संसद् सदस्य [वेतन, भत्ता और पेंशन] अधिनियम, 1954
(1954 का अधिनियम संख्यांक 30)
[22 मई, 1954]
संसद् सदस्यों के 1[वेतन, भत्तों और पेंशन] का उपबन्ध
करने के लिए
अधिनियम
भारत गणराज्य के पांचवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-
1. संक्षिप्त नाम और प्रारंभ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम संसद् सदस्य 1[वेतन, भत्ता और पेंशन] अधिनियम, 1954 है ।
(2) यह 1954 के जून के प्रथम दिन प्रवृत्त होगा ।
2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में,-
(क) “समिति" से संसद् के किसी एक सदन की कोई समिति अभिप्रेत है और दोनों सदनों की संयुक्त समिति इसके अन्तर्गत है;
[(कक) “आश्रित" से मृत सदस्य के निम्नलिखित नातेदारों में से कोई नातेदार अभिप्रेत है, अर्थात् :-
(i) कोई अवयस्क धर्मज पुत्र, और अविवाहित धर्मज पुत्री तथा विधवा माता; या
(ii) सदस्य की मृत्यु के समय उसके उपार्जन पर पूर्णतः आश्रित ऐसा कोई पुत्र या पुत्री जिसने अठारह वर्ष की आयु प्राप्त कर ली है और जो अशक्त है; या
(iii) सदस्य की मृत्यु के समय उसके उपार्जन पर पूर्णतः या भागतः आश्रित-
(क) माता-पिता; या
(ख) अवयस्क भाई या अविवाहित बहन; या
(ग) विधवा पुत्रवधु; या
(घ) पूर्व मृत पुत्र का अवयस्क बालक; या
(ङ) पूर्व मृत पुत्री का अवयस्क बालक, जहां बालक के माता-पिता में से कोई जीवित न हो; या
(च) पितामह-पितामही, यदि सदस्य के माता-पिता में से कोई जीवित न हों; या
(छ) ऐसा अन्य व्यक्ति, जो संयुक्त समिति द्वारा धारा 9 के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विनिर्दिष्ट किया जाए;]
(ख) “सदस्य" से संसद् के किसी एक सदन का सदस्य अभिप्रेत है, [किन्तु इस अधिनियम में जैसे अभिव्यक्त रूप से उपबंधित है उसके सिवाय, इसके अंतर्गत] -
(i) मंत्रियों के सम्बलमों और भत्तों से संबंधित अधिनियम, 1952 (1952 का 58) में यथापरिभाषित मंत्री नहीं हैं, ***
[(ii) संसद् में विपक्षी नेता, वेतन और भत्ता अधिनियम, 1977 में यथापरिभाषित विपक्षी नेता नहीं है;]
[(iii)] संसद् अधिकारी वेतन और भत्ता अधिनियम, 1953 (1953 का 20) में यथापरिभाषित संसद् का अधिकारी नहीं है;
(ग) “नया सदस्य" से ऐसा सदस्य अभिप्रेत है, जो इस अधिनियम के प्रारंभ के पश्चात् संसद् के किसी सदन में अपना स्थान ग्रहण करता है और इसके अंतर्गत पुनः निर्वाचित या पुनः नामनिर्देशित सदस्य भी है;
(घ) “कर्तव्य पर रहते हुए निवास की अवधि" से ऐसी अवधि अभिप्रेत है, जिसके दौरान सदस्य, ऐसे स्थान पर, जहां संसद् के किसी सदन का सत्र या समिति की बैठक होती है या जहां ऐसे सदस्य की हैसियत में उसके कर्तव्यों से सम्बन्धित कोई अन्य कार्य किया जाता है, वहां वह ऐसे सत्र या बैठक में उपस्थित होने के प्रयोजन के लिए या ऐसा अन्य कार्य करने के लिए उपस्थित होने के प्रयोजन के लिए, निवास करता है, और इसके अन्तर्गत है,-
(i) संसद् के किसी सदन के सत्र की दशा में, उस सत्र के प्रारंभ के ठीक पूर्ववर्ती तीन दिन से अनधिक ऐसे निवास की अवधि तथा [ऐसी तारीख के, जिसको संसद् का सदन अनिश्चित काल के लिए या सात दिन से अधिक अवधि के लिए स्थगित कर दिया जाता है,ट ठीक पश्चात्वर्ती तीन दिन से अनधिक ऐसे निवास की अवधि, और
(ii) समिति की बैठक या किसी अन्य कार्य की दशा में, समिति के कार्य या अन्य कार्य के प्रारंभ के ठीक पूर्ववर्ती दो दिन से अनधिक ऐसे निवास की अवधि तथा समिति के कार्य या अन्य कार्य की समाप्ति के पश्चात्वती दो दिन से अनधिक ऐसे निवास की अवधि ।
स्पष्टीकरण-कोई सदस्य जो मामूली तौर पर ऐसे स्थान पर निवास करता है जहां संसद् के सदन का सत्र या समिति की बैठक होती है या जहां ऐसे सदस्य की हैसियत में उसके कर्तव्यों से सम्बन्धित कोई अन्य कार्य किया जाता है, वहां उस सत्र या बैठक को अवधि या अन्य कार्य करने में लगे समय के लिए (जिसमें ठीक पूर्ववर्ती या पश्चात्वर्ती तीन या दो दिन सम्मिलत हैं), उस सदस्य के बारे में यह समझा जाएगा कि वह, यथास्थिति, ऐसे सत्र या ऐसी बैठक में उपस्थित होने के प्रयोजन के लिए या ऐसे अन्य कार्य में उपस्थित होने के प्रयोजन के लिए ऐसे स्थान पर निवास करता है;
(ङ) “पदावधि" से-
(क) किसी ऐसे व्यक्ति के संबंध में, जो इस अधिनियम के प्रारंभ पर सदस्य है, वह अवधि अभिप्रेत है, जो अधिनियम के प्रारम्भ से लेकर सदस्य के स्थान रिक्त करने की तारीख को समाप्त होती है;
[(ख) किसी नए सदस्य के सम्बन्ध में,-
(i) जहां ऐसा नया सदस्य द्विवर्षीय निर्वाचन में निर्वाचित राज्य सभा का सदस्य है या उस सदन में नामनिर्दिष्ट किया गया है वहां लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 (1951 का 43) की धारा 71 के अधीन उसके नाम को राजपत्र में अधिसूचित करने वाली अधिसूचना के प्रकाशन की तारीख से प्रारम्भ होने वाली; या
(ii) जहां ऐसा नया सदस्य नई लोक सभा का गठन करने के प्रयोजन के लिए किए गए साधारण निर्वाचन से निर्वाचित लोक सभा का सदस्य है वहां उक्त अधिनियम की धारा 73 के अधीन निर्वाचन आयोग द्वारा अधिसूचना के प्रकाशन की तारीख से आरम्भ होने वाली; या
(iii) जहां ऐसा नया सदस्य संसद् के दोनों सदनों में से किसी सदन का उस सदन के लिए उप-निर्वाचन में निर्वाचित सदस्य है या लोक सभा के लिए नामनिर्दिष्ट सदस्य है वहां, यथास्थिति, उक्त अधिनियम की धारा 67क में निर्दिष्ट निर्वाचन की तारीख से या उसके नामनिर्देशन की तारीख से आरम्भ होने वाली,
और प्रत्येक दशा में उस तारीख को समाप्त होने वाली अवधि अभिप्रेत है जिसको सदस्य का स्थान रिक्त हो जाता है ।]
3. वेतन तथा दैनिक भत्ते-सदस्य अपनी सम्पूर्ण पदावधि के दौरान [ [प्रतिमास [पचास हजार रुपएट की दर सेटट वेतन प्राप्त करने के हकदार होगा [तथा इस अधिनियम के अधीन बनाए गए किन्हीं नियमों के अधीन रहते हुए,ट कर्तव्य पर रहते हुए निवास का किसी अवधि के दौरान 3[4[प्रतिमास 5[दो हजार रुपए] की दर से]] भत्ता प्राप्त करने के हकदार होगा :
[परंतु कोई भी सदस्य पूर्वोक्त भत्ते का तभी हकदार होगा जब वह, यथास्थिति, लोक सभा या राज्य सभा सचिवालय द्वारा इस प्रयोजन के लिए रखे गए रजिस्टर पर सदन के सत्र के उन सभी दिवसों पर हस्ताक्षर करता है (सिवाय मध्यवर्ती अवकाश दिनों के जिनमें इस प्रकार हस्ताक्षर करना अपेक्षित नहीं है), जिनके लिए भत्ते का दावा किया जाता है] :
[परंतु यह और कि इस धारा में विनिर्दिष्ट वेतन की दरें 18 मई, 2009 से लागू होंगी ।]
4. यात्रा भत्ते-(1) प्रत्येक सदस्य को, संसद् के किसी सदन के सत्र या किसी समिति की बैठक में उपस्थित होने के प्रयोजन के लिए या सदस्य के रूप में, अपने कर्तव्यों से संबंधित किसी अन्य कार्य में उपस्थित होने के प्रयोजन के लिए अपने प्रायिक निवास-स्थान से उस स्थान तक जहां ऐसा सत्र या ऐसी बैठक होने वाली हो या अन्य कार्य किया जाने वाला हो तथा ऐसे स्थान से अपने प्रायिक निवास-स्थान तक वापसी के लिए उसके [भारत में] की गई प्रत्येक यात्रा की बाबत-
(क) यदि यात्रा रेल द्वारा की जाती है, तो प्रत्येक ऐसी यात्री के लिए [पहले दर्जे एक टिकट] और [दूसरे दर्जे] के एक टिकट का किराया दिया जाएगा चाहे सदस्य ने वास्तव में किसी भी दर्जे में यात्रा की हो;
(ख) यदि यात्रा वायु मार्ग द्वारा की जाती है तो प्रत्येक ऐसी यात्रा के लिए वायुयान के 11/4 टिकट का किराया दिया जाएगा;
(ग) यदि यात्रा या उसका कोई भाग रेल या वायुमार्ग द्वारा नहीं किया जा सकता है, तो-
[(i) जहां यात्रा या उसका कोई मार्ग स्टीमर द्वारा किया जाता है, वहां प्रत्येक ऐसी यात्रा या उस भाग के लिए स्टीमर में उच्चतम दर्जे के 1 3/5 टिकट का किराया (भोजन रहित) दिया जाएगा या यदि कोई नियमित स्टीमर-सेवा नहीं है तो प्रत्येक ऐसी यात्रा या उसके भाग के लिए उतनी रकम दी जाएगी जो धारा 9 के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित की जाए ;]
(ii) जहां यात्रा या उसका कोई भाग सड़क मार्ग द्वारा किया जाता है, वहां प्रत्येक ऐसी यात्रा या उसके भाग के लिए [ [सौलह रुपए] प्रति किलोमीटर की दर से सड़क मील भत्ता दिया जाएगा] :
6[पंरतु जब संसद् सत्र में हो और किसी सदस्य की पत्नी या पति, यदि कोई हो, ऐसी यात्रा या उसका कोई भाग ऐसे सदस्य के साथ के बिना सड़क मार्ग से करती है या करता है, जिसकी बाबत ऐसी पत्नी या पति को सदस्य के प्रायिक निवास स्थान से दिल्ली तक आने और वापस जाने के लिए वायु मार्ग अथवा भागतः वायु मार्ग और भागतः रेल से यात्रा करने के लिए धारा 6ख की उपधारा (2) के अधीन अनुज्ञात किया गया है, वहां इस शर्त के अधीन रहते हुए कि एक वर्ष में ऐसी यात्राओं की संख्या आठ से अधिक नहीं होगी, इस उपखंड के अधीन विहित सड़क मील भत्ता ऐसे सदस्य को ऐसी यात्रा या उसके भाग के लिए अनुज्ञात किया जाएगा :]
[परंतु यह और कि जहां कोई सदस्य दिल्ली में किसी हवाई अड्डे से और उस तक सड़क द्वारा यात्रा करता है वहां उसे ऐसी प्रत्येक यात्रा के लिए कम से कम एक सौ बीस रुपए की रकम दी जाएगी ।]
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स्पष्टीकरण-इस उपधारा के खण्ड (ग) के उपखण्ड (ii) के प्रयोजनों के लिए “यात्रा" पद के अन्तर्गत रेल स्टेशन, पत्तन या हवाई अड्डे से, यथास्थिति, सदस्य के प्रायिक निवास-स्थान तक या जहां संसद् के सदन का सत्र होने वाला है या समिति की बैठक होने वाली है या जहां कोई अन्य कार्य किया जाने वाला है, उस स्थान पर सदस्य के निवास तक आने जाने की यात्रा है ।
(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, ऐसा सदस्य, जो रेल या स्टीमर द्वारा जुड़े हुए स्थानों के बीच, सड़क मार्ग द्वारा या तो पूर्णतः या भागतः यात्रा करता है, यदि वह, यथास्थिति, रेल या स्टीमर द्वारा यात्रा करता है तो उसे जो मील भत्ता प्राप्त होता, उस भत्ते के बदले, उपधारा (1) के खण्ड (ग) के उपखण्ड (ii) में निर्दिष्ट मील भत्ता ले सकेगा :
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[परन्तु ऐसे सदस्य द्वारा सम्पूर्ण यात्रा के लिए ली गई यात्रा भत्ता की कुल रकम, ऐसी रकम से अधिक नहीं होगी, जो यदि, वह, यथास्थिति, रेल या स्टीमर से ऐसी यात्रा करता तो उसे अनुज्ञेय होती :
परन्तु यह और कि पहला परन्तुक केवल ऐसी यात्रा को ही लागू होगा जहां यात्रा के स्थान एक्सप्रेस, मेल या सुपरफास्ट रेलगाड़ी द्वारा जुड़े हुए हैं ।]
[परन्तु यह भी कि पहला परंतुक ऐसे सदस्य को लागू नहीं होगा जो, यथास्थिति, राज्य सभा के सभापति या लोक सभा के अध्यक्ष की राय में, शारीरिक रूप से इतना असमर्थ है कि वह वायु मार्ग या रेलगाड़ी द्वारा यात्रा नहीं कर सकता है;]
[परंतु यह भी कि किसी सदस्य के दिल्ली से तीन सौ किलोमीटर की दूरी के भीतर निवास करने की दशा में, वह या उसकी पत्नी/उसका पति, उसके द्वारा सड़क द्वारा की गई यात्रा के लिए ऐसे भत्ते के स्थान पर, जो उसे उस समय अनुज्ञेय होता जब उसने, यथास्थिति, रेल द्वारा या सड़क द्वारा ऐसी यात्रा की होती, उपधारा (1) के खंड (ग) के उपखंड (त्त्) में निर्दिष्ट मील भत्ता ले सकेगा :
परंतु यह और भी कि किसी सदस्य के अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम या त्रिपुरा राज्यों में निवास करने की दशा में वह या उसकी पत्नी/उसका पति उक्त राज्यों में से किसी में अपने निवास से निकटतम विमानपत्तन तक उसके द्वारा सड़क द्वारा की गई यात्रा के लिए उपधारा (1) के खंड (ग) के उपखंड (ii) में निर्दिष्ट मील भत्ता ले सकेगा ।]
[(3) ऐसे सदस्य की हैसियत में अपने कर्तव्यों के निर्वहन में भारत के बाहर किए गए किसी दौरे के अनुक्रम में अपने द्वारा की गई यात्रा के बारे में सदस्य को ऐसे यात्रा तथा दैनिक भत्ते दिए जाएंगे, जो धारा 9 के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित किए जाएं ।]
2[(4) ऐसे किसी व्यक्ति को,-
(क) जो राज्य सभा के सदस्य के रूप में द्विवार्षिक निर्वाचन में निर्वाचित हुआ है, किंतु लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 (1951 का 43) की धारा 71 के अधीन उसके नाम को अधिसूचित करने वाली अधिसूचना राजपत्र में प्रकाशित नहीं की गई है; या
(ख) जो नई लोक सभा का गठन करने के प्रयोजन के लिए हुए साधारण निर्वाचन में लोक सभा के सदस्य के रूप में निर्वाचित हुआ है, किंतु लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 (1951 का 43) की धारा 73 के अधीन उसके नाम को अधिसूचित करने वाली अधिसूचना राजपत्र में प्रकाशित नहीं की गई है; या
(ग) जो संसद् के किसी सदन के सदस्य के रूप में किसी उपनिर्वाचन में निर्वाचित हुआ है या संसद् के किसी सदन के सदस्य के रूप में नामनिर्दिष्ट किया गया है,
खंड (क) या खंड (ख) में निर्दिष्ट अधिसूचना के प्रकाशन से पूर्व या खंड (ग) के अधीन निर्वाचन या नामनिर्देशन पर दिल्ली आने के लिए उसके द्वारा की गई प्रत्येक यात्रा के संबंध में किराए के बराबर रकम का संदाय किया जाएगा :
परन्तु यदि यात्रा रेल या स्टीमर या सड़क द्वारा की जाती है तो वह उस किराए या मील भत्ते की प्रतिपूर्ति किए जाने का हकदार होगा जिसके लिए कोई सदस्य हकदार है :
परन्तु यह और कि यदि वह यात्रा वायुमार्ग द्वारा करता है तो ऐसी यात्रा धारा 5 की उपधारा (2) के पहले परंतुक में निर्दिष्ट बत्तीस यात्राओं की गणना करने के प्रयोजन के लिए सम्मिलित की जाएगी ।]
5. मध्यवर्ती यात्रा के लिए यात्रा भत्ता- [(1)] जहां कोई संसद् के किसी सदन के सत्र या किसी समिति की बैठक के दौरान भारत में किसी स्थान को जाने के लिए पंद्रह दिन से कम अवधि के लिए अनुपस्थित रहता है, वहां वह ऐसे स्थान को, ऐसी यात्रा के लिए और ऐसे स्थान से वापसी यात्रा के लिए-
(क) यदि यात्रा रेल द्वारा की जाती है तो प्रत्येक ऐसी यात्रा के लिए चाहे सदस्य ने, वास्तव में यात्रा किसी भी दर्जे से की हो, [पहले दर्जे के एक टिकट] के किराए के बराबर;
(ख) [यदि यात्रा जो समिति की किसी बैठक के दौरान की गई कोई यात्रा है] वायुमार्ग द्वारा की जाती है तो, प्रत्येक ऐसी यात्रा के लिए वायुमार्ग के एक टिकट के किराए के बराबर, यात्रा भत्ता पाने का हकदार होगा :
परन्तु ऐसे यात्रा भत्ते, ऐसे दैनिक भत्तों की कुल रकम से अधिक नहीं होंगे, जो यदि वह सदस्य इस प्रकार अनुपस्थित नहीं रहता, तो अनुपस्थिति के दिनों के लिए धारा 3 के अधीन उसे अनुज्ञेय होते :
6[परन्तु यह और कि पहले परंतुक की कोई बात वहां लागू नहीं होगी जहां सदस्य समिति की किसी बैठक के दौरान एक से अनधिक बार भारत में किसी स्थान को जाने के लिए वायु मार्ग से यात्रा करता हैट-
[(1क) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, कोई सदस्य किसी विभाग से संबंधित स्थायी समिति की दो बैठकों के बीच [पांच दिनट से अनधिक के ऐसे अंतराल के दौरान जब संसद्का कोई सदन बजट सत्र के दौरान नियत अवधि के लिए स्थगित कर दिया जाता है, भारत में किसी स्थान को जाने के लिए वायु मार्ग द्वारा की गई प्रत्येक यात्रा के लिए यात्रा भत्ते पाने का हकदार होगा :]
परन्तु ऐसे यात्रा भत्ते, वायुयान के किराए को छोड़कर, ऐसे दैनिक भत्तों की कुल रकम से अधिक नहीं होंगे, जो यदि वह सदस्य अनुपस्थित नहीं रहता तो अनुपस्थिति के दिनों के लिए धारा 3 के अधीन उसे अनुज्ञेय होते ।
[(2) प्रत्येक सदस्य ऐसे सदस्य की हैसियत में अपनी पदावधि के दौरान, भारत में किसी स्थान से भारत में किसी अन्य स्थान को अपने द्वारा [अकेले या पति या पत्नी के साथ या साथियों या नातेदारों की किसी संख्या के साथ) की गई वायुमार्ग द्वारा प्रत्येक एकतरफा यात्रा के लिए जो धारा 4 या इस धारा की उपधारा (1) के दूसरे परन्तुक या धारा 6ग में निर्दिष्ट यात्रा से भिन्न है वायुमार्ग के किराए के बराबर रकम पाने का हकदार होगा :
[परंतु इस उपधारा के अधीन ऐसी यात्राओं की कुल संख्या प्रतिवर्ष चौंतीस यात्राएं होगी :]
[परन्तु यह और कि जहां किसी सदस्य द्वारा वायु मार्ग द्वारा की गई यात्राओं की संख्या 3[चौंतीस से कमट है, वहां उसके द्वारा न की गई ऐसी यात्राओं की संख्या आगामी वर्ष के लिए अग्रनीत हो जाएंगी :]
[पंरतु यह भी कि किसी सदस्य का/की, यथास्थिति, पत्नी/पति या साथी अकेला/अकेली भारत में किसी स्थान से भारत में किसी ऐसे स्थान को, ऐसे सदस्य से भेंट करने के प्रयोजन के लिए वायु मार्ग द्वारा अधिकतम आठ यात्राए कर सकेगा/सकेगी और ऐसी यात्रा उपधारा (2) के पहले परंतुक में निर्दिष्ट 3[चौंतीस यात्राओंट की गणना करने के प्रयोजन के लिए सम्मिलित की जाएगी :]
[परंतु यह और भी कि यदि कोई सदस्य वर्ष में उसे अनुज्ञेय ऐसी चौंतीस यात्राओं से अधिक यात्राएं वायु मार्ग द्वारा करता है तो उसे आठ से अनधिक ऐसी यात्राओं को उन यात्राओं की संख्या से जिनका वह हकदार होगा जो ठीक बाद के वर्ष में उसके खाते में प्रोद्भूत हों, समायोजित करने के लिए, अनुज्ञात किया जा सकेगा ।]
6[(3) उपधारा (2) में किसी बात के होते हुए भी, ऐसे सदस्य को, जो, यथास्थिति, राज्य सभा के सभापति या लोक सभा के अध्यक्ष की राय में, शारीरिक रूप से इतना असमर्थ है कि वह वायु मार्ग या रेलगाड़ी से यात्रा नहीं कर सकता है, पूर्ण सड़क यात्रा के लिए मील भत्ता दिया जाएगा ।]
स्पष्टीकरण 1- धारा 4 की उपधारा (1) के खंड (ग) और उपधारा (2) के उपबंध यावत्शक्य, इस धारा के अधीन संदेय यात्रा भत्तों को वैसे ही लागू होंगे, जैसे वे उस धारा के अधीन संदेय यात्रा भत्तों को लागू होते हैं ।
स्पष्टीकरण 2-इस धारा के प्रयोजनों के लिए, वर्ष" से अभिप्रेत है-
(i) किसी ऐसे व्यक्ति की दशा में जो संसद् सदस्य वेतन, भत्ता और पेंशन (संशोधन) अधिनियम, 1985 के प्रारंभ पर सदस्य है, ऐसे प्रारंभ से शुरू होने वाला वर्ष और प्रत्येक पश्चात्वर्ती वर्ष;
(ii) किसी ऐसे व्यक्ति की दशा में जो ऐसे प्रारंभ के पश्चात् सदस्य बनता है, ऐसी तारीख से जिसको ऐसे सदस्य के रूप में उसकी पदावधि प्रारंभ होती है, शुरू होने वाला वर्ष और प्रत्येक पश्चात्वर्ती वर्ष ।
[स्पष्टीकरण-3 उपधारा (2) के प्रयोजनों के लिए, 2[पति या पत्नी, साथियों या नातेदारों द्वारा की गई कोई यात्रा उस धारा के पंरतुक में विनिर्दिष्ट 3[चौंतीस यात्राओं] की संगणना करने में जोड़ी जाएगी ।
[5क. मार्गस्थ वास-सुविधा-जहां धारा 4 की उपधारा (4) में निर्दिष्ट व्यक्ति दिल्ली आता है, वहां वह ऐसी मार्गस्थ वास-सुविधा के लिए ऐसी अवधि के लिए, जो संयुक्त समिति द्वारा धारा 9 की उपधारा (3) के खंड (गगग) के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित की जाए, हकदार होगा ।]
[6. रेल द्वारा मुफ्त यात्रा-(1) प्रत्येक सदस्य को [किसी रेलगाड़ी के वातानुकूलित प्रथम दर्जे या अभिजात्य दर्जे का एक मुफ्त अनन्तरणीय पास दिया जाएगा, जिससे वह भारत में किसी रेल से किसी समय यात्रा करने का हकदार होगा ।
स्पष्टीकरण- [इस उपधारा तथा धारा 6क और 6ख के प्रयोजनों के लिए], सदस्य के अन्तर्गत मंत्रियों के सम्बलम् और भत्तों से संबंधित अधिनियम, 1952 (1952 का 58) में यथापरिभाषित मंत्री [संसद् में विपक्षी नेता वेतन और भत्ता अधिनियम, 1977 (1977 का 33) में यथापरिभाषित विपक्षी नेता] तथा संसद् अधिकारी वेतन और भत्ता अधिनियम, 1963 (1963 का 20) में यथापरिभाषित राज्य सभा के सभापति से भिन्न संसद् के अधिकारी होंगे ।
(2) उपधारा (1) के अधीन किसी सदस्य को जारी किया गया मुफ्त रेल पास उसकी पदावधिपर्यन्त विधिमान्य होगा और ऐसी अवधि की समाप्ति पर, वह पास, यथास्थिति लोक सभा या राज्य सभा के सचिव को वापस कर दिया जाएगा :
परन्तु जहां कोई ऐसा पास किसी नए सदस्य को उसके संसद् के किसी सदन में अपना स्थान ग्रहण करने के पूर्व जारी किया गया है, वहां वह उस सदन के सत्र में, अपना स्थान ग्रहण करने के लिए उपस्थित होने के लिए उस पास का उपयोग करने का हकदार होगा ।
(3) जब तक उपधारा (1) के अधीन किसी सदस्य को मुफ्त रेल पास न दिया जाए तब तक वह धारा 4 की उपधारा (1) में निर्दिष्ट प्रकृति की अपने द्वारा की गई किसी रेल यात्रा के लिए [किसी रेलगाड़ी के वातानुकूलित प्रथम दर्जे या अभिजात्य दर्जे] के एक टिकट के किराए के बराबर रकम का हकदार होगा और यह समझा जाएगा कि वह इस प्रकार सदैव हकदार था ।
(4) कोई ऐसा सदस्य जो सदस्य न रह जाने पर अपना पास वापस कर देता है, यदि वह धारा 4 की उपधारा (1) में निर्दिष्ट प्रकृति की कोई वापसी यात्रा रेल द्वारा करता है, तो उस यात्रा की बाबत 3[किसी रेलगाड़ी के वातानुकूलित प्रथम दर्जे या अभिजात्य दर्जे] के एक टिकट के किराए के बराबर रकम का हकदार होगा और यह समझा जाएगा कि वह इस प्रकार सदैव हकदार था ।
(5) इस धारा की किसी भी बात का यह अर्थ नहीं लगाया जाएगा कि वह किसी सदस्य को किन्हीं ऐसे यात्रा भत्तों का हकदार नहीं बनाती है, जिनका वह इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन अन्यथा हकदार है ।]
[6क. स्टीमर द्वारा मुफ्त यात्रा-(1) [धारा 6 के उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, अंडमान और निकोबार द्वीप संघ राज्यक्षेत्र या लक्षद्वीप संघ राज्यक्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाला प्रत्येक सदस्य-
(क) एक मुफ्त अनंतरणीय पास पाएगा, जिससे कि वह अपने निर्वाचन-क्षेत्र के किसी एक भाग तथा दूसरे भाग के बीच और अपने निर्वाचन-क्षेत्र के एक भाग तथा भारत की मुख्य भूमि के निकटतम पत्तन के बीच स्टीमर से उच्चतम दर्जे में किसी भी समय यात्रा करने का हकदार होगा; और
(ख) अपने प्रायिक निवास स्थान से भारत की मुख्य भूमि के निकटतम विमान-पत्तन तक [और वापसी के लिए, वायुयान के निकट के किराए के बराबर रकम का हकदार होगा :]
परन्तु इस उपधारा की किसी बात का यह अर्थ नहीं लगाया जाएगा कि वह ऐसी यात्रा के दौरान सदस्य संदेय भोजन प्रभारों के संदाय से उसे छूट देती है ।
(2) उपधारा (1) के अधीन किसी सदस्य को जारी किया गया मुफ्त स्टीमर पास उसकी पदावधि पर्यन्त विधिमान्य होगा और उसकी अवधि की समाप्ति पर, वह पास लोक सभा के सचिव को वापस कर दिया जाएगा :
परन्तु जहां कोई ऐसा पास किसी नए सदस्य को उसके लोक सभा में अपना स्थान ग्रहण करने के पूर्व जारी किया गया है वहां वह उस सदन के सत्र में अपना स्थान ग्रहण करने के लिए उपस्थित होने के लिए उस पास का उपयोग करने का हकदार होगा ।
(3) जब तक उपधारा (1) के अधीन किसी सदस्य को मुफ्त स्टीमर पास न दिया जाए, तब तक वह धारा 4 की उपधारा (1) में निर्दिष्ट प्रकृति की अपने द्वारा की गई किसी स्टीमर यात्रा के लिए उच्चतम दर्जे के एक टिकट के किराए (भोजन रहित) के बराबर रकम का हकदार होगा ।
(4) कोई ऐसा सदस्य, जो सदस्य न रह जाने पर उपधारा (1) के अधीन अपने को जारी किया गया स्टीमर पास वापस कर देता है, यदि वह धारा 4 की उपधारा (1) में निर्दिष्ट प्रकृति की कोई वापसी यात्रा स्टीमर द्वारा करता है तो उस यात्रा की बाबत ऐसी रकम का हकदार होगा जो उच्चतम दर्जे के एक टिकट के किराए (भोजन रहित) के बराबर होगी ।
(5) इस धारा की किसी भी बात का अर्थ नहीं लगाया जाएगा कि वह किसी सदस्य को किन्हीं ऐसे यात्रा भत्तों का हकदार नहीं बनाती है जिनका वह इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन अन्यथा हकदार है ।
(6) उपधारा (1) के अधीन 5[किसी सदस्य को दी गई सुविधाओं] के अतिरिक्त वह-
(i) सदस्य के निर्वाचन-क्षेत्र के किसी एक भाग तथा उसके दूसरे भाग के बीच या उसके निर्वाचन-क्षेत्र के एक भाग और भारत की मुख्य भूमि के निकटतम पत्तन के बीच स्टीमर द्वारा [उच्चतम दर्जे] में यात्रा करने के लिए सदस्य के साथ आने जाने वाले एक व्यक्ति के लिए एक मुफ्त पास का; 1[या]
(ii) सदस्य के निर्वाचन-क्षेत्र में उसके अपने प्रायिक निवास स्थान से और भारत की मुख्य भूमि के निकटतम पत्तन तक स्टीमर से उच्चतम दर्जे में जाने के लिए सदस्य की पत्नी या पति के लिए यदि कोई है [द्वीप और भारत की मुख्य भूमि के बीच किसी भी समय एक मुफ्त अनंतरणीय पास का; और ]
[(iii) द्वीप में, प्रायिक निवास स्थान से भारत की मुख्य भूमि के निकतटम विमान-पत्तन तक [और वापसी के लिए] सदस्य की या तो पत्नी या पति, यदि कोई है, के लिए या सदस्य के साथ जाने वाले एक व्यक्ति के लिए वायुयान के टिकट के किराए के बराबर रकम का,ट
भी हकदार होगा :
परन्तु इस उपधारा की किसी बात का यह अर्थ नहीं लगाया जाएगा कि सदस्य के साथ जाने वाले व्यक्ति या सदस्य के पति या पत्नी को ऐसे व्यक्ति द्वारा या पति या पत्नी द्वारा ऐसी यात्रा के दौरान संदेय किन्हीं भोजन प्रभारों के संदाय से छूट देती है ।]
[6कक. लद्दाख के सदस्यों के लिए विशेष सुविधा-(1) धारा 6 के उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसा प्रत्येक सदस्य, जिसका जम्मू-कश्मीर राज्य के लद्दाख में सामान्य निवास स्थान है, लद्दाख में, किसी विमान-पत्तन से दिल्ली में विमान-पत्तन तक आने जाने के लिए उसके द्वारा किसी भी समय की गई प्रत्येक एकल विमान-यात्रा के लिए वायुयान के टिकट के किराए के बराबर रकम का हकदार होगा ।
(2) सदस्य, उपधारा (1) के अधीन उसके लिए उपबंधित विमान-यात्रा के अतिरिक्त, लद्दाख क्षेत्र में किसी विमान-पत्तन से दिल्ली विमान-पत्तन तक आने और जाने के लिए उसकी पत्नी या पति, यदि कोई है, या ऐसे सदस्य के साथ यात्रा करने वाले एक व्यक्ति द्वारा किसी भी समय की गई प्रत्येक एकल विमान यात्रा के लिए वायुयान के टिकट के किराए के बराबर रकम का भी हकदार होगा ।]
[6ख. सदस्यों को यात्रा सुविधाएं- [(1)] इस अधिनियम के अन्य उपबन्धों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना प्रत्येक सदस्य निम्नलिखित का हकदार होगा-
(i) जब सदस्य रेल से यात्रा करता है, तब उसके साथ आने जाने वाले एक व्यक्ति के लिए वातानुकूलित दो-टीयर दर्जे के एक मुफ्त रेल पास का, और
(ii) भारत में किसी स्थान से भारत में किसी अन्य स्थान तक आने जाने के लिए सदस्य, पत्नी के साथ, यदि कोई हो, भारत में किसी रेलगाड़ी से वातानुकूलित प्रथम दर्जे या अभिजात्य दर्जे में मुफ्त रेलयात्रा का, और यदि ऐसी यात्रा या उसका कोई भाग सदस्य के प्रायिक निवास स्थान से भिन्न किसी स्थान से दिल्ली तक आने और जाने के लिए लिए वायुमार्ग से की जाती है तो ऐसी यात्रा या उसके भाग के लिए वायुयान के किराए के बराबर रकम का, या सदस्य के प्रायिक निवास स्थान से दिल्ली तक वायुमार्ग से की गई यात्रा के किराए की रकम के बराबर का, जो भी कम हो :
7[परन्तु जहां किसी सदस्य की पति या पत्नी नहीं है, वहां उस सदस्य के साथ कोई व्यक्ति पति या पत्नी के स्थान पर साथ जा सकेगा, और खंड (त्) में किसी बात के होते हुए भी इस प्रकार साथ जाने वाला व्यक्ति, पति या पत्नी को उपलब्ध प्रत्येक सुविधा का हकदार होगा ।]
[(2) उपधारा (1) के खंड (ii) में किसी बात के होते हुए भी, सदस्य की पत्नी या पति,-
(क) सदस्य के प्रायिक निवास स्थान से दिल्ली तक आने और वापस जाने के लिए किसी भी रेलगाड़ी से वातानुकूलित प्रथम दर्जे या अभिजात्य दर्जे में रेल द्वारा कितनी भी यात्राएं करने का हकदार होगी या होगा;
(ख) जब संसद् सत्र में हो तो सदस्य के प्रायिक निवास स्थान से दिल्ली तक आने या वापस जाने के लिए वायुमार्ग अथवा भागतः वायुमार्ग और भागतः रेल से, इस शर्त के अधीन रहते हुए कि एक वर्ष में ऐसी यात्राओं की संख्या आठ से अधिक नहीं होगी, यात्राएं करने का हकदार होगी या होगाः
परन्तु जहां ऐसी कोई यात्रा या उसका भाग, सदस्य के प्रायिक निवास स्थान से भिन्न किसी स्थान से दिल्ली तक आने और वापस जाने के लिए वायुमार्ग द्वारा की जाती है, वहां ऐसी पत्नी या पति, यथास्थिति, ऐसी यात्रा या उसके भाग के लिए किराए के बराबर या सदस्य के प्रायिक निवास स्थान से दिल्ली तक आने या वापस जाने के लिए वायुमार्ग द्वारा की गई यात्रा के किराए के बराबर रकम, जो भी कम हो, की हकदार होगी या होगा ।]
[6ग. कुछ परिस्थितियों में वायुमार्ग द्वारा यात्रा करने की सुविधाएं-इस अधिनियम के अन्य उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, जहां किसी वर्ष के किसी भाग के दौरान किसी सदस्य का उसके निर्वाचन-क्षेत्र में उसका प्रायिक निवास-स्थान उसके निर्वाचन-क्षेत्र के बाहर किसी स्थान से सड़क, रेल या स्टीमर से मौसम की परिस्थितियों के कारण पहुंच के बाहर है किन्तु उसके निर्वाचन-क्षेत्र में किसी स्थान पर और उसके निर्वाचन-क्षेत्र के बाहर रेल सेवा वाले निकटतम स्थान के बीच वायु सेवा है वहां ऐसा सदस्य अपने निर्वाचन-क्षेत्र के उस निकटतम स्थान से जहां वायु सेवा है उस स्थान को जहां रेल सेवा है वायुमार्ग द्वारा दोनों ओर की यात्रा करने का हकदार होगा :
परन्तु जहां वायु सेवा वाला निकटतम स्थान उसके निर्वाचन-क्षेत्र के बाहर है वहां ऐसा सदस्य केवल उसी स्थान से उस निकटतम स्थान को, जहां रेल सेवा है, वायुमार्ग द्वारा दोनों ओर की यात्रा करने का हकदार होगा ।]
[6घ. दृष्टिहीन और शारीरिक रूप से असमर्थ सदस्यों को विशेष सुविधा-ऐसा कोई सदस्य जो, यथास्थिति, राज्य सभा के सभापति या लोकसभा के अध्यक्ष की राय में शारीरिक रूप से इतना असमर्थ है कि उसके लिए परिचारक सुविधा आवश्यक है,-
(i) धारा 4 की उपधारा (1) के खंड (ख) में या धारा 5 की उपधारा (1) के खंड (ख) या उपधारा (2) में या धारा 6ग में निर्दिष्ट वायुमार्ग द्वारा ऐसी प्रत्येक यात्रा की बाबत जो उसने परिचारक के साथ की है, (उन भत्तों के अतिरिक्त जिनका, यथास्थिति, धारा 4 या धारा 5 या धारा 6ग के अधीन हकदार है) ऐसी यात्रा के लिए एक यात्री के वायुमार्ग के किराए के बराबर रकम का हकदार होगा;
(ii) धारा 4, धारा 5, धारा 6 या धारा 6ख में निर्दिष्ट रेल द्वारा ऐसी प्रत्येक यात्रा की बाबत ऐसे सदस्य की परिचर्या के लिए परिचारक के लिए धारा 6ख की उपधारा (1) के खंड (i) के अधीन मुफ्त वातानुकूलित दू टियर दर्जे के रेल के पास के स्थान पर उसी दर्जे में जिसमें ऐसा सदस्य यात्रा करता है एक यात्री की मुफ्त रेल पास की सुविधा अनुज्ञात की जाएगी ;
[(iii) धारा 4 या धारा 5 में निर्दिष्ट सड़क मार्ग द्वारा ऐसी प्रत्येक यात्रा की बाबत एक मील भत्ते के बराबर रकम का हकदार होगा ।]
7. एक सत्र समाप्ति तथा दूसरे सत्र आदि के प्रारम्भ के बीच लघु अन्तरालों के दौरान भत्ते- [जहां संसद् के किसी सदन के स्थगन या, यथास्थिति, किसी समिति की एक बैठक तथा उसी स्थान पर उस सदन का पुनः समवेत होने या समिति की अगली बैठक के बीच अन्तराल] [पांच दिन] से अधिक न हो, और संबद्ध सदस्य अन्तराल के दौरान ऐसे स्थान पर रहता है, वहां ऐसे स्थान पर निवास के प्रत्येक दिन के लिए धारा 3 में विनिर्दिष्ट दर पर दैनिक भत्ता लेने का हकदार होगा :
परन्तु यदि सदस्य अन्तराल के दौरान ऐसे स्थान से चला जाता है, तो उस स्थान से उसकी अनुपस्थिति, यथास्थिति, संसद् के किसी सदन के सत्र या समिति की बैठक के दौरान अनुपस्थिति के रूप में समझी जाएगी और धारा 5 के उपबंध तद्नुसार लागू होंगे ।
[8. निर्वाचन-क्षेत्रों संबंधी भत्ता और सुख सुविधाएं-कोई सदस्य ऐसे निर्वाचन-क्षेत्र संबंधी भत्ते [कार्यालय व्यय भत्ते] का और अपने लिए और अपने कुटुंब के सदस्यों के लिए ऐसी चिकित्सीय सुविधाओं का और ऐसा आवास, टेलीफोन, जल, बिजली संबंधी सुविधाओं का या इन सभी सुविधाओं या इनमें से किसी सुविधा के बदले में ऐसी नकद रकम का हकदार होगा जो धारा 9 के अधीन नियमों द्वारा विहित की जाए :]
[परन्तु जहां लोक सभा उसके पहले अधिवेशन के लिए नियत तारीख से पांच वर्ष पूरा होने से पहले ही विघटित कर दी जाती है, वहां ऐसे सदन के सदस्यों को उस वर्ष के लिए जिसमें ऐसे सदन का विघटन होता है, उसे उपलब्ध मुफ्त टेलीफोन कालों या मुफ्त विद्युत की युनिटों या मुफ्त जल की किलोलीटरों में यूनिटों के कोटा को, उस सीमा तक, जो ऐसे विघटन की तारीख को उपयोग करने से शेष रह जाती है, विघटन की तारीख से ही प्रारंभ होने वाली और उस तारीख से, जिसको लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 (1951 का 43) की धारा 73 के अधीन पश्चात्वर्ती लोक सभा के गठन की अधिसूचना जारी की जाती है, ठीक पहले की तारीख को समाप्त होने वाली अवधि के दौरान, संदाय के बिना इस शर्त के अधीन रहते हुए अनुज्ञात किया जा सकेगा कि ऐसा सदस्य, ऐसे प्रयोजन के लिए सरकार द्वारा उसे उपलब्ध टेलीफोन की ऐसी अवधि के दौरान की जाने वाली इस प्रकार अनुज्ञात कालों और मुफ्त विद्युत या जल की किलोलीटरों में अनुज्ञात यूनिटों से अधिक खपत की गई विद्युत की यूनिटों या जल के किलोलीटरों के यूनिटों के लिए, संदाय करने का दायी होगा :
परन्तु यह कि जहां पहले परन्तुक में निर्दिष्ट सदस्य उस परन्तुक में गठित किए जाने के लिए निर्दिष्ट पश्चात्वर्ती लोक सभा का सदस्य हो जाता है, वहां वह ऐसी आधिक्य टेलीफोन कालों, विद्युत की यूनिटों और जल के किलोलीटरों के लिए संदाय का दायी होगा जिसके लिए वह पहले परन्तुक के अधीन ऐसी मुफ्त टेलीफोन कालों, विद्युत की यूनिटों और जल के किलोलीटरों के कोटा के लिए दायी है, जिनके लिए वह ऐसी पश्चात्वर्ती लोक सभा की अवधि के पहले वर्ष के लिए हकदार है ।]
[8क. पेंशन- [(1) 18 मई, 2009 से, ऐसे प्रत्येक व्यक्ति को बीस हजार रुपए प्रतिमास पेंशन संदत्त की जाएगी जिसने अंतःकालीन संसद् या संसद् के किसी सदन के सदस्य के रूप में किसी भी अवधि तक सेवा की है :
परंतु जहां किसी व्यक्ति ने अंतःकालीन संसद् या संसद् के किसी सदन के सदस्य के रूप में पांच वर्ष से अधिक की अवधि के लिए सेवा की है, वहां उसे पांच वर्ष से अधिक सेवा किए गए प्रत्येक वर्ष के लिए पन्द्रह सौ रुपए प्रति मास की अतिरिक्त पेंशन दी जाएगी ।
स्पष्टीकरण-इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए अंतःकालीन संसद्" के अन्तर्गत वह निकाय भी है, जिसने संविधान के प्रारंभ के ठीक पहले भारत डोमिनियन की संविधान सभा के रूप में काम किया था ।]
(2) जहां उपधारा (1) के अधीन पेंशन के लिए हकदार कोई व्यक्ति-
(i) राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति के पद के लिए निर्वाचित हो जाता है या किसी राज्य के राज्यपाल के पद पर या किसी संघ राज्यक्षेत्र के प्रशासक के पद पर नियुक्त किया जाता है; या
(ii) राज्य सभा या लोक सभा अथवा किसी राज्य या संघ राज्यक्षेत्र की विधान सभा अथवा किसी राज्य की विधान परिषद् का या दिल्ली प्रशासन अधिनियम, 1966 (1966 का 16) की धारा 3 के अधीन गठित दिल्ली महानगर परिषद् का सदस्य बन जाता है; या
(iii) केन्द्रीय सरकार या किसी राज्य सरकार के स्वामित्व या नियंत्रण के अधीन किसी निगम या किसी स्थानीय प्राधिकारी के अधीन वेतन पर नियुक्त किया जाता है या ऐसी सरकार, निगम या स्थानीय प्राधिकारी से किसी पारिश्रमिक का अन्यथा हकदार हो जाता है,
वहां ऐसा व्यक्ति उस अवधि के लिए, जिसके दौरान वह ऐसा पद धारण किए रहता है या ऐसे सदस्य के रूप में बना रहता है या इस प्रकार नियोजित रहता है या ऐसे पारिश्रमिक के लिए हकदार रहता है, उपधारा (1) के अधीन किसी पेंशन के लिए हकदार नहीं होगा :
परन्तु जहां ऐसे व्यक्ति को ऐसा पद धारण करने के लिए या ऐसा सदस्य होने के लिए या इस प्रकार नियोजन के लिए संदेय वेतन या जहां ऐसे व्यक्ति को खण्ड (iii) में निर्दिष्ट संदेय पारिश्रमिक, उपधारा (1) के अधीन संदेय पेंशन से कम है वहां ऐसा व्यक्ति दोनों ही दशाओं में केवल अतिशेष के पेंशन के रूप में उस उपधारा के अधीन पाने का हकदार होगा ।
[(3) जहां कोई व्यक्ति, जो उपधारा (1) के अधीन पेंशन का हकदार है किसी अन्य पेंशन का भी हकदार है, वहां ऐसा व्यक्ति ऐसी अन्य पेंशन के अतिरिक्त उपधारा (1) के अधीन पेंशन पाने का हकदार होगा ।
(4) उपधारा (1) के प्रयोजनों के लिए वर्षों की संख्या संगणना करने में वह अवधि हिसाब में ली जाएगी जिसके दौरान किसी व्यक्ति ने लोक सभा या राज्य सभा की सदस्यता के आधार पर मंत्रियों के संबलमों और भत्तों से सम्बन्धित अधिनियम, 1952 (1952 का 58) में परिभाषित मंत्री के रूप में या संसद् अधिकारी वेतन और भत्ता अधिनियम, 1953 (1953 का 20) में परिभाषित [संसद् अधिकारी के रूप में] (राज्य सभा के सभापति से भिन्न) अथवा [संसद् में विपक्षी नेता वेतन और भत्ता अधिनियम, 1977 (1977 का 33) में यथापरिभाषित विपक्षी नेता के रूप में या ऐसी सभी हैसियतों में या उसमें से किन्हीं दो हैसियतों में सेवा की है ।]
[ [8कक. भूतपूर्व सदस्यों को यात्रा सुविधाएं- [(1)] ऐसा प्रत्येक व्यक्ति जो आसीन सदस्य नहीं है, किन्तु संसद् के किसी सदन के सदस्य के रूप में किसी अवधि के लिए सेवा कर चुका है, किन्हीं प्रभारों का संदाय किए बिना, यथास्थिति, संसद् के किसी भी सदन के सचिवालय द्वारा इस प्रयोजन के लिए जारी किए गए प्राधिकार के आधार पर,-
(क) 18 जनवरी, 1999 से किसी साथी के साथ भारत में किसी रेल की किसी रेलगाड़ी द्वारा वातानुकूलित दो-टियर में यात्रा करने का हकदार होगा; या
(ख) भारत में किसी रेल की किसी रेलगाड़ी द्वारा वातानुकूलित प्रथम दर्जा में अकेला यात्रा करने का हकदार होगा ।]
[(2) ऐसा प्रत्येक व्यक्ति, जो आसीन सदस्य नहीं है किंतु अंदमान और निकोबार द्वीप या लक्षद्वीप से सदस्य के रूप में किसी अवधि के लिए सेवा कर चुका है, उपधारा (1) के अधीन ऐसे सदस्य को उपलब्ध सुविधाओं के अतिरिक्त संसद् के किसी भी सदन के सचिवालय द्वारा इस प्रयोजन के लिए जारी किए गए प्राधिकार के आधार पर, यथास्थिति, अंदमान और निकोबार द्वीप या लक्षद्वीप और भारत के मुख्य भूमि राज्यक्षेत्र के बीच चलने वाले किसी स्टीमर में उच्चतम दर्जे से किन्हीं प्रभारों का संदाय किए बिना यात्रा करने के लिए हकदार होगा ।]
[8कख. पेंशन की अवधि का पूर्णांकन-जहां ऐसी अवधि में, जिसके लिए इस अधिनियम के अधीन पेंशन संदेय है, किसी वर्ष का कोई भाग अंतर्विष्ट है तब, यदि ऐसा भाग नौ मास या उससे अधिक का है तो उसे धारा 8क की उपधारा (1) के अधीन अतिरिक्त पेंशन के संदाय के प्रयोजन के लिए पूरे एक वर्ष के बराबर संगणित किया जाएगा और यदि ऐसा भाग नौ मास से कम है तो उसे गणना में नहीं लिया जाएगा ।]
[8कग. कुटुंब पेंशन-(1) संसद् के किसी सदन के किसी सदस्य की, उसकी पदावधि के दौरान मृत्यु हो जाने पर, उसकी पत्नी या पति, यदि कोई हो, या ऐसे सदस्य के आश्रित को, यथास्थिति, ऐसे पत्नी या पति या ऐसे आश्रित के, जब तक ऐसा आश्रित" धारा 2 के खंड (कक) के अर्थान्तर्गत आश्रित बना रहता है, शेष जीवन काल के दौरान उस पेंशन के, जो ऐसे संसद् सदस्य को उसके सेवानिवृत्त होने पर प्राप्त होती, आधे के बराबर कुटुंब पेंशन का संदाय किया जाएगा :
परंतु ऐसे किसी आश्रित को, यदि ऐसा आश्रित संसद् का आसीन सदस्य है या धारा 8क के अधीन पेंशन ले रहा है, ऐसी कुटुंब पेंशन संदेय नहीं होगी ।
(2) उपधारा (1) के अधीन संदेय कुटुंब पेंशन ऐसे व्यक्ति की पत्नी या पति अथवा आश्रित को भी संदेय होगी जो संसद् सदस्य वेतन, भत्ता और पेंशन (संशोधन) अधिनियम, 2006 के प्रारंभ होने के पूर्व किसी समय संसद् या अंतःकालीन संसद् के किसी भी सदन का सदस्य था और ऐसे सदस्य के रूप में सेवा करने के पश्चात् उसकी मुत्यु हो गई थी :
परंतु ऐसी पत्नी या पति अथवा आश्रित, इस अधिनियम के अधीन कोई पेंशन नहीं ले रहा हो या वह उपधारा (1) के परंतुक के अधीन कुटुंब पेंशन लेने का हकदार नहीं है :
परंतु यह और कि ऐसा कोई भी व्यक्ति, संसद् सदस्य वेतन, भत्ता और पेंशन (संशोधन) अधिनियम, 2006 के प्रारंभ के पूर्व की किसी अवधि की बाबत इस उपधारा के अधीन कुटुंब पेंशन के बकाया का दावा करने का हकदार नहीं होगा ।
स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए, “अंतःकालीन संसद्" के अंतर्गत वह निकाय भी है जिसने संविधान के प्रारंभ के ठीक पहले भारत डोमिनियन की संविधान सभा के रूप में काम किया था ।]
[8ख. वाहन क्रय करने के लिए अग्रिम-सदस्य को वाहन का क्रय करने के लिए, प्रतिसंदाय अग्रिम के रूप में [चार लाख रुपए] से अनधिक ऐसी धनराशि का संदाय किया जा सकेगा जो धारा 9 के अधीन इस निमित्त बनाए गए नियमों द्वारा अवधारित की जाए ।]
9. नियम बनाने की शक्ति-(1) इस धारा के अधीन नियम बनाने के प्रयोजन के लिए सभापति द्वारा नामनिर्देशित, राज्य सभा से पांच सदस्यों तथा अध्यक्ष द्वारा नामनिर्देशित लोक सभा से दस सदस्यों को मिलाकर संसद् के दोनों सदनों की संयुक्त समिति गठित की जाएगी ।
(2) उपधारा (1) के अधीन गठित संयुक्त समिति अपना अध्यक्ष चुनेगी और उसे अपनी प्रक्रिया का विनियमन करने की शक्ति होगी ।
[(2क) संयुक्त समिति का सदस्य, ऐसे सदस्य की हैसियत में अपने नामनिर्देशन की तारीख से एक वर्ष के लिए पद धारण करेगा और संयुक्त समिति की कोई आकस्मिक रिक्ति, यथास्थिति, राज्य सभा के सभापति द्वारा या लोक सभा के अध्यक्ष द्वारा नामनिर्देशन से भरी जा सकेगी ।
स्पष्टीकरण-संसद् सदस्य वेतन और भत्ता (संशोधन) अधिनियम, 1958 (1958 का 55) के प्रारंभ के ठीक पूर्व संयुक्त समिति के सदस्य के रूप में पद धारण करने वाले सदस्य की दशा में, एक वर्ष की अवधि ऐसे प्रारम्भ की तारीख से संगणित की जाएगी ।]
(3) उपधारा (1) के अधीन गठित संयुक्त समिति, 6[केन्द्रीय सरकार से परामर्श के पश्चात्] निम्नलिखित सभी मामलों या उनमें से किसी के लिए उपबन्ध करने के लिए नियम बना सकेगी, अर्थात् :-
(क) किसी यात्रा के लिए मार्ग;
[(कक) वह व्यक्ति जो धारा 2 के खंड (कक) के उपखंड (छ) के अधीन आश्रित के रूप में विनिर्दिष्ट किया जाए;]
(ख) दिन के भाग की, उस दिन के लिए अनुज्ञेय दैनिक भत्ता अवधारित करने के प्रयोजन के लिए, गणना करने की रीति;
(ग) जहां सदस्य के लिए सम्पूर्ण यात्रा या उसके किसी भाग के लिए मुफ्त यात्रा की व्यवस्था की गई है, वहां अनुज्ञेय यात्रा भत्ता [तथा जहां सरकार या किसी स्थानीय प्राधिकारी के खर्चे पर सदस्य के मुफ्त निवास तथा भोजन की व्यवस्था की गई है वहां दैनिक भत्ते में से कटौती ;]
[(गग) वह दर, जिस पर धारा 4 की उपधारा (1) के खंड (ग) के उपखण्ड (ii) के अधीन सड़क मील भत्ता दिया जाएगा ;]
[(गगग) वह मार्गस्थ वास-सुविधा और अवधि, जिसके लिए धारा 5क के अधीन ऐसी वास-सुविधा उपलब्ध कराई जा सकेगी ;]
(घ) जहां वह स्थान, जिससे सदस्य अपनी यात्रा का प्रारंभ करता है या जहां वह वापस जाता है, उसका प्रायिक निवास स्थान नहीं है, वहां अनुज्ञेय यात्रा भत्ता;
[(घघ) जहां नियमित स्टीमर सेवा नहीं है, वहां किसी जलयान से की गई यात्रा की बाबत अनुज्ञेय यात्रा भत्ता ;
(घघघ) सदस्य द्वारा भारत के बाहर किए गए किसी दौरे के अनुक्रम में, ऐसे सदाय की हैसियत में, अपने कर्तव्यों के संबंध में की गई यात्रा के लिए अनुज्ञेय, यात्रा तथा दैनिक भत्ते;]
(ङ) वह प्ररूप जिसमें किसी सदस्य द्वारा इस अधिनियम के अधीन किसी भत्ते के दावे के प्रयोजन के लिए प्रमाणपत्र यदि कोई हो, दिए जाएंगे;
[(ङङ) वह प्ररूप जिसमें किसी व्यक्ति द्वारा इस अधिनियम के अधीन किसी पेंशन के दावे के प्रयोजन के लिए प्रमाणपत्र, यदि कोई हो, दिए जाएंगे;]
[(च) धारा 8 में उल्लिखित निर्वाचन-क्षेत्र संबंधी भत्ता तथा चिकित्सीय और अन्य सुविधाएं तथा ऐसे भत्तों और सुविधाओं के बदले में नकद संदत्त की जाने वाली रकम;
(चच) वह रकम जिसका वाहन का क्रय करने के लिए, प्रतिसंदेय अग्रिम के रूप में संदाय किया जा सकेगा, उस पर ब्याज की दर तथा ऐसी रकम और उस पर ब्याज की वसूली का ढंग; और]
4[(चचच) 1 अप्रैल, 2002 को या उसके पश्चात् प्रारंभ होने वाले किसी वर्ष से संबंधित अनुपयोजित निःशुल्क टेलिफोन काल किसी पश्चात्वर्ती वर्ष के लिए अग्रनीत करने के संबंध में उपबंध करना;]
(छ) साधारणतया इस अधिनियम के अधीन [दैनिक भत्तों, यात्रा भत्तों और पेंशन] के संदाय के विनियमन के लिए ।
(4) उपधारा (3) के अधीन बनाए गए नियम तब तक प्रभावी नहीं होंगे जब तक वे राज्य सभा के सभापति द्वारा तथा लोक सभा के अध्यक्ष द्वारा अनुमोदित तथा पुष्ट न किए जाएं तथा राजपत्र में प्रकाशित न कर दिए जाएं और नियमों का ऐसा प्रकाशन इस बात का निश्चायक सबूत होगा कि वे सम्यक् रूप से बनाए गए हैं ।
10. कतिपय यात्रा भत्तों के संदाय का विधिमान्यकरण-निरसन तथा संशोधन अधिनियम, 1960 (1960 का 58) की धारा 2 तथा अनुसूची 1 द्वारा निरसित ।
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