत्त किसी विधि में या किसी संविदा में प्रतिकूल किसी बात के होते हुए भी, इस अधिनियम के प्रारंभ पर विद्यमान या उसके पश्चात् अस्तित्व में आने वाली प्रत्येक प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी, अपने निदेशकों में से एक निदेशक को अपने बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में पूर्णकालिक या अंशकालिक आधार पर नियुक्त कर सकेगी और जहां उसे उसके बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में पूर्णकालिक आधार पर नियुक्त किया जाता है वहां उसे प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी के संपूर्ण कार्यों का प्रबंध सौंपा जाएगा :

परन्तु प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी के बोर्ड का अध्यक्ष अपनी शक्तियों का प्रयोग बोर्ड के अधीक्षण, नियंत्रण और निदेशों के अधीन रहते हुए करेगा ।

(2) जहां अध्यक्ष अंशकालिक आधार पर नियुक्त किया जाता है, वहां प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी के संपूर्ण कार्य का प्रबंध किसी प्रबंध निदेशक या पूर्णकालिक निदेशक को, चाहे वह किसी नाम से ज्ञात हो, सौंपा जाएगा, जो अपनी शक्तियों का प्रयोग बोर्ड के अधीक्षण, नियंत्रण और निदेशों के अधीन रहते हुए करेगा ।

(3) अध्यक्ष या प्रबंध निदेशक या पूर्णकालिक निदेशक चाहे वह किसी नाम से ज्ञात हो, के अतिरिक्त, निदेशक बोर्ड में पचास प्रतिशत से अन्यून निदेशक होंगे जो ऐसे व्यक्ति होंगे जिनके पास लोक प्रशासन, विधि, बैंककारी, वित्त, लेखा कर्म, प्रबंध और सूचना प्रौद्योगिकी से संबंधित विषयों का विशेष ज्ञान या व्यावहारिक अनुभव है ।

(4) बोर्ड अपने कृत्यों का निर्वहन करते समय, कारबार के सिद्धांतों पर कार्य करेगा, और अपने विनिर्दिष्ट उपयोक्ताओं, प्रत्य संस्थाओं या ग्राहकों या प्रत्यय संस्थाओं से उधार लेने वालों के हितों का सम्यक् ध्यान रखेगा

(5) जहां रिजर्व बैंक का यह समाधान हो जाता है कि लोकहित में या बैंककारी नीति या देश की प्रत्यय प्रणाली के हित में या ऐसी प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी के कार्यों को रोकने के लिए जिसका प्रबंध बैंककारी नीति या प्रत्यय संस्थाओं या उधार लेने वालों या ग्राहकों के हितों के हानिकर रीति में किया जा रहा है या किसी प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी का समुचित प्रबंध सुनिश्चित करने के लिए ऐसा करना आवश्यक है, वहां रिजर्व बैंक, उन कारणों से जो लेखबद्ध किए जाएंगे, राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा, ऐसी कंपनी के बोर्ड का, ऐसी अवधि के लिए जो छह मास से अधिक की न हो, जो आदेश में विनिर्दिष्ट की जाए और जिसे समय-समय पर बढ़ाया जा सकेगा, तथापि कुल अवधि बारह मास से अधिक की नहीं होगी, अधिक्रांत कर सकेगा :

परन्तु ऐसा कोई आदेश करने से पूर्व, रिजर्व बैंक ऐसी प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी के बोर्ड को प्रस्तावित अधिक्रमण के विरुद्ध अभ्यावेदन करने के लिए युक्तियुक्त अवसर देगा और बोर्ड के अभ्यावेदन पर, यदि कोई हो, विचार करेगा

(6) रिजर्व बैंक, उपधारा (5) के अधीन किसी प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी के बोर्ड के अधिक्रमण पर, ऐसी अवधि के लिए और ऐसे वेतन तथा अन्य निबंधनों और शर्तों पर, जो वह अवधारित करे, एक प्रशासक नियुक्त कर सकेगा

(7) रिजर्व बैंक प्रशासक को ऐसे निदेश दे सकेगा, जो वह उचित समझे और प्रशासक ऐसे निदेशों का पालन करने के लिए आबद्ध होगा

(8) उपधारा (5) के अधीन किसी प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी के बोर्ड का अधिक्रमण करने वाला आदेश किए जाने पर-

(क) ऐसी प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी का अध्यक्ष, प्रबंध निदेशक और अन्य निदेशक अधिक्रमण की तारीख से ही अपने पद रिक्त कर देंगे;

(ख) उन सभी शक्तियां, कृत्य और कर्तव्यों का जिनका कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) या इस अधिनियम या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के उपबंधों द्वारा या उनके अधीन ऐसी प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी के बोर्ड द्वारा या उसकी ओर से या उस कंपनी के साधारण अधिवेशन में पारित किसी संकल्प द्वारा उपधारा (6) के अधीन रिजर्व बैंक द्वारा नियुक्त प्रशासक द्वारा तब तक प्रयोग या निर्वहन किया जाएगा जब तक कि उपधारा (10) के अधीन उसके बोर्ड का पुनर्गठन न हो जाए:

परन्तु प्रशासक द्वारा प्रयोग की गई शक्तियां, इस बात के होते हुए भी कि ऐसी शक्ितयां ऐसी प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी के साधारण अधिवेशन में पारित किसी संकल्प द्वारा प्रयोक्तव्य हैं, विधिमान्य होंगी ।

(9) प्रशासक और प्रशासक की सहायता करने वाले कर्मचारिवृंद को संदेय वेतन और भत्ते प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी द्वारा वहन किए जाएंगे ।

(10) उपधारा (5) के अधीन जारी रिजर्व बैंक के आदेश में वर्णित अधिक्रमण की अवधि की समाप्ति से पूर्व दो मास के भीतर प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी का प्रशासक, नए निदेशकों का निर्वाचन करने और उसके बोर्ड का पुनर्गठन करने के लिए प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी का साधारण अधिवेशन बुलाएगा और ऐसा व्यक्ति जिसने उपधारा (8) के खंड () के अधीन अपना पद रिक्त किया था; पुनर्नियुक्ति के लिए निरर्हित नहीं समझा जाएगा

(11) तत्समय प्रवृत्त किसी विधि में या किसी संविदा या प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी के संगम ज्ञापन या अनुच्छेदों में किसी बात के होते हुए भी, इस धारा के अधीन किसी व्यक्ति को पद से हटाए जाने पर, वह व्यक्ति पद की हानि या समाप्ति के लिए किसी प्रतिकर का दावा करने का हकदार नहीं होगा ।

10. रिजर्व बैंक की नीति अवधारित करने की शक्ति-जहां रिजर्व बैंक का यह समाधान हो जाता है कि लोकहित में या विनिर्दिष्ट उपयोक्ताओं के हित में या प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनियों या प्रत्यय संस्थाओं या ग्राहकों या उधार लेने वालों के हित में ऐसा करना आवश्यक और समीचीन है वहां वह साधारणतया या विशिष्टतया प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनियों या प्रत्यय संस्थाओं या विनिर्दिष्ट उपयोक्ताओं के कृत्यों के सबंध में नीति अवधारित कर सकेगी और जब इस प्रकार नीति अवधारित कर दी गई हो तब सभी, यथास्थिति, प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनियां, प्रत्यय संस्थाएं और विनिर्दिष्ट उपयोक्ता, इस प्रकार अवधारित नीति का पालन करने के लिए आबद्ध होंगे

11. रिजर्व बैंक की निदेश देने की शक्ति-(1) जहां रिजर्व बैंक का यह समाधान हो जाता है कि-

(क) लोकहित में; या

(ख) प्रत्यय संस्थाओं के हित में; या

(ग) विनिर्दिष्ट उपयोक्ताओं के हित में; या

(घ) बैंककारी नीति के हित में; या

(ङ) ऐसी किसी प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी के ऐसे कार्यकलापों को रोकने के लिए जो उसके विनिर्दिष्ट उपयोक्ताओं के हितों के हानिकर रीति में या प्रत्यय संस्थाओं या उधार लेने वालों या ग्राहकों के हितों पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाली रीति में किए जा रहे हैं; या

(च) साधारणतया प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनियों का समुचित प्रबंध सुनिश्चित करने के लिए साधारणतया प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनियों या प्रत्यय संस्थाओं या विनिर्दिष्ट उपयोक्ताओं या विशिष्टतया किसी प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी या प्रत्यय संस्था विनिर्दिष्ट उपयोक्ता को निदेश जारी करना आवश्यक है, वहां, वह समय-समय पर ऐसे निदेश जारी कर सकेगा, जो वह ठीक समझे और, यथास्थिति, ऐसी प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनियां, प्रत्यय संस्थाएं और विनिर्दिष्ट उपयोक्ता या प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी, प्रत्यय संस्था और विनिर्दिष्ट उपयोक्ता, ऐसे निदेशों का पालन करने के लिए आबद्ध होंगे ।

(2) रिजर्व बैंक, उसे अभ्यावेदन किए जाने पर या स्वप्रेरणा से उपधारा (1) के अधीन जारी किए गए किसी निदेश को उपांतरित या रद्द कर सकेगा और रिजर्व बैंक किसी निदेश को इस प्रकार उपांतरित या रद्द करते हुए, ऐसी शर्तें जिनके अधीन रहते हुए उपांतरण या रद्दकरण प्रभावी होगा, अधिरोपित कर सकेगा, जिन्हें वह ठीक समझे

(3) रिजर्व बैंक, किसी भी समय, यदि उसका यह समाधान हो जाता है कि लोकहित में या प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी या उसके सदस्यों के हित में ऐसा करना आवश्यक है, तो लिखित आदेश द्वारा और ऐसे निबंधनों और शर्तों पर, जो उसमें विनिर्दिष्ट की जाएं, -

(क) ऐसी प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी से, प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी के कार्यों से संबंधित या उद्भूत किसी मामले पर विचार करने के प्रयोजन के लिए अपने निदेशकों का अधिवेशन बुलाने की अपेक्षा कर सकेगा;

(ख) प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी के बोर्ड या उसके द्वारा गठित किसी समिति या किसी अन्य निकाय के किसी अधिवेशन में कार्यवाहियों पर निगरानी रखने के लिए अपने अधिकारियों में से एक या अधिक को प्रतिनियुक्त कर सकेगा और प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी से ऐसे अधिवेशन में प्रतिनियुक्त अधिकारियों को सुने जाने का अवसर दिए जाने की अपेक्षा कर सकेगा और ऐसे अधिकारियों से यह भी अपेक्षा कर सकेगा कि वे रिजर्व बैंक को ऐसी कार्यवाहियों की रिपोर्ट भेजे;

() प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी के बोर्ड या उसके द्वारा गठित समिति या किसी अन्य निकाय से रिजर्व बैंक द्वारा इस निमित्त प्रतिनियुक्त किसी अधिकारी को उसके प्रायिक पते पर बोर्ड उसके द्वारा गठित समिति या अन्य निकाय के किसी अधिवेशन के संबंध में सभी सूचनाएं और अन्य संसूचनाएं लिखित में देने की अपेक्षा कर सकेगा;

() अपने अधिकारियों में से एक या अधिक को प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी या उसके कार्यालयों या शाखाओं के कार्यों का संचालन करने की रीति का संप्रेक्षण करने और उन पर रिपोर्ट देने के लिए नियुक्त कर सकेगा;

(ङ) प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी से ऐसे समय में जो आदेश में विनिर्दिष्ट किया जाए, प्रबंध में ऐसे परिवर्तन जो रिजर्व बैंक आवश्यक समझे, करने की अपेक्षा कर सकेगा ।

(4) रिजर्व बैंक, किसी भी समय, किसी प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी को उसे ऐसे समय के भीतर जो रिजर्व बैंक द्वारा विनिर्दिष्ट किया जाए, ऐसी प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी के कारबार और कार्यों से संबंधित ऐसे विवरण और जानकारी जिन्हें रिजर्व बैंक इस अधिनियम के प्रयोजन के लिए अभिप्राप्त करना आवश्यक और समीचीन समझे, प्रस्तुत करने का निदेश दे सकेगा ।

12. प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी, प्रत्यय संस्था और विनिर्दिष्ट उपयोक्ता का निरीक्षण-(1) कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) की धारा 235 में अंतर्विष्ट प्रतिकूल किसी बात के होते हुए भी, रिजर्व बैंक, किसी भी समय किसी प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी या प्रत्यय संस्था या विनिर्दिष्ट उपयोक्ता और उनकी बहियों तथा लेखाओं का अपने एक या अधिक अधिकारियों द्वारा या ऐसे अन्य व्यक्तियों या अभिकरण के माध्यम से जो रिजर्व बैंक अवधारित करे निरीक्षण करा सकेगा और केन्द्रीय सरकार द्वारा ऐसा करने के लिए निदेश दिए जाने पर ऐसा कराएगा; और रिजर्व बैंक, यथास्थिति, प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी या प्रत्यय संस्था या विनिर्दिष्ट उपयोक्ता को ऐसे निरीक्षण के संबंध में अपनी रिपोर्ट की एक प्रति का प्रदाय करेगा ।

(2) प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी, प्रत्यय संस्था और विनिर्दिष्ट उपयोक्ता के प्रत्येक निदेशक या अन्य अधिकारी या कर्मचारी का यह कर्तव्य होगा कि वह उपधारा (1) के अधीन निरीक्षण करने वाले, यथास्थिति, किसी अधिकारी या व्यक्ति या अभिकरण को अपनी अभिरक्षा या शक्ति के अधीन ऐसी सभी बहियों, लेखाओं और अन्य दस्तावेजों को प्रस्तुत करे और ऐसी प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी, प्रत्यय संस्था और विनिर्दिष्ट उपयोक्ता के कार्यों से संबंधित ऐसा कोई विवरण या जानकारी उसे दे जिसकी उक्त अधिकारी या व्यक्ति या अभिकरण ऐसे समय के भीतर, जो उक्त अधिकारी या व्यक्ति या अभिकरण विनिर्दिष्ट करे, उससे अपेक्षा करे ।

(3) उपधारा (1) के अधीन निरीक्षण करने वाला रिजर्व बैंक का कोई अधिकारी या व्यक्ति या अभिकरण प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी, प्रत्यय संस्था और विनिर्दिष्ट उपयोक्ता के किसी निदेशक या अन्य अधिकारी या कर्मचारी की उनके कारबार के संबंध में शपथ पर परीक्षा कर सकेगा और तद्नुसार शपथ दिला सकेगा ।

(4) उपधारा (1) में निर्दिष्ट किसी व्यक्ति या किसी अभिकरण द्वारा उपधारा (1) के अधीन निरीक्षण के या उसके आनुषंगिक व्यय, यथास्थिति, संबद्ध प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी या प्रत्यय संस्था या विनिर्दिष्ट उपयोक्ता द्वारा वहन किए जाएंगे ।

अध्याय 4

संपरीक्षक

13. संपरीक्षक की शक्तियां और कर्तव्य-(1) प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी के संपरीक्षक का यह कर्तव्य होगा कि वह इस बारे में जांच करे कि प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी ने अपने कारबार से संबंधित ऐसे विवरण, जानकारी या विशिष्टियां, जिनके दिए जाने की अपेक्षा इस अधिनियम के अधीन की गई है, रिजर्व बैंक को दी है या नहीं, और संपरीक्षक, उस दशा के सिवाय जहां ऐसी जांच के पश्चात् उसका यह समाधान हो जाता है कि प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी ने ऐसा कोई विवरण, जानकारी या विशिष्टियां प्रस्तुत कर दी हैं, रिजर्व बैंक को इस संबंध में रिपोर्ट देगा

(2) रिजर्व बैंक अपना यह समाधान हो जाने पर कि लोकहित में या प्रत्यय प्रणाली के हित में ऐसा करना आवश्यक है, प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी की संपरीक्षा और रिजर्व बैंक को रिपोर्ट प्रस्तुत किए जाने के संबंध में विशिष्टियां या साधारणतया निदेश जारी कर सकेगा ।

(3) जहां रिजर्व बैंक की यह राय है कि लोकहित में या प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी के या उसके सदस्यों के हित में या प्रत्यय प्रणाली या प्रत्यय संस्था या उसके उधार लेने वाले या ग्राहक के हित में ऐसा करना आवश्यक है तो, वह, किसी भी समय, आदेश द्वारा, यह निदेश दे सकेगा कि प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी के लेखाओं की किसी ऐसे संव्यवहार या संव्यवहारों के वर्ग के संबंध में या ऐसी अवधि या अवधियों के लिए, जो आदेश में उल्लिखित की जाएं, विशेष संपरीक्षा कराई जाए और रिजर्व बैंक ऐसे आदेश द्वारा या किसी पृथक् आदेश द्वारा या तो किसी संपरीक्षक या संपरीक्षकों की नियुक्ति कर सकेगा या प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी के संपरीक्षक को यह निदेश दे सकेगा कि वह स्वयं ऐसी विशेष संपरीक्षा करे और संपरीक्षक ऐसे निदेशों का अनुपालन करेगा और रिजर्व बैंक को ऐसी संपरीक्षा की रिपोर्ट देगा और उसकी प्रति प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी को अग्रेषित करेगा  

(4) संपरीक्षा में अंतर्वलित कार्य की प्रकृति और परिमाण को ध्यान में रखते हुए रिजर्व बैंक द्वारा नियत किए जाने वाले संपरीक्षकों का पारिश्रमिक और संपरीक्षा के या उसके आनुषंगिक व्यय इस प्रकार संपरीक्षित प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी द्वारा वहन किए जाएंगे ।

अध्याय 5

प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनियों के कृत्य

14. प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी के कृत्य-(1) प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी निम्नलिखित प्रकार के कारबारों में से कोई एक या अधिक कारबार कर सकेगी, अर्थात्: -

(क) ऐसी प्रत्यय संस्था के जो प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी की सदस्य है, उधार लेने वालों के व्यापार, प्रत्यय और वित्तीय स्थिति के संबंध में जानकारी का संग्रहण, प्रक्रमण और समाकलन करना;

(ख) अपने विनिर्दिष्ट उपयोक्ताओं को या किसी अन्य प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी के विनिर्दिष्ट उपयोक्ताओं को या किसी ऐसी अन्य प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी को जो उसकी सदस्य है, प्रत्यय विषयक जानकारी उपलब्ध कराना;

(ग) अपने विनिर्दिष्ट उपयोक्ताओं या किसी अन्य प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी के विनिर्दिष्ट उपयोक्ताओं या ऐसी प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनियों को जो उसकी सदस्य हैं, प्रत्यय विषयक आंकडे़ उपलब्ध कराना;

(घ) अनुसंधान परियोजना चलाना;

(ङ) किसी अन्य प्रकार का कारबार करना जिसे रिजर्व बैंक विनियमों द्वारा कारबार के रूप में विनिर्दिष्ट करे, जिसमें किसी प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी का लगाना विधिपूर्ण है ।

(2) कोई प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी उपधारा (1) में निर्दिष्ट कारबार से भिन्न किसी प्रकार का कोई कारबार नहीं करेगी

(3) प्रत्यय विषयक जानकारी का कारबार करने के प्रयोजनों के लिए कोई प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी-

(क) ऐसे निबंधनों और शर्तों के अधीन रहते हुए जो ऐसी प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी द्वारा पूर्व अवधारित और प्रकट की जाएं, अपने विकल्प पर प्रत्यय संस्थाओं और अन्य प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनियों को अपने सदस्य के रूप में रजिस्टर कर सकेगी;

() किसी विनिर्दिष्ट उपयोक्ता को प्रत्यय विषयक जानकारी देने के लिए फीस की ऐसी युक्तियुक्त रकम, जो उसे उपयुक्त प्रतीत हो और ऐसी अधिकतम फीस से अधिक हो, जो धारा 27 के अधीन विनिर्दिष्ट की जाए प्रभारित कर सकेगी;

() साधारणतया सभी ऐसे अन्य कार्य कर सकेगी और ऐसे अन्य कृत्यों का निर्वहन कर सकेगी, जो इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसार उसके कार्यों, कारबार और कृत्यों के समुचित संचालन को सुकर बनाने के लिए आवश्यक हों

15. प्रत्यय संस्था का किसी प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी का सदस्य होना-(1) प्रत्येक प्रत्यय संस्था जो इस अधिनियम के प्रारंभ पर अस्तित्व में है, ऐसे प्रारंभ से तीन मास के अवसान के पूर्व या ऐसी विस्तारित अवधि के भीतर जो रिजर्व बैंक द्वारा उसके आवेदन पर अनुज्ञात की जाए और विस्तारण के लिए कारण के बारे में समाधान हो जाने के अधीन रहते हुए, कम से कम एक प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी का सदस्य बनेगी ।

(2) ऐसी प्रत्येक प्रत्यय संस्था जो इस अधिनियम के प्रारंभ के पश्चात् अस्तित्व में आती है, अपने अस्तित्व में आने से तीन मास के अवसान के पूर्व या ऐसी विस्तारित अवधि के भीतर, जो रिजर्व बैंक द्वारा उसके आवेदन पर अनुज्ञात की जाए और विस्तारण के लिए कारण के बारे में समाधान हो जाने के अधीन रहते हुए, कम से कम एक प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी का सदस्य बनेगी ।

(3) प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी, अपने विकल्प पर, किसी अन्य प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी का सदस्य बन सकेगी

(4) कोई प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी, किसी प्रत्यय संस्था या अन्य प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी को अपने सदस्य के रूप में ऐसी प्रत्यय संस्था या प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी को, जिसके आवेदन को वह अस्वीकार करने का प्रस्ताव करती है, सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर दिए बिना और ऐसे अस्वीकार किए जाने के कारण अभिलिखित किए बिना रजिस्टर करने से इंकार नहीं करेगी और ऐसे अस्वीकार किए जाने वाले आदेश की प्रति रिजर्व बैंक को अग्रेषित की जाएगी ।

(5) ऐसी कोई प्रत्यय संस्था या प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी जो उपधारा (4) के अधीन प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी के सदस्य के रूप में उसे रजिस्टर करने के लिए उसके आवेदन के अस्वीकार किए जाने के आदेश से व्यथित है, रिजर्व बैंक उस तारीख से जिसको अस्वीकार किए जाने का ऐसा आदेश उसे संसूचित किया गया था, तीस दिन की अवधि के भीतर अपील कर सकेगी:

परन्तु रिजर्व बैंक, यदि उसका यह समाधान हो जाता है कि अपीलार्थी को उक्त अवधि के भीतर अपील फाइल किए जाने से पर्याप्त कारण से रोका गया था, उसे तीस दिन से अनधिक की और अवधि के भीतर अपील फाइल करने के लिए अनुज्ञात कर सकेगा ।

(6) रिजर्व बैंक, उपधारा (5) के अधीन अपील प्राप्त होने पर, अपीलार्थी और अन्य संबद्ध पक्षकारों को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर देने के पश्चात् ऐसा आदेश पारित कर सकेगा, जो वह ठीक समझे ।

(7) रिजर्व बैंक का विनिश्चय, जहां उसे उपधारा (5) के अधीन कोई अपील की गई है, अंतिम होगा और उपधारा (4) के अधीन प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी का आदेश उक्त तीस दिन की अवधि के अवसान के पश्चात् तब अंतिम होगा जब रिजर्व बैंक को उस उपधारा के अधीन कोई अपील नहीं की गई है ।

(8) प्रत्येक विनिर्दिष्ट उपयोक्ता ऐसी प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी से जिसका विनिर्दिष्ट उपयोक्ता सदस्य है, अपने उपयोग के लिए प्रत्यय विषयक जानकारी अभिप्राप्त करने का हकदार होगा ।

16. किसी प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी का सदस्य बनने में असफल रहना-(1) जहां कोई प्रत्यय संस्था-

(क) कम से कम एक प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी की सदस्य बनने से प्रविरत रहती है; या

(ख) किसी भी समय किसी प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी की सदस्य नहीं है,

वहां रिजर्व बैंक स्वप्रेरणा से या किसी प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी से शिकायत पर ऐसी प्रत्यय संस्था को ऐसे समय के भीतर, जो वह विनिर्दिष्ट करे, किसी प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी की सदस्य बनने के लिए आवश्यक कदम उठाने के लिए निदेश दे सकेगा ।

(2) यदि कोई प्रत्यय संस्था कम से कम एक प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी की सदस्य बनने के लिए उपधारा (1) के अधीन रिजर्व बैंक के निदेशों का अनुपालन करने में असफल रहती है तो रिजर्व बैंक इस अधिनियम के उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, किसी अन्य प्राधिकारी को ऐसी कार्रवाई करने के लिए, जो वह ठीक समझे, ऐसी असफलता को संसूचित कर सकेगी ।

17. प्रत्यय विषयक जानकारी का संग्रहण और प्रस्तुत किया जाना-(1) कोई प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी या उस निमित्त उस कंपनी द्वारा प्राधिकृत कोई व्यक्ति जो ऐसे प्ररूप में रिजर्व बैंक द्वारा बनाए गए विनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट किया जाए या उसके यथा निकट प्ररूप में लिखित सूचना द्वारा अपने सदस्यों से, जो प्रत्यय संस्था या प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी है, ऐसी प्रत्यय विषयक जानकारी जिसे वह इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसार ठीक समझे, प्रस्तुत करने की अपेक्षा कर सकेगा ।

(2) प्रत्येक प्रत्यय संस्था, जो प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी की सदस्य है और प्रत्येक प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी, जो अन्य प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी की सदस्य है, उपधारा (1) के अधीन सूचना की प्राप्ति पर उस प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी को, जिसकी वह सदस्य है, ऐसी अवधि के भीतर, जो उस सूचना में विनिर्दिष्ट की जाए, प्रत्यय विषयक जानकारी प्रदान करेगी ।

(3) प्रत्येक प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी ऐसे प्रयोजन के लिए, जो विनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट किया जाए, उपनियम (2) के अधीन प्राप्त प्रत्यय विषयक जानकारी अपने विनिर्दिष्ट उपयोक्ता को, उससे प्राप्त अनुरोध पर इस अधिनियम के उपबंधों और तद्धीन समय-समय पर इस निमित रिजर्व बैंक द्वारा जारी किए गए निदेशों के अनुसार प्रदान करेगी

(4) इस अधिनियम के अधीन ऐसी कोई प्रत्यय विषयक जानकारी-

(क) जो प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी द्वारा प्राप्त की जाती है, उसके विनिर्दिष्ट उपयोक्ता से भिन्न व्यक्ति को प्रकट नहीं की जाएगी; या

(ख) जो विनिर्दिष्ट उपयोक्ता द्वारा प्राप्त की जाती है, किसी अन्य व्यक्ति को प्रकट नहीं की जाएगी; या

() जो प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी या विनिर्दिष्ट उपयोक्ता द्वारा प्राप्त की जाती है, तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि द्वारा यथा अनुज्ञात या अपेक्षित प्रयोजन से भिन्न किसी अन्य प्रयोजन के लिए प्रकट नहीं की जाएगी

18. विवाद का निपटारा-(1) तत्समय प्रवृत्त किसी विधि में किसी बात के होते हुए भी, यदि प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनियों, प्रत्यय संस्थाओं, उधार लेने वालों और ग्राहकों के बीच प्रत्यय विषयक जानकारी के कारबार से संबंधित किसी विषय पर कोई विवाद उद्भूत होता है और जिसके लिए इस अधिनियम में किसी उपचार का उपबंध नहीं किया गया है तो ऐसे विवादों का निपटारा माध्यस्थम् और सुलह अधिनियम, 1996 (1996 का 26) में यथा उपबंधित रूप में सुलह या माध्यस्थम् द्वारा इस प्रकार किया जाएगा मानो विवाद के पक्षकारों ने ऐसे विवाद के सुलह या माध्यस्थम् द्वारा अवधारण के लिए लिखित में अपनी सहमति दी हो और उस अधिनियम के उपबंध तद्नुसार लागू होंगे

(2) जहां कोई विवाद उपधारा (1) के अधीन माध्यस्थम् को निर्देशित किया गया है, वहां उसका निपटारा या विनिश्चय, -

(क) रिजर्व बैंक द्वारा नियुक्त किए जाने वाले मध्यस्थ द्वारा;

(ख) विवाद के पक्षकारों द्वारा निर्देश किए जाने के तीन मास के भीतर किया जाएगा:

परन्तु मध्यस्थ, उसके लिए जो कारण हैं उनके लेखबद्ध करने के पश्चात्, उक्त अवधि को छह मास की अधिकतम अवधि तक विस्तारित कर सकेगा:

परन्तु यह और कि किसी समुचित मामले या मालमों में, रिजर्व बैंक, यदि वह ऐसा करना आवश्यक समझता है (जिसके कारण लेखबद्ध किए जाएंगे), विवाद के पक्षकारों को माध्यस्थम् और सुलह अधिनियम, 1996 (1996 का 26) के उपबंधों के अनुसार अपने विवाद के उस अधिनियम के उपबंधों के अनुसार निपटान के लिए मध्यस्थ नियुक्त करने के लिए निदेश दे सकेगा ।

(3) इस अधिनियम में जैसा उपबंधित है उसके सिवाय, माध्यस्थम् और सुलह अधिनियम, 1996 (1996 का 26) के उपबंध इस अधिनियम के अधीन सभी माध्यस्थमों को ऐसे लागू होंगे मानो माध्यस्थम् के लिए कार्यवाहियां माध्यस्थम् और सुलह अधिनियम, 1996 के उपबंधों के अधीन निपटान या विनिश्चिय के लिए निर्दिष्ट की गई थीं

अध्याय 6

जानकारी की गोपनीयता का सिद्धांत और प्रत्यय विषयक जानकारी देना

19. प्रत्यय विषयक जानकारी की यथार्थता और सुरक्षा-यथास्थिति, ऐसी कोई प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी या प्रत्यय संस्था या विनिर्दिष्ट उपयोक्ता जिसके कब्जे या नियंत्रण में प्रत्यय विषयक जानकारी है यह सुनिश्चित करने के लिए कि उनके द्वारा रखे गए प्रत्यय विषयक जानकारी से संबंधित आंकड़े यथार्थ, पूर्ण, किसी हानि या अप्राधिकृत पहुंच या उपयोग या उसके अप्राधिकृत प्रकटन के प्रति सम्यक् रूप से संरक्षित हैं, ऐसे कदम उठाएगा (जिसके अंतर्गत सुरक्षा रक्षोपाय भी हैं) जो विहित किए जाएं ।

20. गोपनीयता का सिद्धांत-प्रत्येक प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी, प्रत्यय संस्था और विनिर्दिष्ट उपयोक्ता प्रत्यय विषयक जानकारी के संग्रहण, प्रक्रमण, समाकलन, अभिलेखन, परिरक्षण, गोपनीयता, हिस्सा बंटाना और प्रथा के संबंध में निम्नलिखित गोपनीयता के सिद्धांत अपनाएगी, अर्थात्: -

(क) वे सिद्धांत-

(i) जो प्रत्येक प्रत्यय संस्था द्वारा उसके उधार लेने वालों ग्राहकों से जानकारी के संग्रहण के लिए और प्रत्येक प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी द्वारा अपनी सदस्य प्रत्यय संस्थाओं या प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनियों से जानकारी के संग्रहण के लिए, यथास्थिति, अपनी सदस्य प्रत्यय संस्थाओं या प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनियों द्वारा दी गई या उनसे अभिप्राप्त प्रत्यय विषयक जानकारी से संबंधित आंकड़ों के प्रक्रमण, अभिलेखन, संरक्षण के लिए और विनिर्दिष्ट उपयोक्ताओं के साथ ऐसे आंकड़े हिस्सा बंटाने के लिए अनुसरण किए जा सकेंगे;

(ii) जो प्रत्येक विनिर्दिष्ट उपयोक्ता द्वारा, यथास्थिति, प्रस्तुत या प्राप्त प्रत्यय विषयक जानकारी से संबंधित आंकड़ों के प्रक्रमण, अभिलेखन, परिरक्षण और संरक्षण के लिए उसके द्वारा अपनाए जा सकेंगे;

(iii) जो प्रत्येक प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी द्वारा उधार लेने वालों और ग्राहकों की प्रत्यय विषयक जानकारी से युक्त अभिलेखों की पहुंच अनुज्ञात करने के लिए और ऐसा करने की आवश्यकता की दशा में ऐसे अभिलेखों के परिवर्तन के लिए अपनाए जा सकेंगे;

() वे प्रयोजन जिनके लिए प्रत्यय विषयक जानकारी उपयोग की जा सकेगी, ऐसे उपयोग और उसके प्रकटन पर निर्बन्धन;

(ग) यथास्थिति, प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनियों या प्रत्यय संस्थाओं या विनिर्दिष्ट उपयोक्ताओं को ऐसी जानकारी देने से पूर्व प्रत्यय विषयक जानकारी की यथार्थता की जांच करने के लिए बाध्यता की सीमा;

(घ) यथास्थिति, प्रत्येक प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी, प्रत्यय संस्था और विनिर्दिष्ट उपयोक्ता द्वारा रखी गई प्रत्यय विषयक जानकारी का परिरक्षण (जिसके अंतर्गत वह अवधि जिसके लिए ऐसी जानकारी रखी जा सकेगी, ऐसी जानकारी के लोप की रीति और प्रत्यय विषयक जानकारी के अभिलेखों का अनुरक्षण भी है);

(ङ) इलेक्ट्रानिक पद्धति के माध्यम से प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनियों, प्रत्यय संस्थाओं और विनिर्दिष्ट उपयोक्ताओं की नेटवर्किंग;

(च) प्रत्यय विषयक जानकारी से संबंधित कोई अन्य सिद्धांत और प्रक्रियाएं, जिन्हें रिजर्व बैंक आवश्यक और समुचित समझे और वे विनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट की जा सकें ।

21. प्रत्यय विषयक जानकारी फाइलों और प्रत्यय विषयक रिपोर्टों में परिवर्तन-(1) कोई व्यक्ति जो किसी प्रत्यय संस्था से उधार सुविधा के अनुदान या मंजूरी के लिए आवेदन करता है, ऐसी संस्था से प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी से ऐसी संस्था द्वारा अभिप्राप्त प्रत्यय विषयक जानकारी की एक प्रति उसे देने के लिए अनुरोध कर सकेगा

(2) प्रत्येक प्रत्यय संस्था, उपधारा (1) के अधीन अनुरोध प्राप्त होने पर, उस उपधारा में निर्दिष्ट व्यक्ति को ऐसे प्रभारों के, जो इस संबंध में रिजर्व बैंक द्वारा विनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट किए जाएं संदाय के अधीन रहते हुए प्रत्यय विषयक जानकारी की एक   प्रति देगा ।

(3) यदि ऐसी किसी प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी या विनिर्दिष्ट उपयोक्ता या प्रत्यय संस्था ने, जिसके कब्जे या नियंत्रण में प्रत्यय विषयक जानकारी है, उसके द्वारा रखी गई जानकारी को अद्यतन नहीं किया है तो उधार लेने वाला या ग्राहक जानकारी को चाहे समुचित संशोधन या परिवर्धन करके या अन्यथा अद्यतन करने के लिए सभी या उनमें से किसी से अनुरोध कर सकेगा; और ऐसे अनुरोध पर, यथास्थिति, प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी या विनिर्दिष्ट उपयोक्ता या प्रत्यय संस्था ऐसा करने के लिए अनुरोध किए जाने के पश्चात् तीस दिन के भीतर प्रत्यय विषयक जानकारी को अद्यतन करने के लिए समुचित कार्रवाई करेगी :

परन्तु प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी और विनिर्दिष्ट उपयोक्ता संबद्ध प्रत्यय संस्था द्वारा ऐसे संशोधन, लोप या परिवर्धन के सही होने के रूप में प्रमाणित किए जाने के पश्चात् ही प्रत्यय विषयक जानकारी में संशोधन, लोप या परिवर्धन करेगी:

परन्तु यह और कि कोई ऐसा संशोधन, लोप या परिवर्धन प्रत्यय विषयक जानकारी में नहीं किया जाएगा यदि ऐसे संशोधन, लोप या परिवर्धन से संबंधित कोई विवाद किसी मध्यस्थ या अधिकरण या न्यायालय के समक्ष लंबित है और ऐसे मामलों में जहां ऐसा विवाद लंबित है, संबंधित प्रत्यय संस्था की बहियों में की प्रविष्टियों को प्रत्यय विषयक जानकारी के प्रयोजन के लिए हिसाब में लिया जाएगा ।

22. प्रत्यय विषयक जानकारी तक अप्राधिकृत पहुंच-(1) कोई व्यक्ति किसी प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी या प्रत्यय संस्था या विनिर्दिष्ट उपयोक्ता के कब्जाधीन या नियंत्रणाधीन प्रत्यय विषयक जानकारी तक तब तक पहुंच नहीं रखेगा जब तक कि वह पहुंच इस अधिनियम या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि द्वारा प्राधिकृत नहीं है या किसी न्यायालय या अधिकरण द्वारा ऐसा करने के लिए निदेशित नहीं किया गया है और ऐसे प्राधिकार या निदेश के बिना प्रत्यय विषयक जानकारी तक ऐसी पहुंच, प्रत्यय विषयक जानकारी तक अप्राधिकृत पहुंच समझी जाएगी ।

(2) कोई व्यक्ति जो उपधारा (1) में यथा निर्दिष्ट प्रत्यय विषयक जानकारी के प्रति अप्राधिकृत पहुंच अभिप्राप्त करता है, जुर्माने से, जो प्रत्येक अपराध की बाबत एक लाख रुपए तक का हो सकेगा, और यदि वह ऐसी अप्राधिकृत पहुंच निरंतर बनाए रखता है तो अतिरिक्त जुर्माने से, जो उस प्रत्येक दिन के लिए, जिसको व्यतिक्रम जारी रहता है, दस हजार रुपए तक का हो सकेगा, दंडनीय होगा और ऐसी अप्राधिकृत प्रत्यय विषयक जानकारी किसी प्रयोजन के लिए हिसाब में नहीं ली जाएगी ।

अध्याय 7

अपराध और शास्तियां

23. अपराध और शास्तियां-(1) जो कोई किसी विवरणी या अन्य दस्तावेज में अथवा इस अधिनियम के किसी उपबंध द्वारा या उसके अधीन या उसके प्रयोजनों के लिए अपेक्षित या दी गई किसी जानकारी में जानबूझकर ऐसा कथन करेगा जो किसी तात्त्विक विशिष्टि में मिथ्या है, जिसका मिथ्या होना वह जानता है या कोई तात्त्विक कथन करने में, जानबूझकर लोप करेगा तो वह कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी दंडनीय होगा और जुर्माने का भी दायी होगा ।    

(2) प्रत्येक प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी या कोई प्रत्यय संस्था या कोई विनिर्दिष्ट उपयोक्ता जो धारा 20 में निर्दिष्ट किसी सिद्धांत के भंग में जानबूझकर कोई कार्य कर रहा है या किसी व्यापार में लगा हुआ है, एक करोड़ रुपए से अनधिक के जुर्माने से दंडनीय होगा ।

(3) कोई प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी या प्रत्यय संस्था या विनिर्दिष्ट उपयोक्ता, यथास्थिति, किसी अन्य प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी या प्रत्यय संस्था या विनिर्दिष्ट उपयोक्ता या उधार लेने वाले या ग्राहक को जानबूझकर ऐसी प्रत्यय विषयक जानकारी प्रदान करता है जो किसी तात्त्विक विशिष्टि में मिथ्या है, या जिसका मिथ्या होना वह जानता है या कोई तात्त्विक कथन करने में, जानबूझकर लोप करेगा तो वह जुर्माने से, जो एक करोड़ रुपए तक का हो सकेगा, दंडनीय होगा ।

(4) कोई व्यक्ति जो इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए किसी नियम के किसी उपबंध या किए गए किसी आदेश का उल्लंघन करेगा या इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन प्रदत्त किसी शक्ति के विधिपूर्ण प्रयोग में बाधा डालेगा या इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए किसी नियम या किए गए आदेश या जारी निदेश की किसी अपेक्षा के अनुपालन में व्यतिक्रम करेगा, यदि ऐसे उल्लंघन, बाधा या व्यतिक्रम के दंड के लिए इस अधिनियम द्वारा कोई विनिर्दिष्ट उपबंध नहीं किया गया है, तो वह जुर्माने से, जो एक लाख रुपए तक का हो सकेगा, और जहां उल्लंघन या व्यतिक्रम लगातार जारी है वहां, अतिरिक्त जुर्माने से, जो उस प्रत्येक दिन के लिए जिसके दौरान उल्लंघन या व्यतिक्रम जारी रहता है, पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, दंडनीय होगा ।

(5) जहां कोई उल्लंघन या व्यतिक्रम, यथास्थिति, किसी प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी या प्रत्यय संस्था या विनिर्दिष्ट उपयोक्ता द्वारा किया गया है वहां ऐसा प्रत्येक व्यक्ति, जो उस उल्लंघन या व्यतिक्रम के किए जाने के समय उस प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी या प्रत्यय संस्था या विनिर्दिष्ट उपयोक्ता के कारबार के संचालन के लिए उसका भारसाधक और उसके प्रति उत्तरदायी था, ऐसे उल्लंघन या व्यतिक्रम का दोषी समझा जाएगा और तद्नुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने और दंडित किए जाने का भागी होगा:

परन्तु इस उपधारा की कोई बात किसी ऐसे व्यक्ति को इस अधिनियम में उपबंधित किसी दंड का भागी नहीं बनाएगी यदि वह यह साबित कर देता है कि उल्लंघन या व्यतिक्रम उसकी जानकारी के बिना किया गया था या उसने ऐसे उल्लंघन या व्यतिक्रम के किए जाने का निवारण करने के लिए सब सम्यक् तत्परता बरती थी ।

(6) उपधारा (5) में किसी बात के होते हुए भी, जहां कोई उल्लंघन या व्यतिक्रम, यथास्थिति, किसी प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी या प्रत्यय संस्था या विनिर्दिष्ट उपयोक्ता द्वारा किया गया है और यह साबित हो जाता है कि वह उल्लंघन या व्यतिक्रम उस प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी या प्रत्यय संस्था के अध्यक्ष, प्रबंध निदेशक, किसी अन्य निदेशक, प्रबंधक, सचिव या अन्य अधिकारी की सहमति या मौनानुकूलता से किया गया है या उस उल्लंघन या व्यतिक्रम का किया जाना उसकी किसी घोर उपेक्षा के कारण माना जा सकता है, वहां ऐसा अध्यक्ष, प्रबंध निदेशक, कोई अन्य निदेशक, प्रबंधक, सचिव या अन्य अधिकारी भी उस उल्लंघन या व्यतिक्रम का दोषी समझा जाएगा और तद्नुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने और दंडित किए जाने का भागी होगा ।

स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए, -

(क) कंपनी" से कोई निगमित निकाय अभिप्रेत है और इसके अंतर्गत फर्म या व्यष्टियों का अन्य संगम है, और

(ख) फर्म के संबंध में, निदेशक" से उस फर्म का भागीदार अभिप्रेत है ।

24. अपराधों का संज्ञान-(1) कोई भी न्यायालय, किसी प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी के सदस्य द्वारा किए गए और   धारा 23 के अधीन दंडनीय किसी अपराध का संज्ञान नहीं लेगा उस प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी द्वारा इस निमित्त लिखित रूप में साधारणतया या विशिष्टतया प्राधिकृत प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी के किसी अधिकारी द्वारा लिखित में किए गए परिवाद पर करने के सिवाय नहीं करेगा या यदि ऐसा करने के लिए रिजर्व बैंक द्वारा इस प्रकार निदेशित किया गया है तो महानगर मजिस्ट्रेट या प्रथम वर्ग न्यायिक मजिस्ट्रेट या उससे वरिष्ठ किसी न्यायालय से भिन्न कोई न्यायालय किसी ऐसे अपराध का विचारण नहीं करेगा ।

स्पष्टीकरण-इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी के सदस्य" से धारा 15 में निर्दिष्ट सदस्य अभिप्रेत होगा ।

(2) कोई न्यायालय किसी प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी द्वारा कारित धारा 23 के अधीन दंडनीय किसी अपराध का संज्ञान नहीं लेगा जो इस निमित्त रिजर्व बैंक द्वारा लिखित रूप में साधारणतया या विशिष्टतया प्राधिकृत रिजर्व बैंक के किसी अधिकारी द्वारा लिखित में किए गए परिवाद पर करने के सिवाय नहीं करेगा और महानगर मजिस्ट्रेट या प्रथम वर्ग न्यायिक मजिस्ट्रेट या उससे वरिष्ठ किसी न्यायालय से भिन्न कोई न्यायालय किसी ऐसे अपराध का विचारण नहीं करेगा ।

25. शास्ति अधिरोपित करने की रिजर्व बैंक की शक्ति-(1) धारा 23 में किसी बात के होते हुए भी, यदि, यथास्थिति, धारा 22 की उपधारा (2) या धारा 23 की उपधारा (2) या उपधारा (3) या उपधारा (4) में निर्दिष्ट प्रकृति का कोई उल्लंघन या व्यतिक्रम किसी प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी या किसी प्रत्यय संस्था द्वारा किया जाता है, तब रिजर्व बैंक ऐसी प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी या प्रत्यय संस्था पर निम्नलिखित अधिरोपित कर सकेगा-

(i) जहां उल्लंघन धारा 22 की उपधारा (2) में निर्दिष्ट प्रकृति का है, एक लाख रुपए से अनधिक की शास्ति;

(ii) जहां उल्लंघन धारा 23 की उपधारा (2) या उपधारा (3) में निर्दिष्ट प्रकृति का है, एक करोड़ रुपए से अनधिक की शास्ति;

(iii) जहां उल्लंघन धारा 23 की उपधारा (4) में निर्दिष्ट प्रकृति का है वहां एक लाख रुपए से अनधिक की शास्ति और जहां ऐसा उल्लंघन या व्यतिक्रम जारी रहता है, अतिरिक्त शास्ति जो प्रथम उल्लंघन या व्यतिक्रम के पश्चात् उस प्रत्येक दिन के लिए जिसके दौरान वह उल्लंघन या व्यतिक्रम जारी रहता है, पांच हजार रुपए तक की हो सकेगी

(2) उपधारा (1) के अधीन शास्ति का न्यायनिर्णयन करने के प्रयोजन के लिए, रिजर्व बैंक, यथास्थिति, प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी या प्रत्यय संस्था या विनिर्दिष्ट उपयोक्ता पर उससे यह कारण दर्शित करने की अपेक्षा करते हुए कि सूचना में उल्लिखित रकम शास्ति के रूप में क्यों न अधिरोपित कर दी जाए, सूचना की तामील करेगी और, यथास्थिति, ऐसी प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी या प्रत्यय संस्था या विनिर्दिष्ट उपयोक्ता को सुने जाने का उचित अवसर भी दिया जाएगा ।

(3) ऐसे किसी उल्लंघन या व्यतिक्रम की बाबत, जिसकी बाबत इस धारा के अधीन रिजर्व बैंक द्वारा कोई शास्ति अधिरोपित की गई है, न्यायालय में, यथास्थिति, किसी प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी या प्रत्यय संस्था या विनिर्दिष्ट उपयोक्ता के विरुद्ध कोई परिवाद फाइल नहीं किया जाएगा ।

(4) इस अधिनियम के अधीन रिजर्व बैंक द्वारा अधिरोपित कोई शास्ति उस तारीख से, जिसको राशि के संदाय की मांग करते हुए रिजर्व बैंक द्वारा जारी की गई सूचना की तामील, यथास्थिति, प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी या प्रत्यय संस्था या विनिर्दिष्ट उपयोक्ता पर की जाती है, चौदह दिन के भीतर संदेय होगी और ऐसी प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी या प्रत्यय संस्था या विनिर्दिष्ट उपयोक्ता के ऐसी अवधि के भीतर राशि का संदाय करने में असफल रहने की दशा में, प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी, प्रत्यय संस्था या विनिर्दिष्ट उपयोक्ता का, जो एक कंपनी है, जहां रजिस्ट्रीकृत कार्यालय स्थित है और जहां प्रत्यय संस्था भारत के बाहर निगमित है, जहां उसका भारत में कारबार का प्रधान स्थान स्थित है, उस पर अधिकारिता रखने वाले प्रधान सिविल न्यायालय के निदेश पर उद्गृहीत की जाएगी :

परन्तु इस उपधारा के अधीन ऐसा निदेश रिजर्व बैंक द्वारा न्यायालय को इस निमित्त आवेदन किए जाने पर ही किया जाएगा

(5) वह न्यायालय, जो उपधारा (4) के अधीन निदेश देता है, यथास्थिति, किसी प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी या प्रत्यय संस्था या विनिर्दिष्ट उपयोक्ता द्वारा संदेय राशि को उल्लिखित करते हुए प्रमाणपत्र जारी करेगा और ऐसा प्रत्येक प्रमाणपत्र उसी रीति में प्रवर्तनीय होगा मानो वह किसी सिविल वाद में न्यायालय द्वारा की गई डिक्री हो

(6) जहां, यथास्थिति, किसी प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी या प्रत्यय संस्था या विनिर्दिष्ट उपयोक्ता के विरुद्ध धारा 22 की उपधारा (2) या धारा 23 की उपधारा (2) या उपधारा (3) या उपधारा (4) में निर्दिष्ट प्रकृति के उल्लंघन या व्यतिक्रम की बाबत कोई परिवाद किसी न्यायालय में फाइल किया गया है, वहां इस धारा के अधीन प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी या प्रत्यय संस्था या विनिर्दिष्ट उपयोक्ता के विरुद्ध किसी शास्ति के अधिरोपण के लिए कोई कार्यवाही नहीं की जाएगी ।

26. जुर्माने का उपयोजन-इस अधिनियम के अधीन कोई जुर्माना अधिरोपित करने वाला न्यायालय यह निदेश दे सकेगा कि संपूर्ण जुर्माना अथवा उसका कोई भाग, कार्यवाहियों के खर्चों का संदाय करने में या संदाय मद्दे अथवा न्यायालय द्वारा निदेशित प्रयोजन के लिए उपयोजित किया जाएगा ।

अध्याय 8

प्रकीर्ण

27. फीस की अधिकतम रकम विनिर्दिष्ट करने की रिजर्व बैंक की शक्ति-रिजर्व बैंक, विनिर्दिष्ट उपयोक्ताओं को जानकारी उपलब्ध कराने के लिए और प्रत्यय संस्थाओं या प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी के किसी प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी के सदस्य के रूप में प्रवेश के लिए धारा 14 की उपधारा (3) के अधीन उद्ग्रहणीय फीस की अधिकतम रकम को विनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट कर सकेगा ।

28. किसी न्यायालय या अधिकरण या प्राधिकारी के समक्ष सूचनाओं का प्रकटीकरण-प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी के कारबार में या विनिर्दिष्ट उपयोक्ता के कारबार में लगा कोई अध्यक्ष, निदेशक, सदस्य, संपरीक्षक, सलाहकार, अधिकारी या अन्य कर्मचारी या अभिकर्ता इस अधिनियम के प्रयोजनों के सिवाय या तब के सिवाय जब उससे या किसी अन्य प्रवृत्त विधि या न्यायालय या अधिकरण या प्राधिकारी द्वारा ऐसा करने की अपेक्षा की जाए ऐसी सूचना का प्रकटन नहीं करेगा ।

29. विश्वस्तता और गोपनीयता के बारे में बाध्यताएं-(1) जब तक कि विधि द्वारा अन्यथा अपेक्षित न हो, प्रत्येक प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी ऐसी परिपाटियों और प्रथाओं का अनुपालन करेगी जो प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनियों में रूढ़िगत है और ऐसी कोई जानकारी जो उसके सदस्यों या विनिर्दिष्ट उपयोक्ताओं के संबंध में हो, या उनके क्रियाकलापों के संबंध में हो, प्रकट नहीं करेगी ।

(2) प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी का प्रत्येक अध्यक्ष, निदेशक, सदस्य, संपरीक्षक, सलाहकार, अधिकारी या अन्य कर्मचारी, अपना कार्यभार ग्रहण करने से पूर्व, इस संबंध में विश्वस्तता और गोपनीयता की ऐसे प्ररूप में घोषणा करेगा, जो इस बाबत विहित किया जाए ।

स्पष्टीकरण-इस धारा और धारा 30 के प्रयोजनों के लिए, परिपाटी और रूढ़िजन्य प्रथा" पद से ऐसी परिपाटी और प्रथाएं अभिप्रेत हैं, जिनका साधारणतः ऐसी प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनियों द्वारा अनुसरण किया जाता है या, जो इस अधिनियम, उसके अधीन बनाए गए नियमों और विनियमों तथा उनके अनुसरण में समय-समय पर जारी निदेशों के अनुसरण में उनके कृत्यों के सम्यक् अनुक्रम में विकसित की गई हों ।

30. सद्भावपूर्वक की गई कार्रवाइयों के लिए संरक्षण-(1) इस अधिनियम या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अनुसरण में सद्भावपूर्वक की गई या किए जाने के लिए आशयित किसी बात से कारित किसी हानि या नुकसानी या ऐसी हानि या नुकसानी के लिए जिसके कारित होने की संभावना है, कोई भी वाद या अन्य विधिक कार्यवाही या अभियोजन रिजर्व बैंक या केन्द्रीय सरकार या प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी या प्रत्यय संस्था या उसके अध्यक्ष, निदेशक, सदस्य, संपरीक्षक, सलाहकार, अधिकारी या अन्य कर्मचारी या अभिकर्ता या रिजर्व बैंक या केन्द्रीय सरकार या प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी या प्रत्यय संस्था द्वारा इस अधिनियम के अधीन किसी कृत्य का निर्वहन करने के लिए प्राधिकृत किसी व्यक्ति के विरुद्ध संस्थित नहीं किया जाएगा ।

(2) उपधारा (1) की कोई बात, यथास्थिति, प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी, प्रत्यय संस्था या उसके अध्यक्ष, निदेशक, सदस्य, संपरीक्षक, सलाहकार, अधिकारी या अन्य कर्मचारी या अभिकर्ताओं के विरुद्ध उनमें से किसी के द्वारा किए गए ऐसे किसी प्रकटन के कारण जो अप्राधिकृत या कपटपूर्ण या इस अधिनियम के उपबंधों या उनमें प्रचलित परिपाटियों या प्रथाओं के विपरीत हो, उसे कारित किसी हानि की बाबत नुकसानी का दावा करने के किसी व्यक्ति के अधिकार को प्रभावित नहीं करेगी ।

31. अधिकारिता का वर्जन-धारा 4, धारा 5, धारा 6, धारा 7 और धारा 18 में निर्दिष्ट मामलों के संबंध में, संविधान के अनुच्छेद 32, अनुच्छेद 226 या अनुच्छेद 227 के अधीन अधिकारिता का प्रयोग करते समय उच्चतम न्यायालय या किसी उच्च न्यायालय के सिवाय, किसी न्यायालय या प्राधिकारी को कोई अधिकारिता, शक्तियां या प्राधिकार नहीं होगा या उनका प्रयोग करने के लिए वह हकदार नहीं होगा ।

32. कतिपय मामलों में छूट देने की रिजर्व बैंक की शक्तियां-(1) केन्द्रीय सरकार, रिजर्व बैंक की सिफारिश पर, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, यह निदेश दे सकेगी कि इस अधिनियम का कोई या सभी उपबंध, यथास्थिति, किसी प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी या प्रत्यय संस्था को या तो साधारणतः या ऐसी अवधि के लिए और ऐसे अपवादों या उपांतरणों के अधीन रहते हुए जो उस अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किए जाएं, लागू नहीं होंगे ।

(2) उपधारा (1) के अधीन जारी किए जाने के लिए प्रस्तावित प्रत्येक अधिसूचना की एक प्रति संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखी जाएगी । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस अधिसूचना के निकाले जाने का अननुमोदन करने के लिए सहमत हो जाते हैं या दोनों सदन अधिसूचना में कोई उपांतरण करने के लिए सहमत हो जाएं तो, यथास्थिति, अधिसूचना नहीं निकाली जाएगी या ऐसे उपांतरित रूप में निकाली जाएगी जिसमें दोनों सदन सहमत हों ।

33. अन्य विधियों के लागू होने का वर्जन होना-इस अधिनियम के उपबंध, इस अधिनियम में जैसा उपबंधित है उसके सिवाय, कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के उपबंधों के अतिरिक्त होंगे न कि उनके अल्पीकरण में ।

34. कतिपय अधिनियमितियों का संशोधन-इस अधिनियम की अनुसूची में वर्णित अधिनियमितियों का संशोधन उनमें विनिर्दिष्ट रीति से होगा ।

35. कठिनाइयों को दूर करना-(1) यदि इस अधिनियम के उपबंधों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है तो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा, ऐसे उपबंध कर सकेगी, जो इस अधिनियम के उपबंधों से असंगत हों और जो उसे कठिनाइयों को दूर करने के लिए आवश्यक या समीचीन प्रतीत हों:

परन्तु इस धारा के अधीन कोई आदेश इस अधिनियम के प्रारंभ से दो वर्ष की अवधि की समाप्ति के पश्चात् नहीं किया जाएगा

(2) इस धारा के अधीन किया गया प्रत्येक आदेश उसके किए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखा जाएगा ।

36. नियम बनाने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार, रिजर्व बैंक से परामर्श करने के पश्चात्, इस अधिनियम के उपबंधों को कार्यान्वित करने के लिए नियम, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, बना सकेगी ।

(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम निम्नलिखित सभी या किन्हीं विषयों के लिए उपबंध कर सकेंगे, अर्थात्: -

(क) वह प्राधिकारी या अधिकरण जिसे धारा 7 की उपधारा (1) के अधीन अभिहित किया जाए;

(ख) प्रत्येक प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी या प्रत्यय संस्था और विनिर्दिष्ट उपयोक्ता द्वारा धारा 19 के अधीन आंकड़ों की यथार्थता, पूर्णता और आंकड़ों की किसी हानि या अप्राधिकृत पहुंच या उपयोग या प्रकटन से सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए की गई कार्रवाई;

(ग) वह प्ररूप जिसमें धारा 29 की उपधारा (2) के अधीन विश्वस्तता और गोपनीयता विषयक घोषणा की जाएगी;

(घ) कोई अन्य विषय, जो विहित किया जाना है या किया जाए ।

(3) इस अधिनियम के अधीन केंद्रीय सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम बनाए बनाए जाने के पश्चात्, यथाशीघ्र संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी और यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा किंतु नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा

37. रिजर्व बैंक की विनियम बनाने की शक्ति-(1) रिजर्व बैंक, इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए, इस अधिनियम के उपबंधों से और उसके अधीन बनाए गए नियमों से संगत विनियम बना सकेगा ।

(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना ऐसे विनियम निम्नलिखित सभी या किन्हीं विषयों के लिए उपबंध कर सकेंगे, अर्थात्: -

() वे व्यक्ति और संस्थाएं जो धारा 2 के खंड () के अधीन विनिर्दिष्ट उपयोक्ताओं के रूप में विनिर्दिष्ट की जाएं;

(ख) वह प्ररूप जिसमें धारा 4 की उपधारा (1) के अधीन आवेदन किए जा सकेंगे और उस उपधारा के अधीन ऐसे आवेदन फाइल करने की रीति;

(ग) किसी अन्य प्रकार का कारबार जिसमें धारा 14 की उपधारा (1) के खंड (ङ) के अधीन प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी लग सकेगी;

(घ) धारा 17 की उपधारा (1) और उपधारा (2) के अधीन जानकारी संग्रहण और उसे भेजने के लिए सूचना का प्ररूप; उससे सम्बन्धित प्रक्रिया और वे प्रयोजन जिनके लिए प्रत्यय विषयक जानकारी उपलब्ध कराई जा सकेगी;

(ङ) धारा 20 के खंड (च) के अधीन यथाविनिर्दिष्ट प्रत्यय विषयक जानकारी के संबंध में सिद्धांत और प्रक्रिया;

(च) वह रकम जिसका धारा 21 की उपधारा (2) के अधीन प्रत्यय विषयक जानकारी की प्रति अभिप्राप्त करने के लिए संदत्त किया जाना अपेक्षित हो;

(छ) धारा 27 के अधीन संदेय प्रभारों की अधिकतम रकम ।

(3) प्रत्येक विनियम, रिजर्व बैंक द्वारा बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र केंद्रीय सरकार को भेजा जाएगा और वह सरकार उसकी प्रति संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखवाएगी । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस विनियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह विनियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किंतु विनियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभावी होने से पहले उसके अधीन की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।

अनुसूची

(धारा 34 देखिए)

कतिपय अधिनियमितियों का संशोधन

भाग 1

भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934

(1934 का 2)

धारा 45ङ की उपधारा (2) में खंड (ग) के पश्चात् निम्नलिखित अंतःस्थापित करें-

() प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी (विनियमन) अधिनियम, 2005 के अधीन किसी प्रत्यय विषयक सूचना का प्रकटन "

भाग 2

बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949

(1949 का 10)

1. धारा 19 की उपधारा (3) के पश्चात् निम्नलिखित अंतःस्थापित करें-

(4) उपधारा (1) के खंड (ग) में जैसा उपबंधित है उसके सिवाय बैंककारी कंपनी कोई समनुषंगी कंपनी बनाकर प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी (विनियमन) अधिनियम, 2005 के अनुसार प्रत्यय विषयक जानकारी संबंधी कारबार करने के लिए समनुषंगी कंपनी बना सकेगी ।" ।

2. धारा 28 में इस धारा के अधीन उन्हें अभिप्राप्त किसी जानकारी को ऐसे समेकित प्ररूप में प्रकाशित कर सकेंगे जो वह ठीक समझे", के स्थान पर निम्नलिखित रखें-

(क) इस अधिनियम के अधीन उन्हें अभिप्राप्त किसी जानकारी को ऐसे समेकित प्ररूप में जिसे वह ठीक समझे;

(ख) प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी (विनियमन) अधिनियम, 2005 के अधीन प्रकट की गई किसी प्रत्यय विषयक जानकारी को ऐसी रीति में जिसे वे उचित समझें, प्रकाशित कर सकेगा ।" ।

भाग 3

राज्य वित्तीय निगम अधिनियम, 1951

(1951 का 63)

धारा 40 की उपधारा (3) के पश्चात्, निम्नलिखित अंतःस्थापित करें-

(4) इस धारा की कोई बात प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी (विनियमन) अधिनियम, 2005 के अधीन प्रकट की गई प्रत्यय विषयक जानकारी को लागू नहीं होगी ।" ।

भाग 4

भारतीय स्टेट बैंक अधिनियम, 1955

(1955 का 23)

धारा 44 की उपधारा (2) के पश्चात्, निम्नलिखित अंतःस्थापित करें-

(3) इस धारा की कोई बात प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी (विनियमन) अधिनियम, 2005 के अधीन प्रकट की गई प्रत्यय विषयक जानकारी को लागू नहीं होगी ।" ।

भाग 5

भारतीय स्टेट बैंक (समनुषंगी बैंक) अधिनियम, 1959

(1959 का 38)

धारा 52 की उपधारा (2) के पश्चात्, निम्नलिखित अंतःस्थापित करें-

(3) इस धारा की कोई बात प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी (विनियमन) अधिनियम, 2005 के अधीन प्रकट की गई प्रत्यय विषयक जानकारी को लागू नहीं होगी ।" ।

भाग 6

निक्षेप बीमा और प्रत्यय गारंटी निगम अधिनियम, 1961

(1961 का 47)

धारा 39 की उपधारा (2) के पश्चात्, निम्नलिखित अंतःस्थापित करें-

(3) इस धारा की कोई बात प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी (विनियमन) अधिनियम, 2005 के अधीन प्रकट की गई प्रत्यय विषयक जानकारी को लागू नहीं होगी ।" ।

भाग 7

राज्य कृषि उधार निगम अधिनियम, 1968

(1968 का 60)

धारा 40 में निम्नलिखित अंतःस्थापित करें-

परंतु इस धारा की कोई बात प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी (विनियमन) अधिनियम, 2005 के अधीन प्रकट की गई प्रत्यय विषयक जानकारी को लागू नहीं होगी ।" ।

भाग 8

बैंककारी कम्पनी (उपक्रमों का अर्जन और अंतरण) अधिनियम, 1970

(1970 का 5)

धारा 13 की उपधारा (3) के पश्चात्, निम्नलिखित अंतःस्थापित करें-

(4) इस धारा की कोई बात प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी (विनियमन) अधिनियम, 2005 के अधीन प्रकट की गई प्रत्यय विषयक जानकारी को लागू नहीं होगी ।" ।

भाग 9

बैंककारी कम्पनी (उपक्रमों का अर्जन और अंतरण) अधिनियम, 1980

(1980 का 40)

धारा 13 की उपधारा (3) के पश्चात्, निम्नलिखित अंतःस्थापित करें-

(4) इस धारा की कोई बात प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी (विनियमन) अधिनियम, 2005 के अधीन प्रकट की गई प्रत्यय विषयक जानकारी को लागू नहीं होगी ।" ।

भाग 10

भारतीय निर्यात-आयात बैंक अधिनियम, 1981

(1981 का 28)

धारा 30 की उपधारा (3) के पश्चात्, निम्नलिखित अंतःस्थापित करें-

(4) इस धारा की कोई बात प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी (विनियमन) अधिनियम, 2005 के अधीन प्रकट की गई प्रत्यय विषयक जानकारी को लागू नहीं होगी ।" ।

भाग 11

भारतीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक अधिनियम, 1981

(1981 का 61)

धारा 51 की उपधारा (2) के पश्चात्, निम्नलिखित अंतःस्थापित करें-

(3) इस धारा की कोई बात प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी (विनियमन) अधिनियम, 2005 के अधीन प्रकट की गई प्रत्यय विषयक जानकारी को लागू नहीं होगी ।" ।

भाग 12

लोक वित्तीय संस्था (विश्वस्तता और गोपनीयता विषयक बाध्यता) अधिनियम, 1983

(1983 का 48)

धारा 3 की उपधारा (2) के पश्चात्, निम्नलिखित अंतःस्थापित करें-

(3) इस धारा की कोई बात प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी (विनियमन) अधिनियम, 2005 के अधीन प्रकट की गई प्रत्यय विषयक जानकारी को लागू नहीं होगी ।" ।

भाग 13

राष्ट्रीय आवास बैंक अधिनियम, 1987

(1987 का 53)

धारा 44 की उपधारा (2) के पश्चात्, निम्नलिखित अंतःस्थापित करें-

(3) इस धारा की कोई बात प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी (विनियमन) अधिनियम, 2005 के अधीन प्रकट की गई प्रत्यय विषयक जानकारी को लागू नहीं होगी ।" ।

भाग 14

प्रादेशिक ग्रामीण बैंक अधिनियम, 1976

(1976 का 21)

धारा 25 की उपधारा (2) के पश्चात्, निम्नलिखित अंतःस्थापित करें-

(3) इस धारा की कोई बात प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी (विनियमन) अधिनियम, 2005 के अधीन प्रकट की गई प्रत्यय विषयक जानकारी को लागू नहीं होगी ।" ।

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