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असंगठित कर्मकार सामाजिक सुरक्षाअधिनियम, 2008 ( Unorganised Workers Social Security Act, 2008 )


 

असंगठित कर्मकार सामाजिक सुरक्षाअधिनियम, 2008

(2008 का अधिनियम संख्यांक 33)

[30 दिसंबर, 2008]

अंसगठित कर्मकारों की सामाजिक सुरक्षा और उनके कल्याण

का तथा उससे संबंधित या उसके आनुषंगिक

अन्य विषयों का उपबंध

करने के लिए

अधिनियम

भारत गणराज्य के उनसठवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित होः-

अध्याय 1

प्रारंभिक

1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारंभ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम असंगठित कर्मकार सामाजिक सुरक्षा अधिनियम, 2008 है ।

(2) इसका विस्तार संपूर्ण भारत पर है ।

(3) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे ।

2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-

(क) नियोजक" से ऐसा व्यक्ति या व्यक्तियों का संगम अभिप्रेत है जिसने या तो सीधे या अन्यथा पारिश्रमिक के लिए कोई असंगठित कर्मकार लगाया है या नियोजित किया है;

(ख) अस्थायी कर्मकार" से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जो किसी नियोजक के लिए अपने घर में या नियोजक के कार्य-स्थल से भिन्न अपनी इच्छा के किसी अन्य परिसर में पारिश्रमिक के लिए, इस बात का विचार किए बिना कि नियोजक उपस्कर, सामग्री या अन्य निवेश उपलब्ध कराता है अथवा नहीं, माल के उत्पादन या सेवाओं में लगा हुआ है;

(ग) पहचान पत्र" से धारा 10 की उपधारा (3) के अधीन जिला प्रशासन द्वारा असंगठित कर्मकार को जारी किया गया कार्ड, दस्तावेज या प्रमाणपत्र अभिप्रेत है;

(घ) राष्ट्रीय बोर्ड" से धारा 5 की उपधारा (1) के अधीन गठित राष्ट्रीय असंगठित कर्मकार सामाजिक सुरक्षा बोर्ड अभिप्रेत है;

(ङ) अधिसूचना" से राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना अभिप्रेत है;

(च) संगठित सेक्टर" से ऐसा उद्यम अभिप्रेत है, जो असंगठित सेक्टर नहीं है;

(छ) विहित" से, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार द्वारा इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है;

(ज) रजिस्ट्रीकृत कर्मकार" से धारा 10 की उपधारा (3) के अधीन रजिस्ट्रीकृत असंगठित कर्मकार अभिप्रेत है;

(झ) अनुसूची" से अधिनियम से संलग्न अनुसूची अभिप्रेत है;

(ञ) राज्य बोर्ड" से धारा 6 की उपधारा (1) के अधीन गठित (राज्य का नाम) राज्य असंगठित कर्मकार सामाजिक सुरक्षा बोर्ड अभिप्रेत है;

(ट) स्वनियोजित कर्मकार" से ऐसा कोई व्यक्ति अभिप्रेत है जो किसी नियोजक द्वारा नियोजित नहीं है, बल्कि असंगठित सेक्टर में किसी उपजीविका में स्वयं को मासिक रूप से ऐसी रकम अर्जित करने के अधीन रहते हुए लगा हुआ है जो केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर अधिसूचित की जाए, अथवा ऐसी अधिकतम सीमा के अधीन रहते हुए कृषि योग्य भूमि धारण करता है जो राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित की जाए;

(ठ) असंगठित सेक्टर" से व्यष्टियों या स्वनियोजित कर्मकारों के स्वामित्वाधीन और किसी प्रकार के माल के उत्पादन या विक्रय में या सेवा प्रदान करने में लगा हुआ उद्यम अभिप्रेत है और जहां उद्यम कर्मकारों को नियोजित करता है वहां ऐसे कर्मकारों की संख्या दस से कम है;

(ड) असंगठित कर्मकार" से असंगठित सेक्टर में अस्थायी कर्मकार, स्वनियोजित कर्मकार या मजदूरी कर्मकार अभिप्रेत है और इसके अन्तर्गत संगठित सेक्टर का ऐसा कर्मकार भी आता है जो इस अधिनियम की अनुसूची 2 में उल्लिखित किसी भी अधिनियम के अंतर्गत नहीं आता है; और

(ढ) मजदूरी कर्मकार" से किसी नियोजक द्वारा प्रत्यक्ष रूप से या किसी ठेकेदार के माध्यम से असंगठित सेक्टर में, चाहे कार्य-स्थल कोई भी हो, पारिश्रमिक के लिए नियोजित व्यक्ति अभिप्रेत है, चाहे वह अनन्य रूप से किसी एक नियोजक या एक या अधिक नियोजकों के लिए नियोजित हो, चाहे नकद मजदूरी मिलती हो या वस्तु रूप में, चाहे वह अस्थायी कर्मकार के रूप में या अस्थायी या दैनिक मजदूर के रूप में अथवा प्रवासी कर्मकार के रूप में या घरेलू कर्मकारों सहित गृहस्थियों द्वारा नियोजित कर्मकार के रूप में और ऐसी रकम की मासिक मजदूरी पर लगा हो जो, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित की जाए । 

अध्याय 2

सामाजिक सुरक्षा फायदे

3. स्कीम विरचित करना-(1) केन्द्रीय सरकार समय-समय पर असंगठित कर्मकारों के लिए निम्नलिखित से संबंधित विषयों के संबंध में उपयुक्त कल्याणकारी स्कीमें विरचित और अधिसूचित करेगी-

(क) जीवन और निःशक्तता सुरक्षा;

(ख) स्वास्थ्य और प्रसूति फायदे;

(ग) वृद्धावस्था संरक्षण; और

(घ) ऐसा कोई अन्य फायदा जो केन्द्रीय सरकार द्वारा अवधारित किया जाए ।

(2) इस अधिनियम की अनुसूची 1 में सम्मिलित स्कीमों को उपधारा (1) के अधीन कल्याणकारी स्कीमें समझा जाएगा ।

(3) केन्द्रीय सरकार, अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम से संलग्न अनुसूचियों का संशोधन कर सकेगी ।

(4) राज्य सरकार, समय-समय पर, असंगठित कर्मकारों के लिए निम्नलिखित से संबंधित स्कीमों सहित उपयुक्त कल्याणकारी स्कीमें विरचित और अधिसूचित कर सकेगी,-

(क) भविष्य निधि;

(ख) नियोजन क्षति फायदा;

(ग) आवासन;

(घ) बालकों के लिए शिक्षा संबंधी स्कीमें;

(ङ) कर्मकारों के कौशल का उन्नयन;

(च) अंत्येष्टि सहायता; और

(छ) वृद्धाश्रम ।

4. केन्द्रीय सरकार की स्कीमों का वित्तपोषण-(1) केन्द्रीय सरकार द्वारा अधिसूचित किसी स्कीम का, -

(i) केन्द्रीय सरकार द्वारा पूर्णतः वित्तपोषण किया जा सकेगा; या

(ii) भागतः केन्द्रीय सरकार द्वारा और भागतः राज्य सरकार द्वारा वित्तपोषण किया जा सकेगा; या

(iii) भागतः केन्द्रीय सरकार द्वारा, भागतः राज्य सरकार द्वारा और भागतः स्कीम के हिताधिकारियों या नियोजकों से संगृहीत किए गए अभिदायों के माध्यम से, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा स्कीम में विहित किए जाएं, वित्तपोषण किया जा सकेगा ।

(2) केन्द्रीय सरकार द्वारा अधिसूचित प्रत्येक स्कीम में ऐसे विषयों का जिसमें निम्नलिखित से संबंधित विषय भी सम्मिलित हैं, उपबंध किया जाएगा जो स्कीम के, दक्ष कार्यान्वयन के लिए आवश्यक हैं,-

(i) स्कीम का विस्तार क्षेत्र;

(ii) स्कीम के हिताधिकारी;

(iii) स्कीम के संसाधन;

(iv) वह अभिकरण या वे अभिकरण जो योजना को क्रियान्वित करेंगे;

(v) शिकायत प्रतितोषण; और

(vi) कोई अन्य सुसंगत मामला ।

अध्याय 3

राष्ट्रीय असंगठित कर्मकार सामाजिक सुरक्षा बोर्ड

5. राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड-(1) केन्द्रीय सरकार, अधिसूचना द्वारा, राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड नामक एक राष्ट्रीय बोर्ड का गठन करेगी जो इस अधिनियम के अधीन उसे प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करेगा तथा सौंपे गए कृत्यों का निर्वहन करेगा ।

(2) राष्ट्रीय बोर्ड में निम्नलिखित सदस्य होंगे, अर्थात्ः-

(ख) केन्द्रीय श्रम और रोजगार मंत्री-अध्यक्ष, पदेन;

(ख) महानिदेशक (श्रम कल्याण) -सदस्य-सचिव, पदेन; और

(ग) केन्द्रीय सरकार द्वारा नामनिर्देशित किए जाने वाले चौंतीस सदस्य, जिनमें से-

(i) असंगठित सेक्टर कर्मकारों का प्रतिनिधित्व करने वाले सात सदस्य;

(ii) असंगठित सेक्टर के नियोजकों का प्रतिनिधित्व करने वाले सात सदस्य;

(iii) नागरिक समाज के प्रख्यात व्यक्तियों का प्रतिनिधित्व करने वाले सात सदस्य;

(iv) लोक सभा का प्रतिनिधित्व करने वाले दो और राज्य सभा का प्रतिनिधित्व करने वाला एक सदस्य;

(v) केन्द्रीय सरकार के संबंधित मंत्रालयों और विभागों का प्रतिनिधित्व करने वाले पांच सदस्य;

(vi) राज्य सरकारों का प्रतिनिधित्व करने वाले पांच सदस्य ।

(3) बोर्ड का अध्यक्ष और अन्य सदस्य श्रम कल्याण, प्रबंध, वित्त, विधि और प्रशासन के क्षेत्रों में विख्यात व्यक्तियों में से होंगे ।

(4) राष्ट्रीय बोर्ड में उपधारा (2) के खंड (ग) में विनिर्दिष्ट प्रवर्गों में से प्रत्येक से सदस्यों के रूप में नामनिर्दिष्ट किए जाने वाले व्यक्तियों की संख्या, सदस्यों की पदावधि और उनकी सेवा की अन्य शर्तें, सदस्यों द्वारा अपने कृत्यों के निर्वहन में अनुसरित की जाने वाली प्रक्रिया और सदस्यों के बीच रिक्तियों को भरने की रीति वह होगी जो विनिर्दिष्ट की जाएः

परंतु अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों, अल्पसंख्यक समुदायों के व्यक्तियों और महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व दिया जाएगा ।

(5) राष्ट्रीय बोर्ड का कार्यकाल तीन वर्ष का होगा ।

(6) राष्ट्रीय बोर्ड वर्ष में कम से कम तीन बार ऐसे समय और स्थान पर अधिवेशन करेगा तथा अपने अधिवेशनों में कारबार के संव्यवहार से संबंधित प्रक्रिया के ऐसे नियमों का पालन करेगा जो विहित किए जाएं ।

(7) सदस्य ऐसे भत्ते प्राप्त कर सकेंगे जो राष्ट्रीय बोर्ड के अधिवेशनों में उपस्थित होने के लिए विहित किए जाएं ।

(8) राष्ट्रीय बोर्ड निम्नलिखित कृत्यों का निर्वहन करेगा, अर्थात्ः-

(क) असंगठित कर्मकारों के विभिन्न वर्गों के लिए उपयुक्त स्कीमों की केन्द्रीय सरकार को सिफारिश करना;

(ख) इस अधिनियम के प्रशासन से उद्भूत होने वाले ऐसे विषयों पर केन्द्रीय सरकार को सलाह देना जो उसे निर्दिष्ट किए जाएं;

(ग) असंगठित कर्मकारों के लिए ऐसी सामाजिक कल्याणकारी स्कीमों को मानीटर करना जो केन्द्रीय सरकार द्वारा प्रशासित की जाएं;

(घ) असंगठित कर्मकारों के रजिस्ट्रीकरण और उनको पहचान पत्र जारी किए जाने की प्रगति का पुनर्विलोकन करना;

(ङ) राज्य स्तर पर किए गए अभिलेख रखने से संबंधित कृत्यों का पुनर्विलोकन करना;

(च) विभिन्न स्कीमों के अधीन निधियों से व्यय का पुनर्विलोकन करना; और

(छ) ऐसे अन्य कृत्य करना जो केन्द्रीय सरकार द्वारा उसे समय-समय पर समनुदेशित किए जाएं ।

 

अध्याय 4

राज्य असंगठित कर्मकार सामाजिक सुरक्षा बोर्ड

6. राज्य सामाजिक सुरक्षा बोर्ड-(1) प्रत्येक राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा (राज्य का नाम) राज्य सामाजिक सुरक्षा बोर्ड नामक एक राज्य बोर्ड का गठन करेगी जो इस अधिनियम के अधीन उसे प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करेगा और सौंपे गए कृत्यों का निर्वहन करेगा ।

(2) राज्य बोर्ड में निम्नलिखित सदस्य होंगे, अर्थात्ः-

(क) संबंधित राज्य का श्रम और रोजगार मंत्री-अध्यक्ष, पदेन;

(ख) प्रधान सचिव अथवा सचिव (श्रम) -सदस्य-सचिव, पदेन; और

(ग) राज्य सरकार द्वारा नामनिर्देशित किए जाने वाले अट्ठाईस सदस्य जिनमें से-

(i) असंगठित कर्मकारों का प्रतिनिधित्व करने वाले सात सदस्य;

(ii) असंगठित कर्मकार नियोजकों का प्रतिनिधित्व करने वाले सात सदस्य;

(iii) संबंधित राज्य की विधान सभा का प्रतिनिधित्व करने वाले दो सदस्य;

(iv) नागरिक समाज के प्रख्यात व्यक्तियों का प्रतिनिधित्व करने वाले पांच सदस्य; और

(v) राज्य सरकार के संबंधित विभागों का प्रतिनिधित्व करने वाले सात सदस्य ।

(3) बोर्ड का अध्यक्ष और अन्य सदस्य श्रम कल्याण, प्रबंध, वित्त, विधि और प्रशासन के क्षेत्रों में विख्यात व्यक्तियों में से होंगे ।

(4) राज्य बोर्ड में उपधारा (2) के खंड (ग) में विनिर्दिष्ट प्रवर्गों में से प्रत्येक से सदस्यों के रूप में नामनिर्दिष्ट किए जाने वाले व्यक्तियों की संख्या, सदस्यों की पदावधि और उनकी सेवा की अन्य शर्तें, सदस्यों द्वारा अपने कृत्यों के निर्वहन में अनुसरित की जाने वाली प्रक्रिया और सदस्यों के बीच रिक्तियों को भरने की रीति वह होगी जो विनिर्दिष्ट की जाएः

परंतु अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों, अल्पसंख्यक समुदायों के व्यक्तियों और महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व दिया जाएगा ।

(5) राज्य बोर्ड का कार्यकाल तीन वर्ष का होगा ।

(6) राज्य बोर्ड तिमाही में कम से कम एक बार ऐसे समय और स्थान पर अधिवेशन करेगा तथा अपने अधिवेशनों में कारबार के संव्यवहार से संबंधित प्रक्रिया के ऐसे नियमों का पालन करेगा जो विहित किए जाएं ।

(7) सदस्य ऐसे भत्ते प्राप्त कर सकेंगे जो राज्य बोर्ड के अधिवेशनों में उपस्थित होने के लिए विहित किए जाएं ।

(8) राज्य बोर्ड निम्नलिखित कृत्यों का निर्वहन करेगा, अर्थात्ः-

(क) असंगठित सेक्टर कर्मकारों के विभिन्न वर्गों के लिए उपयुक्त स्कीमें तैयार करने में राज्य सरकार को सिफारिश करना;

(ख) इस अधिनियम के प्रशासन से उद्भूत होने वाले ऐसे विषयों पर राज्य सरकार को सलाह देना जो उसे निर्दिष्ट किए जाएं;

(ग) असंगठित कर्मकारों के लिए ऐसी सामाजिक कल्याणकारी स्कीमों को मानीटर करना, जो राज्य सरकार द्वारा प्रशासित की जाएं;

(घ) जिला स्तर पर किए गए अभिलेख रखने से संबंधित कृत्यों का पुनर्विलोकन करना;

(ङ) असंगठित सेक्टर कर्मकारों के रजिस्ट्रीकरण और उनको पहचान पत्र जारी किए जाने की प्रगति का पुनर्विलोकन करना;

(च) विभिन्न स्कीमों के अधीन निधियों से व्यय का पुनर्विलोकन करना; और

(छ) ऐसे अन्य कृत्य करना जो राज्य सरकार द्वारा उसे समय-समय पर समनुदेशित किए जाएं ।

7. राज्य सरकार की स्कीमों का वित्तपोषण-(1) राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित किसी स्कीम का, -

(i) राज्य सरकार द्वारा पूर्णतः वित्तपोषण किया जा सकेगा; या

(ii) भागतः राज्य सरकार द्वारा और भागतः स्कीम के हिताधिकारियों या नियोजकों से संगृहीत किए गए अभिदायों के माध्यम से, जो राज्य सरकार द्वारा स्कीम में विहित किए जाएं, वित्तपोषण किया जा सकेगा ।

(2) राज्य सरकार उसके द्वारा तैयार की गई स्कीमों के लिए केन्द्रीय सरकार से वित्तीय सहायता मांग सकेगी ।

(3) केन्द्रीय सरकार स्कीमों के प्रयोजनों के लिए ऐसी अवधि के लिए और ऐसे निबंधनों और शर्तों पर जो वह ठीक समझे, राज्य सरकारों को ऐसी वित्तीय सहायता प्रदान कर सकेगी ।

8. जिला प्रशासन द्वारा अभिलेख का रखा जाना-इस अधिनियम के प्रयोजन के लिए अभिलेख रखने के कार्य जिला प्रशासन द्वारा किए जाएंगेः

परंतु राज्य सरकार यह निदेश दे सकेगी कि अभिलेख रखने का कार्य-

(क) ग्रामीण क्षेत्रों में जिला पंचायत द्वारा किया जाएगा; और

(ख) शहरी क्षेत्रों में शहरी स्थानीय निकायों द्वारा किया जाएगा ।

9. कर्मकार सुविधा केन्द्र-राज्य सरकार ऐसे कर्मकार सुविधा केन्द्रों की स्थापना कर सकेगी जो समय-समय पर निम्नलिखित कृत्यों का निर्वहन करने के लिए आवश्यक समझे जाएंः-

(क) असंगठित कर्मकारों के लिए उपलब्ध सामाजिक सुरक्षा स्कीमों से संबंधित जानकारी का प्रसार करना;

(ख) असंगठित कर्मकारों के रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन पत्रों को फाइल करना, उन पर कार्यवाही करना तथा उन्हें अग्रेषित करना;

(ग) असंगठित कर्मकार की जिला प्रशासन से रजिस्ट्रीकरण प्राप्त करने में सहायता करना;

(घ) सामाजिक सुरक्षा स्कीमों में रजिस्ट्रीकृत असंगठित कर्मकार का नामांकन सुकर बनाना ।

अध्याय 5

रजिस्ट्रीकरण

10. रजिस्ट्रीकरण और सामाजिक सुरक्षा फायदों के लिए पात्रता-(1) प्रत्येक असंगठित कर्मकार निम्नलिखित शर्तों को पूरा करने के अधीन रहते हुए, रजिस्ट्रीकरण के लिए पात्र होगा, अर्थात्ः-

(क) वह चौदह वर्ष की आयु का हो गया हो या हो गई हो; और

(ख) उसके द्वारा एक स्व-घोषणा यह पुष्ट करते हुए की गई हो कि वह एक असंगठित कर्मकार है ।

(2) प्रत्येक पात्र असंगठित कर्मकार रजिस्ट्रीकरण के लिए जिला प्रशासन को विहित प्ररूप में आवेदन करेगा ।

(3) प्रत्येक असंगठित कर्मकार को जिला प्रशासन द्वारा रजिस्ट्रीकृत किया जाएगा और उसे एक पहचान पत्र जारी किया जाएगा जो एक स्मार्ट कार्ड होगा जिस पर एक विशिष्ट पहचान संख्या होगी और जो साथ में रखा जा सकेगा ।

(4) यदि किसी स्कीम में रजिस्ट्रीकृत असंगठित कर्मकार द्वारा अभिदाय करने की अपेक्षा की जाती है तो वह ऐसे अभिदाय का संदाय करने पर ही स्कीम के अधीन सामाजिक सुरक्षा फायदों के लिए पात्र होगा ।

(5) जहां स्कीम केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार द्वारा अभिदाय करने की अपेक्षा करती है वहां, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार स्कीम के निबंधनों के अनुसार नियमित रूप से अभिदाय करेगी ।

अध्याय 6

प्रकीर्ण

11. केन्द्रीय सरकार की निदेश देने की शक्ति-केन्द्रीय सरकार-

(i) राष्ट्रीय बोर्ड; या

(ii) किसी राज्य सरकार या उस राज्य के राज्य बोर्ड,

को इस अधिनियम के उपबंधों के कार्यान्वयन से संबंधित विषयों की बाबत निदेश दे सकेगी ।

12. रिक्तियों आदि से कार्यवाहियों का अविधिमान्य होना-राष्ट्रीय बोर्ड या किसी राज्य बोर्ड की कोई कार्यवाहियां केवल इस आधार पर अविधिमान्य नहीं होंगी कि, यथास्थिति, राष्ट्रीय बोर्ड या राज्य बोर्ड में कोई रिक्ति है या उसके गठन में त्रुटि है ।

13. केन्द्रीय सरकार की नियम बनाने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार इस अधिनियम के उपबंधों को कार्यान्वित करने के लिए नियम, अधिसूचना द्वारा, बना सकेगी ।

(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम निम्नलिखित सभी या किन्हीं विषयों के लिए उपबंध कर सकेंगे, अर्थात्ः-

(क) धारा 4 की उपधारा (1) के अधीन स्कीम के हिताधिकारियों या नियोजकों से संगृहीत किए जाने वाले अभिदाय;

(ख) धारा 5 की उपधारा (4) के अधीन राष्ट्रीय बोर्ड में नामनिर्दिष्ट किए जाने वाले व्यक्तियों की संख्या, सदस्यों की पदावधि और सेवा की अन्य शर्तें, राष्ट्रीय बोर्ड द्वारा कृत्यों के निर्वहन में अनुसरित की जाने वाली प्रक्रिया तथा उसमें रिक्तियों को भरने की रीति;

(ग) धारा 5 की उपधारा (6) के अधीन राष्ट्रीय बोर्ड के अधिवेशन में कारबार के संव्यवहार से संबंधित प्रक्रिया   के नियम;

(घ) धारा 5 की उपधारा (7) के अधीन राष्ट्रीय बोर्ड के अधिवेशनों में उपस्थित होने के लिए भत्ते;

(ङ) धारा 10 की उपधारा (2) के अधीन रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन करने का प्ररूप; और

(च) कोई अन्य विषय जो विहित किया जाना अपेक्षित है या विहित किया जाए ।

14. राज्य सरकार की नियम बनाने की शक्ति-(1) राज्य सरकार, इस अधिनियम के उपबंधों को कार्यान्वित करने के लिए नियम, अधिसूचना द्वारा, बना सकेगी ।

(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम निम्नलिखित सभी या किन्हीं विषयों के लिए उपबंध कर सकेंगे, अर्थात्ः-

(क) धारा 6 की उपधारा (4) के अधीन राज्य बोर्ड में नामनिर्दिष्ट किए जाने वाले व्यक्तियों की संख्या, सदस्यों की पदावधि और सेवा की अन्य शर्तें, राज्य बोर्ड द्वारा कर्तव्यों के निर्वहन में अनुसरित की जाने वाली प्रक्रिया तथा उसमें रिक्तियों को भरने की रीति;

(ख) धारा 6 की उपधारा (6) के अधीन राज्य बोर्ड के अधिवेशनों में कारबार के संव्यवहार से संबंधित प्रक्रिया के नियम;

(ग) धारा 6 की उपधारा (7) के अधीन राज्य बोर्ड के अधिवेशनों में उपस्थित होने के लिए भत्ते;

(घ) धारा 7 की उपधारा (1) के अधीन स्कीम के हिताधिकारियों या नियोजकों से संगृहीत किए जाने वाले अभिदाय;

(ङ) वह प्ररूप जिसमें धारा 10 की उपधारा (2) के अधीन रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन किया जाएगा; और

(च) कोई अन्य विषय जो विहित किया जाना अपेक्षित है या विहित किया जाए ।

15. नियमों का रखा जाना-(1) इस अधिनियम के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम, बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किन्तु नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।

(2) इस अधिनियम के अधीन राज्य सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम, उसके अधिसूचित किए जाने के पश्चात्, यथाशीघ्र, राज्य विधान-मंडल के समक्ष रखा जाएगा ।

16. कतिपय विधियों की व्यावृत्ति-इस अधिनियम की कोई बात राज्य में कल्याणकारी स्कीमों का उपबंध करने वाली ऐसी किसी तत्स्थानी विधि के प्रवर्तन को प्रभावित नहीं करेगी जो असंगठित कर्मकारों के लिए इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन उनके लिए उपबंधित कल्याणकारी स्कीमों से अधिक फायदाप्रद हों ।

17. कठिनाइयों को दूर करने की शक्ति-(1) यदि इस अधिनियम के उपबंधों को कार्यान्वित करने में कोई कठिनाई उद्भूत होती है तो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा, ऐसे उपबंध कर सकेगी जो इस अधिनियम के उपबंधों से असंगत न हों और जो कठिनाई को दूर करने के लिए उसे आवश्यक प्रतीत होंः

परंतु इस धारा के अधीन ऐसा कोई आदेश इस अधिनियम के प्रारंभ से दो वर्ष की अवधि की समाप्ति के पश्चात् नहीं किया जाएगा ।

(2) इस धारा के अधीन किया गया प्रत्येक आदेश, उसके किए जाने के पश्चात्, यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखा जाएगा ।

अनुसूची 1

[धारा 2() और धारा 3 देखिए]

असंगठित कर्मकार सामाजिक सुरक्षा स्कीमें

क्र० सं०   स्कीम का नाम

1.             इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन स्कीम ।

2.             राष्ट्रीय कुटुंब फायदा स्कीम ।

3.             जननी सुरक्षा योजना ।

4.             हथकरघा बुनकर समग्र कल्याण स्कीम ।

5.             हस्तशिल्प कारीगर समग्र कल्याण स्कीम ।

6.             मास्टर क्राफ्ट व्यक्तियों के लिए पेंशन ।

7.             मछुआरों के कल्याण और प्रशिक्षण के लिए राष्ट्रीय स्कीम तथा उनका विस्तार ।

8.             जनश्री बीमा योजना ।

9.             आम आदमी बीमा योजना ।

10.          राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना ।

अनुसूची 2

[धारा 2() देखिए]

क्र० सं०   अधिनियम का नाम

1.             कर्मकार प्रतिकर अधिनियम, 1923 (1923 का 8) ।

2.             औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 (1947 का 14) ।

3.             कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम, 1948 (1948 का 34) ।

4.             कर्मचारी भविष्य निधि और प्रकीर्ण उपबंध अधिनियम, 1952 (1952 का 19) ।

5.             प्रसूति प्रसुविधा अधिनियम, 1961 (1961 का 53) ।

6.             उपदान संदाय अधिनियम, 1972 (1972 का 39) ।

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