चीनी उपक्रम (प्रबन्ध-ग्रहण) अधिनियम, 1978
(1978 का अधिनियम संख्यांक 49)
[30 दिसम्बर, 1978]
कुछ परिस्थितियों में कुछ चीनी उपक्रमों का लोकहित में
अस्थायी प्रबन्ध ग्रहण करने का उपबन्ध
करने के लिए
अधिनियम
लोकहित में समीचीन है कि चीनी का उत्पादन निरन्तर बनाए रखने और गन्ना उत्पादन करने वाले कृषकों को असम्यक् कठिनाई से बचाने के लिए तथा जनता के सभी वर्गों के हितों के सर्वोत्तम साधन के लिए प्रत्येक चीनी उपक्रम का, जो चीनी का विनिर्माण करने में असफल रहता है या उसे बन्द कर देता है या जो उपक्रम के प्रयोजनों के लिए अर्जित गन्ने की देय रकम का शीघ्र संदाय करने में असफल रहता है, सीमित अवधि के लिए प्रबन्ध ग्रहण करने का उपबन्ध किया जाए ;
भारत गणराज्य के उनतीसवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-
अध्याय 1
प्रारम्भिक
1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारम्भ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम चीनी उपक्रम (प्रबन्ध-ग्रहण) अधिनियम, 1978 है ।
(2) इसका विस्तार सम्पूर्ण भारत पर है ।
(3) यह 9 नवम्बर, 1978 को प्रवृत्त हुआ समझा जाएगा ।
2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-
(क) किसी चीनी-वर्ष के सम्बन्ध में नियत दिन" से वर्ष का वह दिन अभिप्रेत है जिसे केन्द्रीय सरकार, ऐसी कृषि-जलवायु सम्बन्धी दशाओं को, जो विद्यमान हैं या उनके विद्यमान होने की सम्भावना है, गन्ने की मात्रा को जो पैराई के लिए उपलब्ध है या जिसके उपलब्ध होने की संभावना है तथा अन्य सुसंगत तथ्यों को ध्यान में रखते हुए, अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट करे :
परन्तु चीनी-वर्ष 1978-79 के लिए नियत दिन 15 नवम्बर, 1978 होगा ;
(ख) गन्ने" से ईख अभिप्रेत है ;
(ग) किसी चीनी उपक्रम के सम्बन्ध में निहित होने की तारीख" से वह तारीख अभिप्रेत है जिसको उपक्रम का प्रबन्ध केन्द्रीय सरकार में धारा 3 के अधीन निहित होता है ;
(घ) अधिसूचना" से राजपत्र में प्रकाशित कोई अधिसूचना अभिप्रेत है ;
(ङ) विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है ;
(च) चीनी उपक्रम" से ऐसा कोई उपक्रम अभिप्रेत है जो निर्वात कटाह के माध्यम से और यांत्रिक शक्ति की सहायता से चीनी के विनिर्माण या उत्पादन में लगा हुआ है और अधिसूचित चीनी उपक्रम" से ऐसा चीनी उपक्रम अभिप्रेत है जिसकी बाबत धारा 3 के अधीन अधिसूचना निकाली गई है ;
(छ) चीनी वर्ष" से 1 अक्तूबर से प्रारम्भ होकर आगामी 30 दिसम्बर को समाप्त होने वाली बारह मास की अवधि अभिप्रेत है ;
(ज) उन शब्दों और पदों के जो इस अधिनियम में प्रयुक्त हैं किन्तु परिभाषित नहीं हैं और उद्योग (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1951 (1951 का 65) में परिभाषित हैं, वही अर्थ होंगे जो उस अधिनियम में उनके हैं और इस प्रयोजन के लिए चीनी उपक्रम को उस अधिनियम के अर्थ में एक औद्योगिक उपक्रम समझा जाएगा ;
(झ) उन शब्दों और पदों के जो इस अधिनियम में प्रयुक्त हैं किन्तु इस अधिनियम या उद्योग (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1951 (1951 का 65) में परिभाषित नहीं हैं और कम्पनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) में परिभाषित हैं, वही अर्थ होंगे जो उनके कम्पनी अधिनियम, 1956 में हैं ।
अध्याय 2
प्रबन्ध-ग्रहण
3. केन्द्रीय सरकार में किसी चीनी उपक्रम के प्रबन्ध का निहित होना-(1) यदि केन्द्रीय सरकार का यह समाधान हो जाता है कि-
(क) कोई चीनी उपक्रम किसी चीनी-वर्ष में उस वर्ष की बाबत नियत दिन को या उसके पूर्व चीनी का विनिर्माण प्रारम्भ करने में असफल रहा है अथवा उस दिन को या उसके पूर्व चीनी का विनिर्माण प्रारम्भ करके, उस उपक्रम के सम्बन्ध में चीनी के विनिर्माण की औसत अवधि के अवसान के पूर्व चीनी का विनिर्माण बन्द कर देता है ; या
(ख) किसी चीनी-वर्ष में किसी तारीख को किसी चीनी उपक्रम पर उस उपक्रम के प्रयोजनों के लिए उस तारीख के पूर्व (चाहे उस वर्ष में या किसी पूर्वततर चीनी वर्ष या चीनी-वर्षों में और चाहे इस अधिनियम के प्रारम्भ से पूर्व या उसके पश्चात्) किसी समय क्रय किए गए गन्ने की देय रकम की इतनी बकाया है जो ठीक पूर्ववर्ती चीनी-वर्ष के दौरान उपक्रम के प्रयोजनों के लिए क्रय किए गए गन्ने की कुल कीमत के दस प्रतिशत से अधिक है ; और
(ग) उपर्युक्त दोनों दशाओं में से किसी भी दशा में उस उपक्रम का प्रभावी रूप में काम करना इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए आवश्यक है,
तो केन्द्रीय सरकार एक सूचना ऐसे प्ररूप में और ऐसी रीति से, जो विहित की जाए, उस चीनी उपक्रम के स्वामी या प्रबन्धक को देगी जिसमें उस स्वामी या प्रबंधक से यह मांग की जाएगी कि वह ऐसे समय के भीतर जो सूचना में विनिर्दिष्ट किया जाए किन्तु जो पांच दिन से कम का नहीं होगा, उन परिस्थितियों के बारे में लिखित रिपोर्ट दे जिनमें ऐसा उपक्रम, यथास्थिति, चीनी का विनिर्माण प्रारम्भ करने में असफल रहा है या उसने ऐसा विनिर्माण बन्द कर दिया है या गन्ने की उक्त रकम की बकाया चुकता करने में असफल रहा है और इस बाबत कारण बताए कि उस उपक्रम का प्रबन्ध केन्द्रीय सरकार इस अधिनियम के अधीन क्यों न अपने हाथ में ले ले ।
(2) केन्द्रीय सरकार चीनी उपक्रम से उपधारा (1) के अधीन रिपोर्ट प्राप्त करने के पश्चात्, यथाशीघ्र या जब चीनी उपक्रम उपधारा (1) के अधीन उसे दी गई सूचना में विनिर्दिष्ट समय के भीतर ऐसी रिपोर्ट देने में असफल रहा है तब ऐसे समय के अवसान के पश्चात्, ऐसी अतिरिक्त जांच (यदि कोई हो) कर सकेगी जो वह ठीक समझे, और-
(क) यदि केन्द्रीय सरकार का समाधान हो जाता है कि मामले की सभी परिस्थितियों को और इस अधिनियम के प्रयोजनों को ध्यान में रखते हुए उस उपक्रम को, यथास्थिति, चीनी का उत्पादन प्रारम्भ या पुनः प्रारम्भ करने में या गन्ने की देय रकम की बकाया चुकता करने में समर्थ होने के लिए अतिरिक्त समय दिया जाना समीचीन होगा तो वह लिखित आदेश द्वारा ऐसी तारीख, जिसको या जिसके पूर्व, और ऐसी रीति विनिर्दिष्ट करेगा जिसमें वह उपक्रम, यथास्थिति, चीनी का उत्पादन प्रारम्भ या पुनः प्रारम्भ कर दे या गन्ने की उक्त देय रकम की बकाया चुकता कर देगा ; या
(ख) यदि केन्द्रीय सरकार का खण्ड (क) में उपबंधित रूप से समाधान नहीं होता है तो वह अधिसूचना द्वारा यह घोषणा कर सकेगी कि ऐसे उपक्रम का प्रबन्ध केन्द्रीय सरकार में ऐसी तारीख से ही निहित हो जाएगा जो उस सूचना में विनिर्दिष्ट की जाए ।
(3) यदि कोई चीनी उपक्रम, उपधारा (2) के खण्ड (क) के अधीन किए गए किसी आदेश का अनुपालन करने में असफल रहता है या उस आदेश में विनिर्दिष्ट तारीख को या उसके पूर्व चीनी का उत्पादन प्रारम्भ या पुनः प्रारम्भ करके, उस उपक्रम के संबंध में चीनी के विनिर्माण की औसत अवधि की अवसान होने से पूर्व ही चीनी का विनिर्माण बन्द कर देता है और केन्द्रीय सरकार का यह समाधान हो जाता है कि इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए ऐसा करना आवश्यक है तो वह अधिसूचना द्वारा यह घोषणा कर सकेगी कि उस चीनी उपक्रम का प्रबन्ध केन्द्रीय सरकार में ऐसी तारीख से ही निहित हो जाएगा जो उस अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाए ।
(4) किसी अवधि के दौरान चीनी के विनिर्माण के लिए किसी चीनी उपक्रम का उपयोग करने में उस उपक्रम के स्वामी या प्रबन्धक की ओर से किसी असफलता को उस उपक्रम की बाबत उपधारा (2) के खण्ड (ख) या उपधारा (3) के अधीन अधिसूचना निकाले जाने के प्रयोजन के लिए, वहां ध्यान में नहीं रखा जाएगा जहां ऐसी असफलता उस स्वामी के नियंत्रण से परे किन्हीं परिस्थितियों (वित्तीय कठिनाइयों से भिन्न) के कारण हुई है ।
(5) किसी चीनी उपक्रम का प्रबन्ध केन्द्रीय सरकार में निहित हो जाने के लिए उपधारा (2) या उपधारा (3) के अधीन निकाली गई प्रत्येक अधिसूचना, निहित हो जाने की तारीख से अधिक से अधिक तीन वर्ष की ऐसी अवधि के लिए प्रवृत्त होगी जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाए किन्तु यदि इस प्रकार विनिर्दिष्ट अवधि निहित किए जाने की तारीख से तीन वर्ष से कम की है और केन्द्रीय सरकार की राय में यह समीचीन है कि लोकहित में उस चीनी उपक्रम का प्रबन्ध इस प्रकार विनिर्दिष्ट अवधि के अवसान के पश्चात् भी केन्द्रीय सरकार में निहित रहना चाहिए तो वह, समय-समय पर अधिसूचना द्वारा, ऐसी अतिरिक्त अवधि के लिए जो निदेशों में विनिर्दिष्ट की जाए, इस प्रकार निहित बने रहने के लिए निदेश दे सकेगी :
परन्तु वह कुल अवधि, जिसके लिए किसी उपक्रम का प्रबन्ध केन्द्रीय सरकार में, निहित रह सकेगा, किसी भी दशा में निहित होने की तारीख से तीन वर्ष से अधिक की नहीं होगी ।
(6) इस धारा के प्रयोजनों के लिए-
(क) किसी चीनी उपक्रम द्वारा क्रय किए गए गन्ने के संबंध में गन्ने की देय रकम" से वह कीमत अभिप्रेत है जो ऐसे क्रय से संबंधित करार (चाहे वह अभिव्यक्त हो या विवक्षित) या ठहराव के अनुसार संदेय है और जहां ऐसा कोई करार या ठहराव नहीं है वहां ऐसे क्रय को लागू विधि के अनुसार अवधारित कीमत अभिप्रेत है ;
(ख) गन्ने की कोई देय रकम, जो किसी चीनी उपक्रम के प्रयोजनों के लिए अर्जित गन्ने की संदेय कीमत है, उस उपक्रम को ऐसे गन्ने के परिदान की तारीख से चौदह दिन के अवसान के पूर्व किसी भी समय बकाया नहीं समझी जाएगी ;
(ग) किसी चीनी-वर्ष (जिसे इस खण्ड में इसके पश्चात् चालू चीनी-वर्ष कहा गया है) की बाबत किसी चीनी उपक्रम के संबंध में चीनी के विनिर्माण की औसत अवधि की संगणना, चालू चीनी-वर्ष के ठीक पूर्ववर्ती तीन चीनी-वर्षों की औसत अवधि के दौरान किसी उपक्रम ने चीनी का उत्पादन जितने कैलेन्डर दिन किया है उस दिनों की कुल संख्या को तीन वर्ष की उक्त अवधि के दौरान उस उपक्रम ने चीनी का उत्पादन जितने चीनी-वर्ष किया है उस संख्या से विभाजित करके की जाएगी ।
4. अधिसूचित चीनी उपक्रम की आस्तियां, आदि-(1) अधिसूचित चीनी उपक्रम की बाबत यह समझा जाएगा कि उसके अन्तर्गत उक्त उपक्रम के संबंध में सभी आस्तियां, अधिकार, शक्तियां, प्राधिकार और विशेषाधिकार तथा जंगम और स्थावर सभी संपत्ति जिसके अन्तर्गत हैं भूमि, भवन, कर्मशाला, स्टोर, उपकरण, मशीनरी, मोटर-गाड़ी और अन्य यान और माल जिनका उत्पादन हो रहा है या जिनका अभिवहन किया जा रहा है, रोकड़बाकी, आरक्षित निधियां, विनिधान जो ऐसी सभी संपत्ति में या उससे उद्भूत होने वाले अन्य समस्त अधिकार और हित, जो ऐसी संपत्ति के निहित होने की तारीख से ठीक पूर्व भारत के अन्दर या बाहर, उपक्रम के स्वामित्व, कब्जे, शक्ति या नियंत्रण में थे तथा तत्संबंधी सभी लेखा-बहियां, रजिस्टर और अन्य सब दस्तावेजें, चाहे वे किसी भी प्रकार की हों ।
(2) कोई संविदा, चाहे वह अभिव्यक्त है या विवक्षित या अन्य ठहराव (चाहे वह किसी कानून के अधीन है या अन्यथा), जहां तक उसका संबंध अधिसूचित चीनी उपक्रम के कारबार और कामकाज के प्रबन्ध से है और जो निहित होने की तारीखके ठीक पूर्व प्रवृत्त है या किसी न्यायालय द्वारा किया गया कोई आदेश, जहां तक कि उसका संबंध उस उपक्रम के कारबार और कामकाज के प्रबन्ध् से है और जो उक्त तारीख के ठीक पूर्व प्रवृत्त है, उस तारीख को समाप्त हो गया समझा जाएगा ।
(3) अधिसूचित चीनी उपक्रम के कारबार और कामकाज का प्रबन्ध जिन सभी व्यक्तियों में, निहित होने की तारीख से ठीक पूर्व, निहित है उस तारीख से उनमें निहित नहीं रहेगा ।
(4) किसी न्यायालय, अधिकरण या अन्य प्राधिकरण के किसी निर्णय, डिक्री या आदेश में या तत्समय प्रवृत्त किसी विधि (इस अधिनियम से भिन्न) में किसी बात के होते हुए भी, प्रत्येक रिसीवर, शासकीय समापक या अन्य व्यक्ति जिसके कब्जे या अभिरक्षा में या जिसके नियंत्रणाधीन अधिसूचित चीनी उपक्रम या उसका कोई भाग निहित होने की तारीख से ठीक पूर्व है, उस तारीख को, यथास्थिति, उक्त उपक्रम या उसके किसी भाग का कब्जा धारा 5 के अधीन नियुक्त अभिरक्षक को या जहां ऐसा अभिरक्षक नियुक्त नहीं किया गया है वहां ऐसे व्यक्ति को दे देगा जिसे केन्द्रीय सरकार निदिष्ट करे ।
(5) केन्द्रीय सरकार अधिसूचित चीनी उपक्रम का कब्जा प्राप्त करने के लिए सभी आवश्यक कार्रवाई कर सकेगी या करा सकेगी ।
5. अभिरक्षक की नियुक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार, जैसे ही प्रशासनिक दृष्टि से ऐसा करना सुविधाजनक हो, किसी व्यष्टि या व्यष्टि निकाय या सरकारी कम्पनी को, किसी अधिसूचित चीनी उपक्रम का या अधिसूचित चीनी उपक्रमों के समूह का प्रबन्ध-ग्रहण करने के प्रयोजन के लिए ऐसे चीनी उपक्रम या उपक्रमों के अभिरक्षक के रूप में नियुक्त कर सकेगी और इस प्रकार नियुक्त अभिरक्षक, केन्द्रीय सरकार के लिए और उसकी ओर से ऐसे उपक्रम या उपक्रमों का प्रबन्ध चलाएगा ।
(2) केन्द्रीय सरकार किसी व्यष्टि या सरकारी कम्पनी को सभी अधिसूचित चीनी उपक्रमों के पर्यवेक्षण और नियंत्रण के लिए महा-अभिरक्षक के रूप में भी नियुक्त कर सकेगी और ऐसी नियुक्ति पर उपधारा (1) के अधीन नियुक्त प्रत्येक अभिरक्षक, महा-अभिरक्षक के मार्गदर्शन, नियंत्रण और पर्यवेक्षण में, कार्य करेगा ।
(3) उपधारा (1) के अधीन किसी अभिरक्षक की नियुक्ति पर, यथास्थिति, अधिसूचित चीनी उपक्रम या अधिसूचित चीनी उपक्रमों के समूह के प्रबन्ध का भार ऐसे अभिरक्षक में निहित होगा और ऐसी नियुक्ति के ठीक पूर्व ऐसे उपक्रम या उपक्रमों के प्रबन्ध के भारसाधक सभी व्यक्ति, ऐसे प्रबन्ध के भारसाधक नहीं रहेंगे, और ऐसे उपक्रम या उपक्रमों के समूह से संबंधित सभी आस्तियां, लेखा-बहियां, रजिस्टर या अन्य दस्तावेजें, जो उनकी अभिरक्षा में हों, ऐसे अभिरक्षक को देने के लिए आबद्ध होंगे ।
(4) केन्द्रीय सरकार अभिरक्षक या महा-अभिरक्षक को उसकी शक्तियों और कर्तव्यों के बारे में ऐसे निदेश (जिनके अन्तर्गत किसी कार्यालय, अभिकरण या अन्य प्राधिकरण के समक्ष कोई विधिक कार्यवाही प्रारम्भ करने, उनमें प्रतिरक्षा करने या उन्हें चालू रखने के बारे में निदेश भी हैं) जारी कर सकेगी जो केन्द्रीय सरकार वांछनीय समझे और महा-अभिरक्षक या यदि कोई महा-अभिरक्षक नहीं है तो अभिरक्षक ऐसी रीति के बारे में, जिससे अभिरक्षक या महा-अभिरक्षक अधिसूचित चीनी उपक्रम के प्रबन्ध का संचालन करेगा या ऐसे प्रबन्ध के दौरान उत्पन्न होने वाले किसी मामले के संबंध में अनुदेश के लिए, किसी भी समय केन्द्रीय सरकार को आवेदन कर सकेगा ।
(5) कोई व्यक्ति, जिसके कब्जे या नियंत्रण में अधिसूचित चीनी उपक्रम से संबंधित कोई बही, कागज या अन्य दस्तावेजें नियत दिन को हैं, तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी, अभिरक्षक को ऐसी बही, कागज और अन्य दस्तावेजों का लेखा-जोखा देने के लिए दायी होगा और अभिरक्षक को या ऐसे अन्य व्यक्ति को, जिसे केन्द्रीय सरकार या अभिरक्षक इस निमित्त प्राधिकृत करे, उनका परिदान करेगा ।
(6) निहित होने की तारीख के ठीक पूर्व अधिसूचित चीनी उपक्रम के प्रबन्ध का भारसाधक प्रत्येक व्यक्ति, उस तारीख से दस दिन के भीतर या ऐसी अतिरिक्त अवधि के भीतर जो केन्द्रीय सरकार इस निमित्त अनुज्ञात करे, निहित होने की तारीख के ठीक पूर्व उपक्रम की भागरूप सभी सम्पत्तियों और आस्तियों की (जिनके अन्तर्गत बही-ऋण, विनिधान और माल-असबाब की विशिष्टियां हैं) और उपक्रम के सभी ऐसे दायित्वों और बाध्यताओं की जो उस तारीख के ठीक पूर्व विद्यमान हैं और उक्त उपक्रम के संबंध में उपक्रम के स्वामी या प्रबन्धक द्वारा किए गए और उस तारीख के ठीक पूर्व प्रवृत्त सभी करारों की, पूर्ण तालिका अभिरक्षक को देगा ।
(7) महा-अभिरक्षक केन्द्रीय सरकार के प्रसादपर्यन्त पद धारण करेगा और ऐसा पारिश्रमिक प्राप्त करेगा जो केन्द्रीय सरकार नियत करे ।
(8) प्रत्येक अभिरक्षक या जहां कोई व्यष्टि-निकाय अभिरक्षक के रूप में नियुक्त किया गया है वहां, प्रत्येक ऐसा व्यष्टि निकाय केन्द्रीय सरकार के प्रसादपर्यन्त पद धारण करेगा और संबंधित चीनी उपक्रम या चीनी उपक्रमों के समूह की निधियों में से ऐसे पारिश्रमिक प्राप्त करेगा जो केन्द्रीय सरकार नियत करे ।
स्पष्टीकरण-दो या अधिक अधिसूचित उपक्रमों के अभिरक्षक को संदेय पारिश्रमिक का आबंटन उपक्रमों की निधियों में से ऐसे अनुपात में किया जाएगा जो केन्द्रीय सरकार ऐसे उपक्रमों से संबंधित कार्य की मात्रा और अन्य सुसंगत परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए आदेश द्वारा अवधारित करे ।
6. रकम का संदाय-(1) केन्द्रीय सरकार, धारा 3 के अधीन प्रत्येक अधिसूचित चीनी उपक्रम का प्रबन्ध केन्द्रीय सरकार में निहित किए जाने के लिए ऐसे उपक्रम के स्वामी को एक नकद रकम देगी ।
(2) प्रत्येक ऐसे मास के लिए जिसके दौरान अधिसूचित चीनी उपक्रम का प्रबंध इस अधिनियम के अधीन केन्द्रीय सरकार में निहित रहता है, उपधारा (1) में निर्दिष्ट रकम-
(क) जहां उपक्रम की गन्ना पेरने की दैनिक क्षमता पांच सौ टन या कम है वहां पांच सौ रुपए होगी, और
(ख) जहां उपक्रम का गन्ना पेरने की दैनिक क्षमता पांच सौ टन से अधिक है वहां ऐसी क्षमता के प्रत्येक टन के लिए एक रुपए की दर से संगणित रकम या एक हजार दो सौ पचास रुपए की रकम, इनमें से जो भी कम हो, होगी ।
अध्याय 3
चीनी उपक्रमों और गन्ने का उत्पादन करने वाले कृषकों को राहत
7. कुछ घोषणाएं करने की केन्द्रीय सरकार की शक्ति-(1) यदि केन्द्रीय सरकार का किसी अधिसूचित चीनी उपक्रम के संबंध में यह समाधान हो जाता है कि चीनी उद्योग के उत्पादन-परिमाण में गिरावट को रोकने के लिए लोकहित में ऐसा करना आवश्यक है तो वह अधिसूचना द्वारा घोषित कर सकेगी कि-
(क) अनुसूची में विनिर्दिष्ट सभी या कोई अधिनियमिति ऐसे चीनी उपक्रमों को लागू नहीं होंगी, या ऐसे अनुकूलनों के साथ, चाहे वे उपान्तरण, परिवर्धन या लोप के रूप में हों, (किन्तु जिनसे उक्त अधिनियमितियों की नीति प्रभावित नहीं होती है), लागू होंगी जो ऐसी अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किए जाएं, या
(ख) अधिसूचना निकाली जाने की तारीख के ठीक पूर्व प्रवृत्त सभी संविदाओं, सम्पत्ति के हस्तांतरण पत्रों, करारों, ठहरावों, अधिनिर्णयों, स्थायी आदेशों या अन्य लिखतों का (जिनमें ऐसा चीनी उपक्रम या ऐसे उपक्रम का स्वामी एक पक्षकार है या जो ऐसे किसी उपक्रम या व्यक्ति को लागू हो सकती हैं) या उसमें से किसी का, प्रवर्तन निलम्बित रहेगा या यह कि उक्त तारीख के पूर्व उनके अधीन उपगत या उद्भूत सभी या कोई अधिकार, विशेषाधिकार, बाध्यताएं और दायित्व निलम्बित रहेगा या अनुकूलन के साथ और ऐसी रीति से प्रवर्तनीय होगा जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाए ।
(2) उपधारा (1) के अधीन किसी अधिसूचित चीनी उपक्रम के सम्बन्ध में निकाली गई अधिसूचना, प्रथम बार में अधिक से अधिक एक वर्ष तक की ऐसी अवधि के लिए, जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाए, प्रवृत्त रहेगी किन्तु ऐसी अधिसूचना की अवधि को समय-समय पर किसी अन्य अधिसूचना द्वारा एक बार में अधिक से अधिक एक वर्ष की अवधि के लिए, बढ़ाया जा सकेगा ।
(3) उपधारा (1) के अधीन निकाली गई कोई अधिसूचना, किसी अन्य विधि, करार या लिखत में या किसी न्यायालय, अधिकरण, अधिकारी या अन्य प्राधिकारी की किसी डिक्री या आदेश में या किसी निवेदन, समझौते या स्थायी आदेश में तत्प्रतिकूल किसी बात के होते हुए भी, प्रभावी होगी ।
(4) उपधारा (1) के खण्ड (ख) में निर्दिष्ट और उस उपधारा के अधीन निकाली गई किसी अधिसूचना द्वारा निलम्बित या उपान्तरित किसी अधिकार, विशेषाधिकार, बाध्यता या दायित्व के प्रवर्तन के लिए कोई उपचार, अधिसूचना के निबन्धनों के अनुसार, निलम्बित या उपान्तरित बना रहेगा और उससे सम्बन्धित सभी कार्यवाही, जो किसी न्यायालय, अधिकरण, अधिकारी या अन्य प्राधिकारी के समक्ष लम्बित है, तद्नुसार रुकी रहेगी या ऐसे अनुकूलनों के अधीन रहते हुए, इस प्रकार चालू रहेगी कि अधिसूचना के प्रभावी न रहने पर-
(क) इस प्रकार निलम्बित या उपान्तरित कोई अधिकार, विशेषाधिकार, बाध्यता, या दायित्व उसी प्रकार पुनरुज्जीवित और प्रवर्तनीय हो जाएगा मानो अधिसूचना कभी निकाली ही न गई हो ;
(ख) इस प्रकार रोकी गई कोई कार्यवाही, ऐसी किसी विधि के उपबन्धों के अधीन रहते हुए, जो उस समय प्रवृत्त हो, उस प्रक्रम से पुनः चालू कर दी जाएगी जिस पर वह रोके जाने के समय थी ।
(5) उपधारा (1) के खण्ड (ख) में निर्दिष्ट किसी अधिकार, विशेषाधिकार, बाध्यता या दायित्व के प्रवर्तन के लिए परिसीमाकाल की गणना करने में वह अवधि अपवर्जित कर दी जाएगी जिसके दौरान वह या जिसके प्रवर्तन के लिए उपचार, निलम्बित रहा है ।
8. गन्ने की देय रकमों की बकाया चुकता करने के लिए अधिसूचित चीनी उपक्रमों की सहायता-(1) केन्द्रीय सरकार, गन्ने की बकाया शीघ्र चुकता करने को सुकर बनाने के लिए महा-अभिरक्षक और अभिरक्षकों को ऐसे निदेश जारी कर सकेगी जो वह ठीक समझे जिसके कि गन्ना उत्पादन करने वाले कृषकों को असम्यक् कठिनाई न हो ।
(2) उपधारा (1) के उपबन्धों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, गन्ने का उत्पादन करने वाले कृषकों को असम्यक् कठिनाई से बचाने के लिए केन्द्रीय सरकार, किसी अधिसूचित गन्ना उपक्रम की ऐसी सहायता ऐसी रीति से कर सकेगी जो वह ठीक समझे जिससे कि ऐसा उपक्रम गन्ने की अपनी देय रकम की सम्पूर्ण बकाया या उसका कोई भाग चुकता कर सके ।
स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए, गन्ने की देय रकम की बकाया" पद का अर्थान्वयन धारा 3 की उपधारा (6) के खण्ड (क) और (ख) के उपबन्धों के अनुसार किया जाएगा ।
अध्याय 4
प्रकीर्ण
9. यदि अधिसूचित गन्ना उपक्रम कोई कम्पनी है तो उसका परिसमापन नहीं होगा-(1) किसी अधिसूचित चीनी उपक्रम के, जो कि कोई कम्पनी है, परिसमापन के लिए कोई कार्यवाही केन्द्रीय सरकार की सहमति के बिना, न तो किसी न्यायालय में होगी और न किसी न्यायालय द्वारा या उसके पर्यवेक्षण के अधीन या स्वेच्छया, चालू रखी जाएगी ।
(2) ऐसे किसी आवेदन के लिए, जो किसी ऐसे अधिसूचित चीनी उपक्रम के परिसमापन के अनुक्रम में, ऐसे उपक्रम के सम्बन्ध में किसी संव्यवहार से उत्पन्न विषय की बाबत किया जा सकता है, तत्समय प्रवृत्त किसी विधि द्वारा विहित परिसीमाकाल की संगणना करने में, वह समय अपवर्जित कर दिया जाएगा जिसके दौरान ऐसे आवेदन का किया जाना अधिनियम द्वारा वर्जित कर दिया गया था ।
10. सद्भावपूर्ण संविदाएं, आदि रद्द या परिवर्तित की जा सकेंगी-(1) यदि केन्द्रीय सरकार का, ऐसी जांच करने के पश्चात्, जो वह ठीक समझे, यह समाधान हो जाता है कि किसी अधिसूचित चीनी उपक्रम के स्वामी या प्रबन्धक ने उक्त उपक्रम के सम्बन्ध में, निहित होने की तारीख से ठीक पूर्ववर्ती बारह मास के भीतर किसी समय ऐसी कोई संविदा या करार किया है जो असद्भावपूर्ण है या उपक्रम के लिए अहितकर है तो वह ऐसी संविदा या करार को रद्द या परिवर्तित (या तो शर्त रहित या ऐसी शर्तों के अधीन जो वह अधिरोपित करना ठीक समझे) करने के लिए आदेश कर सकेगी और तत्पश्चात् ऐसी संविदा या करार तद्नुसार प्रभावी होगा :
परन्तु कोई संविदा या करार तब तक रद्द या परिवर्तित नहीं किया जाएगा जब तक कि ऐसी संविदा या करार के पक्षकारों को सुने जाने का युक्तियुक्त अवसर नहीं दे दिया जाता ।
(2) उपधारा (1) के अधीन किए गए किसी आदेश से व्यथित कोई व्यक्ति, ऐसे आदेश में परिवर्तन कराने या उसे उलटवाने के लिए आवेदन, सिविल अधिकारिता वाले प्रधान न्यायालय को, जिसकी अधिकारिता की स्थानीय सीमाओं के भीतर ऐसे गन्ना उपक्रम का रजिस्ट्रीकृत कार्यालय स्थित है, कर सकेगा और तब ऐसा न्यायालय ऐसे आदेश को पुष्ट कर सकेगा या परिवर्तित कर सकेगा या उलट सकेगा ।
11. नियोजन-संविदा समाप्त करने की शक्ति-यदि अभिरक्षक या महा-अभिरक्षक की राय है कि अधिसूचित चीनी उपक्रम के स्वामी या सदस्य ने अथवा उसके अभिकर्ता ने, निहित होने की तारीख से पूर्व किसी समय, उक्त उपक्रम के सम्बन्ध में ऐसी कोई नियोजन-संविदा की है जो असम्यक्तः दुर्भर है तो वह कर्मचारी को एक मास की लिखित सूचना या उसके बदले में एक मास का वेतन या मजदूरी देकर ऐसी नियोजन-संविदा समाप्त कर सकेगा ।
12. अभिरक्षक द्वारा वास्तविक कब्जा ग्रहण किए जाने तक अधिसूचित चीनी उपक्रम का प्रबन्ध-(1) जब तक कि धारा 5 के अधीन नियुक्त किया गया अभिरक्षक किसी अधिसूचित चीनी उपक्रम का वास्तविक कब्जा ग्रहण नहीं कर लेता, तब तक निहित होने को तारीख से ठीक पूर्व ऐसे उपक्रम के प्रबन्ध का भारसाधक व्यक्ति, उस तारीख से ही केन्द्रीय सरकार के लिए और उसकी ओर से ऐसे उपक्रम के प्रबन्ध का भारसाधक होगा और ऐसे उपक्रम का प्रबन्ध ऐसा व्यक्ति उपधारा (2) के अन्तर्विष्ट उपबन्धों के तथा ऐसे निदेशों के, यदि कोई हों, जो केन्द्रीय सरकार उसे दे, अधीन रहते हुए करेगा और कोई अन्य व्यक्ति, जिसके अन्तर्गत उक्त उपक्रम भी है, जब तक ऐसा प्रबन्ध चालू रहता है, उक्त उपक्रम के सम्बन्ध में प्रबन्ध की किन्हीं शक्तियों का प्रयोग नहीं करेगा ।
(2) किसी अधिसूचित चीनी उपक्रम का उपधारा (1) के अधीन भारसाधक कोई व्यक्ति, धारा 5 के अधीन नियुक्त महा-अभिरक्षक के पूर्व अनुमोदन के बिना-
(i) कर्मचारियों और अभिकर्ताओं को वेतन या कमीशन का नेमी संदाय करने या नेमी दैनिक व्यय पूरा करने के प्रयोजन से भिन्न किसी प्रयोजन के लिए उपक्रम से सम्बन्धित आस्तियों से कोई व्यय नहीं करेगा ;
(ii) ऐसी आस्तियों का अन्तरण या अन्यथा व्ययन नहीं करेगा अथवा उन पर कोई भार, आडमान, धारणाधिकार या अन्य विल्लंगम सृजित नहीं करेगा ;
(iii) ऐसी आस्तियों के भागरूप किसी धन को किसी रीति से विनिहित नहीं करेगा ;
(iv) ऐसी आस्तियों के भागरूप किसी धन से कोई स्थावर सम्पत्ति अर्जित नहीं करेगा ;
(v) उपक्रम के पूर्णतः या भागतः सम्बद्ध प्रयोजनों के लिए कोई सेवा या अभिकर्ता-संविदा, चाहे वह अभिव्यक्त रूप में हो या चाहे विवक्षित रूप में, नहीं करेगा अथवा ऐसे किसी संव्यवहार से सम्बन्धित किसी संविदा के, जो निहित होने की तारीख को विद्यमान थी, निबन्धनों और शर्तों को परिवर्तित नहीं करेगा ।
(3) महा-अभिरक्षक का अनुमोदन, अधिसूचित चीनी उपक्रम से सम्बन्धित किन्हीं वर्गों के संव्यवहारों के सम्बन्ध में साधारणतया या उसके किन्हीं संव्यवहारों के सम्बन्ध में विशिष्टतया, दिया जा सकता है ।
13. सद्भावपूर्वक की गई कार्रवाई के लिए सरंक्षण-(1) कोई भी वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही किसी भी ऐसी बात के बारे में जो इस अधिनियम के अधीन सद्भावपूर्वक की गई हो या की जाने के लिए आशयित हो, सरकार, महा-अभिरक्षक या सरकार के किसी अन्य अधिकारी या किसी अभिरक्षक के विरुद्ध न होगी ।
(2) कोई भी वाद या अन्य विधिक कार्यवाही किसी भी ऐसी बात से, जो इस अधिनियम के अधीन सद्भावपूर्वक की गई हो या की जाने के लिए आशयित हो, हुए किसी नुकसान या सम्भावित नुकसान के लिए सरकार, महा-अभिरक्षक या सरकार के किसी अन्य अधिकारी या अभिरक्षक के विरुद्ध न होगी ।
14. शक्तियों का प्रत्यायोजन-(1) केन्द्रीय सरकार, अधिसूचना द्वारा निदेश दे सकेगी कि इस अधिनियम के अधीन उसके द्वारा प्रयोक्तव्य सभी या किसी शक्ति का प्रयोग, इस धारा या धारा 8 या धारा 20 के अधीन शक्तियों को छोड़कर, ऐसे किसी व्यक्ति या व्यक्तियों द्वारा भी किया जा सकेगा जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किए जाएं ।
(2) जब कभी उपधारा (1) के अधीन किसी शक्ति का प्रत्यायोजन किया जाता है तो वह व्यक्ति, जिसे ऐसी शक्ति प्रत्यायोजित की गई है, केन्द्रीय सरकार के निदेशन, नियंत्रण और पर्यवेक्षण के अधीन कार्य करेगा ।
15. अधिसूचित चीनी उपक्रमों के प्रयोजन के लिए उपगत ऋणों को पूर्विकता-ऐसे किसी ऋण को, जो किसी अधिसूचित चीनी उपक्रम को केन्द्रीय सरकार या किसी राज्य सरकार द्वारा, ऐसे उपक्रम के प्रबन्ध को चलाने के लिए अग्रिम रूप में दिए गए किसी उधार से उत्पन्न होता है-
(क) ऐसे सभी अन्य ऋणों से, चाहे वे प्रतिभूत हैं या अप्रतिभूत, जो इस अधिनियम के अधीन ऐसे उपक्रम का प्रबन्ध ग्रहण किए जाने के पूर्व उपगत किए गए हैं, पूर्विकता मिलेगी,
(ख) कम्पनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) की धारा 530 के अर्थ में अधिमानी ऋण माना जाएगा,
और ऐसे ऋण समान पंक्ति के होंगे और उपक्रम की आस्तियों में से पूर्णतः संदत्त किए जांएगे किन्तु यदि ऐसी आस्तियां उन्हें पूर्णतः चुकाने के लिए अपर्याप्त हैं तो वे आनुपातिक रूप में कम कर दिए जाएंगे ।
16. शास्तियां-जो कोई व्यक्ति-
(क) किसी अधिसूचित चीनी उपक्रम से सम्बन्धित किन्हीं आस्तियों, लेखा पुस्तकों, रजिस्टरों, या किन्हीं अन्य दस्तावेजों का, जो उसकी अभिरक्षा में हैं, अभिरक्षक को परिदान करने में असफल रहता है ; या
(ख) ऐसे उपक्रम की किसी सम्पत्ति को प्रतिधारित करता है या उसे हटाता है या नष्ट करता है ; या
(ग) धारा 5 के उपबन्धों का अनुपालन करने में असफल रहता है ; या
(घ) इस अधिनियम के अधीन दिए गए किसी निदेश का अनुपालन करने में असफल रहता है,
वह कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने के लिए भी दायी होगा ।
17. कम्पनियों द्वारा अपराध-(1) यदि इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध किसी कंपनी द्वारा किया गया है, तो प्रत्येक व्यक्ति जो उस अपराध के किए जाने के समय उस कंपनी के कारबार के संचालन के लिए उस कंपनी का भारसाधक और उसके प्रति उत्तरदायी था और साथ ही वह कंपनी भी ऐसे उल्लघंन के दोषी समझे जाएंगे और तद्नुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने और दंडित किए जाने के भागी होंगे :
परंतु इस उपधारा की कोई बात किसी ऐसे व्यक्ति को दंड का भागी नहीं बनाएगी यदि वह यह साबित कर देता है कि अपराध उसकी जानकारी के बिना किया गया था या उसने ऐसे अपराध का किया जाना रोकने के लिए सभी सम्यक् तत्परता बरती थी ।
(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए, भी जहां इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध किसी कंपनी द्वारा किया गया है तथा यह साबित होता है कि वह अपराध कंपनी के किसी निदेशक, प्रबंधक, सचिव या अन्य अधिकारी की सहमति या मौनानुकूलता से किया गया है या उस अपराध का किया जाना उसकी किसी उपेक्षा के कारण माना जा सकता है, वहां ऐसा निदेशक, प्रबंधक, सचिव या अन्य अधिकारी भी उस अपराध का दोषी समझा जाएगा और तद्नुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने और दंडित किए जाने का भागी होगा ।
स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए-
(क) कंपनी" से कोई निगमित निकाय अभिप्रेत है, और इसके अंतर्गत फर्म या व्यष्टियों का संगम भी है ; तथा
(ख) फर्म के संबंध में निदेशक" से उक्त फर्म का भागीदार अभिप्रेत है ।
18. अधिनियम का कुछ चीनी उपक्रमों को लागू न होना-(1) इस अधिनियम के उपबन्ध ऐसे किसी चीनी उपक्रम को लागू नहीं होंगे जो केन्द्रीय सरकार या किसी राज्य सरकार या किसी अधिनियमिति (जिसके अन्तर्गत अध्यादेश भी है) द्वारा या उसके अधीन स्थापित किसी निगम या कम्पनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) की धारा 617 में यथा परिभाषित किसी सरकारी कम्पनी के स्वामित्वाधीन या प्रबन्धाधीन है ।
(2) उपधारा (1) के प्रयोजनों के लिए, केन्द्रीय सरकार या किसी राज्य सरकार द्वारा, तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन, नियुक्त किए गए किसी रिसीवर या किसी प्राधिकृत नियंत्रक द्वारा किसी चीनी उपक्रम के प्रबन्ध को भी, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या किसी राज्य सरकार द्वारा ऐसे उपक्रम का प्रबंध समझा जाएगा ।
19. अधिनियम का अध्यारोही प्रभाव होना-इस अधिनियम के उपबन्ध (इस अधिनियम से भिन्न), किसी विधि में या किसी न्यायालय, अधिकरण या अन्य प्राधिकरण के किसी निर्णय, डिक्री या आदेश में या इस अधिनियम से भिन्न किसी विधि के आधार पर प्रभावी किसी लिखत में उनसे असंगत किसी बात के होते हुए भी, प्रभावी होंगे ।
20. नियम बनाने की शक्ति-केन्द्रीय सरकार, इस अधिनियम के उपबन्धों को कार्यान्वित करने के लिए नियम, अधिसूचना द्वारा बना सकेगी ।
21. नियमों और कुछ अधिसूचनाओं का रखा जाना-इस अधिनियम के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम बनाए जाने और धारा 7 के अधीन जारी की गई प्रत्येक अधिसूचना जारी की जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा/रखी जाएगी । यह अवधि एक सत्र में या दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व, दोनों सदन उस नियम या अधिसूचना में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा/होगी । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए या अधिसूचना जारी नहीं की जानी चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा/जाएगी । किन्तु नियम या अधिसूचना के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।
22. निरसन और व्यावृत्ति-(1) चीनी उपक्रम (प्रबन्ध-ग्रहण) अध्यादेश, 1978 (1978 का 5) इसके द्वारा निरसित किया जाता है ।
(2) ऐसे निरसन के होते हुए भी, इस प्रकार निरसित अध्यादेश के अधीन की गई कोई बात या कार्रवाई, इस अधिनियम के तत्स्थानी उपबंधों के अधीन की गई समझी जाएगी ।
अनुसूची
(धारा 7 देखिए)
1. औद्योगिक नियोजन (स्थायी आदेश) अधिनियम, 1946 (1946 का 20) ।
2. औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 (1947 का 14) ।
3. न्यूनतम मजदूरी अधिनियम, 1948 (1948 का 11) ।
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