खनिजों पर उपकर और अन्य कर (विधिमान्यकरण) अधिनियम, 1992
(1992 का अधिनियम संख्यांक 16)
[4 अप्रैल, 1992]
कतिपय राज्य विधियों के अधीन खनिजों पर उपकरों और कतिपय
अन्य करों के अधिरोपण और संग्रहण के
विधिमान्यकरण के लिए
अधिनियम
भारत गणराज्य के तैंतालीसवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-
1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारंभ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम खनिजों पर उपकर और अन्य कर (विधिमान्यकरण) अधिनियम, 1992 है ।
(2) इसका विस्तार संपूर्ण भारत पर है ।
(3) यह 15 फरवरी, 1992 को प्रवृत्त हुआ समझा जाएगा ।
2. कतिपय राज्य विधियों और उनके अधीन की गई कार्रवाइयों और बातों का विधिमान्यकरण-(1) इस अधिनियम की अनुसूची में विनिर्दिष्ट विधियां उतनी ही विधिमान्य होंगी और सदैव उतनी ही विधिमान्य समझी जाएंगी मानो खनिजों पर उपकरों या अन्य करों से संबंधित उनमें अंतर्विष्ट उपबंध संसद् द्वारा अधिनियमित किए गए थे और ऐसे उपबंध 4 अप्रैल, 1991 तक प्रवृत्त बने रहे समझे जाएंगे ।
(2) किसी न्यायालय के किसी निर्णय, डिक्री या आदेश के होते हुए भी, की गई या की जाने के लिए तात्पर्यित सभी कार्रवाइयां, की गई या की जाने के लिए तात्पर्यित सभी बातें, बनाए गए या बनाए जाने के लिए तात्पर्यित सभी नियम, निकाली गई या निकाली जाने के लिए तात्पर्यित सभी अधिसूचनाएं और ऐसी किन्हीं विधियों के अधीन खनिजों पर वसूल किए गए उपकर या अन्य कर, यथास्थिति, विधिमान्य रूप से की गई, बनाए गए, निकाली गई या वसूल किए गए समझे जाएंगे मानो यह धारा सभी तात्त्विक समयों पर, जब ऐसी कार्रवाइयां या बातें की गई थीं, नियम बनाए गए थे, अधिसूचनाएं निकाली गई थीं, या उपकर या अन्य कर वसूल किए गए थे, प्रवृत्त थीं और ऐसी किन्हीं विधियों के अधीन वसूल किए गए उपकरों या अन्य करों के प्रतिदाय के लिए कोई वाद या अन्य कार्यवाही किसी न्यायालय में नहीं की जाएगी या चालू नहीं रखी जाएगी ।
(3) शंकाओं को दूर करने के लिए यह घोषित किया जाता है कि उपधारा (2) में की किसी बात के बारे में, यह अर्थ नहीं लगाया जाएगा कि वह किसी व्यक्ति को ऐसी किन्हीं विधियों के अधीन उससे शोध्य रकम से अधिक उसके द्वारा संदत्त किसी उपकर या कर के प्रतिदाय का दावा करने से निवारित करती है ।
3. निरसन और व्यावृत्ति-(1) खनिजों पर उपकर और अन्य कर (विधिमान्यकरण) अध्यादेश, 1992 (1992 का अध्यादेश संख्यांक 7) इसके द्वारा निरसित किया जाता है ।
(2) ऐसे निरसन के होते हुए भी, उक्त अध्यादेश के अधीन की गई कोई बात या कोई कार्रवाई इस अधिनियम के तत्स्थानी उपबंधों के अधीन की गई समझी जाएगी ।
अनुसूची
(धारा 2 देखिए)
1. आंध्र प्रदेश (खनिज अधिकार) कर अधिनियम, 1975 (1975 का आंध्र प्रदेश अधिनियम 14) ।
2. आंध्र प्रदेश (आंध्र क्षेत्र) जिला बोर्ड अधिनियम, 1920 ।
3. आंध्र प्रदेश (तेलंगाना क्षेत्र) जिला बोर्ड अधिनियम, 1955 ।
4. उपकर अधिनियम, 1880 (1880 का बंगाल अधिनियम 9) जैसा कि वह बिहार राज्य में लागू है ।
5. कर्नाटक जिला परिषद्, तालुक पंचायत समिति, मंडल पंचायत और न्याय पंचायत अधिनियम, 1983 (1985 का कर्नाटक अधिनियम 20) ।
6. कर्नाटक (खनिज अधिकार) कर अधिनियम, 1984 (1984 का कर्नाटक अधिनियम 32) ।
7. मध्य प्रदेश कराधान अधिनियम, 1982 (1982 का मध्य प्रदेश अधिनियम 15) ।
8. मध्य प्रदेश उपकर अधिनियम, 1981 (1982 का मध्य प्रदेश अधिनियम 1) ।
9. महाराष्ट्र जिला परिषद् और पंचायत समिति (संशोधन और विधिमान्यकरण) अधिनियम, 1981 (1981 का महाराष्ट्र अधिनियम 46) ।
10. उड़ीसा उपकर अधिनियम, 1962 (1962 का उड़ीसा अधिनियम 2) ।
11. तमिलनाडु पंचायत अधिनियम, 1958 (1958 का तमिलनाडु अधिनियम 35) ।
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