माल बहुविध परिवहन अधिनियम, 1993
(1993 का अधिनियम संख्यांक 28)
[2 अप्रैल, 1993]
बहुविध परिवहन संविदा के आधार पर भारत में किसी स्थान से भारत
के बाहर किसी स्थान को माल के बहुविध परिवहन का विनियमन करने का और उससे संबंधित या उसके
आनुषंगिक विषयों का उपबंध
करने के लिए
अधिनियम
भारत गणराज्य के चवालीसवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-
अध्याय 1
प्रारंभिक
1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारंभ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम माल बहुविध परिवहन अधिनियम, 1993 है ।
(2) इसका विस्तार जम्मू-कश्मीर राज्य के सिवाय सम्पूर्ण भारत पर है ।
(3) यह 16 अक्तूबर, 1992 को प्रवृत्त हुआ समझा जाएगा ।
2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-
[(क) वाहक" से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जो सड़क, रेल, अन्तर्देशीय जल मार्ग, समुद्र मार्ग या वायु मार्ग द्वारा माल के वहन या उसके किसी भाग को, भाड़े के लिए, पूरा करता है या पूरा करने का उत्तरदायित्व लेता है ;]
(ख) सक्षम प्राधिकारी" से इस अधिनियम के अधीन सक्षम प्राधिकारी के कृत्यों का निर्वहन करने के लिए केंद्रीय सरकार द्वारा, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, प्राधिकृत व्यक्ति या प्राधिकारी अभिप्रेत है ;
(ग) परेषिती" से बहुविध परिवहन संविदा में परेषिती के रूप में नामित व्यक्ति अभिप्रेत है ;
(घ) परेषण" से बहुविध परिवहन के लिए किसी बहुविध परिवहन प्रचालक को सौंपा गया माल अभिप्रेत है ;
(ङ) परेषक" से बहुविध परिवहन संविदा में परेषक के रूप में नामित ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जिसके द्वारा या जिसकी ओर से ऐसी संविदा के अन्तर्गत आने वाला माल बहुविध परिवहन के लिए, किसी बहुविध परिवहन प्रचालक को सौंपा जाता है ;
(च) परिदान" से अभिप्रेत है,-
(i) किसी परक्राम्य बहुविध परिवहन दस्तावेज की दशा में परेषिती को या परेषण को प्राप्त करने के हकदार किसी अन्य व्यक्ति को परेषण का परिदान करना या उसके व्ययनाधीन रखा जाना ;
(ii) किसी अपरक्राम्य बहुविध परिवहन दस्तावेज की दशा में, परेषिती को या परेषिती की ओर से परेषण का परिदान प्रतिग्रहण करने के लिए उसके द्वारा प्राधिकृत किसी व्यक्ति को परेषण का परिदान करना या उसके व्ययनाधीन रखा जाना ;
(छ) पृष्ठांकिती" से वह व्यक्ति अभिप्रेत है जिसके पक्ष में कोई पृष्ठांकन किया जाता है, और उत्तरोत्तर पृष्ठांकनों की दशा में, वह व्यक्ति अभिप्रेत है जिसके पक्ष में अंतिम पृष्ठांकन किया जाता है ;
(ज) पृष्ठांकन" से अभिप्रेत है, परेषिती या पृष्ठांकिती द्वारा परक्राम्य बहुविध परिवहन दस्तावेज पर ऐसा निदेश जोड़ने के पश्चात् हस्ताक्षर करना कि ऐसी दस्तावेज में उल्लिखित माल में की संपत्ति किसी विनिर्दिष्ट व्यक्ति को संक्रांत की जाए ;
1[(झ) माल" से कोई संपत्ति अभिप्रेत है जिसके अंतर्गत जीवित पशु, आधान, पट्टिकाएं या परिवहन या पैकेज की ऐसी अन्य वस्तुएं हैं जिनका परेषक द्वारा, इस बात पर ध्यान दिए बिना कि ऐसी संपत्ति डेक पर है या उसमें ले जाई जानी है या ले जाई जाती है, प्रदाय किया गया है ;]
(ञ) परिवहन का ढंग" से [सड़क, वायु, रेल,] अन्तर्देशीय जल मार्ग या समुद्र मार्ग द्वारा माल का वहन अभिप्रेत है ;
1[(ट) बहुविध परिवहन" से भारत में माल के प्रतिग्रहण के स्थान से भारत के बाहर माल के परिदान के स्थान तक किसी बहुविध परिवहन संविदा के अधीन परिवहन की कम से कम दो विभिन्न रीतियों द्वारा माल का वहन अभिप्रेत है ;
(ठ) बहुविध परिवहन संविदा" से ऐसी संविदा अभिप्रेत है जिसके अधीन बहुविध परिवहन प्रचालक, भाड़े के संदाय के लिए बहुविध परिवहन करने का उत्तरदायित्व लेता है या उसको कराता है ;
(ठक) बहुविध परिवहन दस्तावेज" से ऐसा परक्राम्य या अपरक्राम्य दस्तावेज अभिप्रेत है जो बहुविध परिवहन संविदा का साक्ष्य है और जिसे लागू होने वाली विधि द्वारा अनुज्ञात इलैक्ट्रॉनिक डाटा अदली-बदली संदेशों द्वारा प्रतिस्थापित किया जा सकता है ;]
(ड) बहुविध परिवहन प्रचालक" से ऐसा कोई व्यक्ति अभिप्रेत है जो,-
(i) अपनी ओर से या उसकी ओर से कार्य करने वाले किसी अन्य व्यक्ति के माध्यम से बहुविध परिवहन संविदा करता है ;
(ii) मालिक के रूप में कार्य करता है 1[न कि परेषक या परेषिती या बहुविध परिवहन में भाग लेने वाले वाहक के अभिकर्ता के रूप में] और जो उक्त संविदा का पालन करने का उत्तरदायित्व लेता है ; और
(iii) धारा 4 की उपधारा (3) के अधीन रजिस्ट्रीकृत है ;
(ढ) परक्राम्य बहुविध परिवहन दस्तावेज" से ऐसी बहुविध परिवहन दस्तावेज अभिप्रेत है जो,-
(i) आदेशानुसार या धारक के पक्ष में बनाई गई है ; या
(ii) आदेशानुसार बनाई गई है और पृष्ठांकन द्वारा अंतरणीय है ; या
(iii) धारक के पक्ष में बनाई गई है और पृष्ठांकन के बिना अंतरणीय है ;
(ण) अपरक्राम्य बहुविध परिवहन दस्तावेज" से ऐसी बहुविध परिवहन दस्तावेज अभिप्रेत है जिसमें केवल एक नामित परेषिती उपदर्शित है ;
(त) विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है ;
(थ) रजिस्ट्रीकरण" से धारा 4 की उपधारा (3) के अधीन बहुविध परिवहन प्रचालक का रजिस्ट्रीकरण अभिप्रेत है ;
[(द) विशेष आहरण अधिकार" से लेखाओं की ऐसी इकाइयां अभिप्रेत हैं जो अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष द्वारा अवधारित की जाती हैं ;
(ध) भारसाधन में लेना" से अभिप्रेत है कि माल वहन के लिए बहुविध परिवहन प्रचालक को सौंप दिया गया है और उसने उसे प्रतिगृहीत कर लिया है ।]
अध्याय 2
बहुविध परिवहन का विनियमन
3. रजिस्ट्रीकरण के बिना किसी भी व्यक्ति द्वारा कारबार का न चलाया जाना-कोई भी व्यक्ति बहुविध परिवहन का कारबार तब तक नहीं चलाएगा या प्रारंभ नहीं करेगा जब तक कि वह इस अधिनियम के अधीन रजिस्ट्रीकृत नहीं कर लिया जाता है :
परंतु वह व्यक्ति, जो इस अधिनियम के प्रारंभ के ठीक पूर्व बहुविध परिवहन का कारबार चला रहा है, ऐसे प्रारंभ से तीन मास की अवधि तक, और यदि उसने उक्त अवधि के भीतर रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन किया है तो ऐसे आवेदन का निपटारा होने तक, ऐसा करता रह सकेगा ।
4. बहुविध परिवहन के लिए रजिस्ट्रीकरण-(1) कोई भी व्यक्ति बहुविध परिवहन का कारबार चलाने या प्रारंभ करने की बाबत रजिस्ट्रीकरण के लिए सक्षम प्राधिकारी को आवेदन कर सकेगा ।
(2) उपधारा (1) के अधीन आवेदन ऐसे प्ररूप में किया जाएगा जो विहित किया जाए और उसके साथ दस हजार रुपए की फीस होगी ।
(3) आवेदन प्राप्त होने पर, सक्षम प्राधिकारी अपना यह समाधान करेगा कि आवेदक निम्नलिखित शर्तें पूरी करता है, अर्थात् :-
[(क) (i) आवेदक ऐसी कंपनी, फर्म या स्वत्वधारी समुत्थान है जो भारत में या विदेश में पोत परिहवन या भाड़े पर अग्रेषण के कारबार में लगा हुआ है और जिसका ठीक पूर्ववर्ती वित्तीय वर्ष के दौरान न्यूनतम वार्षिक आवर्त पचास लाख रुपए या पूर्ववर्ती तीन वित्तीय वर्षों के दौरान औसत आवर्त पचास लाख रुपए है जैसा कि चार्टर्ड अकाउन्टेंट अधिनियम,1949 (1949 का 38) के अर्थान्तर्गत किसी चार्टर्ड अकाउन्टेंट द्वारा यथाप्रमाणित किया गया हो ;
(ii) यदि आवेदक उपखंड (i) में विनिर्दिष्ट कंपनी, फर्म या स्वत्वधारी समुत्थान से भिन्न कोई कंपनी, फर्म या स्वत्वधारी समुत्थान है तो ऐसी कंपनी की अभिदत्त शेयर पूंजी या फर्म के भागीदारों के पूंजी लेखा में कुल अतिशेष या स्वत्वधारी की पूंजी पचास लाख रुपए से कम नहीं है ;]
(ख) आवेदक के कम से कम दो अन्य देशों में कार्यालय अथवा अभिकर्ता या प्रतिनिधि हैं,
और इस प्रकार समाधान हो जाने पर, आवेदक को बहुविध परिवहन प्रचालक के रूप में रजिस्ट्रीकृत करेगा तथा उसे बहुविध परिवहन का कारबार चलाने या प्रारंभ करने के लिए प्रमाणपत्र देगा :
परन्तु सक्षम प्राधिकारी, ऐसे कारणों से जो लेखबद्ध किए जाएंगे, रजिस्ट्रीकरण करने से इंकार कर सकेगा यदि उसका यह समाधान हो जाता है कि आवेदक उक्त शर्तों को पूरा नहीं करता है :
[पंरतु यह और कि ऐसे किसी आवेदक को, जो भारत का निवासी नहीं है और जो पोत परिवहन के कारबार में नहीं लगा हुआ है, रजिस्ट्रीकरण तब तक अनुदत्त नहीं किया जाएगा जब तक वह भारत में कारबार का स्थान स्थापित नहीं कर लेता है :
परंतु यह भी कि ऐसे किसी आवेदक की बाबत, जो भारत का निवासी नहीं है, आवर्त उस देश में कंपनी के लेखाओं को प्रमाणित करने के लिए किसी सक्षम प्राधिकारी द्वारा प्रमाणित किया जा सकेगा ।]
1[(4) उपधारा (3) के अधीन दिया गया कोई प्रमाणपत्र तीन वर्ष की अवधि के लिए विधिमान्य होगा और समय-समय पर एक बार में तीन वर्ष की और अवधि के लिए नवीकृत किया जा सकेगा ।
(5) नवीकरण के लिए आवेदन ऐसे प्ररूप में किया जाएगा जो विहित किया जाए और उसके साथ फीस की ऐसी रकम होगी जो केंद्रीय सरकार द्वारा अधिसूचित की जाए :
परंतु ऐसी फीस दस हजार रुपए से कम नहीं होगी और बीस हजार रुपए से अधिक नहीं होगी ।
(6) सक्षम प्राधिकारी उपधारा (3) के अधीन अनुदत्त रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र का, यदि आवेदक रजिस्ट्रीकरण के समय यथा अधिकथित ऐसी शर्तों को पूरा करता रहता है तो नवीकरण करेगा ।]
5. रजिस्ट्रीकरण का रद्द किया जाना-सक्षम प्राधिकारी, रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र को, आदेश द्वारा, रद्द कर सकेगा यदि रजिस्ट्रीकरण के पश्चात् किसी भी समय उसका यह समाधान हो जाता है कि,-
(क) धारा 4 की उपधारा (2) के अधीन किसी आवेदन या उस धारा की उपधारा (5) के अधीन उसके नवीकरण में या उसके संबंध में, कोई कथन, किसी तात्त्विक विशिष्टि में गलत या मिथ्या है ; या
(ख) बहुविध परिवहन प्रचालक ने इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए नियमों के उपबंधों में से किसी का उल्ल्घंन किया है ; या
(ग) बहुविध परिवहन प्रचालक ने अपने रजिस्ट्रीकरण के पश्चात् पूर्ववर्ती दो वर्षों के दौरान कोई बहुविध परिवहन संविदा नहीं की है :
परन्तु ऐसा रजिस्ट्रीकरण तब तक रद्द नहीं किया जाएगा जब तक कि बहुविध परिवहन प्रचालक को, प्रस्थापित कार्रवाई के विरुद्ध हेतुक दर्शित करने का उचित अवसर न दे दिया गया हो ।
[6. अपील-धारा 4 के अधीन रजिस्ट्रीकरण करने या उसका नवीकरण करने से सक्षम प्राधिकारी के इंकार करने से या धारा 5 के अधीन रजिस्ट्रीकरण के रद्द करने से व्यथित कोई व्यक्ति केंद्रीय सराकर को ऐसी अवधि के भीतर, जो विहित की जाए, अपील कर सकेगा ।
(2) कोई अपील यदि वह विहित अवधि की समाप्ति के पश्चात् की जाती है तो, ग्रहण नहीं की जाएगी :
परन्तु कोई अपील विहित अवधि की समाप्ति के पश्चात् ग्रहण की जा सकेगी यदि अपीलार्थी, केन्द्रीय सराकर का यह समाधान कर देता है कि उसके पास विहित अवधि के भीतर अपील करने के लिए पर्याप्त हेतुक था ।
(3) इस धारा के अधीन प्रत्येक अपील ऐसे प्ररूप में और उतनी फीस का जो विहित की जाए, संदाय करने पर, की जाएगी तथा उसके साथ उस आदेश की एक प्रति संलग्न होगी, जिसके विरुद्ध अपील की गई है ।
(4) ऐसी कोई अपील प्राप्त होने पर, केन्द्रीय सराकर, पक्षकारों को सुनवाई का उचित अवसर देने तथा ऐसी जांच करने के पश्चात् जो वह उचित समझे, ऐसा आदेश कर सकेगी जो वह ठीक समझे ।
अध्याय 3
बहुविध परिवहन दस्तावेज
7. बहुविध परिवहन दस्तावेज का जारी किया जाना-(1) जहां परेषक और वहुविध परिवहन प्रचालक ने बहुविध परिवहन के लिए कोई संविदा की है और बहुविध परिवहन प्रचालक ने माल अपने भारसाधन में ले लिया है वहां वह, परेषक के विकल्प पर, परक्राम्य या अपरक्राम्य बहुविध परिवहन दस्तावेज जारी करेगा :
[परंतु बहुविध परिवहन प्रचालक, बहुविध परिवहन दस्तावेज को विधिमान्य बीमा रक्षण अभिप्राप्त करने के पश्चात् और उसके अस्तित्वकाल के दौरान ही जारी करेगा ।]
(2) बहुविध परिवहन दस्तावेज पर बहुविध परिवहन प्रचालक द्वारा या उसके द्वारा सम्यक् रूप से प्राधिकृत व्यक्ति द्वारा हस्ताक्षर किए जाएंगे ।
8. बहुविध परिवहन दस्तावेज का हक दस्तावेज के रूप में माना जाना-(1) यथास्थिति, परक्राम्य या अपरक्राम्य बहुविध परिवहन दस्तावेज में नामित प्रत्येक परेषिती को और ऐसी दस्तावेज के प्रत्येक पृष्ठांकिती को, जिसे उसमें उल्लिखित माल में की संपत्ति ऐसे परेषण या पृष्ठांकन के कारण संक्रांत होगी, परेषक के सभी अधिकार और दायित्व होंगे ।
(2) उपधारा (1) की कोई बात, परेषक से भाड़े का दावा करने के बहुविध परिवहन प्रचालक के अधिकार के अथवा परेषिती या पृष्ठांकिती के किसी दायित्व को प्रवर्तित करने के, उसके ऐसा परेषिती या पृष्ठांकिती होने के कारण, प्रतिकूल नहीं होगी या उस पर कोई प्रभाव नहीं डालेगी ।
9. बहुविध परिवहन दस्तावेज की अन्तर्वस्तु-बहुविध परिवहन दस्तावेज में निम्नलिखित विशिष्टियां अन्तर्विष्ट होंगी, अर्थात् :-
[(क) माल की साधारण प्रकृति, माल की पहचान के लिए आवश्यक प्रमुख संकेत चिह्न, माल का (जिसके अंतर्गत खतरनाक माल भी है) स्वरूप, पैकेजों या इकाइयों की संख्या और परेषक द्वारा घोषित रूप में माल का सकल भार तथा मात्रा ;]
(ख) माल की प्रकट दशा ;
(ग) बहुविध परिवहन प्रचालक का नाम और कारबार का मुख्य स्थान ;
(घ) परेषक का नाम ;
(ङ) यदि परेषक ने विनिर्दिष्ट किया है तो परेषिती का नाम ;
(च) बहुविध परिवहन प्रचालक द्वारा माल को भारसाधन में लेने का स्थान और तारीख ;
(छ) माल के परिदान का स्थान ;
2[(ज) बहुविध परिवहन प्रचालक द्वारा माल के परिदान की तारीख या अवधि, जो अभिव्यक्त रूप से परेषक और बहुविध परिवहन प्रचालक के बीच करार पाई गई हो ;]
(झ) दस्तावेज परक्राम्य है या अपरक्राम्य ;
(ञ) दस्तावेज जारी करने का स्थान और तारीख ;
2[(ट) यथास्थिति, परेषक या परेषिती द्वारा संदेय भाड़ा तभी वर्णित किया जाएगा जब परेषक और परेषिती दोनों के द्वारा अभिव्यक्त रूप से सहमति दी गई हो ;]
(ठ) बहुविध परिवहन प्रचालक या उसके द्वारा सम्यक् रूप से प्राधिकृत व्यक्ति के हस्ताक्षर ;
(ड) आशयित यात्रा मार्ग, परिवहन के ढंग और यानान्तरण के स्थान, यदि दस्तावेज के दिए जाने के समय ज्ञात हों ;
(ढ) लदाई की शर्तें और यह कथन कि दस्तावेज इस अधिनियम के अधीन रहते हुए और इसके अनुसार दी गई है ; और
(ण) कोई अन्य विशिष्टियां जिन्हें पक्षकार दस्तावेज में अन्तर्लिखित करने के लिए सहमत हों, यदि ऐसी कोई विशिष्टि, तत्समय प्रवृत्त किसी विधि से असंगत नहीं है :
[परंतु ऊपर सूचीबद्ध विशिष्टियों में से किसी के न होने से बहुविध परिवहन दस्तावेज के विधिक स्वरूप पर प्रभाव नहीं पड़ेगा ।]
10. बहुविध परिवहन दस्तावेज में अपवाद-(1) जहां बहुविध परिवहन प्रचालक या उसकी ओर से कार्य करने वाला कोई व्यक्ति यह जानता है या उसके पास ऐसा संदेह करने के उचित आधार हैं कि बहुविध परिवहन दस्तावेज में परेषक द्वारा दी गई विशिष्टियां वस्तुतः भारसाधन में लिए गए माल को ठीक-ठीक व्यपदिष्ट नहीं करती हैं या उसके पास ऐसी विशिष्टियों की जांच करने के उचित साधन नहीं हैं, तो बहुविध परिवहन प्रचालक या उसकी ओर से कार्य करने वाला व्यक्ति बहुविध परिवहन दस्तावेज में ऐसे किसी अपवाद को अन्तर्लिखित करेगा जिसमें ऐसी अशुद्धियां, यदि कोई हों, संदेह के आधार या विशिष्टियों की जांच करने के उचित साधनों का अभाव विनिर्दिष्ट किया जाएगा ।
(2) जहां बहुविध परिवहन प्रचालक या उसकी ओर से कार्य करने वाला व्यक्ति बहुविध परिवहन दस्तावेज में माल की प्रकट दशा से संबंधित अपवाद को अन्तर्लिखित करने में असफल रहता है वहां यह समझा जाएगा कि उसने माल को उसकी प्रकट अच्छी दशा के अनुसार ग्रहण किया है ।
11. बहुविध परिवहन दस्तावेज का साक्ष्यिक प्रभाव-धारा 10 में जैसा उपबंधित है उसके सिवाय,-
(क) बहुविध परिवहन दस्तावेज इस तथ्य का प्रथमदृष्ट्या साक्ष्य होगा कि बहुविध परिवहन प्रचालक ने दस्तावेज में वर्णित माल को भरसाधन में ले लिया है ; और
(ख) बहुविध परिवहन प्रचालक द्वारा तत्प्रतिकूल कोई सबूत ग्राह्य नहीं होगा यदि बहुविध परिवहन दस्तावेज परक्राम्य रूप में जारी किया जाता है और परेषिती को परेषित या परेषिती द्वारा अन्य पक्षकार को अंतरित किया गया है यदि परेषिती या अन्य पक्षकार ने दस्तावेज में माल के विवरण पर भरोसा करके सद्भावपूर्वक कार्य किया है ।
12. परेषक का उतरदायित्व-(1) परेषक के बारे में यह समझा जाएगा कि उसने बहुविध परिवहन प्रचालक को उसके द्वारा माल को अपने भारसाधन में लिए जाते समय धारा 9 के खंड (क) और खंड (ख) में निर्दिष्ट विशिष्टियों की, जो परेषक ने बहुविध परिवहन दस्तावेज में अन्तर्लिखित किए जाने के लिए दी हैं, पर्याप्तता और शुद्धता की गारन्टी दी है ।
(2) परेषक उपधारा (1) में निर्दिष्ट विशिष्टियों की अपर्याप्तता या अशुद्धता के परिणामस्वरूप होने वाली हानि की बाबत बहुविध परिवहन प्रचालक की क्षतिपूर्ति करेगा ।
(3) उपधारा (2) के अधीन बहुविध परिवहन प्रचालक के अधिकार से बहुविध परिवहन संविदा के अधीन परेषक से भिन्न किसी व्यक्ति के प्रति उसका दायित्व किसी भी प्रकार सीमिति नहीं होगा ।
अध्याय 4
बहुविध परिवहन प्रचालक के उत्तरदायित्व और दायित्व
13. बहुविध परिवहन प्रचालक के दायित्व का आधार-(1) बहुविध परिवहन प्रचालक, -
(क) परेषण की किसी हानि या नुकसान के ;
(ख) परेषण के परिवहन में विलंब के और ऐसे विलंब से हुई किसी पारिणामिक हानि या नुकसान के,
परिणामस्वरूप होने वाली हानि के लिए दायी होगा यदि ऐसी हानि, नुकसान या परिदान में विलंब उस समय हुआ जब परेषण उसके भारसाधन में था :
परन्तु बहुविध परिवहन प्रचालक तब दायी नहीं होगा जब वह यह साबित कर देता है कि ऐसी हानि, नुकसान या परिदान में विलंब, उसकी अथवा उसके सेवकों या अभिकर्ताओं की, किसी त्रुटि या उपेक्षा के कारण नहीं हुआ है या उसमें उसका कोई योगदान नहीं है :
परन्तु यह और कि बहुविध परिवहन प्रचालक, परिदान में विलंब से होने वाली हानि या नुकसान के लिए तब तक दायी नहीं होगा जब तक कि परेषक ने, समय से ऐसा परिदान किए जाने में, हित की घोषणा न की हो जिसे बहुविध परिवहन प्रचालक ने स्वीकार कर लिया हो :
[परंतु यह और कि बहुविध परिवहन प्रचालक, परिदान में विलंब से होने वाली हानि या नुकसान के लिए, जिनके अंतर्गत ऐसे विलंब से होने वाली पारिणामिक हानि या नुकसान भी हैं, तब तक दायी नहीं होगा जब तक कि परेषक ने, समय से ऐसा परिदान किए जाने में हित की घोषणा न की हो और जिसे बहुविध प्रचालक ने स्वीकार कर लिया हो ।]
स्पष्टीकरण-इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, परिदान में विलंब" तब हुआ समझा जाएगा जब परेषण का परिदान, अभिव्यक्त रूप से करार पाए गए समय के भीतर या ऐसे करार के अभाव में, परेषण का परिदान करने के लिए मामले की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, किसी तत्पर बहुविध परिवहन प्रचालक द्वारा अपेक्षित युक्तियुक्त समय के भीतर नहीं किया गया है ।
(2) यदि परेषण का परिदान, अभिव्यक्त रूप से करार पाई गई तारीख के पश्चात्वर्ती लगातार नब्बे दिन के भीतर या उपधारा (1) के स्पष्टीकरण में निर्दिष्ट युक्तियुक्त समय के भीतर नहीं किया जाता है तो दावेदार, परेषण के बारे में यह मान सकेगा कि वह हानिग्रस्त हो गया है ।
14. जब परेषण की प्रकृति और उसका मूल्य घोषित नहीं किया गया है और परिवहन का वह प्रक्रम जिस पर हानि या नुकसान हुआ है, ज्ञात न हो तब दायित्व की परिसीमाएं-(1) जहां बहुविध परिवहन प्रचालक ऐसे किसी परेषण की हानि या नुकसान के लिए दायी हो जाता है, जिसकी प्रकृति और जिसका मूल्य परेषक ने, बहुविध परिवहन प्रचालक द्वारा ऐसे परेषण को भारसाधन में लेने के पूर्व, घोषित नहीं किया है और परिवहन का वह प्रक्रम जिस पर ऐसी हानि या नुकसान हुआ है, ज्ञात नहीं है वहां बहुविध परिवहन प्रचालक का प्रतिकर संदाय करने का दायित्व, हानिग्रस्त या नुकसानग्रस्त परेषण के सकल भार के प्रति किलोग्राम दो विशेष आहरण अधिकारों से अथवा हानिग्रस्त या नुकसानग्रस्त प्रति पैकेज या यूनिट पर 666.67 विशेष आहरण अधिकारों से, इनमें से जो भी उच्चर हो, अधिक नहीं होगा ।
[स्पष्टीकरण-इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, जहां कोई आधान, पट्टिका या वैसी ही वस्तु एक से अधिक पैकेजों या इकाइयों से भरी हैं, वहां बहुविध परिवहन दस्तावेज में प्रगणित पैकेज या इकाइयां जैसे कि वे ऐसे आधान, पट्टिका या परिवहन की वैसी ही वस्तु में पैक किए गए हैं, पैकेज या इकाइयों के रूप में समझे जाएंगे ।]
(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, यदि बहुविध परिवहन के अन्तर्गत, बहुविध परिवहन संविदा के अनुसार, समुद्र मार्ग द्वारा या अन्तर्देशीय जलमार्ग द्वारा माल का वहन नहीं आता है तो बहुविध परिवहन प्रचालक का दायित्व उस रकम तक परिसीमित होगा जो हानिग्रस्त या नुकसानग्रस्त माल के सकल भार के प्रति किलोग्राम पर 8.33 विशेष आहरण अधिकारों से अधिक नहीं है ।
15. जब परेषण की प्रकृति और उसका मूल्य घोषित नहीं किया गया है और परिवहन का वह प्रक्रम, जिस पर हानि या नुकसान हुआ है, ज्ञात हो तब दायित्व की परिसीमाएं-जहां बहुविध परिवहन प्रचालक ऐसे किसी परेषण की हानि या नुकसान के लिए दायी हो जाता है, जिसकी प्रकृति और जिसका मूल्य परेषक ने, बहुविध परिवहन प्रचालक द्वारा ऐसे परेषण को भरसाधन में लिए जाने के पूर्व, घोषित नहीं किया है और परिवहन का वह प्रक्रम जिस पर हानि या नुकसान हुआ है, ज्ञात हैं वहां ऐसी हानि या नुकसान के लिए उसके दायित्व की परिसीमा उस सुसंगत विधि के उपबंधों के अनुसार अवधारित की जाएगी जो उस परिवहन के ढंग के संबंध में लागू हैं जिसके अनुक्रम में हानि या नुकसान हुआ था और बहुविध परिवहन संविदा में तत्प्रतिकूल कोई अनुबंध शून्य और अप्रवर्तनीय होगा :
[परंतु बहुविध परिवहन प्रचालक किसी ऐसी हानि, नकुसान या परिदान में विलंब के लिए दायी नहीं होगा जो ऐसे कारण से हुआ है जिसके लिए वाहक को लागू होने वाली विधि के अनुसार दायित्व से छूट प्राप्त है ।]
16. कतिपय परिस्थितियों के अधीन माल के परिदान में विलंब की दशा में बहुविध परिवहन प्रचालक का दायित्व-जहां परेषण के परिदान में विलंब धारा 13 की उपधारा (1) के स्पष्टीकरण में उल्लिखित किन्हीं परिस्थितियों के अधीन होता है या ऐसे विलंब से कोई पारिणामिक हानि या नुकसान होता है वहां बहुविध परिवहन प्रचालक का दायित्व ऐसे विलंबित परेषण के लिए संदेय माल-भाड़े तक सीमित होगा ।
17. प्रतिकर का निर्धारण-(1) परेषण की हानि या नुकसान के लिए प्रतिकर का निर्धारण, ऐसे परेषण के उस स्थान पर जहां और उस समय पर जब वह परेषण परेषिती को परिदत्त किया जाता है, या उस स्थान पर जहां और उस समय पर जब बहुविध परिवहन संविदा के अनुसार उसका परिदान किया जाना चाहिए था, उसके मूल्य के प्रति निर्देश से किया जाएगा ।
(2) परेषण के मूल्य का अवधारण, उस प्रचलित वस्तु विनिमय कीमत के अनुसार अथवा यदि ऐसी कोई कीमत नहीं है तो प्रचलित बाजार कीमत के अनुसार अथवा यदि प्रचलित बाजार कीमत अभिनिश्चेय नहीं है तो उसी प्रकार के और उसी मात्रा के परेषण के सामान्य मूल्य के प्रति निर्देश से किया जाएगा ।
18. बहुविध परिवहन प्रचालक के दायित्व को सीमित करने के अधिकार की हानि-बहुविध परिवहन प्रचालक इस अध्याय के किसी उपबंध के अधीन दायित्व की परिसीमा का फायदा उठाने का हकदार नहीं होगा यदि यह साबित हो जाता है कि परेषण की हानि, नुकसान या परिदान में विलम्ब बहुविध परिवहन प्रचालक के किसी कार्य या लोप के परिणामस्वरूप हुआ था जो ऐसी हानि, नुकसान या विलम्ब करने के आशय से किया गया था अथवा जो बिना सोचे-विचारे और यह जानते हुए किया गया था कि ऐसी हानि, नुकसान या विलम्ब होना अधिसंभाव्य है ।
19. माल की पूर्ण हानि के लिए बहुविध परिवहन प्रचालक के दायित्व की परिसीमा-बहुविध परिवहन प्रचालक, किसी भी दशा में, उस माल की पूर्ण हानि के लिए जिसके लिए कोई व्यक्ति इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन उसके विरुद्ध दावा करने का हकदार होगा, दायित्व से अधिक रकम के लिए दायी नहीं होगा ।
20. माल की हानि या नुकसान की सूचना-(1) बहुविध परिवहन प्रचालक द्वारा परेषिती को परेषण का परिदान बहुविध परिवहन दस्तावेज में वर्णित माल के परिदान का प्रथमदृष्ट्या साक्ष्य तब तक माना जाएगा जब तक कि बहुविध परिवहन प्रचालक को माल की हानि या नुकसान की साधारण प्रकृति की परेषिती द्वारा लिखित सूचना परेषिती को माल के सौंपे जाने के समय न दे दी गई हो ।
(2) जहां हानि या नुकसान स्पष्ट नहीं है वहां उपधारा (1) के उपबंध तब तक लागू नहीं होंगे जब तक कि माल की हानि या नुकसान की परेषिती द्वारा लिखित सूचना, परेषिती का माल के सौंपे जाने के दिन के पश्चात् लगातार छह दिन के भीतर न दे दी गई हो ।
[20क. उत्तरदायित्व की अवधि-इस अधिनियम के अधीन माल के लिए, बहुविध परिवहन प्रचालक के उत्तरदायित्व के अंतर्गत, उस समय से जब उसने माल अपने भारसाधन में लिया है, उसके परिदान के समय तक की, अवधि आएगी ।]
अध्याय 5
प्रकीर्ण
21. खतरनाक माल के लिए विशेष उपबंध-(1) जहां परेषक विहित खतरनाक माल बहुविध परिवहन प्रचालक को या ऐसे प्रचालक की ओर से कार्य करने वाले किसी व्यक्ति को सौंपता है वहां परेषक उसे खतरनाक माल की प्रकृति की और यदि आवश्यक हो तो ऐसे माल का परिवहन करते समय बरती जाने वाली पूर्वावधानियों की सूचना देगा ।
(2) जहां परेषक बहुविध परिवहन प्रचालक को या ऐसे प्रचालक की ओर से कार्य करने वाले अन्य व्यक्ति को खतरनाक माल की प्रकृति की सूचना देने में असफल रहता है और ऐसे प्रचालक या व्यक्ति को खतरनाक माल की अन्यथा जानकारी नहीं है वहां-
(क) परेषक ऐसे माल के बहुविध परिवहन के परिणामस्वरूप होने वाली सभी हानि के लिए बहुविध परिवहन प्रचालक या ऐसे प्रचालक की ओर से कार्य करने वाले अन्य व्यक्ति के प्रति दायी होगा; और
(ख) वह माल, प्रतिकर का संदाय किए बिना, किसी भी समय उतारा जा सकेगा, नष्ट किया जा सकेगा या हानि रहित किया जा सकेगा, जैसा कि परिस्थितियों में अपेक्षित हो ।
22. माल और दस्तावेजों पर धारणाधिकार रखने का बहुविध परिवहन प्रचालक का अधिकार-(1) बहुविध परिवहन प्रचालक का, जिसे बहुविध परिवहन संविदा में अनुबद्ध प्रतिफल की रकम का संदाय नहीं किया गया है, अपने कब्जे में के परेषण पर तथा दस्जावेजों पर धारणाधिकार होगा ।
(2) धारा 13, धारा 16 और धारा 18 में किसी बात के होते हुए भी, वह अवधि जिसके दौरान माल उपधारा (1) में निर्दिष्ट उसके धारणाधिकार के प्रयोग में बहुविध परिवहन प्रचालक के कब्जे में रहता है, उन धाराओं में से किसी के अधीन विलंब के समय की संगणना के प्रयोजनों के लिए सम्मिलित नहीं की जाएगी ।
23. साधारण औसत-इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध में किसी बात के होते हुए भी बहुविध परिवहन संविदा के पक्षकारों के लिए बहुविध परिवहन दस्तावेज में साधारण औसत से संबंधित कोई उपबंध सम्मिलित करना विधिपूर्ण होगा ।
स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए, साधारण औसत" से ऐसी हानि, नुकसान या व्यय अभिप्रेत है जो बहुविध परिवहन में अंतर्वलित सामान्य संकट में और हित में संपत्ति के खतरे का निवारण करने की दृष्टि से युक्तियुक्त रूप से उपगत किया गया है ।
24. अनुयोजन का निर्बन्धन-बहुविध परिवहन प्रचालक इस अधिनियम के किसी उपबंध के अधीन तब तक दायी नहीं होगा जब तक कि उसके विरुद्ध अनुयोजन,-
(क) माल के परिदान की तारीख से ; या
(ख) उस तारीख से जिसको माल परिदत्त किया जाना चाहिए था ; या
(ग) उस तारीख से जिसको और जिससे माल का परिदान प्राप्त करने के हकदार पक्षकार को धारा 13 की उपधारा (2) के अधीन माल के बारे में यह मानने का अधिकार है कि वह हानिग्रस्त हो गया है,
नौ मास के भीतर न लाया गया हो ।
25. अनुयोजन संस्थित करने के लिए अधिकारिता-बहुविध परिवहन संविदा का कोई भी पक्षकार किसी ऐसे न्यायालय में अनुयोजन संस्थित कर सकेगा जो सक्षम है और जिसकी अधिकारिता के भीतर निम्नलिखित स्थानों में से कोई एक स्थान स्थित है, अर्थात् :-
(क) कारबार का मुख्य स्थान या उसके अभाव में, प्रतिवादी का साधारण निवास-स्थान ; या
(ख) वह स्थान जहां बहुविध परिवहन संविदा की गई थी, परन्तु यह तब जब कि प्रतिवादी का कारबार का स्थान, शाखा या अभिकरण उस स्थान पर हो ; या
(ग) बहुविध परिवहन के लिए माल को भारसाधन में लेने का स्थान या उसके परिदान का स्थान ; या
(घ) कोई अन्य स्थान जो बहुविध परिवहन संविदा में विनिर्दिष्ट है और बहुविध परिवहन दस्तावेज में साक्ष्यित है ।
26. माध्यस्थम्-(1) बहुविध परिवहन संविदा के पक्षकार, संविदा में यह उपबन्ध कर सकेंगे कि कोई विवाद, जो इस अधिनियम के उपबन्धों के अधीन बहुविध परिवहन के संबंध में उठता हो, माध्यस्थम् के लिए निर्देशित किया जाएगा ।
(2) माध्यस्थम् कार्यवाही ऐसे स्थान पर या ऐसी प्रक्रिया के अनुसार, जो बहुविध परिवहन दस्तावेज में विनिर्दिष्ट की जाए, संस्थित की जा सकेगी ।
27. शक्ति का प्रत्यायोजन-केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, यह निदेश दे सकेगी कि इस अधिनियम के अधीन उसके द्वारा प्रयोक्तव्य कोई शक्ति, धारा 30 के अधीन शक्ति को छोड़कर, ऐसी परिस्थितियों में और ऐसी शर्तों के, यदि कोई हों, अधीन रहते हुए, जो उसमें विनिर्दिष्ट की जाएं, ऐसे अधिकारी या प्राधिकारी द्वारा, जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किया जाए, भी प्रयोक्तव्य होगी ।
28. बहुविध परिवहन संविदा का इस अधिनियम के अनुसार किया जाना-बहुविध परिवहन प्रचालक के रूप में रजिस्ट्रीकृत कोई व्यक्ति, बहुविध परिवहन की कोई संविदा इस अधिनियम के उपबन्धों के अनुसार ही करेगा, अन्यथा नहीं और कोई भी संविदा, उस विस्तार तक जिस तक वह उक्त उपबन्धों से असंगत है, शून्य और अप्रवर्तनीय होगी ।
29. अधिनियम का अन्य अधिनियमितियों पर अध्यारोही होना-इस अधिनियम के उपबन्ध, तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में या इस अधिनियम से भिन्न किसी विधि के आधार पर प्रभाव रखने वाली किसी लिखत में, उससे असंगत किसी बात के होते हुए भी, प्रभावी होंगे ।
30. नियम बनाने की शक्ति-केन्द्रीय सरकार, इस अधिनियम के उपबन्धों को कार्यान्वित करने के लिए नियम, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, बना सकेगी ।
(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी उपबंधों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियमों में निम्नलिखित सभी या किन्हीं विषयों के लिए उपबंध किया जा सकेगा, अर्थात् :-
(क) वे प्ररूप जिनमें धारा 4 के अधीन आवेदन किए जाए जाएंगे ;
(ख) वह अवधि जिसके भीतर धारा 6 की उपधारा (1) के अधीन अपील की जा जाएगी ;
(ग) वह प्ररूप जिसमें धारा 6 के अधीन अपील की जाएगी और ऐसी अपील की बाबत संदेय फीस की रकम ;
(घ) धारा 21 के प्रयोजन के लिए खतरनाक माल ;
(ङ) कोई अन्य विषय जो विहित किया जाना है या किया जाए ।
(3) इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम, बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किन्तु नियम के ऐसे प्रवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।
।31. कतिपय अधिनियमितियों का संशोधन-इस अधिनियम के प्रारम्भ की तारीख से ही, अनुसूची के भाग 1, भाग 2 और भाग 3 में विनिर्दिष्ट अधिनियमितियां, उनमें विनिर्दिष्ट रीति से संशोधित हो जाएंगी ।
32. निरसन और व्यावृत्ति-(1) माल बहुविध परिवहन अध्यादेश, 1993 (1993 का अध्यादेश संख्यांक 6) इसके द्वारा निरसित किया जाता है ।
(2) ऐसे निरसन के होते हुए भी, उक्त अध्यादेश के अधीन की गई कोई बात या कार्रवाई इस अधिनियम के तत्स्थानी उपबंधों के अधीन की गई समझी जाएगी ।
।[अनुसूची
(धारा 31 देखिए)
कतिपय अधिनियमों का संशोधन
भाग 1
वाहक अधिनियम, 1865 (1865 का अधिनियम संख्यांक 3) का संशोधन
वाहक अधिनियम, 1865 में,-
(क) धारा 2 में, सामान्य वाहक" से संबंधित परिभाषा में, संपत्ति का भाड़े के लिए सभी व्यक्तियों के लिए बिना भेद के एक स्थान से दूसरे स्थान को" शब्दों के स्थान पर सभी व्यक्तियों के लिए बिना भेद के एक स्थान से दूसरे स्थान को बहुविध परिवहन दस्तावेज के अधीन संपत्ति का परिवहन करने का अथवा संपत्ति का भाड़े के लिए" शब्द रखे जाएंगे ;
(ख) धारा 6, धारा 7 और धारा 8 में, परिदत्त किसी सम्पत्ति के" शब्दों के स्थान पर परिदत्त किसी संपत्ति के (जिसके अंतर्गत माल समेकित करने के लिए प्रयुक्त आधान, पट्टिका या परिवहन की वैसी ही वस्तु है)" शब्द और कोष्ठक रखे जाएंगे ;
(ग) धारा 9 और धारा 10 में, सौंपे गए माल के" शब्दों के स्थान पर सौंपे गए माल के (जिसके अन्तर्गत माल समेकित करने के लिए प्रयुक्त आधान, पट्टिका या परिवहन की वैसी ही वस्तु है)" शब्द और कोष्ठक रखे जाएंगे ।
भाग 2
भारतीय समुद्र द्वारा माल वहन अधिनियम, 1925 (1925 का अधिनियम संख्यांक 26) का संशोधन
भारतीय समुद्र द्वारा माल वहन अधिनियम, 1925 में,-
(क) उद्देशिका में, दूसरे पैरा के पश्चात्, निम्नलिखित पैरा अन्तःस्थापित किया जाएगा, अर्थात् :-
और यतः उक्त नियम, 23 फरवरी, 1968 को ब्रुसेल्स में हस्क्षारित प्रोटोकाल द्वारा और 21 दिसम्बर, 1979 को ब्रुसेल्स में हस्ताक्षरित, पोटोकाल द्वारा संशोधित किए गए थे ;" ;
(ख) धारा 7 की उपधारा (1) में, धारा 331 और 352" शब्द और अंकों के स्थान पर धारा 331 और भाग 10क" शब्द, अंक और अक्षर रखे जाएंगे :
(ग) अनुसूची में,-
(i) अनुच्छेद 1 के खंड (ग) में, वस्तुएं" शब्द के पश्चात् माल समेकित करने के लिए प्रयुक्त आधान, पट्टिकाएं या परिवहन की वैसी ही वस्तुएं यदि वह माल भेजने वाले द्वारा प्रदत्त की जाएं" शब्द अन्तःस्थापित किए जाएंगे ;
(ii) अनुच्छेद 3 में,-
(1) पैरा 4 के अन्त में निम्नलिखित को जोड़ा जाएगा, अर्थात् :-
तथापि, तत्प्रतिकूल सबूत तब ग्राह्य नहीं होगा, जब वहन-पत्र सद्भावपूर्वक कार्य करते हुए किसी तृतीय पक्षकार को अन्तरित कर दिया गया है ।" ;
(2) पैरा 6 के तीसरे उपपैरा के अन्त में निम्नलिखित जोड़ा जाएगा, अर्थात् :-
तथापि इस अवधि को बढ़ाया जा सकेगा यदि पक्षकार वाद हेतुक के उद्भूत होने के पश्चात् इस प्रकार सहमत हो जाएं :
परन्तु यह कि कोई वाद इस उपपैरा में निर्दिष्ट एक वर्ष की अवधि की समाप्ति के पश्चात्, न्यायालय द्वारा अनुज्ञात तीन मास से अनधिक अतिरिक्त अवधि के भीतर लाया जा सकेगा ।" ;
(iii) अनुच्छेद 4 के पैरा 5 में,-
(1) प्रति पैकेज या यूनिट एक सौ पौंड से" शब्दों के स्थान पर प्रति पैकेज या यूनिट पर 666.67 विशेष आहरण अधिकारों से अथवा हानिग्रस्त या नुकसानग्रस्त माल के सकल भार के प्रति किलोग्राम दो विशेष आहरण अधिकारों से, इनमें से जो भी उच्चतर हो," शब्द और अंक रखे जाएंगे ;
(2) पहले उपपैरा के पश्चात् निम्नलिखित उपपैरा अन्तःस्थापित किए जाएंगे, अर्थात् :-
जहां किसी आधान, पट्टिका या परिवहन की वैसी ही वस्तु का प्रयोग माल समेकित करने के लिए किया जाता है वहां वहन-पत्र में प्रगणित पैकेजों या यूनिटों की वह संख्या, जो परिवहन की ऐसी वस्तु में पैक की गई है, जहां तक का ऐसे पैकेजों या यूनिटों का संबंध है, इस पैरा के प्रयोजनों के लिए पैकेजों या यूनिटों की संख्या समझी जाएगी ।
इस पैरा में उपबन्धित दायित्व की सीमा के फायदे का न तो वाहक और न पोत ही हकदार होगा, यदि यह साबित हो जाता है कि नुकसान, वाहक के ऐसे कार्य या लोप के परिणामस्वरूप हुआ है, जो नुकसान पहुंचाने के आशय से किया गया था या जो बिना सोचे-विचारे और ऐसी जानकारी के साथ किया गया था कि उससे नुकसान होना अधिसंभाव्य है ।
जहां माल की प्रकृति या मूल्य का माल भेजने वाले द्वारा वहन-पत्र में जानबूझकर मिथ्या कथन किया गया है वहां वाहक या पोत का दायित्व इस प्रकार कथित मूल्य से अधिक नहीं होगा ।" ।
भाग 3
माल विक्रय अधिनियम, 1930 (1930 का अधिनियम संख्यांक 3) का संशोधन
माल विक्रय अधिनियम, 1930 की धारा 2 के खण्ड (4) में रेल रसीद," शब्दों के पश्चात् बहुविध परिवहन दस्तोवज," शब्द अंतःस्थापित किए जांएगे ।]
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