प्रकीर्ण स्वीय विधि (विस्तारण) अधिनियम, 1959
(1959 का अधिनियम संख्यांक 48)
[4 दिसम्बर, 1959]
कतिपय स्वीय विधियों का भारत के उन भागों पर, जहां वे
इस समय प्रवृत्त नहीं हैं, विस्तार करने
का उपबन्ध करने के लिए
अधिनियम
भारत गणराज्य के दसवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित किया जाता है: -
1. संक्षिप्त नाम और प्रारम्भ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम प्रकीर्ण स्वीय विधि (विस्तारण) अधिनियम, 1959 है ।
(2) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा, जिसे केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे ।
2. परिभाषा-इस अधिनियम में नियत दिन" से वह तारीख अभिप्रेत है जिसको यह अधिनियम प्रवृत्त होता है ।
3. कतिपय अधिनियमों का विस्तारण और संशोधन- अनुसूची 1 में विनिर्दिष्ट अधिनियम उसमें विनिर्दिष्ट रीति से, नियत दिन को और से, संशोधित हो जाएंगे ।
4. निरसन और व्यावृत्ति-(1) अनुसूची 2 में विनिर्दिष्ट अधिनियमितियां तथा अनुसूची 1 में विनिर्दिष्ट अधिनियमों की तत्स्थानी अन्य अधिनियमितियां, नियत दिन को और से, उन राज्यक्षेत्रों में निरसित हो जाएंगी जिन पर उनका क्रमशः उस दिन से ठीक पूर्व विस्तार था ।
(2) उपधारा (1) की कोई भी बात
(क) इस प्रकार निरसित किसी अधिनियमिति के पूर्व प्रवर्तन पर अथवा तद्धीन सम्यक् रूप से की गई या सहन की गई किसी बात पर प्रभाव नहीं डालेगी ; अथवा
(ख) इस प्रकार निरसित किसी अधिनियमिति के अधीन अर्जित, प्रोद्भूत या उपगत किसी अधिकार, विशेषाधिकार, बाध्यता या दायित्व पर प्रभाव नहीं डालेगी ; अथवा
(ग) इस प्रकार निरसित किसी अधिनियमिति के विरुद्ध किए गए किसी अपराध की बाबत उपगत किसी शास्ति, समपहरण या दंड पर प्रभाव नहीं डालेगी ; अथवा
(घ) किसी यथापूर्वोक्त ऐसे अधिकार, विशेषाधिकार, बाध्यता, दायित्व, शास्ति, समपहरण या दंड के बारे में किसी अन्वेषण, विधिक कार्यवाही या उपचार पर प्रभाव नहीं डालेगी,
और ऐसा कोई भी अन्वेषण, विधिक कार्यवाही या उपचार इस प्रकार संस्थित, चालू या प्रवर्तनशील रखा जा सकेगा, और ऐसी कोई भी शास्ति, समपहरण या दंड इस प्रकार अधिरोपित किया जा सकेगा मानो यह अधिनियम पारित ही नहीं हुआ था:
परन्तु ऐसी किसी अधिनियमिति के अधीन की गई कोई बात या कार्रवाई संबंधित राज्यक्षेत्र पर सम्प्रति विस्तारित अधिनियम के तत्स्थानी उपबंध के अधीन की गई समझी जाएगी, और, जब तक वह उक्त अधिनियम के अधीन की गई किसी बात या कार्रवाई द्वारा अधिक्रान्त नहीं कर दी जाती, तदनुसार प्रवृत्त बनी रहेगी ।
अनुसूची 1
(धारा 3 देखिए)
संपरिवर्ती विवाह-विघटन अधिनियम, 1866
(1866 का अधिनियम सं० 21)
धारा 35-उन राज्यक्षेत्रों के सिवाय, जो 1 नवम्बर, 1956 से ठीक पूर्व भाग-ख राज्यों में समाविष्ट थे" के स्थान पर जम्मू-कश्मीर राज्य और मणिपुर संघ राज्यक्षेत्र के सिवाय" रखा जाएगा ।
आनन्द विवाह अधिनियम, 1909
(1909 का अधिनियम सं० 7)
धारा 1-उपधारा (2) में, उन राज्यक्षेत्रों के सिवाय, जो 1 नवम्बर, 1956 से ठीक पूर्व भाग-ख राज्यों में समाविष्ट थे" के स्थान पर जम्मू-कश्मीर राज्य के सिवाय" रखा जाएगा ।
हिन्दू सम्पत्ति व्ययन अधिनियम, 1916
(1916 का अधिनियम सं० 15)
धारा 1-उपधारा (2) के स्थान पर निम्नलिखित उपधारा रखी जाएगी :
(2) इसका विस्तार, जम्मू-कश्मीर राज्य के सिवाय, सम्पूर्ण भारत पर है ।" ।
हिन्दू विरासत (निर्योग्यता निराकरण) अधिनियम, 1928
(1928 का अधिनियम सं० 12)
धारा 1-उपधारा (2) में, उन राज्यक्षेत्रों के सिवाय, जो 1 नवम्बर, 1956 से ठीक पूर्व भाग-ख राज्यों में समाविष्ट थे" के स्थान पर जम्मू-कश्मीर राज्य के सिवाय" रखा जाएगा ।
धारा 2-विरासत से या" का लोप कर दिया जाएगा ।
हिन्दू विद्याधन अधिनियम, 1930
(1930 का अधिनियम सं० 30)
धारा 1-उपधारा (2) में, उन राज्यक्षेत्रों के सिवाय, जो 1 नवम्बर, 1956 से ठीक पूर्व भाग-ख राज्यों में समाविष्ट थे" के स्थान पर जम्मू-कश्मीर राज्य के सिवाय" रखा जाएगा ।
मुस्लिम स्वीय विधि (शरीयत) अधिनियम, 1937
(1937 का अधिनियम सं० 26)
धारा 1-उपधारा (2) में, उन राज्यक्षेत्रों के सिवाय, जो 1 नवम्बर, 1956 से ठीक पूर्व भाग-ख राज्यों में समाविष्ट थे" के स्थान पर जम्मू-कश्मीर राज्य के सिवाय" रखा जाएगा ।
मुस्लिम विवाह विघटन अधिनियम, 1939
(1939 का अधिनियम सं० 8)
धारा 1-उपधारा (2) में, उन राज्यक्षेत्रों के सिवाय, जो 1 नवम्बर, 1956 से ठीक पूर्व भाग-ख राज्यों में समाविष्ट थे" के स्थान पर जम्मू-कश्मीर राज्य के सिवाय" रखा जाएगा ।
अनुसूची 2
[धारा 4(1) देखिए
दि हिन्दू ट्रान्सफर्स एण्ड बिक्वेस्ट्स (सिटी आफ मद्रास) ऐक्ट, 1921 (1921 का ऐक्ट सं० 8).
दि हैदराबाद हिन्दू गेन्स आफ लर्निंग ऐक्ट, 1344-एफ (1344-एफ का हैदराबाद ऐक्ट सं० 5).
दि हैदराबाद (एप्लीकेशन आफ सेन्ट्रल ऐक्ट्स) ऐक्ट, 1952 (1952 का हैदराबाद ऐक्ट सं० 48), जहां तक उसका संबंध अनुसूची 1 में विनिर्दिष्ट अधिनियमों में से किसी से हो ।
दि आन्ध्र प्रदेश (एक्स्टेंशन आफ लाज) ऐक्ट, 1958 (1958 का आन्ध्र प्रदेश ऐक्ट सं० 23), जहां तक उसका संबंध हिन्दू विद्याधन अधिनियम, 1930 से है ।
दि स्टेट आफ सौराष्ट्र (एप्लीकेशन आफ सेन्ट्रल एण्ड बाम्बे ऐक्ट्स) आर्डिनेन्स, 1948 (1948 सौराष्ट्र आर्डिनेन्स सं० 25), जहां तक उसका संबंध निम्नलिखित से है,
(क) हिन्दू विरासत (निर्योग्यता निराकरण) अधिनियम, 1928 (1928 का अधिनियम सं० 12); और
(ख) हिन्दू विद्याधन अधिनियम, 1930 (1930 का अधिनियम सं० 30) ।
दि सौराष्ट्र डिजोल्यूशन आफ मुस्लिम मैरिजेज ऐक्ट, 1952 (1952 का सौराष्ट्र ऐक्ट सं० 26) ।
दि ट्रावनकोर मुस्लिम सक्सेशन ऐक्ट, 1108 (1108 का ऐक्ट सं० 11) ।
दि कोचीन मुस्लिम सक्सेशन ऐक्ट, 1108 (1108 का ऐक्ट सं० 15) ।
दि ट्रावनकोर हिन्दू इनहेरिटेन्स (रिमूवल आफ डिसएबिलिटीज) ऐक्ट, 1114 (1114 का ऐक्ट सं० 18) ।
दि ट्रावनकोर हिन्दू गेन्स आफ लर्निंग ऐक्ट, 1117 (1117 का ऐक्ट सं० 30) ।
दि कोचीन मुस्लिम मैरिजेज डिजोल्यूशन ऐक्ट, 1120 (1120 का ऐक्ट सं० 22) ।
दि मध्य भारत (एडैप्टेशन आफ लाज) ऐक्ट, संवत 2009 (1953 का ऐक्ट सं० 1), जहां तक उसका संबंध निम्नलिखित से है
(क) आनन्द विवाह अधिनियम, 1909 (1909 का अधिनियम सं० 7);
(ख) हिन्दू सम्पत्ति व्ययन अधिनियम, 1916 (1916 का अधिनियम सं० 15);
(ग) हिन्दू विरासत (निर्योग्यता निराकरण) अधिनियम, 1928 (1928 का अधिनियम सं० 12);
(घ) हिन्दू विद्याधन अधिनियम, 1930 (1930 का अधिनियम सं० 30); और
(ङ) मुस्लिम स्वीय विधि (शरीयत) अधिनियम, 1937 (1937 का अधिनियम सं० 26) ।
दि मध्य भारत डिजोल्यूशन आफ मुस्लिम मैरिजेज ऐक्ट, 1956 (1956 का ऐक्ट सं० 14) ।
दि मद्रास हिन्दू ट्रान्सफर्स एण्ड बिक्वेस्ट्स ऐक्ट, 1914 (1914 का मद्रास ऐक्ट सं० 1) ।
दि मैसूर कन्वर्ट्स मैरिज डिजोल्यूशन ऐक्ट, 1866 (1866 का मैसूर ऐक्ट सं० 21), मैसूर पर यथाविस्तारित ।
मैसूर हिन्दू ला (विमेन्स राइट्स) ऐक्ट, 1933 (1933 का मैसूर ऐक्ट सं० 10) की धारा 6 ।
दि मैसूर हिन्द इनहेरिटेन्स (रिमूवल आफ डिसएबिलिटीज) ऐक्ट, 1938 (1938 का मैसूर ऐक्ट सं० 5) ।
दि मैसूर डिजोल्यूशन आफ मुस्लिम मैरिजेज ऐक्ट, 1943 (1943 का मैसूर ऐक्ट सं० 43) ।
दि यूनाइटेड स्टेट आफ राजस्थान मुस्लिम पर्सनल ला (शरीयत) एप्लीकेशन आर्डिनेन्स, 1949 (1949 का आर्डिनेन्स सं० 14) ।
दि राजस्थान (एडैप्टेशन आफ सेन्ट्रल लाज) आर्डिनेन्स, 1950 (1950 का आर्डिनेन्स सं० 4), जहां तक उसका संबंध निम्नलिखित से है,
(क) आनन्द विवाह अधिनियम, 1909 (1909 का अधिनियम सं० 7);
(ख) हिन्दू सम्पत्ति व्ययन अधिनियम, 1916 (1916 का अधिनियम सं० 15);
(ग) हिन्दू विरासत (निर्योग्यता निराकरण) अधिनियम, 1928 (1928 का अधिनियम सं० 12);
(घ) हिन्दू विद्याधन अधिनियम, 1930 (1930 का अधिनियम सं० 30); और
(ङ) मुस्लिम विवाह विघटन अधिनियम, 1939 (1939 का अधिनियम सं० 8)।
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