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राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग अधिनियम, 1993 ( National Commission for Safai Karamcharis Act, 1993 )


 

राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग अधिनियम, 1993

(1993 का अधिनियम संख्यांक 64)

[4 सितम्बर, 1993]

सफाई कर्मचारियों के लिए एक राष्ट्रीय आयोग

का गठन करने और उससे संबंधित या

उसके आनुषंगिक विषयों का

उपबन्ध करने के लिए

अधिनियम

भारत गणराज्य के चवालीसवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-

अध्याय 1

प्रारंभिक

1. संक्षिप्त नाम, विस्तार, लागू होना, प्रारंभ, अवधि और व्यावृत्ति-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग अधिनियम, 1993 है ।

                (2) इसका विस्तार जम्मू-कश्मीर राज्य के सिवाय संपूर्ण भारत पर है ।

                (3) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा जो केंद्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे ।

                (4) यह  [29 फरवरी, 2004] के पश्चात् उन बातों के सिवाय प्रभावी नहीं रहेगा जिन्हें ऐसे प्रभावहीन होने से पहले किया गया है या करने का लोप किया गया है और ऐसे प्रभावहीन होने पर साधारण खंड अधिनियम, 1897 (1897 का 19) की धारा 6 इस प्रकार लागू होगी मानो यह अधिनियम किसी केंद्रीय अधिनियम द्वारा निरसित कर दिया गया हो ।

2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, -

                                (क) अध्यक्ष" से आयोग का अध्यक्ष अभिप्रेत है ;

                                (ख) आयोग" से धारा 3 के अधीन गठित राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग अभिप्रेत है ;

                                (ग) सदस्य" से आयोग का सदस्य अभिप्रेत है ;

                                (घ) विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है ;

                (ङ) सफाई कर्मचारी" से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जो मानव मल-मूत्र हाथ से उठाने या किसी अन्य सफाई कार्य में लगा है या नियोजित है ;

                (च) उपाध्यक्ष" से आयोग का उपाध्यक्ष अभिप्रेत है ।

अध्याय 2

राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग

3. राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग का गठन-(1) केन्द्रीय सरकार, एक निकाय का जो राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग के नाम से ज्ञात होगा, इस अधिनियम के अधीन उसे प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करने और उसे समनुदिष्ट कृत्यों का पालन करने के लिए, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, गठन करेगी ।

(2) आयोग निम्नलिखित से मिलकर बनेगा, अर्थात् :-

                (क) एक अध्यक्ष ;

                (ख) एक उपाध्यक्ष ;

                (ग) पांच सदस्य,

जो केंद्रीय सरकार द्वारा सफाई कर्मचारियों के सामाजिक-आर्थिक विकास और कल्याण से संबंधित प्रतिष्ठित व्यक्तियों में से नामनिर्देशित किए जाएंगे :

                परंतु कम से कम एक सदस्य महिला होगी ।

4. अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्यों की पदावधि और सेवा की शर्तें-(1) अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और प्रत्येक सदस्य तीन वर्ष से अनधिक ऐसी अवधि तक, जो केन्द्रीय सरकार, इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे, या 31 मार्च, 1997 तक, इनमें से जो भी पूर्वतर हो, पद धारण करेगा :

 [परन्तु यह कि अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और प्रत्येक सदस्य, जो राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग (संशोधन) अधिनियम, 1997 के प्रारम्भ के ठीक पूर्व ऐसी हैसियत में पद धारण किए हुए हैं, 31 मार्च 1997 को अपने-अपने पद रिक्त कर देंगे :

परन्तु यह और कि राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग (संशोधन) अधिनियम, 1997 के प्रारम्भ के पश्चात् नियुक्त किए गए अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और प्रत्येक सदस्य ऐसी अवधि के लिए, जो तीन वर्ष से अधिक न हो, जो केन्द्रीय सरकार, इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे, या 31 मार्च, 2002 तक, इनमें से जो भी पूर्वतर हो, पद धारण करेगा ।]

 [(1क) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, 16 फरवरी, 2001 को या उसके पश्चात् नियुक्त अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और प्रत्येक सदस्य पद ग्रहण करने की तारीख से तीन वर्ष से अनधिक अवधिक के लिए 29 फरवरी, 2004 तक, इनमें से जो भी पूर्वतर हो, पद धारण करेंगे ।]

(2) अध्यक्ष, उपाध्यक्ष या कोई सदस्य किसी भी समय केन्द्रीय सरकार को संबोधित लिखित सूचना द्वारा, यथास्थिति, अध्यक्ष, उपाध्यक्ष या सदस्य का पद त्याग सकेगा ।

(3) केन्द्रीय सरकार किसी व्यक्ति को अध्यक्ष, उपाध्यक्ष या सदस्य के पद से हटा देगी यदि वह व्यक्ति-

                (क) अनुन्मोचित दिवालिया हो जाता है ;

                (ख) किसी ऐसे अपराध के लिए सिद्धदोष ठहराया जाता है और कारावास से दंडादिष्ट किया जाता है जिसमें केन्द्रीय सरकार की राय में, नैतिक अधमता अंतवर्लित है ;

                (ग) विकृतचित्त का हो जाता है और किसी सक्षम न्यायालय की ऐसी घोषणा विद्यमान है ;

                (घ) कार्य करने से इंकार करता है या कार्य करने के लिए असमर्थ हो जाता है ;

                (ङ) आयोग से अनुपस्थिति की इजाजत लिए बिना आयोग के लगातार तीन अधिवेशनों से अनुपस्थित रहता है ; या

                (च) केन्द्रीय सरकार की राय में, ऐसा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष या सदस्य के पद का दुरुपयोग करता है जिसके कारण उस व्यक्ति का पद पर बने रहना लोकहित के लिए हानिकर हो गया है :

                परंतु इस खंड के अधीन कोई व्यक्ति तब तक नहीं हटाया जाएगा जब तक उस व्यक्ति को उस मामले में सुनवाई का उचित अवसर न दे दिया गया हो ।

(4) उपधारा (2) या उपधारा (3) के अधीन या अन्यथा होने वाली रिक्ति नए नामनिर्देशन द्वारा भरी जाएगी और इस प्रकार नामनिर्देशित व्यक्ति उस पदावधि की अनवसित अवधि के लिए पद धारण करेगा जिसके लिए उसका पद पूर्ववर्ती उस दशा में पद धारण करता यदि ऐसी रिक्ति नहीं हुई होती ।

(5) अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्यों को संदेय वेतन और भत्ते तथा उनकी सेवा के अन्य निबंधन और शर्तें वे होंगी जो विहित की जाएं ।

5. आयोग के अधिकारी और अन्य कर्मचारी-(1) केन्द्रीय सरकार आयोग के लिए ऐसे अधिकारियों और कर्मचारियों की व्यवस्था करेगी जो इस अधिनियम के अधीन आयोग के कृत्यों के दक्षतापूर्ण अनुपालन के लिए आवश्यक हों ।

(2) आयोग के प्रयोजन के लिए नियुक्त अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों को संदेय वेतन और भत्ते तथा उनकी सेवा के अन्य निबंधन और शर्तें वे होंगी जो विहित की जाएं ।

6. रिक्ति, आदि से आयोग की कार्यवाहियों का अविधिमान्य होना-आयोग का कोई कार्य या कार्यवाही केवल इस आधार पर प्रश्नगत नहीं की जाएगी या अविधिमान्य नहीं होगी कि आयोग में कोई रिक्ति है या उसके गठन में कोई त्रुटि है ।

7. प्रक्रिया का आयोग द्वारा विनियमित किया जाना-(1) आयोग का अधिवेशन जब भी आवश्यक हो ऐसे समय और स्थान पर होगा जो अध्यक्ष ठीक समझे ।

(2) आयोग अपनी प्रक्रिया स्वयं विनियमित करेगा ।

(3) आयोग के सभी आदेश और विनिश्चय अध्यक्ष द्वारा या इस निमित्त अध्यक्ष द्वारा सम्यक् रूप से प्राधिकृत आयोग के किसी अन्य अधिकारी द्वारा अधिप्रमाणित किए जाएंगे ।

 

अध्याय 3

आयोग के कृत्य और शक्तियां

8. आयोग के कृत्य और शक्तियां-(1) आयोग निम्नलिखित सभी या किन्हीं कृत्यों का पालन करेगा, अर्थात् :-

                (क) सफाई कर्मचारियों के लिए प्रतिष्ठा सुविधाओं और अवसरों की असमानता समाप्त करने के लिए समयबद्ध कार्य योजना के अधीन कार्रवाई के विनिर्दिष्ट कार्यक्रमों की केन्द्रीय सरकार को सिफारिश करना ;

                (ख) सफाई कर्मचारियों के सामाजिक और आर्थिक पुनर्वास से संबंधित कार्यक्रमों और स्कीमों के कार्यान्वयन का अध्ययन और मूल्यांकन करना तथा केन्द्रीय सरकार और राज्य सरकारों को ऐसे कार्यक्रमों और स्कीमों के बेहतर समन्वय और कार्यान्वयन के लिए सिफारिश करना ;

                (ग) विनिर्दिष्ट शिकायतों का अन्वेषण करना और निम्नलिखित को कार्यान्वित न किए जाने से संबंधित विषयों की स्वप्रेरणा से अवेक्षा करना, -

                                (i) सफाई कर्मचारियों के किसी समूह की बाबत कार्यक्रम या स्कीमें ;

                                (ii) सफाई कर्मचारियों की कठिनाइयों को कम करने के लिए विनिश्चय, मार्गदर्शन या अनुदेश ;

                                (iii) सफाई कर्मचारियों के सामाजिक और आर्थिक उत्थान के लिए उपाय ;

                                (iv) सफाई कर्मचारियों को लागू किसी विधि के उपबंध,

और ऐसे विषयों को संबंधित प्राधिकारियों अथवा केन्द्रीय या राज्य सरकारों के समक्ष उठाना ;

                (घ) सफाई कर्मचारियों द्वारा जिन कठिनाइयों या निर्योग्यताओं का सामना करना पड़ रहा है उनको ध्यान में रखते हुए, सफाई कर्मचारियों से संबंधित किसी विषय पर केन्द्रीय और राज्य सरकारों को कालिक रिपोर्ट देना ;

                (ङ) कोई अन्य विषय जो केन्द्रीय सरकार द्वारा उसे निर्देशित किया जाए ।

(2) आयोग को, उपधारा (1) के अधीन अपने कृत्यों के निर्वहन में किसी सरकार अथवा स्थानीय या अन्य प्राधिकारी से उस उपधारा में विनिर्दिष्ट किसी विषय की बाबत जानकारी मांगने की शक्ति होगी ।

अध्याय 4

प्रकीर्ण

9. अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्यों तथा आयोग के कर्मचारिवृन्द का लोक सेवक होना-अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सदस्य, आयोग के अधिकारी और अन्य कर्मचारी, भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 21 के अर्थ में लोक सेवक समझे जाएंगे ।

10. केन्द्रीय सरकार द्वारा आयोग से परामर्श किया जाना-केन्द्रीय सरकार, सफाई कर्मचारियों को प्रभावित करने वाले सभी प्रमुख नीति विषयक मामलों पर आयोग से परामर्श करेगी ।

11. वार्षिक रिपोर्ट-आयोग, प्रत्येक वित्तीय वर्ष के लिए, ऐसे प्ररूप में और ऐसे समय पर जो विहित किया जाए, अपनी वार्षिक रिपोर्ट तैयार करेगा, जिसमें पूर्ववर्ती वित्तीय वर्ष के दौरान उसके क्रियाकलापों का पूरा विवरण होगा और उसकी एक प्रति केन्द्रीय सरकार को भेजेगा ।

12. वार्षिक रिपोर्ट का संसद् या विधान सभा के समक्ष रखा जाना-(1) केन्द्रीय सरकार वार्षिक रिपोर्ट और साथ ही उसमें अन्तर्विष्ट सिफारिशों पर जहां तक उनका संबंध केन्द्रीय सरकार से है की गई या किए जाने के लिए प्रस्थापित कार्रवाई और किसी ऐसी सिफारिश की अस्वीकृति के कारणों को यदि कोई हों, स्पष्ट करने वाला ज्ञापन संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाएगी ।

(2) जहां उक्त रिपोर्ट या उसका कोई भाग किसी ऐसे विषय से संबंधित है जिसका किसी राज्य सरकार से संबंध है वहां ऐसी रिपोर्ट की एक प्रति उस राज्य के राज्यपाल को भेजी जाएगी जो उसे और साथ ही राज्य से संबंधित सिफारिशों पर की गई या किए जाने के लिए प्रस्थापित कार्रवाई और किसी ऐसी सिफारिश या उसके किसी भाग की अस्वीकृति के कारणों को यदि कोई हो, स्पष्ट करने वाला ज्ञापन राज्य के विधान-मंडल के समक्ष रखवाएगा ।

13. शक्तियों का प्रत्यायोजन-आयोग, साधारण या विशेष आदेश द्वारा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष या किसी सदस्य अथवा आयोग के किसी अधिकारी को ऐसी शर्तों और परिसीमाओं के, यदि कोई हों, अधीन रहते हुए जो उसमें विनिर्दिष्ट की जाए, इस अधिनियम के अधीन अपनी ऐसी शक्तियों और कृत्यों को, जो वह ठीक समझे, प्रत्यायोजित कर सकेगा ।

14. सद्भावपूर्वक की गई कार्रवाई के लिए संरक्षण-इस अधिनियम के अधीन सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात के लिए कोई भी वाद, अभियोजन या अन्य विद्यिक कार्यवाही केन्द्रीय सरकार, आयोग, अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सदस्य अथवा आयोग के किसी अधिकारी या अन्य कर्मचारी के विरुद्ध नहीं होगी ।

15. नियम बनाने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार इस अधिनियम के उपबंधों को कार्यान्वित करने के लिए नियम, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, बना सकेगी ।

(2) विशिष्टितया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना ऐसे नियमों में, निम्नलिखित सभी या किन्हीं विषयों के लिए उपबंध किया जा सकेगा, अर्थात् :-

(क) धारा 4 की उपधारा (5) के अधीन अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्यों को और धारा 5 की उपधारा (2) के अधीन आयोग के अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों को संदेय वेतन और भत्ते तथा उनकी सेवा के अन्य निबंधन और शर्तें ;

(ख) वह प्ररूप जिसमें, और वह समय जब, धारा 11 के अधीन वार्षिक रिपोर्ट तैयार की जाएगी ;

(ग) कोई अन्य विषय जिसका विहित किया जाना अपेक्षित है या जो विहित किया जाए ।

                (3) इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम, बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किन्तु नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।

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