कराधान विधि (जम्मू-कश्मीर पर विस्तारण) अधिनियम, 1972
(1972 का अधिनियम संख्यांक 25)
[6 जून, 1972]
जम्मू-कश्मीर राज्य पर कुछ कराधान
विषयों के विस्तार के लिए
उपबन्ध करने के लिए
अधिनियम
भारत गणराज्य के तेईसवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-
1. संक्षिप्त नाम और प्रारम्भ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम कराधान विधि (जम्मू-कश्मीर पर विस्तारण) अधिनियम, 1972 है ।
(2) यह 1972 की जुलाई के प्रथम दिन को प्रवृत्त होगा ।
2. जम्मू-कश्मीर पर कुछ कराधान विधियों का विस्तार और उनका संशोधन-(1) वित्त (संख्यांक 2) अधिनियम, 1971(1971 का 32) के अध्याय 7 के उपबन्धों का, और उसके अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा बनाए गए सभी नियमों और जारी की गई सभी अधिसूचनाओं का और केन्द्रीय उत्पाद-शुल्क और सीमाशुल्क बोर्ड द्वारा बनाए गए सभी विनियमों का विस्तार जम्मू-कश्मीर राज्य पर होगा और वे जम्मू-कश्मीर राज्य में प्रवृत्त होंगे ।
(2) डाक वस्तुओं पर कर अधिनियम, 1971 (1971 का 47) का और अन्तर्देशीय हवाई यात्रा कर अधिनियम, 1971(1971 का 48) का और उसके अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा बनाए गए सभी नियमों और जारी की गई सभी अधिसूचनाओं का विस्तार, जम्मू-कश्मीर राज्य पर होगा और वे जम्मू-कश्मीर राज्य में प्रवृत्त होंगे ।
। । । । । । ।
3. दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1898 के प्रति निर्देशों का अर्थान्वयन-वित्त (संख्यांक 2) अधिनियम, 1971 (1971 का 32) के अध्याय 7 में, और अन्तर्देशीय हवाई यात्रा कर अधिनियम, 1971 (1971 का 48) की धारा 8 में, दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1898 (1898 का 5) के प्रति निर्देश का, जम्मू-कश्मीर राज्य के सम्बन्ध में, यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह उस राज्य में प्रवृत्त तत्समान विधि के प्रति निर्देश है ।
4. कठिनाइयों को दूर करने की शक्ति-यदि जम्मू-कश्मीर राज्य में या उसके सम्बन्ध में, वित्त (संख्यांक 2) अधिनियम, 1971 (1971 का 32) के अध्याय 7 के, या डाक वस्तुओं पर कर अधिनियम, 1971 (1971 का 47) के, या अन्तर्देशीय हवाई यात्रा कर अधिनियम, 1971 (1971 का 48) के ऐसे उपबन्धों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है जिनका विस्तार अब जम्मू-कश्मीर राज्य पर किया गया है, तो केन्द्रीय सरकार, परिस्थितियों की अपेक्षानुसार, राजपत्र में अधिसूचित आदेश द्वारा ऐसे उपबन्ध कर सकती है या ऐसे निदेश दे सकती है, जो कठिनाइयों को दूर करने के लिए आवश्यक प्रतीत हों और जो उस अध्याय या अधिनियम के उपबन्धों से असंगत न हों :
परन्तु इस अधिनियम के प्रारम्भ से दो वर्ष की समाप्ति के पश्चात् इस धारा के अधीन कोई आदेश नहीं किया जाएगा ।
[अनुसूची
(धारा 2 देखिए)
वित्त (संख्यांक 2) अधिनियम, 1971
(1971 का अधिनियम संख्यांक 32)
अध्याय 7
विदेश यात्रा कर
धारा 43-(i) उपधारा (1) में जम्मू-कश्मीर राज्य के सिवाय" का लोप करें;
(ii) उपधारा (2) के पश्चात् निम्नलिखित अन्तःस्थापित करें :-
परन्तु ये जम्मू-कश्मीर राज्य में 1972 की जुलाई के प्रथम दिन से प्रवृत्त होंगे ।" ।
धारा 44-खण्ड (ङ) में,-
(i) उपखण्ड (i) में उन राज्यक्षेत्रों से जिन पर इस अध्याय का विस्तार है" को भारत से" प्रतिस्थापित करें; और
(ii) उपखण्ड (ii) में, उक्त राज्यक्षेत्रों" को भारत से" प्रतिस्थापित करें ।
डाक वस्तुओं पर कर अधिनियम, 1971
(1971 का अधिनियम संख्यांक 47)
धारा 1-(i) उपधारा (2) में जम्मू-कश्मीर राज्य के सिवाय" का लोप करें;
(ii) उपधारा (3) के पश्चात् निम्नलिखित अन्तःस्थापित करें,-
परन्तु यह जम्मू-कश्मीर राज्य में 1972 की जुलाई के प्रथम दिन से प्रवृत्त होगा ।"।
धारा 3-उपधारा (1) में, जिन राज्यक्षेत्रों पर इस अधिनियम का विस्तार है" का लोप करें ।
अन्तर्देशीय हवाई यात्रा कर अधिनियम, 1971
(1971 का अधिनियम संख्यांक 48)
धारा 1-(i) उपधारा (2) में, जम्मू-कश्मीर राज्य के सिवाय" का लोप करें ।
(ii) उपधारा (3) के पश्चात् निम्नलिखित अन्तःस्थापित करें,-
परन्तु यह जम्मू-कश्मीर राज्य में, 1972 की जुलाई के प्रथम दिन से प्रवृत्त होगा ।"
धारा 2-खण्ड (घ) के स्थान पर निम्नलिखित प्रतिस्थापित करें,-
(घ) किसी यात्री के सम्बन्ध में अन्तर्देशीय यात्रा" से भारत में किसी स्थान से भारत में किसी स्थान को उसकी यात्रा अभिप्रेत है, किन्तु इसके अन्तर्गत ऐसी यात्रा नहीं है जो सीधे अन्तर्राष्ट्रीय टिकट से की जाती है तथा उसी टिकट पर भारत के बाहर किसी स्थान को या उससे यात्रा की पूर्ववर्ती यात्रा है अथवा पूर्ववर्ती यात्राओं की श्रृंखला का भाग है अथवा पश्चात्वर्ती यात्रा है या पश्चात्वर्ती यात्राओं की श्रृंखला का भाग है ।।
धारा 4-धारा 4 के स्थान पर निम्नलिखित प्रतिस्थापित करें,-
4. पूर्णांकन-इस अधिनियम के अधीन उद्ग्रहणीय कर, जहां भी आवश्यक हो, निकटतम रुपयों में पूर्ण कर दिया जाएगा, तथा पचास पैसे और उससे अधिक को एक रुपया गिना जाएगा और पचास से कम पैसे छोड़ दिए जाएंगे ।"।
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