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बहुराज्य सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 2002 ( Multi-State Cooperative Societies Act, 2002 )


 

बहुराज्य सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 2002

(2002 का अधिनियम संख्यांक 39)

[3 जुलाई, 2002]

ऐसी सहकारी सोसाइटियों से, जिनके उद्देश्य एक राज्य तक सीमित नहीं हैं और जो

एक से अधिक राज्यों में सदस्यों का हित साधन कर रही हैं, संबंधित विधि का

समेकन और संशोधन करने, जन संस्थाओं के रूप में सहकारिताओं की

स्वैच्छिक विरचना और लोकतांत्रिक कृत्यकरण को, जो स्वावलंबन

और परस्पर सहायता पर आधारित हो, सुकर बनाने और

सहकारी सोसाइटियों को आर्थिक और सामाजिक

उन्नति के संवर्धन में समर्थ करने तथा कृत्यकारी

स्वायत्तता प्रदान करने के लिए और उससे

संसक्त या उसके आनुषंगिक

विषयों के लिए

अधिनियम

भारत गणराज्य के तिरपनवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो: -

अध्याय 1

प्रारंभिक

1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारंभ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम बहुराज्य सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 2002 है ।

(2) इसका विस्तार संपूर्ण भारत पर है ।

(3) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा, जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे और इस अधिनियम के भिन्न-भिन्न उपबंधों के लिए भिन्न-भिन्न तारीखें नियत की जा सकेंगी और ऐसे किसी उपबंध में इस अधिनियम के प्रारंभ के प्रति निर्देश का यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह उस उपबंध के प्रवृत्त होने के प्रतिनिर्देश है

2. लागू होना-यह अधिनियम, -

(क) उन सभी सहकारी सोसाइटियों को, जिनके उद्देश्य एक राज्य तक सीमित नहीं हैं और जो इस अधिनियम के प्रारंभ के पूर्व, -

(i) सोसाइटी अधिनियम, 1912 (1912 का 2) के अधीन; या 

(ii) किसी राज्य में प्रवृत्त सहकारी सोसाइटियों से संबंधित किसी अन्य विधि के अधीन या बहुएकक सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 1942 (1942 का 6) या बहुराज्य सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 1984 (1984 का 51) के अनुसरण में निगमित की गई थीं, और जिनका रजिस्ट्रीकरण ऐसे प्रारंभ के पूर्व रद्द नहीं कर दिया गया है; और

(ख) सभी बहुराज्य सहकारी सोसाइटियों को लागू होगा ।

3. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, -

(क) कार्यक्षेत्र" से वह क्षेत्र अभिप्रेत है जहां से सदस्यों के रूप में व्यक्तियों को प्रवेश दिया गया है;

(ख) बोर्ड" से अभिप्रेत है किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी का निदेशक बोर्ड या शासी निकाय, चाहे वह किसी भी नाम से ज्ञात हो, जिसे सोसाइटी के काम काज के प्रबंध का निदेशन और नियंत्रण सौंपा गया हो;

(ग) उपविधि" से उस समय प्रवृत्त ऐसी उपविधियां अभिप्रेत हैं, जो इस अधिनियम के अधीन सम्यक् रूप से रजिस्ट्रीकृत हैं या रजिस्ट्रीकृत की गई समझी गई हैं और इसके अंतर्गत उनके ऐसे संशोधन हैं जो इस अधिनियम के अधीन सम्यक् रूप से रजिस्ट्रीकृत है या रजिस्ट्रीकृत किए गए समझे गए हैं;

(घ) केन्द्रीय रजिस्ट्रार" से धारा 4 की उपधारा (1) के अधीन नियुक्त सहकारी सोसाइटियों का केंद्रीय रजिस्ट्रार अभिप्रेत है और इसके अंतर्गत उस धारा की उपधारा (2) के अधीन केन्द्रीय रजिस्ट्रार की शक्तियों का प्रयोग करने के लिए सशक्त कोई अधिकारी भी है;

() मुख्य कार्यपालक" से धारा 51 के अधीन नियुक्त बहुराज्य सहकारी सोसाइटी का मुख्य कार्यपालक अभिप्रेत है;

(च) सहकारी बैंक" से ऐसी वहुराज्य सहकारी सोसाइटी अभिप्रेत है, जो बैंककारी कारबार करती है;

(छ) सहकारिता सिद्धान्त" से सहकारिता के ऐसे सिद्धान्त अभिप्रेत हैं जो पहली अनुसूची में विनिर्दिष्ट हैं;

(ज) सहकारी सोसाइटी" से किसी राज्य में सहकारी सोसाइटियों से संबंधित उस समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन रजिस्ट्रीकृत या रजिस्ट्रीकृत समझी जाने वाली कोई सोसाइटी अभिप्रेत है;

() किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी या ऐसी सोसाइटियों के वर्ग के संबंध में सहकारी वर्ष" से उस वर्ष की 31 मार्च को समाप्त होने वाला वर्ष और जहां ऐसी सोसाइटी या ऐसे वर्ग की सोसाइटियों के लेखाओं का, केन्द्रीय रजिस्ट्रार की पूर्व मंजूरी से, किसी अन्य दिन को तुलनपत्र तैयार किया जाता है, वहां उस दिन को समाप्त होने वाला वर्ष अभिप्रेत है;

(ञ) निक्षेप बीमा निगम" से, निक्षेप बीमा निगम अधिनियम, 1961 (1961 का 47) की धारा 3 के अधीन स्थापित निक्षेप बीमा और प्रत्यय गारंटी निगम अभिप्रेत है;

() परिसंघीय सहकारी समिति" से इस अधिनियम के अधीन रजिस्ट्रीकृत सहकारी सोसाइटियों का परिसंघ अभिप्रेत है और जिसकी सदस्यता केवल किसी सहकारी सोसाइटी या किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी को ही उपलब्ध है;

(ठ) किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के संबंध में साधारण निकाय" से उस सोसाइटी के सभी सदस्य अभिप्रेत हैं और किसी राष्ट्रीय सहकारी सोसाइटी या किसी परिसंघीय सहकारी समिति के संबंध में सदस्य सहकारी सोसाइटियों के प्रतिनिधि या बहुराज्य सहकारी सोसाइटियों के प्रतिनिधि अभिप्रेत हैं और इसके अंतर्गत अधिनियम की धारा 38 की   उपधारा (1) के पहले परंतुक के अधीन गठित कोई निकाय भी आता है;

(ड) साधारण अधिवेशन" से किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के साधारण निकाय का अधिवेशन अभिप्रेत है और इसके अंतर्गत विशेष साधारण अधिवेशन भी आते हैं;

(ढ) सदस्य" से बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन में सम्मिलित होने वाला व्यक्ति अभिप्रेत है और इसके अंतर्गत इस अधिनियम, नियमों और उपविधियों के उपबंधों के अनुसार ऐसे रजिस्ट्रीकरण के पश्चात् सदस्यता के लिए स्वीकृत कोई व्यक्ति भी है;

(ण) सदस्य सहकारी समिति" से ऐसी सहकारी सोसाइटी या बहुराज्य सहकारी सोसाइटी अभिप्रेत है जो किसी परिसंघीय सहकारी समिति की सदस्य है;

(त) बहुराज्य सहकारी सोसाइटी" से इस अधिनियम के अधीन रजिस्ट्रीकृत या रजिस्ट्रीकत समझी जाने वाली सोसाइटी अभिप्रेत है और इसके अंतर्गत राष्ट्रीय सहकारी सोसाइटी और कोई परिसंघीय सहकारी समिति भी है;

(थ) सीमित दायित्व वाली बहुराज्य सहकारी सोसाइटी" से ऐसी सोसाइटी अभिप्रेत है जिसके सदस्यों का दायित्व उसकी उपविधियों द्वारा उस रकम तक, यदि कोई है, सीमित है, जो सदस्यों द्वारा धारित उनके शेयरों पर असंदत्त रह गई है या जिसके लिए वे सोसाइटी की आस्तियों में, उसका परिसमापन होने की दशा में, अभिदाय करने के लिए उसके द्वारा वचनबद्ध है;

(द) राष्ट्रीय सहकारी सोसाइटी" से दूसरी अनुसूची में विनिर्दिष्ट बहुराज्य सहकारी सोसाइटी अभिप्रेत है;

(ध) अधिसूचना" से राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना अभिप्रेत है;

(न) अधिकारी" से सभापति, उपसभापति, अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, प्रबंध निदेशक, सचिव, प्रबंधक, बोर्ड का सदस्य, कोषाध्यक्ष, समापक तथा धारा 123 के अधीन नियुक्त प्रशासक अभिप्रेत है और इसके अंतर्गत कोई अन्य व्यक्ति भी है जो इस अधिनियम या नियमों या उपविधियों के अधीन बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के कारबार के संबंध में निदेश देने के लिए सशक्त किया गया है;

(प) विहित" से नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है;

() रिजर्व बैंक" से भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का 2) के अधीन गठित भारतीय रिजर्व बैंक अभिप्रेत है;

(ब) नियमों" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियम अभिप्रेत हैं ।

अध्याय 2

केन्द्रीय रजिस्ट्रार और बहुराज्य सहकारी सोसाइटियों का रजिस्ट्रीकरण

4. केन्द्रीय रजिस्ट्रार-(1) केन्द्रीय सरकार, किसी व्यक्ति को सहकारी सोसाइटियों का केन्द्रीय रजिस्ट्रार नियुक्त कर सकेगी और केन्द्रीय रजिस्ट्रार की सहायता के लिए ऐसे अन्य व्यक्तियों को भी नियुक्त कर सकेगी, जिन्हें वह ठीक समझे

(2) केन्द्रीय सरकार, अधिसूचना द्वारा, निदेश दे सकेगी कि इस अधिनियम के अधीन केन्द्रीय रजिस्ट्रार द्वारा प्रयोग की जा सकने वाली कोई शक्ति (किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के रजिस्ट्रीकरण की शक्ति से भिन्न) ऐसी सोसाइटी और ऐसे विषयों के संबंध में, जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किए जाएं, केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार के किसी अन्य अधिकारी द्वारा भी, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा प्राधिकृत किया जाए, ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए जो उसमें विनिर्दिष्ट की जाएं, प्रयोग की जा सकेगी:

परन्तु राज्य सरकार का कोई अधिकारी राष्ट्रीय सहकारी सोसाइटी के संबंध में ऐसी शक्ति का प्रयोग करने के लिए सशक्त नहीं किया जाएगा ।

5. ऐसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटियां जो रजिस्टर की जा सकती हैं-(1) किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी को इस अधिनियम के अधीन तभी रजिस्ट्रीकृत किया जाएगा, जब कि-

(क) उसके मुख्य उद्देश्य ऐसे हों, जिनसे कि एक से अधिक राज्यों में सदस्यों के हित साधन हो सकें; और

(ख) उसकी उपविधियों में सहकारिता सिद्धांतों के अनुसार स्वावलंबन और परस्पर सहायता के माध्यम से उसके सदस्यों के सामाजिक और आर्थिक उन्नति के लिए उपबंध किया गया हो ।

(2) लिमिटेड" शब्द या किसी भारतीय भाषा में इसका समतुल्य शब्द इस अधिनियम के अधीन परिसीमित दायित्व सहित रजिस्ट्रीकृत प्रत्येक बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के नाम के अंत में जोड़ा जाएगा ।

6. रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन-(1) किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के इस अधिनियम के अधीन रजिस्ट्रीकरण के प्रयोजनों के लिए, केन्द्रीय रजिस्ट्रार को ऐसे प्ररूप में और ऐसी विशिष्टियों सहित, जो विहित की जाएं, आवेदन किया जाएगा ।

(2) आवेदन, -

(क) किसी ऐसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी की दशा में जिसके सभी सदस्य व्यष्टि हैं, संबंधित प्रत्येक राज्य से कम से कम पचास व्यक्तियों द्वारा हस्ताक्षरित होगा; और

(ख) किसी ऐसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी की दशा में, जिसकी सदस्य सहकारी सोसाइटियां हैं, कम से कम ऐसी पांच सोसाइटियों की ओर से जो उसी राज्य में रजिस्ट्रीकृत नहीं हैं, सम्यक् रूप से प्राधिकृत प्रतिनिधियों द्वारा हस्ताक्षरित होगा; और

(ग) किसी ऐसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी की दशा में, जिसकी सदस्य कोई अन्य बहुराज्य सहकारी सोसाइटी और अन्य सहकारी सोसाइटियों हैं, ऐसी प्रत्येक सोसाइटी के सम्यक् रूप से प्राधिकृत प्रतिनिधियों द्वारा हस्ताक्षरित होगाः परन्तु, इस खंड में निर्दिष्ट सहकारी सोसाइटियों में से कम से कम दो सोसाइटियां ऐसी होंगी जो एक ही राज्य में रजिस्टर नहीं है;

(घ) ऐसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी की दशा में, जिसकी सदस्य सहकारी सोसाइटियां या बहुराज्य सहकारी सोसाइटियां और व्यष्टि हैं, -

(i) दो राज्य या उससे अधिक से प्रत्येक से पचास व्यक्तियों द्वारा जो व्यष्टि हों; और

(ii) दो राज्य या उससे अधिक से प्रत्येक से एक से कम एक सहकारी सोसाइटी या एक बहुराज्य सहकारी सोसाइटी द्वारा, हस्ताक्षरित होगा । 

(3) आवेदन के साथ बहुराज्य सहकारी सोसाइटी की प्रस्तावित उपविधियों की चार प्रतियां होंगी और ऐसे व्यक्ति जिनके द्वारा या जिनकी ओर से ऐसा आवेदन किया जाता है, सोसाइटी के संबंध में ऐसी जानकारी प्रस्तुत करेंगे जिसकी केन्द्रीय रजिस्ट्रार अपेक्षा करे ।

7. रजिस्ट्रीकरण-(1) यदि केन्द्रीय रजिस्ट्रार का समाधान हो जाता है कि, -

(क) आवेदन इस अधिनियम और नियमों के उपबंधों का अनुपालन करता है;

(ख) प्रस्तावित बहुराज्य सहकारी सोसाइटी इस मूल आधार को पूरा करती है कि उसके उद्देश्य एक से अधिक राज्यों में सदस्यों का हितसाधन करने के लिए हैं; 

(ग) उसकी उपविधियों में, सहकारिता सिद्धांतों के अनुसार स्वावलंबन और परस्पर सहायता के माध्यम से उसके सदस्यों की सामाजिक और आर्थिक उन्नति के लिए उपबंध किया गया है;

(घ) प्रस्तावित उपविधियां इस अधिनियम और नियमों के उपबंधों के प्रतिकूल नहीं हैं, तो वह बहुराज्य सहकारी सोसाइटी और उसकी उपविधियों को रजिस्टर कर सकेगा ।

(2) केन्द्रीय रजिस्ट्रार द्वारा रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन का निपटारा उसके द्वारा आवेदन की प्राप्ति की तारीख से चार मास की अवधि के भीतर किया जाएगा ।

(3) जहां केन्द्रीय रजिस्ट्रार किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी को रजिस्टर करने से इंकार करता है वहां वह इंकार करने वाले ऐसे आदेश को इंकार करने के कारणों सहित, यथास्थिति, आवेदक या आवेदकों को, रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन की प्राप्ति की तारीख से चार मास की अवधि के भीतर, संसूचित करेगा:

परंतु यह कि इंकार करने का कोई आदेश तब तक नहीं किया जाएगा जब तक कि, आवेदकों को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर नहीं दे दिया गया है:

परन्तु यह और कि यदि रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन का उपधारा (2) में विनिर्दिष्ट चार मास की अवधि के भीतर निपटारा नहीं किया जाता या केंद्रीय रजिस्ट्रार उस अवधि के भीतर इंकार का आदेश संसूचित करने में असमर्थ रहता है तो आवेदन रजिस्ट्रीकरण के लिए स्वीकार किया गया समझा जाएगा और केन्द्रीय रजिस्ट्रार इस अधिनियम और उसके अधीन बनाए गए नियमों के उपबंधों के अनुसार रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र जारी करेगा

8. रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र-जहां इस अधिनियम के अधीन किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी को रजिस्टर किया जाता है, वहां केन्द्रीय रजिस्ट्रार, अपने द्वारा हस्ताक्षरित रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र देगा जो इस बात का निश्चायक साक्ष्य होगा कि उसमें वर्णित सोसाइटी इस अधिनियम के अधीन सम्यक् रूप से रजिस्टर कर ली गई है, जब तक कि यह साबित नहीं कर दिया जाता है कि सोसाइटी का रजिस्ट्रीकरण रद्द कर दिया गया है ।

9. बहुराज्य सहकारी सोसाइटियों का निगमित निकाय होना-(1) कोई बहुराज्य सहकारी सोसाइटी, उसका रजिस्ट्रीकरण हो जाने पर उस नाम से जिससे वह रजिस्ट्रीकृत है, निगमित निकाय बन जाएगी और उसका शाश्वत उत्तराधिकार और सामान्य मुद्रा होगी और उसे स्थावर और जंगम दोनों तरह की संपत्ति अर्जित करने, धारित करने तथा उसका व्ययन करने, संविदा करने, वाद और अन्य विधिक कार्यवाहियां संस्थित करने और उनमें प्रतिरक्षा करने और ऐसे सभी कार्य करने की शक्तियां होंगी जो उन सभी प्रयोजनों के लिए आवश्यक हों, जिनके लिए उसका गठन किया गया है और उस नाम से वाद लाएगी या उसके विरुद्ध वाद लाया जाएगा ।

(2) किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के रजिस्ट्रीकरण से पूर्व सद्भावपूर्वक किए गए सभी संव्यवहार, रजिस्ट्रीकरण के पश्चात् इसके रजिस्ट्रीकरण के उद्देश्यों को अग्रसर करने के लिए किए गए संव्यवहार समझे जाएंगे

10. बहुराज्य सहकारी सोसाइटियों की उपविधि-(1) प्रत्येक बहुराज्य सहकारी सोसाइटी, इस अधिनियम और उसके अधीन बनाए गए नियमों के उपबंधों से संगत अपनी उपविधि बना सकेगी ।

(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसी उपविधि निम्नलिखित सभी या किन्हीं विषयों के उपबंध कर सकेगी, अर्थात्ः-

(क) सोसाइटी का नाम, पता और कार्यक्षेत्र;

(ख) सोसाइटी के उद्देश्य;

(ग) उसके सदस्यों को उपलब्ध कराई जाने वाली सेवाएं;

(घ) सदस्यता अभिप्राप्त करने के लिए पात्रता;

(ङ) सदस्यता अभिप्राप्त करने के लिए प्रक्रिया;

(च) सदस्य बने रहने के लिए शर्तें;

(छ) सदस्यता के प्रत्याहरण के लिए प्रक्रिया;

(ज) सदस्यता का अन्तरण;

(झ) सदस्यता से निष्कासन के लिए प्रक्रिया;

(ञ) सदस्यों के अधिकार और कर्तव्य;

(ट) सोसाइटी की पूंजी की प्रकृति और रकम;

(ठ) वह रीति, जिसमें कोई एकल सदस्य अधिकतम पूंजी के लिए अभिदाय कर सकता है;

(ड) ऐसे स्रोत जहां से बहुराज्य सहकारी सोसाइटी द्वारा निधियां जुटाई जा सकेंगी;

(ढ) वह प्रयोजन जिसके लिए निधियां उपयोजित की जा सकेंगी;

(ण) बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के शुद्ध लाभों के आबंटन या संवितरण की रीति;

(त) विभिन्न आरक्षितियों का गठन;

() इस अधिनियम के अधीन उपबंधित अधिवेशनों से भिन्न साधारण अधिवेशन बुलाने की रीति और उसकी गणपूर्ति

(द) साधारण और अन्य अधिवेशनों के लिए सूचना की प्रक्रिया और उनमें मतदान की रीति;

(ध) उपविधि में संशोधन करने की प्रक्रिया;

(न) बोर्ड के सदस्यों की संख्या जो इक्कीस से अधिक नहीं होगी;

(प) सोसाइटी के निदेशकों, अध्यक्ष और अन्य पदाधिकारियों की पदावधि जो पांच वर्ष से अधिक की नहीं होगी;

(फ) बोर्ड के सदस्यों को हटाने और रिक्तियां भरने की प्रक्रिया;

(ब) बोर्ड के अधिवेशन बुलाने की रीति और उसकी गणपूर्ति, वर्ष में ऐसे अधिवेशनों की संख्या और ऐसे अधिवेशनों का स्थान;

(भ) बोर्ड अधिवेशनों की आवृति;

(म) मुख्य कार्यपालक की, धारा 52 में उपबंधित शक्तियों और कृत्यों के अतिरिक्त शक्तियां और कृत्य;

(य) शास्ति अधिरोपित करने की रीति;

(यक) संपरीक्षकों की नियुक्ति, उनके अधिकार और कर्तव्य तथा संपरीक्षा करने की प्रक्रिया;

(यख) सोसाइटी की ओर से दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने, वादों तथा अन्य विधिक कार्यवाहियों को संस्थित करने और उनमें प्रतिरक्षा करने के लिए अधिकारियों को प्राधिकृत करना; 

(यग) ऐसे निबंधन, जिन पर कोई बहुराज्य सहकारी सोसाइटी सदस्यों से भिन्न व्यक्तियों से व्यवहार कर सकेगी;

(यघ) वे निबंधन, जिन पर कोई बहुराज्य सहकारी सोसाइटी, अन्य सहकारी सोसाइटियों से सहयुक्त हो सकेगी;

(यङ) वे निबंधन, जिन पर कोई बहुराज्य सहकारी सोसाइटी, सहकारी सोसाइटियों से भिन्न किसी संगठन से व्यवहार कर सकेगी;

(यच) वे अधिकार, यदि कोई हों, जिन्हें बहुराज्य सहकारी सोसाइटी, किसी अन्य बहुराज्य सहकारी सोसाइटी या परिसंघीय सहकारी समिति को प्रदत्त कर सकेगी और वे परिस्थितियां जिनमें परिसंघीय सहकारी समिति इन अधिकारों का प्रयोग कर सकेगी;

(यछ) किसी सदस्य की मृत्यु की दशा में, उसके नामनिर्देशिती के नाम पर शेयरों और हितों के अंतरण की प्रक्रिया और रीति

(यज) बहुराज्य सहकारी सोसाइटी द्वारा संचालित किए जाने वाले शैक्षिक और प्रशिक्षण कार्यक्रम; 

(यझ) बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के कारबार का मुख्य स्थान और अन्य स्थान;

(यञ) उसके सदस्यों द्वारा उपयोग की जाने वाली सेवाओं का न्यूनतम स्तर;

(यट) कोई अन्य विषय जो विहित किया जाए ।

11. किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी की उपविधियों का संशोधन-(1) किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी की उपविधि का संशोधन, तब तक विधिमान्य नहीं होगा जब तक ऐसा संशोधन इस अधिनियम के अधीन रजिस्टर न कर लिया गया हो ।

(2) किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी की उपविधियों का संशोधन, सोसाइटी के साधारण अधिवेशन में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत द्वारा पारित संकल्प द्वारा किया जाएगा ।      

(3) ऐसा कोई संकल्प तब तक विधिमान्य नहीं होगा; जब तक कि सदस्यों को प्रस्तावित संशोधनों की स्पष्ट पन्द्रह दिन की सूचना न दे दी गई हो । 

(4) ऐसे प्रत्येक मामले में, जिसमें बहुराज्य सहकारी सोसाइटी अपनी उपविधियों में संशोधन करने का प्रस्ताव करती है, केन्द्रीय रजिस्ट्रार को, ऐसे संशोधनों को रजिस्टर करने के लिए आवेदन निम्नलिखित के साथ करेगा-

(क) उपधारा (2) में निर्दिष्ट संकल्प की प्रति;

(ख) निम्नलिखित उपदर्शित करने वाली विशिष्टियों से युक्ति विवरण, -

(i) उस साधारण अधिवेशन की तारीख जिसमें उपविधियों में संशोधन किए गए थे;

(ii) साधारण अधिवेशन बुलाने के लिए दी गई सूचना के दिनों की संख्या;

(iii) बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के सदस्यों की कुल संख्या;

(iv) ऐसे अधिवेशन के लिए अपेक्षित गणपूर्ति;

(v) अधिवेशन में उपस्थित सदस्यों की संख्या;

(vi) ऐसे सदस्यों की संख्या, जिन्होंने ऐसे अधिवेशन में मतदान किया;

(vii) ऐसे सदस्यों की संख्या, जिन्होंने उपविधियों में ऐसे संशोधनों के पक्ष में मतदान किया;

(ग) उन संशोधनों के साथ जिन्हें किए जाने का प्रस्ताव है, प्रवृत्त सुसंगत उपविधियों की एक प्रति और साथ ही ऐसे संशोधनों को न्यायोचित ठहराने वाले कारण; 

(घ) साधारण निकाय द्वारा इस निमित्त सम्यक् रूप से प्राधिकृत अधिकारी द्वारा हस्ताक्षरित उपविधियों के ऐसे पाठ की चार प्रतियां, जिनमें प्रस्तावित संशोधन सम्मिलित किए गए हैं;

(ङ) सदस्यों को दी गई सूचना और उपविधियों में संशोधन के प्रस्ताव की एक प्रति;

() साधारण अधिवेशन की अध्यक्षता करने वाले व्यक्ति द्वारा हस्ताक्षरित एक प्रमाणपत्र जिसमें यह प्रमाणित किया गया हो कि उपधारा (2) और (3) तथा उपविधियों में विनिर्दिष्ट प्रक्रिया का अनुसरण किया गया है;

(छ) ऐसी कोई अन्य विशिष्टि, जिसकी केन्द्रीय रजिस्ट्रार द्वारा इस निमित्त अपेक्षा की जाए ।

(5) ऐसा प्रत्येक आवेदन, ऐसे साधारण अधिवेशन की तारीख से, जिसमें उपविधियों में ऐसे संशोधन पारित किए गए थे, साठ दिन के भीतर किया जाएगा ।

(6) ऐसी सहकारी सोसाइटी की जो धारा 22 के उपबंधों के अनुसार बहुराज्य सहकारी सोसाइटी में संपरिवर्तित होने की वांछा करती है, उपविधियों के संशोधन को, इस धारा की उपधारा (2) से उपधारा (5) में दी गई प्रक्रिया लागू होगी

(7) यदि उपधारा (5) के अधीन आवेदन की प्राप्ति पर, केन्द्रीय रजिस्ट्रार का यह समाधान हो जाता है कि प्रस्तावित संशोधन-

(क) इस अधिनियम या नियमों के उपबंधों के प्रतिकूल नहीं है;

(ख) सहकारिता के सिद्धान्तों के विरुद्ध नहीं है; और

(ग) बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के सदस्यों के आर्थिक हितों का संवर्द्धन करेगा,

तो वह संशोधन को उसे प्राप्त होने की तारीख से तीन मास की अवधि के भीतर रजिस्टर कर सकेगा ।

(8) केन्द्रीय रजिस्ट्रार, रजिस्ट्रीकृत संशोधन की प्रति अपने द्वारा हस्ताक्षरित प्रमाणपत्र सहित, उसके रजिस्ट्रीकरण की तारीख से एक मास की अवधि के भीतर, बहुराज्य सहकारी सोसाइटी को भेजेगा और ऐसा प्रमाणपत्र इस बात का निश्चायक साक्ष्य होगा कि संशोधन सम्यक् रूप से रजिस्टर कर लिया गया है ।

(9) जहां केन्द्रीय रजिस्ट्रार किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी की उपविधियों के किसी संशोधन को रजिस्टर करने से इंकार करता है वहां वह इंकार करने के ऐसे आदेश को, उसके कारणों सहित, सोसाइटी के मुख्य कार्यपालक को, इंकार करने की तारीख से पन्द्रह दिन के भीतर विहित रीति से संसूचित करेगा:

परन्तु यदि रजिस्ट्रीकरण के आवेदन का, उपधारा (7) में विनिर्दिष्ट तीन मास की अवधि के भीतर निपटारा नहीं किया जाता या केन्द्रीय रजिस्ट्रार उस अवधि के भीतर इंकार का आदेश संसूचित करने में असफल रहता है, तो आवेदन को रजिस्ट्रीकरण के लिए स्वीकार कर लिया गया समझा जाएगा और केन्द्रीय रजिस्ट्रार इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसार रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र जारी करेगा ।

12. उपविधियों का संशोधन कब प्रवृत्त होगा-बहुराज्य सहकारी सोसाइटी की उपविधियों का कोई संशोधन, जब तक वह किसी विशिष्ट दिन प्रवृत्त होने के लिए अभिव्यक्त न किया गया हो, उस दिन प्रवृत्त होगा जिस दिन संशोधन रजिस्टर किया जाता है । 

13. नाम में परिवर्तन-(1) कोई बहुराज्य सहकारी सोसाइटी अपनी उपविधियों का संशोधन करके अपने नाम में परिवर्तन कर सकती है, किन्तु ऐसे परिवर्तन से, बहुराज्य सहकारी सोसाइटी या उसके किन्हीं सदस्यों या भूतपूर्व सदस्यों में से किसी के अधिकार या बाध्यता पर प्रभाव नहीं पड़ेगा, और किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी द्वारा या उसके विरुद्ध ऐसी विधिक कार्यवाहियां, जो उसके पूर्ववर्ती नाम से जारी रखी जा सकती थीं या प्रारंभ की जा सकती थीं, उसके नए से या उसके विरुद्ध जारी रखी जा सकेंगी या प्रारंभ की जा सकेंगी ।

 (2) जहां कोई बहुराज्य सहकारी सोसाइटी अपने नाम में परिवर्तन करती है वहां केन्द्रीय रजिस्ट्रार, बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के रजिस्टर में उसके पूर्ववर्ती नाम के स्थान पर नए नाम को प्रविष्ट करेगा और तद्नुसार रजिस्ट्रीकरण के प्रमाणपत्र का संशोधन करेगा ।

14. पते में परिवर्तन-प्रत्येक बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के कारबार का एक मुख्य स्थान होगा और विहित रीति से रजिस्ट्रीकृत पता होगा जिस पर सभी सूचनाएं और संसूचनाएं भेजी जा सकेंगी ।

15. बहुराज्य सहकारी सोसाइटी द्वारा नाम का प्रकाशन-प्रत्येक बहुराज्य सहकारी सोसाइटी-

(क) अपना नाम और अपने रजिस्ट्रीकृत कार्यालय का पता पेंट करेगी या चिपकाएगी और उसे प्रत्येक कार्यालय या ऐसे स्थान के जहां से इसका कारबार चलाया जाता है, बाहर सहजदृश्य स्थान पर, आसानी से सुपाठ्य अक्षरों में पेंट कराकर या चिपकवा कर रखेगी और यदि उसमें लिखी गई लिपि ऐसी भाषाओं की या ऐसी भाषाओं में से किसी एक की नहीं हैं, जो उस परिक्षेत्र में साधारण उपयोग में है तो उस भाषा में या उन भाषाओं में से किसी एक में भी पेंट कराएगी या चिपकवाएगी जा प्रचलन में हैं;

(ख) अपनी मुद्रा पर, अपना नाम सुपाठ्य लिपि में उत्कीर्ण कराएगी; और

(ग) अपना नाम और रजिस्ट्रीकृत कार्यालय का पता, अपने सभी कारबार पत्रों, अपने सभी बिल शीर्षों और पत्र पर्णों तथा अपनी सूचनाओं और अन्य शासकीय प्रकाशनों में वर्णित कराएगी और अपने सभी विनिमय पत्रों, हुण्डियों, वचनपत्रों, पृष्ठांकनों, चेकों, धन के आदेशों या बहुराज्य सहकारी सोसाइटी द्वारा या उसकी ओर से हस्ताक्षर करने के लिए प्रस्तावित मालों और बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के सभी पार्सल, बिलों, बीजकों, प्राप्तियों और प्रत्यय पत्रों पर भी अपना नाम इस प्रकार वर्णित कराएगी ।

16. दायित्व-(1) अपरिसीमित दायित्व वाली किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी को इस अधिनियम के प्रारंभ के पश्चात् रजिस्टर नहीं किया जाएगा:

परन्तु जहां अपरिसीमित दायित्व वाली बहुराज्य सहकारी सोसाइटी इस अधिनियम के प्रारंभ से पूर्व कृत्य कर रही थी, वहां ऐसी सोसाइटी ऐसे प्रारंभ से एक वर्ष की अवधि के भीतर या तो उस रूप में कृत्य करते रहने या उपधारा (2) से उपधारा (4) में विनिर्दिष्ट प्रक्रिया का अनुसरण करके स्वयं को सीमित दायित्व वाली बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के रूप में संपरिवर्तित करने के विकल्प का प्रयोग करेगी ।

(2) इस अधिनियम के उपबंधों और नियमों के अधीन रहते हुए कोई बहुराज्य सहकारी सोसाइटी अपनी उपविधियों का संशोधन करके अपने दायित्व के परिणाम में परिवर्तन कर सकती है ।

(3) जब कोई बहुराज्य सहकारी सोसाइटी अपने दायित्व के परिमाण में परिवर्तन करने के लिए कोई संकल्प पारित करती है तब वह अपने सभी सदस्यों और लेनदारों को लिखित रूप में उसकी सूचना देगी और उपविधियों और संविदा में उसके प्रतिकूल किसी बात के होते हुए भी किसी सदस्य या लेनदार को, उस पर सूचना की तामील की तारीख से एक मास की अवधि के दौरान, यथास्थिति, अपने शेयरों, निक्षेपों या उधारों को वापस लेने का विकल्प होगा

(4) उपधारा (3) में विनिर्दिष्ट अवधि के भीतर यदि कोई सदस्य या लेनदार अपने विकल्प का प्रयोग नहीं करता है, तो यह समझा जाएगा कि उसने ऐसे परिवर्तन के लिए अनुमति दे दी है ।

(5) किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी की उपविधि का ऐसा कोई संशोधन जो उसके दायित्व के परिमाण में परिवर्तन करने वाला है, तब तक रजिस्टर नहीं किया जाएगा या प्रभावी नहीं होगा जब तक कि-

(क) या तो सभी सदस्यों या लेनदारों की उस पर अनुमति प्राप्त न कर ली गई हो; या

(ख) उन सभी सदस्यों और लेनदारों के जो उपधारा (3) में विनिर्दिष्ट विकल्प का उसमें विनिर्दिष्ट अवधि के भीतर प्रयोग करते है, सभी सभी दावों को पूर्ण रूप से चुका न दिया गया हो या अन्यथा तुष्ट न कर दिया गया हो ।

17. बहुराज्य सहकारी सोसाइटियों की आस्तियों और दायित्वों का समामेलन या अंतरण अथवा बहुराज्य सहकारी सोसाइटी का विभाजन-(1) कोई बहुराज्य सहकारी सोसाइटी, इस प्रयोजन के लिए सोसाइटी के साधारण अधिवेशन में उपस्थित और मत देने वाले सदस्यों के कम से कम-तिहाई बहुमत से पारित संकल्प द्वारा, -

(क) अपनी आस्तियों और दायित्वों को पूर्ण रूप से या भागतः किसी अन्य बहुराज्य सहकारी सोसाइटी या किसी सहकारी सोसाइटी को अंतरित कर सकेगी; 

(ख) अपने को दो या अधिक बहुराज्य सहकारी सोसाइटियों में विभाजित कर सकेगी;

(ग) अपने को दो या अधिक सहकारी सोसाइटियों में विभाजित कर सकेगी ।

(2) कोई दो या अधिक बहुराज्य सहकारी सोसाइटियां, ऐसी सोसाइटियों के साधारण अधिवेशन में उपस्थित और मत देने वाले सदस्यों के कम दो-तिहाई बहुमत से पारित संकल्प द्वारा अपने को समामेलित कर सकेंगी और एक नई बहुराज्य सहकारी सोसाइटी बना सकेंगी ।

(3) उपधारा (1) या उपधारा (2) के अधीन किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के संकल्प में, यथास्थिति, अन्तरण या विभाजन या समामेलन की सभी विशिष्टियां होंगी ।

(4) जब कोई बहुराज्य सहकारी सोसाइटी उपधारा (1) या उपधारा (2) के अधीन कोई ऐसा संकल्प पारित करती है, तब वह उसकी लिखित सूचना सभी सदस्यों और लेनदारों को देगी और उपविधियों में या संविदा में उसके प्रतिकूल किसी बात के होते हुए भी, किसी सदस्य या लेनदार को, उस पर सूचना की तामील की तारीख से एक मास की अवधि के दौरान, यथास्थिति, अपने शेयरों, निक्षेपों या उधारों को वापस लेने का विकल्प होगा ।

(5) उपधारा (4) में विनिर्दिष्ट अवधि के भीतर यदि कोई सदस्य या लेनदार अपने संकल्प का प्रयोग नहीं करता है तो यह समझा जाएगा कि उसने संकल्प में किए गए प्रस्तावों के लिए अनुमति दे दी है ।

(6) (क) इस धारा के अधीन किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी द्वारा पारित संकल्प तब तक प्रभावी नहीं होगा जब तक कि उसके सभी सदस्यों और लेनदारों की उस पर अनुमति प्राप्त नहीं कर ली जाती है ।

() बहुराज्य सहकारी सोसाइटी ऐसे सभी सदस्यों और लेनदारों के, जो उपधारा (4) में विनिर्दिष्ट अवधि के भीतर विकल्प का प्रयोग करते हैं; सभी दावों को पूर्ण रूप से चुकाने या अन्यथा तुष्ट करने के लिए व्यवस्था करेगी

  (7) उपधारा (1) के अधीन पारित संकल्प के अनुसार विभाजन द्वारा बनाई गई नई सोसाइटियों के या उपधारा (2) के अधीन पारित संकल्प के अनुसार समामेलन द्वारा बनाई गई नई सोसाइटी के रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन की प्राप्ति पर, केन्द्रीय रजिस्ट्रार, यह समाधन हो जाने पर कि संकल्प उपधारा (6) के अधीन प्रभावी हो गया है, जब तक कि वह ऐसे कारणों से, जो लेखबद्ध किए जाएंगे, ऐसा करने से इंकार करना ठीक नहीं समझता है, यथास्थिति, नई सोसाइटी या सोसाइटियों को और उनकी या उसकी उपविधियों को रजिस्टर करेगा ।

(8) उपधारा (7) के अधीन किसी आदेश के जारी किए जाने पर धारा 21 के उपबंध यावत्शक्य इस प्रकार विभाजित बहुराज्य सहकारी सोसाइटी को या इस प्रकार समामेलित बहुराज्य सहकारी सोसइटियों को लागू होंगे

(9) जहां इस धारा के अधीन किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी द्वारा पारित कोई संकल्प किन्हीं आस्तियों और दायित्वों के अंतरण के संबंध में है वहां वह संकल्प उस समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी, और किसी हस्तांतरण पत्र के बिना अंतरिती में आस्तियों और दायित्वों के निहित होने का पर्याप्त हस्तांतरण पत्र होगा

18. केन्द्रीय रजिस्ट्रार द्वारा कुछ मामलों में सहकारी बैंक के समामेलन या पुनर्गठन की स्कीम का तैयार किया जाना-यदि किसी सहकारी बैंक के संबंध में बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) की धारा 45 की उपधारा (2) के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा अधिस्थगन का कोई आदेश किया गया है तो केन्द्रीय रजिस्ट्रार, रिजर्व बैंक के लिखित पूर्व अनुमोदन से अधिस्थगन की अवधि के दौरान, -

(क) उस सहकारी बैंक के किसी अन्य सहकारी बैंक के साथ समामेलन के लिए; या

(ख) किसी सहकारी बैंक के पुनर्गठन के लिए, स्कीम तैयार कर सकेगा ।

19. समनुषंगी संस्थाओं का संप्रवर्तन-(1) कोई बहुराज्य सहकारी सोसाइटी, अपने साधारण अधिवेशन में उपस्थित और मत देने वाले सदस्यों के बहुमत से पारित संकल्प द्वारा अपने अधीन कथित उदेश्यों को अग्रसर करने के लिए एक या अधिक ऐसी समनुषंगी संस्थाओं को संप्रवर्तित कर सकेगी जो तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन रजिस्टर की जा सकेंगी ।

(2) उपधारा (1) के अधीन संप्रवर्तित कोई समनुषंगी संस्था केवल तभी तक आस्तित्व में रहेगी जब तक कि बहुराज्य सहकारी सोसाइटी का साधारण निकाय इसके आस्तित्व को आवश्यक समझता है:

परन्तु कोई बहुराज्य सहकारी सोसाइटी किसी ऐसी समनुषंगी संस्था को संप्रवर्तित करते समय अपने कथित उद्देश्यों को अग्रसर करने के लिए किए जा रहे कारबार या क्रियाकलाप के सारभूत भाग को अन्तरित या समनुदेशित नहीं करेगी ।

स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए-

(क) कोई संस्था समनुषंगी संस्था समझी जाएगी यदि बहुराज्य सहकारी सोसाइटी-

(i) ऐसी संस्था के प्रबंध तंत्र या निदेशक बोर्ड या शासी निकाय के सदस्यों को नियंत्रित करती है; या

(ii) ऐसी संस्था के साधारण शेयरों के अभिहित मूल्य में आधे से अधिक धारित करती हैं; या

(iii) यदि ऐसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के एक या अधिक सदस्य, यथास्थिति, स्वयं या समनुषंगी संस्था के साथ या अपने संबंधियों सहित मिलकर, उस संस्था में साधारण शेयरों की बहुसंख्या धारण करते हैं;

(ख) किसी समनुषंगी संस्था में कोई भागीदारी फर्म सम्मिलित नहीं होगी ।

(3) ऐसी समनुषंगी संस्था की वार्षिक रिपोर्ट और लेखे प्रत्येक वर्ष संप्रवर्तित करने वाली बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के साधारण अधिवेशन में रखे जाएंगे ।

20. किसी सहकारी बैंक का निक्षेप बीमा और प्रत्यय गांरटी निगम के प्रति दायित्व-धारा 17 या इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध में किसी बात के होते हुए भी, जहां कोई सहकारी बैंक, जो निक्षेप बीमा और प्रत्यय गारण्टी निगम अधिनियम, 1961 (1961 का 47) के अर्थ में बीमाकृत बैंक है, समामेलित या पुनर्गठित किया जाता है और निक्षेप बीमा निगम उस अधिनियम की धारा 17 की उपधारा (2) के अधीन बीमाकृत बैंक के निक्षेपकर्ताओं को संदाय करने के लिए दायी हो गया है, वहां ऐसा बैंक जिसके साथ ऐसा बीमाकृत बैंक समामेलित किया जाता है या ऐसे समामेलन के पश्चात् बनाए गए नए सहकारी बैंक या, यथास्थिति, बीमाकृत बैंक या अंतरिती बैंक, निक्षेप बीमा निगम को निक्षेप बीमा और प्रत्यय गांरटी निगम अधिनियम, 1961 की धारा 21 में निर्दिष्ट परिस्थितियों में और परिमाण तक तथा रीति से प्रतिसंदाय करने के लिए बाध्यता के अधीन होगा ।

21. कुछ मामलों में बहुराज्य सहकारी सोसाइटियों के रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र का रद्द किया जाना-(1) यदि किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी की सम्पूर्ण आस्तियों और दायित्वों का धारा 17 के उपबंधों के अनुसार किसी अन्य बहुराज्य सहकारी सोसाइटी या सहकारी सोसाइटी को अंतरण किया जाता है, तो प्रथमवर्णित बहुराज्य सहकारी सोसाइटी का रजिस्ट्रीकरण रद्द हो जाएगा और सोसाइटी को विघटित हुआ समझा जाएगा और वह निगमित निकाय के रूप में नहीं रह जाएगी ।

(2) जहां दो या अधिक बहुराज्य सहकारी सोसाइटियां नई बहुराज्य सहकारी सोसाइटी में धारा 17 के उपबंधों के अनुसार समामेलित की जाती हैं, वहां समामेलित सोसाइटियों में से प्रत्येक का रजिस्ट्रीकरण नई सोसाइटी का रजिस्ट्रीकरण होने पर रद्द हो जाएगा और समामेलित होने वाली प्रत्येक सोसाइटी को विघटित हुआ समझा जाएगा और वह निगमित निकाय के रूप में विद्यमान नहीं रह जाएगी ।

(3) जहां कोई बहुराज्य सहकारी सोसाइटी अपने को दो या अधिक बहुराज्य सहकारी सोसाइटियों में या दो अथवा अधिक सहकारी सोसाइटियों में धारा 17 के उपबंधों के अनुसार विभाजित कर लेती है, वहां उस सोसाइटी का रजिस्ट्रीकरण नई सोसाइटियों का रजिस्ट्रीकरण होने पर रद्द हो जाएगा और उस सोसाइटी को विद्यटित हुआ समझा जाएगा और वह निगमित निकाय के रूप में विद्यमान नहीं रह जाएगी ।

(4) बहुराज्य सहकारी सोसाइटियों के समामेलन और विभाजन का किसी भी रीति से इस प्रकार के समामेलन या विभाजन के परिणामस्वरूप बनी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी या सोसाइटियों के किसी अधिकार या बाध्यता पर प्रभाव नहीं पड़ेगा या बहुराज्य सहकारी सोसाइटी या सोसाइटियों द्वारा या उनके विरुद्ध कोई विधिक कार्रवाई त्रुटिपूर्ण नहीं होगी और कोई विधिक कार्रवाई जो, यथास्थिति, बहुराज्य सहकारी सोसाइटी या सोसाइटियों द्वारा या उनके विरुद्ध समामेलन या विभाजन के पूर्व जारी रखी गई थी या प्रारम्भ की गई थी, इस प्रकार समामेलन या विभाजन के परिणामस्वरूप बनाई गई बहुराज्य सहकारी सोसाइटी या सोसाइटियों द्वारा या उनके विरुद्ध जारी रखी या प्रारम्भ की जा सकेगी।

22. सहकारी सोसाइटियों का बहुराज्य सहकारी सोसाइटी में संपरिवर्तन-(1) कोई सहकारी सोसाइटी, अपनी उपविधियों का संशोधन करके अपनी अधिकारिता का विस्तार कर सकेगी और अपने को बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के रूप में संपरिवर्तित कर सकेगी:

परन्तु किसी सहकारी सोसाइटी की उपविधियों का ऐसा कोई संशोधन तब तक विधिमान्य नहीं होगा जब तक कि वह केन्द्रीय रजिस्ट्रार द्वारा रजिस्टर न किया गया हो ।

(2) (क) उपविधियों के ऐसे संशोधन के लिए प्रत्येक प्रस्ताव को धारा 11 की उपधारा (4) में अन्तर्विष्ट उपबंधों के अनुसार केन्द्रीय रजिस्ट्रार को भेजा जाएगा ।

(ख) यदि केन्द्रीय रजिस्ट्रार संबंधित राज्यों की सहकारी सोसाइटियों के रजिस्ट्रारों से परामर्श करने के पश्चात् अपना यह समाधान कर लेता है कि ऐसा संशोधन-

(i) एक से अधिक राज्यों से सदस्य होने की अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए है;

(ii) धारा 11 की उपधारा (4) में अन्तर्विष्ट उपबंधों के अनुसार है,

तो वह संशोधन को उसे उसकी प्राप्ति की तारीख से छह मास की अवधि के भीतर रजिस्टर कर सकेगाः

परन्तु कोई भी सहकारी समिति किसी भी आधार पर तब तक बहुराज्य सहकारी सोसाइटी में संपरिवर्तित की गई नहीं समझी जाएगी जब तक कि ऐसी सोसाइटी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के रूप में रजिस्ट्रीकृत नहीं है ।

(3) केंन्द्रीय रजिस्ट्रार रजिस्ट्रीकृत संशोधन की एक प्रति अपने द्वारा हस्ताक्षरित प्रमाणपत्र सहित सहकारी सोसाइटी को भेजेगा और ऐसा प्रमाणपत्र इस बात का निश्चायक साक्ष्य होगा कि संशोधन रजिस्टर कर लिया गया है

(4) जहां केन्द्रीय रजिस्ट्रार किसी सहकारी सोसाइटी की उपविधियों के किसी संशोधन को रजिस्टर करने से इंकार करता है वहां वह इंकार करने के ऐसे आदेश को उसके कारणों सहित सोसाइटी को इंकार करने की तारीख से सात दिन के भीतर विहित रीति से संसूचित करेगा ।

(5) (क) केन्द्रीय रजिस्ट्रार द्वारा उपविधियों के संशोधन रजिस्टर किए जाने के पश्चात् सहकारी सोसाइटी संशोधन के रजिस्ट्रीकरण की तारीख से एक बहुराज्य सहकारी सोसाइटी बन जाएगी ।

(ख) केन्द्रीय रजिस्ट्रार सहकारी सोसाइटी को अपने द्वारा हस्ताक्षरित इस आशय का एक प्रमाणपत्र भेजेगा कि ऐसी सोसाइटी को इस अधिनियम के अधीन एक बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के रूप में रजिस्टर कर लिया गया है और उसकी एक प्रति संबंधित राज्य की सहकारी सोसाइटियों के रजिस्ट्रार को भी भेजेगा ।

(ग) खण्ड (ख) में निर्दिष्ट सहकारी सोसाइटियों का रजिस्ट्रार तदुपरि यह निदेश करते हुए आदेश करेगा कि सोसाइटी केन्द्रीय रजिस्ट्रार द्वारा रजिस्ट्रीकरण की तारीख से उस राज्य में प्रवृत्त सहकारी सोसाइटियों से संबंधित विधि के अधीन सोसाइटी नहीं रह गई है ।

अध्याय 3

परिसंघीय सहकारियों का रजिस्ट्रीकरण और उनके कृत्य

23. परिसंघीय सहकारियों का रजिस्ट्रीकरण-(1) प्रत्येक परिसंघीय सहकारी इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसार रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र अभिप्राप्त करेगी ।

(2) प्रत्येक परिसंघीय सहकारी का उसके साधारण अधिवेशन में उसकी सदस्य सहकारी समिति द्वारा प्रतिनिधित्व किया जाएगा ।

(3) परिसंघीय सहकारियों का वर्गीकरण और उसे लागू अन्य निबन्धन और शर्तें वे होंगी जो विहित की जाएं ।

(4) बहुराज्य सहकारी सोसाइटी को लागू इस अधिनियम के सभी उपबंध, जहां तक हो सके, परिसंघीय सहकारी को लागू होंगे

24. परिसंघीय सहकारी के कृत्य-(1) इस अधिनियम के और तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के उपबंधों के अधीन रहते हुए केन्द्रीय सहकारी समिति स्वावलंबन और पारस्परिक सहायता पर आधारित केन्द्रीय सहकारी समिति या बहुराज्य सहकारी समितियों के रूप में सहकारी सोसाइटियों की स्वैच्छिक विरचना और लोकतांत्रिक कार्यकरण को सुकर बनाने के कृत्यों का निर्वहन कर सकेगी ।

(2) उपधारा (1) में अन्तर्विष्ट पूर्वगामी उपबंधों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना परिसंघीय सहकारी समिति-

(क) सहकारी सिद्धान्तों के अनुपालन को सुनिश्चित कर सकेगी,

(ख) अपनी सदस्य सहकारी समितियों के विचार के लिए आदर्श उपविधियां और नीतियां बना सकेगी,

(ग) विशिष्ट प्रशिक्षण, शिक्षा और डाटा आधारित सूचना दे सकेगी,

(घ) अपनी सदस्य सहकारी समितियों के लिए सापेक्ष महत्व की विकास योजनाएं तैयार करने में अनुसंधान, मूल्यांकन और सहायता कर सकेगी ।

(ङ) सदस्य सहकारी समितियों के बीच सामंजस्यपूर्ण संबंधों में अभिवृद्धि कर सकेगी,

(च) सदस्य सहकारी समितियों की उनके बीच विवादों को निपटाने में सहायता कर सकेगी,

(छ) यदि साधारण निकाय या बोर्ड के संकल्प द्वारा या सदस्य सहकारी समिति की उपविधियों के अधीन विशेष रूप से अपेक्षित हो, तो अपनी सदस्य सहकारी समिति की ओर से कारबार संबंधी सेवाएं कर सकेगी,

(ज) सदस्य सहकारी समिति को प्रबंध विकास सेवाएं उपलब्ध करा सकेगी,

(झ) सदस्य सहकारी समिति द्वारा अनुपालन करने के लिए आचार संहिता विकसित कर सकेगी,

(ञ) सदस्य सहकारी समिति के लिए व्यवहार्यता मानदण्डों का विकास कर सकेगी,

(ट) सदस्य सहकारी समिति को विधिक सहायता और सलाह दे सकेगी,

(ठ) स्वावलंबन के कार्य करने के लिए सदस्य सहकारी समिति की सहायता कर सकेगी,

() बाजार सूचना पद्धति, लोगो ब्रांड संवर्धन, क्वालिटी नियंत्रण और प्रौद्योगिकी प्रोन्नयन विकसित कर सकेगी

अध्याय 4

बहुराज्य सहकारी सोसाइटियों के सदस्य तथा उनके कर्तव्य, अधिकार और दायित्व

25. ऐसे व्यक्ति जो सदस्य हो सकते हैं-(1) निम्नलिखित को छोड़कर, कोई भी व्यक्ति बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के सदस्य के रूप में सम्मिलित नहीं किया जाएगा, अर्थात्ः-

() कोई व्यष्टि, जो भारतीय संविदा अधिनियम, 1872 (1872 का 9) की धारा 11 के अधीन संविदा करने के लिए सक्षम है;

(ख) कोई बहुराज्य सहकारी सोसाइटी या कोई सहकारी सोसाइटी;

(ग) केन्द्रीय सरकार;

(घ) कोई राज्य सरकार;

() राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम अधिनियम, 1962 (1962 का 26) के अधीन स्थापित राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम;

(च) सरकार के स्वामित्व के अधीन या उसके द्वारा नियंत्रित कोई अन्य निगम;

(छ) कम्पनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) की धारा 617 में परिभाषित कोई सरकारी कंपनी; और

(ज) ऐसे वर्ग या ऐसे वर्गों के व्यक्ति या व्यक्तियों का संगम जो केन्द्रीय रजिस्ट्रार द्वारा बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के स्वरूप और क्रियाकलापों को ध्यान में रखते हुए अनुज्ञात किया जाए ।

(2) कोई व्यष्टिक व्यक्ति किसी राष्ट्रीय सहकारी सोसाइटी या केन्द्रीय सहकारी समिति के सदस्य के रूप में सम्मिलित किए जाने का पात्र नहीं होगा ।

(3) ऐसा कोई व्यक्ति, जो बहुराज्य सहकारी सोसाइटी की सदस्यता के लिए पात्र है, उसके द्वारा आवेदन किए जाने पर ऐसी सोसाइटी के सदस्य के रूप में सम्मिलित किया जा सकेगा ।

(4) बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के सदस्य के रूप में सम्मिलित किए जाने के लिए प्रत्येक आवेदन ऐसी सोसाइटी द्वारा, आवेदन की प्राप्ति की तारीख से, चार मास की अवधि के भीतर, निपटाया जाएगा और आवेदन पर सोसाइटी का विनिश्चय ऐसे विनिश्चय की तारीख से पन्द्रह दिन के भीतर आवेदक को सूचित किया जाएगा:

परन्तु यदि आवेदन का निपटारा पूर्वोक्त अवधि के भीतर नहीं किया जाता है या आवेदन की प्राप्ति की तारीख से पूर्वोक्त चार मास की अवधि की समाप्ति से पन्द्रह दिन की अवधि के भीतर विनिश्चय सूचित नहीं किया जाता है, तो बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के बारे में यह समझा जाएगा कि उसने ऐसी अवधि की समाप्ति की तारीख को, आवेदक को सम्मिलित किए जाने से इंकार करने वाला विनिश्चय किया है ।

(5) किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के प्रत्येक सदस्य का ऐसी सोसाइटी के हितों और उद्देश्यों को संप्रवर्तित करने और संरक्षित करने का कर्तव्य होगा ।

26. सोसाइटी का नाममात्र का या सहयुक्त सदस्य-बहुराज्य सहकारी सोसाइटी, यदि उसकी उपविधियों में इसके लिए उपबंध है, किसी व्यक्ति को नाममात्र के या सहयुक्त सदस्य के रूप में सम्मिलित कर सकेगी:

परन्तु ऐसा कोई नाममात्र का या सहयुक्त सदस्य ऐसी सोसाइटी के शेयरों में अभिदाय करने का हकदार नहीं होगा या उसके प्रबंध तंत्र में कोई हित नहीं रखेगा जिसके अन्तर्गत मत देने, बोर्ड के सदस्य के रूप में निर्वाचित होने या साधारण अधिवेशनों में भाग लेने का अधिकार आता है ।

27. सदस्यों के लिए शैक्षिक पाठ्यक्रम-(1) प्रत्येक बहुराज्य सहकारी सोसाइटी अपने सदस्यों, निदेशकों और कर्मचारियों के लिए सहकारी शिक्षा कार्यक्रम आयोजित करेगी ।

(2) प्रत्येक बहुराज्य सहकारी सोसाइटी सहकारी शिक्षा कार्यक्रम के लिए निधि दे सकेगी ।

28. सम्यक् संदाय किए जाने तक सदस्यों द्वारा अधिकारों का प्रयोग किया जाना-बहुराज्य सहकारी सोसाइटी का कोई सदस्य किसी सदस्य के अधिकारों का प्रयोग तब तक नहीं करेगा जब तक कि उसने सदस्यता के संबंध में सोसाइटी को ऐसा संदाय कर दिया हो या सोसाइटी में ऐसा हित अर्जित कर लिया हो जो उपविधियों में विनिर्दिष्ट किया जाए

29. बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के सदस्य के लिए निरर्हता-कोई व्यक्ति, बहुराज्य सहकारी सोसाइटी का सदस्य होने के लिए पात्र नहीं होगा, यदि- 

(क) उसका कारबार ऐसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के कारबार के प्रतिकूल है या उसका प्रतियोगी है; या

() उसने लगातार दो वर्षों तक उपविधियों में विनिर्दिष्ट न्यूनतम स्तर से कम की सेवाओं का उपयोग किया है; या 

(ग) उसने बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के लगातार तीन साधारण अधिवेशनों में भाग नहीं लिया है और ऐसी अनुपस्थिति को साधारण अधिवेशन में सदस्यों द्वारा माफ नहीं किया गया है; या

(घ) उसने ऐसी सोसाइटी की उपविधियों के अधीन बहुराज्य सहकारी सोसाइटी को संदत्त की जाने वाली किसी रकम के संदाय में व्यतिक्रम किया है ।

30. सदस्यों का निष्कासन-(1) कोई बहुराज्य सहकारी सोसाइटी, इस प्रयोजन के लिए किए गए साधारण अधिवेशन में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से पारित संकल्प द्वारा किसी सदस्य को ऐसे कार्यों के लिए निष्कासित कर सकेगी, जो सोसाइटी के समुचित कार्यकरण के लिए हानिकर हैं:

परन्तु संबंधित सदस्य को तब तक निष्कासित नहीं किया जाएगा जब तक कि उसे इस विषय में अभ्यावेदन करने का युक्तियुक्त अवसर न दे दिया गया हो ।

(2) बहुराज्य सहकारी सोसाइटी का कोई ऐसा सदस्य, जिसे उपधारा (1) के अधीन निष्कासित किया गया है, ऐसे निष्कासन की तारीख से तीन वर्ष की अवधि तक उस सोसाइटी के सदस्य के रूप में पुन: सम्मिलित किए जाने का पात्र नहीं होगा

31. सदस्यों के मत-किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के प्रत्येक सदस्य का, जिसके अंतर्गत ऐसा सदस्य भी है, जो ऐसी सोसाइटी का कर्मचारी है, सोसाइटी के कार्यकलाप में एकमत होगा:

परन्तु-

(क) ऐसा सदस्य जो ऐसी सोसाइटी का कर्मचारी है-

(i) ऐसी सोसाइटी के बोर्ड के किसी सदस्य के निर्वाचन में;

(ii) ऐसी सोसाइटी की उपविधियां बनाने या उसमें कोई संशोधन करने के लिए बुलाए गए किसी साधारण अधिवेशन में,

मतदान करने का हकदार नहीं होगा;

(ख) मतों के बराबर होने की दशा में, अध्यक्ष का निर्णायक मत होगा;

(ग) जहां धारा 25 की उपधारा (1) के खण्ड (ख) से खण्ड (छ) तक में निर्दिष्ट प्राधिकरणों में से कोई प्राधिकरण, बहुराज्य सहकारी सोसाइटी या सहकारी सोसाइटी किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी की सदस्य है, वहां ऐसे प्राधिकरण या सोसाइटी द्वारा इस अधिनियम और नियमों में अन्तर्विष्ट उपबंधों के अनुसार बोर्ड में नामनिर्दिष्ट प्रत्येक व्यक्ति का एक मत होगा;

(घ) कोई भी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी, जिसके सदस्यों के अंतर्गत सहकारी सोसाइटियां और अन्य बहुराज्य सहकारी सोसाइटियां भी हैं, ऐसी सहकारी सोसाइटियों या बहुराज्य सहकारी सोसाइटियों की सदस्यता और उनके द्वारा किए जा रहे कारबार के विस्तार और अन्य सुसंगत परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए साम्यापूर्ण मतदान प्रणाली के लिए अपनी उपविधियों में उपबंध कर सकती है ।

32. मतदान करने की रीति-बहुराज्य सहकारी सोसाइटी का प्रत्येक सदस्य अपना मतदान स्वयं करेगा और किसी सदस्य को परोक्षी द्वारा मतदान करने के लिए अनुज्ञात नहीं किया जाएगा:

परन्तु कोई बहुराज्य सहकारी सोसाइटी या ऐसी सहकारी सोसाइटी या कोई अन्य संगठन जो किसी अन्य बहुराज्य सहकारी सोसाइटी का सदस्य है, धारा 38 की उपधारा (2) और नियमों के उपबंधों के अधीन रहते हुए अपने प्रतिनिधि को अपनी ओर से उस ऐसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के कार्यकलाप में मतदान के लिए नियुक्त कर सकेगी

33. शेयरों के धारण करने पर निर्बन्धन-धारा 25 की उपधारा (1) के खंड (ग) से खण्ड (छ) तक में निर्दिष्ट प्राधिकरणों या किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी या सहकारी सोसाइटी से भिन्न कोई अन्य सदस्य सोसाइटी की कुल शेयर पूंजी के ऐसे भाग से, जो ऐसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के नियमों या उपविधियों में विहित किया जाए (जो किसी भी दशा में उसके पांचवें भाग से अधिक नहीं होगा) अधिक शेयर धारण नहीं करेगा ।

34. शेयरों या हित के अंतरण पर निर्बन्धन-किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी की पूंजी में किसी सदस्य के शेयर या हित का अन्तरण, अधिकतम शेयर या हित धारण करने के बारे में ऐसी शतों के अधीन रहते हुए, जो धारा 33 में विनिर्दिष्ट की जाएं, किया जाएगा ।

35. शेयरों का मोचन-(1) धारा 25 की उपधारा (1) के खण्ड () से खण्ड () तक में निर्दिष्ट प्राधिकरणों में से किसी प्राधिकरण द्वारा किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी में धारण किए गए शेयर ऐसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटियों की उपविधियों के अनुसार मोचनीय होंगे और उस दशा में, जहां उपविधियों में इसकी बाबत कोई उपबन्ध नहीं है, ऐसी रीति से मोचनीय होंगे, जो किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी और ऐसे प्राधिकरण के बीच तय की जाए

(2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट शेयरों का मोचन शेयरों के अंकित मूल्य पर होगा ।

36. सदस्यों की मृत्यु हो जाने पर हितों का अंतरण-(1) किसी सदस्य की मृत्यु हो जाने पर कोई बहुराज्य सहकारी सोसाइटी मृत सदस्य के शेयर या हित को इस निमित्त बनाई गई उपविधियों के अनुसार नामनिर्दिष्ट व्यक्ति को अंतरित कर सकेगी या यदि इस प्रकार कोई नामनिर्दिष्ट व्यक्ति नहीं है तो ऐसे व्यक्ति को जो बोर्ड को मृत सदस्य का वारिस या विधिक प्रतिनिधि प्रतीत हो, या यथास्थिति, ऐसे नामनिर्देशिती, वारिस या विधिक प्रतिनिधि को, नियमों के अनुसार अभिनिश्चित किए गए ऐसे सदस्य के शेयर या हित के मूल्य को जताने वाली रकम का संदाय कर सकेगी :

परन्तु कोई ऐसा अंतरण या संदाय, यथास्थिति, नामनिर्देशिती, वारिस या विधिक प्रतिनिधि की सम्मति से ही किया जाएगा, अन्यथा नहीं ।

(2) कोई बहुराज्य सहकारी सोसाइटी जब तक कि वह किसी सदस्य की मृत्यु के छह मास के भीतर किसी सक्षम न्यायालय के किसी आदेश द्वारा निवारित न की गई हो, यथास्थिति, ऐसे नामनिर्देशिती, वारिस या विधिक प्रतिनिधि को सोसाइटी से मृत व्यक्ति को शोध्य सभी अन्य धनराशि का संदाय करेगी ।

(3) इस धारा के उपबंधों के अनुसार किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी द्वारा किए गए सभी अंतरण और संदाय किसी अन्य व्यक्ति द्वारा सोसाइटी से की गई किसी मांग के विरुद्ध विधिमान्य और प्रभावी होंगे ।

37. भूतपर्व सदस्य का दायित्व और मृत सदस्य की सम्पदा-(1) उपधारा (2) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के किसी भूतपूर्व सदस्य का दायित्व या मृत सदस्य की सम्पदा सोसाइटी के उन ऋणों के लिए जो, - 

(क) किसी भूतपूर्व सदस्य की दशा में, उस तारीख को विद्यमान थे जिसको वह सदस्य नहीं रह गया था;

() किसी मृत सदस्य की दशा में, उसकी मृत्यु की तारीख को विद्यमान थे, ऐसी तारीख से दो वर्ष की अवधि के लिए बनी रहेगी  

(2) उपधारा (1) में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, जहां किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी का धारा 86 के अधीन परिसमापन किए जाने का आदेश किया गया है वहां ऐसे भूतपूर्व सदस्य का दायित्व या ऐसे मृत सदस्य की सम्पदा, जो परिसमापन के आदेश की तारीख से ठीक पूर्ववर्ती दो वर्ष के भीतर सदस्य नहीं रह गया था या उसकी मृत्यु हो गई थी, तब तक बनी रहेगी जब तक कि सम्पूर्ण परिसमापन कार्यवाहियां पूरी नहीं हो जाती हैं, किन्तु ऐसे दायित्व का विस्तार सोसाइटी के केवल उन ऋणों तक ही होगा जो, यथास्थिति, उसकी सदस्यता की समाप्ति या मृत्यु की तारीख को विद्यमान थे ।

अध्याय 5

बहुराज्य सहकारी सोसाइटियों का निदेशन और प्रबंध

38. साधारण निकाय का गठन, उसकी शक्तियां और उसके कृत्य-(1) किसी बहुराज्य सोसाइटी का साधारण निकाय ऐसी सोसाइटी के सभी सदस्यों से मिलकर बनेगा:

परन्तु जहां किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी की उपविधियों में ऐसी उपविधियों के अनुसार निर्वाचित या चयन किए गए सोसाइटी के सदस्यों के प्रतिनिधियों को मिलाकर छोटे निकाय के गठन के लिए उपबंध किया गया है, वहां वह छोटा निकाय, साधारण निकाय की ऐसी शक्तियों का प्रयोग करेगा, जो सोसाइटी की उपविधियों में विहित या विनिर्दिष्ट की जाएं ।

(2) इस अधिनियम, नियम और उपविधियों के उपबंधों के अधीन रहते हुए किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी का अन्तिम प्राधिकार उसके सदस्यों के साधारण निकाय में निहित होगा:

परन्तु इस उपधारा में अन्तर्विष्ट कोई बात बोर्ड या किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के किसी अधिकारी द्वारा इस अधिनियम या नियम या उपविधियों द्वारा ऐसे बोर्ड या ऐसे अधिकारी को प्रदत्त किसी शक्ति के प्रयोग पर प्रभाव नहीं डालेगी

(3) जहां किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के साधारण निकाय या बोर्ड के किसी अधिवेशन में किसी सहकारी सोसाइटी या दूसरी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी का प्रतिनिधित्व किया जाना है, वहां ऐसी सहकारी सोसाइटी या दूसरी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी का प्रतिनिधित्व ऐसे अधिवेशन में, यथास्थिति, यदि ऐसी सहकारी सोसाइटी या दूसरी बहुराज्य सहकारी के केवल अध्यक्ष या प्रधान या मुख्य कार्यपालक द्वारा या बोर्ड के सदस्य द्वारा यदि ऐसा सदस्य बोर्ड द्वारा इस प्रकार प्राधिकृत किया जाता है, किया जाएगा और जहां ऐसी सहकारी सोसाइटी या दूसरी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी का किन्हीं कारणों से कोई बोर्ड नहीं है वहां ऐसी सहकारी सोसाइटी या दूसरी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के प्रशासक द्वारा प्रतिनिधित्व किया जाएगा, चाहे वह किसी नाम से ज्ञात हो :

परन्तु जहां किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी की उपविधियां साधारण निकाय के किसी अधिवेशन में या ऐसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के निदेशक बोर्ड में किन्हीं अन्य संस्थाओं के प्रतिनिधित्व का उपबन्ध करती हैं वहां ऐसी संस्थाओं का उसके नामनिर्देशिती द्वारा प्रतिनिधित्व किया जाएगा ।

39. साधारण निकाय का वार्षिक साधारण अधिवेशन-(1) प्रत्येक बहुराज्य सहकारी सोसाइटी का बोर्ड, ऐसी अवधि के भीतर जो विहित की जाए और तत्स्थानी वर्ष की समाप्ति के पश्चात् अधिक से अधिक छह मास के भीतर, निम्नलिखित प्रयोजन के लिए विहित रीति में वार्षिक साधारण अधिवेशन बुलाएगा-

(क) लेखाओं के संपरीक्षित विवरण पर विचार करने के लिए;  

(ख) संपरीक्षा रिपोर्ट और वार्षिक रिपोर्ट पर विचार करने के लिए;

(ग) संपरीक्षा अनुपालन रिपोर्ट पर विचार करने के लिए;

(घ) शुद्ध लाभों के निपटारे के लिए;

(ङ) प्रचालन घाटे, यदि कोई हों, के पुनर्विलोकन के लिए;

(च) विशिष्ट आरक्षितियों और अन्य निधियों के सृजन के लिए;

(छ) वार्षिक बजट के अनुमोदन के लिए;

(ज) आरक्षिति और अन्य निधियों के वास्तविक उपयोजन के पुनर्विलोकन के लिए;

(झ) लम्बी अवधि की सापेक्ष महत्व की योजना और वार्षिक कार्यपालन योजना के अनुमोदन के लिए;

(ञ) समनुषंगी संस्था, यदि कोई हो, की वार्षिक रिपोर्ट और लेखाओं के पुनर्विलोकन के लिए;

(ट) सदस्यों के निष्कासन के लिए;

(ठ) ऐसे कर्मचारियों की सूची के लिए जो बोर्ड के सदस्यों या मुख्य कार्यपालक के संबंधी हैं;

(ड) उपविधियों का संशोधन करने के लिए, यदि कोई हों;

(ढ) बोर्ड के सदस्यों और अधिकारियों के लिए आचार-संहिता बनाने के लिए;

(ण) बोर्ड के सदस्यों, यदि कोई हों, का निर्वाचन ।

(2) जहां किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी का बोर्ड उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट अवधि के भीतर वार्षिक साधारण अधिवेशन बुलाने में असमर्थ रहता है वहां केन्द्रीय रजिस्ट्रार या इस निमित्त उसके द्वारा प्राधिकृत कोई व्यक्ति, उक्त उपधारा में वर्णित अवधि की समाप्ति की तारीख से नब्बे दिन की अवधि के भीतर ऐसा वार्षिक अधिवेशन बुलाने के लिए सक्षम होगा और ऐसे अधिवेशन पर उपगत व्यय सोसाइटी द्वारा वहन किया जाएगा ।

(3) किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के प्रत्येक वार्षिक साधारण अधिवेशन में, बोर्ड सोसाइटी के समक्ष पूर्ववर्ती वर्ष के दौरान बोर्ड के किसी सदस्य को या बोर्ड के किसी सदस्य के पति या पत्नी या उसके पुत्र या पुत्री को दिए गए उधारों या उधार पर दी गई वस्तुओं का, यदि कोई हो, या बोर्ड के किसी सदस्य के विरुद्ध या उसके पति या पत्नी के विरुद्ध या उसके पुत्र या पुत्री के विरुद्ध बकाया का ब्यौरा देने वाला विवरण प्रस्तुत करेगा ।

40. साधारण निकाय का विशेष साधारण अधिवेशन-(1) मुख्य कार्यपालक, बोर्ड के निदेश पर, किसी भी समय सोसाइटी का विशेष साधारण अधिवेशन बुला सकेगा और केन्द्रीय रजिस्ट्रार या ऐसे सदस्य या सदस्यों से अथवा सदस्यों की कुल संख्या के ऐसे अनुपात से जो उपविधियों में उपबंधित हो, लिखित अध्यपेक्षा की प्राप्ति के पश्चात् एक मास के भीतर ऐसा अधिवेशन बुलाएगा ।

(2) यदि किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी का विशेष साधारण अधिवेशन उपधारा (1) में निर्दिष्ट अध्यपेक्षा के अनुसार नहीं बुलाया जाता है तो केन्द्रीय रजिस्ट्रार या उसके द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किसी व्यक्ति को ऐसा अधिवेशन बुलाने की शक्ति होगी और उस अधिवेशन के बारे में यह समझा जाएगा कि वह मुख्य कार्यपालक द्वारा उस उपधारा के उपबंधों के अनुसार बुलाया गया है और केन्द्रीय रजिस्ट्रार आदेश दे सकेगा कि ऐसा अधिवेशन बुलाने में उपगत व्यय का संदाय सोसाइटी की निधियां में से या ऐसे व्यक्ति या व्यक्तियों द्वारा, जो केन्द्रीय रजिस्ट्रार की राय में विशेष साधारण अधिवेशन को बुलाने से इंकार करने या बुलाने में असफल रहने के लिए जिम्मेदार था या थे, किया जाएगा ।

41. निदेशक बोर्ड-(1) इस अधिनियम और नियमों के उपबंधों के अधीन रहते हुए, प्रत्येक बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के लिए एक निदेशक बोर्ड होगा जिसमें उतनी संख्या में सदस्य होंगे जितनी उपधारा (3) में विनिर्दिष्ट हो

(2) बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के सदस्य, साधारण अधिवेशन में संकल्प द्वारा, निदेशकों का निर्वाचन करेंगे जो बोर्ड के सदस्य होंगे ।

(3) बोर्ड में निदेशकों की संख्या उतनी होगी जो उपविधियों में विनिर्दिष्ट की जाए:

परंतु किसी भी दशा में निदेशकों की अधिकतम संख्या इक्कीस से अधिक नहीं होगी:

परंतु यह और कि बोर्ड, पहले परंतुक में विनिर्दिष्ट इक्कीस निदेशकों के अतिरिक्त दो निदेशक सहयोजित कर सकेगा:

परंतु यह भी कि राष्ट्रीय सहकारी सोसाइटियों के कृत्यकारी निदेशक भी बोर्ड के सदस्य होंगे और पहले परंतुक में विनिर्दिष्ट निदेशकों की कुल संख्या की गणना ऐसे सदस्यों को छोड़कर की जाएगी ।

42. प्रबंध संबंधी विनिश्चय करने की प्रक्रिया में कर्मचारियों का सहयोजन-प्रत्येक बहुराज्य सहकारी सोसाइटी ऐसे स्तर पर या ऐसे निकायों में, जो उपविधियों में या इस संबंध में जारी किए गए अनुदेशों में विनिर्दिष्ट किए जाएं, प्रबंध संबंधी विनिश्चय करने की प्रक्रिया में कर्मचारियों के प्रतिनिधियों के सहयोजन के लिए ऐसी प्रक्रिया बनाएगी, जो उपविधियों में या ऐसी सोसाइटियों के प्रशासनिक अनुदेशों में विनिर्दिष्ट की जाए ।

43. बोर्ड का सदस्य होने के लिए निरर्हता-(1) किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी का कोई सदस्य या राष्ट्रीय सहकारी सोसाइटी की सदस्य सोसाइटी का नामनिर्देशिती ऐसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी या राष्ट्रीय सहकारी सोसाइटी या किसी अन्य ऐसी सहकारी सोसाइटी के जिससे ऐसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी संबद्ध है, बोर्ड के रूप में चुने जाने या सदस्य होने का पात्र नहीं होगा, यदि ऐसा सदस्य- 

(क) किसी सक्षम न्यायालय द्वारा दिवालिया या विकृतचित न्यायनिर्णीत किया गया है;

(ख) सोसाइटी के साथ किसी संविदा के लाभों से संबंधित है या उसमें भाग लेता है;

(ग) नैतिक अधमता अंतर्वलित करने वाले किसी अपराध के लिए सिद्धदोष ठहराया गया है;

(घ) सोसाइटी के अधीन कोई लाभ का पद या हैसियत धारण करता है:

परंतु मुख्य कार्यपालक या सोसाइटी का ऐसा पूर्णकालिक कर्मचारी जिसे केन्द्रीय सरकार द्वारा समय-समय पर अधिसूचित किया जाए या कोई व्यक्ति, जिसे ऐसी सोसाइटी के कर्मचारियों द्वारा ऐसी सोसाइटी के बोर्ड में उनका प्रतिनिधित्व करने के लिए निर्वाचित किया गया हो, ऐसे बोर्ड का सदस्य चुने जाने या होने के लिए पात्र होगा

() ऐसे निर्वाचन या नियुक्ति की तारीख के ठीक पूर्ववर्ती बारह मास से कम अवधि के लिए सोसाइटी का सदस्य रहा है;

(च) ऐसी सोसाइटी द्वारा, जिसका वह सदस्य है, किए जाने वाले किसी प्रकार के कारबार में हित रखता है;

(छ) ऐसी सोसाइटी से, जिसका वह सदस्य है, उधार लेता है या उधार पर माल लेता है या अन्यथा ऐसी सोसाइटी के प्रति ऋणी है और ऐसी सोसाइटी द्वारा उसको जारी की गई व्यतिक्रम की सूचना की प्राप्ति के पश्चात् उसने-

(i) यथास्थिति, ऐसे उधार या ऋण के प्रतिसंदाय में या उधार पर लिए गए माल की कीमत के संदाय में, ऐसे प्रतिसंदाय या संदाय के लिए नियत तारीख के भीतर या जहां ऐसी तारीख बढ़ाई गई है वहां इस प्रकार बढ़ाई गई तारीख के भीतर, जो किसी भी दशा में इस प्रकार बढ़ाई गई तारीख से छह मास से अधिक नहीं होगी, व्यतिक्रम किया है; या

(ii) जब ऐसा उधार या ऋण या उधार पर लिए गए माल की कीमत किस्तों में संदत्त की जानी है तब किसी किस्त के संदाय में व्यतिक्रम किया है और व्यतिक्रम की रकम या उसका कोई भाग उसके ऐसे व्यतिक्रम की तारीख से छह मास की समाप्ति पर, असंदत्त रह गया है:

परंतु बोर्ड का कोई ऐसा सदस्य, जो इस खंड के अधीन सदस्य के रूप में पद धारण नहीं कर रहा है, उस बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के, जिसका वह सदस्य था, बोर्ड के सदस्य के रूप में पुनः निर्वाचन के लिए या किसी अन्य बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के बोर्ड में निर्वाचन के लिए, उस तारीख से, जिसको वह पद पर नहीं रह गया था, एक वर्ष की अवधि के लिए पात्र नहीं होगा;

(ज) वह ऐसा व्यक्ति है, जिसके विरुद्ध किसी डिक्री, विनिश्चय या आदेश के अधीन शोध्य कोई रकम इस अधिनियम के अधीन वसूली के लिए लंबित है;

() किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी की ओर से या उसके विरुद्ध या ऐसी किसी अन्य बहुराज्य सहकारी सोसाइटी की, जो पूर्ववर्ती सोसाइटी की सदस्य है, ओर से या उसके विरुद्ध विधि व्यवसायी के रूप में रखा गया है या नियोजित है

स्पष्टीकरण-इस खंड के प्रयोजनों के लिए विधि व्यवसायी" का वही अर्थ है जो अधिवक्ता अधिनियम, 1961 (1961 का 25) की धारा 2 की उपधारा (1) के खंड (झ) में है;

(ञ) इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध के लिए सिद्धदोष ठहराया गया है;

(ट) धारा 29 के अधीन सदस्य होने के लिए निरर्हित है;

(ठ) धारा 30 के अधीन सदस्य के रूप में निष्कासित किया गया है;

() बोर्ड के निरंतर तीन अधिवेशनों में अनुपस्थित रहा है और ऐसी अनुपस्थिति के लिए बोर्ड द्वारा माफी नहीं दी गई है;

(ढ) साधारण निकाय के निरंतर तीन अधिवेशनों में अनुपस्थित रहा है और ऐसी अनुपस्थिति के लिए साधारण निकाय के सदस्यों द्वारा माफी नहीं दी गई है ।

(2) कोई व्यक्ति बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के बोर्ड के सदस्य के रूप में निर्वाचित होने के लिए पांच वर्ष की अवधि तक पात्र नहीं होगा यदि ऐसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी का बोर्डः-

(क) धारा 45 के अधीन बोर्ड के निर्वाचन करवाने में; या

(ख) धारा 39 के अधीन वार्षिक साधारण अधिवेशन बुलाने में; या

(ग) वित्तीय विवरण तैयार करने और उसे वार्षिक साधारण अधिवेशन में प्रस्तुत करने में, असफल रहता है ।

44. कतिपय परिस्थितियों में अध्यक्ष या प्रधान या उपाध्यक्ष या उपप्रधान का पद धारण करने का निषेध-(1) बोर्ड का कोई सदस्य, किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के अध्यक्ष या प्रधान या उपाध्यक्ष या उपप्रधान के रूप में निर्वाचित किए जाने के लिए पात्र नहीं होगा यदि ऐसा सदस्य केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार में मंत्री हो ।

(2) बोर्ड का कोई सदस्य, किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के अध्यक्ष या प्रधान के रूप में निर्वाचित किए जाने के लिए पात्र नहीं होगा यदि उसने इस रूप में लगातार दो अवधियों के दौरान, चाहे संपूर्ण या भागरूप में, पद धारण किया है:

परंतु ऐसा कोई सदस्य जिसने लगातार एक संपूर्ण अवधि के लिए अध्यक्ष या प्रधान का पद धारण नहीं किया है, इस रूप में उस पद के निर्वाचन के लिए पुनः पात्र होगा ।

 स्पष्टीकरण-जहां इस अधिनियम के प्रारंभ पर अध्यक्ष या प्रधान का पद धारण करने वाला कोई सदस्य ऐसे प्रारंभ के पश्चात् उस पद पर पुनः निर्वाचित हुआ है, वहां उसके द्वारा इस धारा के प्रयोजन के लिए ऐसे निर्वाचन से पूर्व एक अवधि के लिए पद धारण किया हुआ माना जाएगा ।

45. बोर्ड के सदस्यों का निर्वाचन-(1) किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के बोर्ड के लिए निर्वाचन कराने का उत्तरदायित्व विद्यमान बोर्ड का होगा ।

(2) बोर्ड के सदस्यों का निर्वाचन ऐसी रीति से, जो विहित की जाए, गुप्त मतदान द्वारा किया जाएगा ।

(3) बोर्ड के सदस्यों का निर्वाचन बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के सदस्यों के साधारण अधिवेशन में किया जाएगा

(4) बोर्ड के निर्वाचित सदस्य, यदि ऐसी सोसाइटी की उपविधियां अनुज्ञात करें, पुनर्निर्वाचन के लिए पात्र होंगे ।

(5) बोर्ड के निर्वाचित सदस्यों की पदावधि निर्वाचन की तारीख से पांच वर्ष से अनधिक की ऐसी अवधि होगी जो बहुराज्य सहकारी सोसाइटी की उपविधियों में विनिर्दिष्ट की जाए:

परंतु निर्वाचित सदस्य इस अधिनियम या नियमों या उपविधियों के उपबंधों के अधीन अपने उत्तरवर्तियों के निर्वाचित या नामनिर्दिष्ट किए जाने तक पद धारण किए रहेंगे और अपने पद का भार ग्रहण करते रहेंगे ।

(6) जहां बोर्ड, बोर्ड के सदस्यों का निर्वाचन करवाने में असफल रहता है वहां केन्द्रीय रजिस्ट्रार, निर्वाचन उस तारीख से जिसको ऐसे निर्वाचन होने थे, नब्बे दिन की अवधि के भीतर करवाएगा ।

(7) कोई भी व्यक्ति किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के बोर्ड के सदस्य के रूप में निर्वाचित किए जाने के लिए तब तक पात्र नहीं होगा जब तक कि वह उस सोसाइटी के साधारण निकाय का सदस्य न हो ।

(8) केन्द्रीय रजिस्ट्रार द्वारा निर्वाचन कराए जाने का व्यय उक्त बहुराज्य सहकारी सोसाइटी द्वारा वहन किया जाएगा

(9) केन्द्रीय सरकार बोर्ड के सदस्यों के निर्वाचन से संबंधित विषयों के लिए उपबंध करने के लिए या उनका विनियमन करने के लिए साधारणतया नियम बना सकेगी ।

46. सहकारी सोसाइटी में पद धारण करना-इस अधिनियम में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, कोई भी व्यक्ति दो से अधिक बहुराज्य सहकारी सोसाइटियों के बोर्ड के अध्यक्ष या प्रधान का अथवा उपाध्यक्ष या उपप्रधान का पद एक ही समय पर धारण करने का पात्र नहीं होगा ।

47. साधारण निकाय द्वारा निर्वाचित सदस्यों का हटाया जाना-किसी बोर्ड का कोई ऐसा निर्वाचित सदस्य, जिसने बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के हितों के प्रतिकूल कार्य किया है, केन्द्रीय रजिस्ट्रार से प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर या अन्यथा बोर्ड के, साधारण निकाय के अपने अधिवेशन में उपस्थित और मत देने वाले सदस्यों के दो-तिहाई से अन्यून बहुमत द्वारा पारित संकल्प द्वारा हटाया जा सकेगा:

परंतु संबंधित सदस्य को तब तक नहीं हटाया जाएगा जब तक कि उसे उस विषय में अभ्यावेदन करने का युक्तियुक्त अवसर न दे दिया गया हो ।

48. बोर्ड में केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार का नामनिर्देशिती-(1) जहां केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार ने किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी की शेयरपूंजी में अभिदाय किया है वहां, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार को अथवा केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार द्वारा प्राधिकृत किसी व्यक्ति को बोर्ड में उतनी संख्या में व्यक्तियों को निम्नलिखित आधार पर उसके सदस्यों के रूप में नामनिर्दिष्ट करने का अधिकार होगा, अर्थात्ः-

(क) जहां केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार द्वारा धृत निर्गमित साधारण शेयरपूंजी की कुल रकम कुल निर्गमित साधारण शेयरपूंजी के छब्बीस प्रतिशत से कम है, बोर्ड का एक सदस्य;

(ख) जहां केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार द्वारा धृत निर्गमित साधारण शेयरपूंजी की कुल रकम कुल निर्गमित साधारण शेयरपूंजी के छब्बीस प्रतिशत या उससे अधिक है किंतु इक्यावन प्रतिशत से कम है, बोर्ड के दो सदस्य;

(ग) जहां केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार द्वारा धृत निर्गमित साधारण शेयरपूंजी की कुल रकम कुल निर्गमित शेयरपूंजी का इक्यावन प्रतिशत या उससे अधिक है, बोर्ड के तीन सदस्य:

परंतु इस प्रकार नामनिर्दिष्ट व्यक्तियों की संख्या बोर्ड के सदस्यों की कुल संख्या के एक-तिहाई से अधिक नहीं होगी:

परंतु यह और कि जहां केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार ने, बहुराज्य सहकारी सोसाइटी द्वारा जारी किए गए डिबेंचरों के मूल धन का प्रतिसंदाय और उन पर ब्याज का संदाय प्रत्याभूत किया है अथवा बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के ऋणों और उधारों के मूल और उधारों पर ब्याज के प्रतिसंदाय को प्रत्याभूत किया है अथवा बहुराज्य सहकारी सोसाइटी को अनुदानों के रूप में या अन्यथा कोई सहायता दी है वहां, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार या केन्द्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किसी व्यक्ति को, ऐसी सोसाइटी के बोर्ड में किसी व्यक्ति को उस रीति से जो विहित की जाए, नामनिर्दिष्ट करने का अधिकार होगा ।

(2) इस धारा के अधीन नामनिर्दिष्ट कोई व्यक्ति उस सरकार के प्रसादपर्यन्त पद धारण करेगा, जिसके द्वारा उसे इस प्रकार नामनिर्देशित किया गया है ।

49. बोर्ड की शक्तियां और कृत्य-(1) बोर्ड ऐसी सभी शक्तियों का प्रयोग कर सकेगा जो इस अधिनियम के अधीन उसके कृत्यों को करने के प्रयोजन के लिए आवश्यक या समीचीन हों ।

(2) पूर्वगामी शक्तियों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसी शक्ति में निम्नलिखित शक्ति भी होगी, अर्थात्ः-

(क) सदस्यों को सम्मिलित करना;

() संगठनात्मक उद्देश्यों का निर्वचन करना और उन उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए विनिर्दिष्ट लक्ष्य निर्धारित करना;

(ग) संक्रियाओं को समय-समय पर आंकना;

(घ) सोसाइटी के मुख्य कार्यपालक और ऐसे अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति करना जिन्हें मुख्य कार्यपालक द्वारा नियुक्त किया जाना अपेक्षित नहीं है;

() बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के कर्मचारियों की नियुक्ति, वेतनमानों, भत्तों और सेवा की अन्य शर्तों को, जिनके अंतर्गत ऐसे कर्मचारियों के विरुद्ध अनुशासनिक कार्रवाइयां भी हैं, विनियमित करने के लिए उपबंध कराना;

() वार्षिक रिपोर्ट, वार्षिक वित्तीय विवरण, वार्षिक योजना और बजट को साधारण निकाय के अनुमोदनार्थ रखना;

(छ) संपरीक्षा और अनुपालन रिपोर्ट पर विचार करना और उन्हें साधारण निकाय के समक्ष रखना; 

(ज) स्थावर संपत्ति का अर्जन या व्ययन करना;

(झ) अन्य सहकारियों में सदस्यता का पुनरीक्षण करना;

(ञ) वार्षिक और अनुपूरक बजट का अनुमोदन करना;

(ट) निधियां जुटाना;

(ठ) सदस्यों को ऋण मंजूर करना; और

(ड) ऐसे अन्य उपाय करना या ऐसे अन्य कार्य करना जो इस अधिनियम या उपविधियों के अधीन विहित किए जाएं या अपेक्षित हों या साधारण निकाय द्वारा प्रत्यायोजित किए जाएं ।

50. बोर्ड के अधिवेशन-(1) मुख्य कार्यपालक, बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के अध्यक्ष या सभापति की प्रेरणा पर बोर्ड के अधिवेशन बुलाएगा ।

(2) किसी एक वर्ष में बोर्ड के अधिवेशनों की कुल संख्या और ऐसे अधिवेशनों का स्थान वह होगा जो उपविधियों में विनिर्दिष्ट किया जाए:

परंतु प्रत्येक तीन मास में बोर्ड का कम से कम एक अधिवेशन अवश्य होगा:

परंतु यह और कि बोर्ड द्वारा अपने अधिवेशन में दो से अधिक व्यक्ति आमंत्रित नहीं किए जा सकेंगे ।

(3) सभापति, या किसी कारणवश यदि वह बोर्ड के अधिवेशन में उपस्थित होने में असमर्थ है तो अधिवेशन में उपस्थित बोर्ड के सदस्यों द्वारा अपने में से चुना गया बोर्ड का कोई अन्य सदस्य अधिवेशन का सभापतित्व करेगा

51. मुख्य कार्यपालक-(1) प्रत्येक बहुराज्य सहकारी सोसाइटी का एक मुख्य कार्यपालक होगा, चाहे वह किसी भी पदाभिधान से ज्ञात हो, जिसे बोर्ड द्वारा नियुक्त किया जाएगा और वह ऐसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी का पूर्णकालिक कर्मचारी होगा ।

(2) मुख्य कार्यपालक, बोर्ड और कार्यपालक समिति और ऐसी अन्य समितियों या उपसमितियों का सदस्य होगा जो धारा 53 की उपधारा (1) के अधीन गठित की जाएं ।

(3) जहां केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार बहुराज्य सहकारी सोसाइटी की साधारण शेयरपूंजी या कुल शेयरों का इक्यावन प्रतिशत या उससे अधिक धारित करती है वहां मुख्य कार्यपालक को संदेय वेतन और भत्ते तथा सेवा के अन्य निबंधन और शर्तें जिनमें पेंशन, उपदान और अन्य सेवानिवृत्ति फायदे भी है, ऐसी होंगी जो विहित की जाएं

52. मुख्य कार्यपालक की शक्तियां और कृत्य-मुख्य कार्यपालक, बोर्ड के साधारण पर्यवेक्षण, निदेशन और नियंत्रण के अधीन रहते हुए नीचे विनिर्दिष्ट शक्तियों का प्रयोग और कृत्यों का निर्वहन करेगा, अर्थात्ः-

(क) बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के कारबार का दिन प्रतिदिन का प्रबंध;

(ख) बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के लेखाओं का संचालन और नकद राशि की सुरक्षित अभिरक्षा का प्रबंध करने के लिए जिम्मेदार होना;

(ग) बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के लिए और उसकी ओर से दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करना;

(घ) बहुराज्य सहकारी सोसाइटी की विभिन्न पुस्तकों और अभिलेखों को उचित रूप से बनाए रखने के लिए और इस अधिनियम, नियमों और उपविधियों के उपबंधों के अनुसार कालिक विवरणों और विवरणियों के ठीक से तैयार किए जाने, समय से प्रस्तुत किए जाने के लिए प्रबंध करना;

() बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के साधारण निकाय, बोर्ड और कार्यकारिणी समिति और धारा 53 की उपधारा (1) के अधीन गठित अन्य समितियों या उपसमितियों के अधिवेशन बुलाना और ऐसे अधिवेशनों के लिए उचित अभिलेख रखना;

(च) बहुराज्य सहकारी सोसाइटी में उपविधियों के अनुसार पदों पर नियुक्तियां करना;

(छ) नीतियों, उद्देश्यों और योजनाओं के बनाने में बोर्ड की सहायता करना;

() बोर्ड को कालिक जानकारी देना जो बहुराज्य सहकारी सोसाइटी की संक्रियाओं और कृत्यों को आंकने के लिए आवश्यक होः

() ऐसा व्यक्ति नियुक्त करना जो बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के निमित्त वाद लाएगा या जिस पर वाद लाया जाएगा;

() वित्तीय वर्ष की समाप्ति के तीस दिन के भीतर बोर्ड के अनुमोदनार्थ प्रारूप वार्षिक रिपोर्ट और वित्तीय विवरण प्रस्तुत करना;

(ट) ऐसे अन्य कर्तव्यों का पालन करना और ऐसी अन्य शक्तियों का प्रयोग करना जो बहुराज्य सहकारी सोसाइटी की उपविधियों में विनिर्दिष्ट की जाएं ।

53. बोर्ड की समितियां-(1) बोर्ड, ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए जो विहित की जाएं, ऐसी कार्यपालक समिति, अन्य समितियों या उपसमितियों का गठन कर सकेगा जो आवश्यक प्रतीत हों:

परंतु कार्यपालक समिति से भिन्न अन्य समितियां या उपसमितियां तीन से अधिक नहीं होंगी ।

(2) कार्यपालक समिति या उपधारा (1) में निर्दिष्ट अन्य समिति या उपसमिति ऐसे कृत्यों का पालन करेगी जो उसे ऐसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी द्वारा उपविधियों के अनुसार सौंपे जाएं ।

54. अभिलेख, आदि का कब्जा प्राप्त करना-(1) यदि-

(क) किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के अभिलेखों, जिसमें रजिस्टर और लेखाबहियां भी सम्मिलित हैं, को बिगाड़े जाने या उन्हें नष्ट किए जाने की संभावना है या ऐसी सोसइटी की निधियों या अन्य संपत्ति का दुर्विनियोग किए जाने की संभावना है; या

(ख) सोसाइटी के साधारण अधिवेशन में बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के बोर्ड का पुनर्गठन किया जाना है; या

(ग) धारा 86 के अधीन किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी का परिसमापन किए जाने के लिए आदेश किया जाता है और बोर्ड के पद छोड़ने वाले सदस्य सोसाइटी के अभिलेखों और सम्पत्ति का भार ऐसे व्यक्तियों को जो ऐसे भार रखे हुए हैं या ग्रहण करने के हकदार हैं, देने से इन्कार करते हैं,

तो मुख्य कार्यपालक, ऐसे मजिस्ट्रेट को जिसकी अधिकारिता के भीतर ऐसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी कार्य करती है, सोसाइटी के अभिलेखों और सम्पत्ति को प्राप्त करने के लिए आवेदन कर सकेगा ।

(2) उपधारा (1) के अधीन किसी आवेदन की प्राप्ति पर मजिस्ट्रेट किसी पुलिस अधिकारी को जो उपनिरीक्षक से नीचे की पंक्ति का न हो, वारंट द्वारा किसी ऐसे स्थान में जहां ऐसे अभिलेख या संपत्ति रखी जाती है या जहां उसके रखे जाने का विश्वास हो, प्रवेश करने और तलाशी लेने के लिए और ऐसे अभिलेखों और संपत्ति का अभिग्रहण करने के लिए प्राधिकृत कर सकेगा और इस प्रकार अभिगृहीत अभिलेखों और संपत्ति को, यथास्थिति, नए बोर्ड या समापक को दे दिया जाएगा ।

(3) प्रत्येक ऐसी तलाशी और ऐसा अभिग्रहण दंड प्रकिया संहिता, 1973 (1974 का 2) के उपबंधों के अनुसार किया जाएगा

अध्याय 6

बहुराज्य सहकारी सोसाइटियों के विशेषाधिकार

55. सदस्यों के शेयर या अभिदाय या हित के संबंध में भार और मुजरा-किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी का, किसी सदस्य या भूतपूर्व सदस्य या मृत सदस्य की पूंजी में शेयर या अभिदाय या हित पर और उसके निक्षेपों पर, तथा किसी सदस्य या भूतपूर्व सदस्य को संदेय किसी लाभांश, बोनस या लाभों पर या मृत सदस्य की संपदा पर किसी ऐसे ऋण के संबंध में, जो ऐसे सदस्य या भूतपूर्व सदस्य से या ऐसे मृत सदस्य की संपदा से सोसाइटी  को शोध्य है, भार होगा तथा वह किसी सदस्य या भूतपूर्व सदस्य या मृत सदस्य को संपदा के नाम जमा की गई या संदेय किसी राशि का ऐसे ऋण के संदाय में या उस मद्दे मुजरा कर सकेगी ।

56. शेयर या अभिदाय या हित का कुर्क हो सकना-(1) धारा 55 के उपबंधों के अधीन रहते हुए, किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी की पूंजी में किसी सदस्य या भूतपूर्व सदस्य या मृत सदस्य का शेयर या अभिदाय या हित, ऐसे सदस्य द्वारा उपगत किसी ऋण या दायित्व की बाबत न्यायालय की किसी डिक्री या आदेश के अधीन, कुर्क या विक्रय नहीं किया जा सकेगा और दिवाला संबंधी किसी विधि के अधीन कोई शासकीय समनुदेशिती या रिसीवर ऐसे शेयर या अभिदाय या हित पर किसी दावे का हकदार नहीं होगा या वह उस पर कोई दावा नहीं रखेगा ।

(2) किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी की ऐसी आरक्षित निधि, या डूबंत ऋण आरक्षितियां या कर्मचारियों की भविष्य निधि, जो ऐसी सोसाइटी द्वारा इस अधिनियम और उपविधियों के उपबंधों के अनुसार विनिहित की गई है, सोसाइटी द्वारा उपगत किसी ऋण या दायित्व की बाबत किसी न्यायालय की किसी डिक्री या आदेश के अधीन कुर्क नहीं की जा सकेगी ।

57. सदस्यों का रजिस्टर-सदस्यों या शेयरों का कोई रजिस्टर या सूची, जो किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी द्वारा रखी गई हो, उसमें प्रविष्ट निम्नलिखित विशिष्टियों का प्रथमदृष्ट्या साक्ष्य होगी, अर्थात्ः-

() वह तारीख, जिसको किसी व्यक्ति का नाम उस रजिस्टर या सूची में सदस्य के रूप में प्रविष्ट किया गया था; और 

(ख) वह तारीख, जिसको ऐसा कोई व्यक्ति सदस्य नहीं रह गया था ।

58. प्रविष्टि की प्रति का साक्ष्य के रूप में ग्राह्य होना-(1) किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी को किसी पुस्तक में जो उसके कामकाज के अनुक्रम में नियमित रूप से रखी जाती है, किसी प्रविष्टि की कोई प्रति, यदि वह ऐसी रीति से, जो उपविधियों में विहित की जाए, प्रमाणित की गई हो, तो किसी वाद या विधिक कार्यवाही में ऐसी प्रविष्टि के होने के प्रथमदृष्ट्या साक्ष्य के रूप में ली जाएगी और उसे ऐसी प्रत्येक दशा में, जिसमें वह उस विस्तार तक जहां तक मूल प्रविष्टि स्वयं ग्राह्य है, उसमें अभिलिखित विषयों, संव्यवहारों और लेखाओं के साक्ष्य के रूप में ग्रहण की जाएगी

(2) किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के किसी अधिकारी और किसी ऐसे अधिकारी को, जिसके कार्यालय में बहुराज्य सहकारी सोसाइटी की पुस्तकें समापन के पश्चात् रखी गई हैं, किसी ऐसी विधिक कार्यवाही में जिसकी पक्षकार सोसाइटी या समापक नहीं है, सोसाइटी की ऐसी पुस्तकों या दस्तावेजों को पेश करने के लिए, जिनकी अन्तर्वस्तुएं इस धारा के अधीन साबित की जा सकती हैं या उनमें अभिलिखित विषयों, संव्यवहारों और लेखाओं को साबित करने के लिए साक्षी के रूप में हाजिर होने के लिए, न्यायालय द्वारा या विशेष मामले के लिए बनाए गए मध्यस्थ द्वारा किए गए आदेश के सिवाय, विवश नहीं किया जाएगा ।

59. लिखतों के अनिवार्य रजिस्ट्रीकरण से छूट-रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1908 (1908 का 16) की धारा 17 की उपधारा (1) के खंड (ख) और खंड (ग) की कोई भी बात निम्नलिखित को लागू नहीं होगी, अर्थात्ः-

(क) किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के शेयरों से संबंधित किसी लिखत को इस बात के होते हुए भी कि ऐसी सोसाइटी की आस्तियां पूर्णतः या अंशतः स्थावर संपत्ति से मिलकर बनी हैं, अथवा

(ख) ऐसी किसी सोसाइटी द्वारा जारी किए गए डिबेंचरों को, जो किसी स्थावर संपत्ति में कोई अधिकार, हक या हित सृजित, घोषित, समनुदेशित, परिसीमित या निर्वापित न करते हों, सिवाय उस दशा के जिसमें वह उसके धारक को किसी ऐसी रजिस्ट्रीकृत लिखत द्वारा दी गई प्रतिभूति का हकदार बनाती है जिसके द्वारा सोसाइटी ने अपनी संपूर्ण स्थावर संपत्ति या उसके किसी भाग को या उसमें के किसी हित को ऐसे डिबेंचर धारकों के फायदे के लिए न्यासियों के पास बंधक रख दिया है, हस्तांतरित कर दिया है या अन्यथा अंतरित कर दिया है, अथवा

(ग) किसी ऐसी सोसाइटी द्वारा जारी किए गए किसी डिबेंचर पर किसी पृष्ठांकन या उस डिबेंचर के अंतरण को ।

60. कुछ मामलों में बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के दावों को पूरा करने के लिए वेतन से कटौती-(1) तत्समय प्रवृत्त किसी विधि में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी का कोई सदस्य सोसाइटी के पक्ष में यह उपबंध करते हुए किसी करार का निष्पादन कर सकेगा कि उसका नियोजक उसके वेतन या मजदूरी का संवितरण करते समय उसे संदेय वेतन या मजदूरी में से ऐसी रकम की, जो करार में विनिर्दिष्ट की जाए, प्रति मास कटौती करने के लिए सक्षम होगा और इस प्रकार कटौती की गई रकम का सोसाइटी को शोध्य किसी ऋण या अन्य मांग की तुष्टि के लिए संदाय करेगा ।

(2) ऐसे करार के निष्पादन पर, सदस्यों के वेतन और मजदूरी का संवितरण करते हुए नियोजक, यदि बहुराज्य सहकारी सोसाइटी, लिखित अध्यपेक्षा द्वारा ऐसी अपेक्षा करे और जब तक सोसाइटी यह सूचित न कर दे कि ऐसे संपूर्ण ऋण का संदाय कर दिया गया है या अन्य मांग की पूर्ति कर दी गई है तो, करार के अनुसार कटौती करेगा और इस प्रकार कटौती की गई रकम का सोसाइटी को ऐसी तारीख से जिसको कटौती की गई है, चौदह दिन की अवधि के भीतर संदाय करेगा मानो वह मजदूरी संदाय अधिनियम, 1936 (1936 का 4) के अधीन, उस दिन अपेक्षित संदेय वेतन या मजदूरी का भाग हो, और ऐसा संदाय नियोजक की कटौती की गई रकम के संदाय के लिए उसके दायित्व की बाबत विधिमान्य उन्मोचन होगा ।

(3) यदि उपधारा (2) के अधीन की गई अध्यपेक्षा की प्राप्ति के पश्चात् वेतन या मजदूरी का संवितरण करने वाला नियोजक किसी समय अध्यपेक्षा में विनिर्दिष्ट रकम की, संबंधित सदस्य को संदेय वेतन या मजदूरी में से कटौती करने में असफल रहता है, या इस प्रकार कटौती की गई रकम का बहुराज्य सहकारी सोसाइटी को भेजने में व्यतिक्रम करता है, तो सोसाइटी ऐसे नियोजक से ऐसी किसी रकम को भू-राजस्व की बकाया के रूप में वसूल के लिए हकदार होगी और ऐसे नियोजक से इस प्रकार शोध्य रकम, ऐसे नियोजक के दायित्व के संबंध में बकाया वेतन या मजदूरी के बराबर की पूर्विकता वाली श्रेणी में होगी ।

61. बहुराज्य सहकारी सोसाइटियों को सरकारी सहायता-उस समय प्रवृत्त किसी विधि में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, केन्द्रीय सरकार या कोई राज्य सरकार, किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी से अनुरोध प्राप्त होने पर और सहकारी आंदोलन को बढ़ाने की दृष्टि से, -

(क) किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी की शेयर पूंजी में अभिदाय कर सकेगी;

(ख) किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी को उधार या अग्रिम दे सकेगी;

(ग) किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी द्वारा जारी किए गए डिबेंचरों के मूल धन के प्रतिसंदाय और उस पर ब्याज के संदाय के लिए प्रत्याभूति दे सकेगी;

(घ) किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी की शेयर पूंजी के और उस पर लाभांशों के ऐसी दर से, जो केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट की जाए, प्रतिसंदाय के लिए प्रत्याभूति दे सकेगी;

(ङ) किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी को दिए गए उधारों और अग्रिमों के मूल के प्रतिसंदाय और उस पर ब्याज के संदाय के लिए प्रत्याभूति दे सकेगी;

() किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी को किसी अन्य रूप में वित्तीय सहायता, जिसके अंतर्गत सहायकी भी है, दे सकेगी; और

() किसी अन्य बहुराज्य सहकारी सोसाइटी को ऐसे निबंधनों और शर्तों पर जो विहित की जाएं, सहायता दे सकेगी

अध्याय 7

बहुराज्य सहकारी सोसाइटियों की सम्पत्ति और निधियां

62. निधियों का लाभ के रूप में विभाजित किया जाना-(1) किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी की शुद्ध लाभों से भिन्न, निधियों का कोई भाग, बोनस या लाभांशों के रूप में विभाजित नहीं किया जाएगा या अन्यथा उसके सदस्यों में वितरित नहीं किया जाएगा ।

(2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के शुद्ध लाभ की संगणना, लाभ उपार्जित करने वाली सोसाइटी की बाबत किसी वर्ष के कुल लाभों में से, ऐसी रकम के संबंध में जो अतिशोध्य हैं, प्रोद्भूत और प्रोद्भूत होने वाले ब्याज की, स्थापना प्रभारों, ऋणों और निक्षेपों पर संदेय ब्याज, लेखापरीक्षा फीसों, कार्यकरण व्ययों, जिनके अंतर्गत मरम्मत, भाड़ा, कर और अवक्षयण भी हैं, उस समय प्रवृत्त बोनस के संदाय से संबंधित विधि के अधीन कर्मचारियों को संदेय बोनस और ऐसे बोनस के लिए समकरण निधि, आय-कर के संदाय के लिए उपबंध की और आय-कर अधिनियम, 1961 (1961 का 43) के अधीन अनुमोदित संदान करके, विकास रिबेट, विकास निधि, डूबंत ऋण निधि, कीमत उतार चढ़ाव निधि, लाभांश समकरण निधि, शेयर पूंजी मोचन निधि, विनिधान उतार-चढ़ाव निधि के लिए उपबंध करके, कर्मचारियों के लिए सेवानिवृत्ति फायदों के लिए उपबंध और ऐसे डूबंत ऋणों और हानियों के लिए उपबंध करके या उन्हें अपलिखित करके जिन्हें लाभ में से सृजित किसी निधि के विरुद्ध समायोजित न किया गया हो, कटौती करके की जाएगी :

परंतु ऐसी सोसाइटी किसी वर्ष के शुद्ध लाभों में, पूर्ववर्ती वर्षों में प्रोद्भूत किंतु वस्तुतः उस वर्ष में वसूल किए गए ब्याज को जोड़ सकेगी:

परंतु यह और कि ऐसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटियों की दशा में, जिनकी शेयर पूंजी न हो, व्यय से अतिशेष आय को शुद्ध लाभ नहीं माना जाएगा और ऐसे अतिशेष को उपविधियों के अनुसार बरता जाएगा ।

 63. शुद्ध लाभों का व्ययन-(1) बहुराज्य सहकारी सोसाइटी, किसी वर्ष में अपने शुद्ध लाभों में से-

(क) पच्चीस प्रतिशत से अन्यून रकम का आरक्षित निधि में अंतरण करेगी; और

(ख) एक प्रतिशत भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ लिमिटेड, नई दिल्ली द्वारा अनुरक्षित सहकारी शिक्षा निधि में ऐसी रीति से जमा करेगी जो विहित की जाए; और

(ग) दस प्रतिशत से अनधिक रकम अकल्पित हानियों को पूरा करने के लिए आरक्षित निधि में जमा की जाएगी ।

(2) ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए, जो विहित की जाएं शुद्ध लाभों के अतिशेष का निम्नलिखित प्रयोजनों में से सभी या किन्हीं के लिए उपयोग किया जा सकेगा, अर्थात्ः-

(क) सदस्यों को उनकी समादत्त शेयर पूंजी पर विहित सीमा से अनधिक की दर से लाभांश का संदाय;

() ऐसी विशेष निधियों का, जिनके अंतर्गत शिक्षा निधि भी हैं, जो उपविधियों में विनिर्दिष्ट की जाएं, गठन या उनमें अभिदाय;

(ग) शुद्ध लाभों के पांच प्रतिशत से अनधिक रकमों का सहकारी आंदोलन के विकास से संबंधित किसी प्रयोजन के लिए या पूर्त विन्यास अधिनियम, 1890 (1890 का 6) की धारा 2 में यथापरिभाषित प्रयोजनों के लिए संदान;

() उपविधियों में विनिर्दिष्ट सीमा तक और रीति से बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के कर्मचारियों को अनुग्रहपूर्वक रकम का संदाय

64. निधियों का विनिधान-कोई बहुराज्य सहकारी सोसाइटी अपनी निधियों को-

(क) किसी सहकारी बैंक, राज्य सहकारी बैंक, सहकारी भूमि विकास बैंक या केन्द्रीय सहकारी बैंक में; या

(ख) भारतीय न्यास अधिनियम, 1882 (1882 का 2) की धारा 20 में विनिर्दिष्ट प्रतिभूतियों में से किसी में; या

(ग) किसी अन्य बहुराज्य सहकारी सोसाइटी या सहकारी सोसाइटी के शेयरों या प्रतिभूतियों में; या

(घ) किसी सहायक संस्था या किसी अन्य संस्था के शेयरों, प्रतिभूतियों या आस्तियों में; या

(ङ) किसी अन्य बैंक में; या

(च) ऐसे अन्य ढंग से जो उपविधियों में विहित किया जाए, विनिहित या निक्षिप्त कर सकेगी ।

स्पष्टीकरण-खंड (ङ) के प्रयोजनों के लिए बैंक" से बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) की धारा 5 के खंड (ग) में यथापरिभाषित कोई बैंककारी कंपनी अभिप्रेत है और इसके अंतर्गत निम्नलिखित हैं-

(i) भारतीय स्टेट बैंक अधिनियम, 1955 (1955 का 23) के अधीन गठित भारतीय स्टेट बैंक;

(ii) भारतीय स्टेट बैंक (समनुषंगी बैंक) अधिनियम, 1959 (1959 का 38) की धारा 2 के खंड (ट) में यथापरिभाषित कोई समनुंषगी बैंक;

(iii) बैंककारी कंपनी (उपक्रमों का अर्जन और अंतरण) अधिनियम, 1970 (1970 का 5) की धारा 3 के अधीन गठित कोई तत्स्थानी नया बैंक, या बैंककारी कंपनी (उपक्रमों का अर्जन और अंतरण) अधिनियम, 1980 (1980 का 40) की धारा 3 के अधीन गठित कोई तत्स्थानी नया बैंक ।

65. अभिदायों पर निर्बन्धन-कोई बहुराज्य सहकारी सोसाइटी, किसी ऐसी संस्था को जिसका उद्देश्य किसी राजनैतिक दल के हित को आगे बढ़ाना है, प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः धन के रूप में या किसी किस्म का कोई अभिदाय नहीं करेगी ।

66. उधारों पर निर्बंधन-(1) किसी सहकारी बैंक से भिन्न कोई बहुराज्य सहकारी सोसाइटी किसी सदस्य को उसके शेयर की प्रतिभूति पर या किसी गैर सदस्य की प्रतिभूति पर उधार नहीं देगी ।

(2) उपधारा (1) में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, कोई बहुराज्य सहकारी सोसाइटी किसी निक्षेपकर्ता को उसके निक्षेप की गई प्रतिभूति पर उधार दे सकेगी ।

67. उधार लेने पर निर्बन्धन-(1) कोई बहुराज्य सहकारी सोसाइटी बाह्य स्रोतों से निक्षेप, उधार और अनुदान केवल उसी सीमा तक और ऐसी शर्तों के अधीन प्राप्त करेगी, जो उपविधियों में विनिर्दिष्ट की जाए:

परंतु किसी वित्तीय वर्ष के दौरान प्राप्त निक्षेपों और उधारों की कुल रकम अभिदत्त शेयर पूंजी और संचित आरक्षितियों की राशि के दस गुणा से अधिक नहीं होगी:

परंतु यह और कि अभिदत्त शेयर पूंजी और संचित आरक्षितियों की कुल राशि संगणित करते समय संचित हानियों को उसमें से घटा दिया जाएगा ।

(2) बहुराज्य सहकारी सोसाइटी, उपधारा (1) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, अपने उद्देश्यों की पूर्ति के लिए ऐसे निबंधनों और शर्तों पर जिन पर परस्पर संविदा की जाए, निधियां स्वीकार कर सकेगी या उधार ले सकेगी ।

(3) कोई बहुराज्य सहकारी सोसाइटी, अपने उद्देश्यों की पूर्ति के लिए साधन एकत्रित करने के लिए अपनी समादत्त शेयर पूंजी के पच्चीस प्रतिशत के बराबर तक तत्समय प्रवृत्त किन्हीं उपबंधों के अधीन रहते हुए असंप्रवर्तनीय डिबेंचर या अन्य लिखतें निर्गमित कर सकेगी ।

68. गैर-सदस्यों के साथ अन्य संव्यवहारों पर निर्बन्धन-धारा 66 या धारा 67 में जैसा उपबंधित है उसके सिवाय, किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी का किसी सदस्य से भिन्न किसी व्यक्ति के साथ संव्यवहार, ऐसे प्रतिषेधों और निर्बंधनों के, यदि कोई हों, जो उपविधियों में विहित किए जाएं, अधीन होगा ।

69. अभिदायी भविष्य निधि-(1) कर्मचारी भविष्य निधि और प्रकीर्ण उपबंध अधिनियम, 1952 (1952 का 19) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, कोई बहुराज्य सहकारी सोसाइटी, जिसमें इतने और ऐसे वर्ग के कर्मचारी हैं, जो विहित किए जाएं, अपने कर्मचारियों की प्रसुविधाओं के लिए अभिदायी भविष्य निधि स्थापित कर सकेगी, जिसमें सोसाइटी की उपविधियों के अनुसार कर्मचारियों और सोसाइटी द्वारा किए गए सभी अभिदाय जमा किए जाएंगे

(2) उपधारा (1) के अधीन किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी द्वारा स्थापित किसी अभिदायी भविष्य निधि में जमा धन-  

(क) का उपयोग सोसाइटी के कारबार में नहीं किया जाएगा;

(ख) सोसाइटी की आस्तियों का भाग नहीं होगा;

() कुर्क नहीं किया जा सकेगा या किसी न्यायालय अथवा अन्य प्राधिकारी की किसी अन्य प्रक्रिया के अधीन नहीं होगा

अध्याय 8

संपरीक्षा, जांच, निरीक्षण और अधिभार

70. संपरीक्षकों की नियुक्ति और पारिश्रमिक-(1) प्रत्येक बहुराज्य सहकारी सोसाइटी, अपने लेखाओं की प्रतिवर्ष कम से कम एक बार उपधारा (2) में निर्दिष्ट किसी संपरीक्षक से संपरीक्षा कराएगी ।

(2) प्रत्येक बहुराज्य सहकारी सोसाइटी, प्रत्येक वार्षिक साधारण अधिवेशन में एक या अधिक संपरीक्षक नियुक्त करेगी जो उस अधिवेशन की समाप्ति से आगामी वार्षिक अधिवेशन की समाप्ति तक पद धारण करेगा/करेंगे और नियुक्ति के सात दिन के भीतर इस प्रकार नियुक्त प्रत्येक संपरीक्षक को उसकी प्रज्ञापना देगी: 

परंतु ऐसा/ऐसे संपरीक्षक केन्द्रीय रजिस्ट्रार द्वारा अनुमोदित संपरीक्षकों के पैनल से या बहुराज्य सहकारी सोसाइटी द्वारा तैयार किए गए संपरीक्षकों के पैनल से, यदि कोई हैं, नियुक्त किया जाएगा/किए जाएंगे ।

(3) उपधारा (1) के अधीन नियुक्त किया गया प्रत्येक संपरीक्षक, बहुराज्य सहकारी सोसाइटी से अपनी नियुक्ति की प्रज्ञापना प्राप्त होने के तीस दिन के भीतर केन्द्रीय रजिस्ट्रार को लिखित में सूचित करेगा कि उसने नियुक्ति स्वीकार कर ली है या स्वीकार करने से इंकार कर दिया है ।

(4) सेवानिवृति होने वाला संपरीक्षक, तभी पुनः नियुक्त किया जाएगा जबः-        

(क) वह पुनर्नियुक्ति के लिए अर्हित हो;

() उसने बहुराज्य सहकारी सोसाइटी को पुनर्नियुक्त किए जाने के लिए अपनी इच्छा की सूचना लिखित में दे    दी हो;

(ग) सदस्यों के साधारण अधिवेशन में उसके स्थान पर किसी और व्यक्ति को नियुक्त करने वाला या अभिव्यक्ततः यह उपबंध करने वाला एक संकल्प पास किया गया हो कि उसे पुनर्नियुक्त किया जाएगा; या

(घ) जहां सेवानिवृत्त होने वाले संपरीक्षक के स्थान पर किसी व्यक्ति या व्यक्तियों को नियुक्त करने के लिए आशयित किसी संकल्प की सूचना दी गई हो और, यथास्थिति, उस व्यक्ति या उन सभी व्यक्तियों की मृत्यु, असमर्थता या निरर्हता के कारण संकल्प पर कार्रवाई नहीं की जा सकती है ।

(5) जहां किसी वार्षिक साधारण अधिवेशन में कोई संपरीक्षक नियुक्त या पुनर्नियुक्त न किया गया हो वहां केन्द्रीय रजिस्ट्रार रिक्ति को भरने के लिए किसी व्यक्ति को नियुक्त कर सकेगा ।

(6) किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी का पहला संपरीक्षक या संपरीक्षक, बोर्ड द्वारा सोसाइटी के रजिस्ट्रीकरण की तारीख से एक मास के भीतर नियुक्त किया जाएगा/किए जाएंगे और इस प्रकार नियुक्त किया गया/किए गए संपरीक्षक पहले वार्षिक साधारण अधिवेशन की समाप्ति तक पद धारण करेगा/करेंगे:

परंतु यह कि-

(क) बहुराज्य सहकारी सोसाइटी, किसी साधारण अधिवेशन में ऐसे किसी संपरीक्षक या सभी या किन्हीं ऐसे संपरीक्षकों को हटा सकेगी और उसके/उनके स्थान पर किसी अन्य ऐसे व्यक्ति या व्यक्तियों को नियुक्त कर सकेगी जिसे/जिन्हें बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के किसी सदस्य द्वारा नियुक्ति के लिए नामनिर्दिष्ट किया गया हो और जिसके नामनिर्देशन की सूचना बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के सदस्यों को अधिवेशन की तारीख से कम-से-कम चौदह दिन पूर्व दे दी गई हो; और 

(ख) यदि बोर्ड इस उपधारा के अधीन अपनी शक्तियों का प्रयोग करने में असफल रहता है तो बहुराज्य सहकारी सोसाइटी साधारण अधिवेशन में पहले संपरीक्षक या संपरीक्षकों को नियुक्त कर सकेगी ।

(7) (क) बहुराज्य सहकारी सोसाइटी संपरीक्षक के पद में किसी आकस्मिक रिक्ति को भर सकेगी किंतु जब तक ऐसी रिक्ति बनी रहती है तब तक शेष संपरीक्षक, यदि कोई हो कार्य करेगा/करेंगे:

परंतु जहां ऐसी रिक्ति किसी संपरीक्षक के त्यागपत्र से कारित हुई हो वहां वह रिक्ति बहुराज्य सहकारी सोसाइटी द्वारा केवल साधारण अधिवेशन में ही भरी जाएगी ।

() आकस्मिक रिक्ति पर नियुक्त कोई संपरीक्षक आगामी वार्षिक साधारण अधिवेशन की समाप्ति तक पद धारण करेगा

(8) इस धारा के अधीन नियुक्त कोई संपरीक्षक, बहुराज्य सहकारी सोसाइटी द्वारा उसकी पदावधि की समाप्ति से पूर्व साधारण अधिवेशन में हटाया जा सकेगा ।

(9) बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के संपरीक्षकों का पारिश्रमिक-

(क) बोर्ड या केन्द्रीय रजिस्ट्रार द्वारा नियुक्त किसी संपरीक्षक की दशा में, यथास्थिति, बोर्ड या केंन्द्रीय रजिस्ट्रार द्वारा नियत किया जाएगा; और

(ख) खंड (क) के अधीन रहते हुए, बहुराज्य सहकारी सोसाइटी द्वारा साधारण अधिवेशन में या ऐसी रीति से नियत किया जाएगा जो बहुराज्य सहकारी सोसाइटी द्वारा साधारण अधिवेशन में अवधारित की जाए । 

स्पष्टीकरण-इस उपधारा के प्रयोजन के लिए बहुराज्य सहकारी सोसाइटी द्वारा संपरीक्षकों के व्ययों के संबंध में सदत्त कोई राशि पारिश्रमिक" पद में सम्मिलित की गई समझी जाएगी ।

71. संपरीक्षकों को नियुक्त करने या हटाने के लिए संकल्पों का उपबंध-(1) सेवानिवृत्त होने वाले संपरीक्षक से भिन्न किसी व्यक्ति को संपरीक्षक के रूप में नियुक्त करने या अभिव्यक्ततः यह उपबंध करने के लिए कि सेवानिवृत्त होने वाला संपरीक्षक पुनः नियुक्त नहीं किया जाएगा, वार्षिक साधारण अधिवेशन में संकल्प के लिए, एक विशेष सूचना अपेक्षित होगी ।

(2) ऐसे संकल्प की सूचना की प्राप्ति पर, बहुराज्य सहकारी सोसाइटी उसकी प्रति तुरंत सेवानिवृत्त होने वाले संपरीक्षक को भेजेगी ।

(3) जहां ऐसे संकल्प की सूचना दी जाती है और सेवानिवृत्त होने वाला संपरीक्षक उसके संबंध में बहुराज्य सहकारी सोसाइटी को एक लिखित अभ्यावेदन (युक्तियुक्त विस्तार से अनधिक) करता है और अनुरोध करता है कि उसकी अधिसूचना बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के सदस्यों को की जाए, वहां बहुराज्य सहकारी सोसाइटी, सिवाय तब के जब ऐसा अभ्यावेदन उसे ऐसा करने के लिए बहुत विलंब से प्राप्त होता है, -

(क) बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के सदस्यों को दी जाने वाली संकल्प की किसी सूचना में, किए गए अभ्यावेदन का तथ्य कथित करेगी; और  

(ख) बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के प्रत्येक सदस्य को जिसे अधिवेशन की सूचना भेजी जा रही हो, अभ्यावेदन की एक प्रति भेजेगी चाहे वह बहुराज्य सहकारी सोसाइटी द्वारा अभ्यावेदनों की प्राप्ति के पूर्व हो या पश्चात्,

और बहुत विलंब से प्राप्त होने या बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के व्यतिक्रम के कारण यदि अभ्यावेदनों की एक प्रति पूर्वोक्त रूप में भेजी जाती है तो संपरीक्षक (उसके मौखिक रूप से सुनवाई के अधिकार पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना) अपेक्षा कर सकता है कि अभ्यावेदनों को अधिवेशन में पढ़ा जाए । 

72. संपरीक्षकों की अर्हताएं और निरर्हताएं-(1) कोई व्यक्ति बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के संपरीक्षक के रूप में नियुक्ति के लिए तब तक अर्हित नहीं होगा जब तक कि वह चार्टर्ड अकाउन्टेंट अधिनियम, 1949(1949 का 38) के अर्थान्तर्गत चार्टर्ड अकाउन्टेंट न हो ।

(2) निम्नलिखित व्यक्तियों में से कोई भी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के संपरीक्षक के रूप में नियुक्ति के लिए अर्हित नहीं होगाः-

(क) कोई निगमित निकाय; 

(ख) बहुराज्य सहकारी सोसाइटी का कोई अधिकारी या कर्मचारी;

() ऐसा व्यक्ति जो बहुराज्य सोसाइटी का सदस्य है, या उसके किसी अधिकारी या कर्मचारी के रूप में नियोजन में है;

() ऐसा व्यक्ति जो बहुराज्य सहकारी सोसाइटी का ऋणी है या जिसने बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के प्रति किसी तीसरे आदमी की ऋणग्रस्तता में के संबंध में एक हजार रुपए से अधिक रकम की कोई प्रत्याभूति या प्रतिभूति दी हो

(3) कोई व्यक्ति किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के संपरीक्षक के रूप में नियुक्ति के लिए तब भी अर्हित नहीं होगा जब वह उपधारा (2) के कारण किसी अन्य निगमित निकाय या बहुराज्य सहकारी सोसाइटी या सहकारी सोसाइटी के संपरीक्षक के रूप में नियुक्ति के लिए निरर्हित हो ।

(4) यदि कोई संपरीक्षक अपनी नियुक्ति के पश्चात् उपधारा (2) और उपधारा (3) में विनिर्दिष्ट किसी निरर्हता के अधीन हो जाए तो उसके द्वारा अपना पद तभी से रिक्त कर दिया गया समझा जाएगा ।

73. संपरीक्षकों की शक्तियां और कर्तव्य-(1) किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के प्रत्येक संपरीक्षक की, सभी समयों पर बहुराज्य सहकारी सोसाइटी की बहियों, लेखाओं और वाउचरों तक पहुंच होगी चाहे वे बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के प्रधान कार्यालय में रखे हों या कहीं और, और वह बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के अधिकारियों या अन्य कर्मचारियों से ऐसी जानकारी और स्पष्टीकरण की अपेक्षा करने का हकदार होगा जो संपरीक्षक, संपरीक्षक के रूप में अपने कर्तव्यों के निष्पादन के लिए आवश्यक समझे ।

(2) उपधारा (1) के उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, संपरीक्षक निम्नलिखित की जांच करेगा: -

() क्या बहुराज्य सहकारी सोसाइटी द्वारा, प्रतिभूति के आधार पर दिए गए ऋण और उधार उचित रूप से प्रत्याभूत हैं और वे निबंधन जिन पर वे दिए गए हैं, बहुराज्य सोसाइटी या उसके सदस्यों के हितों पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालते;

(ख) क्या बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के संव्यवहार जो केवल बही प्रविष्टियों द्वारा दिखाए गए हैं, बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के हितों पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालते;

(ग) क्या वैयक्तिक व्ययों को राजस्व लेखा पर प्रभारित किया गया है; और

() जहां बहुराज्य सहकारी सोसाइटी की बहियों और कागजों में यह कथन किया गया है कि कोई शेयर नकदी के विरुद्ध आबंटित किए गए हैं क्या, ऐसे आंबटन की बाबत नकदी वास्तव में प्राप्त की गई है और यदि वास्तव में ऐसी कोई नकदी प्राप्त नहीं की गई है, तो लेखा-पुस्तकों और तुनलपत्र में कथित स्थिति क्या सही है, नियमित है और भ्रामक नहीं है

(3) संपरीक्षक, बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के सदस्यों को, उसके द्वारा परीक्षा किए गए लेखाओं और प्रत्येक तुलनपत्र और लाभ तथा हानि लेखा और प्रत्येक अन्य दस्तावेज के बारे में जो इस अधिनियम द्वारा तुलनपत्र या लाभ और हानि लेखा के भागरूप संलग्न किए जाने के लिए घोषित किया गया है और जो उसकी पदावधि के दौरान साधारण अधिवेशन में बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के समक्ष रखे जाते हैं, एक रिपोर्ट देगा और रिपोर्ट में यह कथन होगा कि क्या उसकी राय में और उसकी सर्वोत्तम जानकारी और उसे दिए गए स्पष्टीकरणों के अनुसार, उक्त लेखाओं में इस अधिनियम द्वारा अपेक्षित जानकारी अपेक्षित रीति से दी गई है और वह निम्नलिखित की दशा में सही और उचित दृश्य प्रस्तुत करती हैं,-

() तुलनपत्र की दशा में, बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के क्रियाकलापों की स्थिति जो उसके वित्तीय वर्ष के अंत में हो; और 

(ख) लाभ और हानि लेखा की दशा में, उसके वित्तीय वर्ष के लाभ और हानि ।

(4) संपरीक्षक की रिपोर्ट में यह भी कथन होगा किः-

(क) क्या उसने वह सब जानकारी और स्पष्टीकरण प्राप्त कर लिए हैं जो उसके सर्वोत्तम ज्ञान और विश्वास के अनुसार उसकी संपरीक्षा के प्रयोजन के लिए आवश्यक थे;

(ख) क्या उसकी राय में बहुराज्य सहकारी सोसाइटी द्वारा उचित लेखा बहियां रखी गई हैं, जहां तक उन बहियों की उसके द्वारा की गई परीक्षा से प्रतीत होता है और क्या उसकी संपरीक्षा के प्रयोजनों के लिए पर्याप्त उचित विवरणियां उस बहुराज्य सहकारी सोसाइटी की, जहां वह नहीं गया है, शाखाओं या कार्यालयों से प्राप्त हुई हैं;

() क्या बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के संपरीक्षक से भिन्न किसी व्यक्ति द्वारा संपरीक्षा की गई शाखा या कार्यालय के लेखाओं की रिपोर्ट उसे भेज दी गई है और संपरीक्षक की रिपोर्ट तैयार करने में उसने उनकी चर्चा किस प्रकार की है

(घ) क्या बहुराज्य सहकारी सोसाइटी का तुलनपत्र और लाभ और हानि लेखा की रिपोर्ट में चर्चा लेखा बहियों और विवरणियों के अनुसार है ।

(5) जहां उपधारा (3) के खंड (क) और खंड (ख) या उपधारा (4) के खंड (क), खंड (ख), खंड (ग) और खंड (घ) में निर्दिष्ट किसी विषय पर उत्तर नकारात्मक है या किसी विश्लेषण के साथ है वहां संपरीक्षक की रिपोर्ट में उत्तर के लिए कारण कथित किए जाएंगे ।

74. संपरीक्षक की रिपोर्ट आदि पर हस्ताक्षर-बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के संपरीक्षक के रूप में नियुक्त व्यक्ति ही संपरीक्षक की रिपोर्ट पर हस्ताक्षर करेगा या बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के किसी अन्य दस्तावेज पर जो विधि के अनुसार संपरीक्षक द्वारा हस्ताक्षरित या अधिप्रमाणित किया जाना अपेक्षित हो, हस्ताक्षर या अधिप्रमाणित करेगा

75. संपरीक्षक की रिपोर्ट का वाचन और निरीक्षण-संपरीक्षक की रिपोर्ट साधारण अधिवेशन में बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के समक्ष पढ़ी जाएगी और बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के किसी सदस्य द्वारा निरीक्षण के लिए खुली रहेगी  

76. संपरीक्षक का साधारण अधिवेशन में उपस्थित होने का अधिकार-बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के किसी साधारण अधिवेशन से संबंधित सभी सूचनाएं और अन्य संसूचनाएं जिन्हें बहुराज्य सहकारी सोसाइटी का कोई सदस्य उसे भेजे जाने का हकदार है, बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के संपरीक्षक को भी भेजी जाएंगी और संपरीक्षक किसी साधारण अधिवेशन में उपस्थित रहने और ऐसे साधारण अधिवेशन में जिसमें वह संपरीक्षक के रूप में उससे संबंधित कारबार के किसी भाग के संबंध में उपस्थित होता है, सुनवाई का हकदार होगा ।

77. केन्द्रीय सरकार की कतिपय दशाओं में विशेष संपरीक्षा का निदेश देने की शक्ति-(1) जहां केंद्रीय सरकार की यह राय हो कि-

() किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के क्रियाकलापों का प्रबंध स्वावलंबन और पारस्परिक सहायता तथा सहकारी सिद्धांतों या प्रबुद्ध वाणिज्यिक प्रथाओं या ठोस कारोबारी सिद्धांतों के अनुसार नहीं किया जा रहा है; या

(ख) किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी का प्रबंध ऐसी रीति से किया जा रहा है जिससे उस व्यापार, उद्योग या कारबार, जिससे वह संबंधित है, के हितों को गंभीर क्षति या नुकसान कारित होने की संभावना है; या

(ग) किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी की वित्तीय स्थिति ऐसी है कि उसकी शोधन क्षमता को खतरा हो सकता है,

वहां केन्द्रीय सरकार, किसी भी समय आदेश द्वारा, निदेश दे सकेगी कि किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के लेखाओं की ऐसी अवधि या अवधियों के लिए जो आदेश में विनिर्दिष्ट की जाएं, विशेष संपरीक्षा की जाए और उसी या भिन्न आदेश द्वारा चार्टर्ड अकाउन्टेंट अधिनियम, 1949 (1949 का 38) की धारा 2 की उपधारा (1) के खंड (ख) में यथापरिभाषित किसी चार्टर्ड अकाउन्टेंट को या बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के संपरीक्षक को ही विशेष संपरीक्षा करने के लिए नियुक्त कर सकेगी: 

परंतु केंन्द्रीय सरकार, किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के लेखाओं की विशेष संपरीक्षा के लिए आदेश नहीं देगी यदि वह सरकार या राज्य सरकार अकेले या दोनों ऐसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी की समादत्त शेयर पूंजी या उसके शेयरों के इक्यावन प्रतिशत से कम धारित करती हो ।

(2) उपधारा (1) के अधीन यथापूर्वोक्त विशेष संपरीक्षा करने के लिए नियुक्त चार्टर्ड अकाउन्टेंट या बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के संपरीक्षक को इस धारा में इसके पश्चात् विशेष संपरीक्षक के रूप में निर्दिष्ट किया जाएगा ।

(3) विशेष संपरीक्षक की, विशेष संपरीक्षा के संबंध में वही शक्तियां और कर्तव्य होंगे जो बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के संपरीक्षक के धारा 73 के अधीन हैं:

परंतु विशेष संपरीक्षक अपनी रिपोर्ट बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के सदस्यों को देने की बजाय केंद्रीय सरकार को देगा

(4) विशेष संपरीक्षक की रिपोर्ट में यावत्साध्य, वे सभी विषय सम्मिलित होंगे जो धारा 73 के अधीन संपरीक्षक की रिपोर्ट में सम्मिलित किए जाने के लिए अपेक्षित हैं और यदि केन्द्रीय सरकार ऐसा निदेश दे तो उसमें किसी ऐसे अन्य विषय जो उसे सरकार द्वारा निर्दिष्ट किया जाए, पर विवरण भी सम्मिलित होंगे ।

(5) केंद्रीय सरकार आदेश द्वारा आदेश में विनिर्दिष्ट किसी व्यक्ति को यह निदेश दे सकेगी कि वह उसमें विनिर्दिष्ट समय के भीतर विशेष संपरीक्षक को ऐसी जानकारी या अतिरिक्त जानकारी दे जिसकी विशेष संपरीक्षक द्वारा विशेष संपरीक्षा के संबंध में अपेक्षा की जाए ।

(6) विशेष संपरीक्षक की रिपोर्ट की प्राप्ति पर, केंद्रीय सरकार, इस अधिनियम या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के उपबंधों के अनुसार उस रिपोर्ट पर ऐसी कार्रवाई कर सकेगी जो वह आवश्यक समझे:

परंतु यदि केन्द्रीय सरकार, रिपोर्ट की प्राप्ति की तारीख से चार मास के भीतर उस पर कोई कार्रवाई नहीं करती है तो सरकार बहुराज्य सहकारी सोसाइटी को रिपोर्ट की या तो प्रति या सुसंगत उद्धरण अपनी टिप्पणियों सहित भेजेगी और बहुराज्य सहकारी सोसाइटी से अपेक्षा करेगी कि वह या तो ऐसी प्रति या उन उद्धरणों को सदस्यों को परिचालित करे या उस प्रति या उन उद्धरणों को अगले विशेष अधिवेशन में बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के समक्ष पढ़े

(7) इस धारा के अधीन किसी विशेष संपरीक्षा के और उससे आनुषंगिक व्यय (विशेष संपरीक्षक के पारिश्रमिक सहित) केंद्रीय सरकार द्वारा अवधारित किए जाएंगे जो अवधारण अंतिम होगा और बहुराज्य सहकारी सोसाइटी द्वारा संदत्त किए जाएंगे और ऐसा संदाय किए जाने में व्यतिक्रम पर बहुराज्य सहकारी सोसाइटी से भू-राजस्व के बकाया के रूप में वसूलनीय होंगे ।

78. केन्द्रीय रजिस्ट्रार द्वारा जांच-(1) केंद्रीय रजिस्ट्रार, किसी ऐसी परिसंघीय सहकारी समिति जिससे बहुराज्य सहकारी सोसाइटी सहबद्ध है या लेनदार है या बोर्ड के कम-से-कम एक-तिहाई सदस्यों या बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के सदस्यों की कुल संख्या के कम-से-कम एक बटा पांच सदस्यों के अनुरोध पर, जांच कर सकेगा या इस निमित्त लिखित आदेश द्वारा अपने द्वारा प्राधिकृत किसी व्यक्ति को बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के गठन, कार्यकरण और वित्तीय स्थिति की जांच करने का निदेश देगा:

परंतु इस उपधारा के अधीन कोई जांच तब तक नहीं की जाएगी जब तक कि संबद्ध बहुराज्य सहकारी सोसाइटी को कम से कम पन्द्रह दिन की सूचना न दे दी गई हो ।

(2) केन्द्रीय रजिस्ट्रार या उपधारा (1) के अधीन उसके द्वारा प्राधिकृत किसी व्यक्ति को निम्नलिखित शक्तियां होंगी, अर्थात्ः- 

(क) उसकी सभी युक्तियुक्त समय पर बहुराज्य सहकारी सोसाइटी से संबंधित या उसकी अभिरक्षा में रखी गई बहियों, लेखाओं, दस्तावेजों, प्रतिभूतियों, नकद और अन्य संपत्तियों तक अबाधि पहुंच होगी और वह ऐसे किसी व्यक्ति को जिसके कब्जे में, ऐसी पुस्तकें, लेखे, दस्तावेज, प्रतिभूतियां, नकद या अन्य संपत्तियां हैं या जो उनकी अभिरक्षा के लिए उत्तरदायी हैं, उसके द्वारा विनिर्दिष्ट किसी स्थान पर प्रस्तुत करने के लिए समन करेगा;

(ख) वह, बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के साधारण अधिवेशन के लिए सूचना की अवधि विनिर्दिष्ट करने वाली किसी उपविधि के होते हुए भी, सोसाइटी के अधिकारियों से अपेक्षा कर सकता है कि कम से कम सात दिन की सूचना देकर सोसाइटी के प्रधान कार्यालय में ऐसे समय और स्थान पर ऐसे विषयों पर विचार करने के लिए जिसके लिए वह निदेश दे, सोसाइटी का साधारण अधिवेशन बुलाए और जहां सोसाइटी के अधिकारी ऐसा अधिवेशन बुलाने से इन्कार करते हैं या असफल रहते हैं वहां उसे ऐसा अधिवेशन स्वयं बुलाने की शक्ति होगी;

(ग) वह ऐसे किसी व्यक्ति को, जिसके बारे में उसे युक्तियुक्त रूप से यह विश्वास है कि उसे बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के मामलों का ज्ञान है, अपने सामने सोसाइटी के प्रधान कार्यालय या उसकी किसी शाखा में किसी स्थान पर प्रस्तुत होने के लिए समन कर सकेगा और ऐसे व्यक्ति की शपथ पर परीक्षा करेगा ।

(3) उपधारा (2) के खंड () के अधीन बुलाए गए किसी अधिवेशन को सोसाइटी की उपविधियों के अधीन बुलाए गए सोसाइटी के साधारण अधिवेशन की सभी शक्तियां होंगी और उसकी कार्यवाहियां उक्त उपविधियों द्वारा विनियमित होंगी

(4) केंद्रीय रजिस्ट्रार जांच की रिपोर्ट की प्राप्ति की तारीख से तीन मास की अवधि के भीतर, बहुराज्य सहकारी सोसाइटी को, ऐसी वित्तीय संस्थाओं को, यदि कोई हों, जिनसे सोसाइटी सहबद्ध है और उस व्यक्ति या प्राधिकारी को यदि कोई हो, जिसकी प्रेरणा पर जांच की गई है, रिपोर्ट का सारांश सूचित करेगा ।

79. बहुराज्य सहकारी सोसाइटियों का निरीक्षण-(1) केन्द्रीय रजिस्ट्रार, किसी ऐसी परिसंघीय सहकारी समिति जिससे बहुराज्य सहकारी सोसाइटी सहबद्ध है या लेनदार है या बोर्ड के कम-से-कम एक-तिहाई सदस्य या बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के सदस्यों की कुल संख्या के कम से कम एक बटा पांच सदस्यों के अनुरोध पर इस निमित्त लिखित साधारण या विशेष आदेश द्वारा जांच कर सकेगा या इस निमित्त लिखित आदेश द्वारा अपने द्वारा प्राधिकृत किसी व्यक्ति को बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के गठन, कार्यकरण और वित्तीय स्थिति की जांच करने का निदेश दे सकेगा :

परन्तु इस उपधारा के अधीन कोई निरीक्षण तब तक नहीं किया जाएगा जब तक कि संबद्ध बहुराज्य सहकारी सोसाइटी को कम से कम पन्द्रह दिन की सूचना न दे दी गई हो ।

(2) () उपधारा (1) के अधीन निरीक्षण के प्रयोजन के लिए केन्द्रीय रजिस्ट्रार या उस उपधारा के अधीन उसके द्वारा प्राधिकृत किसी व्यक्ति की सभी समयों पर उस सोसाइटी की सभी बहियों, लेखाओं, कागजपत्रों, वाउचरों, प्रतिभूतियों, स्टाक और अन्य सम्पत्ति तक अबाध पहुंच होगी और वह निरीक्षण के दौरान गम्भीर अनियमितताओं के पता लगने की दशा में उन्हें अभिरक्षा में ले सकेगा और उसे सोसाइटी के नकद अतिशेष का सत्यापन करने और केन्द्रीय रजिस्ट्रार के साधारण या विशेष आदेश के अधीन रहते हुए बोर्ड का अधिवेशन और सोसाइटी का विशेष अधिवेशन भी, जहां ऐसा साधारण अधिवेशन बुलाना उसकी राय में आवश्यक हो, बुलाने की शक्ति होगी

(ख) किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी का प्रत्येक अधिकारी या सदस्य सोसाइटी के कार्यकरण के सम्बन्ध में ऐसी जानकारी देगा जिसकी अपेक्षा केन्द्रीय रजिस्ट्रार या ऐसा निरीक्षण करने वाला व्यक्ति करे ।

(3) इस धारा के अधीन निरीक्षण की रिपोर्ट की एक प्रति, ऐसे निरीक्षण के पूरा हो जाने की तारीख से, तीन मास की अवधि के भीतर, बहुराज्य सहकारी सोसाइटी को दी जाए ।

 80. ऋणी बहुराज्य सहकारी सोसाइटियों की बहियों का निरीक्षण-(1) केन्द्रीय रजिस्ट्रार, किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के लेनदार के आवेदन पर, सोसाइटी की बहियों का निरीक्षण करेगा या लिखित आदेश द्वारा उस निमित्त उसके द्वारा प्राधिकृत किसी व्यक्ति को निरीक्षण करने का निदेश देगा:

परन्तु कोई ऐसा निरीक्षण तब तक नहीं किया जाएगा जब तक आवेदक-

(क) केन्द्रीय रजिस्ट्रार का यह समाधान नहीं कर देता है कि ऋण एक ऐसी राशि है जो उस समय शोध्य थी और उसने उसके संदाय की मांग की है और युक्तियुक्त समय के भीतर उसकी तुष्टि नहीं की गई है;

(ख) केन्द्रीय रजिस्ट्रार के पास प्रस्तावित निरीक्षण के खर्चों के लिए प्रतिभूति के रूप में ऐसी राशि का निक्षेप नहीं कर देता है, जिसकी अपेक्षा केन्द्रीय रजिस्ट्रार करे ।

(2) केन्द्रीय रजिस्ट्रार, किसी ऐसे निरीक्षण का परिणाम लेनदार को सूचित करेगा ।

81. जांच और निरीक्षण का खर्च-जहां धारा 78 के अधीन कोई जांच की जाती है या धारा 79 के अधीन कोई निरीक्षण किया जाता है, वहां केन्द्रीय रजिस्ट्रार खर्चों या खर्चों के ऐसे भाग को, जो वह ठीक समझे, बहुराज्य सहकारी सोसाइटी, जांच या निरीक्षण की मांग करने वाले सदस्यों और लेनदार तथा उस सोसाइटी के अधिकारियों या भूतपूर्व अधिकारियों और सदस्यों या भूतपूर्व सदस्यों के बीच प्रभाजित कर सकेगा:

परन्तु-

(क) खर्च के प्रभाजन का कोई आदेश इस धारा के अधीन तब तक नहीं किया जाएगा जब तक कि सोसाइटी या उसके अधीन खर्चों का संदाय करने के लिए दायी व्यक्ति को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर न दे दिया गया हो;

(ख) केन्द्रीय रजिस्ट्रार, अपने हस्ताक्षर सहित उन आधारों का लिखित कथन करेगा जिन पर खर्च का प्रभाजन किया गया है ।

82. खर्च की वसूली-धारा 81 के अधीन खर्च के रूप में अधिनिर्णीत कोई राशि, उस व्यक्ति से, ऐसे मजिस्ट्रेट को, जिसकी अधिकारिता में वह स्थान है, जहां वह व्यक्ति जिससे धन का दावा किया जाना है, वस्तुतः और स्वेच्छया निवास करता है या कारबार करता है, आवेदन करके वसूल की जा सकती है और ऐसा मजिस्ट्रेट उसे ऐसे वसूल करेगा मानो वह उसके द्वारा अधिरोपित जुर्माना हो ।

83. प्रतिसंदाय, आदि-(1) यदि, किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी की संपरीक्षा, जांच, निरीक्षण या समापन के दौरान यह पाया जाता है कि किसी व्यक्ति ने, जिसे ऐसी सोसाइटी का संगठन या प्रबन्ध न्यस्त किया गया है या किया गया था अथवा जो सोसाइटी का कोई अधिकारी या कोई कर्मचारी है या किसी समय रहा है, इस अधिनियम या उपविधियों के प्रतिकूल कोई संदाय किया है या न्यास भंग द्वारा अथवा जानबूझकर उपेक्षा द्वारा सोसाइटी की आस्तियों में कोई कमी कारित की है या ऐसी सोसाइटी से संबंधित किसी धन या अन्य सम्पत्ति का दुरुपयोजन किया है या कपटपूर्वक उसे प्रतिधारित किया है, तो केन्द्रीय रजिस्ट्रार, स्वप्ररेणा से या बोर्ड, समापक या किसी लेनदार के आवेदन पर, ऐसे व्यक्ति के आचरण की जांच स्वयं करेगा या अपने द्वारा प्राधिकृत किसी व्यक्ति को, यथास्थिति, संपरीक्षा, निरीक्षण या जांच की तारीख से या समापन के आदेश की तारीख से दो वर्ष की अवधि के भीतर इस निमित्त लिखित आदेश द्वारा, जांच करने के लिए निदेश देगा :

परन्तु जहां केन्द्रीय रजिस्ट्रार का यह समाधान हो जाता है कि स्पष्ट या तथ्यों को छिपाने के कारण पूर्वोक्त दो वर्ष की अवधि के दौरान ऐसी जांच आरम्भ नहीं की जा सकी थी, वहां वह संपरीक्षा, निरीक्षण या जांच की रिपोर्ट की तारीख से या परिसमापन की तारीख से, जो वह ठीक समझता है छह वर्ष से अनधिक की अवधि के भीतर जांच करने के लिए निदेश देगा ।

(2) जहां उपधारा (1) के अधीन कोई जांच की जाती है, वहां केन्द्रीय रजिस्ट्रार, सम्बन्धित व्यक्ति को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर देने के पश्चात् उससे यह अपेक्षा करने वाला आदेश कर सकेगा कि वह धन या सम्पत्ति या उसके किसी भाग का, ऐसी दर पर ब्याज सहित, प्रतिसंदाय करे या उसे प्रत्यावर्तित करे या ऐसी सीमा तक अभिदाय और खर्च या प्रतिकर का संदाय करे, जो केन्द्रीय रजिस्ट्रार न्यायोचित और साम्यापूर्ण समझे । 

अध्याय 9

विवादों का निपटारा

84. विवादों का निर्देश-(1) तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी, यदि कोई विवाद [किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी द्वारा वेतन पाने वाले अपने कर्मचारी के विरुद्ध की गई अनुशासनिक कार्रवाई की बाबत किसी विवाद से या औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 (1947 का 14) की धारा 2 के खण्ड (ट) में परिभाषित किसी औद्योगिक विवाद से भिन्न] किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के गठन, प्रबन्ध या कारबार के सम्बन्ध में-

(क) सदस्यों, भूतपूर्व सदस्यों और सदस्यों, भूतपूर्व सदस्यों और मृत सदस्यों की मार्फत दावा करने वाले व्यक्तियों के बीच, या

(ख) किसी सदस्य, भूतपूर्व सदस्य अथवा किसी सदस्य, भूतपूर्व सदस्य या मृत सदस्य की मार्फत दावा करने वाला व्यक्ति और बहुराज्य सहकारी सोसाइटी, उसके बोर्ड या बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के किसी अधिकारी, अभिकर्ता या कर्मचारी अथवा भूतपूर्व या वर्तमान समापक के बीच, या

(ग) बहुराज्य सहकारी सोसाइटी या उसके बोर्ड और बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के किसी भूतपूर्व बोर्ड, किसी अधिकारी, अभिकर्ता या कर्मचारी या किसी भूतपूर्व अधिकारी, भूतपूर्व अभिकर्ता या भूतपूर्व कर्मचारी या किसी मृत अधिकारी, मृत अभिकर्ता या मृत कर्मचारी के वारिस या विधिक प्रतिनिधि के बीच, या

(घ) बहुराज्य सहकारी सोसाइटी और किसी अन्य बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के बीच, किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी और दूसरी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के समापक के बीच अथवा एक बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के समापक और दूसरी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के समापक के बीच,

उद्भूत होता है, तो ऐसे विवाद को मध्यस्थ को निर्दिष्ट किया जाएगा ।

(2) उपधारा (1) के प्रयोजनों के लिए, निम्नलिखित विवादों को किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के गठन, प्रबन्ध या कारबार से संबंधित विवाद समझा जाएगा, अर्थात्ः-

() बहुराज्य सहकारी सोसाइटी द्वारा, किसी सदस्य या मृत सदस्य के नामनिर्देशिती, वारिस या विधिक प्रतिनिधि से किसी ऐसे शोध्य ऋण या मांग के लिए कोई दावा, चाहे ऐसा ऋण या ऐसी मांग स्वीकार की गई हो या नहीं;

(ख) किसी प्रतिभूति द्वारा मूल ऋणी के विरुद्ध कोई दावा, जहां बहुराज्य सहकारी सोसाइटी ने प्रतिभू से मूल ऋणी के व्यतिक्रम के परिणामस्वरूप मूल ऋणी से उसे शोध्य किसी ऋण या मांग के सम्बन्ध में कोई रकम वसूल कर ली है, चाहे ऐसा ऋण या ऐसी मांग स्वीकार की गई हो या नहीं;

(ग) किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के किसी अधिकारी के निर्वाचन के सम्बन्ध में उठने वाला कोई विवाद ।

(3) यदि कोई प्रश्न उठता है कि इस धारा के अधीन मध्यस्थ को निर्दिष्ट कोई विवाद किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के गठन, प्रबन्ध या कारबार से सम्बन्धित विवाद है या नहीं, तो उस प्रश्न पर मध्यस्थ का विनिश्चय अंतिम होगा और किसी न्यायालय में प्रश्नगत नहीं किया जाएगा ।

(4) जहां उपधारा (1) के अधीन कोई विवाद माध्यस्थम् को निर्दिष्ट किया गया है, वहां उसे केंद्रीय रजिस्ट्रार द्वारा नियुक्त किए जाने वाले मध्यस्थ द्वारा निपटाया जाएगा या विनिश्चित किया जाएगा ।

(5) इस अधिनियम के अधीन जैसा अन्यथा उपबंधित है उसके सिवाय, माध्यस्थम् और सुलह अधिनियम, 1996(1996 का 26) के उपबंध इस अधिनियम के अधीन सभी माध्यस्थम् को इस प्रकार लागू होंगे मानो माध्यस्थम् के लिए कार्यवाहियां माध्यस्थम् और सुलह अधिनियम, 1996 के उपबंधों के अधीन समझौते या विनिश्चय के लिए निर्दिष्ट की गई हैं ।

85. परिसीमा-(1) परिसीमा अधिनियम, 1963 (1963 का 36) में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, किन्तु इस अधिनियम में किए गए विनिर्दिष्ट उपबन्धों के अधीन रहते हुए, माध्यस्थम् को निर्दिष्ट विवाद के मामले में परिसीमा की अवधि, -

(क) जब विवाद किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के उसके किसी सदस्य द्वारा सोसाइटी को देय किसी राशि की वसूली से संबंधित है जिसके अन्तर्गत उस पर ब्याज भी है, उस तारीख से संगणित की जाएगी जिसको ऐसे सदस्य की मृत्यु होती है या वह सोसाइटी का सदस्य नहीं रह जाता है;

(ख) जैसा खण्ड (ग) में उपबंधित है उसके सिवाय, जब विवाद धारा 84 की उपधारा (1) के खण्ड (ख) या खण्ड (ग) या खण्ड (घ) में निर्दिष्ट पक्षकारों में से किसी के कार्य या कार्य लोप से संबंधित है, उस तारीख से जिसको ऐसा कार्य या कार्य लोप जिसके प्रति विवाद उद्भूत हुआ है, किया गया था, छह वर्ष होगी;

 (ग) जब विवाद किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के किसी अधिकारी के निर्वाचन के संबंध में है, तब निर्वाचन के परिणाम की घोषणा की तारीख से एक मास होगी ।

(2) उपधारा (1) में वर्णित विवादों के सिवाय, जो प्राधिकरण को निर्दिष्ट किया जाना अपेक्षित है, किसी विवाद के मामले में परिसीमा की अवधि, परिसीमा अधिनियम, 1963 (1963 का 36) के उपबन्धों द्वारा इस प्रकार विनियमित की जाएगी मानो कि विवाद एक वाद हो और मध्यस्थ एक सिविल न्यायालय ।

(3) उपधारा (1) और उपधारा (2) में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, मध्यस्थ परिसीमा की अवधि की समाप्ति के पश्चात् किसी विवाद को ग्रहण कर सकेगा यदि आवेदक मध्यस्थ का यह समाधान कर देता है कि उसके पास ऐसी अवधि के भीतर विवाद को निर्दिष्ट न करने के पर्याप्त कारण थे ।

अध्याय 10

बहुराज्य सहकारी सोसाइटियों का परिसमापन

86. बहुराज्य सहकारी सोसाइटियों का परिसमापन-(1) यदि धारा 70 के अधीन संपरीक्षा किए जाने या धारा 77 के अधीन या विशेष संपरीक्षा किए जाने या धारा 78 के अधीन कोई जांच किए जाने या धारा 79 के अधीन कोई निरीक्षण किए जाने के पश्चात्, केन्द्रीय रजिस्ट्रार की राय है कि सोसाइटी का परिसमापन किया जाना चाहिए, तो वह सोसाइटी को अभ्यावेदन करने का युक्तियुक्त अवसर देने के पश्चात्, आदेश द्वारा उसका परिसमापन किए जाने का निदेश दे सकेगा ।

(2) केन्द्रीय रजिस्ट्रार स्वप्रेरणा से और किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी को अभ्यावेदन करने का युक्तियुक्त अवसर देने के पश्चात् उसका परिसमापन करने का निदेश देने वाला आदेश कर सकेगा-

(क) जहां सोसाइटी के रजिस्ट्रीकरण की यह एक शर्त है कि सोसाइटी में कम से कम पचास सदस्य होने चाहिएं और सदस्यों की संख्या घटकर पचास से कम हो गई है; या 

(ख) जहां बहुराज्य सहकारी सोसाइटी ने अपने रजिस्ट्रीकरण की तारीख से छह मास की अवधि के भीतर या ऐसी बढ़ाई गई अवधि के भीतर जो केन्द्रीय रजिस्ट्रार इस निमित्त अनुज्ञात करे, अपना कार्य आरम्भ नहीं किया है या सहकारिता के सिद्धान्तों के अनुसार कृत्य करना बंद कर दिया है ।

(3) केन्द्रीय रजिस्ट्रार, किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के परिसमापन के किसी आदेश को किसी भी समय किसी ऐसी दशा में, जहां उसकी राय में सोसाइटी को बना रहना चाहिए, रद्द कर सकेगा ।

(4) ऐसे आदेश की एक प्रति, बहुराज्य सहकारी सोसाइटी को और उन वित्तीय संस्थाओं को, यदि कोई हों, जिनकी सोसाइटी सदस्य है, रजिस्ट्रीकृत डाक द्वारा भेजी जाएगी ।

(5) इस धारा में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, किसी सहकारी बैंक का परिसमापन, रिजर्व बैंक की लिखित पूर्व मंजूरी से ही किया जाएगा, अन्यथा नहीं ।

(6) इस धारा में किसी बात के होते हुए भी, केन्द्रीय रजिस्ट्रार, किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी का परिसमापन करने का आदेश करेगा यदि सोसाइटी साधारण अधिवेशन में उपस्थित और मत देने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत से संकल्प पारित करके उस सोसाइटी का परिसमापन करने का विनिश्चिय करती है ।

87. रिजर्व बैंक के निदेश पर सहकारी बैंकों का परिसमापन-इस अधिनियम में अन्यत्र अन्तर्विष्ट इसके प्रतिकूल किसी बात के होते हुए भी, केन्द्रीय रजिस्ट्रार, यदि रिजर्व बैंक द्वारा निक्षेप बीमा और प्रत्यय गारंटी निगम अधिनियम, 1961 (1961 का 47) की धारा 13घ में वर्णित परिस्थितियों में ऐसी अपेक्षा की जाती है तो सहकारी बैंक के परिसमापन के लिए आदेश करेगा ।

88. समापक द्वारा निक्षेप बीमा निगम को प्रतिपूर्ति-जहां ऐसे सहकारी बैंक का,जो निक्षेप बीमा और प्रत्यय गारंटी निगम अधिनियम, 1961 (1961 का 47) के अर्थ के भीतर एक बीमाकृत बैंक है, परिसमापन किया जाता है और उस अधिनियम की धारा 16 की उपधारा (1) के अधीन निक्षेप बीमा निगम बीमाकृत बैंक के निक्षेपकों के प्रति दायी हो गया है वहां निक्षेप बीमा निगम की, समापक द्वारा या परिस्थितियों के अनुसार ऐसे अन्य व्यक्ति द्वारा, उस अधिनियम की धारा 21 में उपबंधित परिमाण तक और रीति से प्रतिपूर्ति की जाएगी ।

89. समापक-(1) जहां केन्द्रीय रजिस्ट्रार ने किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के परिसमापन के लिए धारा 86 के अधीन कोई आदेश किया है वहां केन्द्रीय रजिस्ट्रार, उस प्रयोजन के लिए किसी समापक की नियुक्ति कर सकेगा और उसका पारिश्रमिक नियत कर सकेगा ।

(2) कोई समापक, नियुक्ति पर, ऐसी सभी संपत्ति, चीजवस्तु और अनुयोज्य दावे, जिनकी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी हकदार है या हकदार प्रतीत होती है, अपनी अभिरक्षा में लेगा या उन्हें अपने नियंत्रण के अधीन रखेगा और ऐसी कार्रवाई करेगा जो वह ऐसी संपत्ति, चीजवस्तु और दावों की हानि या क्षय या नुकसान का निवारण करने के लिए आवश्यक या समीचीन समझे और केन्द्रीय रजिस्ट्रार के पूर्व अनुमोदन से, बहुराज्य सहकारी सोसाइटी का कारबार जहां तक आवश्यक हो, चला सकेगा ।

(3) जहां धारा 99 की उपधारा (1) के खंड (च) के अधीन कोई अपील की जाती है, वहां धारा 86 के अधीन किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के परिसमापन के लिए किया गया कोई आदेश उसके पश्चात् तब तक प्रवर्तित नहीं होगा जब तक कि अपील में आदेश की पुष्टि नहीं कर दी जाती है:

परन्तु समापक उपधारा (2) में उल्लिखित संपत्ति, चीजवस्तु और अनुयोज्य दावों को अभिरक्षा या नियंत्रण में रखे रहेगा और उसे उस उपधारा में निर्दिष्ट कार्रवाई करने का प्राधिकार होगा ।

(4) जहां किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के परिसमापन का कोई आदेश अपील में अपास्त हो जाता है, वहां सोसाइटी की संपत्ति, चीजवस्तु और अनुयोज्य दावे सोसाइटी में पुनः निहित हो जाएंगे ।

90. समापक की शक्तियां-(1) इस निमित्त बनाए गए किन्हीं नियमों के अधीन रहते हुए, किसी ऐसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी की, जिसके संबंध में कोई परिसमापन आदेश किया गया है, संपूर्ण आस्तियां, धारा 89 के अधीन नियुक्त समापक में उस तारीख से निहित हो जाएंगी, जिसको आदेश प्रभावी होता है और समापक को विक्रय द्वारा या अन्यथा ऐसी आस्तियों को वसूल करने की शक्ति होगी ।

(2) केन्द्रीय रजिस्ट्रार के नियंत्रण के अधीन रहते हुए, ऐसे समापक को निम्नलिखित शक्ति भी होगी, अर्थात्ः-

(क) बहुराज्य सहकारी सोसाइटी की ओर से वादों और अन्य कार्यवाहियों को अपने पदनाम से संस्थित करना और उनकी प्रतिरक्षा करना; 

(ख) समय-समय पर सदस्यों या भूतपूर्व सदस्यों द्वारा या मृत सदस्यों की संपदाओं या नामनिर्देशितियों, वारिसों या विधिक प्रतिनिधियों द्वारा या किन्हीं अधिकारियों या भूतपूर्व अधिकारियों द्वारा सोसाइटी की आस्तियों में किए जाने वाले या किए जाने के लिए शेष अभिदाय का (जिसके अंतर्गत शोध्य ऋण और समापन के खर्चे भी हैं) अवधारण करना;

(ग) बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के विरुद्ध सभी दावों का अन्वेषण करना और इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन रहते हुए, दावेदारों के बीच उठने वाले पूर्विकता के प्रश्नों का विनिश्चय करना;

(घ) बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के विरुद्ध दावों का, जिनके अंतर्गत उनकी अपनी-अपनी पूर्विकताओं के अनुसार यदि कोई हों, पूर्ण रूप से या अनुपाततः जो सोसाइटी की आस्तियां अनुज्ञात करें, परिसमापन की तारीख तक ब्याज संदाय करना भी है, दावों के संदाय के पश्चात् शेष अधिशेष को यदि कोई हो, परिसमापन के ऐसे आदेश की तारीख से उस दर पर, जो उसके द्वारा नियत की गई हो, किंतु किसी भी दशा में संविदा दर से अधिक न हो, ब्याज के संदाय में उपयोजित किया जाएगा;

() यह अवधारण करना कि समापन के खर्चों को किन व्यक्तियों द्वारा और किन अनुपातों में वहन किया जाएगा;

(च) यह अवधारण करना कि क्या कोई व्यक्ति, सदस्य, भूतपूर्व सदस्य या मृत सदस्य का नामनिर्देशिती है;

(छ) बहुराज्य सहकारी सोसाइटी की आस्तियों के संग्रहण और वितरण की बाबत ऐसे निदेश देना जो उस सोसाइटी के कामकाज के परिसमापन के लिए उसे आवश्यक प्रतीत हों;

() बहुराज्य सहकारी सोसाइटी का उतना कारबार करना, जितना उसके फायदाप्रद परिसमापन के लिए आवश्यक हो;

(झ) लेनदारों या लेनदार होने का दावा करने वाले व्यक्तियों या कोई ऐसा दावा, उस समय या भविष्य में जिसके द्वारा बहुराज्य सहकारी सोसाइटी दायी हो सकती हो, रखने वाले या रखने का अभिकथन करने वाले व्यक्तियों के साथ कोई समझौता या ठहराव करना;

(ञ) किसी ऐसे व्यक्ति के साथ, जिसके और बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के बीच कोई विवाद हो, कोई समझौता या ठहराव करना और किसी ऐसे विवाद के विनिश्चय के लिए निर्दिष्ट करना;

(ट) बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के सदस्यों से परामर्श करने के पश्चात्, सोसाइटी के विरुद्ध दावों का संदाय, ऐसी रीति से जो विहित की जाए, करने के पश्चात् शेष अधिशेष का यदि कोई हो, व्ययन करना;

() सभी मांगों या मांगों और ऋणों के प्रति दायित्वों और ऋणों के परिणामस्वरूप उत्पन्न होने वाले दायित्वों तथा वर्तमान या भविष्य के निश्चित या आकस्मिक सभी दावों से, जो बहुराज्य सहकारी सोसाइटी और किसी अभिदायी या अन्य ऋणी या बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के प्रति दायित्व की आशंका करने वाले व्यक्ति के बीच विद्यमान है या जिनका विद्यमान होना अभिकथित है, और सोसाइटी की आस्तियों या उसके परिसमापन से किसी प्रकार संबंधित या उस पर प्रभाव डालने वाले सभी प्रश्नों से, ऐसे निबंधनों पर, जो तय किए जाएं, समझौता करना और किसी ऐसी मांग, दायित्व, ऋण या दावे के उन्मोचन के लिए कोई प्रतिभूति लेना और उसका पूर्ण रूप से उन्मोचन करना

(3) जब किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के कामकाज का परिसमापन किया जाता है, तब समापक, केन्द्रीय रजिस्ट्रार को उसकी रिपोर्ट देगा और सोसाइटी के अभिलेखों को ऐसे स्थान में, जिसका केन्द्रीय रजिस्ट्रार निदेश करे, जमा करेगा

91. अधिशेष आस्तियों का व्ययन-अधिशेष आस्तियों का जैसी वे बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के, जिसका परिसमापन किया गया है, समापन की रिपोर्ट में दर्शित की गई है, -

() यदि बहुराज्य सहकारी सोसाइटी की उपविधियों में उस प्रयोजन का विनिर्देश किया गया है जिसके लिए ऐसे अधिशेष का उपयोग किया जाएगा तो उसका उपयोग केन्द्रीय रजिस्ट्रार द्वारा उक्त प्रयोजन के लिए किया जा सकेगा; और

() यदि उपर्युक्त उपविधियों में प्रयोजन का विनिर्देश नहीं किया गया है, तो उनका केन्द्रीय सरकार की पूर्व   मंजूरी से, ऐसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के सदस्यों के बीच ऐसी रीति से, जो विहित की जाए, विभाजन किया जा सकेगा

92. समापक द्वारा निर्धारित अभिदायों की पूर्विकता-दिवाला से संबंधित किसी विधि में किसी बात के होते हुए भी, किसी समापक द्वारा निर्धारित अभिदाय का क्रम दिवाला कार्यवाहियों में पूर्विकता क्रम के अनुसार केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार या किसी स्थानीय प्राधिकरण को शोध्य ऋणों के पश्चात् होगा ।

93. केन्द्रीय रजिस्ट्रार की किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी का रजिस्ट्रीकरण रद्द करने की शक्ति-(1) केन्द्रीय रजिस्ट्रार, धारा 90 की उपधारा (3) के अधीन उसको की गई समापक की रिपोर्ट पर विचार करने के पश्चात् बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के रजिस्ट्रीकरण को रद्द किए जाने का आदेश कर सकेगा और ऐसे रद्दकरण पर वह सोसाइटी विघटित हो जाएगी ।

(2) उपधारा (1) के अधीन किया गया कोई आदेश, बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के, यथास्थिति, अध्यक्ष या सभापति को और ऐसी वित्तीय संस्थाओं को, यदि कोई हो, जिनकी सोसाइटी सदस्य थी, रजिस्ट्रीकृत डाक द्वारा संसूचित किया जाएगा ।

अध्याय 11

डिक्रियों, आदेशों और विनिश्चयों का निष्पादन

94. विनिश्चयों, आदि का निष्पादन-धारा 39 या धारा 40 या धारा 83 या धारा 99 या धारा 101 के अधीन किया गया प्रत्येक विनिश्चय या आदेश, यदि क्रियान्वित न किया गया हो तो, -

(क) केन्द्रीय रजिस्ट्रार या इस निमित्त उसके द्वारा प्राधिकृत किसी व्यक्ति द्वारा, हस्ताक्षरित प्रमाणपत्र पर सिविल न्यायालय की डिक्री समझा जाएगा और उसी रीति से निष्पादित किया जाएगा मानो वह ऐसे न्यायालय की डिक्री है और ऐसी डिक्री का केन्द्रीय रजिस्ट्रार या उसके द्वारा लिखित में इस निमित्त प्राधिकृत किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा बहुराज्य सहकारी सोसाइटी की, जिसके विरुद्ध विनिश्चय या आदेश किया गया है, किसी संपत्ति की कुर्की और विक्रय द्वारा या बिना कुर्की के विक्रय द्वारा निष्पादन किया जा सकेगा; या

(ख) जहां विनिश्चय या आदेश में धन की वसूली के लिए उपबंध है, वहां वह भू-राजस्व की बकाया की वसूली के लिए तत्समय प्रवृत्त विधि के अनुसार, निष्पादित किया जाएगा:

परंतु किसी राशि की वसूली के लिए कोई आवेदन ऐसी रीति में-

(i) कलकटर को किया जाएगा और उसके साथ केन्द्रीय रजिस्ट्रार या प्राधिकरण द्वारा या इस निमित्त लिखित रूप में उसके द्वारा प्राधिकृत किसी व्यक्ति द्वारा हस्ताक्षरित प्रमाणपत्र होगा;

(ii) उस तारीख से जो उस विनिश्चय या आदेश में नियत की गई हो, और यदि ऐसी कोई तारीख नियत नहीं की गई है तो, यथास्थिति, उस विनिश्चय या आदेश की तारीख से बारह वर्ष के भीतर किया जाएगा; या

(ग) केन्द्रीय रजिस्ट्रार द्वारा अथवा इस निमित्त उसके द्वारा लिखित रूप से प्राधिकृत किसी व्यक्ति द्वारा उस व्यक्ति की या उस बहुराज्य सहकारी सोसाइटी की जिसके विरुद्ध विनिश्चय या आदेश किया गया है, किसी संपत्ति की कुर्की और विक्रय द्वारा या कुर्की के बिना विक्रय द्वारा, निष्पादित किया जाएगा ।

95. समापक के आदेशों का निष्पादन-धारा 90 के अधीन समापक द्वारा किया गया प्रत्येक आदेश, भू-राजस्व की बकाया की वसूली के लिए तत्समय प्रवृत्त विधि के अनुसार निष्पादित किया जाएगा ।

96. अधिनिर्णय के पूर्व कुर्की-(1) जहां मध्यस्थ का समाधान हो जाता है कि धारा 84 के अधीन उसको किए गए किसी निर्देश का कोई पक्षकर ऐसे किसी विनिश्चय के, जो उस पर पारित किया जा सकता है निष्पादन को विफल करने या उसमें विलंब करने के आशय से-

(क) संपूर्ण संपत्ति या उसके किसी भाग का व्ययन करने वाला है; या

(ख) संपूर्ण संपत्ति या उसके किसी भाग को उसकी विद्यमान प्रसीमाओं से हटाने वाला है,

तो मध्यस्थ, जब तक पर्याप्त प्रतिभूति न दे दी जाए, उक्त संपत्ति या उसके ऐसे भाग को जो वह आवश्यक समझे, सशर्त कुर्क करने के लिए निदेश दे सकेगा ।

(2) उपधारा (1) के अधीन कुर्की का निष्पादन, अधिकारिता रखने वाले सिविल न्यायालय द्वारा उसी रीति से किया जाएगा जैसा कि वह अपने द्वारा पारित किसी कुर्की के बारे में करता है और उसका प्रभाव उसी आदेश के रूप में होगा

97. केन्द्रीय रजिस्ट्रार या मध्यस्थ या उसके द्वारा प्राधिकृत व्यक्ति का कुछ प्रयोजनों के लिए सिविल न्यायालय होना-केन्द्रीय रजिस्ट्रार या मध्यस्थ या इस निमित्त उसके द्वारा लिखित रूप में प्राधिकृत कोई व्यक्ति, जब इस अधिनियम के अधीन किसी संपत्ति की कुर्की और विक्रय द्वारा या कुर्की के बिना विक्रय द्वारा किसी रकम की वसूली के लिए शक्तियों का प्रयोग कर रहा हो, या ऐसी वसूली अथवा ऐसी वसूली करने में सहायता के लिए कोई कार्यवाही करने के लिए उसको किए गए किसी आवेदन पर कोई आदेश पारित कर रहा हो, तब उसे परिसीमा अधिनियम, 1963 (1963 का 36) की अनुसूची के अनुच्छेद 136 के प्रयोजनों के लिए सिविल न्यायालय समझा जाएगा ।

98. सरकार को शोध्य राशियों की वसूली-(1) किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी या किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के किसी अधिकारी या सदस्य या भूतपूर्व सदस्य द्वारा केन्द्रीय सरकार या किसी राज्य सरकार को शोध्य सभी राशियां, जिनके अंतर्गत इस अधिनियम के किसी उपबंध के अधीन, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार के पक्ष में अधिनिर्णीत खर्चे भी हैं, इस निमित्त केन्द्रीय रजिस्ट्रार द्वारा जारी किए गए प्रमाणपत्र पर, यथास्थिति, ऐसी सोसाइटी या अधिकारी या सदस्य की आस्तियों पर प्रथम भार के रूप में उसी रीति से वसूली की जाएगी जैसे भू-राजस्व की बकाया की वसूली की जाती है ।

(2) किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी से केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार को शोध्य और उपधारा (1) के अधीन वसूलीय राशियां प्रथमतः सोसाइटी की संपत्ति से और द्वितीयतः सदस्यों, भूतपूर्व सदस्यों या मृत सदस्यों की संपदाओं से, उनके दायित्व की सीमा के अधीन रहते हुए वसूल की जा सकेंगी:

परंतु भूतपूर्व सदस्यों का और मृत सदस्यों की संपदा का दायित्व सभी दशाओं में धारा 37 के उपबंधों के अधीन होगा

अध्याय 12

अपील और पुनर्विलोकन

99. अपील-(1) धारा 100 के उपबंधों के अधीन रहते हुए, इस धारा के अधीन कोई अपील निम्नलिखित के विरुद्ध हो सकेगी, अर्थात्ः -

(क) धारा 7 की उपधारा (3) के अधीन किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी को रजिस्टर करने से इंकार करने वाला केन्द्रीय रजिस्ट्रार का कोई आदेश;

(ख) धारा 11 की उपधारा (9) के अधीन किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी की उपविधियों का संशोधन रजिस्टर करने से इंकार करने वाला केन्द्रीय रजिस्ट्रार का कोई आदेश;

(ग) धारा 25 की उपधारा (4) के अधीन किसी व्यक्ति को, जो सोसाइटी की उपविधियों के अधीन सदस्यता के लिए सम्यक् रूप से अन्यथा अर्हित है सोसाइटी के सदस्य के रूप में ग्रहण करने से इंकार करने वाला या इंकार करने वाला समझा जाने वाला किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी का कोई विनिश्चय;

(घ) धारा 78 के अधीन की गई किसी जांच या धारा 80 के अधीन किए गए किसी निरीक्षण के खर्चों को प्रभाजित करने वाला धारा 81 के अधीन केन्द्रीय रजिस्ट्रार द्वारा किया गया कोई आदेश;

(ङ) धारा 83 की उपधारा (2) के अधीन केन्द्रीय रजिस्ट्रार द्वारा किया गया कोई आदेश;

(च) धारा 86 के अधीन किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी का परिसमापन करने का निदेश देने के लिए केन्द्रीय रजिस्ट्रार द्वारा किया गया कोई आदेश;

(छ) धारा 90 के अधीन किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के समापक द्वारा किया गया कोई आदेश ।

(2) उपधारा (1) के अधीन किसी विनिश्चय या आदेश के विरुद्ध कोई अपील ऐसे विनिश्चय या आदेश की तारीख से साठ दिन के भीतर विहित प्राधिकारी को की जाएगी ।

(3) अपील प्राधिकारी यदि उसका समाधान हो जाता है कि अपीलार्थी साठ दिन की अवधि के भीतर अपील करने से पर्याप्त कारण से निवारित किया गया था, तो वह अपील को ऐसी अतिरिक्त अवधि के भीतर जो ऐसा प्राधिकारी ठीक समझे, ग्रहण कर सकेगा ।

(4) इस धारा के अधीन अपील का निपटारा करने में, अपील प्राधिकारी, पक्षकारों को अपना अभ्यावेदन करने का युक्तियुक्त अवसर देने के पश्चात् उस पर ऐसे आदेश पारित कर सकेगा, जो वह प्राधिकारी उचित समझे ।

(5) अपील पर अपील प्राधिकारी का विनिश्चय या आदेश अंतिम होगा ।

100. कुछ मामलों में किसी अपील का होना-इस अधिनियम में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, जहां रिजर्व बैंक की लिखित पूर्व सम्मति से या उसकी अध्यपेक्षा पर, किसी सहकारी बैंक का-

(क) परिसमापन किया जा रहा है; या

(ख) जिसकी बाबत समामेलन या पुनर्गठन की कोई स्कीम कार्यान्वित की जा रही है,

वहां उसके विरुद्ध कोई अपील नहीं की जाएगी अथवा अनुज्ञेय नहीं होगी और रिजर्व बैंक की मंजूरी या अध्यपेक्षा प्रश्नगत नहीं की जाएगी ।

101. पुनर्विलोकन-(1) अपील प्राधिकारी, धारा 99 के अधीन किसी पक्षकार के आवेदन पर किसी मामले में अपने द्वारा किए गए आदेश का पुनर्विलोकन कर सकेगा और उसके प्रति निर्देश से ऐसे आदेश पारित किए सकेगा, जो वह ठीक समझे:

परंतु कोई ऐसा आवेदन तब तक ग्रहण नहीं किया जाएगा जब तक कि अपील प्राधिकारी का यह समाधान नहीं हो जाता कि ऐसे नए और महत्वपूर्ण विषय या साक्ष्य का पता चला है जो जब आदेश किया गया था तब सम्यक् तत्परता बरते जाने के पश्चात् भी आवेदक की जानकारी में नहीं था या जिसे उसके द्वारा उस समय प्रस्तुत नहीं किया जा सका था या अभिलेख में कोई प्रत्यक्षतः गलती या भूल हुई प्रतीत होती है या किसी अन्य पर्याप्त कारण से:

परंतु यह और कि इस उपधारा के अधीन ऐसा कोई आदेश तब तक नहीं किया जाएगा जब तक सभी हितबद्ध पक्षकारों को सूचना न दे दी हो और उनको सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर न दे दिया गया हो ।

(2) किसी पक्षकर द्वारा उपधारा (1) के अधीन पुनर्विलोकन के लिए कोई आवेदन अपील प्राधिकारी के उस आदेश के जिसका पुनर्विलोकन किया जाना है, संसूचित किए जाने की तारीख से तीस दिन के भीतर किया जाएगा

102. अंतर्वर्ती आदेश-जहां धारा 99 के अधीन कोई अपील की जाती है, वहां, अपील प्राधिकारी न्याय के उद्देश्यों को विफल होने से रोकने के लिए, अपील का विनिश्चय होने तक, ऐसे अंतर्वर्ती आदेश कर सकेगा, जिसके अंतर्गत रोक आदेश भी है, जो ऐसा प्राधिकारी उचित समझे । 

अध्याय 13

ऐसी सोसाइटियां जो राज्यों के पुनर्गठन के परिणामस्वरूप बहुराज्य सहकारी सोसाइटियां बन जाती हैं

103. राज्यों के पुनर्गठन के ठीक पूर्व कार्य कर रही सहकारी सोसाइटियां-(1) जहां राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956(1956 का 37) के भाग 2 के उपबंधों या राज्यों के पुर्नगठन से संबंधित किसी अन्य अधिनियमिति के आधार पर, कोई सहकारी सोसाइटी जिसके उद्देश्य, उस दिन के ठीक पूर्व, जिसको पुनर्गठन हुआ था, एक राज्य तक सीमित थे, उस दिन से बहुराज्य सहकारी सोसाइटी बन जाती है, वहां वह इस अधिनियम के तत्स्थानी उपबंधों के अधीन रजिस्ट्रीकृत बहुराज्य सहकारी सोसाइटी समझी जाएगी और ऐसी सोसाइटी की उपविधियां जहां तक वे इस अधिनियम के उपबंधों से असंगत नहीं हैं तब तक प्रवृत्त रहेंगी जब तक वे परिवर्तित या विखंडित कर दी जाएं

(2) यदि केन्द्रीय रजिस्ट्रार या केन्द्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किसी अधिकारी को (जिसे इस धारा में इसके पश्चात् प्राधिकृत अधिकारी कहा गया है) यह प्रतीत होता है कि उपधारा (1) में निर्दिष्ट किसी सोसाइटी का पुनर्गठन या पुनर्संगठन किया जाना आवश्यक या समीचीन है तो, यथास्थिति, केन्द्रीय रजिस्ट्रार या प्राधिकृत अधिकारी, केन्द्रीय सरकार के पूर्व अनुमोदन से ऐसी रीति से, जो विहित की जाए, किए गए उस सोसाइटी के साधारण निकाय के अधिवेशन के समक्ष पुनर्गठन या पुनर्संगठन के लिए एक स्कीम रख सकेगा जिसके अंतर्गत निम्नलिखित के बारे में भी प्रस्थापनाएं होंगी, अर्थात्ः-

(क) नई बहुराज्य सहकारी सोसाइटियां बनाना और उनमें उस सोसाइटी की आस्तियों और दायित्वों का पूर्णतः या भागतः अंतरण करना, या

(ख) उस सोसाइटी की पूर्णतः या भागतः आस्तियों और दायित्वों का, किसी ऐसी अन्य बहुराज्य सहकारी सोसाइटी को जो साधारण निकाय के उस अधिवेशन की तारीख से ठीक पूर्व विद्यमान थी (जिसे इस धारा में इसके पश्चात् विद्यमान बहुराज्य सहकारी सोसाइटी कहा गया है) अंतरण करना ।

(3) यदि उक्त अधिवेशन में उपस्थित सदस्यों के बहुमत द्वारा पारित किसी संकल्प द्वारा, उपांतरणों के बिना या ऐसे उपांतरणों सहित जिनसे केन्द्रीय रजिस्ट्रार या प्राधिकृत अधिकारी सहमत है, स्कीम को मंजूर किया जाता है, तो वह स्कीम को प्रमाणित करेगा और ऐसे प्रमाणन पर स्कीम, उस समय प्रवृत्त किसी विधि, विनियम, या उपविधि में अंतर्विष्ट किसी प्रतिकूल बात के होते हुए भी, स्कीम द्वारा प्रभावित सभी सोसाइटियों और साथ ही ऐसी सभी सोसाइटियों के शेयरधारकों और लेनदारों पर आबद्धकर होगा ।

(4) यदि उपधारा (3) के अधीन स्कीम मंजूर नहीं की जाती है, तो केन्दीय रजिस्ट्रार या प्राधिकृत अधिकारी समुचित उच्च न्यायालय के ऐसे न्यायाधीश को, जो उसके मुख्य न्यायाधिपति द्वारा इस निमित्त नामनिर्दिष्ट किया जाए, निर्दिष्ट कर सकेगा, और स्कीम के बारे में उस न्यायाधीश का विनिश्चय अंतिम होगा और स्कीम द्वारा प्रभावित सभी सोसाइटियों और साथ ही ऐसी सभी सोसाइटियों के शेयरधारकों और लेनदारों पर आबद्धकर होगा

स्पष्टीकरण-इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए समुचित उच्च न्यायालय" से ऐसा उच्च न्यायालय अभिप्रेत है जिसकी अधिकारिता की स्थानीय सीमाओं के भीतर बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के कारबार का मुख्य स्थान स्थित है

(5) इस धारा में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, जहां उपधारा (2) के अधीन किसी स्कीम में उसके खंड (ख) में निर्दिष्ट किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी की आस्तियों और दायित्वों के अंतरण की बाबत कोई प्रस्थापना है, वहां ऐसी स्कीम ऐसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी या उसके शेयरधारकों और लेनदारों पर तब तक आबद्धकर नहीं होगी जब तक ऐसी अंतरण की बाबत प्रस्थापना उस बहुराज्य सहकारी सोसाइटी द्वारा उसके साधारण निकाय के अधिवेशन में उपस्थित सदस्यों के बहुमत से पारित संकल्प द्वारा स्वीकार नहीं कर ली जाती है ।

अध्याय 14

अपराध और शास्तियां

104. अपराध और शास्तियां-(1) कोई बहुराज्य सहकारी सोसाइटी या उसका कोई अधिकारी या सदस्य जानबूझकर कोई मिथ्या विवरणी देगा या मिथ्या जानकारी देगा या इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन जारी किए गए किसी समन, अध्यपेक्षा या विधिपूर्ण लिखित आदेश की, कोई व्यक्ति जानबूझकर या किसी युक्तियुक्त हेतुक के बिना अवज्ञा करेगा या इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन इस निमित्त प्राधिकृत किसी व्यक्ति द्वारा उससे अपेक्षित कोई जानकारी जानबूझकर नहीं देगा, तो वह जुर्माने से, जो दो हजार रुपए से कम का नहीं होगा, और जो दस हजार रुपए तक का हो सकेगा, दंडनीय होगा ।

(2) कोई नियोजक, जो पर्याप्त कारण के बिना, किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी को धारा 60 के अधीन उसके द्वारा कटौती की गई रकम का उस तारीख से, जिसको ऐसी कटौती की गई है, चौदह दिन की अवधि के भीतर संदाय करने में असफल रहेगा, ऐसी किसी कार्यवाही पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, जो उस समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन उसके विरुद्ध की जा सकती है, जुर्माने से, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, दंडनीय होगा

(3) कोई अधिकारी या अभिरक्षक जो किसी ऐसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी से, जिसका वह अधिकारी या अभिरक्षक है, संबंधित बहियों, लेखाओं, दस्तावेजों, अभिलेखों, नकद प्रतिभूति और अन्य संपत्ति की अभिरक्षा, धारा 54 या धारा 70 या धारा 78 या धारा 79 या धारा 89 के अधीन हकदार किसी व्यक्ति को देने में जानबूझकर असफल रहेगा, जुर्माने से, जो दो हजार रुपए तक का हो सकेगा, दंडनीय होगा और चालू रहने वाले भंग की दशा में अतिरिक्त जुर्माने से, जो उस प्रत्येक दिन के लिए, जिसके दौरान ऐसा भंग, ऐसे प्रथम भंग के लिए दोषसिद्धि के पश्चात् चालू रहता है, पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, दंडनीय होगा ।

(4) जो कोई धारा 38 की उपधारा (1) के परन्तुक के अधीन प्रतिनिधियों के निर्वाचन या बोर्ड के सदस्यों के निर्वाचन से पूर्व; उसके दौरान या पश्चात्-

(क) किसी नामनिर्देशन पत्र को कपटपूर्वक विरूपित करेगा या कपटपूर्वक नष्ट करेगा; या

(ख) रिटर्निंग आफिसर के प्राधिकार द्वारा या उसके अधीन लगाई गई किसी सूची, सूचना या अन्य दस्तावेज को कपटपूर्वक विरूपित करेगा, नष्ट करेगा या हटाएगा; या

(ग) किसी मतपत्र या किसी मतपत्र पर के शासकीय चिह्न या पहचान की किसी घोषणा को कपटपूर्वक विरूपित करेगा या कपटपूर्वक नष्ट करेगा; या 

(घ) सम्यक् प्राधिकार के बिना किसी व्यक्ति को कोई मतपत्र देगा या किसी व्यक्ति से कोई मतपत्र प्राप्त करेगा या अपने कब्जे में कोई मतपत्र रखेगा; या

(ङ) किसी मतपेटी में उस मतपत्र से भिन्न, जिसे वह उसमें डालने के लिए विधि द्वारा प्राधिकृत है, कोई अन्य चीज कपटपूर्वक डालेगा; या

(च) सम्यक् प्राधिकार के बिना किसी मतपेटी या मतपत्र को, जो निर्वाचन के प्रयोजनों के लिए तब उपयोग में हैं, नष्ट करेगा; लेगा, खोलेगा या अन्यथा उसमें हस्तक्षेप करेगा; या

(छ) यथास्थिति, कपटपूर्वक या सम्यक् प्राधिकार के बिना पूर्ववर्ती कार्यों में से कोई कार्य करने का प्रयत्न करेगा या किन्हीं ऐसे कार्यों के करने में जानबूझकर सहायता करेगा या उन कार्यों का दुष्प्रेरण करेगा; 

(ज) किसी व्यक्ति को किसी दान की प्रस्थापना करेगा या परितोषण की प्रस्थापना करने का वचन देगा, जिसका प्रत्यक्षतः या परोक्षतः यह उद्देश्य हो कि-

(i) किसी व्यक्ति को निर्वाचन में अभ्यर्थी के रूप में खड़े होने या न होने के लिए या अभ्यर्थिता वापस लेने या न लेने के लिए; अथवा

(ii) किसी सदस्य को किसी निर्वाचन में मत देने या मत देने से विरत रहने के लिए उत्प्रेरित किया जाए अथवा व्यक्ति के लिए इस प्रकार खड़ा होने या होने या इस बात के लिए कि उसने अपनी अभ्यर्थिता वापस ले ली या नहीं ली; अथवा

(iii) किसी सदस्य के लिए इस बात के लिए कि वह मत देने या मत देने से विरत रहे, ईनाम के रूप       में हो,

तो वह कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से दण्डनीय होगा ।

105. अपराधों का संज्ञान-(1) किसी महानगर मजिस्ट्रेट या किसी प्रथम वर्ग न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय से नीचे का कोई न्यायालय इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध का विचारण नहीं करेगा ।

(2) धारा 104 के अधीन अपराधों के लिए कोई अभियोजन बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के किसी सदस्य या केन्द्रीय रजिस्ट्रार द्वारा किसी सक्षम न्यायालय में लिखित रूप में फाइल किए गए परिवाद पर के सिवाय, संस्थित नहीं किया जाएगा

अध्याय 15

प्रकीर्ण

106. उपविधियों आदि की प्रति का निरीक्षण के लिए खुला रहना-प्रत्येक बहुराज्य सहकारी सोसाइटी, नियमों और उसकी उपविधियों की एक प्रति और अपने सदस्यों की एक सूची भी सोसाइटी के रजिस्ट्रीकृत पते पर, सभी युक्तियुक्त समयों पर, निःशुल्क निरीक्षण के लिए खुली रखेगी ।

107. रजिस्टरों और विवरणियों के रखने और निरीक्षण का स्थान-(1) बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के रजिस्ट्रीकरण की तारीख से प्रारंभ होने वाले सदस्यों का रजिस्टर, सदस्यों की अनुक्रमणिका, डिबेंचर धारकों का रजिस्टर और तैयार की गई सभी वार्षिक विवरणियों की प्रतियां और साथ ही प्रमाणपत्रों और दस्तावेजों की प्रतियां भी, बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के रजिस्ट्रीकृत कार्यालय में रखी जाएंगी ।

(2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट रजिस्टर, अनुक्रमणिकाएं, विवरणियां और प्रमाणपत्रों तथा अन्य दस्तावेजों की प्रतियां, कारबार समय के दौरान निम्नलिखित के निरीक्षण के लिए खुली रहेंगी (ऐसे युक्तियुक्त निर्बंधनों के अधीन रहते हुए, जिन्हें बहुराज्य सहकारी सोसाइटी अधिरोपित करे ताकि प्रत्येक दिवस में निरीक्षण के लिए कम से कम दो घंटे का समय अनुज्ञात हो), -

(क) कोई सदस्य या डिबेंचर धारक, बिना फीस के; और

(ख) कोई अन्य व्यक्ति, ऐसी राशि के संदाय पर, जो प्रत्येक निरीक्षण के लिए विहित की जाए ।

108. बहुराज्य सहकारी सोसाइटी की लेखा बहियों इत्यादि का निरीक्षण-(1) प्रत्येक बहुराज्य सहकारी सोसाइटी की लेखा बहियां और अन्य बहियां तथा कागज-पत्र निम्नलिखित द्वारा निरीक्षण के लिए कारबार के समय के दौरान खुले रहेंगे-

(i) केन्द्रीय रजिस्ट्रार, या

(ii) सरकार का ऐसा अधिकारी, जिसे केंद्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किया जाएः

परन्तु ऐसा निरीक्षण, ऐसी सोसाइटी या उसके किसी अधिकारी को कोई पूर्व सूचना दिए बिना किया जा सकेगा;

(iii) बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के सदस्य ।

(2) बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के प्रत्येक निदेशक, अन्य अधिकारी या कर्मचारी का यह कर्तव्य होगा कि वह, उपधारा (1) के अधीन निरीक्षण करने वाले व्यक्ति को, बहुराज्य सहकारी सोसाइटी की, उसकी अभिरक्षा या नियंत्रण में रखी गई ऐसी सभी लेखा बहियों और अन्य बहियों तथा कागज-पत्रों को प्रस्तुत करे और उक्त व्यक्ति द्वारा अपेक्षित, ऐसी सोसाइटी के कार्यों से संबंधित ऐसा कोई विवरण, जानकारी या स्पष्टीकरण ऐसे समय के भीतर और ऐसे स्थान पर उसे दे, जिसे वह विनिर्दिष्ट करे ।

(3) बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के प्रत्येक निदेशक, अन्य अधिकारी या कर्मचारी का यह भी कर्तव्य होगा कि वह, इस धारा के अधीन निरीक्षण करने वाले व्यक्ति को निरीक्षण से संबंधित ऐसी सभी सहायता करे, जिसे देने की बहुराज्य सहकारी सोसइटी युक्तियुक्त रूप से प्रत्याशा करे ।

(4) इस धारा के अधीन निरीक्षण करने वाला व्यक्ति, निरीक्षण के दौरान-

(i) लेखा बहियों, अन्य बहियों या कागज-पत्रों की प्रतियां बना सकेगा या बनवा सकेगा, या

(ii) इस बात के संकेत के रूप में कि उनका निरीक्षण कर लिया गया है, उन पर कोई पहचान चिह्न लगा सकेगा या लगवा सकेगा ।

(5) तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में किसी प्रतिकूल बात या संविदा के होते हुए भी, इस धारा के अधीन निरीक्षण करने वाले केन्द्रीय रजिस्ट्रार या उपधारा (1) के खंड (ii) के अधीन प्राधिकृत किसी अधिकारी के पास निम्नलिखित विषयों के संबंध में वही शक्तियां होंगी, जो सिविल प्रकिया संहिता, 1908 (1908 का 5) के अधीन सिविल न्यायालय में वाद का विचारण करते समय निहित होती हैं, अर्थात्ः-

(i) लेखा बहियों और अन्य दस्तावेजों का प्रकटीकरण और ऐसे स्थान और ऐसे समय पर, जो ऐसे व्यक्ति द्वारा विनिर्दिष्ट किया जाए, प्रस्तुत किया जाना;

(ii) व्यक्तियों को समन करना और उन्हें हाजिर कराना तथा उनकी शपथ पर परीक्षा करना;

(iii) बहुराज्य सहकारी सोसाइटी की किन्हीं बहियों, रजिस्टरों और अन्य दस्तावेजों का किसी भी स्थान पर निरीक्षण करना

(6) जहां इस धारा के अधीन किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी की लेखा बहियों, अन्य बहियों और कागज-पत्रों का निरीक्षण किया गया है, वहां केन्द्रीय रजिस्ट्रार या उपधारा (1) के खंड (ii) के अधीन निरीक्षण करने के लिए प्राधिकृत कोई अधिकारी केन्द्रीय सरकार को रिपोर्ट देगा ।

109. वार्षिक लेखा और तुलनपत्र-बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के प्रत्येक वार्षिक साधारण अधिवेशन में, बोर्ड बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के समक्ष निम्नलिखित रखेगा-

(क) प्रत्येक सहकारी वर्ष के अन्त पर यथा विद्यमान तुलन-पत्र; और

(ख) उस वर्ष के लिए लाभ और हानि लेखा ।

110. साधारण अधिवेशनों, बोर्ड के अधिवेशनों और अन्य अधिवेशनों की कार्यवाही का कार्यवृत्त-(1) प्रत्येक बहुराज्य सहकारी सोसइटी, प्रत्येक साधारण अधिवेशन की कार्यवाही और उसके बोर्ड या बोर्ड की प्रत्येक समिति के प्रत्येक अधिवेशन की कार्यवाही का कार्यवृत्त, ऐसे प्रत्येक अधिवेशन की समाप्ति के तीस दिन के भीतर तैयार कराके और इस प्रयोजन के लिए रखी गई बही में उनके क्रमवर्ती रूप में संख्यांकित पृष्ठों पर प्रविष्टियां कराके रखवाएगी

(2) ऐसी बही का प्रत्येक पृष्ठ निम्नलिखित द्वारा आद्याक्षरित या हस्ताक्षरित होगा और ऐसी बही में प्रत्येक अधिवेशन की कार्यवाही के अभिलेख के अंतिम पृष्ठ पर तारीख डाली जाएगी और उस पर उन्हीं के हस्ताक्षर होंगे

(क) बोर्ड या उसकी समिति के अधिवेशन की कार्यवाही के कार्यवृत्त के मामले में, उक्त अधिवेशन के सभापति या अगले उत्तरवर्ती अधिवेशन के सभापति द्वारा;

(ख) साधारण अधिवेशन की कार्यवाही के कार्यवृत्त के मामले में, पूर्वोक्त तीस दिन की अवधि के भीतर उस अधिवेशन के सभापति द्वारा या उस अवधि के दौरान उस सभापति की मृत्यु या असमर्थता की दशा में, बोर्ड द्वारा इस प्रयोजन के लिए सम्यक् रूप से प्राधिकृत बोर्ड के सदस्य द्वारा ।

(3) किसी अधिवेशन की कार्यवाही का कार्यवृत्त, किसी भी दशा में, पूर्वोक्त किसी बही में चिपका कर या किसी अन्य रूप में नहीं जोड़ा जाएगा ।

(4) प्रत्येक अधिवेशन के कार्यवृत्त में, उसकी कार्यवाही का उचित और सही सार होगा ।

(5) पूर्वोक्त अधिवेशनों में से किसी में की गई अधिकारियों की सभी नियुक्तियां अधिवेशन के कार्यवृत्त में सम्मिलित की जाएंगी ।

(6) बोर्ड या बोर्ड की समिति के अधिवेशन की दशा में, कार्यवृत्त में निम्नलिखित भी होंगे, -

(क) अधिवेशन में उपस्थित बोर्ड के सदस्यों के नाम; और

(ख) अधिवेशन में पारित प्रत्येक संकल्प की दशा में, बोर्ड के ऐसे सदस्यों, यदि कोई हों, के नाम जो संकल्प से विसम्मत थे या जो सहमत नहीं थे ।

(7) उपधारा (1) से उपधारा (6) तक में की कोई बात, ऐसे किसी कार्यवृत्त में किसी ऐसे मामले को सम्मिलित करने वाली नहीं समझी जाएगी, जो अधिवेशन के अध्यक्ष की राय में, -

(क) किसी व्यक्ति के लिए युक्तियुक्त रूप में मानहानिकारक है या हो सकती है;

(ख) कार्यवाहियों से असंगत या तत्त्वहीन हैं; या

(ग) बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के हितों के लिए हानिकारक है ।

स्पष्टीकरण-अध्यक्ष कार्यवृत्तों में किसी मामले को सम्मिलित करने या सम्मिलित न करने के संबंध में उस उपधारा में विनिर्दिष्ट आधारों पर पूर्ण विवेक का प्रयोग करेगा ।

111. कार्यवृत्तों का साक्ष्य होना-धारा 110 के उपबंधों के अनुसार रखे गए अधिवेशन के कार्यवृत्त, उसमें अभिलिखित कार्यवाहियों का साक्ष्य होगा ।

112. जहां कार्यवृत्त सम्यक् रूप से बनाया गया हो और हस्ताक्षरित हो वहां उसके बारे में उपधारणाएं-जहां किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के किसी साधारण अधिवेशन या इसके बोर्ड या बोर्ड की किसी समिति के किसी अधिवेशन की कार्यवाहियों के कार्यवृत्त, धारा 110 के उपबंधों के अनुसार रखे जाते हैं, वहां, जब तक कि प्रतिकूल साबित न हो जाए, अधिवेशन को सम्यक् रूप से बुलाया गया और हुआ समझा जाएगा और उसकी सभी कार्यवाहियों को भी सम्यक्तः किया गया समझा जाएगा और विशिष्ट रूप से अधिवेशन में की गई निदेशकों या समापकों की नियुक्तियों को विधिमान्य समझा जाएगा ।

113. साधारण अधिवेशनों की कार्यवृत्त बहियों का निरीक्षण-किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के किसी साधारण अधिवेशन की कार्यवाही के कार्यवृत्त से युक्त बहियां, -

(क) उस सोसाइटी के रजिस्ट्रीकृत कार्यालय में रखी जाएंगी, और

(ख) कारबार समय के दौरान, उस सोसाइटी के किसी सदस्य के निरीक्षण के लिए उपलब्ध रहेंगी ।

114. समापक का लोक सेवक होना-इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन समापक के रूप में नियुक्त कोई व्यक्ति, भारतीय दण्ड संहिता (1860 का 45) की धारा 21 के अर्थ में लोक सेवक समझा जाएगा ।

115. वादों के संबंध में सूचना का आवश्यक होना-किसी बहुराज्य सहकारी सोसइटी या उसके अधिकारियों में से किसी के विरुद्ध सोसाइटी के गठन, प्रबंध या कारबार से संबंधित किसी कार्य की बाबत कोई वाद, तब तक संस्थित नहीं किया जाएगा जब तक ऐसी लिखित सूचना को, जिसमें वाद हेतुक, वादी के नाम, वर्णन और निवास-स्थान और ऐसे अनुतोष का, जिसका वह दावा करता है, कथन किया गया हो, केन्द्रीय रजिस्ट्रार को परिदत्त किए जाने या उसके कार्यालय में छोड़ दिए जाने के पश्चात् नब्बे दिन समाप्त न हो गए हों, और वादपत्र में यह कथन होगा कि ऐसी सूचना इस प्रकार परिदत्त कर दी गई है या छोड़ दी गई है ।

116. दूसरी अनुसूची का संशोधन करने की शक्ति-(1) यदि केन्द्रीय सरकार का यह समाधान हो जाता है कि किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी को राष्ट्रीय सहकारी सोसाइटी के रूप में अभिहित किया जाना चाहिए या दूसरी अनुसूची में विनिर्दिष्ट किसी राष्ट्रीय सहकारी सोसाइटी का उक्त अनुसूची से लोप किया जाना चाहिए, तो वह अधिसूचना द्वारा उक्त अनुसूची को संशोधित कर सकेगी जिससे कि बहुराज्य सहकारी सोसाइटी को उस अनुसूची में सम्मिलित किया जा सके या ऐसी राष्ट्रीय सहकारी सोसाइटी को अलग किया जा सके और तदुपरि उक्त अनुसूची को तद्नुसार संशोधित किया गया समझा जाएगा ।

(2) उपधारा (1) के अधीन बनाई गई प्रत्येक अधिसूचना की प्रतिलिपि उसके बनाए जाने के यावत्शक्य पश्चात् संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखी जाएगी ।

117. न्यायालयों की अधिकारिता का वर्जन-(1) इस अधिनियम में जैसा उपबंधित है उसके सिवाय, किसी न्यायालय को निम्नलिखित के संबंध में कोई अधिकारिता नहीं होगी, अर्थात्ः-

(क) किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी या उसकी उपविधियों या उपविधियों के किसी संशोधन का रजिस्ट्रीकरण;

(ख) किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के परिसमापन और विघटन से संबंधित कोई विषय ।

(2) जब किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी का परिसमापन किया जाता है तब ऐसी सोसाइटी के कारबार से संबंधित किसी वाद या अन्य विधिक कार्यवाहियों पर, समापक के विरुद्ध या सोसाइटी के विरुद्ध या उसके किसी सदस्य के विरुद्ध केन्द्रीय रजिस्ट्रार की इजाजत से और ऐसे निबंधनों और शर्तों के अधीन रहते हुए, जो वह अधिरोपित करे, कार्यवाही की जाएगी या उन्हें संस्थित किया जाएगा, अन्यथा नहीं ।

(3) इस अधिनियम में जैसा उपबंधित है उसके सिवाय, इस अधिनियम के अधीन किया गया कोई विनिश्चय या आदेश किसी न्यायालय में प्रश्नगत नहीं किया जाएगा ।

118. संरक्षण-केन्द्रीय रजिस्ट्रार या उसके अधीनस्थ या उसके प्राधिकार पर कार्य करने वाले किसी व्यक्ति के विरुद्ध या किसी अन्य व्यक्ति के विरुद्ध इस अधिनियम के अधीन सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए तात्पर्यित किसी बात के लिए कोई वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही नहीं होगी ।

119. शाखाएं खोलना-किसी राज्य में प्रवृ्त्त सहकारी सोसाइटियों से संबंधित किसी विधि में अंतर्विष्ट किसी प्रतिकूल बात के होते हुए भी, कोई बहुराज्य सहकारी सोसाइटी, जो सहकारी बैंक नहीं है, भारत में किसी स्थान पर शाखाएं खोल सकेगी या कारबार का स्थान बना सकेगी ।

120. विवरणियों का फाइल किया जाना-प्रत्येक बहुराज्य सहकारी सोसाइटी प्रत्येक वर्ष लेखावर्ष के बंद होने के छह मास के भीतर केन्द्रीय रजिस्ट्रार के समक्ष निम्नलिखित विवरणियां फाइल करेगीः-

(क) क्रियाकलापों की वार्षिक रिपोर्ट;

(ख) लेखाओं के संपरीक्षित विवरण;

(ग) साधारण निकाय द्वारा यथाअनुमोदित अधिशेष के निपटान की योजना;

(घ) बहुराज्य सहकारी सोसाइटी की उपविधियों के संशोधनों की सूची;

() साधारण निकाय का अधिवेशन कराने और जहां निर्वाचन होना हो वहां निर्वाचन कराने की तारीख के संबंध में घोषणा

(च) अधिनियम के किसी उपबंध के अनुसरण में केन्द्रीय रजिस्ट्रार द्वारा अपेक्षित कोई जानकारी ।

121. कुछ अधिनियमों का लागू होना-(1) कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) और एकाधिकार तथा अवरोधक व्यापारिक व्यवहार अधिनियम, 1969 (1969 का 54) के उपबंध बहुराज्य सहकारी सोसाइटियों को लागू नहीं होंगे

(2) इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन रजिस्ट्रीकृत बहुराज्य सहकारी सोसाइटियां या रजिस्ट्रीकृत समझी गई बहुराज्य सहकारी सोसाइटियां एकाधिकार तथा अवरोधक व्यापारिक व्यवहार अधिनियम, 1969 (1969 का 54) में परिभाषित एकाधिकारिक तथा अवरोधक व्यापारिक व्यवहार में भाग नहीं लेंगी ।

122. केंद्रीय सरकार की विनिर्दिष्ट बहुराज्य सहकारी सोसाइटियों को लोकहित में निदेश देने की शक्ति-यदि केन्द्रीय सरकार का यह समाधान हो जाता है कि लोकहित में या केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित या हाथ में लिए गए सहकारी उत्पादन और अन्य विकास कार्यक्रमों का समुचित रूप से क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के प्रयोजन के लिए या साधारणतया विनिर्दिष्ट बहुराज्य सहकारी सोसाइटियों के कारबार का समुचित प्रबन्ध सुनिश्चित करने के लिए या ऐसी सोसाइटी के ऐसी रीति से किए जा रहे लोकहित में क्रियाकलापों को रोकने के लिए, जो उसके सदस्यों, निक्षेपकर्ताओं या लेनदारों के हितों के लिए अहितकर  हों, साधारणतया किसी भी वर्ग की विनिर्दिष्ट बहुराज्य सहकारी सोसाइटियों को या किसी भी विनिर्दिष्ट बहुराज्य सहकारी सोसाइटी या विशेष सोसाइटियों को निदेश देना आवश्यक है, तो केन्द्रीय सरकार, समय-समय पर उसे या उन्हें निदेश दे सकेगी और, यथास्थिति, ऐसी सभी विनिर्दिष्ट बहुराज्य सहकारी सोसाइटी, या संबंधित सोसाइटियां ऐसे निदेशों का अनुपालन करने के लिए आबद्ध होगी या होंगी ।

123. विनिर्दिष्ट बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के बोर्ड का अधिक्रमण-(1) यदि केन्द्रीय सरकार की राय में, किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी का बोर्ड इस अधिनियम या नियमों या उपविधियों द्वारा उस पर अधिरोपित कर्तव्यों के पालन में बार-बार व्यतिक्रम कर रहा है या उनकी उपेक्षा करता है या उसने कोई ऐसा कार्य किया है जो सोसाइटी के या उसके सदस्यों के हितों पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला है या उसने धारा 122 के अधीन उसे दिए गए किन्हीं निदेशों का अनुपालन करने में लोप किया है या असफल रहा है या बोर्ड के गठन में अथवा कृत्य करने में गत्यावरोध आ गया है, तो केन्द्रीय सरकार, बोर्ड को अपने आक्षेपों का, यदि कोई हों, कथन करने का अवसर देने के पश्चात् और आक्षेपों पर, यदि प्राप्त हों, विचार करने पर लिखित आदेश द्वारा, बोर्ड को हटा सकेगी और एक या अधिक प्रशासकों को, जिनके लिए यह आवश्यक नहीं है कि वे सोसाइटी के सदस्य हों, सोसाइटी के कार्यकलापों का छह मास से अनधिक की ऐसी अवधि के लिए, जो आदेश में विनिर्दिष्ट की जाए और जो केन्द्रीय सरकार के विवेक पर समय-समय पर बढ़ाई जा सकेगी किन्तु जिसकी कुल अवधि एक वर्ष से अधिक नहीं होगी, प्रबन्ध करने के लिए नियुक्त कर सकेगा :

परन्तु सहकारी बैंक के मामले में, इस उपधारा के उपबंध इस प्रकार प्रभावी होंगे मानो एक वर्ष शब्दों के स्थान पर दो वर्ष" शब्द रखे गए हों ।

(2) केन्द्रीय सरकार, प्रशासक के लिए ऐसा पारिश्रमिक, जो वह ठीक समझे, नियत कर सकेगा और पारिश्रमिक का संदाय विनिर्दिष्ट बहुराज्य सहकारी सोसाइटी की निधियों में से किया जाएगा ।

(3) प्रशासक को, केन्द्रीय सरकार के नियंत्रण और ऐसे अनुदेशों के, जो वह समय-समय पर दे, अधीन रहते हुए विनिर्दिष्ट बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के बोर्ड के या किसी अधिकारी के सभी या किसी कृत्य को करने की शक्ति होगी और वह ऐसी सभी कार्रवाइयां करेगा जो सोसाइटी के हितों में अपेक्षित हों ।

(4) उपधारा (5) में जैसा उपबंधित है उसके सिवाय प्रशासक, अपनी पदावधि की समप्ति के पूर्व, विनिर्दिष्ट बहुराज्य सहकारी सोसाइटी की उपविधियों के अनुसार नए बोर्ड के गठन की व्यवस्था करेगा ।

(5) यदि, ऐसी अवधि के दौरान, जिसमें प्रशासक पदासीन है, किसी समय केन्द्रीय सरकार ऐसा करना आवश्यक या समीचीन समझे तो वह उसके कारण देते हुए लिखित आदेश द्वारा प्रशासक को ऐसी विनिर्दिष्ट बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के लिए उस सोसाइटी की उपविधियों के अनुसार नए बोर्ड के गठन के लिए व्यवस्था करने का निदेश दे सकेगी और ऐसे बोर्ड के गठन पर तुरन्त ही प्रशासक ऐसी सोसाइटी का प्रबन्ध इस प्रकार गठित नए बोर्ड को सौंप देगा और वह कृत्य करना समाप्त कर देगा ।

(6) जहां कोई विनिर्दिष्ट बहुराज्य सहकारी सोसाइटी किसी वित्तीय संस्था की ऋणी है, वहां केन्द्रीय सरकार, उपधारा (1) के अधीन उस सोसाइटी की बाबत कार्रवाई करने से पूर्व, वित्तीय संस्था से परामर्श करेगी ।

स्पष्टीकरण-धारा 122 और 123 के प्रयोजनों के लिए, विनिर्दिष्ट, बहुराज्य सहकारी सोसाइटी" से ऐसी कोई बहुराज्य सहकारी सोसाइटी अभिप्रेत है, जिसमें समादत्त शेयर पूंजी या कुल शेयरों के इक्यावन प्रतिशत से अन्यून केन्द्रीय सरकार द्वारा धारित हों ।

124. नियम बनाने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार, इस अधिनियम के उपबंधों को कार्यान्वित करने के लिए, अधिसूचना द्वारा, नियम बना सकेगी ।

(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, इन नियमों में निम्नलिखित विषयों में से सभी या किसी के लिए उपबंध किया जा सकेगा, अर्थात्ः-

(क) धारा 6 के अधीन किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन करने के लिए उपयोग किया जाने वाला प्ररूप, उस आवेदन में दी जाने वाली विशिष्टियां और उसे देने में अनुपालन की जाने वाली शर्तें, तथा ऐसे आवेदनों के विषय में प्रकिया;

() वे विषय जिनकी बाबत कोई बहुराज्य सहकारी सोसाइटी धारा 10 की उपधारा (2) के अधीन उपविधियां बना सकेगी;

(ग) वह रीति जिसमें उपविधियों के किसी संशोधन को रजिस्टर करने से इंकार करने वाले आदेश को धारा 11 की उपधारा (9) के अधीन संसूचित किया जाएगा;

(घ) वह रीति जिसमें किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी का धारा 14 के अधीन कारबार का प्रधान स्थान और रजिस्ट्रीकृत पता होगा;

() धारा 16 के अधीन किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के दायित्व की सीमा में परिवर्तन के लिए प्रक्रिया     और शर्तें;

(च) वह रीति जिसमें उपविधियों के संशोधन को रजिस्टर करने से इंकार करने का आदेश धारा 22 की उपधारा (4) के अधीन संसूचित किया जाएगा;

(छ) परिसंघीय सहकारी समितियों का वर्गीकरण और धारा 23 की उपधारा (3) के अधीन उनको लागू होने वाले अन्य निबंधन और शर्तें;

(ज) धारा 33 में निर्दिष्ट सदस्य से भिन्न सोसाइटी की शेयर पूंजी धारण करने पर निर्बंधन;

(झ) धारा 38 की उपधारा (1) के परन्तुक के अधीन साधारण निकाय का प्रतिनिधित्व करने वाले छोटे निकाय का गठन और शक्तियां;

(ञ) ऐसी अवधि जिसके भीतर धारा 39 के अधीन साधारण वार्षिक अधिवेशन बुलाया जाएगा और ऐसे अधिवेशनों में प्रक्रिया तथा ऐसे अधिवेशनों द्वारा प्रयोग की जाने वाली शक्तियां;

(ट) धारा 45 की उपधारा (2) के अधीन बोर्डों के सदस्यों का गुप्त मतदान द्वारा निर्वाचन;

(ठ) धारा 48 की उपधारा (1) के दूसरे परन्तुक के अधीन सदस्यों का नामनिर्देशन;

(ड) यथास्थिति, ऐसे अतिरिक्त उपाय और कार्य, जो धारा 49 के अधीन बोर्ड द्वारा किए जा सकेंगे;

(ढ) धारा 51 की उपधारा (3) के अधीन मुख्य कार्यपालक को संदेय वेतन और भत्ते तथा उसकी सेवा के अन्य निबंधन और शर्तें;

(ण) वे शर्तें जिनके अधीन रहते हुए बोर्ड, धारा 53 की उपधारा (1) के अधीन कार्यपालक समिति और अन्य समितियां या उपसमितियां गठित कर सकेगा;

() ऐसे व्यक्ति जिनके द्वारा और ऐसे प्ररूप जिसमें बहुराज्य सहकारी सोसाइटियों की बहियों में प्रविष्टियों की प्रतियों को धारा 58 के अधीन प्रमाणित किया जा सकेगा और ऐसी प्रतियों के प्रदाय के लिए उद्गृहीत किए जाने वाले प्रभार;

(थ) धारा 61 के खंड (छ) के अधीन कतिपय निर्बंधनों और शर्तों पर बहुराज्य सहकारी सोसाइटी को सहायता देना;

() वे शर्तें जिनके अधीन लाभों का वितरण किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के सदस्यों को किया जा सकेगा और उस लाभांश की अधिकतम दर जो बहुराज्य सहकारी सोसाइटियों द्वारा धारा 63 के अधीन संदत्त की जा सकेगी;

(ध) धारा 69 की उपधारा (1) के अधीन अभिदायी भविष्य निधि की स्थापना;

(न) धारा 90 की उपधारा (2) के खंड (ट) के अधीन अधिशेष के निपटान की रीति;

(प) वह रीति जिसमें केन्द्रीय रजिस्ट्रार द्वारा धारा 91 के खंड (ख) के अधीन अधिशेष आस्तियों का केन्द्रीय सरकार की पूर्व मंजूरी से विभाजन किया जाएगा;

(फ) अपील प्राधिकारी जो धारा 99 की उपधारा (2) के अधीन विनिर्दिष्ट किया जाए;

(ब) ऐसी सोसाइटियों के, जो किन्हीं राज्यों के पुनर्गठन के परिणामस्वरूप बहुराज्य सहकारी सोसाइटियां बन जाती हैं, पुनर्गठन और पुनः संरचना के लिए धारा 103 के अधीन प्रकिया;

(भ) धारा 107 की उपधारा (2) के खंड (ख) के अधीन फीस के संदाय पर सोसाइटी के अभिलेखों का निरीक्षण ।

(म) कोई अन्य विषय जो विहित किया जाना अपेक्षित है या विहित किया जाए ।

(3) इस धारा के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम, बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किन्तु उस नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।

125. कठिनाइयों को दूर करने की शक्ति-(1) यदि इस अधिनियम के उपबंधों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है तो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा, ऐसे नियम बना सकेगी जो इस अधिनियम के उपबंधों से असंगत न हों और जो उस कठिनाई को दूर करने के लिए आवश्यक प्रतीत होते हों:

परन्तु इस धारा के अधीन कोई आदेश, इस अधिनियम के प्रारंभ से दो वर्ष की समाप्ति के पश्चात् नहीं किया जाएगा

(2) इस धारा के अधीन किया गया प्रत्येक आदेश, किए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखा जाएगा ।

126. निरसन और व्यावृत्ति-(1) बहुराज्य सहकारी सोसइटी अधिनियम, 1984 (1984 का 51) इसके द्वारा निरसित किया जाता है ।

(2) निरसन के संबंध में साधारण खंड अधिनियम, 1897 (1897 का 10) में अंतर्विष्ट उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, कोई अधिसूचना, नियम, आदेश, अपेक्षा, रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र, सूचना, विनिश्चय, निदेश, अनुमोदन, प्राधिकरण, सहमति, आवेदन, अनुरोध या बात, जो बहुराज्य सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 1984 (1984 का 51) के अधीन जारी की गई/किया गया, दिया गया या की गई हो, यदि इस अधिनियम के प्रारंभ के समय प्रवृत्त है तो उसी प्रकार प्रवृत्त बनी रहेगी और प्रभावी होगी मानो वह इस अधिनियम के तत्स्थानी उपबंधों के अधीन जारी की गई/किया गया, दिया गया या की गई है ।

(3) इस अधिनियम के प्रारंभ के ठीक पूर्व विद्यमान प्रत्येक बहुराज्य सहकारी सोसाइटी, जो सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 1912 (1912 का 2) के अधीन या किसी राज्य में प्रवृत्त सहकारी सोसाइटियों से संबंधित किसी अन्य अधिनियम के अधीन या बहुएकक सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 1942 (1942 का 6) के या बहुराज्य सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 1984 (1984 का 51) के उपबंधों के अनुसरण में रजिस्ट्रीकृत रही हैं, इस अधिनियम के तत्स्थानी उपबंधों के अधीन रजिस्टर की गई समझी जाएगी और ऐसी सोसाइटी की उपविधियां, जहां तक वे इस अधिनियम या नियमों के उपबंधों से असंगत नहीं हैं तब तक प्रवृत्त बनी रहेंगी जब तक कि वे परिवर्तित या विखंडित नहीं की जातीं ।

(4) उपधारा (1) में निर्दिष्ट अधिनियमों में से किसी अधिनियम के अधीन की गई सभी नियुक्तियां, बनाए गए नियम और किए गए आदेश, जारी की गई सभी अधिसूचनाएं और सूचनाएं और संस्थित किए गए सभी वाद और अन्य कार्यवाहियां, जहां तक वे इस अधिनियम के उपबंधों से असंगत नहीं हैं, क्रमशः इस अधिनियम के अधीन की गई, बनाए गए, किए गए, जारी की गई या संस्थित किए गए समझे जाएंगे सिवाय इसके कि किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के रजिस्ट्रीकरण को रद्द करने के लिए किया गया आदेश, जब तक कि सोसाइटी पहले से ही अंतिम रूप से समाप्त कर दी गई हो, उसके परिसमापन के लिए धारा 86 के अधीन किया गया आदेश समझा जाएगा

 (5) इस अधिनियम के उपबंध इस अधिनियम के प्रारंभ के समय लंबित-

(क) बहुराज्य सहकारी सोसाइटी के रजिस्ट्रीकरण के लिए किसी आवेदन को;

(ख) किसी बहुराज्य सहकारी सोसाइटी की उपविधियों के संशोधन के रजिस्ट्रीकरण के लिए किसी आवेदन को,

और उनके परिणामस्वरूप कार्यवाहियों को तथा उनके अनुसरण में अनुदत्त किसी रजिस्ट्रीकरण को लागू होंगे ।

(6) इस अधिनियम में जैसा अन्यथा उपबंधित है उसके सिवाय, इस अधिनियम के प्रारंभ के समय किसी न्यायालय में या केन्द्रीय रजिस्ट्रार या किसी अन्य प्राधिकारी के समक्ष लम्बित कोई विधिक कार्यवाही उस न्यायालय में या केन्द्रीय रजिस्ट्रार या उस प्राधिकारी के समक्ष ऐसे जारी रहेगी मानो यह अधिनियम पारित ही हुआ हो

पहली अनुसूची

[धारा 3(छ) देखिए]

सहकारिता के सिद्धांत

1. स्वैच्छिक और खुली सदस्यता-सहकारी समितियां स्वैच्छिक संगठन हैं और लिंग, सामाजिक असमानता, जातिगत, राजनैतिक आदर्शों या धार्मिक विचार के आधार पर बिना किसी भेदभाव के ऐसे सभी व्यक्तियों के लिए जो अपनी सेवाओं का उपयोग करने में समर्थ हैं और सदस्यता के दायित्वों को स्वीकार करने के लिए इच्छुक हैं, खुली हैं

2. लोकतांत्रिक सदस्य नियंत्रण-सहकारी समितियां, उनके ऐसे सदस्यों द्वारा नियंत्रित, लोकतांत्रिक संगठन हैं जो उनकी नीतियों को निर्धारित करने और विनिश्चय करने में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं । इन सहकारी समितियों के निर्वाचित प्रतिनिधि उनके सदस्यों के प्रति उत्तरदायी और जवाबदार हैं ।

3. सदस्यों की आर्थिक भागीदारी-सदस्य अपनी सहकारी समितियों की पूंजी में समान रूप से अंशदान करते हैं और उसे लोकतांत्रिक रूप से नियंत्रित करते हैं । आर्थिक परिणामों से उद्भूत अधिशेष का कम से कम एक भाग, सहकारी समितियों की सम्मिलित सम्पत्ति होगी । शेष अधिशेष का उपयोग, सहकारी समिति में सदस्यों को उनके अंश के अनुपात में फायदा पहुंचाने के लिए किया या सकेगा ।

4. स्वायत्तता और स्वतंत्रता-सहकारी समितियां, अपने सदस्यों द्वारा नियंत्रित स्वायत्त, शासित और स्वावलंबी संगठन हैं । यदि सहकारी समितियां अन्य संगठनों के साथ, जिनके अंतर्गत सरकार भी है, करार करती है, या बाह्य स्रोतों से पूंजी इकट्ठी करती है तो वे ऐसा उन निबंधनों पर करेंगी जिनसे सदस्यों द्वारा उनका लोकतांत्रिक नियंत्रण सुनिश्चित हो सके और सहकारी स्वायत्ता बनी रह सके ।

5. शिक्षा, प्रशिक्षण और सूचना-सहकारी समितियां अपने सदस्यों, निर्वाचित प्रतिनिधियों और कर्मचारियों को शिक्षा और प्रशिक्षण प्रदान करेंगी ताकि वे अपनी सहकारी समितियों के विकास में प्रभावी तौर पर योगदान कर सकें वे साधारण जनता, विशेष रूप से युवा वर्ग और नेताओं को सहकारिता की प्रकृति और उनके फायदों की भी जानकारी देती हैं

6. सहकारी समितियों में सहकारिता-सहकारी समितियां उपलभ्य स्थानीय, प्रादेशिक, राष्ट्रीय और अन्तरराष्ट्रीय संरचनाओं के माध्यम से साथ-साथ काम करके अपने सदस्यों की अत्यधिक प्रभावी रूप से सेवा करती हैं और सहकारी आन्दोलन को सशक्त बनाती हैं ।

7. समुदाय के लिए चिन्ता-अपने सदस्यों की आवश्यकताओं पर ध्यान केन्द्रित करने के साथ-साथ, अपने सदस्यों द्वारा स्वीकार की गई नीतियों के माध्यम से समुदाय के सतत् विकास के लिए कार्य करती हैं । 

दूसरी अनुसूची

[धारा 3(द) और धारा 116 देखिए]

राष्ट्रीय सहकारी सोसाइटियों की सूची

                1. नेशनल कोआपरेटिव लैंड डेवलपमेंट बैंक्स फेडरेशन लिमिटेड, मुम्बई ।

                2. नेशनल फेडरेशन आफ स्टेट कोआपरेटिव बैंक्स लिमिटेड, मुम्बई ।

                3. नेशनल कोआपरेटिव यूनियन आफ इंडिया लिमिटेड, नई दिल्ली ।

                4. नेशनल एग्रीकल्चरल कोआपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन आफ इंडिया लिमिटेड, नई दिल्ली ।

                5. नेशनल कोआपरेटिव कंज्यूमर्स फेडरेशन आफ इंडिया लिमिटेड, नई दिल्ली ।

                6. नेशनल फेडरेशन आफ कोआपरेटिव शुगर फैक्टरीज लिमिटेड, नई दिल्ली ।

                7. नेशनल फेडरेशन आफ इंडस्ट्रियल कोआपरेटिव लिमिटेड, नई दिल्ली ।

                8. नेशनल कोआपरेटिव हाउसिंग फेडरेशन लिमिटेड, नई दिल्ली ।

                9. इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइजर कोआपरेटिव लिमिटेड, नई दिल्ली ।

                10. आल इंडिया फेडरेशन ऑफ कोआपरेटिव स्पिनिंग मिल्स लिमिटेड, मुम्बई ।

                11. आल इंडिया इंडस्ट्रियल कोआपरेटिव बैंक्स फेडरेशन, लिमिटेड, बंगलौर ।

                12. नेशनल कोआपरेटिव डेरी फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड, आनन्द ।

                13. पेट्रोफिल्स कोआपरेटिव लिमिटेड, बड़ोदरा ।

                14. नेशनल हैवी इंजीनियरिंग कोआपरेटिव लिमिटेड, पुणे ।

                15. आल इंडिया हैंडलूम फैब्रिक्स मार्केटिंग को आपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड, नई दिल्ली ।

                16. नेशनल फेडरेशन आफ अरबन कोआपरेटिव बैंक्स एंड क्रेडिट सोसाइटीज लिमिटेड, नई दिल्ली । 

                17. कृषक् भारती कोआपरेटिव लिमिटेड, नई दिल्ली ।

                18. नेशनल फेडरेशन आफ फिशरमेंस कोआपरेटिव लिमिटेड, नई दिल्ली ।

                19. नेशनल फेडरेशन आफ लेबर कोआपरेटिव लिमिटेड, नई दिल्ली ।

                20. नेशनल कोआपरेटिव टुबैको ग्रोअर्स फेडरेशन लिमिटेड, आनन्द ।

                21. ट्राइबल कोआपरेटिव मार्केटिंग डेवलमेंट फेडरेशन आफ इंडिया लिमिटेड, नई दिल्ली ।

 

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