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पथ विक्रेता (जीविका संरक्षण और पथ विक्रय विनियमन) अधिनियम, 2014 ( Street Vendors (Protection of Livelihood and Regulation of Street Vending) Act, 2014 )


 

पथ विक्रेता (जीविका संरक्षण और पथ विक्रय विनियमन) अधिनियम, 2014

(2014 का अधिनियम संख्यांक 7)

[4 मार्च, 2014]

नगरीय पथ विक्रेताओं के अधिकारों की संरक्षा करने और

पथ विक्रय क्रियाकलापों का विनियमन करने तथा

उनसे संबंधित या उनके आनुषंगिक

विषयों के लिए

अधिनियम

भारत के गणराज्य के पैंसठवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो: -

अध्याय 1

प्रारंभिक

1. संक्षिप्त नाम, विस्तार, प्रारंभ और उपबंध-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम पथ विक्रेता (जीविका संरक्षण और पथ विक्रय विनियमन) अधिनियम, 2014 है ।

(2) इसका विस्तार जम्मू-कश्मीर राज्य के सिवाय संपूर्ण भारत पर है ।

(3) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा जो केंद्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे; और भिन्न-भिन्न राज्यों के लिए भिन्न-भिन्न तारीखें नियत की जा सकेंगी और किसी उपबंध में इस अधिनियम के प्रारंभ के प्रति किसी निर्देश का किसी राज्य के संबंध में यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह उस राज्य में उस उपबंध के प्रवृत्त होने के प्रति निर्देश है ।

(4) इस अधिनियम के उपबंध रेल अधिनियम, 1989 (1989 का 24) के अधीन रेल के स्वामित्वाधीन और नियंत्रणाधीन किसी भूमि, किन्हीं परिसरों और रेलगाड़ियों को लागू नहीं होंगे ।

2. परिभाषाएं-(1) इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, -

(क) समुचित सरकार" से-

(i) बिना विधान-मंडल वाले किसी संघ राज्यक्षेत्र से संबंधित विषयों की बाबत, केंद्रीय सरकार;

(ii) विधान-मंडल वाले संघ राज्यक्षेत्र से संबंधित विषयों की बाबत, यथास्थिति, दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी राज्यक्षेत्र की सरकार या पुडुचेरी संघ राज्यक्षेत्र की सरकार;

(iii) किसी राज्य से संबंधित विषयों की बाबत, राज्य सरकार, अभिप्रेत है;

(ख) धारण क्षमता" से पथ विक्रेताओं की वह अधिकतम संख्या अभिप्रेत है जिसके लिए किसी विक्रय जोन में स्थान प्रदान किया जा सकता है और जिसे शहरी विक्रय समिति की सिफारिशों पर स्थानीय प्राधिकारी द्वारा उस रूप में अवधारित किया गया है;

(ग) स्थानीय प्राधिकारी" से, यथास्थिति, कोई नगर या कोई नगरपालिक परिषद् या नगर पंचायत, चाहे वह किसी भी नाम से ज्ञात हो या छावनी बोर्ड अथवा छावनी अधिनियम, 2006 (2006 का 41) की धारा 47 के अधीन नियुक्त कोई सिविल क्षेत्र समिति या ऐसा अन्य निकाय अभिप्रेत है जो नागरिक सेवाएं उपलब्ध कराने और पथ विक्रय को विनियमित करने के लिए किसी नगर या शहर में स्थानीय प्राधिकारी के रूप में कार्य करने के लिए हकदार हो और इसके अंतर्गत ऐसा योजना प्राधिकारी" भी है जो उस नगर या शहर में भूमि के उपयोग को विनियमित करता है ;

(घ) चल विक्रेता" से ऐसे पथ विक्रेता अभिप्रेत है जो अभिहित क्षेत्र में अपने माल और अपनी सेवाओं का विक्रय करते हुए एक स्थान से दूसरे स्थान पर चलते-फिरते विक्रय क्रियाकलाप करते हैं;

(ङ) प्राकृतिक बाजार" से ऐसा बाजार अभिप्रेत है जहां विक्रेता और क्रेता उत्पादों या सेवाओं के विक्रय और क्रय के लिए परंपरागत रूप से एकत्र होते हैं और जिसे शहरी विक्रय समिति की सिफारिशों पर स्थानीय प्राधिकारी द्वारा उस रूप में अवधारित किया गया है;

(च) अधिसूचना" से राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना अभिप्रेत है और अधिसूचित" पद का तद्नुसार अर्थान्वयन किया जाएगा;

(छ) योजना प्राधिकरण" से नगर विकास प्राधिकरण या समुचित सरकार द्वारा किसी नगर या शहर में पदाभिहित ऐसा कोई अन्य प्राधिकरण अभिप्रेत है जो मास्टर प्लान या विकास योजना या आंचलिक योजना या अभिन्यास योजना अथवा किसी अन्य ऐसी स्थान विषयक योजना में, जो, यथास्थिति, लागू नगर और ग्राम योजना अधिनियम या नगर विकास अधिनियम अथवा नगर निगम अधिनियम के अधीन विधिक रूप से प्रवर्तनीय है, किसी विशिष्ट क्रियाकलाप के लिए क्षेत्रों के यथावत विस्तार को परिभाषित करते हुए भूमि के उपयोग को विनियमित करने के लिए उत्तरदायी है;

(ज) विहित" से समुचित सरकार द्वारा इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है;

(झ) अनुसूची" से इस अधिनियम से उपाबद्ध अनुसूची अभिप्रेत है;

(ञ) स्कीम" से धारा 38 के अधीन समुचित सरकार द्वारा विरचित कोई स्कीम अभिप्रेत है;

(ट) स्थिर विक्रेता" से ऐसे पथ विक्रेता अभिप्रेत हैं जो किसी विनिर्दिष्ट अवस्थान पर नियमित आधार पर विक्रय संबंधी क्रियाकलाप करते हैं;

(ठ) पथ विक्रेता" से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जो किसी पथ, गली, पार्श्व मार्ग, पैदल पथ, सड़क की पटरी, सार्वजनिक पार्क या किसी अन्य सार्वजनिक स्थान अथवा प्राइवेट क्षेत्र में किसी अस्थायी निर्मित संरचना से या एक स्थान से दूसरे स्थान पर घूमकर प्रतिदिन के उपयोग की वस्तुएं, माल, सामान, खाद्य पदार्थ या सौदा बेचने अथवा जनसाधारण को सेवाएं प्रदान करने में लगा हुआ है और इसके अंतर्गत हाकर, खोमचे वाला, बैठकर बेचने वाला और ऐसे अन्य सभी समानार्थक पद आते हैं जो किसी स्थान या क्षेत्र विशेष के आपेक्षिक हैं ; और पथ विक्रय" शब्दों का उनके व्याकरणिक रूपभेदों और सजातीय पदों के साथ तद्नुसार अर्थ लगाया जाएगा ;

(ड) नगर विक्रय समिति" से धारा 22 के अधीन समुचित सरकार द्वारा गठित निकाय अभिप्रेत है;

(ढ) विक्रय जोन" से पथ विक्रय के लिय पथ विक्रेताओं द्वारा विनिर्दिष्ट उपयोग के लिए नगर विक्रय समिति की सिफारिशों पर स्थानीय प्राधिकारी द्वारा उस रूप में अभिहित कोई क्षेत्र या कोई स्थान अथवा अवस्थान अभिप्रेत है और इसके अंतर्गत पैदल पथ, पार्श्व मार्ग, सड़क की पटरी, तटबंध, किसी पथ का भाग, सार्वजनिक प्रतीक्षा क्षेत्र या कोई ऐसा स्थान भी है, जो विक्रय क्रियाकलापों के लिए और जनसाधारण को सेवाएं प्रदान करने के लिए उपयुक्त समझा जाए ।

(2) इस अधिनियम में किसी अधिनियमिति या उसके किसी उपबंध के प्रति किसी ऐसे क्षेत्र के संबंध में, जिसमें ऐसी अधिनियमिति या ऐसा उपबंध प्रवृत्त नहीं है, किसी निर्देश के बारे में यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह उस क्षेत्र में प्रवृत्त तत्स्थानी विधि, यदि कोई हो, के प्रतिनिर्देश है ।

अध्याय 2

पथ विक्रय का विनियमन

3. पथ विक्रेताओं का सर्वेक्षण और बेदखली या पुनःस्थापन से संरक्षण-(1) नगर विक्रय समिति, ऐसी अवधि के भीतर और ऐसी रीति में, जो स्कीम में विनिर्दिष्ट की जाए, अपनी अधिकारिता के अधीन के क्षेत्र में विद्यमान सभी पथ विक्रेताओं का सर्वेक्षण करेगी और पश्चात्वर्ती सर्वेक्षण प्रत्येक पांच वर्ष में कम से कम एक बार किया जाएगा ।

(2) नगर विक्रय समिति यह सुनिश्चित करेगी कि ऐसे सभी विद्यमान पथ विक्रेताओं को जिनकी सर्वेक्षण में पहचान की गई है, पथ विक्रय संबंधी योजना और विक्रय जोनों की धारण क्षमता के अनुसार, यथास्थिति, वार्ड या जोन या नगर या शहर की जनसंख्या के ढाई प्रतिशत के अनुरूप किसी सन्नियम के अधीन रहते हुए विक्रय जोनों में स्थान सुविधा उपलब्ध कराई जाए ।

(3) किसी भी पथ विक्रेता को, उपधारा (1) के अधीन विनिर्दिष्ट सर्वेक्षण के पूरा होने और सभी पथ विक्रेताओं को विक्रय प्रमाणपत्र जारी होने तक, यथास्थिति, बेदखल या पुनःस्थापित नहीं किया जाएगा ।

4. विक्रय प्रमाणपत्र जारी किया जाना-(1) ऐसे प्रत्येक पथ विक्रेता को, जिसकी धारा 3 की उपधारा (1) के अधीन किए गए सर्वेक्षण के अधीन पहचान की गई है, और जिसने चौदह वर्ष की आयु या ऐसी आयु, जो समुचित सरकार द्वारा विहित की जाए, पूरी कर ली है, ऐसे निबंधनों और शर्तों के अध्यधीन और पथ विक्रय संबंधी योजना में विनिर्दिष्ट निर्बंधनों सहित स्कीम में विनिर्दिष्ट अवधि के भीतर नगर विक्रय समिति द्वारा विक्रय प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा:

परंतु कोई व्यक्ति, चाहे उसे धारा 3 की उपधारा (1) के अधीन सर्वेक्षण में सम्मिलित किया गया हो या नहीं, जिसे इस अधिनियम के प्रारंभ के पूर्व विक्रय का प्रमाणपत्र जारी किया गया है, चाहे वह अनुज्ञप्ति या अनुज्ञा के अन्य रूप में ज्ञात हो (चाहे वह स्थिर विक्रेता या चल विक्रेता के रूप में हो या किसी अन्य प्रवर्ग के अधीन हो) उस अवधि के लिए, जिसके लिए ऐसे विक्रय का प्रमाणपत्र जारी किया गया है, उस प्रवर्ग के लिए पथ विक्रेता समझा जाएगा ।

(2) जहां दो सर्वेक्षणों के बीच की मध्यवर्ती अवधि में कोई व्यक्ति विक्रय करने की ईप्सा करता है, वहां नगर विक्रय समिति, स्कीम, पथ विक्रय की योजना और विक्रय जोनों की धारणा क्षमता के अध्यधीन ऐसे व्यक्ति को विक्रय प्रमाणपत्र प्रदान कर सकेगी ।

(3) जहां उन पथ विक्रेताओं की संख्या जिनकी उपधारा (1) के अधीन पहचान की गई है या उन व्यक्तियों की संख्या जिन्होंने उपधारा (2) के अधीन विक्रय करने की ईप्सा की है, विक्रय जोन की धारण क्षमता से अधिक है और उन व्यक्तियों की संख्या से अधिक है, जिन्हें उस विक्रय जोन में स्थान उपलब्ध कराया जाना है, वहां नगर विक्रय समिति उस विक्रय जोन के लिए विक्रय प्रमाणपत्र जारी करने के लिए पर्चियां डालकर नाम निकालेगी और शेष व्यक्तियों को, पुनःस्थापन का परिवर्जन करने के लिए, किसी साथ लगे विक्रय जोन में स्थान सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी ।

5. विक्रय प्रमाणपत्र के जारी किए जाने की शर्तें-(1) प्रत्येक पथ विक्रेता, धारा 4 के अधीन विक्रय प्रमाणपत्र के जारी किए जाने के पूर्व नगर विक्रय समिति से इस बात का एक वचनबंध करेगा कि--

(क) वह स्वयं या अपने कुटुंब के सदस्य के माध्यम से पथ विक्रय का कारबार करेगा;

(ख) उसके पास जीविका के कोई अन्य साधन नहीं हैं;

(ग) वह, किराया, विक्रय प्रमाणपत्र को या उसमें विनिर्दिष्ट स्थान को किसी भी रीति से, चाहे वह कोई भी हो, जिसके अन्तर्गत किराए पर देना भी है किसी अन्य व्यक्ति को अन्तरित नहीं करेगा-

(2) जहां ऐसे किसी पथ विक्रेता की, जिसको विक्रय प्रमाणपत्र जारी किया जाता है, मृत्यु हो जाती है या वह किसी स्थायी निःशक्तता से ग्रस्त हो जाता है या बीमार हो जाता है, वहां उसके कुटुंब का कोई एक सदस्य निम्नलिखित पूर्विकता के क्रम में उसके स्थान पर विक्रय प्रमाणपत्र की विधिमान्यता तक विक्रय कार्य कर सकेगा-

(क) पथ विक्रेता का पति या पत्नी:

(ख) पथ विक्रेता का आश्रित बालक:

परंतु जहां यह विवाद उत्पन्न होता है कि विक्रेता के स्थान में विक्रय कार्य करने के लिए कौन हकदार है, वहां उस मामले का विनिश्चय धारा 20 के अधीन समिति द्वारा किया जाएगा ।

6. विक्रय प्रमाणपत्र के प्रवर्ग और पहचान-पत्रों का जारी होना-(1) विक्रय प्रमाणपत्र निम्नलिखित प्रवर्गों में से किसी प्रवर्ग के अधीन जारी किया जाएगा-

(क) कोई स्थिर विक्रेता;

(ख) कोई चल विक्रेता; या

(ग) कोई अन्य प्रवर्ग, जो स्कीम में विनिर्दिष्ट किया जाए ।

(2) उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट प्रवर्गों के लिए जारी किया गया विक्रय प्रमाणपत्र ऐसे प्ररूप में होगा और ऐसी रीति में जारी किया जाएगा, जो स्कीम में विनिर्दिष्ट की जाए और उसमें उस विक्रय जोन को, जहां पथ विक्रेता अपने विक्रय क्रियाकलाप करेगा, ऐसे विक्रय क्रियाकलापों को करने के दिनों और समय-सीमा को तथा उन शर्तों और निर्बंधनों को विनिर्दिष्ट किया जाएगा जिनके अधीन रहते हुए वह ऐसे विक्रय क्रियाकलाप करेगा ।

(3) प्रत्येक पथ विक्रेता को जिसे उपधारा (1) के अधीन विक्रय प्रमाणपत्र जारी किया गया है, पहचान-पत्र ऐसे प्ररूप में और ऐसी रीति से, जारी किए जाएंगे जो स्कीम में विनिर्दिष्ट की जाए ।

7. विक्रय प्रमाणपत्र जारी करने के मानदंड-किसी पथ विक्रेता को विक्रय प्रमाणपत्र जारी करने के लिए नगर विक्रय समिति द्वारा अनुसरण किए जाने वाले मानदंड ऐसे होंगे जो स्कीम में विनिर्दिष्ट किए जाएं, उनमें अन्य बातों के अलावा, अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों, अन्य पिछड़े वर्गों, स्त्रियों और निःशक्त व्यक्तियों, अल्पसंख्यकों या ऐसे अन्य प्रवर्गों को, जो स्कीम में विनिर्दिष्ट किए जाएं, अधिमान दिए जाने का उपबंध किया जा सकेगा ।

8. विक्रय फीस-प्रत्येक ऐसा पथ विक्रेता, जिसे विक्रय प्रमाणपत्र जारी किया गया है, ऐसी विक्रय फीस का संदाय करेगा जो स्कीम में विनिर्दिष्ट की जाए ।

9. विक्रय प्रमाणपत्र की विधिमान्यता और नवीकरण-(1) प्रत्येक विक्रय प्रमाणपत्र, ऐसी अवधि के लिए विधिमान्य होगा जो स्कीम में विनिर्दिष्ट की जाए ।

(2) प्रत्येक विक्रय प्रमाणपत्र, ऐसी अवधि के लिए, ऐसी रीति में और ऐसी फीस का संदाय करने पर, जो स्कीम में विनिर्दिष्ट की जाए, नवीकरणीय होगा ।

10. विक्रय प्रमाणपत्र का रद्दकरण या निलंबन-जहां कोई ऐसा पथ विक्रेता, जिसे इस अधिनियम के अधीन विक्रय प्रमाणपत्र जारी किया गया है, उसकी किन्हीं शर्तों का या इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए किन्हीं नियमों या स्कीमों के अधीन पथ विक्रय को विनियमित करने के प्रयोजन के लिए विनिर्दिष्ट किन्हीं अन्य निबंधनों और शर्तों का भंग करता है या जहां नगर विक्रय समिति का यह समाधान हो जाता है कि पथ विक्रेता द्वारा ऐसा विक्रय प्रमाणपत्र दुर्व्यपदेशन या कपट करके प्राप्त किया गया है, वहां नगर विक्रय समिति, किसी ऐसे अन्य जुर्माने पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, जो इस अधिनियम के अधीन किसी पथ विक्रेता से उपगत किया जा सकता हो, विक्रय प्रमाणपत्र को रद्द कर सकेगी या उसे ऐसी रीति में, जो स्कीम में विनिर्दिष्ट की जाए और ऐसी अवधि के लिए, जो वह ठीक समझे, निलंबित कर सकेगी :

परंतु नगर विक्रय समिति द्वारा ऐसा कोई रद्दकरण या निलंबन तब तक नहीं किया जाएगा जब तक कि पथ विक्रेता को सुने जाने का अवसर नहीं दे दिया जाता ।

11. नगर विक्रय समिति के विनिश्चय के विरुद्ध अपील-(1) ऐसा कोई व्यक्ति, जो धारा 6 के अधीन विक्रय प्रमाणपत्र जारी किए जाने या धारा 10 के अधीन विक्रय प्रमाणपत्र के रद्द किए जाने या निलंबित किए जाने के संबंध में नगर विक्रय समिति के किसी विनिश्चय से व्यथित है, स्थानीय प्राधिकारी को, ऐसे प्ररूप में, ऐसी अवधि के भीतर और ऐसी रीति में, जो विहित की जाए, अपील कर सकेगा ।

(2) स्थानीय प्राधिकारी द्वारा अपील का निपटारा तब तक नहीं किया जाएगा जब तक कि अपीलार्थी को सुने जाने का अवसर नहीं दे दिया जाता ।

अध्याय 3

पथ विक्रेताओं के अधिकार और बाध्यताएं

12. पथ विक्रेता के अधिकार-(1) प्रत्येक पथ विक्रेता को विक्रय प्रमाणपत्र में वर्णित निबंधनों और शर्तों के अनुसार पथ विक्रय क्रियाकलापों का कारबार करने का अधिकार होगा । (2) उपधारा (1) में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, जहां, यथास्थिति, किसी क्षेत्र या स्थान को विक्रय निषेध जोन के रूप में चिह्नांकित किया गया है वहां कोई भी पथ विक्रेता उस जोन में विक्रय संबंधी कोई क्रियाकलाप नहीं करेगा ।

13. पुनःस्थापन पर नवीन स्थल या क्षेत्र के लिए पथ विक्रेता का अधिकार-प्रत्येक ऐसा पथ विक्रेता, जिसके पास विक्रय प्रमाणपत्र है, धारा 18 के अधीन उसके पुनःस्थापन की दशा में, अपने ऐसे विक्रय क्रियाकलाप करने के लिए, यथास्थिति, नवीन स्थल या क्षेत्र का हकदार होगा, जो स्थानीय प्राधिकारी द्वारा नगर विक्रय समिति के परामर्श से अवधारित किए जाएं ।

14. पथ विक्रेताओं का कर्तव्य-जहां कोई पथ विक्रेता समय-विभाजन के आधार पर किसी स्थल का अधिभोग रखता है, वहां वह प्रति दिन, उसे अनुज्ञात समय-विभाजन अवधि की समाप्ति पर, अपने माल और सामान को हटा लेगा ।

15. सफाई और सार्वजनिक स्वच्छता को बनाए रखना-प्रत्येक पथ विक्रेता, विक्रय जोनों और उससे लगे हुए क्षेत्रों में सफाई और सार्वजनिक स्वच्छता को बनाए रखेगा ।

16. विक्रय जोन में नागरिक सुख-सुविधाओं को अच्छी दशा में बनाए रखना-प्रत्येक पथ विक्रेता, विक्रय जोन में नागरिक सुख-सुविधाओं और सार्वजनिक संपत्ति को अच्छी दशा में बनाए रखेगा और उसे नुकसान नहीं पहुंचाएगा या नष्ट नहीं करेगा या उसे नुकसान नहीं पहुंचवाएगा या नष्ट नहीं करवाएगा ।

17. अनुरक्षण प्रभारों का संदाय-प्रत्येक पथ विक्रेता, विक्रय जोनों में उपलब्ध कराई गई नागरिक सुख-सुविधाओं और सुविधाओं के लिए समय-समय पर ऐसे अनुरक्षण प्रभारों का संदाय करेगा जो स्थानीय प्राधिकारी द्वारा अवधारित किए जाएं ।

अध्याय 4

पथ विक्रेताओं का पुनःस्थापन और बेदखली

18. पथ विक्रेताओं का पुनःस्थापन या बेदखली-(1) स्थानीय प्राधिकारी, नगर विक्रय समिति की सिफारिशों पर, किसी जोन या उसके भाग को किसी लोक प्रयोजन के लिए विक्रय निषेध जोन घोषित कर सकेगा और उस क्षेत्र में विक्रय करने वाले पथ विक्रेताओं को ऐसी रीति में, जो स्कीम में विनिर्दिष्ट की जाए, पुनःस्थापित कर सकेगा ।

(2) स्थानीय प्राधिकारी ऐसे पथ विक्रेता को, जिसका विक्रय प्रमाणपत्र धारा 10 के अधीन रद्द कर दिया गया है या जिसके पास विक्रय प्रमाणपत्र नहीं है और ऐसे प्रमाणपत्र के बिना विक्रय करता है, ऐसी रीति में, जो स्कीम में, विनिर्दिष्ट की जाए, बेदखल करेगा ।

(3) किसी भी पथ विक्रेता को स्थानीय प्राधिकारी द्वारा विक्रय प्रमाणपत्र में विनिर्दिष्ट स्थान से तब तक पुनःस्थापित या बेदखल नहीं किया जाएगा जब तक कि उसे उसके लिए तीस दिन की सूचना ऐसी रीति में, जो स्कीम में, विनिर्दिष्ट की जाए, न दे दी गई हो ।

(4) स्थानीय प्राधिकारी द्वारा किसी पथ विक्रेता को विक्रय प्रमाणपत्र में विनिर्दिष्ट स्थान को सूचना में विनिर्दिष्ट अवधि की समाप्ति के पश्चात् खाली करने में असफल रहने के पश्चात् ही, ऐसी रीति में, जो स्कीम में विनिर्दिष्ट की जाए, वस्तुतः पुनःस्थापित या बेदखल किया जाएगा ।

(5) प्रत्येक पथ विक्रेता, जो विक्रय प्रमाणपत्र में विनिर्दिष्ट स्थान में सूचना में विनिर्दिष्ट अवधि की समाप्ति के पश्चात् पुनःस्थापन करने या उसे खाली करने में असफल रहता है, ऐसे व्यतिक्रम के प्रत्येक दिन के लिए ऐसी शास्ति का, जो दो सौ पचास रुपए तक की, जैसी स्थानीय प्राधिकारी द्वारा अवधारित की जाए, हो सकेगी, किन्तु अभिगृहीत माल के मूल्य से अधिक की नहीं होगी, संदाय करने के लिए दायी होगा ।

19. माल का अभिग्रहण और वापस लिया जाना-(1) यदि पथ विक्रेता विक्रय प्रमाणपत्र में विनिर्दिष्ट स्थान को धारा 18 की उपधारा (3) का अधीन दी गई सूचना में विनिर्दिष्ट अवधि के व्यपगत होने के पश्चात् खाली करने में असफल रहता है, तो स्थानीय प्राधिकारी धारा 18 के अधीन पथ विक्रेता को बेदखल करने के अतिरिक्त, यदि वह आवश्यक समझे, ऐसे पथ विक्रेता के माल का ऐसी रीति में, जो स्कीम में विनिर्दिष्ट की जाए, अभिग्रहण कर सकेगाः

परंतु जहां कोई ऐसा अभिग्रहण किया जाता है, वहां स्कीम में विनिर्दिष्ट रूप में अभिगृहीत माल की एक सूची तैयार की जाएगी और माल का अभिग्रहण करने वाले प्राधिकृत व्यक्ति द्वारा सम्यक् रूप से हस्ताक्षरित उसकी एक प्रति पथ विक्रेता को जारी की जाएगी ।

(2) पथ विक्रेता, जिसका माल, उपधारा (1) के अधीन अभिगृहीत किया गया है, अपने माल को ऐसी रीति में और ऐसी फीस का, जो स्कीम में विनिर्दिष्ट की जाए, संदाय करने के पश्चात् वापस ले सकेगाः

परंतु खराब न होने वाले माल की दशा में, स्थानीय प्राधिकारी, पथ विक्रेता द्वारा किए गए दावे के दो कार्य दिवसों के भीतर माल को छोड़ देगा और खराब होने वाले माल की दशा में, स्थानीय प्राधिकारी, पथ विक्रेता द्वारा किए गए दावे के दिन ही माल को छोड़ देगा ।

अध्याय 5

विवाद समाधान तंत्र

20. पथ विक्रेताओं की शिकायतों को दूर किया जाना या विवादों का समाधान किया जाना-(1) समुचित सरकार, उपधारा (2) के अधीन प्राप्त आवेदनों के विनिश्चय के प्रयोजन के लिए अध्यक्ष, जो सिविल न्यायाधीश या न्यायिक मजिस्ट्रेट रहा हो और दो अन्य वृत्तिकों से, जिनके पास ऐसा अनुभव हो जो विहित किया जाए, से मिलकर बनने वाली एक या अधिक समितियों का गठन कर सकेगीः

परंतु समुचित सरकार के किसी भी कर्मचारी या स्थानीय प्राधिकारी को, समिति का सदस्य नियुक्त नहीं किया जाएगा ।

(2) प्रत्येक पथ विक्रेता, जिसको कोई शिकायत है या जिसका कोई विवाद है, उपधारा (1) के अधीन गठित समिति को लिखित में ऐसे प्ररूप और रीति में आवेदन कर सकेगा, जो विहित की जाए ।

(3) उपधारा (2) के अधीन शिकायत या विवाद के प्राप्त होने पर, उपधारा (1) में निर्दिष्ट समिति, ऐसी रीति में, जो विहित की जाए, सत्यापन और जांच करने के पश्चात्, ऐसी शिकायत को दूर करने या ऐसे विवाद का समाधान करने के लिए ऐसे समय के भीतर और ऐसी रीति में उपाय करेगी जो विहित की जाए ।

(4) ऐसा कोई व्यक्ति, जो समिति के विनिश्चय से व्यथित है, स्थानीय प्राधिकारी को ऐसे प्ररूप में, ऐसे समय के भीतर और ऐसी रीति में अपील कर सकेगा जो विहित की जाए ।

(5) स्थानीय प्राधिकारी, उपधारा (4) के अधीन प्राप्त अपील का निपटारा ऐसे समय के भीतर और ऐसी रीति में करेगा, जो विहित की जाएःपरन्तु स्थानीय प्राधिकारी अपील का निपटारा करने के पूर्व व्यथित व्यक्ति को सुने जाने का अवसर प्रदान करेगा ।

अध्याय 6

पथ विक्रय योजना

21. पथ विक्रय संबंधी योजना-(1) प्रत्येक स्थानीय प्राधिकारी योजना प्राधिकारी के परामर्श से और नगर विक्रय समिति की सिफारिशों पर प्रत्येक पांच वर्ष में एक बार पथ विक्रेताओं के व्यवसाय के संवर्धन के लिए पहली अनुसूची में अन्तर्विष्ट विषयों से युक्त एक योजना बनाएगा ।

(2) स्थानीय प्राधिकारी द्वारा तैयार की गई पथ विक्रय संबंधी योजना, समुचित सरकार को अनुमोदन के लिए प्रस्तुत की जाएगी और वह सरकार, योजना को अधिसूचित करने के पूर्व पथ विक्रेताओं को लागू होने वाले मानदंड अवधारित करेगी ।

अध्याय 7

नगर विक्रय समिति

22. नगर विक्रय समिति-(1) समुचित सरकार, इस निमित्त बनाए गए नियमों द्वारा प्रत्येक स्थानीय प्राधिकरण में एक नगर विक्रय समिति की अवधि और उसके गठन की रीति का उपबंध कर सकेगीः

परंतु यदि समुचित सरकार आवश्यक समझे तो वह प्रत्येक स्थानीय प्राधिकरण में, एक से अधिक नगर विक्रय समितियों के या प्रत्येक जोन या वार्ड के लिए एक नगर विक्रय समिति के गठन का उपबंध कर सकेगी ।

(2) प्रत्येक नगर विक्रय समिति निम्नलिखित से मिलाकर बनेगी--

(क) यथास्थिति, नगरपालिका आयुक्त या मुख्य कार्यपालक अधिकारी, जो चेयरपर्सन होगा; और

(ख) समुचित सरकार द्वारा नामनिर्दिष्ट किए जाने वाले उतने अन्य सदस्य जो विहित किए जाएं जो स्थानीय प्राधिकारी, स्थानीय प्राधिकरण का चिकित्सा अधिकारी, योजना प्राधिकारी, यातायात पुलिस, पुलिस, पथ विक्रेता संगम, बाजार संगम, व्यापारी संगम, गैर-सरकारी संगठन, समुदाय आधारित संगठन, निवासी कल्याण संगम, बैंक और ऐसे अन्य हितों का, जो वह उचित समझे, प्रतिनिधित्व करते हों;

(ग) गैर सरकारी संगठनों और समुदाय आधारित संगठनों का प्रतिनिधित्व करने के लिए नामनिर्दिष्ट सदस्यों की संख्या दस प्रतिशत से कम नहीं होगी;

(घ) पथ विक्रेताओं का प्रतिनिधित्व करने वाले ऐसे सदस्यों की संख्या चालीस प्रतिशत से कम नहीं होगी जो स्वयं पथ विक्रेताओं द्वारा ऐसी रीति में निर्वाचित किए जाएंगे, जो विहित की जाएः

परंतु पथ विक्रेताओं का प्रतिनिधित्व करने वाले एक-तिहाई सदस्य महिला विक्रेताओं में से होंगे:

परंतु यह और कि पथ विक्रेताओं का प्रतिनिधित्व करने वाले सदस्यों में से अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों, अन्य पिछड़े वर्गों, अल्पसंख्यकों और निःशक्त व्यक्तियों को सम्यक् प्रतिनिधित्व दिया जाएगा ।

(3) उपधारा (2) के अधीन नामनिर्दिष्ट चेयरपर्सन और सदस्य ऐसे भत्ते अभिप्राप्त करेंगे जो समुचित सरकार द्वारा विहित किए जाएं । 

23. नगर विक्रय समिति की बैठकें-(1) नगर विक्रय समिति की बैठकें स्थानीय प्राधिकारी की अधिकारिता के भीतर ऐसे समय और स्थानों पर होंगी और वह अपनी बैठकों के कार्य संचालन के संबंध में ऐसे प्रक्रिया नियमों का पालन और ऐसे कृत्यों का निर्वहन करेगी जो विहित किए जाएं ।       

(2) नगर विक्रय समिति का प्रत्येक विनिश्चय, ऐसा विनिश्चय करने के कारणों सहित, अधिसूचित किया जाएगा ।

24. विशिष्ट प्रयोजनों के लिए नगर विक्रय समिति के साथ व्यक्तियों को अस्थायी रूप से सहयुक्त किया जाना-(1) नगर विक्रय समिति इस अधिनियम के उपबंधों को कार्यान्वित करने के लिए ऐसे किसी व्यक्ति को, जिसकी सहायता या सलाह की वह वांछा करे अपने साथ ऐसी रीति में और ऐसे प्रयोजनों के लिए सहयुक्त कर सकेगी, जो विहित किए जाएं ।

(2) उपधारा (1) के अधीन सहयुक्त व्यक्ति को ऐसे भत्तों का संदाय किया जाएगा, जो विहित किए जाएं ।

25. नगर विक्रय समिति के लिए कार्यालय स्थल और अन्य कर्मचारी-स्थानीय प्राधिकारी, नगर विक्रय समिति को समुचित कार्यालय स्थल और उतने कर्मचारी उपलब्ध कराएगा, जितने विहित किए जाएं ।

26. पथ विक्रेता चार्टर और डाटा-बेस का प्रकाशन और सामाजिक संपरीक्षा का किया जाना-(1) प्रत्येक नगर विक्रय समिति, पथ विक्रेता चार्टर का प्रकाशन करेगी जिसमें उस समय को, जिसके भीतर किसी पथ विक्रेता को विक्रय प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा और उस समय को, जिसके भीतर ऐसे विक्रय प्रमाणपत्र का नवीकरण किया जाएगा और उन अन्य क्रियाकलापों को विनिर्दिष्ट किया जाएगा, जो उसमें विनिर्दिष्ट समय-सीमा के भीतर किए जाने होंगे ।

(2) प्रत्येक नगर विक्रय समिति, रजिस्ट्रीकृत पथ विक्रेताओं और ऐसे पथ विक्रेताओं के जिनको विक्रय प्रमाणपत्र जारी किया गया है, अद्यतन अभिलेख जिनमें पथ विक्रेता का नाम, उसे आबंटित स्टाल, उसके द्वारा किए जा रहे कारबार की प्रकृति, पथ विक्रय का प्रवर्ग और ऐसी अन्य विशिष्टियां, जो पथ विक्रेताओं से सुसंगत हों, समाविष्ट हों, ऐसी रीति में बनाए रखेगी, जो विहित की जाए ।

अध्याय 8

पथ विक्रेताओं के उत्पीड़न का निवारण

27. पुलिस और अन्य प्राधिकारियों द्वारा उत्पीड़न का निवारण-तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, ऐसे किसी पथ विक्रेता को, जो अपने विक्रय प्रमाणपत्र के निबंधनों और शर्तों के अनुसार पथ विक्रय संबंधी क्रियाकलाप करता है, तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन शक्तियों का प्रयोग करने वाले किसी व्यक्ति या पुलिस या किसी अन्य प्राधिकारी द्वारा ऐसे अधिकारों का प्रयोग करने से निवारित नहीं किया जाएगा ।

अध्याय 9

दांडिक उपबंध

28. उल्लघंन के लिए शास्ति-यदि कोई पथ विक्रेता--

(क) विक्रय प्रमाणपत्र के बिना विक्रय क्रियाकलापों में लिप्त होता है;

(ख) विक्रय प्रमाणपत्र के निबंधनों का उल्लंघन करता है; या

(ग) इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए किन्हीं नियमों या स्कीमों के अधीन पथ विक्रय को विनियमित करने के प्रयोजन के लिए विनिर्दिष्ट किन्हीं अन्य निबंधनों और शर्तों का उल्लंघन करता है,

तो वह ऐसे प्रत्येक अपराध के लिए ऐसी शास्ति के लिए जैसी स्थानीय प्राधिकारी द्वारा अवधारित की जाए, और जो दो हजार रुपए तक की हो सकेगी, दायी होगा ।

अध्याय 10

प्रकीर्ण

29. इस अधिनियम के उपबंधों का स्वामित्व संबंधी अधिकार आदि प्रदत्त करने के रूप में अर्थान्वयन किया जाना-(1) इस अधिनियम में अन्तर्विष्ट किसी बात का यह अर्थ नहीं लगाया जाएगा कि वह किसी पथ विक्रेता को उन विक्रय जोनों में जो उसे आबंटित किए गए हैं विक्रय संबंधी क्रियाकलाप करने या ऐसे किसी अन्य स्थान के संबंध में, जहां पर वह ऐसे विक्रय संबंधी क्रियाकलाप करता है, कोई अस्थायी, स्थायी या शाश्वत अधिकार प्रदान करती है ।

(2) उपधारा (1) में अन्तर्विष्ट कोई बात किसी स्थिर विक्रेता को उस दशा में लागू नहीं होगी यदि उसे किसी पट्टा विलेख द्वारा या अन्यथा ऐसे किसी विनिर्दिष्ट अवस्थान पर, जहां वह तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के उपबंधों के अनुसार ऐसे विक्रय संबंधी क्रियाकलाप करता है, किसी स्थान के संबंध में ऐसे विक्रय संबंधी क्रियाकलाप करने के लिए कोई अस्थायी पट्टाधृति या स्वामित्व संबंधी अधिकार प्रदत्त किया गया है ।

30. विवरणियां-प्रत्येक नगर विक्रय समिति समय-समय पर समुचित सरकार और स्थानीय प्राधिकारी को ऐसी विवरणियां प्रस्तुत करेगी जो विहित की जाएं ।  

31. संवर्धनकारी उपाय-समुचित सरकार, नगर विक्रय समिति, स्थानीय प्राधिकरण, योजना प्राधिकरण और पथ विक्रेता संगमों या संघों के साथ परामर्श करके, पथ विक्रेताओं को प्रत्यय, बीमा और सामाजिक सुरक्षा की अन्य कल्याणकारी स्कीमें उपलब्ध कराने के लिए संवर्धनकारी उपाय कर सकेगी ।

32. अनुसंधान, प्रशिक्षण और जागरुकता-समुचित सरकार, वित्तीय और अन्य संसाधनों की उपलब्धता के परिणाम तक, -

(क) इस अधिनियम के अधीन अनुध्यात अधिकारों का प्रयोग करने के लिए पथ विक्रेताओं को समर्थ बनाने हेतु, क्षमता वर्धन कार्यक्रमों का आयोजन कर सकेगी;

(ख) अर्थव्यवस्था में साधारणतया अनौपचारिक सेक्टर और विशिष्टतया पथ विक्रेताओं की भूमिका संबंधी जानकारी और समझ की अभिवृद्धि के लिए तथा जनसाधारण में नगर विक्रय समिति के माध्यम से जागरुकता बढ़ाने के लिए अनुसंधान, शिक्षा और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को अपने हाथ में ले सकेगी ।

33. अधिनियम का अध्यारोही प्रभाव होना-इस अधिनियम के उपबंध तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि या किसी अन्य लिखत में, जिसका इस अधिनियम से भिन्न किसी विधि के आधार पर प्रभाव है, अंतर्विष्ट किसी असंगत बात के होते हुए भी प्रभावी होंगे ।

34. प्रत्यायोजित करने की शक्ति-समुचित सरकार, लिखित साधारण या विशेष आदेश द्वारा, इस अधिनियम के अधीन अपनी ऐसी शक्तियों (धारा 38 के अधीन स्कीम विरचित करने की शक्ति और धारा 36 के अधीन नियम बनाने की शक्ति को छोड़कर) और ऐसे कृत्यों को, जो वह आवश्यक समझे, स्थानीय प्राधिकारी या नगर विक्रय समिति या किसी अन्य अधिकारी को, ऐसी शर्तों के, यदि कोई हों, अधीन रहते हुए, जो उस आदेश में विनिर्दिष्ट की जाएं, प्रत्यायोजित कर सकेगी ।

35. अनुसूचियों का संशोधन करने की शक्ति-(1) समुचित सरकार द्वारा की गई सिफारिशों पर या अन्यथा, यदि केन्द्रीय सरकार का यह समाधान हो जाता है कि ऐसा करना आवश्यक या समीचीन है तो वह, अधिसूचना द्वारा, अनुसूचियों का संशोधन कर सकेगी और ऐसा होने पर, यथास्थिति, पहली अनुसूची या दूसरी अनुसूची तद्नुसार संशोधित हुई समझी जाएगी ।

(2) उपधारा (1) के अधीन जारी प्रत्येक अधिसूचना की एक प्रति, जारी किए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखी जाएगी ।

36. नियम बनाने की शक्ति-(1) समुचित सरकार, इस अधिनियम के प्रारंभ की तारीख से एक वर्ष के भीतर, इस अधिनियम के उपबंधों को कार्यान्वित करने के लिए नियम, अधिसूचना द्वारा बनाएगी ।

(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियमों में निम्नलिखित सभी या किन्हीं विषयों के लिए उपबंध किया जा सकेगा, अर्थात्: --

(क) धारा 4 की उपधारा (1) के अधीन पथ विक्रय के लिए आयु;

(ख) धारा 11 की उपधारा (1) के अधीन स्थानीय प्राधिकारी को अपील फाइल करने का प्ररूप, अवधि और रीति;

(ग) धारा 20 की उपधारा (1) के अधीन ऐसे व्यक्ति और ऐसा अनुभव, जो ऐसे व्यक्ति के पास होना होगा;

(घ) धारा 20 की उपधारा (2) के अधीन आवेदन करने का प्ररूप और रीति ;

(ङ) शिकायत या विवाद के प्राप्त होने पर, धारा 20 की उपधारा (3) के अधीन सत्यापन और जांच करने की रीति, वह समय जिसके भीतर और वह रीति जिसमें शिकायतों को दूर करने और विवादों का समाधान करने के उपाय किए जा सकेंगे;

(च) वह प्ररूप, जिसमें, वह समय जिसके भीतर और वह रीति जिसमें धारा 20 की उपधारा (4) के अधीन अपील फाइल की जा सकेगी;

(छ) वह समय जिसके भीतर और वह रीति जिसमें धारा 20 की उपधारा (5) के अधीन अपील का निपटारा किया जाएगा;

(ज) धारा 22 की उपधारा (1) के अधीन नगर विक्रय समिति की अवधि और उसके गठन की रीति;

(झ) धारा 22 की उपधारा (2) के खंड (ख) के अधीन नगर विक्रय समिति के अन्य सदस्यों की संख्या;

(ञ) धारा 22 की उपधारा (2) के खंड (घ) के अधीन पथ विक्रेताओं में से निर्वाचनों की रीति;

(ट) धारा 23 की उपधारा (3) के अधीन चेयरपर्सन और सदस्यों के भत्ते;

(ठ) धारा 23 के अधीन नगर विक्रय समिति की बैठक का समय और स्थान, बैठकों में कार्य संचालन की प्रक्रिया और उसके द्वारा निर्वहन किए जाने वाले कृत्य;

(ड) वह रीति और प्रयोजन जिसके लिए धारा 24 की उपधारा (1) के अधीन किसी व्यक्ति को सहयुक्त किया जा सकेगा;

(ढ) धारा 24 की उपधारा (2) के अधीन सहयुक्त किसी व्यक्ति को संदत्त किए जाने वाले भत्ते;

(ण) धारा 25 के अधीन नगर विक्रय समिति के अन्य कर्मचारी;

(त) धारा 26 की उपधारा (2) के अधीन सभी पथ विक्रेताओं के अभिलेख अद्यतन बनाए रखने की रीति;

(थ) धारा 30 के अधीन प्रस्तुत की जाने वाली विवरणियां;

(द) धारा 38 की उपधारा (2) के अधीन स्कीम का सार प्रकाशित करने की रीति ।

(3) इस अधिनियम के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम और बनाई गई प्रत्येक स्कीम, बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा/रखी जाएगी । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम या स्कीम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा/होगी । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए या स्कीम नहीं बनाई जानी चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा/जाएगी । किन्तु नियम या स्कीम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उस नियम या स्कीम के अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।

(4) राज्य सरकार द्वारा इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम या बनाई गई प्रत्येक स्कीम बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, जहां राज्य विधान-मंडल के दो सदन हैं, वहां प्रत्येक सदन के समक्ष और जहां राज्य विधान-मंडल का एक सदन है वहां उस सदन के समक्ष रखा जाएगा/रखी जाएगी ।

37. उपविधियां बनाने की शक्ति-स्थानीय प्राधिकारी, इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए किसी नियम या स्कीम के उपबंधों के अधीन रहते हुए, निम्नलिखित सभी या किन्हीं विषयों का उपबंध करने के लिए उपविधियां बना सकेगा, अर्थात्: --

(क) निर्बंधन मुक्त विक्रय जोनों, निर्बंधित विक्रय जोनों और अभिहित विक्रय जोनों में विक्रय का विनियमन और रीति;

(ख) धारा 17 के अधीन विक्रय जोनों में नागरिक सुख-सुविधाओं और सुविधाओं के लिए मासिक अनुरक्षण प्रभारों का अवधारण;

(ग) धारा 18 की उपधारा (5) और धारा 28 के अधीन शास्ति का अवधारण;

(घ) विक्रय जोनों में करों और फीसों के संग्रहण का विनियमन;

(ङ) विक्रय जोनों में यातायात का विनियमन;

(च) विक्रय जोनों में जनसाधारण को उपलब्ध कराए गए उत्पादों और सेवाओं की क्वालिटी का विनियमन और लोक स्वास्थ्य, स्वच्छता और सुरक्षा मानकों का बनाए रखा जाना;

(छ) विक्रय जोनों में नागरिक सेवाओं का विनियमन; और

(ज) विक्रय जोनों में ऐसे अन्य विषयों का विनियमन जो आवश्यक हों ।

38. पथ विक्रेताओं के लिए स्कीम-(1) इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए, समुचित सरकार स्थानीय प्राधिकारी और नगर विक्रय समिति के साथ सम्यक् परामर्श करने के पश्चात्, इस अधिनियम के प्रारंभ की तारीख से छह मास के भीतर अधिसूचना द्वारा, एक स्कीम विरचित करेगी जिसमें दूसरी अनुसूची में उपबंधित सभी या किन्हीं विषयों को विनिर्दिष्ट किया जा सकेगा ।

(2) समुचित सरकार द्वारा उपधारा (1) के अधीन अधिसूचित स्कीम का सार, स्थानीय प्राधिकारी द्वारा, कम से कम दो स्थानीय समाचारपत्रों में ऐसी रीति में, जो विहित की जाए, प्रकाशित किया जाएगा ।

39. कठिनाइयों को दूर करने की शक्ति-(1) यदि इस अधिनियम के उपबंधों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है तो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में प्रकाशित ऐसे आदेश द्वारा, ऐसे उपबंध कर सकेगी जो इस अधिनियम के उपबंधों से असंगत न हों और जो उस कठिनाई को दूर करने के लिए उसे आवश्यक या समीचीन प्रतीत हों: 

परन्तु इस धारा के अधीन ऐसा कोई आदेश इस अधिनियम के प्रारम्भ से तीन वर्ष की समाप्ति के पश्चात् नहीं किया जाएगा ।

(2) इस धारा के अधीन किया गया प्रत्येक आदेश, किए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखा जाएगा । 

पहली अनुसूची

(धारा 21 देखिए)

पथ विक्रय योजना

(1) पथ विक्रय योजना में, -

(क) यह सुनिश्चित किया जाएगा कि उन सभी विद्यमान पथ विक्रेताओं को, जिनकी सर्वेक्षण में पहचान की गई है, ऐसे सन्नियम के अधीन रहते हुए, जो, यथास्थिति, वार्ड, जोन, नगर या शहर की जनसंख्या के ढाई प्रतिशत के अनुरूप हो, पथ विक्रय योजना में स्थान उपलब्ध कराए जाएं:

(ख) यात्रियों के निर्बाध आवागमन और बिना किसी अड़चन के सड़कों का उपयोग करने के अधिकार को सुनिश्चित किया जाएगा;

(ग) यह सुनिश्चित किया जाएगा कि पथ विक्रय के स्थान या क्षेत्र की व्यवस्था युक्तियुक्त और विद्यमान प्राकृतिक बाजारों से संगत हो;

(घ) विक्रय जोनों के रूप में पहचान किए गए स्थानों या क्षेत्रों का समुचित उपयोग किए जाने के लिए नागरिक सुविधाओं को ध्यान में रखा जाएगा;

(ङ) माल के वितरण तथा सेवाओं के उपबंध का सुविधाजनक, दक्षतापूर्ण और कारगर लागत के रूप में संवर्धन किया जाएगा;

(च) ऐसे अन्य विषय होंगे, जो पथ विक्रय योजना को प्रभावी करने के लिए स्कीम में विनिर्दिष्ट किए जाएं ।

(2) पथ विक्रय योजना में निम्नलिखित सभी विषय अंतर्विष्ट होंगे, अर्थात्: -

(क) पथ विक्रय के लिए स्थानिक योजना मानदंडों का अवधारण;

(ख) विक्रय जोनों के लिए स्थान या क्षेत्र का चिह्नांकन;

(ग) विक्रय जोनों का निर्बंधन मुक्त विक्रय जोनों, निर्बंधित विक्रय जोनों और विक्रय-निषेध जोनों के रूप में अवधारण;

(घ) ऐसी स्थानिक योजनाओं का ऐसे मानदंड अपनाकर, जो आवश्यक हों, बनाया जाना, जो उस नगर या शहर में पथ विक्रेताओं की विद्यमान संख्या के लिए और भावी बढ़ोतरी के लिए भी सहायक और पर्याप्त हों;

(ङ) ऐसे पारिणामिक परिवर्तन, जिनकी अभिहित विक्रय जोनों में पथ विक्रेताओं को स्थान-सुविधा उपलब्ध कराने के लिए विद्यमान महायोजना (मास्टर प्लान), विकास योजना, आंचलिक योजना (जोनल प्लान), अभिन्यास योजना और किसी अन्य योजना में आवश्यकता है ।

(3) विक्रय निषेध जोन की घोषणा निम्नलिखित सिद्धांतों के अधीन रहते हुए पथ विक्रय योजना द्वारा क्रियान्वित की जाएगी, अर्थात्: -

(क) ऐसे किसी विद्यमान बाजार या प्राकृतिक बाजार को, जिसकी सर्वेक्षण के अधीन पहचान की गई है, विक्रय निषेध जोन घोषित नहीं किया जाएगा;

(ख) विक्रय निषेध जोन की घोषणा ऐसी रीति में की जाएगी जिससे पथ विक्रेताओं की न्यूनतम प्रतिशतता विस्थापित हो;

(ग) किसी क्षेत्र को विक्रय निषेध जोन घोषित करने के लिए किसी स्थान की भीड़-भाड़ आधार नहीं होगी परन्तु ऐसे क्षेत्रों में उन व्यक्तियों को, जिनकी सर्वेक्षण में पथ विक्रेताओं के रूप में पहचान नहीं की गई है, विक्रय प्रमाणपत्र जारी किए जाने पर निर्बंधन लगाए जा सकते हैं;

(घ) किसी क्षेत्र को विक्रय निषेध जोन घोषित करने के लिए एकमात्र स्वच्छता की समस्या आधार नहीं होगी जब तक कि ऐसी समस्या पथ विक्रेताओं के कारण पैदा हुई न समझी गई हो और उसकी स्थानीय प्राधिकरण द्वारा समुचित नागरिक कार्रवाई के माध्यम से समाधान न हो सकता हो;

(ङ) उस समय तक, जब तक कि सर्वेक्षण कार्यान्वित न हो जाए और पथ विक्रय योजना तैयार न हो जाए, किसी भी जोन को, विक्रय निषेध जोन घोषित नहीं किया जाएगा ।

दूसरी अनुसूची

(धारा 38 देखिए)

समुचित सरकार द्वारा पथ विक्रेताओं के संबंध में विरचित स्कीम में उपबंधित किए जाने वाले विषय: -

(क) सर्वेक्षण करने की रीति;

(ख) वह अवधि जिसके भीतर उन पथ विक्रेताओं को जिनकी सर्वेक्षण के अधीन पहचान की गई है विक्रय प्रमाणपत्र जारी किए जाएंगे;

(ग) वे निबंधन और शर्तें जिनके अधीन रहते हुए विक्रय प्रमाणपत्र ऐसे किसी पथ विक्रेता को, जिसके अंतर्गत ऐसे व्यक्ति भी हैं, जो दो सर्वेक्षणों की मध्यवर्ती अवधि के दौरान पथ विक्रय का कार्य करना चाहते हैं, जारी किया जा सकेगा;

(घ) ऐसा प्ररूप और रीति, जिसमें किसी पथ विक्रेता को विक्रय प्रमाणपत्र जारी किया जा सकेगा;

(ङ) पथ विक्रेताओं को पहचान-पत्र जारी करने का प्ररूप और रीति;

(च) पथ विक्रेताओं को विक्रय प्रमाणपत्र जारी किए जाने संबंधी मानदंड;

(छ) पथ विक्रय के प्रवर्ग के आधार पर संदत्त की जाने वाली विक्रय फीस, जो भिन्न-भिन्न शहरों के लिए भिन्न-भिन्न हो सकेगी;

(ज) चल स्टालों के रजिस्ट्रीकरण, उनके लिए पार्किंग स्थल के उपयोग के लिए और नागरिक सुख-सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए बैंकों, स्थानीय प्राधिकरण के पटलों और नगर विक्रय समिति के पटलों के माध्यम से विक्रय फीस, अनुरक्षण प्रभारों और शास्तियों का संग्रहण करने की रीति;

(झ) विक्रय प्रमाणपत्र की विधिमान्यता की अवधि;

(ञ) वह अवधि, जिसके लिए और वह रीति, जिसमें विक्रय प्रमाणपत्र का नवीकरण किया जा सकेगा और ऐसे नवीकरण की फीस;

(ट) वह रीति जिसमें विक्रय प्रमाणपत्र को निलंबित या रद्द किया जा सकेगा;

(ठ) स्थिर विक्रेताओं और चल विक्रेताओं से भिन्न पथ विक्रेताओं के प्रवर्ग;

(ड) व्यक्तियों के ऐसे अन्य प्रवर्ग, जिन्हें विक्रय प्रमाणपत्र जारी किए जाने में अधिमान दिया जाना होगा;

(ढ) वह लोक प्रयोजन, जिसके लिए किसी पथ विक्रेता का पुनःस्थापन किया जा सकेगा और पथ विक्रेता के पुनःस्थापन की रीति;

(ण) किसी पथ विक्रेता को बेदखल करने की रीति;

(त) किसी पथ विक्रेता को बेदखल करने के लिए सूचना देने की रीति;

(थ) किसी पथ विक्रेता को बेदखल करने में असफल रहने पर वस्तुतः बेदखल करने की रीति;

(द) स्थानीय प्राधिकारी द्वारा माल के अभिग्रहण की रीति, जिसके अंतर्गत अभिगृहीत माल की सूची का तैयार किया जाना और उसे जारी किया जाना भी सम्मिलित है;

(ध) पथ विक्रेता द्वारा अभिगृहीत माल को वापस लेने की रीति और उसी के लिए फीस;

(न) नगर विक्रय समिति के क्रियाकलापों की सामाजिक संपरीक्षा करने का प्ररूप और रीति;

(प) वे शर्तें, जिनके अधीन निजी स्थानों को निर्बंधन मुक्त विक्रय जोन, निर्बंधित विक्रय जोन और विक्रय निषेध जोन अभिहित किया जा सकेगा;

(फ) पथ विक्रय के लिए ऐसे निबंधन और शर्तें, जिनके अंतर्गत लोक स्वास्थ्य और स्वच्छता बनाए रखने के लिए पालन किए जाने वाले सन्नियम भी हैं;

(ब) राज्य स्तर पर पथ विक्रय से संबंधित सभी विषयों का समन्वय करने के लिए राज्य नोडल अधिकारी को पदाभिहित किया जाना;

(भ) नगर विक्रय समिति, स्थानीय प्राधिकरण, योजना प्राधिकरण और राज्य नोडल अधिकारी द्वारा पथ विक्रेताओं के संबंध में समुचित अभिलेखों और अन्य दस्तावेजों को बनाए रखने की रीति;

(म) समय विभाजन के आधार पर विक्रय क्रियाकलाप करने की रीति;

(य) विक्रय जोनों का, निर्बंधन मुक्त जोनों, निर्बंधित विक्रय जोनों और विक्रय निषेध जोनों के रूप में अवधारण करने के सिद्धांत;

(यक) विक्रय जोनों की धारण क्षमता का अवधारण करने के सिद्धांत और व्यापक जनगणना तथा सर्वेक्षण कार्य हाथ में लेने की रीति;

(यख) निम्नलिखित के अधीन रहते हुए पुनःस्थापन के सिद्धांत-

(i) जब तक प्रश्नगत भूमि के लिए स्पष्ट और अत्यावश्यकता न हो पुनःस्थापन यथासंभव नहीं किया जाना चाहिए;

(ii) प्रभावित विक्रेताओं या उनके प्रतिनिधियों को, पुनर्वासन की योजना बनाने और उसके कार्यान्वयन में अंतर्वलित किया जाएगा;

(iii) प्रभावित विक्रेताओं को पुनःस्थापित किया जाएगा जिससे कि उनकी आजीविका और जीवन स्तर में सुधार हो सके या कम से कम उन्हें यथार्थ रूप में बेदखल किए जाने के पूर्व के स्तर तक प्रत्यावर्तित किया जा सके;

(iv) नई अवसंरचनात्मक विकास परियोजनाओं द्वारा सृजित आजीविका के अवसर विस्थापित विक्रेताओं को प्रदान किया जाना जिससे वे नई अवसंरचना द्वारा सृजित आजीविका के अवसरों का लाभ उठा सकें;

(v) आस्तियों की हानि नहीं होने दी जाएगी और यदि कोई हानि होती है तो, उसकी क्षतिपूर्ति की जाएगी;

(vi) भूमि में हक या अन्य हित का किसी अंतरण से उस भूमि पर पथ विक्रेताओं के अधिकारों पर प्रभाव नहीं पड़ेगा और ऐसे अंतरण के परिणामस्वरूप कोई भी पुनःस्थापन इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसार किया जाएगा;

(vii) राज्य तंत्र बलात् बेदखलियों की पद्धति पर रोक लगाने और उसे नियंत्रित करने के लिए व्यापक उपाय करेगा;

(viii) ऐसे प्राकृतिक बाजारों को जहां पथ विक्रेताओं ने पचास से अधिक वर्ष तक कारबार किया है, विरासत बाजार घोषित किया जाएगा और ऐसे बाजारों में पथ विक्रेताओं को पुनःस्थापित नहीं किया जाएगा;

(यग) कोई अन्य विषय जिसे इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए स्कीम में सम्मिलित किया जा सकेगा ।

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